गले की खराश से मुंह के छाले तक, इलायची बनाएं गर्मियों का दोस्त…

नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम शुरू होते ही पेट, गला और मुंह की कई छोटी-बड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं ऐसे में भारतीय रसोई में मौजूद छोटी सी इलायची सेहत के लिए रामबाण साबित हो सकती है आयुर्वेद में इलायची को औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है यह न सिर्फ खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाती है बल्कि गर्मी से होने वाली परेशानियों से भी राहत देती है गर्मियों में अपच, एसिडिटी और मुंह के छालों की समस्या बढ़ जाती है खाने के बाद एक इलायची चबाने से पेट की हाइपर एसिडिटी कंट्रोल हो जाती है खट्टी डकारें, सीने में जलन और भारीपन जैसी शिकायतें कम होती हैं। गले में खराश, खांसी या आवाज बैठ जाना आम है ऐसे में 1-2 इलायची धीरे-धीरे चबाकर उसका रस गले से नीचे जाने दें कुछ ही देर में गले को आराम महसूस होगा मुंह के छालों में इलायची को मिश्री के साथ चबाने से जलन और दर्द कम होता है और छाले जल्दी ठीक हो जाते हैं इलायची हिचकी रोकने में भी मददगार है एक इलायची चबाने या इसका पाउडर पानी के साथ लेने से हिचकी तुरंत बंद हो जाती है। इसके अलावा इलायची मुंह के बैक्टीरिया और संक्रमण को भी दूर करती है। रोज भोजन के बाद इलायची चबाने से मुंह से दुर्गंध नहीं आती और दांत स्वस्थ रहते हैं इलायची में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं जो सूजन को कम करते हैं और संक्रमण से बचाव करते हैं। इलायची का सेवन चाय में डालकर, दूध में उबालकर या सीधे चबाकर किया जा सकता है गर्मियों में इलायची वाली चाय या दूध पीने से शरीर को ठंडक मिलती है पाचन तंत्र मजबूत रहता है और तनाव भी दूर होता है एक्सपर्ट्स की सलाह है कि गर्मियों में रोजाना 1-2 इलायची का सेवन जरूर करें यह छोटी-सी आदत पेट, गला और मुंह की कई परेशानियों को जड़ से दूर रख सकती है हालांकि गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है
हेल्दी बनने की जल्दी पड़ सकती है भारी, डॉक्टर ने बताए मॉर्निंग रूटीन के सही नियम

भोपाल । आजकल परफेक्ट मॉर्निंग रूटीन का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जहां लोग सुबह जल्दी उठकर वर्कआउट, ईमेल चेक करना और कॉफी पीने जैसी आदतों को अपनाते हैं। पहली नजर में ये आदतें हेल्दी और प्रोडक्टिव लगती हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इन्हें गलत तरीके से अपनाने पर ये शरीर पर उल्टा असर डाल सकती हैं। असली समस्या इन आदतों में नहीं, बल्कि उन्हें जल्दबाजी और बिना तैयारी के करने में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इंसान का शरीर नींद से जागने के बाद तुरंत एक्टिव मोड में नहीं आता। उसे एक ट्रांजिशन समय यानी एक ब्रिज की जरूरत होती है। अगर यह समय नहीं दिया जाता, तो शरीर अचानक हाई अलर्ट स्थिति में पहुंच जाता है, जिससे तनाव बढ़ सकता है। रिसर्च के अनुसार, अचानक एक्टिव होने से शरीर में कॉर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसका असर मूड, फोकस और मानसिक स्थिति पर पड़ता है। सबसे आम गलती जो लगभग 99 प्रतिशत लोग करते हैं, वह है सुबह उठते ही मोबाइल फोन देखना। अलार्म बंद करते ही लोग नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया या ईमेल चेक करने लगते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इससे दिमाग तुरंत अलर्ट मोड में चला जाता है और तनाव बढ़ने लगता है। इससे चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और मानसिक थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं। इसके अलावा, आजकल प्रोडक्टिव दिखने का दबाव भी लोगों पर हावी हो गया है। लोग मानते हैं कि जितना ज्यादा काम सुबह में कर लिया जाए, दिन उतना बेहतर होगा। लेकिन शरीर इस तरह काम नहीं करता। बिना तैयारी के तुरंत वर्कआउट शुरू करना या लगातार डिजिटल गतिविधियों में लग जाना शरीर के लिए तनाव का कारण बन सकता है। एक और बड़ी गलती है खराब नींद के बावजूद जल्दी उठना। अगर रात में पर्याप्त नींद नहीं ली गई या देर तक फोन इस्तेमाल किया गया, तो सुबह की शुरुआत खराब हो जाती है। नींद की कमी का असर याददाश्त, मूड और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। इसलिए अच्छी सुबह की शुरुआत के लिए अच्छी नींद बेहद जरूरी है। कई लोग सुबह उठते ही कॉफी पीना शुरू कर देते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार 6 से 8 घंटे की नींद के बाद शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो जाता है। ऐसे में सबसे पहले पानी पीना ज्यादा जरूरी होता है। पानी पीने से शरीर हाइड्रेट होता है, दिमाग बेहतर तरीके से काम करता है और थकान कम होती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि सुबह उठने के बाद का पहला एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी समय शरीर का सर्केडियन रिदम सेट होता है, जो पूरे दिन की ऊर्जा और मूड को प्रभावित करता है। अगर इस समय जल्दबाजी की जाए, तो दिनभर थकान और फोकस की कमी बनी रह सकती है। एक सही और संतुलित मॉर्निंग रूटीन के लिए डॉक्टर कुछ आसान आदतें अपनाने की सलाह देते हैं। सुबह उठकर तुरंत भागदौड़ करने के बजाय कुछ मिनट शांत बैठें, गहरी सांस लें और शरीर को धीरे-धीरे एक्टिव करें। सबसे पहले पानी पिएं, हल्की धूप लें और हल्की स्ट्रेचिंग से शुरुआत करें। इसके बाद ही वर्कआउट करें। साथ ही, सुबह उठते ही फोन इस्तेमाल करने से बचें और दिन की शुरुआत शांत और सकारात्मक गतिविधियों से करें। अगर इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो न केवल दिन की शुरुआत बेहतर होगी बल्कि पूरे दिन की ऊर्जा, फोकस और मानसिक स्थिति भी संतुलित बनी रहेगी।
हाई कोलेस्ट्रॉल को कहें अलविदा, इन सरल टिप्स से दिल और लिवर दोनों रहेंगे मजबूत
नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि काफी कम हो गई है और ज्यादातर लोग दिनभर एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, इस वजह से शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है, खासकर बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, 30 की उम्र के बाद युवाओं में लिवर और हृदय से जुड़ी दिक्कतें तेजी से देखने को मिल रही हैं, आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए दवाएं देते हैं, जो रक्त को पतला करने और हृदय को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं, लेकिन आयुर्वेद में भी इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई प्राकृतिक और असरदार उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर बिना ज्यादा दवाओं के भी कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखा जा सकता है कोलेस्ट्रॉल बढ़ना शरीर में कई खतरों को न्योता देता है, इससे स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है, शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण कम दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ संकेत मिल सकते हैं जैसे पलकों पर धब्बे होना, सीने में भारीपन या दर्द महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ, थकान और पैरों में ऐंठन की समस्या, अगर समय