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दिनभर AC में रहने से स्किन हो रही ड्राई? ये आसान टिप्स बनाएंगे आपकी स्किन को हाइड्रेटेड और ग्लोइंग

नई दिल्ली : गर्मी से बचने के लिए आजकल लोग ज्यादातर समय एसी (AC) वाले कमरों में बिताते हैं, चाहे ऑफिस हो या घर। ठंडी हवा भले ही राहत देती है, लेकिन इसका सीधा असर हमारी स्किन पर पड़ता है। लगातार एसी में रहने से त्वचा की नमी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे स्किन ड्राई, बेजान और खिंची हुई महसूस हो सकती है। कई लोगों को चेहरे पर रूखापन, हल्की सफेद परत और ग्लो कम होने जैसी समस्याएं भी दिखने लगती हैं। एसी की ठंडी और सूखी हवा त्वचा की प्राकृतिक नमी को सोख लेती है, जिससे स्किन डिहाइड्रेट हो जाती है। ऐसे में स्किन को सही देखभाल की जरूरत होती है ताकि उसका ग्लो और सॉफ्टनेस बरकरार रहे। सबसे पहले स्किन को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए एसी में बैठने से पहले और दौरान हल्का मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। जेल बेस्ड या हयालूरोनिक एसिड युक्त मॉइश्चराइजर स्किन में नमी बनाए रखने में मदद करता है और ड्राईनेस को कम करता है। दूसरा और सबसे जरूरी उपाय है पर्याप्त मात्रा में पानी पीना। एसी में रहने पर अक्सर प्यास कम लगती है, लेकिन शरीर में पानी की कमी स्किन को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। दिनभर में पर्याप्त पानी, नारियल पानी और ताजे फलों के जूस का सेवन त्वचा को अंदर से हाइड्रेट रखता है। इसके अलावा स्किन को समय-समय पर हल्के फेस मिस्ट या गुलाब जल से रिफ्रेश करना भी फायदेमंद होता है। यह त्वचा को तुरंत ताजगी देता है और ड्राईनेस कम करता है। एसी में लंबे समय तक रहने वाले लोगों के लिए स्किन केयर रूटीन को नियमित रखना बेहद जरूरी है। सही देखभाल से न सिर्फ त्वचा का ग्लो बना रहता है, बल्कि वह हेल्दी और सॉफ्ट भी दिखाई देती है।

बेसन, दही और हल्दी से बनाएं आसान और असरदार होममेड फेसवॉश..

नई दिल्ली :आजकल स्किन केयर हर किसी की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुका है। लोग अपने चेहरे को साफ, फ्रेश और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए कई तरह के फेसवॉश इस्तेमाल करते हैं, लेकिन केमिकल वाले प्रोडक्ट्स कई बार त्वचा को रूखा या संवेदनशील बना सकते हैं। ऐसे में किचन में मौजूद प्राकृतिक चीजों से बना होममेड फेसवॉश एक सुरक्षित और असरदार विकल्प माना जाता है। इस नेचुरल फेसवॉश को बनाने के लिए किसी महंगे प्रोडक्ट की जरूरत नहीं होती। घर में आसानी से मिलने वाली चीजें जैसे बेसन, दही, हल्दी और गुलाब जल त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करती हैं। बेसन स्किन से गंदगी और अतिरिक्त तेल हटाने में मदद करता है, दही त्वचा को नमी देता है, हल्दी एंटीसेप्टिक गुणों से स्किन को सुरक्षित रखती है और गुलाब जल चेहरे को ताजगी प्रदान करता है। इसे बनाने के लिए एक साफ बाउल में दो चम्मच बेसन लें और उसमें एक चम्मच दही मिलाएं। इसके बाद इसमें एक चुटकी हल्दी और थोड़ा सा गुलाब जल डालकर एक स्मूद पेस्ट तैयार करें। इस बात का ध्यान रखें कि मिश्रण न ज्यादा पतला हो और न ज्यादा गाढ़ा, ताकि इसे आसानी से चेहरे पर लगाया जा सके। तैयार फेसवॉश को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाकर एक से दो मिनट तक मसाज करें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है और रोमछिद्रों में जमी गंदगी बाहर निकलने में मदद मिलती है। इसके बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें और हल्के हाथों से सुखा लें। इस घरेलू फेसवॉश का नियमित उपयोग त्वचा को साफ, मुलायम और नेचुरल ग्लो देने में मदद कर सकता है। यह खासकर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनकी स्किन संवेदनशील है या जो केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स से बचना चाहते हैं।

