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सतुआ संक्रांति पर श्रद्धा का उत्सव, जानिए इसका धार्मिक और स्वास्थ्य महत्व

नई दिल्ली। आज पूरे देश में सतुआ संक्रांति (सतुआन) का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन गर्मी की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और सनातन परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन सत्तू, जल से भरा घड़ा, पंखा और मौसमी फलों का दान करने का विधान है। मान्यता है कि इससे देवता प्रसन्न होते हैं और पितरों को तृप्ति मिलती है, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सूर्य के राशि परिवर्तन से जुड़ा है पर्वयह पर्व मेष संक्रांति के रूप में भी जाना जाता है, जब सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान और सूर्य की उपासना का विशेष महत्व होता है। इसी के साथ खरमास का समापन भी हो जाता है और विवाह, उपनयन जैसे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। सत्तू और घड़े के दान का धार्मिक महत्वधार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सत्तू का दान करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं, जबकि जल से भरा घड़ा दान करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है। बेल, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा और कच्चा आम जैसे ठंडक देने वाले फल भी दान किए जाते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने राजा बलि को पराजित करने के बाद सबसे पहले सत्तू का सेवन किया था, तभी से इस दिन सत्तू का विशेष महत्व माना जाता है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, वे इस दिन जल से भरा घड़ा दान करें तो उन्हें लाभ मिलता है। आस्था के साथ सेहत का भी ख्यालसतुआ संक्रांति सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। गर्मी के मौसम में सत्तू शरीर को ठंडक देने का काम करता है। सत्तू का शरबत पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और लू से बचाव होता है। यह फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स से भरपूर होता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और पेट की गर्मी कम होती है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, घर से निकलने से पहले सत्तू का सेवन करने से हीट स्ट्रोक का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। परंपरा और विज्ञान का अनोखा मेलसतुआ संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति में परंपरा और विज्ञान का सुंदर उदाहरण है। जहां एक ओर दान-पुण्य से आत्मिक संतोष मिलता है, वहीं सत्तू जैसे पौष्टिक आहार से शरीर को भी राहत मिलती है। यही कारण है कि यह पर्व आज भी लोगों की आस्था और जीवनशैली का अहम हिस्सा बना हुआ है।

चलते-उठते घुटनों से आती आवाज? जानिए कब बन सकती है बड़ी समस्या

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और लगातार बैठकर काम करने की आदत ने घुटनों से जुड़ी समस्याओं को आम बना दिया है। कई लोग घुटनों में दर्द और चलने-उठने के दौरान आने वाली “कट-कट” की आवाज को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या कई बार गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकती है, खासकर Osteoarthritis जैसी स्थितियों का। क्यों आती है घुटनों से आवाज?घुटनों से आवाज आना कई कारणों से हो सकता है। इनमें सबसे आम है जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज का घिसना। इसके अलावा शरीर में Vitamin D deficiency और कैल्शियम की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, ज्यादा वजन, बार-बार सीढ़ियां चढ़ना या लंबे समय तक एक ही पोजिशन में बैठे रहना भी इसकी वजह बनते हैं। कई मामलों में गैस या जोड़ों में हवा भरने से भी “कट-कट” की आवाज सुनाई देती है। ध्यान रखें: अगर आवाज के साथ दर्द, सूजन या जकड़न भी हो, तो यह सामान्य नहीं है और तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। कब हो सकता है खतरे का संकेत?जब घुटनों की आवाज के साथ दर्द बढ़ने लगे, चलने में परेशानी हो या सूजन दिखे, तो यह शुरुआती आर्थराइटिस या जोड़ों की अन्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय रहते इलाज न किया जाए तो समस्या गंभीर हो सकती है और आगे चलकर चलने-फिरने में भी दिक्कत आ सकती है। जीवनशैली में बदलाव से मिलेगा आरामघुटनों को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि बेहद जरूरी है। सुबह-शाम 15–20 मिनट की सैर करें। इससे जोड़ों की मूवमेंट बेहतर होती है और दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा:लंबे समय तक एक ही जगह बैठने से बचेंवजन को नियंत्रित रखेंसीढ़ियों का सीमित उपयोग करें आयुर्वेदिक उपाय भी कारगरआयुर्वेद में घुटनों के दर्द और आवाज को कम करने के लिए कुछ औषधियों का उल्लेख मिलता है, जैसे Ashwagandha, Yograj Guggul और Lakshadi Guggul। हालांकि इनका सेवन डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए। रोजाना रात में तिल के तेल से घुटनों की मालिश करने से सूजन और दर्द में राहत मिलती है और धीरे-धीरे “कट-कट” की आवाज भी कम हो सकती है। धूप और खानपान का रखें ध्यानशरीर में Vitamin D deficiency की कमी भी घुटनों की समस्या बढ़ा सकती है। इसलिए रोजाना कम से कम 10–15 मिनट धूप जरूर लें। साथ ही, सुबह खाली पेट मेथी का पानी पीना भी फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर में वात संतुलित रखने में मदद करता है और जोड़ों के दर्द को कम करता है।

