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कम उम्र में सफेद बाल? पित्त दोष हो सकता है वजह, जानें आयुर्वेदिक कारण और असरदार उपाय

नई दिल्ली:आज के समय में कम उम्र में ही बालों का सफेद होना एक आम समस्या बनती जा रही है। पहले जहां सफेद बालों को बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था, वहीं अब यह युवाओं में भी तेजी से देखने को मिल रहा है। आयुर्वेद के अनुसार इसका एक बड़ा कारण पित्त दोष का असंतुलन है, जो शरीर में कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है। आयुर्वेद में बताया गया है कि जब पित्त दोष बढ़ जाता है, तो इसका सीधा असर बालों के रंगद्रव्य यानी मेलानिन पर पड़ता है। इससे बाल समय से पहले सफेद होने लगते हैं। इसके अलावा गलत खान-पान, अत्यधिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और नींद की कमी भी इस समस्या को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद बालों की समस्या को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले पित्त को संतुलित करना जरूरी है। इसके लिए खान-पान में सुधार करना बेहद अहम भूमिका निभाता है। ज्यादा मसालेदार, तैलीय और खट्टे भोजन से दूरी बनानी चाहिए। चाय, कॉफी और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ भी पित्त को बढ़ाते हैं, इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। इसके साथ ही आहार में पोषक तत्वों को शामिल करना भी जरूरी है। आयुर्वेद में आंवला, चुकंदर, घी, काली मुनक्का, शतावरी और त्रिफला जैसे तत्वों को बेहद फायदेमंद माना गया है। ये न केवल शरीर को अंदर से पोषण देते हैं, बल्कि बालों की जड़ों को भी मजबूत बनाते हैं। बाहरी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। बालों में नियमित रूप से तेल लगाना बहुत लाभकारी होता है। खासतौर पर नारियल तेल और भृंगराज तेल से हफ्ते में दो बार मालिश करने से बालों को पोषण मिलता है और सफेद बालों की गति को धीमा किया जा सकता है। यह उपाय बालों को मजबूत और चमकदार बनाने में भी मदद करता है। मानसिक तनाव भी इस समस्या का एक बड़ा कारण है। आजकल की व्यस्त जीवनशैली में लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है। गुस्सा, चिड़चिड़ापन और लगातार तनाव बालों की सेहत को खराब कर देते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप अपनी दिनचर्या में सुधार करें, समय पर सोएं और खुद को मानसिक रूप से शांत रखने की कोशिश करें। योग, ध्यान और प्रकृति के बीच समय बिताना भी इस दिशा में काफी मददगार साबित हो सकता है। खुली हवा में टहलना और सकारात्मक सोच अपनाना न केवल मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि बालों की सेहत पर भी अच्छा असर डालता है। सफेद बालों की समस्या को रोकने के लिए केवल बाहरी उपाय ही नहीं, बल्कि अंदर से संतुलन बनाए रखना जरूरी है। सही खान-पान, संतुलित जीवनशैली और आयुर्वेदिक उपाय अपनाकर आप इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं।

मार्च-अप्रैल में ट्रिप का प्लान? इन जगहों से दूरी ही बेहतर, वरना खराब हो सकता है पूरा मजा!

