गर्मी में ये फूल है काफी खास, आपको सेहतमंद रखने में करता है मदद

नई दिल्ली। बड़े बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कि, पेड़-पौधे में ऐसी शक्ति होती है जिससे वह आपको सेहतमंद बनाए रखने में काफी मददगार हो सकते हैं। आयुर्वेद में कई शक्तिशाली और गुणकारी पौधों और फूलों के बारे में बताया गया है, जिनके उपयोग से कई बीमारियों का इलाज होता आया है। सदाबहार का फूल भी इसमें शामिल है। सदाबहार एक ऐसा पौधा है, जिसके पत्ते और फूल औषधीय गुणों से भरे हैं। सेहत के लिए कैसे जरूरी है ये फूलबिल्कुल साधारण और सुंदर सा दिखने वाला फूल सदाबहार काफी कारगर साबित हो सकता है आपकी सेहत के लिए। आयुर्वेद में इसे खून, त्वचा और चयापचय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण द्रव्य माना गया है। आयुर्वेद यह स्पष्ट करता है कि हर वनौषधि तभी औषधि बनती है, जब उसे सही द्रव्य, सही मात्रा और सही विधि के साथ अपनाया जाए।इसका स्वाद कड़वा होता है और इसे खून शुद्धि का सबसे आसान तरीका माना गया है। गर्मी में नाक से खून आने परगर्मियों में अक्सर नाक से खून आने की समस्या देखी जाती है। कई बार तो यह समस्या काफी बढ़ जाती है दिन में कई बार ऐसी घटना हो जाती है। गर्मी में अधिक ताप की वजह से नाक से खून बहना शुरू हो जाता है। ऐसे में सदाबहार के फूल और अनार के फूलों का रस नाक में डालने से आराम मिलेगा।इन दोनों फूलों के रस की तासीर ठंडी होती है और रक्त को बहने से रोकती है। इसके साथ ही ऐसा करने से खून नहीं आता है और वह समस्या ठीक हो जाती है। डायबिटीज नियंत्रण रखने के लिएअगर आपको डायबिटीज है तब यह पौधा आपकी काफी मदद करता है इसे ठीक करने में या फिर नियंत्रण में रखने में आप सुबह दो या तीन पत्ती इसकी जरुर खा सकते हैं।इसकी पत्तियों में मौजूद ‘अल्कलॉइड्स’ नामक तत्व शरीर में इंसुलिन का उत्पादन बढ़ाकर ब्लड शुगर को कम करने में मददगार साबित होते हैं। घाव भरने में मददअगर आपको चोट लग गई है वह ठीक नहीं हो रहा है तब यह पौधा उसमें भी आपकी मदद कर सकता है। इसके पत्ते का चूर्ण और हल्दी की सहायता से घाव को जल्दी भरा जा सकता है।घाव को जल्दी ठीक करने, सूजन को कम करने और घाव की लालिमा को कम करने के लिए सहाबहार के पत्तों को पीसकर और हल्दी मिलाकर सीधा घाव पर लगाया जा सकता है। लेकिन अगर आपको ज्यादा चोट लगी है तब आपको जल्दी हॉस्पिटल जाना चाहिए क्योंकि यह बस छोटी-मोटे घाव के लिए ही काम कर सकता है।
Weekend Getaways: कम पैसों में घूमने के लिए बेस्ट डेस्टिनेशन, छुट्टी को बनाएं खास

नई दिल्ली।रविवार का दिन अक्सर आराम और घर पर बिताने के लिए माना जाता है, लेकिन अगर आप इस दिन को थोड़ा खास बनाना चाहते हैं तो पास की किसी खूबसूरत जगह पर एक छोटी ट्रिप का प्लान कर सकते हैं। मौसम में हल्की ठंडक के बीच एक दिन की यात्रा न सिर्फ आपको तरोताजा करती है बल्कि तनाव और रोजमर्रा की थकान को भी दूर करती है। आजकल एक दिन की ट्रिप के लिए दूर जाने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि हर शहर के आसपास ऐसी कई जगहें मौजूद होती हैं जहां कम पैसे में भी बेहतरीन अनुभव लिया जा सकता है। 