हैदराबाद- सिकंदराबाद का नया ऑफबीट डेस्टिनेशन: महेंद्र हिल्स की पहाड़ियों में बौद्ध संस्कृति और हरियाली

नई दिल्ली:सिकंदराबाद में महेंद्र हिल्स इलाके में एक ऐसा स्थल छुपा है, जिसे लोग प्यार से मिनी तिब्बत’ कहने लगे हैं। ऊंचाई पर बसा यह क्षेत्र अपनी हरियाली, शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर यह जगह मानसिक सुकून और आध्यात्मिक अहसास का अनुभव कराती है। महेंद्र हिल्स की पहाड़ियों पर बौद्ध मंदिर स्थित है, जहां आने वाले लोग ध्यान और योग के लिए आते हैं। खासकर सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य बेहद मनोहारी होता है। ठंडी हवा, हरियाली और आसपास का शांत माहौल तिब्बत की झलक पेश करता है और पर्यटकों को शहर की आपाधापी से कुछ पल के लिए दूर ले जाता है। स्थानीय लोग और पर्यटक दोनों ही यहां सैर करने, तस्वीरें लेने और मानसिक शांति पाने आते हैं। यह जगह खास तौर पर उन लोगों के लिए आदर्श है जो जीवन की भागदौड़ में शांति और मानसिक सुकून की तलाश में हैं। धीरे-धीरे महेंद्र हिल्स हैदराबाद- सिकंदराबाद के लोकप्रिय ऑफबीट पर्यटन स्थलों में शामिल होने लगा है। यदि आप शहर से दूर कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो महेंद्र हिल्स में मिनी तिब्बत’ का अनुभव करना एक यादगार अनुभव साबित हो सकता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण आपको तनावमुक्त और तरोताजा कर देगा।
आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका: दोष के हिसाब से चुनें पानी का तापमान

नई दिल्ली स्नान सिर्फ शरीर की सफाई नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य से शरीर का अहम हिस्सा है। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीकों से स्नान करने से शरीर के दोष वात, पित्त और कफ बने रहते हैं। हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, संस्थान के पानी का तापमान भी एक जैसा होना चाहिए। गुनगुना पानी सबसे अच्छा हैयदि आपके शरीर में रूखापन, ठंडे हाथ-पैर, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं बनी हुई हैं, तो यह वात दोष का संकेत हो सकता है। गुनगुने पानी से स्नान करेंसंस्थान के बाद तेल से अभ्यंग (मालिश) जरूर करेंइससे शरीर का रूखापन कम होगा और त्वचा को पोषण मिलेगा गुनगुना पानी वात को शांति देता है और शरीर को आराम का अनुभव कराता है। कफ प्रकृति: गर्म पानी से मिलेगा फायदायदि शरीर में भारीपन, सुस्ती, बार-बार सर्दी या बलगम की समस्या रहती है, तो यह कफ दोष बढ़ने का संकेत है। गर्म पानी से स्नान करेंसुबह का समय नहाना बहुत खतरनाक हैठंडा पानी से परहेज़, क्योंकि इससे कफ और बढ़ सकता है गर्म पानी शरीर को सक्रिय करता है और कफ को कम करने में मदद करता है। पित्त प्रकृति: सामान्य या ठंडा पानी सहीयदि आपको गर्मी अधिक लगती है, पसीना अधिक आता है, मुंहासे या जलन की समस्या रहती है, तो यह पित्त दोष का संकेत है। सामान्य या साधारण ठंडे पानी से स्नान करेंबहुत ज्यादा ठंडा पानी का उपयोग न करेंइससे शरीर का सबसे अच्छा स्टॉक रहता है यह विधि शरीर की गर्मी को शांत करती है और पित्त को नियंत्रित करती है। स्नान से जुड़े कुछ जरूरी नियमबहुत ज्यादा ठंडा या बहुत ज्यादा गर्म पानी रोज न लेंभोजन के तुरंत बाद स्नान न करेंसुबह स्नान करना सबसे अच्छा माना जाता हैमौसम और शरीर की स्थिति के अनुसार पानी की तापमान में गिरावट शरीर की प्रकृति की प्रशंसा, संभवतः पूरा लाभआयुर्वेद के अनुसार अगर आप अपनी प्रकृति के अनुसार स्नान करते हैं, तो यह सिर्फ शरीर को साफ नहीं करता है, बल्कि कई शर्तों से भी सिखाता है।
बार-बार सिर दर्द से हैं परेशान? इसकी वजह हो सकती है आपकी डाइजेशन प्रॉब्लम