नई दिल्ली:मार्च और अप्रैल का महीना भारत में घूमने-फिरने के लिहाज से काफी लोकप्रिय माना जाता है। स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं खत्म होने लगती हैं और छुट्टियों का माहौल बन जाता है, ऐसे में ज्यादातर परिवार ट्रिप प्लान करने लगते हैं। लेकिन हर जगह इस मौसम में घूमने के लिए सही नहीं होती। कई डेस्टिनेशन ऐसे हैं जहां इस दौरान या तो भीषण गर्मी पड़ती है या फिर इतनी ज्यादा भीड़ हो जाती है कि आपका पूरा ट्रैवल एक्सपीरियंस खराब हो सकता है। सबसे पहले बात करें राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों की, खासकर जैसलमेर, बीकानेर और बाड़मेर जैसे शहरों की। मार्च की शुरुआत से ही यहां तापमान तेजी से बढ़ने लगता है और दिन में पारा 35 डिग्री से ऊपर पहुंच जाता है। तेज धूप और गर्म हवाएं बाहर घूमना मुश्किल बना देती हैं। ऐसे में अगर आप आरामदायक ट्रिप चाहते हैं तो इन जगहों को इस समय टालना ही बेहतर रहेगा। दूसरा नाम आता है मसूरी का, जिसे ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ कहा जाता है। आमतौर पर यह एक बेहतरीन हिल स्टेशन है, लेकिन मार्च-अप्रैल में यहां टूरिस्ट सीजन पीक पर होता है। स्कूल की छुट्टियों के कारण यहां भारी भीड़ उमड़ती है। मॉल रोड पर चलना भी मुश्किल हो जाता है, होटल महंगे हो जाते हैं और ट्रैफिक जाम आम बात बन जाती है। अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो इस समय मसूरी जाना निराश कर सकता है। तीसरी जगह है आगरा, जो अपने ऐतिहासिक महत्व और ताजमहल के लिए दुनियाभर में मशहूर है। लेकिन मार्च और अप्रैल में यहां की गर्मी परेशान कर सकती है। धूप इतनी तेज होती है कि दिन में घूमना मुश्किल हो जाता है, खासकर अगर आप लंबे समय तक बाहर रहना चाहते हैं। भीड़ और गर्म मौसम का कॉम्बिनेशन ट्रिप का मजा कम कर सकता है। इन सबके अलावा एक और बात ध्यान रखने वाली है कि इन महीनों में कई जगहों पर होटल और ट्रांसपोर्ट की कीमतें भी बढ़ जाती हैं, जिससे आपका बजट भी बिगड़ सकता है। इसलिए ट्रिप प्लान करते समय सिर्फ जगह की खूबसूरती नहीं, बल्कि मौसम, भीड़ और सुविधा को भी ध्यान में रखना जरूरी है। अगर आप सच में इस समय एक अच्छा ट्रैवल अनुभव चाहते हैं, तो ऐसी जगहों का चुनाव करें जहां मौसम सुहावना हो, भीड़ कम हो और आप आराम से घूम सकें। सही प्लानिंग और सही डेस्टिनेशन का चुनाव ही आपकी छुट्टियों को यादगार बना सकता है।