गर्मी में गन्ने का रस है अमृत समान, शरीर को रखे ठंडा और मजबूत

नई दिल्ली। मौसम में बदलाव हो रहा है और गर्मी अब धीरे-धीरे बढ़ रही है गर्मी जैसे ही बढ़ने लगती है। कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होने लगती है। आपकी इम्यूनिटी भी कमजोर पड़ जाती है सही खान-पान गर्मी में करना बहुत जरूरी होता है वरना कई प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। गर्मी में गाने का रस पीना बहुत फायदेमंद हो सकता है। यह आपको सेहतमंद रखने में मदद करता है चलिए जानते हैं कैसे। गन्ने के रस के फायदेगर्मियों के मौसम में जब तेज धूप और गर्मी से शरीर थकान महसूस करता है, तब गन्ने का रस सबसे अच्छा प्राकृतिक पेय साबित होता है।औषधीय गुणों से भरपूर ये ठंडा रस शरीर को न केवल तुरंत एनर्जी देता है, बल्कि सेहत का भी ध्यान रखता है।गन्ने का रस शरीर को तरोताजा करने के साथ-साथ आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह लिवर की कार्यक्षमता बढ़ाता है, पाचन तंत्र को सुधारता है और पीलिया जैसी बीमारी में राहत पहुंचाता है। कई बीमारियों के लिए है रामबाणगन्ने के रस से सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि गुड़, शीरा जैसे कई उपयोगी उत्पाद भी बनते हैं।आयुर्वेद में गन्ने के रस को मूत्रवर्धक, शीतलक, रेचक और टॉनिक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।यह पेशाब में जलन, पेशाब न आने की समस्या और रक्तस्राव में भी राहत देता है। यूनानी चिकित्सा में इसे पीलिया के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद माना जाता है। इस लिए आपको गर्मी में गन्ने का रस जरूर पीना चाहिए।गर्मियों में गन्ने का रस पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और गर्मी से होने वाली थकान दूर होती है। इसमें मौजूद मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स तनाव कम करने में मददगार है

डल स्किन से छुटकारा पाकर पाएं नेचुरल ग्लो, सेब, चुकंदर और गाजर का जूस बना सकता है त्वचा को अंदर से हेल्दी और चमकदार

