गर्मी में डिहाइड्रेशन के मामले बढ़े, शरीर में पानी की कमी से बिगड़ सकती है सेहत

नई दिल्ली । तेज गर्मी और लू के बीच इन दिनों डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। अस्पतालों में रोजाना ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं जिन्हें कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी शिकायतें हो रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह समस्या समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती है। डिहाइड्रेशन क्या है और कैसे होता हैडिहाइड्रेशन तब होता है जब शरीर में पानी की मात्रा जरूरत से कम हो जाती है। गर्मी में अधिक पसीना आने और पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने के कारण शरीर में तरल पदार्थों की कमी हो जाती है। इससे शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है और कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाती हैं। डिहाइड्रेशन के सामान्य लक्षणपानी की कमी होने पर शरीर कई संकेत देता है। इनमें अत्यधिक प्यास लगना, मुंह सूखना, सिरदर्द, कमजोरी, चक्कर आना, पेशाब का रंग गहरा होना और थकान शामिल हैं। गंभीर स्थिति में व्यक्ति बेहोशी तक महसूस कर सकता है। किन लोगों में ज्यादा खतराविशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और खुले में काम करने वाले मजदूर डिहाइड्रेशन के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जो लोग कम पानी पीते हैं या अधिक शारीरिक मेहनत करते हैं, उनमें भी इसका खतरा ज्यादा रहता है। गर्मी में डिहाइड्रेशन बढ़ने के कारणतेज धूप में लंबे समय तक बाहर रहना, पसीने के साथ शरीर से नमक और पानी का अधिक निकलना, और पानी की पर्याप्त मात्रा में पूर्ति न होना इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक्स का अधिक सेवन भी शरीर को डिहाइड्रेट कर सकता है। बचाव के आसान उपायडॉक्टर सलाह देते हैं कि गर्मी में हर कुछ समय पर पानी पीते रहें, भले ही प्यास न लगे। नारियल पानी, नींबू पानी और ओआरएस का सेवन भी फायदेमंद होता है। हल्के और सूती कपड़े पहनें और धूप में बाहर निकलने से बचें। कब हो जाए सावधानअगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी या बेहोशी महसूस हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी होता है।
धूल और गर्मी से एलर्जी व खांसी-जुकाम का बढ़ता खतरा, बदलते मौसम में रखें सावधानी

नई दिल्ली । तेज गर्मी और उड़ती धूल का मिश्रण इन दिनों लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। शहरों और ग्रामीण इलाकों में बढ़ते तापमान के साथ हवा में मौजूद धूलकण सांस संबंधी समस्याओं को बढ़ा रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में एलर्जी, खांसी, जुकाम और गले की परेशानी के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। धूल और गर्मी कैसे बनती है बीमारी की वजहगर्म मौसम में सड़कें सूख जाती हैं और वाहनों की आवाजाही से धूल लगातार हवा में फैलती रहती है। यह धूल जब सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है तो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करती है। इससे एलर्जी ट्रिगर होती है और लोगों को छींक, नाक बहना, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं होने लगती हैं। किन लोगों को ज्यादा खतराविशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अस्थमा या एलर्जी से पीड़ित लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है। कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग भी जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे लोगों में हल्की धूल भी गंभीर खांसी-जुकाम का कारण बन सकती है। एलर्जी और जुकाम के सामान्य लक्षणइस मौसम में सबसे आम लक्षणों में बार-बार छींक आना, नाक बंद या बहना, गले में खराश, आंखों में जलन और लगातार खांसी शामिल हैं। कई बार यह स्थिति बढ़कर सांस लेने में परेशानी और अस्थमा अटैक तक भी पहुंच सकती है। बदलते मौसम