नई दिल्ली हम अक्सर सिर दर्द को लेकर तनाव, थकान या अधिक काम का नतीजा मान लेते हैं, लेकिन अगर समस्या बार-बार हो रही है तो इसका एक बड़ा कारण खराब पाचन भी हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार शरीर में पाचन तंत्र और मस्तिष्क का गहरा संबंध होता है। जब पेट सही तरीकों से काम नहीं करता तो इसका असर सिर पर भी दिखने लगता है। पाचन क्रिया तो सिर दर्द क्यों होता है?जब पाचन क्रिया खराब होती है तो शरीर में गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं। इससे शरीर के दोष-वात, पित्त और कफ-असंतुलित हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे मस्तिष्क के तंत्रिकाओं को प्रभावित करते हैं। इसके परिणामस्वरूप बार-बार सिर दर्द, भारीपन या चक्कर जैसे चित्र सामने आते हैं। आयुर्वेद में यह सिर्फ सिर की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे शरीर का संकेत है कि अंदर कुछ समानता है। पेन किलर नहीं, जड़ पर काम करोअक्सर लोगों को सिर दर्द होता ही है, पेनकिलर लेकर तुरंत राहत पा लेते हैं, लेकिन यह सिर्फ अस्थायी समाधान है। अगर वास्तविक वसा पाचन है, तो दवा से दर्द दब जाएगा, लेकिन समस्या बार-बार खत्म हो जाएगी। इसलिए जरूरी है कि पेट को ठीक किया जाए। आयुर्वेदिक उपाय जो दिला सकता है राहतनासिका क्रिया: नाक में औषधीय तेल की कुछ बूंदें गिराने से मस्तिष्क पर दबाव कम होता है और पित्त की मात्रा होती है।धनिया-मिश्री का पानी: रात में रात भर पीने से कब्ज में आराम मिलता है और पाचन सुदृढ होता है।सोंठ का लेप: सोंठ (सुखी अदरक) को पानी में वृद्धावस्था में लगाने से सिर दर्द में आराम मिल सकता है। खान-पान से क्या है कनेक्शन?ग़लत खान-पान जैसे अधिकतर ताल-भुना, क्षार या देर रात का खाना पाचन को ख़राब करता है। इससे गैस और कोष्ठबद्धता होती है, जो सिर दर्द का कारण बन सकती है। इसलिए— प्रभाव और सुपाच्य भोजन करेंसमय पर खाना बनानाअधिक पानी पियेदेर रात भारी भोजन से गोद लेना कब किराया लेना जरूरी है?यदि सिर दर्द लगातार बना रहता है, बहुत तेज होता है या अन्य लक्षण (जैसे उल्टी, चक्कर आना, नजरें धुंधली होना) भी साथ में हैं, तो इसे दांतों में न लें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें। यह किसी अन्य गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। पेट ठीक है तो सिर भी ठीक हैसिर दर्द को केवल सिर तक सीमित सीमा तक गलत माना जा सकता है। सही पाचन, संतुलित आहार और कठिनाइयों से इस समस्या को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल से राहत के आसान उपाय, अपनाएं ये प्राकृतिक तरीके

नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव की स्थिति आम बात है। काम और निजी जिंदगी में चल रही उठा-पटक के बीच जिंदगी को मापना कर पाना मुश्किल होता है, और तनाव को झेलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में चाहते हैं कि जब भी शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़े तो शरीर के बाकी हार्मोन भी असंतुलित हो जाएं। ऐसे में अगर लंबे समय तक लगातार यही लेवल बना रहे तो इससे शरीर को भारी नुकसान हो सकता है। कोर्टिसोल को सरल भाषा में तनाव हार्मोन के नाम से जाना जाता है। यह दोनों किडनी के ऊपर बनी एक ग्रंथि है, जिसे एड्रेनल ग्रंथि कहा जाता है। इसकी सक्रियता अगर शरीर में ज्यादा होती है तो यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक बन जाता है। यह खराब आदत, तनाव, कम नींद, खराब खाना और कम शारीरिक स्थिति से अधिक बनना लगता है। इससे चिंता, वजन कम होना, कमजोरी महसूस होना, सिर भारी होना और नींद में परेशानी बनी रहती है, लेकिन आयुर्वेद में कॉर्टिसोल को कम करने के प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं। गहरी नींद के लिए कोर्टिसोल को कम करना बहुत जरूरी है। अच्छी और