पार्टनर रह जाएगा दंग, वैलेंटाइन डे पर गुलाब जैसा निखार पाने के लिए आज ही शुरू करें ये 7-डे स्किनकेयर चैलेंज

नई दिल्ली । वैलेंटाइन डे आने वाला है और इस खास दिन पर हर कोई सबसे सुंदर दिखना चाहता है. लेकिन काम की थकान और धूल-मिट्टी की वजह से अक्सर चेहरे की चमक खो जाती है और चेहरा मुरझाया हुआ लगने लगता है. अगर आप भी चाहती हैं कि इस वैलेंटाइन डे आपका चेहरा गुलाब की तरह चमक उठे, तो अब महंगे पार्लर जाने की जरूरत नहीं है. हम आपके लिए लाए हैं एक बहुत ही आसान 7 दिनों का घरेलू नुस्खा. आज से ही इसे शुरू करके आप घर बैठे अपनी त्वचा को सुंदर और चमकदार बना सकती हैं. ये छोटे-छोटे तरीके आपके चेहरे पर ऐसा निखार लाएंगे कि आपकी डेट नाइट और भी खास बन जाएगी. चेहरे को साफ रखें आप दिन में कम से कम दो बार अपने चेहरे को किसी अच्छे फेस वॉश या घरेलू चीज से धोएं. अगर आपकी त्वचा सूखी है तो आप कच्चे दूध का इस्तेमाल कर सकती हैं. अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो आप बेसन से चेहरा धो सकती हैं. यह आपके चेहरे से धूल और गंदगी को पूरी तरह साफ करने में मदद करेगा. त्वचा में नमी बनाए रखें चेहरा धोने के तुरंत बाद उसे कभी भी खाली न छोड़ें. चेहरे को हल्का सुखाकर उस पर एलोवेरा जेल या अपनी पसंद की कोई अच्छी क्रीम लगाएं. ऐसा करने से आपकी त्वचा की नमी बनी रहेगी और चेहरा मुलायम नजर आएगा. यह रूखापन दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है. धूप से बचाव करें दिन के समय अपनी त्वचा को धूप से बचाना बहुत जरूरी है. चाहे आप घर के अंदर हों या बाहर, चेहरे पर सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें. यह आपकी त्वचा को काला होने से रोकता है और सूरज की किरणों से होने वाले नुकसान से भी बचाता है. खूब पानी पिएं चेहरे पर असली चमक तभी आती है जब आपका शरीर अंदर से स्वस्थ हो. इसलिए आप दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पीने की आदत डालें. पानी आपके शरीर से गंदगी को बाहर निकालता है जिससे चेहरे पर एक प्यारा और कुदरती निखार आता है.
फिजिकल हेल्थ: शराब और सोडा से भी घातक हैं एनर्जी ड्रिंक्स! जानें कैसे ये आपकी किडनी को कर रहे हैं 'फेल', एक्सपर्ट्स की चेतावनी

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इंस्टेंट एनर्जी तुरंत ऊर्जा का चलन बढ़ गया है। थकान मिटाने के लिए लोग धड़ल्ले से एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा ले रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये ड्रिंक्स आपकी किडनी के लिए शराब और सोडा से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं? नारायणा हॉस्पिटल के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. राजीव गोयल और नेफ्रोलॉजी डायरेक्टर डॉ. यासिर रिजवी ने आगाह किया है कि इन ड्रिंक्स में मौजूद हाई कैफीन और शुगर का जानलेवा कॉम्बिनेशन किडनी को हमेशा के लिए डैमेज कर सकता है। एनर्जी ड्रिंक्स: जहर का मीठा कॉम्बिनेशन एनर्जी ड्रिंक्स को खतरनाक बनाने के पीछे तीन मुख्य विलेन हैं: अत्यधिक कैफीन, सिंथेटिक शुगर और केमिकल प्रिजर्वेटिव्स। * शराब बनाम एनर्जी ड्रिंक: शराब किडनी को डिहाइड्रेट करती है और सोडा शुगर लोड बढ़ाता है, लेकिन एनर्जी ड्रिंक इन दोनों का घातक मिश्रण है। यह एक साथ शरीर को डिहाइड्रेट भी करता है और ब्लड शुगर को अचानक स्पाइक तेजी से बढ़ाना भी कर देता है।