तरबूज खरीदने का सीक्रेट फॉर्मूला हर बार मिलेगा लाल मीठा और पानी से भरपूर फल

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही बाजार में तरबूज की भरमार दिखाई देने लगती है और यह फल हर घर की पहली पसंद बन जाता है क्योंकि इसमें भरपूर पानी होता है जो शरीर को ठंडक और ताजगी देता है लेकिन अक्सर लोगों के साथ एक बड़ी समस्या होती है कि बाहर से हरा और अच्छा दिखने वाला तरबूज अंदर से फीका या कच्चा निकल जाता है जिससे पैसे और उम्मीद दोनों खराब हो जाते हैं अक्सर लोग दुकान पर तरबूज को कटवाकर चेक करते हैं लेकिन यह तरीका सही नहीं माना जाता क्योंकि इससे फल जल्दी खराब हो सकता है और साफ सफाई की दृष्टि से भी यह सुरक्षित नहीं होता ऐसे में जरूरी है कि आप बिना काटे ही अच्छे तरबूज की पहचान करना सीखें ताकि हर बार मीठा और लाल फल ही घर लाएं तरबूज खरीदते समय सबसे पहले उसके नीचे बने पीले धब्बे पर ध्यान देना चाहिए जिसे फील्ड स्पॉट कहा जाता है यह धब्बा इस बात का संकेत होता है कि फल कितने समय तक जमीन पर पड़ा रहा और कितनी अच्छी तरह पका अगर यह धब्बा गहरा पीला या नारंगी रंग का है तो समझ लीजिए कि तरबूज पूरी तरह पका हुआ है और स्वाद में मीठा होगा वहीं अगर यह धब्बा हल्का हरा या सफेद है तो इसका मतलब है कि फल समय से पहले तोड़ा गया है और अंदर से कच्चा निकल सकता है इसके अलावा तरबूज को हल्के हाथ से थपथपाकर उसकी आवाज जरूर सुनें अगर उसमें से गूंजदार और खोखली आवाज आती है तो यह संकेत है कि फल अंदर से रसीला और पका हुआ है लेकिन अगर आवाज भारी या दबाव वाली लगे तो वह तरबूज कच्चा हो सकता है यह एक बहुत ही आसान और असरदार तरीका है जिसे अनुभवी लोग हमेशा अपनाते हैं वजन भी तरबूज की गुणवत्ता पहचानने का एक अहम तरीका है अगर आप एक जैसे आकार के दो तरबूज उठाते हैं और उनमें से एक ज्यादा भारी लगता है तो वही बेहतर होता है क्योंकि ज्यादा वजन का मतलब है उसमें पानी और रस की मात्रा अधिक है जो उसे मीठा और ताजा बनाता है तरबूज के बाहरी रंग और बनावट पर भी ध्यान देना चाहिए हमेशा गहरे हरे रंग और हल्के मैट फिनिश वाले तरबूज ही चुनें बहुत ज्यादा चमकदार तरबूज अक्सर कच्चे होते हैं इसके अलावा अगर तरबूज की सतह पर हल्की भूरी जाली जैसी रेखाएं दिखती हैं तो यह संकेत है कि परागण अच्छे से हुआ है और फल का स्वाद ज्यादा मीठा होगा अंत में तरबूज के डंठल को जरूर देखें अगर डंठल सूखा और भूरा है तो इसका मतलब है कि फल बेल पर पूरी तरह पक चुका है लेकिन अगर डंठल हरा है तो समझ लें कि उसे जल्दी तोड़ लिया गया है और उसका स्वाद उतना अच्छा नहीं होगा इन आसान लेकिन बेहद कारगर तरीकों को अपनाकर आप हर बार बाजार से सही तरबूज चुन सकते हैं और गर्मियों में ठंडक और मिठास का पूरा आनंद ले सकते हैं

छुट्टियों का असर, Ajmer बना पर्यटकों की पहली पसंद, हर जगह दिखा उत्साह..

नई दिल्ली:ईद के बाद वीकेंड आते ही Ajmer एक बार फिर पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार नजर आने लगा है, शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर न केवल स्थानीय लोग बल्कि आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंच रहे हैं, छुट्टियों के इस अनुकूल माहौल ने लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए प्रेरित किया है जिससे पूरे शहर में एक अलग ही उत्साह देखने को मिल रहा है सुबह से ही शहर के पर्यटन स्थलों पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है जो देर शाम तक बनी रहती है, खासतौर पर Ana Sagar Lake और Subhash Udyan इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बने हुए हैं, झील के किनारे बैठकर लोग सुकून के पल बिता रहे हैं तो वहीं बच्चे खेलकूद और मस्ती में व्यस्त नजर आते हैं, शाम के समय इन स्थानों का दृश्य और भी आकर्षक हो जाता है जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है पर्यटकों की बढ़ती संख्या का सकारात्मक असर स्थानीय कारोबार पर भी साफ दिखाई दे रहा है, झील और उद्यान के आसपास लगे खाने-पीने के स्टॉल, खिलौनों की दुकानें और छोटे व्यापारियों के यहां अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है, व्यापारियों का कहना है कि ईद के बाद आई इस भीड़ ने उनके कारोबार को नई गति दी है, जिससे लंबे समय बाद बाजारों में रौनक लौटती नजर आ रही है इसके साथ ही शहर के होटल और अन्य पर्यटन सेवाओं में भी हलचल बढ़ी है, बाहर से आने वाले पर्यटक यहां रुककर शहर की खूबसूरती और ऐतिहासिक महत्व का आनंद ले रहे हैं, इससे पूरे पर्यटन तंत्र को मजबूती मिल रही है और रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के बीच स्थित ये पर्यटन स्थल हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहे हैं, लेकिन त्योहारों और छुट्टियों के बाद यहां की रौनक कुछ अलग ही होती है, खास बात यह भी है कि Ajmer Sharif Dargah पर जियारत के लिए आने वाले जायरीन भी इन स्थलों का रुख करते हैं, जिससे पर्यटकों की संख्या और बढ़ जाती है रमजान के दौरान जहां पर्यटकों की आवाजाही में थोड़ी कमी आई थी, वहीं अब ईद के बाद यह सिलसिला फिर से तेज हो गया है, शहर में हर ओर खुशहाल और जीवंत माहौल नजर आ रहा है, लोग अपने परिवार के साथ समय बिताने के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले रहे हैं  अजमेर में पर्यटन गतिविधियों की यह वापसी न केवल शहर की रौनक को बढ़ा रही है बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है, आने वाले दिनों में भी यदि ऐसा ही माहौल बना रहा तो पर्यटन क्षेत्र और अधिक गति पकड़ सकता है