में क्यों बढ़ती है समस्यागर्मी के मौसम में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है और नाक-गला भी सूखने लगता है। ऐसे में धूल और बैक्टीरिया आसानी से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। हवा में नमी कम होने के कारण एलर्जी फैलाने वाले कण ज्यादा देर तक वातावरण में बने रहते हैं। बचाव के लिए क्या करेंडॉक्टर सलाह देते हैं कि इस मौसम में बाहर निकलते समय मास्क का उपयोग जरूर करें। घर के अंदर नियमित सफाई रखें और धूल जमा न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे। सुबह और शाम के समय ज्यादा धूल भरे इलाकों से बचना चाहिए। कब लें डॉक्टर की सलाहअगर खांसी-जुकाम 5–7 दिन से ज्यादा चले, सांस लेने में परेशानी हो या बुखार लगातार बना रहे तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
बाहर का खाना खाने से फूड पॉइज़निंग का खतरा, लापरवाही पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली । आज के समय में बाहर का खाना लोगों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी हों या छात्र, ज्यादातर लोग स्ट्रीट फूड, ढाबे या रेस्टोरेंट का खाना पसंद करते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यही आदत कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की वजह बन सकती है। सबसे बड़ा खतरा फूड पॉइज़निंग का होता है, जो दूषित भोजन या गंदे पानी से फैलने वाले बैक्टीरिया के कारण होता है। कैसे होता है फूड पॉइज़निंग का खतराफूड पॉइज़निंग तब होती है जब खाना बैक्टीरिया, वायरस या टॉक्सिन से संक्रमित हो जाता है। बाहर के खाने में कई बार साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता। कच्चे या अधपके भोजन, लंबे समय तक खुले में रखे गए पकवान, गंदे तेल का बार-बार उपयोग और दूषित पानी इस समस्या को और बढ़ा देते हैं। स्ट्रीट फूड में हाथों की स्वच्छता की कमी भी संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बनती है। फूड पॉइज़निंग के शुरुआती लक्षणफूड पॉइज़निंग होने पर शरीर तुरंत संकेत देने लगता है। मरीज को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी, दस्त और कमजोरी महसूस होती है। कई मामलों में हल्का बुखार और डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है। किन लोगों के लिए ज्यादा खतराविशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग फूड पॉइज़निंग के अधिक शिकार हो सकते हैं। इन लोगों में संक्रमण तेजी से फैलता है और शरीर पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है। स्ट्रीट फूड और बाहर का खाना कितना सुरक्षितस्ट्रीट फूड भले ही स्वाद में लाजवाब हो, लेकिन सुरक्षा के मामले में हमेशा भरोसेमंद नहीं होता। कई जगहों पर साफ पानी, स्वच्छ बर्तन और सही तरीके से खाना स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती। इसी कारण कई बार लोग एक ही समय में बड़ी संख्या में बीमार हो जाते हैं। कैसे रखें खुद को सुरक्षितविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर खाना खाते समय कुछ सावधानियां जरूर बरतनी चाहिए। हमेशा साफ-सुथरी जगह से ही खाना लें, ताजा और गर्म भोजन का ही सेवन करें, कटे हुए फल या खुले में रखे खाद्य पदार्थों से बचें। खाने से पहले हाथ धोना या सैनिटाइज़र का उपयोग करना भी संक्रमण के खतरे को कम करता है। कब लें डॉक्टर की सलाहअगर किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द या कमजोरी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
Summer Special Recipe: ठंडक देने वाला खीरे का रायता, घर पर बनाएं स्वादिष्ट और हेल्दी डिश