किडनी पर दबाव: साउथ डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी के एक रिव्यू 2008-2020 के अनुसार, ये ड्रिंक्स किडनी पर फिल्ट्रेशन का इतना दबाव डालते हैं कि किडनी की कोशिकाएं थक जाती हैं, जिससे इंफ्लेमेशन और डैमेज का खतरा बढ़ जाता है। क्या इनमें सचमुच ‘एनर्जी’ होती है? डॉक्टरों का कहना है कि यह ‘एनर्जी’ नहीं बल्कि स्टिम्यूलेशन उत्तेजना है। हाई कैफीन आपके नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर देता है, जिससे आपको कुछ देर के लिए ऊर्जा का एहसास होता है। लेकिन जैसे ही इसका असर खत्म होता है, शरीर पहले से ज्यादा थकान और सुस्ती महसूस करने लगता है। रोजाना सेवन के भयानक नुकसान: किडनी स्टोन: हाई शुगर और डिहाइड्रेशन के कारण पथरी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।क्रॉनिक किडनी डिजीज लंबे समय तक सेवन से किडनी टॉक्सिन्स को फिल्टर करने की क्षमता खो देती है।हार्ट और लिवर पर असर: अत्यधिक कैफीन से दिल की धड़कन बढ़ना और लिवर में टॉक्सिसिटी का रिस्क बढ़ता है।ब्लड प्रेशर ये ड्रिंक्स अचानक बीपी बढ़ा देते हैं, जो किडनी की बारीक़ नसों को नुकसान पहुँचाता है।
Valentine Date Ideas: कम बजट में शानदार वैलेंटाइन डेट! दिल्ली की ये 7 जगहें प्यार बढ़ाने के लिए हैं परफेक्ट

नई दिल्ली । वैलेंटाइन डे आते ही हर किसी के मन में यही सवाल होता है कि अपने पार्टनर के साथ ऐसा क्या किया जाए जो दिन को खास बना दे, लेकिन जेब पर ज्यादा भारी भी न पड़े. महंगे होटल और फैंसी रेस्टोरेंट हर बार जरूरी नहीं होते, कई बार सादगी में ही सबसे ज्यादा प्यार छिपा होता है. अगर आप भी इस वैलेंटाइन अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताना चाहते हैं, वो भी कम खर्च में, तो दिल्ली-एनसीआर आपके लिए परफेक्ट जगह है. यहां सिर्फ मॉडर्न कैफे ही नहीं, बल्कि शांत पार्क, खूबसूरत झीलें, ऐतिहासिक जगहें और ओपन स्पेस भी हैं, जहां आप खुलकर बातें कर सकते हैं, टहल सकते हैं और साथ में अच्छे पल जी सकते हैं. खास बात यह है कि इन जगहों पर जाने के लिए आपको बड़ी प्लानिंग या ज्यादा बजट की जरूरत नहीं होती. बस थोड़ा सा टाइम और सही जगह का चुनाव काफी है. अगर आप इस वैलेंटाइन डे को यादगार बनाना चाहते हैं, तो नीचे दी गई इन 7 जगहों को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें. ओखला वाटरफ्रंट नोएडा-दिल्ली बॉर्डर पर स्थित ओखला वाटरफ्रंट सनसेट के लिए जाना जाता है. यहां का शांत माहौल कपल्स को काफी पसंद आता है. अगर आप और आपके पार्टनर को लंबी बातें करना और साथ टहलना अच्छा लगता है, तो यह जगह एकदम सही है. सूर्यास्त के समय यहां की हवा और नजारा किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. इंद्रप्रस्थ पार्क इंद्रप्रस्थ पार्क का जापानी स्टाइल गार्डन अभी भी कई लोगों के लिए अनजान है. यहां रंग-बिरंगे फूल, पत्थर और अलग ही तरह की वाइब देखने को मिलती है. नेचर लवर्स और फोटो के शौकीन कपल्स के लिए यह जगह परफेक्ट है. यहां की शांति आपके वैलेंटाइन डे को और भी खास बना सकती है. कनॉट प्लेस कनॉट प्लेस दिल्ली की सबसे पॉपुलर और हप्पेनिंग जगहों में से एक है. यहां आप कैफे डेट कर सकते हैं, स्ट्रीट फूड का मजा ले सकते हैं और चाहें तो शॉपिंग भी कर सकते हैं. हर बजट के ऑप्शन मिलने की वजह से यह कपल्स के लिए हमेशा से फेवरेट स्पॉट रहा है. संजय झील अगर आप भीड़ से दूर शांति चाहते हैं, तो संजय