लेटेंट टीबी को न करें नजरअंदाज वरना बन सकती है एक्टिव टीबी का बड़ा खतरा

नई दिल्ली:टीबी यानी ट्यूबरकुलोसिस एक संक्रामक बीमारी है, जो Mycobacterium tuberculosis नामक बैक्टीरिया के कारण होती है और मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यह दिमाग, हड्डियों, किडनी और शरीर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। यह बीमारी हवा के जरिए फैलती है और समय पर इलाज न मिलने पर गंभीर रूप ले सकती है लेकिन टीबी की एक स्थिति ऐसी भी होती है, जिसे लेटेंट टीबी कहा जाता है। इस स्थिति में टीबी के बैक्टीरिया शरीर में मौजूद तो रहते हैं, लेकिन निष्क्रिय अवस्था में होते हैं। इसका मतलब यह है कि संक्रमित व्यक्ति को कोई लक्षण महसूस नहीं होते और न ही वह दूसरों में संक्रमण फैलाता है हर साल विश्व टीबी दिवस 24 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाना है। विशेषज्ञों के अनुसार लेटेंट टीबी को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह छुपी हुई स्थिति कभी भी सक्रिय टीबी में बदल सकती हैजब लेटेंट टीबी सक्रिय हो जाती है, तब इसके लक्षण सामने आने लगते हैं। इनमें लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और थकान जैसे संकेत शामिल हैं। इसलिए अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है लेटेंट टीबी का खतरा उन लोगों में ज्यादा होता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इसमें एचआईवी संक्रमित, डायबिटीज के मरीज, कैंसर से पीड़ित लोग या लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं लेने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी इसका जोखिम अधिक होता हैविश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी लेटेंट टीबी से प्रभावित है और भारत जैसे देशों में इसका खतरा और अधिक है। इसलिए समय रहते इसकी जांच और इलाज बेहद जरूरी है लेटेंट टीबी की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट या ट्यूबरकुलिन स्किन टेस्ट किया जाता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो डॉक्टर आमतौर पर 3 से 9 महीने तक दवाएं देते हैं, जिससे यह संक्रमण सक्रिय टीबी में बदलने से रोका जा सके बचाव के लिए जरूरी है कि अगर परिवार में किसी को लंबे समय तक खांसी, बुखार या अचानक वजन कम होने जैसी समस्या हो, तो तुरंत जांच कराई जाए। सही समय पर पहचान और इलाज से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता हैलेटेंट टीबी एक छिपा हुआ खतरा है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। समय पर जांच और उपचार ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है TagsTuberculosis, LatentTB, HealthAwareness, WHO, DiseasePrevention