नई दिल्ली:गर्मी के मौसम में धूल, प्रदूषण और तेज धूप का असर सबसे पहले हमारी त्वचा पर दिखाई देता है। धीरे-धीरे चेहरा अपनी प्राकृतिक चमक खोने लगता है और स्किन डल व थकी हुई नजर आने लगती है। ऐसे में विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाहरी स्किन केयर ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर को अंदर से पोषण देना भी जरूरी होता है। इसी कारण सेब, चुकंदर और गाजर से बना प्राकृतिक जूस त्वचा के लिए एक सरल और प्रभावी उपाय माना जा रहा है, जो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स देकर स्किन को स्वस्थ बनाने में मदद कर सकता है। सेब इस जूस का अहम हिस्सा माना जाता है, जिसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में कोलेजन के निर्माण को सपोर्ट करते हैं, जिससे त्वचा की कसावट बनी रहती है और उम्र बढ़ने के लक्षण धीरे-धीरे कम दिखाई देते हैं। सेब शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करता है, जिससे त्वचा में प्राकृतिक नमी और चमक बनी रहती है। चुकंदर को खून को शुद्ध करने वाला एक प्राकृतिक स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे त्वचा तक ऑक्सीजन और पोषण अधिक मात्रा में पहुंचता है। जब त्वचा को पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह अधिक साफ, चमकदार और स्वस्थ नजर आती है। चुकंदर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में भी सहायक माना जाता है, जिसका सीधा असर त्वचा की गुणवत्ता पर दिखाई देता है। गाजर इस जूस का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसमें बीटा कैरोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यह शरीर में विटामिन ए में बदलकर त्वचा की कोशिकाओं की मरम्मत और नए सेल्स के निर्माण में मदद करता है। यह त्वचा को सूखने से बचाकर उसे मुलायम और हेल्दी बनाए रखने में सहायक होता है, जिससे चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इन तीनों सामग्रियों का मिश्रण शरीर को अंदर से पोषण देने के साथ-साथ डिटॉक्स करने में भी मदद कर सकता है। नियमित रूप से इस प्राकृतिक जूस का सेवन त्वचा की डलनेस को कम करने, उसे साफ रखने और धीरे-धीरे प्राकृतिक ग्लो बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

मौसंबी के छिलके हैं कचरा नहीं खजाना, जानिए 4 आसान और असरदार उपयोग..

नई दिल्ली ।मौसंबी का जूस पीकर अक्सर लोग इसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वास्तव में ये छिलके कई तरह से बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं। मौसंबी एक पौष्टिक फल है, और इसके छिलकों में भी प्राकृतिक तेल, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा, घर की सफाई और ताजगी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। सही तरीके से इनका उपयोग करने पर ये छिलके रोजमर्रा की कई समस्याओं का आसान और सस्ता समाधान बन सकते हैं। मौसंबी के छिलकों का सबसे लोकप्रिय उपयोग त्वचा की देखभाल में किया जाता है। इनमें मौजूद प्राकृतिक गुण त्वचा को साफ करने और उसे निखार देने में सहायक हो सकते हैं। छिलकों को धूप में सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जा सकता है, जिसे गुलाब जल या दही के साथ मिलाकर फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह त्वचा को ताजगी देने के साथ-साथ दाग-धब्बों को हल्का करने में भी मदद कर सकता है। नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। इसके अलावा मौसंबी के छिलके घर की सफाई में भी काफी उपयोगी हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक ऑयल किचन की सतह, सिंक और अन्य जगहों पर जमी चिकनाई को हटाने में मदद करते हैं। छिलकों को रगड़कर इस्तेमाल करने से सतह साफ होने के साथ-साथ हल्की खुशबू भी फैलती है, जिससे घर अधिक स्वच्छ और ताजगी भरा महसूस होता है। यह एक प्राकृतिक क्लीनर के रूप में काम कर सकता है। मौसंबी के छिलकों का उपयोग घर में प्राकृतिक फ्रेशनर के रूप में भी किया जा सकता है। इन्हें सुखाकर अलमारी या कमरे के कोनों में रखने से नमी और बदबू को कम करने में मदद मिलती है। इससे वातावरण में ताजगी बनी रहती है और रासायनिक फ्रेशनर की जरूरत कम हो जाती है। इसके अलावा इन छिलकों का एक और उपयोग कीट नियंत्रण में भी देखा जाता है। इनकी तेज प्राकृतिक सुगंध कुछ हद तक मच्छरों और छोटे कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है, जिससे यह एक सरल और घरेलू उपाय बन जाता है। इस तरह मौसंबी के छिलके केवल कचरा नहीं बल्कि एक उपयोगी प्राकृतिक संसाधन हैं, जिन्हें अपनाकर हम न सिर्फ पैसे बचा सकते हैं बल्कि अपने घर को भी अधिक स्वच्छ, सुगंधित और स्वस्थ बना सकते हैं।