झील एक बेहतरीन ऑप्शन है. झील के किनारे वॉक करना, बोटिंग करना और नेचर के बीच समय बिताना कपल्स को काफी सुकून देता है. यहां का माहौल रिलैक्स करने के लिए बिल्कुल सही है. साइबर हब, गुरुग्राम मॉडर्न और स्टाइलिश डेट के लिए साइबर हब शानदार जगह है. यहां कई कैफे, रेस्टोरेंट और म्यूजिक स्पॉट्स हैं. अगर आप वैलेंटाइन डे पर नाइट आउट या पार्टी का प्लान बना रहे हैं, तो यह जगह आपको निराश नहीं करेगी. सुंदर नर्सरी लोधी रोड के पास स्थित सुंदर नर्सरी कपल्स के लिए एक शांत और खूबसूरत जगह है. हरियाली, ओपन स्पेस और साफ-सुथरा माहौल इसे खास बनाता है. यहां पिकनिक स्टाइल डेट भी प्लान की जा सकती है, जो कम खर्च में शानदार अनुभव देती है. लोधी गार्डन लोधी गार्डन हमेशा से कपल्स की पसंदीदा जगहों में शामिल रहा है. यहां घूमते हुए ऐतिहासिक ढांचे देखना और हरियाली के बीच समय बिताना बेहद अच्छा लगता है. सुबह या शाम, दोनों समय यह जगह वैलेंटाइन डेट के लिए परफेक्ट है.
नियमित जांच से कैंसर पर शुरुआती दौर में लगाया जा सकता है ब्रेक..

नई दिल्ली। कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर और जानलेवा बीमारियों में शामिल है। हालांकि मेडिकल साइंस में लगातार प्रगति हो रही है, लेकिन समय पर पहचान न होने के कारण यह बीमारी लाखों लोगों की जान ले लेती है। भारत में कैंसर के अधिकांश मामलों का पता तीसरे या चौथे स्टेज में चलता है, जिससे इलाज जटिल हो जाता है और मृत्यु दर बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही समय पर जरूरी हेल्थ चेकअप कराए जाएं, तो कैंसर को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है। GLOBOCAN 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत में करीब 14.1 लाख नए कैंसर मामले सामने आए, जबकि लगभग 9.2 लाख लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह लेट डायग्नोसिस है। शुरुआती स्टेज में कैंसर अक्सर बिना लक्षणों के बढ़ता रहता है, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। लेट डायग्नोसिस क्यों है खतरनाकजब कैंसर तीसरे या चौथे स्टेज में पहुंच जाता है, तब यह शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका होता है। इस स्थिति में इलाज न केवल महंगा होता है बल्कि सफल होने की संभावना भी कम हो जाती है। यही कारण है कि डॉक्टर शुरुआती पहचान को कैंसर से लड़ाई का सबसे मजबूत हथियार मानते हैं। एक्सपर्ट द्वारा बताए गए 6 जरूरी हेल्थ चेकअप ब्लड टेस्टसामान्य ब्लड जांच से शरीर में असामान्य बदलाव, संक्रमण या ट्यूमर मार्कर के संकेत मिल सकते हैं। यह शुरुआती चेतावनी का काम करता है। मैमोग्राफीमहिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर की पहचान में यह जांच बेहद जरूरी मानी जाती है। 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी की सलाह दी जाती है। पैप स्मीयर टेस्टयह सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में सहायक होता है। समय पर जांच से इस कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैनपेट, लिवर, किडनी और अन्य अंगों में होने वाले ट्यूमर की पहचान के लिए यह जांच महत्वपूर्ण होती है। कोलोनोस्कोपीयह जांच आंतों और कोलन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने में मदद करती है, खासकर 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए। ओरल स्क्रीनिंगतंबाकू, गुटखा या धूम्रपान करने वालों के लिए मुंह और गले की नियमित जांच बेहद जरूरी होती है, जिससे ओरल कैंसर की समय रहते पहचान हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर का डर पालने की बजाय जागरूकता और नियमित जांच को जीवनशैली का हिस्सा बनाना चाहिए। संतुलित आहार, व्यायाम और समय-समय पर मेडिकल चेकअप से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।समय रहते पहचान न केवल इलाज को आसान बनाती है बल्कि जीवन को भी बचा सकती है।