नई दिल्ली गर्मी का मौसम आते है शरीर में पानी की कमी होने लगती है इसलिए हमें ज्यादातर पानी वाले फल ही खाने चाहिए, जिससे हाइड्रेटेड रहे। इसके साथ ही आप खीरे का रायता (Cucumber Raita) भी खा सकते हैं ये काफी स्वादिष्ट ऑप्शन है। खीरा प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला होता है और दही पाचन को बेहतर बनाता है, इसलिए इन दोनों का संयोजन गर्मियों के लिए एक परफेक्ट डिश माना जाता है। लेकिन अब सवाल उठता हैं अगर इसे बनाना नहीं आता तो क्या करें। तब परेशान होने की बात नहीं हैं हम आपके लिए इसकी खास रेसिपी लेकर आए हैं। खीरे का रायता बनाने की सामग्री2 मध्यम आकार के खीरे1 कप ताजा दही1/2 छोटा चम्मच भुना जीरा पाउडरस्वादानुसार नमक1/4 छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडरथोड़ी सी हरी धनिया पत्ती (बारीक कटी हुई)वैकल्पिक: 1 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई) बनाने की विधिसबसे पहले खीरे को अच्छे से धो लें और छील लें। इसके बाद खीरे को कद्दूकस कर लें। यदि खीरे में ज्यादा पानी हो, तो हल्का सा निचोड़ लें ताकि रायता ज्यादा पतला न हो। अब एक बाउल में दही लें और उसे अच्छे से फेंट लें ताकि वह स्मूद हो जाए। फेंटे हुए दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा डालें और अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें नमक, काली मिर्च और भुना जीरा पाउडर डालकर मिक्स करें। यदि आप थोड़ा तीखा पसंद करते हैं, तो इसमें बारीक कटी हरी मिर्च भी डाल सकते हैं। अंत में ऊपर से हरी धनिया डालकर सजाएं। चाहें तो थोड़ा सा भुना जीरा पाउडर ऊपर से छिड़क दें, इससे स्वाद और भी बढ़ जाएगा। अब आपका ठंडा-ठंडा खीरे का रायता तैयार है। इसे आपक रोटी चावल या फिर ऐसे ही खा सकते हैं। इसको खाने का फायदाखीरा शरीर में पानी की कमी को दूर करता है और दही पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह रायता गर्मी में लू से बचाने में भी मदद करता है और पेट को हल्का रखता है। इस तरह खीरे का रायता न केवल स्वादिष्ट है बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। गर्मियों में इसे अपनी डाइट में जरूर शामिल करें।
Heatwave Alert: बढ़ते तापमान और लू से बढ़ रही परेशानी, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सावधानी

Heatwave Alert: नई दिल्ली । इन दिनों लगातार बढ़ती गर्मी और लू (हीटवेव) ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय चल रही गर्म हवाएं लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार तापमान में लगातार बढ़ोतरी से आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। लू क्या है और क्यों खतरनाक होती है लू यानी हीटवेव तब होती है जब किसी क्षेत्र में सामान्य से बहुत अधिक तापमान दर्ज किया जाता है और गर्म हवाएं चलती हैं। यह स्थिति शरीर के तापमान को तेजी से बढ़ा देती है, जिससे शरीर का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। लंबे समय तक लू के संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। शरीर पर लू का असर लू का असर सबसे पहले शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है। व्यक्ति को कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और अत्यधिक थकान महसूस होने लगती है। गंभीर मामलों में उल्टी, बेहोशी और हीट स्ट्रोक जैसी स्थिति भी बन सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। किन लोगों पर ज्यादा खतरा विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बाहर काम करने वाले मजदूर लू के अधिक शिकार होते हैं। इसके अलावा जिन लोगों को पहले से हृदय, किडनी या डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। लू लगने के शुरुआती लक्षण लू लगने पर शरीर में तेज सिरदर्द, बेचैनी, तेज प्यास, त्वचा का सूखना, चक्कर आना और तेज धड़कन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई बार शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। बचाव के जरूरी उपाय डॉक्टर सलाह देते हैं कि दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें। हल्के और ढीले कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस और तरल पदार्थ का सेवन करें। धूप में ज्यादा देर तक खड़े रहने से बचना चाहिए। कब लें तुरंत डॉक्टर की सलाह अगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर, बेहोशी, अत्यधिक कमजोरी या शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता हुआ महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