1. नजदीकी हिल स्टेशन बनाएं पहला विकल्पअगर आपके शहर से 3 से 5 घंटे की दूरी पर कोई हिल स्टेशन है, तो यह रविवार बिताने का बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आप शनिवार रात यात्रा शुरू करके रविवार सुबह वहां पहुंच सकते हैं और पूरे दिन प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकते हैं। पहाड़ों की ठंडी हवा, हरियाली और शांत वातावरण मन को सुकून देता है। शाम तक वापस लौटकर सोमवार की दिनचर्या भी आसानी से संभाली जा सकती है। 2. ऐतिहासिक स्थलों की सैर करेंभारत के हर राज्य में कई ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं, जो एक दिन की ट्रिप के लिए परफेक्ट हैं। चाहे वह किले हों, स्मारक हों या पुराने मंदिर—इन जगहों पर जाकर इतिहास को करीब से महसूस किया जा सकता है। दिल्ली का कुतुब मीनार, आगरा का ताजमहल या जयपुर का आमेर किला जैसे स्थल घूमने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। ये जगहें न सिर्फ ज्ञान बढ़ाती हैं बल्कि शानदार फोटोग्राफी का मौका भी देती हैं। 3. प्रकृति के बीच बिताएं सुकून भरा दिनअगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं तो अपने शहर के आसपास मौजूद झीलों, नेचर पार्क या वॉटरफॉल्स का रुख कर सकते हैं। परिवार या दोस्तों के साथ पिकनिक का प्लान बनाकर पूरा दिन प्राकृतिक वातावरण में बिताया जा सकता है। हरे-भरे पेड़, पानी की कलकल और ताजी हवा मन को शांत कर देती है और नई ऊर्जा का एहसास कराती है। 4. एडवेंचर स्पॉट्स पर लें रोमांच का मजाअगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं तो ट्रेकिंग, बोटिंग या साइक्लिंग जैसी गतिविधियों वाले स्थान चुन सकते हैं। कई ऐसे डेस्टिनेशन हैं जहां एक ही दिन में एडवेंचर एक्टिविटीज कराकर शाम तक वापसी संभव होती है। हल्की ठंड में एडवेंचर करना अनुभव को और भी यादगार बना देता है। एक दिन की ट्रिप के फायदे कम खर्च में घूमने का मौकामानसिक तनाव से राहतपरिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइमनई जगहों को एक्सप्लोर करने का अवसरकाम के लिए नई ऊर्जा मिलती है अगर आप हर रविवार घर पर बोर हो जाते हैं, तो पास की जगहों पर एक दिन की यात्रा आपके लिए बेहतरीन विकल्प है। चाहे हिल स्टेशन हो, ऐतिहासिक स्थल हो या नेचर स्पॉट—थोड़ी सी प्लानिंग से आप अपने वीकेंड को यादगार बना सकते हैं और नई ऊर्जा के साथ हफ्ते की शुरुआत कर सकते हैं।
पसीने की बदबू से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं आयुर्वेदिक उपचार, मिलेगा लंबे समय तक आराम

नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में शरीर से ज्यादा पसीना निकलना एक आम समस्या है, लेकिन कई बार यह पसीना बदबूदार हो जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इसे शरीर में वात और कफ दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब शरीर में ये दोष बिगड़ते हैं तो पसीना अधिक निकलता है और त्वचा पर बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जिससे दुर्गंध उत्पन्न होती है। इसके अलावा गलत खान-पान, कम पानी पीना और सिंथेटिक कपड़ों का उपयोग भी इस समस्या को बढ़ा देता है। तला-भुना और मसालेदार भोजन शरीर में गर्मी बढ़ाता है, जिससे पसीना और बदबू दोनों बढ़ जाते हैं। आयुर्वेदिक उपाय जो अंदर से करेंगे शरीर को साफआयुर्वेद में इस समस्या का समाधान केवल बाहरी नहीं, बल्कि अंदरूनी संतुलन में बताया गया है। 