जरूरत की खबर: क्या आपकी सेहत के लिए सही है फ्रोजन मटर? जानें इसे खरीदने के 6 गोल्डन रूल्स और सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली। सर्दियों के खत्म होते ही ताजी मटर बाजार से गायब होने लगती है, ऐसे में फ्रोजन मटर ही एकमात्र विकल्प बचती है। ‘रेडी-टू-यूज’ होने के कारण यह न केवल समय बचाती है, बल्कि छीलने के झंझट से भी मुक्ति दिलाती है। लेकिन क्या यह उतनी ही पौष्टिक है जितनी ताजी मटर? एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि सही तरीके से चुनी और इस्तेमाल की जाए, तो फ्रोजन मटर ताजी मटर का एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।फ्रोजन मटर: ताजी मटर से कितनी अलग? अक्सर लोग इसे ‘प्रोसेस्ड फूड’ मानकर घबराते हैं, लेकिन डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि फ्रोजन मटर को ‘ब्लांचिंग’ प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इसमें मटर को पहले उबलते पानी में डाला जाता है और फिर तुरंत ठंडा कर फ्रीज किया जाता है। यह प्रक्रिया मटर के प्राकृतिक रंग, स्वाद और पोषक तत्वों को ‘लॉक’ कर देती है। कई मामलों में, फ्रोजन मटर उन ताजी मटर से बेहतर हो सकती है जो कई दिनों तक ट्रांसपोर्टेशन या धूप में रखी रहती हैं।खरीदते समय बरतें ये 6 सावधानियां बाजार से फ्रोजन मटर का पैकेट उठाते समय इन बातों का खास ख्याल रखें:पैकेट को हिलाकर देखें: मटर के दाने अलग-अलग महसूस होने चाहिए। यदि वे एक बड़े बर्फ के गोले की तरह जमे हुए हैं, तो इसका मतलब है कि पैकेट को पहले पिघलाया गया और फिर दोबारा फ्रीज किया गया है । ऐसे पैकेट न खरीदें। बर्फ की परत: अगर पैकेट के अंदर बहुत अधिक बर्फ जमी है, तो यह नमी और खराब स्टोरेज की निशानी है। एक्सपायरी डेट: हमेशा मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट चेक करें। फ्रोजन मटर आमतौर पर 6-12 महीने तक अच्छी रहती है। पैकेट की बनावट: पैकेट कहीं से फटा या ढीला नहीं होना चाहिए। सीलबंद पैकेट ही लें। रंग: दानों का रंग गहरा हरा होना चाहिए। यदि रंग हल्का पीला या सफेद पड़ रहा हो, तो मटर पुरानी हो सकती है। पिक-अप टाइम: ग्रोसरी शॉपिंग के दौरान फ्रोजन मटर सबसे अंत में उठाएं ताकि वह घर पहुँचने तक ज्यादा न पिघले। इस्तेमाल करने का सही तरीका डायरेक्ट कुकिंग न करें: फ्रोजन मटर को फ्रीजर से निकालकर सीधे गरम तेल या तड़के में न डालें।गुनगुना पानी: इस्तेमाल से 5-10 मिनट पहले मटर को सामान्य या गुनगुने पानी में भिगोकर रखें। इससे इसकी बर्फ पिघल जाएगी और यह अपनी प्राकृतिक कोमलता में आ जाएगी। ओवरकुकिंग से बचें: चूंकि फ्रोजन मटर पहले से ही ‘ब्लांच’ होती है, इसलिए इसे ताजी मटर की तुलना में बहुत कम पकाने की जरूरत होती है। ज्यादा पकाने से इसके विटामिन सी और बी-कॉम्प्लेक्स नष्ट हो सकते हैं।
रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें, सुबह दिखेगा साफ और चमकदार चेहरा..