समर स्किन केयर रूटीन त्वचा को ठंडा और चमकदार रखने के सबसे आसान घरेलू तरीके

नई दिल्ली । गर्मियों में तेज धूप, पसीना और बढ़ती गर्मी त्वचा पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इस मौसम में चेहरा अक्सर चिपचिपा, बेजान और थका हुआ दिखने लगता है। ऐसे में स्किन को ठंडक देना और उसका प्राकृतिक निखार बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू और प्राकृतिक उपाय त्वचा को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहले आता है एलोवेरा, जिसे एक प्राकृतिक कूलिंग एजेंट माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और हाइड्रेटिंग गुण सनबर्न और जलन को कम करने में मदद करते हैं। धूप से लौटने के बाद ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को तुरंत राहत मिलती है और रात में लगाने पर यह त्वचा को गहराई से मॉइश्चराइज करता है। गर्मियों में त्वचा को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए खीरा और गुलाब जल का मिश्रण भी बेहद उपयोगी है। खीरे का रस त्वचा को हाइड्रेट करता है, जबकि गुलाब जल त्वचा के pH संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में भरकर फेस मिस्ट की तरह इस्तेमाल करने से चेहरा पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है। मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक भी गर्मियों में ऑयली स्किन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है, रोमछिद्रों को साफ करता है और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा को ठंडक देकर टैनिंग को भी हल्का करता है। त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए दही और शहद का मिश्रण एक बेहतरीन उपाय है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड डेड स्किन को हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा को मुलायम और मॉइश्चराइज करता है। इसे हफ्ते में दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार देखा जा सकता है। इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीना और तरबूज, खीरा और संतरा जैसे फलों को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। सही आहार और पर्याप्त पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखाई देता है। कुल मिलाकर, इन सरल और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर गर्मियों में त्वचा को न केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि बिना किसी खर्च के प्राकृतिक ग्लो भी पाया जा सकता है। गर्मियों में तेज धूप, पसीना और बढ़ती गर्मी त्वचा पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं। इस मौसम में चेहरा अक्सर चिपचिपा, बेजान और थका हुआ दिखने लगता है। ऐसे में स्किन को ठंडक देना और उसका प्राकृतिक निखार बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। महंगे प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू और प्राकृतिक उपाय त्वचा को सुरक्षित और स्वस्थ रखने में अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं। त्वचा की देखभाल के लिए सबसे पहले आता है एलोवेरा, जिसे एक प्राकृतिक कूलिंग एजेंट माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और हाइड्रेटिंग गुण सनबर्न और जलन को कम करने में मदद करते हैं। धूप से लौटने के बाद ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को तुरंत राहत मिलती है और रात में लगाने पर यह त्वचा को गहराई से मॉइश्चराइज करता है। गर्मियों में त्वचा को ठंडा और फ्रेश रखने के लिए खीरा और गुलाब जल का मिश्रण भी बेहद उपयोगी है। खीरे का रस त्वचा को हाइड्रेट करता है, जबकि गुलाब जल त्वचा के pH संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इस मिश्रण को स्प्रे बोतल में भरकर फेस मिस्ट की तरह इस्तेमाल करने से चेहरा पूरे दिन तरोताजा महसूस करता है। मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक भी गर्मियों में ऑयली स्किन के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। यह अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करता है, रोमछिद्रों को साफ करता है और मुंहासों की समस्या को कम करने में मदद करता है। साथ ही यह त्वचा को ठंडक देकर टैनिंग को भी हल्का करता है। त्वचा की नमी बनाए रखने के लिए दही और शहद का मिश्रण एक बेहतरीन उपाय है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड डेड स्किन को हटाने में मदद करता है, जबकि शहद त्वचा को मुलायम और मॉइश्चराइज करता है। इसे हफ्ते में दो बार लगाने से त्वचा की रंगत में सुधार देखा जा सकता है। इसके साथ ही शरीर को अंदर से हाइड्रेट रखना भी बेहद जरूरी है। दिनभर पर्याप्त पानी पीना और तरबूज, खीरा और संतरा जैसे फलों को डाइट में शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए बहुत लाभकारी है। सही आहार और पर्याप्त पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं, जिसका सीधा असर चेहरे की चमक पर दिखाई देता है। कुल मिलाकर, इन सरल और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर गर्मियों में त्वचा को न केवल सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि बिना किसी खर्च के प्राकृतिक ग्लो भी पाया जा सकता है।