रहते उपाय किए जाएं तो यह गंभीर नहीं बनता और हृदय स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है सुबह की शुरुआत मेथी के पानी से करना बेहद लाभकारी है, इसके लिए रात को मेथी के दानों को पानी में भिगो दें और इसमें एक कली लहसुन डाल दें, सुबह इसे छानकर पीने से रक्त में जमा कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होने लगता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ती है, यदि पसंद हो तो लहसुन को हल्का भूनकर भी सुबह सेवन किया जा सकता है, यह उपाय न केवल हृदय को मजबूत बनाता है बल्कि लिवर की कार्य क्षमता को भी सुधारता है नाश्ते में ओट्स का सेवन करने से भी कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है, ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकन और अलसी का ओमेगा-3 खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद करता है और दिल पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है, साथ ही राजमा और दालों को अपने आहार में शामिल करें, ये प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं और हृदय को सुरक्षित रखते हैं आहार में रिफाइंड तेल का त्याग करना भी बेहद जरूरी है क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का प्रमुख कारण है, इसके स्थान पर घी, तिल का तेल या जैतून का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके अलावा पानी की पर्याप्त मात्रा लेना और हल्की एक्सरसाइज जैसे चलना या योग करना भी शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है, इसके साथ ही तनाव को कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है इन उपायों को नियमित दिनचर्या में शामिल करके आप बिना दवा के अपने कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रख सकते हैं, इससे न केवल हृदय मजबूत रहेगा बल्कि लिवर भी स्वस्थ रहेगा, सही आहार और प्राकृतिक उपायों के संयोजन से आप अपने स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं
तरबूज: पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर गर्मियों का खजाना..

नई दिल्ली : गर्मियों की शुरुआत होते ही तरबूज खाने का मन सभी को करता है यह फल न केवल रिफ्रेशिंग है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है आयुर्वेद में तरबूज को पित्त शामक फल कहा गया है और यह ज्येष्ठ माह का फल माना जाता है क्योंकि इस समय तापमान बहुत अधिक होता है और तरबूज की तासीर ठंडी होती है तरबूज खाने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है क्योंकि इसमें 90 प्रतिशत पानी होता है इसके अलावा इसमें कैलोरी बहुत कम होती है जिससे वजन नियंत्रित रहता है और लंबे समय तक भूख नहीं लगती ओवरईटिंग से बचा जा सकता है। यह शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करता है और चेहरे पर प्राकृतिक ग्लो भी लाता है तरबूज में विटामिन सी और विटामिन ए प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं ये तत्व चेहरे और बालों की सेहत के लिए लाभकारी हैं विटामिन सी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और गर्मियों में होने वाली अतिसार और जी घबराने जैसी समस्याओं को कम करता है। इसके साथ ही तरबूज में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स मांसपेशियों की रिकवरी में सहायक हैं अगर शरीर में सूजन की समस्या है, तब भी तरबूज का सेवन लाभकारी होता है पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स मिलकर शरीर को मजबूती देने का काम करते हैं गर्मियों में दोपहर के वक्त तरबूज खाना सबसे ज्यादा लाभकारी होता है। काटकर खाने के समय न होने पर आप इसे पुदीने के साथ जूस के रूप में भी ले सकते हैं, लेकिन जूस को बिना छाने पिएं ताकि सभी पोषक तत्व मिलते रहें इस तरह तरबूज सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं बल्कि गर्मियों में सेहत और ऊर्जा का खजाना है जो हाइड्रेशन, त्वचा की चमक और मांसपेशियों की मजबूती, सभी के लिए फायदेमंद है