1. सुबह गुनगुना पानी और सौंफ का सेवनदिन की शुरुआत गुनगुने पानी से करना और सौंफ का पानी पीना शरीर को ठंडक देता है। यह पाचन सुधारता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। 2. गुलाब जल का सेवनदिन में सीमित मात्रा में गुलाब जल का सेवन शरीर और मन दोनों को ठंडक देता है। यह तनाव कम करने और शरीर की दुर्गंध को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। 3. नारियल पानी का सेवनगर्मियों में नियमित रूप से नारियल पानी पीना शरीर को हाइड्रेट रखता है और शरीर की गर्मी को कम करता है। यह प्राकृतिक डिटॉक्स का काम भी करता है। 4. भुना जीरा छाछदोपहर के समय भुना जीरा मिलाकर छाछ पीना पाचन को मजबूत करता है और शरीर को ठंडा रखता है। यह लू से बचाव में भी मदद करता है। बाहरी शरीर की देखभाल भी जरूरी- 1. नीम से स्नानआयुर्वेद में नीम को प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल माना गया है। नीम के पत्तों से स्नान करने पर त्वचा की गंदगी और बैक्टीरिया कम होते हैं, जिससे दुर्गंध नियंत्रित होती है। 2. फिटकरी वाला पानीअगर नीम उपलब्ध न हो तो नहाने के पानी में फिटकरी मिलाना भी लाभकारी माना जाता है। यह त्वचा को साफ रखता है और बैक्टीरिया को खत्म करने में मदद करता है। 3. चंदन और गुलाबजल का प्रयोगशरीर पर चंदन और गुलाबजल का लेप लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और प्राकृतिक खुशबू बनी रहती है। यह पसीने की दुर्गंध को काफी हद तक कम करता है। जरूरी सावधानीयदि पसीने की दुर्गंध बहुत अधिक हो या लगातार बनी रहे, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें और चिकित्सकीय सलाह जरूर लें। संतुलित आहार और साफ-सफाई भी बेहद जरूरी है। गर्मियों में पसीने की बदबू को केवल डियोड्रेंट से नहीं, बल्कि आयुर्वेदिक दिनचर्या और सही खान-पान से नियंत्रित किया जा सकता है। अंदरूनी शुद्धता और बाहरी स्वच्छता दोनों मिलकर इस समस्या का स्थायी समाधान दे सकते हैं।
Girls Trip Ideas: घूमने के लिए ये डेस्टिनेशन हैं सबसे शानदार, अभी करें प्लानिंग

नई दिल्ली। अगर आप अपनी गर्ल्स गैंग के साथ कहीं घूमने का प्लान कर रही हैं। तब यह खबर आपके लिए बहुत ही जरूरी है। अगर आप और आपका ग्रुप बहुत दिनों से घूमने का सोच रहे हैं, लेकिन एक परफेक्ट डेस्टिनेशन समझ नहीं आ रही है, तो ऐसे में हम आपकी मदद करेंगे। इस लेख में हम आपको भारत की कुछ खास घूमने लायक जगह बताने वाले हैं जहां आप अपनी गर्ल्स गैंग के साथ जा सकती हैं। इस समय ऋषिकेश रहेगा परफेक्टअगर आप दिल्ली के रहने वाली हैं या फिर दिल्ली आ रही हैं तो दिल्ली से कुछ ही दूर पर कई ऐसी जगह है जहां पर आप घूमने का प्लान बना सकती हैं। दिल्ली से कुछ ही दूर पर ऋषिकेश घूमने की काफी अच्छी जगह है। यहां पर आपको मंदिर, गंगा घाट के अलावा कई सारी चीजों को एक्सप्लोर करने का मौका मिलेगा।ऋषिकेश में आप वोटिंग कर सकती हैं राफ्टिंग कर सकती हैं इसके साथ ही आपको काफी अच्छे-अच्छे सुंदर दृश्य भी दिखाई देंगे। राजस्थान की राजधानी घूमने के लिए खासराजस्थान की राजधानी जयपुर अपने ऐतिहासिक और खूबसूरत इमारतों के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही जयपुर की नाइटलाइफ भी फेमस है। यहां पर शॉपिंग से लेकर खाने तक का काफी अच्छा अच्छा ऑप्शन मिल जाता है। तो आपको जयपुर अपनी लिस्ट में जरूर रखना चाहिए। ये हिल स्टेशन है बेस्टअगर आप भी खूबसूरत और सुरक्षित