विटामिन D की कमी: जानिए किन लोगों को सप्लीमेंट, लेना है बेहद जरूरी

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना और कम धूप के संपर्क में आना शरीर में विटामिन D की कमी का बड़ा कारण बन रहा है। हैरानी की बात यह है कि धूप से भरपूर देश में भी बड़ी संख्या में लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। विटामिन D हड्डियों की मजबूती, इम्यूनिटी और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी माना जाता है, लेकिन इसकी कमी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ लोगों में विटामिन D की कमी का खतरा अधिक होता है और उन्हें सप्लीमेंट की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले वे लोग जो ज्यादातर समय घर या ऑफिस के अंदर रहते हैं और जिनकी त्वचा पर पर्याप्त धूप नहीं पड़ती। इसके अलावा गहरी त्वचा (डार्क स्किन) वाले लोगों में भी यह कमी अधिक देखी जाती है क्योंकि उनकी त्वचा में मेलेनिन अधिक होने से विटामिन D बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों में भी विटामिन D बनाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं और जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है। वहीं मोटापे से ग्रस्त लोगों में यह विटामिन शरीर की फैट कोशिकाओं में फंस जाता है, जिससे इसकी उपलब्धता कम हो जाती है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी इसकी अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि इस दौरान शरीर की जरूरतें बढ़ जाती हैं। शाकाहारी या वीगन लोगों में भी विटामिन D की कमी आम है क्योंकि इसके प्रमुख प्राकृतिक स्रोत जैसे मछली और अंडे उनके आहार में शामिल नहीं होते। इसके अलावा किडनी या पाचन संबंधी रोगों से पीड़ित लोगों में भी शरीर विटामिन D को सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाता, जिससे कमी की संभावना बढ़ जाती है। विटामिन D की कमी के लक्षणों में लगातार थकान, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, बाल झड़ना, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह हड्डियों को कमजोर कर सकता है और इम्यून सिस्टम को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सुबह या दिन के समय थोड़ी देर धूप लेना, आहार में मशरूम, फोर्टिफाइड दूध, अंडे की जर्दी और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि सप्लीमेंट लेने से पहले ब्लड टेस्ट और डॉक्टर की सलाह जरूरी है, क्योंकि अधिक मात्रा में विटामिन D शरीर के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। कुल मिलाकर, सही जीवनशैली, संतुलित आहार और समय-समय पर जांच के जरिए विटामिन D की कमी को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

मीठी तुलसी के चमत्कारी फायदे ,गर्मियों में शरीर को देगी ठंडक और सेहत

नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में तुलसी का विशेष महत्व रहा है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मीठी तुलसी भी गुणों से भरपूर एक औषधीय पौधा है। आयुर्वेद में इसे बेहद उपयोगी माना गया है और खासकर गर्मियों में इसका सेवन कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। मीठी तुलसी को स्टीविया के नाम से भी जाना जाता है। यह प्राकृतिक रूप से मीठी होती है और इसकी मिठास सामान्य चीनी से कई गुना अधिक होती है। खास बात यह है कि इसमें ग्लूकोज या सुक्रोज नहीं होता, इसलिए यह रक्त शर्करा को नहीं बढ़ाती। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीज सीमित मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, मीठी तुलसी पित्त को शांत करने में मदद करती है। गर्मियों में जब शरीर में गर्मी और एसिडिटी बढ़ जाती है, तब इसके पत्तों से बना शरबत या काढ़ा पेट को ठंडक देता है और जलन को कम करता है। यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में भी सहायक होती है। मीठा खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में भी स्टीविया काफी कारगर है। इसमें कैलोरी बहुत कम होती है, जिससे यह वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है। जो लोग डाइटिंग कर रहे हैं या वजन घटाना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतर विकल्प बन सकती है। इसके अलावा, मीठी तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो दांतों को कैविटी और सड़न से बचाने में मदद करते हैं। जहां रिफाइंड शुगर दांतों के लिए नुकसानदायक होती है, वहीं स्टीविया एक सुरक्षित विकल्प के रूप में सामने आती है। ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी यह उपयोगी मानी जाती है। खासकर गर्मियों में लो ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर इसका सेवन लाभकारी हो सकता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देती है। त्वचा के लिए भी मीठी तुलसी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को साफ और स्वस्थ रखने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं कम होती हैं। कुल मिलाकर, मीठी तुलसी केवल स्वाद में ही नहीं बल्कि गुणों में भी बेहद समृद्ध है। इसे अपनी डाइट में शामिल कर आप गर्मियों में सेहतमंद और संतुलित जीवन की ओर एक आसान कदम बढ़ा सकते हैं।