SUMMER TIPS : गर्मियों में बालकनी को बनाएं हरा भरा; ये 8 पौधे रखेंगे हवा और मूड दोनों फ्रेश

SUMMER TIPS : नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम अपने साथ तेज धूप और गर्म हवाएं लेकर आता है ऐसे में घर की बालकनी अगर हरी भरी हो तो न सिर्फ आंखों को सुकून मिलता है बल्कि यह हमारे मूड और स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर डालती है पौधे प्राकृतिक एयर प्यूरीफायर की तरह काम करते हैं और घर के माहौल को ताजगी से भर देते हैं अगर आप भी अपनी बालकनी को इस गर्मी में फ्रेश और खूबसूरत बनाना चाहते हैं तो कुछ खास पौधे आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं रोज़मेरी एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसकी खुशबू दिमाग को तेज करने और याददाश्त बढ़ाने में मदद करती है इसे आप अपने किचन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे स्वाद और सेहत दोनों का फायदा मिलता है एलोवेरा गर्मियों का सुपरस्टार पौधा माना जाता है इसका जेल त्वचा को ठंडक पहुंचाता है और जलन में राहत देता है साथ ही यह हवा को साफ रखने में भी मदद करता है जिससे घर का वातावरण हेल्दी बना रहता है चमेली के सफेद फूल और उसकी भीनी खुशबू आपके मन को शांति देती है यह तनाव को कम करने में मददगार होती है और आपकी बालकनी को खूबसूरत भी बनाती है पीस लिली न केवल देखने में आकर्षक होती है बल्कि यह हवा में मौजूद हानिकारक तत्वों को भी कम करती है इसके पत्ते वातावरण में नमी बनाए रखते हैं जिससे गर्मी में राहत मिलती है पुदीना एक ऐसा पौधा है जो तुरंत ताजगी का एहसास कराता है इसकी खुशबू थकान दूर करती है और इसकी पत्तियों से बनी चाय पाचन के लिए भी फायदेमंद होती है इंग्लिश आइवी खासतौर पर उन लोगों के लिए अच्छा है जिन्हें एलर्जी की समस्या होती है यह हवा में मौजूद एलर्जी पैदा करने वाले तत्वों को कम करने में मदद करता है और बालकनी को हरा भरा लुक देता है बाल्सम के रंग बिरंगे फूल बालकनी को जीवंत बना देते हैं साथ ही यह कीड़े मकोड़ों को दूर रखने में भी मदद करते हैं जिससे आपका वातावरण साफ और सुरक्षित रहता है तुलसी एक पवित्र और औषधीय पौधा है जो तनाव कम करने और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है इसकी मौजूदगी से घर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है अगर आप इन पौधों को अपनी बालकनी में लगाते हैं तो न सिर्फ गर्मी का असर कम महसूस होगा बल्कि आपका घर एक ताजगी भरा और सुकून देने वाला स्थान बन जाएगा
Cardamom health benefits : गर्मियों में इलायची का कमाल: गले की खराश और मुंह के छाले में राहत

Cardamom health benefits : नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम शुरू होते ही बढ़ती गर्मी के कारण पेट, गले और मुंह की कई छोटी-बड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में रसोई में मिलने वाली छोटी-सी इलायची सेहत के लिए बाध्य साबित हो सकती है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों का खजाना माना जाता है, जो खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के साथ गर्मी से होने वाली व्यवस्थाओं में भी आराम देती है। पेट की समस्याओं में राहत गर्मियों में सबसे