हिल स्टेशन पर जाकर बैचलर्स पार्टी एंजॉय करना चाहती हैं, तो आपको नैनीताल की हसीन वादियों में जा सकती हैं। इस मौसम में नैनीताल में ज्यादा भीड़भाड़ नहीं रहती है जिसके कारण आपका सफर काफी अच्छा और सुहाना रहेगा। दार्जिलिंग भी माना जाता है खासअपने चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध, पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध हिल स्टेशन दार्जिलिंग आपकी कप्लना से भी कही ज्यादा अच्छा है। यहां का टाइगर हिल का सूर्योदय नजारा बेहद ही खूबसूरत लगता है, ऐसे नजारे सिर्फ कपल्स के लिए ही नहीं बने, दोस्तों के साथ भी ऐसी चीजों को देखने का मजा ही कुछ और है। साथ ही यहां आप पैराग्लाइडिंग, जीप सफारी, आइस ट्रेकिंग और कयाकिंग जैसी गतिविधियों को भी कर सकती हैं।
होंठों का कालापन दूर करने के टिप्स, घर पर अपनाएं ये नेचुरल तरीके

नई दिल्ली। आज के समय में हर लड़की चाहती है कि उसके होंठ बिना किसी मेकअप के भी गुलाबी और सॉफ्ट नजर आएं। लेकिन अगर आप अगर इस इस समय काले होंठ से परेशान हो गए हैं या फिर आपने कई सारे प्रोडक्ट उसे कर लिया है लेकिन इसका फायदा आपको नहीं हो सका है तो चलिए आज आपको कुछ घरेलू नुस्खे बताते हैं जिससे आपको काफी ज्यादा फायदा होगा और आपके होंठ काफी अच्छे दिखने लगेंगे। तो बिना देरी किए चलिए इन ट्रिक को अपनाइए और अपने होंठ गुलाबी बनाया रात में सोने से पहले फॉलो करेंअगर आप भी पिंक लिप्स पाना चाहती हैं, तो रोज रात को सोने से पहले अपने होंठों को हल्के गुनगुने पानी से साफ करें। इसके बाद एक बूंद घी या वैसलीन लेकर होंठों पर हल्के हाथों से मसाज करें। करीब 2 मिनट तक सर्कुलर मोशन में मसाज करने के बाद इसे रातभर के लिए छोड़ दें। यह नुस्खा होंठों को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और धीरे-धीरे उनका कालापन कम करने में मदद करता है। शहद, नींबू और हल्दी का ये मिश्रण है कमल काहोंठों को एक्सफोलिएट करना भी बहुत जरूरी होता है। इसके लिए आप एक चम्मच शहद में हल्दी और नींबू का रस मिलाकर स्क्रब तैयार कर सकती हैं। आप इसमें नारियल तेल भी मिल सकते हैं। मिक्स किए गए इस पेस्ट को होंठों पर लगाकर कुछ मिनट तक छोड़ दें और फिर हल्के हाथों से साफ कर लें। इस उपाय को हफ्ते में 2 से 3 बार करने से डेड स्किन हटती है और होंठों का रंग निखरता है। और धीरे-धीरे आपके होंठ काफी अच्छे और मुलायम बन जाएंगे दिखने में भी यह काफी अच्छे लगेगे। चुकंदर से बनाए घर पर लिप बामचुकंदर का रस निकालकर उसमें नारियल तेल और एलोवेरा जेल मिलाएं। इस पेस्ट को अच्छी तरह फेंटकर क्रीम जैसा बना लें और एक डिब्बी में स्टोर करके फ्रिज में रख दें। यह अच्छी तरीके से जम जाएगा इसके बाद आप इसे आसानी उपयोग कर सकती हैं। ये आपके होठों को अच्छा बनाएगा।
आयुर्वेदिक औषधि लघु सूतशेखर रस: पाचन और पित्त संतुलन में कारगर उपाय

नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान और तनाव के बीच पेट से जुड़ी समस्याएं आज आम हो गई हैं। इसी बीच आयुर्वेद में बताए गए पारंपरिक उपचारों में लघु सूतशेखर रस को पित्त दोष और एसिडिटी जैसी समस्याओं के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। क्या है लघु सूतशेखर रस?लघु सूतशेखर रस आयुर्वेद की एक प्रसिद्ध औषधि है, जिसे कई जड़ी-बूटियों और खनिज तत्वों के संयोजन से तैयार किया जाता है। इसमें पारद, गंधक, कपूर, दालचीनी, इलायची, नागकेसर, सौंठ और पान के पत्तों के रस जैसे घटक शामिल होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह औषधि मुख्य रूप से शरीर में बढ़े हुए पित्त को संतुलित करने का काम करती है। पित्त दोष और पेट की समस्याओं में लाभआयुर्वेद में पित्त दोष बढ़ने को कई बीमारियों का कारण माना जाता है। लघु सूतशेखर रस के सेवन से कई समस्याओं में राहत मिल सकती है, जैसे— एसिडिटी और पेट की जलनगैस और अपचउल्टी और मतलीसिरदर्द और माइग्रेनपेट में अत्यधिक अम्ल बनने की समस्यायह औषधि पाचन तंत्र को संतुलित करने में मदद करती है और पेट की कार्यप्रणाली को सुधारती है। जीवनशैली में बदलाव भी जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार केवल दवा ही नहीं, बल्कि जीवनशैली में सुधार भी बेहद जरूरी है— अत्यधिक मसालेदार और तैलीय भोजन से बचेंखाली पेट चाय और कॉफी का सेवन न करेंदेर रात खाना खाने की आदत छोड़ेंसमय पर भोजन और पर्याप्त नींद लेंये बदलाव पेट की समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। सावधानी जरूरीआयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि यह औषधि केवल चिकित्सक की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाएं, बच्चे और गंभीर रोगी बिना परामर्श के इसका सेवन न करें। लघु सूतशेखर रस एक आयुर्वेदिक औषधि है जो पित्त दोष, एसिडिटी और पेट की जलन में राहत देती है, लेकिन इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
भीषण गर्मी में राहत के तरीके, हीटवेव से बचने के लिए अपनाएं ये जरूरी टिप्स

नई दिल्ली । अप्रैल का महीना शुरू हो गया है ऐसे में धीरे-धीरे मौसम में बदलाव होगा और गर्मी शुरू हो जाएगी। गर्मी धीरे-धीरे इतनी तेज हो जाती है कि उसे सेहत पर काफी असर पड़ने लगता है। आगामी दिनों में जैसे-जैसे तापमान बढ़ेगा, हर उम्र वर्ग के लोगों के लिए कुछ शारीरिक चुनौतियां भी खड़ी होंगी। बढ़ती गर्मी से बचाव रखते हुए अच्छा स्वास्थ्य कैसे पाएं, खान-पान में क्या बदलाव करें और क्या सावधानियां जरूरी हैं। इन सभी बातों को जानने के लिए नीचे बताई गई जानकारी को जरूर पढ़ें। बच्चों के लिए रहे सावधानइस समय भले ही मौसम ठंडा हुआ है तापमान में गिरावट आई है लेकिन सेहत पर खतरा अभी भी है। बरसात से मौसम हल्का ठंडा हुआ है, लेकिन इससे सर्दी-जुकाम और बुखार का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, आगामी दिनों में तापमान अधिक बढ़ेगा। इसलिए 12 वर्ष तक के बच्चों को धूप और तपिश के पिक टाइम में बचाना जरूरी रहता है। इस उम्र के बच्चों को सुबह 11 से शाम 5 बजे तक धूप से बचाए रखना जरूरी है” इसके साथ जब भी वह बाहर जाएं उन्हें टॉप और पानी की बोतल ये सब चीज देना बिल्कुल ना भूले। खान-पान का रखन होगा ध्यानखान-पान में भी कुछ बदलाव करना जरूरी है, जैसे की शुद्ध पेयजल (प्यूरीफाइड वॉटर) अधिक लें।साथ ही नींबू पानी और ओआरएस जरूर लें। इसके अलावा बच्चों की डाइट में फल (फ्रूट्स) की मात्रा बढ़ाना भी जरूरी है। इसके साथ ही आपको ज्यादा मसाले वाली चीज नहीं खानी चाहिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहना चाहिए पानी समय पर पीने से सेहतमंद रहेंगे। गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यानइस गर्मी से बचने के लिए गर्भवती महिलाएं अपने और गर्भ में पल रहे बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के लिए और हाइड्रेट रहने के लिए अधिक पानी पीएं। लस्सी और ओआरएस का सेवन अधिक करें।यदि मजबूरन धूप में निकलना पड़ रहा है तो ऐसे में सिर पर टोपी पहनें और सनग्लास का इस्तेमाल जरूर करें। साथ ही लू से अपना बचाव करें और कहीं खुले में कुछ देर रूकना जरूरी हो तो पेड़ की छांव का सहारा लें।