शुरुआती लोगों के लिए बेस्ट योग रूटीन, रोज 15 मिनट ,में पाएं फिट बॉडी और शांत मन

नई दिल्ली । अगर आप योग की शुरुआत करना चाहते हैं लेकिन समझ नहीं पा रहे कि कौन से आसन से शुरुआत करें, तो आयुष मंत्रालय की सलाह आपके लिए एक बेहतरीन गाइड साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआती लोगों के लिए ताड़ासन, वज्रासन और भुजंगासन सबसे सरल और प्रभावी योगासन हैं, जिन्हें घर पर आसानी से किया जा सकता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना केवल 10 से 15 मिनट इन आसनों का अभ्यास करने से शरीर लचीला बनता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है। योग की शुरुआत हमेशा धीरे-धीरे करनी चाहिए और सांसों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। नियमित अभ्यास से जल्दी ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं। ताड़ासन योग का सबसे बुनियादी आसन है, जो शरीर को संतुलन और मजबूती देता है। इसमें सीधे खड़े होकर हाथों को ऊपर उठाया जाता है और पूरे शरीर को खींचा जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को सीधा करता है, शरीर की मुद्रा सुधारता है और एकाग्रता बढ़ाता है। शुरुआत में इसे 20 से 30 सेकंड तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। वज्रासन एकमात्र ऐसा आसन है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इसमें घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और शरीर को सीधा रखा जाता है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, पेट की समस्याओं में राहत देता है और ध्यान के लिए आदर्श मुद्रा मानी जाती है। शुरुआती लोग इसे 3 से 5 मिनट तक करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं। भुजंगासन पीठ और रीढ़ के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें पेट के बल लेटकर छाती को ऊपर उठाया जाता है। यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है, फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है और तनाव को कम करता है। इसे 15 से 20 सेकंड तक रोककर 3 से 5 बार दोहराना चाहिए। इन तीनों आसनों का नियमित अभ्यास न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी सकते हैं।

लिवर को रखना है मजबूत, तो डाइट में शामिल करें ये सुपरफूड फल और पत्ते

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित खानपान का सबसे ज्यादा असर हमारे लिवर पर पड़ रहा है, जो शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है। लिवर न केवल खून को साफ करता है बल्कि पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसकी देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है। हर साल 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को लिवर की सेहत के प्रति जागरूक करना है। विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय के अनुसार, अगर सही खानपान और प्राकृतिक चीजों को डाइट में शामिल किया जाए तो लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ फल और पत्ते लिवर के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। इनमें सबसे पहले आता है आंवला, जिसे लिवर का सबसे बड़ा दोस्त माना जाता है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। रोजाना आंवला या इसका जूस पीना बेहद फायदेमंद होता है। पपीता भी लिवर के लिए काफी लाभकारी है। यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है और लिवर में जमा विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। इसके अलावा अनार का सेवन लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है और खून को शुद्ध रखने में सहायक होता है। अंगूर में पाए जाने वाले प्राकृतिक कंपाउंड लिवर की सूजन को कम करते हैं और उसे डिटॉक्स करने में मदद करते हैं। वहीं संतरा और नींबू विटामिन सी से भरपूर होते हैं। सुबह खाली पेट नींबू पानी पीने से लिवर को साफ रखने में मदद मिलती है। फलों के साथ-साथ कुछ पत्ते भी लिवर के लिए बेहद उपयोगी माने जाते हैं। माकोय के पत्ते आयुर्वेद में लिवर टॉनिक के रूप में जाने जाते हैं और लिवर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। वहीं मोरिंगा के पत्तों में पोषक तत्वों की भरमार होती है, जो लिवर को मजबूत बनाने और शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक होते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इन प्राकृतिक चीजों को अपनी रोजाना की डाइट में शामिल करें। साथ ही तला-भुना और जंक फूड से दूरी बनाएं, शराब का सेवन सीमित करें, नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। इन आसान आदतों को अपनाकर लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ और मजबूत रखा जा सकता है।

लौकी का रायता गर्मियों में शरीर को ठंडक और आराम देने में सहायक..