अपान वायु मुद्रा से मिलेगा पीरियड्स दर्द में आराम, ऐंठन और थकान होगी कम

नई दिल्ली । महिलाओं के लिए मासिक धर्म का समय अक्सर असहजता से भरा होता है। पेट दर्द, ऐंठन, कमर में भारीपन और थकान जैसी समस्याएं कई बार इतनी बढ़ जाती हैं कि रोजमर्रा के काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में हर बार दवा लेना जरूरी या सही नहीं होता। यही वजह है कि आजकल प्राकृतिक तरीकों जैसे योग और हस्त मुद्राओं की ओर रुझान बढ़ रहा है। क्या है अपान वायु मुद्रा?अपान वायु मुद्रा एक विशेष हस्त मुद्रा है, जिसे योग में शरीर की ऊर्जा संतुलित करने के लिए किया जाता है। यह मुद्रा खासतौर पर पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द और ऐंठन को कम करने में मददगार मानी जाती है। कैसे मिलती है पीरियड्स में राहत?पीरियड्स के दौरान जब इस मुद्रा का अभ्यास किया जाता है, तो शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और मांसपेशियों का तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। इससे पेट दर्द, ऐंठन और खिंचाव में राहत मिल सकती है। साथ ही यह शरीर को अंदर से शांत करने का काम करती है, जिससे थकान भी कम महसूस होती है। करने का सही तरीकाइस मुद्रा को करना बेहद आसान है-आराम से सुखासन में बैठ जाएंहाथों को घुटनों पर रखें, हथेलियां ऊपर की ओर रहेंतर्जनी उंगली को मोड़कर अंगूठे की जड़ से लगाएंमध्यमा और अनामिका उंगली को मोड़कर अंगूठे से स्पर्श कराएंछोटी उंगली सीधी रखेंआंखें बंद कर शांत मन से कुछ मिनट तक अभ्यास करेंमानसिक तनाव में भी फायदेमंदपीरियड्स के दौरान कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव महसूस होता है। यह मुद्रा मन को शांत करने में मदद करती है, जिससे मूड बेहतर हो सकता है और मानसिक संतुलन बना रहता है। पाचन और ऊर्जा पर भी असरअपान वायु मुद्रा पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और भारीपन में भी राहत दे सकती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का स्तर संतुलित रहता है और दिनभर एक्टिव महसूस होता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातेंखाना खाने के तुरंत बाद इस मुद्रा का अभ्यास न करेंशुरुआत में कम समय के लिए करें, धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएंअगर कोई गंभीर समस्या या दर्द हो तो डॉक्टर की सलाह जरूर लें
काली कोहनी से हैं परेशान? इन घरेलू उपायों से पाएं साफ और चमकदार त्वचा

नई दिल्ली । अक्सर देखने को मिलता है लोग अपने चेहरे का काफी ध्यान रख लेते हैं। लेकिन कोहनी और घुटनों को नजर अंदाज कर देते हैं। यही वजह है कि समय के साथ इन हिस्सों की स्किन काली और रूखी दिखने लगती है। और धीरे-धीरे हम इतने काफी परेशान हो जाते हैं इसको साफ करने के लिए तरह-तरह के प्रोडक्ट उसे करने की सोचते हैं लेकिन आप अपने घर में ही इसे आसानी से साफ कर सकते हैं तो चलिए इसके बारे में आपको सारी जानकारी बताते हैं। घर पर ही करें साफआपको बता दें कि ये समस्या बेहद आम है यह अक्सर हर किसी को हो जाता है।धूप, गंदगी, फ्रिक्शन और मॉइस्चर की कमी के कारण होती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से इस डार्कनेस को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नींबू और शहदचेहरे के साथ साथ स्क्रीन के लिए भी नींबू और शहद काफी काटकर साबित होते हैं। नींबू में मौजूद नेचुरल ब्लीचिंग गुण स्किन के रंग को हल्का करने में मदद करते हैं। जबकि शहद स्किन को गहराई से मॉइस्चराइज कर उसे सॉफ्ट बनाता है। इसके लिए एक चम्मच नींबू के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर कोहनी और घुटनों पर लगाएं और करीब 20 मिनट बाद धो लें। कुछ दिनों में ही इसका इस्तेमाल करने से साफ असर नजर आने लगता है। एलोवेरा जेलएलोवेरा जेल काफी अच्छा होता है आपको इस गर्मी में जरूर लगाना