ज्यादा समस्या अपच, एसिडिटी और खाने के बाद खट्टी डकार की होती है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, रोजाना एक इलायची चबाने से पेट की हाइपर एसिडिटी कंट्रोल हो जाती है। इससे सीने में जलन, भारीपन और गैस जैसी सुविधाएं कम होती हैं। भोजन के बाद इलायची को धीरे-धीरे चबाने की आदत डालें, पेट से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं और पाचन तंत्र मजबूत रहता है। गले की खराश और खांसी में राहत गर्मी में गला अक्सर खराब हो जाता है और खांसी या आवाज बैठ जाने जैसी समस्या आम हो जाती है। ऐसे में 1-2 इलायची धीरे-धीरे चबाकर उसका रस गले से नीचे जाने दें। इससे गले की खराश में तुरंत आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है। यह तरीका बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए सुरक्षित और असरदार है। मुंह के छालों और हिचकी में फायदेमंद गर्मियों में मुंह के छालों की समस्या भी बढ़ जाती है। इलायची को मिश्री के साथ चबाने से छालों में जलन और दर्द कम होता है और जल्दी ठीक हो जाते हैं। इसके अलावा इलायची हिचकी को रोकने में भी गति होती है। बार-बार हिचकी आने पर एक इलायची चबाएं या इसका पाउडर पानी के साथ लें, हिचकी तुरंत रुक जाएगी। मुंह की स्वच्छता और संक्रमण से बचाव इलायची मुंह के बैक्टीरिया और संक्रमण को भी दूर करती है। भोजन के बाद एक इलायची चबाने से मुंह से दुर्गंध नहीं आती और दांत स्वस्थ रहते हैं। इलायची में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन को कम करने और संक्रमण से बचाव करने में मदद करते हैं। सेवन के आसान तरीके इलायची का सेवन कई आसान तरीकों से किया जा सकता है: चाय मेंह दूध में भूनें सीधे चबाकर गर्मियों में इलायची वाली चाय या दूध पीना शरीर को ठंडक देता है, पाचन तंत्र को मजबूत रखता है और मानसिक तनाव को कम करता है। एक्सपोर्ट की सलाह विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्मियों में रोजाना 1-2 इलायची का सेवन जरूर करें। यह छोटी-सी आदत पेट, गले और मुंह की कई दवाओं को जड़ से दूर रख सकती है। हालांकि, अगर समस्या गंभीर हो तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
Mental health home tips : परेशान हैं किसी समस्या से? घर पर अपनाएं ये आसान और असरदार उपाय

Mental health home tips : नई दिल्ली हर किसी ने सोचा है कि उसका चेहरा काफी अच्छा लग रहा है। अगर आप भी यही सोचती हैं और आपके चेहरे पर काफी ज्यादा तस्वीरें देखी गई हैं। तो आपके घर पर ही कुछ आसान से नामांकन को अपनाकर अपने चेहरे से पहले ही अंकित मूल्य को हटाया जा सकता है। तो बिना डिले के इसे पूरे वैज्ञानिक जानते हैं और अच्छे से अभ्यारण्य हैं। घर पर ऐसे ठीक करें देखें फेस पर देखें आपकी सुंदरता कम हो सकती है। इसकी वजह से जगह-जगह पर दाग-धब्बे नजर आते हैं और त्वचा पर गहरी नजर आती है। ऐसे में कई लोग अपने चेहरे की जिद्दी झाइयों को हटाने के लिए तरह-तरह के सौंदर्य और त्वचा देखभाल उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा आपको बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए घर के कुछ नक्से आपके चेहरे को आप ही अच्छा बना सकते हैं तो जानें। शहद और नींबू चेहरे से झा लेबल और चेहरे को अच्छी तरह से साफ करना और इसमें ग्लास लाना शहद और नींबू अच्छे से काफी से करते हैं। वास्तविक, नींबू के रस में साइट्रिक एसिड मौजूद होता है, जो त्वचा के दाग-धब्बों और झाइयों को प्रभावित करने में मदद कर सकता है। इसके लिए आप एक कटोरी में एक मिशिगन शहर लें। इसमें एक डोमेन का रस आर्किटेक्चर अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को