गहरी नींद लेने से शरीर में भरपूर हार्मोन बनता है, जो कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। रोजाना कम से कम 8-10 घंटे की नींद जरूर लें। इससे मन तन और दोनों प्रभाव महसूस होते हैं। अपरिभाषित में इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाएं। साथ ही, बार-बार खाने से बचें और तय समय पर खाना बनाएं, जिससे पेट को खाना पचाने के लिए पूरा समय मिले और पोषण भी पूरे शरीर को मिले। आंतरायिक फास्टिंग कोर्टिसोल को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। कोर्टिसोल को कम करने के लिए धूप और विटामिन डी का बड़ा रोल है। प्रतिदिन 10 मिनट की धूप जरूर लें। इससे शरीर में विटामिन डी की कमी पूरी तरह से होती है और कोर्टिसोल का प्रभाव शरीर पर कम दिखाई देता है। इसके साथ ही सॉसेज युक्त आहार लेना भी होता है। अपने आहार में केला, नारियल पानी, हरी सब्जी, टमाटर और मूंगफली को जरूर शामिल करें।
पनीर का सेवन हर किसी के लिए सही नहीं! जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

नई दिल्ली शाकाहारी लोगों के लिए पनीर प्रोटीन एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है। स्वाद और पोषण से भरपूरता के कारण यह बच्चों से लेकर युवाओं तक सभी को पसंद आता है। लेकिन हर सामान हर किसी के लिए हर समय सही नहीं होता। आयुर्वेद के अनुसार सही तरीके से खाया जाए तो अमृत समान होता है, अन्यथा यह पाचन संबंधी घटक भी पैदा हो सकता है। किन लोगों को पनीर खाने से बचना चाहिए?सबसे पहले उन लोगों की बात करें जिनमें पनीर सीमित मात्रा में या डॉक्टर की सलाह से ही खाना चाहिए- यूरिक एसिड बढ़ा हुआ हो: जिन लोगों को हाई यूरिक एसिड की समस्या है, उन्हें कम खाना खाना चाहिए। अधिक प्रोटीनयुक्त यूरिक एसिड को बढ़ाया जा सकता है, जिससे जोड़ों में दर्द बढ़ सकता है।फ़्रैंच पाचन वाले लोग: फ़्लोचाडा डी फ़ाल्कन है, उन्हें भारी मात्रा में चीज़ मिल सकती है। कच्ची चीज़ में पेट में गैस, दर्द और अपच की वजह बन सकती है।कफ या सांस की समस्या: साइनसाइटिस या बार-बार खांसी-जुकाम से परेशान लोगों को खाना कम खाना चाहिए, क्योंकि इसमें कफ हो सकता है।मोटापा और उच्च कोलेस्ट्रॉल: मोटापे या उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। पनीर खाने का सही तरीका क्या है?पनीर बनाने के लिए उसका सही सेवन अत्यंत आवश्यक है- हमेशा ताज़ा और घर का बना हुआ पनीर ही आकर्षककच्ची चीज़ खाने से बचते हुए, इसे पकाकर ही सेवन करेंपाचन के लिए अदरक, काली मिर्च और हल्दी जैसे पाउडर के साथ प्रभावीअधिक तला-भुना या भारी ग्रेवी वाला पनीर नियमित रूप से न स्थिर पनीर खाने का सही समयआयुर्वेद के अनुसार पनीर का सेवन दिन के समय में आदर्श में करना सबसे अच्छा माना जाता है। रात में पनीर खाने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि उस समय पाचन शक्ति कम हो जाती है और इससे पेट में भारीपन, गैस और अपच का कारण बन सकता है। क्यों होती है पनीर से परेशानी?पनीर “गुरु” (भारी) खाद्य पदार्थों में आता है, यानी इसे पचाने में समय लगता है। गलत समय, गलत मात्रा या गलत तरीके से खाना खाने से खट्टी डकार, गैस और पेट दर्द जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। सही तरीके अपनाएँ, लाभ लाभपनीर सेहत के लिए फायदेमंद है, लेकिन इसकी सही मात्रा, सही समय और सही तरीके से खाना जरूरी है। अगर आप अपने शरीर की जरूरत और पाचन क्षमता के अनुसार इसका सेवन करेंगे, तो यह आपको पोषण भी देगा और नुकसान से भी बचाएगा।