घड़े का पानी देता है नेचुरल ठंडक, खरीदते समय इन बातों का रखें खास ध्यान!

नई दिल्ली। गर्मियों में फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी भले ही तुरंत राहत दे, लेकिन यह शरीर के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होता। बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को अचानक तापमान का झटका लगता है, जिससे गले की नसें सिकुड़ सकती हैं और पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। कई बार इससे खांसी, गले में खराश और एसिडिटी जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। इसके विपरीत, मिट्टी के घड़े का पानी शरीर को प्राकृतिक और संतुलित तरीके से ठंडक देता है, जो सेहत के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। कैसे ठंडा होता है घड़े का पानी?घड़े में पानी ठंडा होने के पीछे एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है, जिसे वाष्पीकरण (Evaporation) कहते हैं। घड़े की मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म छिद्रों से पानी की थोड़ी मात्रा बाहर आकर हवा के संपर्क में वाष्पित होती है, जिससे अंदर का पानी धीरे-धीरे ठंडा हो जाता है। यह ठंडक शरीर के तापमान के अनुकूल होती है, जिससे शरीर को कोई झटका नहीं लगता। आयुर्वेद भी मानता है फायदेमंदAyurveda के अनुसार, बहुत ठंडा पानी पाचन अग्नि को कमजोर करता है, जिससे खाना सही तरीके से नहीं पचता। वहीं घड़े का पानी पाचन को बेहतर बनाता है और पेट को ठंडा रखता है। माना जाता है कि मिट्टी में ऐसे प्राकृतिक गुण होते हैं जो पानी के pH स्तर को संतुलित रखने में मदद करते हैं, जिससे एसिडिटी और जलन जैसी समस्याएं कम होती हैं। शरीर को करता है हाइड्रेट और डिटॉक्सघड़े का पानी शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में भी मदद करता है। यह शरीर से अनचाहे तत्वों को बाहर निकालने में सहायक होता है।संतुलित ठंडक के कारण ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है और त्वचा पर भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिलता है। घड़ा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान- 1. शुद्ध मिट्टी का बना होघड़ा खरीदते समय यह जरूर देखें कि वह पूरी तरह प्राकृतिक मिट्टी से बना हो। उसमें किसी तरह का केमिकल या आर्टिफिशियल रंग नहीं मिला होना चाहिए। 2. गंध और रंग की जांच करेंअगर घड़े से अजीब गंध आती है या उसका रंग हाथ में लगने लगे, तो उसे न खरीदें। अच्छी क्वालिटी का घड़ा हल्की मिट्टी की खुशबू देता है। 3. अंदरूनी सतह पर ध्यान देंघड़े का अंदरूनी हिस्सा थोड़ा खुरदुरा होना चाहिए। इससे पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। 4. मोटाई हो सहीमोटा घड़ा पानी को ज्यादा देर तक ठंडा रखता है और जल्दी टूटता भी नहीं। पतले घड़े जल्दी खराब हो सकते हैं। 5. रिसाव जरूर जांचेंखरीदने से पहले उसमें पानी भरकर देख लें कि कहीं से लीकेज तो नहीं हो रहा। 6. सही साइज चुनेंअपने परिवार की जरूरत और घर की जगह के हिसाब से घड़े का साइज चुनें, ताकि उसका इस्तेमाल आसान रहे। घड़े का पानी न सिर्फ शरीर को प्राकृतिक ठंडक देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। सही घड़ा चुनकर आप गर्मियों में एक हेल्दी और देसी विकल्प अपना सकते हैं।