नई दिल्ली।मिट्टी प्रदूषण और भागदौड़ भरी जिंदगी स्किन की नेचुरल चमक छीन लेती है। ऐसे में लोग महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोइंग स्किन के लिए हमेशा महंगे प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं होते। आपकी किचन और ड्रेसिंग टेबल पर मौजूद कुछ नेचुरल चीजें भी कमाल का असर दिखा सकती हैं।एक्सपर्ट्स के मुताबिक रात का समय स्किन रिपेयर के लिए सबसे बेहतर होता है। दिनभर धूप और प्रदूषण से डैमेज हुई स्किन रात में खुद को रिपेयर करती है। अगर इस दौरान सही चीजें स्किन पर लगाई जाएं तो उनका असर ज्यादा जल्दी और बेहतर दिखाई देता है। रात को सोने से पहले क्यों जरूरी है स्किन केयरदिनभर स्किन बाहरी नुकसान झेलती है। रात के समय ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और स्किन सेल्स तेजी से रिपेयर होते हैं। यही वजह है कि नाइट स्किनकेयर रूटीन को सबसे अहम माना जाता है। रात को सोने से पहले लगाएं ये 3 चीजें 1. एलोवेरा जेलएलोवेरा जेल स्किन को गहराई से हाइड्रेट करता है और दाग धब्बों को हल्का करने में मदद करता है। सोने से पहले चेहरे को साफ करके हल्की मात्रा में एलोवेरा जेल लगाएं और रातभर छोड़ दें। सुबह चेहरा फ्रेश और सॉफ्ट नजर आएगा। 2. गुलाब जलगुलाब जल नेचुरल टोनर की तरह काम करता है। यह स्किन के पोर्स को टाइट करता है और चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाता है। कॉटन की मदद से सोने से पहले चेहरे पर गुलाब जल लगाएं। यह स्किन को शांत करता है और रेडनेस भी कम करता है। 3. नारियल तेल या बादाम तेलअगर आपकी स्किन ड्राई है तो सोने से पहले कुछ बूंदें नारियल तेल या बादाम तेल की मसाज करें। यह स्किन को पोषण देता है और रातभर नमी बनाए रखता है। सुबह स्किन सॉफ्ट और चमकदार दिखती है। बेहतर रिजल्ट के लिए रखें इन बातों का ध्यानसोने से पहले मेकअप जरूर हटाएं। हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें और पर्याप्त नींद लें। पानी ज्यादा पिएं और जंक फूड से दूरी बनाएं।नियमित रूप से इन नेचुरल उपायों को अपनाने से कुछ ही दिनों में स्किन की रंगत में सुधार और नेचुरल ग्लो साफ नजर आने लगेगा।
असली या नकली? महंगी पश्मीना शॉल खरीदने से पहले जान लें पहचान के आसान तरीके..