चाहिए अपने आपके चेहरे को ठंडक भी पहुंचना है साथ ही आपकी स्किन ब्राइट बनता है। ये स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ डार्कनेस कम करने में भी मदद करता है। रोज रात को सोने से पहले ताजा एलोवेरा जेल को कोहनी और घुटनों पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ ही दिनों में स्किन मुलायम और साफ नजर आने लगेगी। स्क्रबिंगडेड स्किन सेल्स जमा होने से भी कोहनी और घुटने काले पड़ने लगते हैं। इसलिए हफ्ते में कम से कम दो बार स्क्रब करना जरूरी है। इसके लिए चीनी और तेल को मिलाकर नेचुरल स्क्रब तैयार करें और हल्के हाथों से रगड़ें। इससे भी जल्दी ठीक हो जाएगा और आप की समस्या दूर हो जाएगी।
काला नमक: छोटी मात्रा में बड़ा फायदा, शरीर का संतुलन बनाए रखने में है बेहद मददगार

नई दिल्ली। काला नमक भारतीय रसोई का एक ऐसा साधारण लेकिन बेहद असरदार घटक है, जो स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत के लिए भी कई तरह से लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में इसे “सौवर्चला लवण” कहा गया है और सामान्य सफेद नमक की तुलना में इसे अधिक औषधीय गुणों वाला बताया गया है। खास बात यह है कि काला नमक पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है। भोजन के बाद होने वाली गैस, पेट फूलना, कब्ज और भारीपन जैसी समस्याओं में यह राहत देने का काम करता है। यह पेट को हल्का रखता है और मेटाबॉलिज्म को सुधारने में सहायक माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार काले नमक की तासीर गर्म होती है, इसलिए यह शरीर में पित्त को संतुलित करने में मदद करता है। सुबह खाली पेट एक चुटकी काला नमक गुनगुने पानी के साथ लेने से शरीर डिटॉक्स होता है और पाचन क्रिया सक्रिय रहती है। हालांकि, इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए क्योंकि अधिक मात्रा नुकसान भी पहुंचा सकती है। काला नमक सिर्फ पाचन ही नहीं, बल्कि सूजन और दर्द में भी राहत देने वाला माना जाता है। जोड़ों के दर्द में इसकी सिकाई उपयोगी हो सकती है। वहीं गर्मियों में छाछ में भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और पेट की जलन कम होती है। हालांकि हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हड्डियों से जुड़ी समस्याओं वाले लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। सही मात्रा में इस्तेमाल किया गया काला नमक शरीर के संतुलन को बनाए रखने में एक सरल और प्राकृतिक सहायक बन सकता है।
गर्मियों में डायबिटीज को लेकर लापरवाही पड़ सकती है भारी, संतुलित आहार है सबसे जरूरी

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान के साथ-साथ डायबिटीज की समस्या भी बढ़ जाती है। देश में डायबिटीज के मरीज बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। ऐसे में गर्मी में लापरवाही से यह और खतरनाक हो सकती है। अच्छी खबर यह है कि सही खान-पान और सही कैलोरी काउंट से इसे बेहतरीन तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार, गर्मियों में सही खान-पान और कैलोरी काउंट पर ध्यान देकर डायबिटीज को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। संतुलित आहार और उचित मात्रा में कैलोरी का सेवन डायबिटीज प्रबंधन का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। सही कैलोरी काउंट ब्लड शुगर को स्थिर रखता है और दवाओं की जरूरत को भी कम कर सकता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर बढ़ने से आंखों की समस्या, किडनी खराब होना, नसों में दिक्कत और दिल की बीमारी जैसी गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं। गर्मियों में पसीना ज्यादा आने और डिहाइड्रेशन की वजह से यह समस्या और बढ़ जाती है। इसलिए लापरवाही बिल्कुल न करें। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार, अपने भोजन की थाली का आधा हिस्सा सब्जियों से भरें। एक चौथाई हिस्सा दाल या प्रोटीन से भरें बाकी हिस्सा साबुत अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, ओट्स, ब्राउन राइस से भरें। ज्यादा चावल, आलू, मैदा और मीठे पदार्थों से परहेज करें। फाइबर युक्त आहार, पालक, ब्रोकली, भिंडी, लौकी, करेला और दालें रोजाना खाएं। वहीं, चीनी, मिठाई, कोल्ड ड्रिंक, जूस और प्रोसेस्ड फूड को पूरी तरह से ना कहें। फल का सेवन सीमित मात्रा में करें। इसके लिए सेब, अमरूद, पपीता, जामुन व मौसमी फल अच्छे विकल्प हैं। हालांकि, मिठास वाले फलों के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। खाने का समय भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए चार्ट बनाएं नाश्ता सुबह 8-9 बजे के बीच, दोपहर का भोजन 1 से 2 बजे के बीच लें, व रात का भोजन 7 से 8 बजे के बीच करें। बीच में भूख लगे तो कुछ हल्का स्नैक ले सकते हैं, जैसे मुट्ठी भर मखाना या दही। नियमित 30 मिनट की सैर, हल्का व्यायाम और तनाव कम करना भी डायबिटीज नियंत्रण में मदद करता है। अगर ब्लड शुगर बढ़ जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
प्याज और आंवला रस का मिश्रण: बालों की मजबूती और ग्रोथ के लिए असरदार घरेलू उपाय

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि बालों को भी सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। तेज धूप, पसीना और धूल-मिट्टी मिलकर स्कैल्प को कमजोर कर देते हैं, जिससे बाल झड़ने, रूखापन और डैंड्रफ जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं। ऐसे में प्राकृतिक उपायों की ओर लौटना सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना जाता है। आयुर्वेद और घरेलू नुस्खों में प्याज और आंवला का मिश्रण बालों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है। प्याज का रस कैसे करता है कामप्याज का रस स्कैल्प में रक्त संचार (ब्लड सर्कुलेशन) को तेज करता है। इससे बालों की जड़ों को अधिक पोषण मिलता है और नई बालों की ग्रोथ को बढ़ावा मिलता है। इसमें मौजूद सल्फर बालों की जड़ों को मजबूत बनाता है और हेयर फॉल को कम करने में मदद करता है। नियमित उपयोग से बाल घने और मजबूत हो सकते हैं। आंवला क्यों है बालों के लिए वरदानआंवला को आयुर्वेद में बालों के लिए सबसे उपयोगी औषधि माना गया है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो बालों को अंदर से पोषण देते हैं। यह समय से पहले बालों के सफेद होने की समस्या को भी कम करता है और स्कैल्प को स्वस्थ बनाए रखता है। प्याज और आंवला रस का मिश्रण कैसे करें तैयारइस उपाय को अपनाने के लिए समान मात्रा में प्याज का रस और आंवला का रस मिलाएं। इसे अच्छी तरह मिक्स करके स्कैल्प और बालों की जड़ों पर हल्के हाथों से लगाएं। लगाने के बाद कम से कम 30 मिनट तक छोड़ दें, ताकि यह स्कैल्प में अच्छी तरह अवशोषित हो सके।इसके बाद हल्के गुनगुने पानी और माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। उपयोग करते समय सावधानी जरूरीकुछ लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है, ऐसे में प्याज का रस लगाने से हल्की जलन या चुभन महसूस हो सकती है। यदि ऐसा हो तो तुरंत बाल धो लें। इस मिश्रण को लगाने के बाद सीधे धूप में जाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे स्कैल्प में जलन बढ़ सकती है। कितनी बार करें इस्तेमालबेहतर परिणाम के लिए इस मिश्रण को सप्ताह में 2 बार इस्तेमाल करना उचित माना जाता है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं और बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम होने लगता है। अतिरिक्त देखभाल के उपायबाल धोने के बाद हल्का हेयर सीरम लगाने से नमी बनी रहती है। यदि सीरम उपलब्ध न हो तो दही और एलोवेरा का मिश्रण भी सप्ताह में एक बार लगाया जा सकता है। इससे बालों में चमक आती है और रूखापन कम होता है। प्याज और आंवला का मिश्रण एक सरल, सस्ता और प्राकृतिक उपाय है, जो गर्मियों में बालों को झड़ने से रोकने और उन्हें मजबूत बनाने में मदद कर सकता है। सही तरीके से और नियमित उपयोग करने पर यह बालों की सेहत में स्पष्ट सुधार ला सकता है।