लौंग से लेकर नमक के पानी तक, इन घरेलू उपायों से पाएं दांतों का दर्द कम!

नई दिल्ली।दांत का दर्द किसी भी दिन की दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है। कभी ठंडा-गरम खाने से झनझनाहट, तो कभी मसूड़ों में सूजन या सड़न के कारण तेज दर्द होने लगता है। आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में दांत दर्द कम करने के कई असरदार घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बिना दवा के आराम पा सकते हैं। 1. लौंग: प्राकृतिक दर्द निवारकलौंग दांत दर्द के लिए सबसे प्रभावी घरेलू उपायों में से एक है। इसमें पाया जाने वाला यूजेनॉल प्राकृतिक दर्द निवारक और एंटीबैक्टीरियल होता है। कैसे करें इस्तेमाल: लौंग को सीधे दांत के पास रखें या लौंग का तेल प्रभावित जगह पर लगाएं।फायदा: नसों को हल्का सुन्न करता है और बैक्टीरिया के विकास को रोकता है, जिससे तुरंत राहत मिलती है। सावधानी: अधिक मात्रा में लगाने से जलन हो सकती है, इसलिए सीमित मात्रा में ही उपयोग करें। 2. नीम: मसूड़ों का संरक्षकनीम में पाए जाने वाले एंटीबैक्टीरियल गुण मुंह में हानिकारक कीटाणुओं को खत्म करते हैं। नीम की दातुन से दांतों को साफ करने से मसूड़े मजबूत रहते हैं। वैज्ञानिक लाभ: नीम मुंह के पीएच लेवल को संतुलित रखता है, जिससे बैक्टीरिया का विकास कम होता है। नियमित उपयोग: दांत और मसूड़े लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं। 3. हल्दी: सूजन और संक्रमण कम करेंहल्दी में मौजूद करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर होता है। कैसे इस्तेमाल करें: हल्दी को पानी या नारियल तेल में मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। फायदा: मसूड़ों की सूजन कम होती है, दर्द में राहत मिलती है और घाव जल्दी भरते हैं। 4. मुलेठी: प्राकृतिक क्लीनरमुलेठी के तत्व बैक्टीरिया से लड़ते हैं और दांतों की सड़न को रोकते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: मुलेठी का पाउडर दांतों पर हल्के हाथ से रगड़ें। फायदा: दांतों की सतह पर जमा गंदगी साफ होती है और मसूड़ों को आराम मिलता है। 5. नमक के पानी से गरारेनमक में संक्रमण को कम करने और मसूड़ों को साफ रखने की क्षमता होती है। कैसे करें इस्तेमाल: गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर गरारे करें। फायदा: मुंह के बैक्टीरिया कम होते हैं और सूजन में राहत मिलती है। इन प्राकृतिक उपायों से दांतों और मसूड़ों को सुरक्षित रखा जा सकता है और तेज दर्द में तुरंत राहत मिलती है। लौंग, नीम, हल्दी, मुलेठी और नमक का पानी दांतों के लिए असरदार घरेलू उपचार हैं। फिर भी, अगर दर्द लगातार बना रहे या मसूड़ों में अधिक सूजन और रक्तस्राव हो, तो तुरंत किसी डेंटिस्ट या विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
महाराष्ट्र का 50 हजार साल पुराना लोनार झील, जहां रहस्यमयी ढंग से बदलता है पानी का रंग!