नई दिल्ली । पश्मीना शॉल सिर्फ सर्दियों से बचाने वाला कपड़ा नहीं, बल्कि कश्मीर और लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसकी बारीक बनावट, हल्कापन और जबरदस्त गर्माहट इसे दुनिया की सबसे महंगी और खास ऊन में शामिल करती है। यही वजह है कि शुद्ध पश्मीना शॉल की कीमत 30 से 40 हजार रुपये या उससे भी ज्यादा हो सकती है। लेकिन ऊंची कीमत के कारण बाजार में नकली और सेमी सिंथेटिक पश्मीना की भरमार है, जिसमें ग्राहक अक्सर धोखा खा जाते हैं। नकली पश्मीना देखने में बिल्कुल असली जैसा लग सकता है, लेकिन कुछ आसान जांच के जरिए इसकी सच्चाई पहचानी जा सकती है। अगर आप भी महंगी पश्मीना शॉल खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। ऊन का स्रोत पहचानेंअसली पश्मीना लद्दाख की ऊंचाई वाले इलाकों में पाई जाने वाली चांगथांगी बकरियों के अंडरकोट से बनाया जाता है। अत्यधिक ठंड के कारण इनके रेशे बेहद महीन, मुलायम और गर्म होते हैं। यही खासियत पश्मीना को दूसरी ऊन से अलग बनाती है। वजन से करें जांचशुद्ध पश्मीना बेहद हल्का होता है। आमतौर पर पूरा पश्मीना शॉल लगभग 180 ग्राम के आसपास होता है, जबकि स्टोल का वजन करीब 90 से 100 ग्राम तक रहता है। अगर शॉल हाथ में भारी महसूस हो, तो वह नकली या मिश्रित हो सकता है। बर्न टेस्ट से पहचानपश्मीना की असलियत जांचने का एक पुराना तरीका बर्न टेस्ट है। शॉल के किनारे से निकाले गए धागे को जलाने पर असली पश्मीना बालों की तरह धीरे जलता है और राख बन जाता है। वहीं नकली या सिंथेटिक धागा प्लास्टिक की तरह पिघलता है और तेज बदबू देता है। बुनावट और फिनिशिंग पर नजर डालेंअसली पश्मीना पूरी तरह हाथ से बुना जाता है। इसलिए उसकी बुनावट में हल्की असमानता हो सकती है। अगर शॉल मशीन से बनी तरह बहुत ज्यादा परफेक्ट और एकसमान दिखे, तो वह नकली होने का संकेत हो सकता है। जीआई टैग जरूर देखेंखरीदारी के समय पश्मीना शॉल पर जीआई टैग की मांग जरूर करें। यह टैग उसकी प्रामाणिकता और मूल स्थान की पुष्टि करता है और बताता है कि शॉल वास्तव में कश्मीर या लद्दाख क्षेत्र की पारंपरिक पश्मीना है।विशेषज्ञों के अनुसार, पश्मीना शॉल खरीदते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए। सही जानकारी और थोड़ी सतर्कता आपको नकली से बचा सकती है और आपकी महंगी खरीद को सही निवेश बना सकती है।
15 साल की सबसे गर्म शुरुआत: फरवरी की ‘सर्द-गर्म’ से सावधान! इन 7 आसान उपायों से बचें फ्लू और बुखार से

नई दिल्ली। फरवरी का मौसम इस बार बेहद असामान्य है। जनवरी के बाद फरवरी की शुरुआत भी पिछले 15 सालों में सबसे गर्म रिकॉर्ड तोड़ रही है। दिन में तेज धूप और शाम को ठंडी हवा—इस ‘सर्द-गर्म’ के कारण शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो रही है और लोग जल्दी बीमार पड़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धूप से लौटते ही पंखा/एसी चलाना या तुरंत ठंडा पानी पीना सर्द-गर्म का मुख्य कारण बन सकता है। फ्लू और सर्दी-जुकाम से बचने के लिए साफ-सफाई सबसे बड़ा हथियार है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों को साबुन से धोना, खांसते/छींकते समय रुमाल का उपयोग और बार-बार नाक-आंख छूने से बचना जरूरी है। साथ ही घर का बना ताजा भोजन, हल्दी वाला दूध, गुनगुना पानी, और सही पहनावा इस मौसम में सेहत बनाए रखने में मददगार है। बच्चे और बुजुर्ग इस मौसम में ज्यादा प्रभावित होते हैं। अगर दो दिन से अधिक बुखार, कफ या कमजोरी बनी रहे तो इसे हल्के में न लें और डॉक्टर से तुरंत सलाह लें।