अपने चेहरे पर लगाएं और कुछ देर के लिए रहने के लिए कहें। करीब 10 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें। हफ्ते में 2 से 3 बार इसे इस्तेमाल करने से धीरे-धीरे धीरे-धीरे कम होने लगेंगी। शहद और एलोवेरा शहद और एलोवेरा का उपयोग करने के लिए फेस से लुक निकाला जा सकता है। असल में, एलोवेरा में एलॉयन नामक तत्व मौजूद होता है, जो दाग-धब्बों और पिगमेंटेशन को दूर करने में मदद करता है। इसके लिए आप एक कटोरी में एक मिशिगन शहर लें। एक क्षेत्र एलोवेरा जेल बिल्डिंग में अच्छी तरह से मिक्स कर लें। अब इस मिश्रण को अपने चेहरे पर कपड़े और हाथों से मसाज करें, करीब 20 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें।
मिनटों में तैयार स्वाद का धमाका जानें सूखी गोभी से परफेक्ट आलू गोभी बनाने का तरीका

नई दिल्ली: भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां हर कोई जल्दी और स्वादिष्ट खाने की तलाश में रहता है वहीं अब एक ऐसी पारंपरिक रेसिपी फिर से लोगों के बीच लोकप्रिय हो रही है जो स्वाद और सुविधा दोनों का बेहतरीन मेल है। आलू गोभी की यह खास रेसिपी इन दिनों सीतामढ़ी के घरों में तेजी से पसंद की जा रही है और खासकर कामकाजी महिलाओं और बैचलर्स के लिए यह एक परफेक्ट इंस्टेंट मील बनकर उभरी है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान और तेज तैयारी है। आमतौर पर गोभी को काटने और साफ करने में समय लगता है लेकिन इस विधि में सूखी गोभी का इस्तेमाल किया जाता है। इसे केवल तीन मिनट के लिए गुनगुने नमक वाले पानी में डालने से यह बिल्कुल ताजी गोभी की तरह फूलकर तैयार हो जाती है। यही ट्रिक इस डिश को खास बनाती है और समय की बचत भी करती है। इसके बाद शुरू होता है असली स्वाद का खेल जहां मसालों को सीधे डालने की बजाय थोड़ा पानी मिलाकर उनका गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है। इस पेस्ट को कढ़ाही में धीरे-धीरे भूनने से मसाले जलते नहीं हैं और सब्जी में एक समान स्वाद आता है। जब सरसों के तेल में उबले हुए आलू और गोभी को सुनहरा होने तक भुना जाता है तो उसमें एक अलग ही सोंधापन आ जाता है जो इस डिश को ढाबा स्टाइल फ्लेवर देता है। अदरक और लहसुन का पेस्ट साथ ही खड़े मसालों का उपयोग इस सब्जी को और भी ज्यादा खुशबूदार और स्वादिष्ट बनाता है। धीमी आंच पर पकने के बाद यह सब्जी पूरी तरह मसालों को अपने अंदर समेट लेती है जिससे हर बाइट में भरपूर स्वाद मिलता है। यह रेसिपी सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि पोषण के लिहाज से भी काफी अच्छी मानी जाती है। कम तेल और सीमित मसालों में तैयार होने वाली यह सब्जी हल्की होने के साथ-साथ हेल्दी भी होती है। यही वजह है कि अब यह डिश लंच बॉक्स में भी तेजी से जगह बना रही है। इस सब्जी को आप गर्मागर्म पूरी पराठे या सादी रोटी के साथ परोस सकते हैं। खास बात यह है कि इसे बनाने में न ज्यादा समय लगता है और न ही ज्यादा सामग्री की जरूरत होती है। यही कारण है कि यह पारंपरिक रेसिपी आज के आधुनिक किचन में भी अपनी जगह बना रही है। यह कहना गलत नहीं होगा कि सूखी गोभी से तैयार यह झटपट आलू गोभी फ्राई स्वाद और सुविधा का ऐसा कॉम्बिनेशन है जो हर घर की रसोई में एक बार जरूर ट्राई किया जाना चाहिए।
तरबूज का कमाल: गर्मियों में ताजगी और सेहत दोनों के लिए है बेहतरीन