मानसिक शांति और शरीर की आंतरिक ठंडक बनाए रखने में चंदन सहायक माना जाता है

नई दिल्ली। भीषण गर्मी के मौसम में जब तापमान लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कई प्राकृतिक उपायों को शरीर के लिए बेहद लाभकारी माना गया है। इन्हीं में से एक प्रमुख और प्राचीन औषधि है चंदन, जिसे अपनी शीतल प्रकृति और औषधीय गुणों के कारण विशेष स्थान प्राप्त है। चंदन एक सुगंधित लकड़ी है, जिसका वानस्पतिक नाम सैंटलम एल्बम लिन बताया जाता है। इसका सबसे उपयोगी भाग इसका हार्टवुड होता है, जिसे औषधीय प्रयोगों में अधिक प्रभावी माना जाता है। पारंपरिक आयुर्वेद में चंदन को शरीर को ठंडक प्रदान करने, मानसिक शांति देने और कई शारीरिक विकारों को संतुलित करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में जाना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार चंदन शरीर की आंतरिक गर्मी को कम करने में सहायक होता है, जिससे गर्मी के मौसम में होने वाली जलन, थकान और कमजोरी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। इसकी शीतल प्रकृति शरीर और मन दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे व्यक्ति को ठंडक और सुकून का अनुभव होता है। आयुर्वेदिक दृष्टि से चंदन को रक्त से जुड़ी समस्याओं में भी उपयोगी माना गया है। माना जाता है कि यह शरीर में रक्त को शुद्ध करने और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा यह ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है, जिससे डायबिटीज से पीड़ित लोगों को राहत मिल सकती है। चंदन का उपयोग मूत्र संबंधी समस्याओं में भी लाभकारी बताया गया है। विशेष रूप से पेशाब में जलन और बार-बार पेशाब आने जैसी स्थितियों में यह राहत प्रदान कर सकता है। इसकी शीतलता शरीर के अंदरूनी ताप को नियंत्रित करती है, जिससे मूत्र मार्ग से जुड़ी समस्याओं में सुधार देखने को मिलता है। त्वचा संबंधी परेशानियों में भी चंदन का प्रयोग पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। इसके लेप से त्वचा पर होने वाले मुंहासे, जलन और सूजन जैसी समस्याओं में आराम मिलने की बात कही जाती है। यह त्वचा को ठंडक प्रदान कर उसे शांत करने में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त चंदन मानसिक तनाव को कम करने और हृदय को शांति प्रदान करने में भी उपयोगी माना जाता है। इसकी सुगंध और ठंडक देने वाले गुण शरीर को आंतरिक रूप से संतुलित रखते हैं, जिससे मानसिक स्थिरता बनी रहती है।

ब्रेकफास्ट में आप भी कर रहे हैं ये आम गलतियां? अभी सुधारें वरना सेहत हो सकती है खराब

नई दिल्ली। सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पूरे दिन की एक्टिविटी, फोकस और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का संतुलित नाश्ता शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और फाइबर देता है, जिससे थकान कम होती है और एनर्जी बनी रहती है। गलत नाश्ता बन सकता है सेहत के लिए खतराविशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग सुबह जल्दबाजी में गलत खानपान कर लेते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है। अधिक चीनी, नमक और फैट वाला नाश्ता धीरे-धीरे कई बीमारियों को जन्म दे सकता है। मुख्य गलतियां- चाय में ज्यादा चीनी या सिर्फ चाय-कॉफी लेकर नाश्ता छोड़ देनाबिस्किट, केक और मिठाई का सेवनसमोसा, कचौड़ी, पकौड़े जैसे तले-भुने खाद्य पदार्थचिप्स, नमकीन और अचार जैसे ज्यादा नमक वाले स्नैक्सये आदतें आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। क्या होना चाहिए सही नाश्ता?नेशनल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का नाश्ता हल्का लेकिन पौष्टिक होना चाहिए, जिसमें संतुलित पोषण हो। अच्छे विकल्पदलिया, ओट्स और सूजी का हल्का हलवाफल जैसे सेब, केला, पपीता, संतरा और मौसमी फलअंकुरित अनाज (मूंग, चना, मेथी स्प्राउट्स)दही या फ्रूट योगर्टपोहा, कम तेल वाली सब्जी के साथ रोटीड्राई फ्रूट्स (सीमित मात्रा में) विशेषज्ञों की सलाहडॉक्टर्स सलाह देते हैं कि सुबह जल्दी उठकर घर का बना ताजा नाश्ता करना सबसे बेहतर है। पैकेट फूड और जंक फूड से जितना बचा जाए उतना अच्छा है। सही नाश्ता न केवल शरीर को फिट रखता है, बल्कि मानसिक सक्रियता भी बढ़ाता है।