आयुर्वेद का खजाना हैं पपीते के पत्ते, जानें फायदे और सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली। अक्सर लोग पपीता खाते समय उसके पत्तों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन वास्तव में ये पत्ते कई औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पपीते के पत्ते शरीर को अंदर से मजबूत बनाने और कई समस्याओं से राहत दिलाने में बेहद प्रभावी हैं। पपीते के पत्तों में विटामिन A C और E प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके साथ ही इसमें पपेन नामक एंजाइम और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि इन्हें प्राकृतिक औषधि माना जाता है। पाचन तंत्र के लिए पपीते के पत्ते किसी वरदान से कम नहीं हैं। इनमें मौजूद एंजाइम भोजन को जल्दी पचाने में मदद करते हैं जिससे गैस अपच और पुरानी कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। नियमित और सही मात्रा में सेवन करने से पेट साफ रहता है और पाचन क्रिया बेहतर होती है। इसके अलावा पपीते के पत्तों का रस लिवर के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद तत्व शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं जिससे लिवर डिटॉक्स होता है और उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगी के दौरान भी पपीते के पत्तों का उपयोग लाभकारी माना जाता है। यह प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाने में सहायक हो सकता है हालांकि इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह उपयोगी है क्योंकि इसमें मौजूद फाइटोकेमिकल्स ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। साथ ही इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण शरीर की सूजन और जोड़ों के दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। सिर्फ सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी पपीते के पत्ते फायदेमंद हैं। इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण त्वचा को निखारते हैं और मुंहासों को कम करने में मदद करते हैं। वहीं बालों की जड़ों को मजबूत बनाकर उनके विकास को भी बढ़ावा देते हैं। हालांकि पपीते के पत्तों का सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए क्योंकि हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है। सही तरीके से उपयोग करने पर यह साधारण सा पत्ता आपकी सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
स्वस्थ और दमकती त्वचा पाने के आसान उपाय, Glowing Skin Care टिप्स

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अक्सर त्वचा की देखभाल पीछे रह जाती है, जिससे चेहरा डल और थका-सा नजर आने लगता है। लेकिन सही स्किनकेयर रूटीन, संतुलित आहार और जीवनशैली के बदलाव से आप अपनी त्वचा को प्राकृतिक चमक और दमकती निखार दे सकते हैं। महंगे प्रोडक्ट्स जरूरी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदतें और प्राकृतिक उपाय ही सबसे कारगर हैं। 1. स्किन क्लीनिंग और हाइड्रेशन: साफ-सुथरी और मुलायम त्वचाचेहरे की सफाई और हाइड्रेशन त्वचा की चमक बनाए रखने के लिए सबसे पहला कदम है। दिन में दो बार चेहरा धोना – सुबह और रात को – बहुत जरूरी है। इसके लिए हल्का फेस वॉश चुनें जो त्वचा के प्राकृतिक तेल को नुकसान न पहुंचाए। वहीं, हर त्वचा प्रकार के लिए मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल जरूरी है। यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ-साथ मुलायम बनाता है और उम्र के असर को भी धीमा करता है। 2. एक्सफोलिएशन से निखार: मृत त्वचा हटाकर चमक बढ़ाएंसप्ताह में 1–2 बार हल्का स्क्रब या एक्सफोलिएंट लगाने से त्वचा की मृत कोशिकाएं हटती हैं और चेहरा निखरता है। प्राकृतिक विकल्पों में बेसन-पानी का पेस्ट, या शहद और चीनी का हल्का स्क्रब बेहद कारगर है। यह न केवल त्वचा को मुलायम बनाता है बल्कि ग्लोइंग स्किन में भी मदद करता है। 