नई दिल्ली गर्मी की आग बढ़ती ही जा रही है और द्रव्य की चाहत भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में तरबूज़ समर का सबसे पसंदीदा फल बन जाता है। यह सिर्फ मीठा और ताजगी देने वाला नहीं है, बल्कि सेहत के लिए भी वरदान है। आयुर्वेद में पित्त शामक फल बताया गया है और ज्येष्ठ मास में इसका सेवन माना जाता है। तरबूज का तासीर लाभकारी होता है, जिससे यह शरीर में गर्मी पहुंचाता है और पाचन तंत्र को भी स्थिर रखता है। तरबूज़: ग्लूकोज़ और वज़न का नियंत्रण प्राकृतिक उपायतरबूज़ का लगभग 90 प्रतिशत भाग पानी होता है, जिससे शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। इसके अलावा, रसायन में बहुत कम और पोषक तत्व अधिक होते हैं। इसलिए इसे खाने के बाद लंबे समय तक भूख न लगने और ओवरईटिंग से बचा जा सकता है। गर्मियों में दोपहर के समय तरबूज़ खाने से शरीर को ठंडक मिलती है और गर्मी रहती है। त्वचा और बालों के लिए गुणकारीतरबूज में विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा पाई जाती है। यह त्वचा और बालों की सेहत के लिए है। विटामिन सी शरीर की रोग संबंधी क्षमता फिर से हासिल हो गई है, जिससे समरलैंड में अतिसार और जी की आशंकाएं कम होती हैं। इसके अलावा, विटामिन ए प्राकृतिक रूप से चमकता है और आंखों की रोशनी को बनाए रखने में मदद करता है। मसाला और सूजन के लिए स्वादिष्टतरबूज में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सिडेंट्स मिश्रण को रिकवर करने में मदद मिलती है। यह सूजन कम करना और शरीर में सूजन का काम भी करता है। व्यायाम या गर्मी की वजह से थकान के बादटर्बोज़ का सेवन शरीर को ऊर्जा और ताजगी प्रदान करता है। तरबूज का सही सेवनटरबूज़ को हमेशा ताज़ा और प्रयोगात्मक बनाएं।अगर समय कम है तो पुदीने के साथ बिना चने पिएं।इसमें दोपहर के भोजन से गर्मी और पाचन संबंधी लाभ अधिक मिलते हैं।बाजार में मिलने वाले तरबूज का सेवन अभी से शुरू किया जा सकता है, लेकिन मौसम के अनुसार ताजगी और पाचन क्षमता पर ध्यान दें। गर्मी में तरबूज सिर्फ मीठा फल नहीं है, बल्कि यह सेहत का खजाना है। यह शरीर को प्रमाणित करता है, वजन को नियंत्रित करता है, त्वचा और बालों की सेहत को सुधारता है, शरीर को मजबूत बनाता है और सूजन को कम करता है। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से यह पित्तशामक फल है और गर्मियों में इसका सेवन दो बार सबसे ज्यादा माना जाता है।
हैदराबाद- सिकंदराबाद का नया ऑफबीट डेस्टिनेशन: महेंद्र हिल्स की पहाड़ियों में बौद्ध संस्कृति और हरियाली

नई दिल्ली:सिकंदराबाद में महेंद्र हिल्स इलाके में एक ऐसा स्थल छुपा है, जिसे लोग प्यार से मिनी तिब्बत’ कहने लगे हैं। ऊंचाई पर बसा यह क्षेत्र अपनी हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर यह जगह मानसिक सुकून और आध्यात्मिक अहसास का अनुभव कराती है। महेंद्र हिल्स की पहाड़ियों पर बौद्ध मंदिर स्थित है, जहां आने वाले लोग ध्यान और योग के लिए आते हैं। खासकर सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य बेहद मनोहारी होता है। ठंडी हवा, हरियाली और आसपास का शांत माहौल तिब्बत की झलक पेश करता है और पर्यटकों को शहर की आपाधापी से कुछ पल के लिए दूर ले जाता है। स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही यहां सैर करने, तस्वीरें लेने और मानसिक शांति पाने आते हैं। यह जगह खास तौर पर उन लोगों के लिए आदर्श है जो जीवन की भागदौड़ में शांति और मानसिक सुकून की तलाश में हैं। धीरे-धीरे महेंद्र हिल्स हैदराबाद- सिकंदराबाद के लोकप्रिय ऑफबीट पर्यटन स्थलों में शामिल होने लगा है। यदि आप शहर से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो महेंद्र हिल्स में मिनी तिब्बत’ का अनुभव करना एक यादगार अनुभव साबित हो सकता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण आपको तनावमुक्त और तरोताजा कर देगा।