केवल तुलसी ही नहीं, उसकी मंजरी भी है अमृत समान, जानिए इसके जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ

नई दिल्ली। घर के आंगन में आसानी से मिलने वाली तुलसी सिर्फ धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक औषधि के रूप में भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अक्सर लोग इसकी पत्तियों का उपयोग करते हैं, लेकिन तुलसी की मंजरी (फूलों का छोटा गुच्छा) भी उतनी ही शक्तिशाली और लाभकारी होती है। आयुर्वेद के अनुसार, इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई तरह के संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। इम्युनिटी बढ़ाने में बेहद असरदारतुलसी की मंजरी का नियमित सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल इंफेक्शन से बचाव में मदद करती है। बदलते मौसम में होने वाली बीमारियों से शरीर को प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। सर्दी-खांसी और सांस की समस्याओं में राहततुलसी मंजरी गले की खराश, बलगम और पुरानी खांसी में बेहद लाभकारी मानी जाती है। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद हो सकती है, क्योंकि यह श्वसन तंत्र को साफ और मजबूत बनाती है। पाचन तंत्र को रखे मजबूतयह गैस, अपच, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत देती है। तुलसी मंजरी शरीर के मेटाबॉलिज्म को सुधारती है और पाचन क्रिया को संतुलित रखने में मदद करती है। तनाव कम करने और नींद सुधारने में सहायकतुलसी की खुशबू और इसके प्राकृतिक गुण मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। यह दिमाग को शांत करती है और अच्छी नींद लाने में भी सहायक मानी जाती है। त्वचा और डिटॉक्स के लिए फायदेमंदतुलसी मंजरी शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे खून साफ होता है। इसके सेवन से चेहरे पर निखार आता है और मुंहासे जैसी समस्याएं भी कम हो सकती हैं। तुलसी मंजरी का सेवन कैसे करें?इसे कई आसान तरीकों से उपयोग किया जा सकता है- सुबह खाली पेट 4–5 मंजरियां चबाएंतुलसी पत्तियों के साथ इसकी चाय बनाकर पिएंशहद के साथ इसका रस लेंअदरक, काली मिर्च और लौंग के साथ काढ़ा बनाकर पिएंनिष्कर्ष तुलसी की मंजरी एक सरल लेकिन अत्यंत प्रभावशाली घरेलू औषधि है, जो इम्युनिटी बढ़ाने से लेकर तनाव कम करने और पाचन सुधारने तक कई लाभ देती है। सही तरीके से इसका सेवन करने पर यह संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक वरदान साबित हो सकती है।

Travel Tips: गर्मी से राहत पाने के लिए परफेक्ट हैं उत्तराखंड के ये हिल स्टेशन, बना लें ट्रैवल प्लान