नई दिल्ली:गर्मियों के मौसम में हल्का, ठंडा और सुपाच्य भोजन शरीर को आराम देने के साथ साथ पाचन तंत्र को भी संतुलित रखने में मदद करता है। ऐसे समय में लौकी का रायता एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है, जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है। यह डिश न केवल गर्मी में शरीर को ठंडक प्रदान करती है बल्कि भोजन को हल्का और पौष्टिक भी बनाती है। लौकी को सामान्यतः लोग ज्यादा पसंद नहीं करते, लेकिन जब इसे रायते के रूप में तैयार किया जाता है तो इसका स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। दही और मसालों के साथ मिलकर यह एक ऐसा व्यंजन बनता है जो हर उम्र के लोगों को आसानी से पसंद आ सकता है। यह लंच और डिनर दोनों के साथ परोसा जा सकता है और गर्मियों में थाली को संतुलित बनाता है। लौकी रायता बनाने की प्रक्रिया भी सरल होती है। इसके लिए सबसे पहले लौकी को अच्छे से छीलकर कद्दूकस किया जाता है और हल्के नमक के साथ कुछ मिनट तक उबाला जाता है ताकि वह नरम हो जाए। इसके बाद इसे ठंडा करके अतिरिक्त पानी निकाल दिया जाता है ताकि रायता पतला न हो। इसके बाद ताजा और ठंडे दही को अच्छी तरह फेंटकर स्मूद बनाया जाता है ताकि उसमें कोई गांठ न रहे। दही में भुना जीरा पाउडर, काला नमक, सामान्य नमक और बारीक कटी हरी मिर्च मिलाकर बेस तैयार किया जाता है। यह मिश्रण रायते को स्वाद और संतुलित स्वाद प्रोफाइल देता है। अब ठंडी की गई लौकी को इस दही के मिश्रण में धीरे धीरे मिलाया जाता है ताकि सभी सामग्री अच्छे से एकसार हो जाएं। ऊपर से हरा धनिया डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। चाहें तो हल्का लाल मिर्च पाउडर भी स्वाद के अनुसार मिलाया जा सकता है। यह रायता न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि गर्मियों में शरीर को ठंडक देने में भी मदद करता है। दही और लौकी दोनों ही पाचन के लिए फायदेमंद माने जाते हैं, जिससे यह व्यंजन हल्के और हेल्दी भोजन के रूप में अच्छा विकल्प बन जाता है। गर्मियों में ऐसे व्यंजन शरीर को हाइड्रेट रखने और भारी भोजन से बचाने में मदद करते हैं। लौकी का रायता इसी कारण से कई घरों में खास पसंद किया जाता है और यह रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा आसानी से बन सकता है।

कम सामग्री में बनने वाली तीखी डिश, जानिए तड़का मिर्ची की आसान विधि..