नई दिल्ली। प्रकृति जितनी खूबसूरत है, उतनी ही रहस्यों से भरी भी है। महाराष्ट्र में बुलढाणा जिले के लोनार गांव के पास स्थित लोनार क्रेटर एक ऐसा ही अनोखा प्राकृतिक चमत्कार है। यह क्रेटर लगभग 35 से 50 हजार साल पहले किसी उल्कापिंड के टकराने से बना था। शुरू में इसे ज्वालामुखी क्रेटर समझा गया, लेकिन बाद में वैज्ञानिकों ने पुष्टि की कि यह उल्कापिंड की तेज टक्कर का परिणाम है। लोनार क्रेटर का वैज्ञानिक महत्वलोनार क्रेटर दुनिया में बेसाल्ट चट्टानों पर बने एकमात्र इम्पैक्ट क्रेटर के रूप में जाना जाता है। यह चंद्रमा और मंगल ग्रह के क्रेटरों के अध्ययन के लिए भी महत्वपूर्ण है। क्रेटर का व्यास लगभग 1,830 मीटर (1.8 किलोमीटर) और गहराई करीब 150 मीटर है। इसका किनारा आसपास की जमीन से 20 मीटर ऊंचा उठकर दिखता है। क्रेटर के अंदर बनी झील नमकीन और क्षारीय है। यह वैज्ञानिकों और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने साल 2004 में उपग्रह से इसकी तस्वीर ली थी, जिसमें झील हरी-नीली दिखाई देती है और चारों ओर वनस्पति, खेत और बस्तियां स्पष्ट नजर आती हैं। रंग बदलती झील का रहस्यलोनार झील का सबसे रोचक पहलू इसकी पानी का बदलता रंग है। जून 2020 में झील का रंग अचानक हरे से गुलाबी या लाल हो गया। वैज्ञानिकों ने सैंपल लेने पर पता लगाया कि यह परिवर्तन हेलोआर्किया जैसे नमकीन पानी में रहने वाले सूक्ष्म जीवों के कारण हुआ। गर्म और सूखे मौसम में पानी का स्तर कम होने से खारापन बढ़ता है और ये जीव तेजी से बढ़कर झील को गुलाबी रंग दे देते हैं। ऐसा रंग परिवर्तन ऑस्ट्रेलिया की लेक हिलियर और ईरान की लेक उर्मिया में भी देखा गया है। झील का रंग हमेशा नहीं रहता, बल्कि मौसम और पानी की मात्रा के अनुसार बदलता रहता है। क्रेटर की खोज और अध्ययन1823 में ब्रिटिश अधिकारी सी.जे.ई. अलेक्जेंडर ने लोनार क्रेटर को पहचाना। 1970 के दशक में मास्केलिनाइट की मौजूदगी से पुष्टि हुई कि यह क्रेटर वास्तव में उल्कापिंड के टकराने से बना है। मास्केलिनाइट केवल तेज गति की टक्करों में बनती है। लोनार क्रेटर का बेसाल्ट प्लेटफॉर्म इसे चंद्रमा की सतह जैसी विशेषता देता है। इस कारण नासा और भारतीय वैज्ञानिक संस्थानों ने यहां कई अध्ययन किए हैं। पर्यावरण और संरक्षणहाल के वर्षों में झील का पानी बढ़ने की समस्या सामने आई है। इससे पास के प्राचीन मंदिरों पर असर पड़ा है और झील का रासायनिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिक इस प्राकृतिक चमत्कार के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने पर ध्यान दे रहे हैं।