नई दिल्ली। उत्तराखंड में ऐसी कई जगह है जो काफी अच्छी हैं वहां पर घूमने से आपका मन काफी अच्छा हो जाता है। आपने वहां कई जगह देखी होंगी, लेकिन जन्नत जैसी जगह कैसी दिखती है, उसका जवाब आपको अभी तक नहीं मिला होगा। हम बात नैनीताल, मसूरी या ऋषिकेश की नहीं कर रहे, हम बात कर रहे हैं देघाट की, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे। देघाट उत्तराखंड की सबसे खूबसूरत जगह है, जो दिल्ली से 390 किमी दूर पड़ती है, यहां आपको नैनीताल और मसूरी जैसी भीड़ नहीं मिलेगी। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी जानते हैं। देघाट में मिलेगा सुकूनबता दें, ये अद्भुत जगह अल्मोड़ा जिले में मौजूद है। ये अल्मोड़ा मुख्य शहर से कुछ ही किमी दूर स्थित है। इसके अलावा, ये नैनीताल से करीबन 132 किमी और रानीखेत से महज 87 किमी दूर पड़ती है।देघाट बहुत ही कम लोग जानते होंगे। हिमालय की गोद में मौजूद देघाट की खूबसूरती देखने के बाद आप यही कहेंगे आप यहां पहले क्यों नहीं गए। घूमने के लिए परफेक्ट देघाटअगर आप कुछ ऐसी जगह एक्सप्लोरर करना चाहते हैं तो काफी खास हो और जहां भीड़ भी काम हो तो देघाट अच्छा ऑप्शन है।देघाट भले ही एक छोटा गांव है, लेकिन खूबसूरती के मामले में द्वाराहाट, रानीखेत जैसी जगहों को टक्कर दे देती है।बादलों से ढके ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घास के मैदान, घने जंगल और झील-झरने देघाट की खूबसूरत में चार चांद लगा देते हैं। यहां की हरियाली भी पर्यटकों को काफी पसंद आती है। देघाट को प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है। कैसे पहुंचे देघाटअल्मोड़ा से देघाट पहुंचना काफी आसान है, इसके लिए आप अल्मोड़ा चौक से टैक्सी या कैब लेकर देघाट जा सकते हैं। इसके अलावा, अल्मोड़ा चौक से स्कूटी रेंट पर लेकर भी घूम सकते हैं। आप नैनीताल से भी टैक्सी या कैब लेकर देघाट पहुंच सकते हैं।

Glowing Skin Tips : यात्रा और ऑफिस रूटीन में भी पाएं ग्लोइंग स्किन, बस अपनाएं ये आसान स्किन केयर हैक्स

   Glowing Skin Tips : नई दिल्ली। आज के समय में ऑफिस जाना ट्रैवल करना और उसके साथ-साथ अपनी स्क्रीन का ध्यान रखना काफी मुश्किल हो जाता है। अगर आप ट्रैवलिंग के साथ-साथ अपने स्क्रीन का ध्यान रखना चाहती हैं तब यह खबर आपके लिए काफी जरूरी है। जब भी हम कहीं बाहर जाते हैं, तो सोचते हैं कि अपने बैग में ऐसा क्या-क्या रखें। जिससे कि हमारा चेहरा फ्रेश और सुंदर बना रहा। तो चलिए आपको इससे जुड़ी खास जानकारी देते हैं। फेस क्लींजर या फेस वॉश सबसे जरूरी होता है कि अगर आप बाहर जा रहे हैं तब चेहरे की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए जरूरी होता है स्किन को साफ रखना, ऑयल, दिनभर की धूल-मिट्टी और मेकअप को हटाने के लिए अच्छा फेस क्लींजर या फेस वॉश होना जरूरी है। इसलिए आप अपने स्किन टाइप के हिसाब से क्लींजर और फेस वॉश को रख सकती हैं। जो आपकी काफी मदद करेगा। फेस मास्क ऑफिस जाते समय या फिर आप कहीं और ट्रेवल कर रही हैं धूप और धूल की वजह से फेस पर गंदगी की परत जम जाती है। इसके लिए फेस मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। जब आप बाहर जाएं, तो बैग में फेस मास्क जरूर रख लें। यह ब्यूटी प्रोडक्ट आपके बहुत काम आएगा। पंजाब विधानसभा में बेअदबी के खिलाफ ऐतिहासिक कानून पारित, सख्त सजा का प्रावधान लागू लिप बाम फेस के साथ-साथ होंठों की देखभाल करना जरूरी है। फटे और ड्राय होंठ बहुत दर्द होते हैं और हमारा लुक भी खराब कर देते हैं। इसलिए लिप बाम को अपने पास जरूर रखना चाहिए। ताकि ये आपके होंठों की देखभाल सही ढंग से करें। मॉइस्चराइजिंग क्रीम स्किन को कोमल और मुलायम बनाने के लिए आपके पास मॉइस्चराइजिंग क्रीम होना जरूरी है। इसलिए इसको बाहर जाते समय मॉइस्चराइजिंग क्रीम ले जाना न भूलें। के साथ ही अगर आप रात में ट्रेवल कर रही हैं तो कोई नाइट क्रीम या फिर सीरम जरूर अपने पास रखें।इससे आपका फेस अगली सुबह फ्रेश और ग्लोइंग रहेगा।