नई दिल्ली:अगर आपको खाने में हल्का सा तीखा और चटपटा स्वाद पसंद है, तो तड़का मिर्ची एक ऐसी आसान रेसिपी है जो आपकी रोजमर्रा की थाली का स्वाद पूरी तरह बदल सकती है। इसे दाल-चावल, खिचड़ी, रोटी या पराठे के साथ परोसा जाए तो साधारण खाना भी खास बन जाता है। यह रेसिपी कम समय में तैयार हो जाती है और स्वाद में बेहद असरदार होती है। तड़का मिर्ची बनाने के लिए मुख्य सामग्री में लंबी हरी मिर्च, तेल, जीरा, राई, हल्दी, नमक, हींग और अमचूर पाउडर या नींबू का रस शामिल होता है। इसके अलावा स्वाद और सजावट के लिए धनिया पत्ती का उपयोग किया जाता है। इन साधारण सामग्रियों से तैयार होने वाली यह डिश खाने के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसे बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छे से धोकर हल्का चीरा लगाया जाता है ताकि मसाले अंदर तक जा सकें। इसके बाद एक कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है और उसमें जीरा तथा राई डाली जाती है। जब ये चटकने लगते हैं तो उसमें हींग मिलाई जाती है, जिससे स्वाद और भी बढ़ जाता है। इसके बाद हरी मिर्च को कड़ाही में डालकर हल्का सा भून लिया जाता है ताकि उसका कच्चापन खत्म हो जाए। फिर इसमें हल्दी और नमक मिलाकर अच्छे से चलाया जाता है। धीमी आंच पर कुछ मिनट तक पकाने से मिर्च नरम हो जाती है और मसाले अच्छे से उसमें समा जाते हैं। अंत में अमचूर पाउडर या नींबू का रस डालकर हल्का मिलाया जाता है, जिससे इसमें खट्टा और तीखा स्वाद आ जाता है। गैस बंद करने के बाद ऊपर से धनिया पत्ती डालकर इसे सजाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। तड़का मिर्ची को गरम दाल-चावल के साथ, खिचड़ी के साथ या फिर साधारण रोटी के साथ खाया जा सकता है। यह एक ऐसा साइड डिश है जो कम भूख में भी खाने का मन बढ़ा देता है और पूरी थाली का स्वाद बदल देता है।

बच्चों की सेहत को लेकर अलर्ट रहें पेट दर्द और पाचन समस्या के संकेतों को समझें समय रहते इलाज करें

नई दिल्ली । बच्चों की सेहत और उनका सही विकास पूरी तरह उनके पोषण और पाचन तंत्र की स्थिति पर निर्भर करता है। आज की व्यस्त जीवनशैली में माता-पिता अक्सर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर गंभीर समस्या का रूप ले सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के पाचन स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है क्योंकि उनका पाचन तंत्र अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अनुसार बच्चों में पाचन संबंधी समस्याएं आम हैं, लेकिन शुरुआती लक्षणों को समझकर समय पर इलाज किया जाए तो बड़ी परेशानियों से बचा जा सकता है। बच्चों में कब्ज, दस्त, पेट दर्द और एसिडिटी जैसी समस्याएं सबसे ज्यादा देखने को मिलती हैं, जिन्हें अक्सर सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कब्ज एक आम समस्या है जिसमें बच्चा कठोर मल त्याग करता है या शौच के समय रोने लगता है। कई बार बच्चा शौच करने से डरने लगता है, जो आगे चलकर आदत बन सकती है। वहीं दस्त की स्थिति में बच्चे को बार बार पतला मल आता है जिससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है और बच्चा सुस्त और कमजोर दिखाई देने लगता है। इसके अलावा पेट में जलन और एसिडिटी भी बच्चों में पाचन समस्या का बड़ा संकेत है। इस स्थिति में बच्चा पेट में जलन की शिकायत करता है, खट्टी डकारें आती हैं और कभी कभी उल्टी जैसी समस्या भी हो सकती है। भोजन असहजता या फूड इनटॉलरेंस भी एक महत्वपूर्ण संकेत है, जिसमें दूध, गेहूं या कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से पेट फूलना, दर्द या एलर्जी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कृमि संक्रमण भी बच्चों में एक आम लेकिन गंभीर समस्या है जो साफ सफाई की कमी के कारण होती है। इसमें बच्चा बार बार पेट दर्द की शिकायत करता है, भूख कम हो जाती है, वजन नहीं बढ़ता और कई बार नींद में दांत पीसने की आदत भी देखी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता पिता को बच्चों के व्यवहार और स्वास्थ्य में होने वाले छोटे बदलावों पर भी नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा लगातार पेट दर्द, उल्टी, दस्त या कब्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा हो तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। घरेलू उपायों से आराम न मिलने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना जरूरी है। साथ ही बच्चों को स्वच्छता की आदतें सिखाना, उबला या साफ पानी देना और संतुलित आहार उपलब्ध कराना बेहद आवश्यक है। नियमित रूप से हाथ धोने की आदत भी उन्हें कई संक्रमणों से बचा सकती है। समय पर ध्यान और सही देखभाल से बच्चों को स्वस्थ और मजबूत बनाया जा सकता है।