फरवरी की 'सर्द-गर्म' से रहें सावधान: 15 सालों में सबसे गर्म शुरुआत, बीमारियों से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

नई दिल्ली। फरवरी का महीना आते ही प्रकृति करवट बदलने लगती है। इस साल मौसम का मिजाज कुछ ज्यादा ही हैरान करने वाला है; जहाँ जनवरी पिछले छह सालों में सबसे गर्म रहा, वहीं फरवरी की शुरुआत ने भी पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दिन में चुभती धूप और शाम होते ही सर्द हवाओं का यह ‘डबल अटैक’ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) पर सीधा हमला करता है। ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आपको अस्पताल पहुँचा सकती है। धूप से आकर तुरंत न चलाएं पंखा दोपहर के वक्त बाहर से आने पर अक्सर शरीर का तापमान बढ़ जाता है और हम तुरंत पंखा चला लेते हैं या एसी की तलाश करते हैं। डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि ऐसा करना ‘सर्द-गर्म’ का मुख्य कारण बनता है। जब आप बाहर से आएं, तो कम से कम 10-15 मिनट शांति से बैठें ताकि शरीर का तापमान प्राकृतिक रूप से सामान्य हो जाए। इसी तरह, तेज धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी पीना गले के संक्रमण और तेज बुखार को न्योता देना है। साफ-सफाई: फ्लू से बचने का सबसे बड़ा हथियार बदलते मौसम में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमण से बचने के लिए हाथों की स्वच्छता (Hand Hygiene) सबसे महत्वपूर्ण है। अपनी हथेलियों, उंगलियों और नाखूनों को नियमित रूप से साबुन से धोएं। खांसते या छींकते समय रुमाल का प्रयोग करें और हाथों से बार-बार नाक या आंखों को छूने से बचें। सेहत बनाए रखने के अचूक उपाय: इस संक्रमण काल में खुद को सुरक्षित रखने के लिए अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव जरूर करें:बाहर के खुले या जंक फूड से परहेज करें और घर का बना ताजा भोजन ही लें।रात को सोने से पहले एक गिलास हल्दी वाला दूध पिएं, यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक का काम करता है।कफ या गले में खराश महसूस होने पर केवल गुनगुना पानी ही पिएं। सुबह और शाम की ठंड को हल्के में न लें; पूरी बाजू के कपड़े पहनें। पैरों में संक्रमण से बचने के लिए अब बंद जूतों की जगह खुली चप्पलों का चुनाव किया जा सकता है। डॉक्टर की सलाह कब लें? बदलते मौसम में बच्चे और बुजुर्ग सबसे जल्दी संक्रमण की चपेट में आते हैं। यदि आपको या परिवार में किसी को भी दो दिन से अधिक समय तक बुखार, लगातार कफ या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो इसे ‘मौसमी असर’ मानकर नजरअंदाज न करें। तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से परामर्श लें ताकि समय रहते सही उपचार शुरू हो सके। फरवरी में दिन की गर्मी और रात की ठंड के कारण ‘सर्द-गर्म’ की समस्या बढ़ रही है। 15 साल की सबसे गर्म शुरुआत के बीच सर्दी-जुकाम और फ्लू का खतरा है। बचाव के लिए धूप से आकर तुरंत ठंडा पानी न पिएं, स्वच्छता का ध्यान रखें और इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए हल्दी वाले दूध का सेवन करें।