3. सनस्क्रीन का महत्व: सूरज से सुरक्षासूरज की हानिकारक यूवी किरणें त्वचा की उम्र बढ़ा सकती हैं और डार्क स्पॉट्स पैदा कर सकती हैं। इसलिए एसपीएफ 30 या उससे ऊपर वाला सनस्क्रीन हर दिन इस्तेमाल करना चाहिए। यह त्वचा को सूरज की तेज धूप और प्रदूषण से बचाने में मदद करता है। 4. डाइट और पानी: अंदर से त्वचा को पोषण देंत्वचा की चमक के लिए हाइड्रेशन सबसे महत्वपूर्ण है। दिनभर 8–10 ग्लास पानी पीना चाहिए। इसके साथ ही, फलों और सब्जियों से भरपूर डाइट अपनाएं, जिनमें विटामिन C, E और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर हों। ये पोषक तत्व त्वचा को स्वस्थ और ग्लोइंग बनाते हैं। वहीं, ज्यादा तला-भुना और जंक फूड त्वचा को डल और बेजान कर सकता है। 5. होम रेमेडीज: प्राकृतिक निखार के आसान उपायहल्दी और दूध का फेस पैक चेहरे को नैचुरल ग्लो देता है।खीरे का जूस या पेस्ट त्वचा को ठंडक और नमी प्रदान करता है।एलोवेरा जेल सूजन कम करता है और त्वचा को हाइड्रेट करता है। ये उपाय रोजाना या सप्ताह में 2–3 बार अपनाए जा सकते हैं। 6. जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ आदतेंनींद पूरी करना – रात को कम से कम 7–8 घंटे सोएं।तनाव कम करना – तनाव हार्मोन बढ़ाता है, जिससे त्वचा डल और झुर्रियों वाली हो सकती है।व्यायाम और योगा – ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और त्वचा में प्राकृतिक निखार लाता है।
डैंड्रफ की समस्या बार-बार हो रही है? जानें किन बातों को रखें ध्यान में

नई दिल्ली। अगर आपको बार-बार डैंड्रफ का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण काफी आप परेशान हो गई हैं तब हम आपके लिए कुछ खास टिप्स लेकर आए हैं जिसे अपनाकर आप इसे ठीक कर सकती हैं। इसके साथ ही आपको कुछ बातों पर विशेष ध्यान रखना होगा उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना होगा वरना यह काफी बढ़ सकता है।कई लोग इससे छुटकारा पाने के लिए महंगे शैंपू, हेयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं जबकि आपको इससे जुड़ी सारी बातों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। क्यों बढ़ता है डैंड्रफबार-बार होने वाला डैंड्रफ शरीर या स्कैल्प में किसी अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। अगर आपको ऐसी बार-बार समस्या हो रही है तब आपको इस पर बहुत अच्छे से विचार करना चाहिए इसे बिल्कुल भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। वरना आगे जाकर यह समस्या काफी ज्यादा आपको परेशान कर सकती है। स्कैल्प का ड्राई होनाडैंड्रफ का सबसे कॉमन कारण होता है जब आपका स्कैल्प सूखा होता है। जब सिर की स्किन में नमी की कमी हो जाती है, तो ऊपरी परत सूखकर झड़ने लगती है और सफेद परत के रूप में दिखाई देती है। स्कैल्प में ऑयल और गंदगी का जमा होनाअगर बालों की रेगुलर सफाई नहीं की जाती, तो स्कैल्प पर तेल, धूल और गंदगी जमा होने लगती है। यह स्थिति बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है, जिससे डैंड्रफ तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए आपको इन सब चीजों पर ध्यान रखना चाहिए। गलत हेयर प्रोडक्ट्सऐसे शैंपू या हेयर प्रोडक्ट्स जो आपके स्कैल्प के अनुकूल नहीं होते, वे समस्या को और बढ़ा सकते हैं। ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स स्कैल्प को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए आपको बार-बार अपने शैंपू को नहीं बदलना चाहिए। इन सबका अगर आप अच्छे से ध्यान रखेंगी तो आपको काफी फायदा होगा।
काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