Sprouts Health Tips: हर किसी को नहीं सूट करता अंकुरित आहार, ये लोग जरूर बरतें सावधानी

नई दिल्ली:अंकुरित अनाज या स्प्राउट्स आज के समय में सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। प्रोटीन और फाइबर से भरपूर यह आहार शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मांसपेशियों और कोशिकाओं के निर्माण में भी मदद करता है। लेकिन क्या यह सभी के लिए समान रूप से फायदेमंद है? आयुर्वेद के अनुसार इसका जवाब है नहीं। आयुर्वेद में अंकुरित आहार को संतुलित तरीके से और सही व्यक्ति के लिए ही उपयुक्त माना गया है। अंकुरित आहार पचने में थोड़ा भारी होता है और अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए तो यह शरीर में वात दोष को बढ़ा सकता है। इससे गैस, पेट फूलना और शरीर में रूखापन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ हमेशा इसे सीमित मात्रा में और सही तरीके से खाने की सलाह देते हैं। विशेष रूप से उन लोगों को अंकुरित आहार से सावधान रहना चाहिए जिनका पाचन कमजोर है। अगर किसी व्यक्ति को कब्ज, अपच या मंद पाचन की समस्या रहती है, तो उन्हें स्प्राउट्स का सेवन कम या बंद कर देना चाहिए। कमजोर पाचन तंत्र में यह आहार सही तरीके से पच नहीं पाता और इससे शरीर में टॉक्सिन्स बनने लगते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, छोटे बच्चों और बुजुर्गों को भी अंकुरित आहार देने से बचना चाहिए। इस उम्र में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर होता है, जिससे स्प्राउट्स का पाचन कठिन हो सकता है। इसी तरह जिन लोगों का स्वभाव वात प्रधान होता है, उन्हें भी इसका सेवन बहुत सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि यह वात को और बढ़ा सकता है। अंकुरित आहार का सेवन करते समय उसकी सही विधि भी बेहद महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद के अनुसार, स्प्राउट्स को कच्चा खाने से बचना चाहिए। बेहतर है कि उन्हें हल्का उबालकर या पकाकर, घी या तेल के साथ खाया जाए। इससे पाचन आसान होता है और शरीर को अधिकतम पोषण मिल पाता है। एक और जरूरी बात यह है कि अंकुरित अनाज को सही समय पर खाया जाए। अंकुरण के तुरंत बाद ही इसका सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि अधिक समय तक रखने पर इसके पोषक तत्वों में कमी आ सकती है। ताजे स्प्राउट्स शरीर के लिए अधिक लाभकारी होते हैं। अंकुरित आहार को अपनी डाइट में शामिल करते समय संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। इसे अपनी संपूर्ण डाइट का एक हिस्सा बनाएं, न कि पूरी डाइट का विकल्प। सही मात्रा, सही तरीका और सही व्यक्ति के अनुसार इसका सेवन करने पर यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।अंकुरित आहार एक पौष्टिक विकल्प जरूर है, लेकिन यह हर किसी के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं है। अपनी शारीरिक प्रकृति और पाचन क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही इसका सेवन करना चाहिए, ताकि इसका लाभ मिले और कोई नुकसान न हो।

ट्रेडिशनल लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का हरी चूड़ियों के ट्रेंडी डिजाइन्स से पाएं परफेक्ट फेस्टिव स्टाइल

नई दिल्ली । नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल बन जाता है और इस खास मौके पर हर कोई अपने लुक को सबसे अलग और आकर्षक बनाना चाहता है पारंपरिक परिधानों के साथ सही एक्सेसरीज का चुनाव ही पूरे लुक को निखारता है और जब बात नवरात्रि की हो तो हरी चूड़ियों का महत्व और भी बढ़ जाता है हरा रंग समृद्धि सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है यही कारण है कि इस त्योहार में हरी चूड़ियां पहनना शुभ भी माना जाता है और स्टाइलिश भी इस साल बाजार में हरी चूड़ियों के कई नए और यूनिक डिजाइन्स देखने को मिल रहे हैं जो आपके ट्रेडिशनल लुक को एक नया ट्विस्ट दे सकते हैं अब सिर्फ सादी कांच की चूड़ियों का जमाना नहीं रहा बल्कि फैंसी और डिजाइनर चूड़ियां ट्रेंड में हैं जो हर उम्र की महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं इन दिनों कश्मीरी घुंघरू डिजाइन वाली हरी चूड़ियां काफी लोकप्रिय हो रही हैं इन चूड़ियों के किनारों पर लगे छोटे छोटे घुंघरू हाथों की हर हलचल के साथ मधुर ध्वनि पैदा करते हैं जो आपके लुक में एक अलग ही आकर्षण जोड़ते हैं यह डिजाइन खासतौर पर सिल्क साड़ी और भारी लहंगे के साथ बेहद खूबसूरत लगता है और आपको एक रॉयल और एलिगेंट लुक देता है अगर आप कुछ मॉडर्न और स्टाइलिश ट्राई करना चाहती हैं तो पोल्का डॉट डिजाइन वाली हरी चूड़ियां आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं हरे रंग के बेस पर सफेद या गोल्डन डॉट्स वाली ये चूड़ियां सिंपल सूट या इंडो वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ बहुत ही ग्रेसफुल लगती हैं खासकर युवा लड़कियों के बीच यह स्टाइल तेजी से ट्रेंड कर रहा है क्योंकि यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है इसके अलावा स्टोन और थ्रेड वर्क वाली चूड़ियां भी इस सीजन में काफी पसंद की जा रही हैं कांच की हरी चूड़ियों के बीच में स्टोन जड़े कड़े या रेशमी धागों से सजी चूड़ियां आपके हाथों की खूबसूरती को और निखार देती हैं आप इन्हें अपने आउटफिट के अनुसार मिक्स एंड मैच करके भी पहन सकती हैं जिससे आपका लुक और ज्यादा आकर्षक बनता है हरी चूड़ियों को स्टाइल करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका चयन अगर आप सिर्फ हरी चूड़ियां पहनने के बजाय उनके बीच में सुनहरे कड़े या डिजाइनर कंगन जोड़ती हैं तो आपका लुक और ज्यादा फेस्टिव और रिच दिखाई देता है अगर आपका आउटफिट प्लेन है तो आप घुंघरू वाली भारी चूड़ियां पहन सकती हैं वहीं अगर आपने पहले से ही हैवी वर्क वाला लहंगा या साड़ी पहनी है तो पतली कांच की चूड़ियां या पोल्का डॉट डिजाइन ज्यादा बेहतर लगेगा इसके साथ ही हरी चूड़ियों के साथ ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी या गोल्डन झुमके पहनने से आपका पूरा लुक संतुलित और स्टाइलिश नजर आता है सही कॉम्बिनेशन और थोड़ी सी क्रिएटिविटी के साथ आप इस नवरात्रि अपने पारंपरिक अंदाज में भी एक नया और आकर्षक ट्विस्ट जोड़ सकती हैं और हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच सकती हैं

घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

नई दिल्ली:भारतीय रसोई में Ghee का महत्व बेहद खास होता है, चाहे पूजा पाठ हो या रोजमर्रा का खाना, घी हर घर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आजकल बाजार में मिलावटी घी की बढ़ती समस्या लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन गई है, ऐसे में जरूरी है कि हम असली और नकली घी की पहचान करना सीखें ताकि अपने परिवार को सुरक्षित और शुद्ध भोजन दे सकें घी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका हथेली टेस्ट माना जाता है, इसके लिए थोड़ा सा घी हथेली पर रखें, असली घी शरीर की गर्माहट से धीरे धीरे पिघलता है, जबकि नकली घी या तो तुरंत पिघल जाता है या फिर बिल्कुल नहीं पिघलता, यह तरीका तुरंत परिणाम देने वाला और बेहद सरल है खुशबू के जरिए भी घी की पहचान की जा सकती है, शुद्ध घी में हल्की मीठी और दूध जैसी सुगंध होती है, जबकि मिलावटी घी में केमिकल जैसी गंध आ सकती है या फिर उसमें कोई खास खुशबू नहीं होती, अगर घी को हल्का गर्म किया जाए तो असली घी की खुशबू और ज्यादा उभरकर सामने आती है स्वाद भी घी की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेत देता है, असली घी का स्वाद हल्का मीठा और मुंह में घुल जाने वाला होता है, वहीं नकली घी जीभ पर चिपचिपा लग सकता है या उसका स्वाद अजीब सा महसूस हो सकता है, ऐसे संकेत मिलते ही सतर्क हो जाना चाहिए फ्रिज टेस्ट भी काफी प्रभावी माना जाता है, इसके लिए घी को एक कटोरी में डालकर कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें, शुद्ध घी जमने पर एक समान और दानेदार टेक्सचर दिखाता है, जबकि मिलावटी घी अलग अलग परतों में जम सकता है या असमान दिखाई देता है पानी में घी डालकर भी उसकी शुद्धता जांची जा सकती है, एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी डालें, असली घी नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली घी पानी में घुल सकता है या ऊपर तैरने लगता है, यह तरीका भी घर पर आसानी से किया जा सकता है एक और तरीका है घी को जलाकर देखना, एक चम्मच में थोड़ा घी लेकर जलाएं, शुद्ध घी साफ लौ के साथ जलता है और उसमें अच्छी खुशबू आती है, जबकि नकली घी जलने पर धुआं देता है या बदबू पैदा करता है घी खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है, बहुत सस्ता घी खरीदने से बचें, खुले में बिकने वाले घी पर भरोसा न करें और हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या डेयरी से ही खरीदारी करें, इसके अलावा घी का रंग बहुत ज्यादा सफेद या अत्यधिक पीला होना भी संदेह का संकेत हो सकता है  थोड़ी सी जागरूकता और ये आसान घरेलू तरीके अपनाकर आप मिलावटी घी से बच सकते हैं और अपने परिवार को शुद्ध, स्वादिष्ट और सेहतमंद भोजन दे सकते हैं

Travel Tips: दोस्तों के साथ घूमने का बनाएं परफेक्ट प्लान, बैग पैक करें और निकल पड़ें

नई दिल्ली।मार्च और अप्रैल का महीना घूमने-फिरने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। अगर आपके मन में भी इस समय ऐसा ही कुछ चल रहा हैं तो ये खबर आपके काफी काम की है। मार्च का समय ऐसा है इस समय न तो ज्यादा ठंड होती है और न ही तेज गर्मी, जिससे ट्रैवल का मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये समय बिल्कुल परफेक्ट है। इन जगहों पर जा सकते हैंआप अकेले को या दोस्तों के साथ आपके लिए ये ट्रिप और ये जगह काफी खास होने वाली है। ट्रिप का असली मजा तभी आता हैअपने दोस्त साथ हो और सुहाना मौसम और अच्छा नजारा।आप पहाड़ों की ठंडी वादियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो मनाली और ऋषिकेश जैसे डेस्टिनेशन बेस्ट हैं। यहां आप एडवेंचर एक्टिविटीज जैसे रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और कैंपिंग का भी अच्छे से आनंद उठा सकते है। मुन्नार और ऊटी भी अच्छा ऑप्शन हैअगर आपको हरियाली और शांति पसंद है, तो मुन्नार और ऊटी जैसी जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं। यहां की खूबसूरत वादियां, चाय के बागान और ठंडी हवाएं आपके ट्रिप को यादगार बना देंगी।जहां आपको काफी अच्छे नजारे देखने को मिलेंगे। आप यहां कई यादें अपने कैमरे में भी कैद कर सकते है। बीच और पार्टीअगर आपको बीच और पार्टी का मजा लेना हो तो गोवा काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां दोस्तों के साथ बीच पर मस्ती, वाटर स्पोर्ट्स और नाइटलाइफ का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।गोवा में सबसे पहले आपको बागा बीच और कैलंगुट बीच जरूर जाना चाहिए। ये बीच अपनी साफ रेत, वाटर स्पोर्ट्स और मस्ती भरे माहौल के लिए मशहूर हैं।इसके अलावा, दूधसागर झरना भी देखने लायक है, जहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपका मन मोह लेगी। इन जगहों पर जा कर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ काफी अच्छा समय बिता सकते हैं। तो देर किस बात की अभी टिकट बुक करें और अपने पसंद की जगहों पर जाएं।

मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद

नई दिल्ली:नवरात्रि के फेस्टिव सीजन में हर महिला अपने लुक को खास बनाना चाहती है और मेहंदी इस खूबसूरती को बढ़ाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास घंटों बैठकर मेहंदी लगवाने का समय नहीं होता, ऐसे में फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स एक बेहतरीन और ट्रेंडी विकल्प बनकर उभरे हैं आजकल वर्किंग वुमन और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के बीच मिनिमल मेहंदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें पूरे हाथ की बजाय सिर्फ उंगलियों के पोरों को सजाया जाता है, यह स्टाइल न केवल समय की बचत करता है बल्कि हाथों को एक एलिगेंट और मॉडर्न लुक भी देता है फिंगर टिप मेहंदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने में बहुत कम समय लगता है, जहां पारंपरिक मेहंदी में कई घंटे लग जाते हैं वहीं ये डिजाइन्स महज 10 से 15 मिनट में तैयार हो जाते हैं, यही वजह है कि यह बिगिनर्स के लिए भी एक आसान और शानदार विकल्प बन चुका है इन डिजाइन्स में रिंग स्टाइल काफी लोकप्रिय है, जिसमें उंगलियों के बीच मेहंदी इस तरह लगाई जाती है कि वह अंगूठी जैसा लुक देती है, इससे बिना किसी ज्वेलरी के भी हाथ बेहद आकर्षक और सजे हुए नजर आते हैं, यह स्टाइल सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है इसके अलावा मिक्स एंड मैच पैटर्न भी युवाओं के बीच पसंद किया जा रहा है, जिसमें हर उंगली पर अलग-अलग डिजाइन बनाया जाता है, यह न केवल यूनिक लुक देता है बल्कि आपके हाथों को एक स्टाइलिश और फैशनेबल टच भी देता है अगर आप थोड़ा हैवी लुक चाहती हैं तो एंकलेट स्टाइल फिंगर मेहंदी ट्राई कर सकती हैं, इसमें उंगलियों के साथ कलाई तक डिजाइन बनाया जाता है जो पारंपरिक और मॉडर्न दोनों का बेहतरीन मेल होता है, यह स्टाइल आपके हाथों को रॉयल लुक देता है सिंपल और सोबर लुक पसंद करने वालों के लिए छोटे-छोटे फ्लोरल मोटिफ्स और बारीक बूटी वर्क वाले डिजाइन्स भी एक शानदार विकल्प हैं, ये देखने में बेहद डेलिकेट और आकर्षक लगते हैं और हर तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं नवरात्रि के दौरान जब महिलाएं व्रत और पूजा में व्यस्त रहती हैं, तब फिंगर टिप मेहंदी और भी ज्यादा सुविधाजनक साबित होती है, क्योंकि इसमें हथेलियां खाली रहती हैं और रोजमर्रा के काम करने में कोई परेशानी नहीं होतीफिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स उन लोगों के लिए परफेक्ट हैं जो कम समय में स्टाइलिश और एलिगेंट लुक पाना चाहते हैं, यह ट्रेंड न केवल फैशन को आसान बना रहा है बल्कि हर महिला को अपने तरीके से खूबसूरत दिखने का मौका भी दे रहा है