नई दिल्ली। बीते 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों, होटलों और अन्य जगहों पर इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक कंटेनरों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते, बल्कि इन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरे और अन्य बचे हुए प्लास्टिक से बनाया जाता है। उनका कहना था कि ऐसे डिब्बों में गर्म खाना रखने से माइक्रोप्लास्टिक कण भोजन में मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इस पर विशेषज्ञों की राय। कैसे तैयार होता है यह प्लास्टिक रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक को बनाने में अक्सर ई-वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे आग से सुरक्षित बनाने के लिए डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं। समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में स्थिर नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में घुल सकते हैं, खासकर जब भोजन गरम या तैलीय हो। इसके अलावा, इसमें BPA और फ्थेलेट्स जैसे रसायन भी पाए जाते हैं, जिन्हें हार्मोन प्रभावित करने वाले तत्व माना जाता है। बार-बार इस्तेमाल या गर्म करने पर ये रसायन शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। क्या कहते हैं विशेषज्ञ 2024 में हुई एक स्टडी में 200 से अधिक ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का परीक्षण किया गया, जिसमें करीब 85 प्रतिशत में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वहीं BPA और फ्थेलेट्स हार्मोनल असंतुलन के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन संबंधी समस्याओं का भी जोखिम है। इसके अलावा ब्लैक प्लास्टिक से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ा सकते हैं, जिससे भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। किन लोगों को अधिक खतरा विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। हालांकि अभी तक इसका कैंसर से सीधा संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक की जगह कांच, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का इस्तेमाल करें। खासतौर पर गर्म भोजन रखने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
गर्मी में गुलकंद का कमाल: थकान और पाचन समस्याओं से दिलाए राहत, शरीर को रखे ठंडा

नई दिल्ली।गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक देने वाले पारंपरिक और प्राकृतिक उपायों की याद आने लगती है। इन्हीं में से एक है गुलाब की ताजा पंखुड़ियों से बना गुलकंद, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि शरीर और मन दोनों को शीतल रखने में मदद करता है। बढ़ती गर्मी, थकान और पाचन संबंधी समस्याओं के बीच गुलकंद एक ऐसा घरेलू उपाय है, जो वर्षों से भारतीय रसोई का अहम हिस्सा रहा है। परंपरा और स्वाद का अनोखा संगमगुलकंद को बनाने की विधि जितनी सरल है, उतनी ही खास भी। ताजी गुलाब की पंखुड़ियों को चीनी या गुड़ के साथ मिलाकर धूप में धीरे-धीरे पकाया जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक मिठास और खुशबू बरकरार रहती है। यह सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और घरेलू नुस्खों की पहचान भी है। पहले के समय में दादी-नानी इसे घर पर बनाकर बच्चों को खिलाती थीं, जिससे उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता था और शरीर को ठंडक भी मिलती थी। गर्मी से राहत दिलाने में कारगरस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गुलकंद की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है। गर्मियों में अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस होती है। ऐसे में गुलकंद का सेवन शरीर को भीतर से ठंडक देता है और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है, जिससे लू और अत्यधिक गर्मी के असर को कम किया जा सकता है। पाचन तंत्र के लिए फायदेमंदगुलकंद का एक बड़ा फायदा इसका पाचन पर सकारात्मक असर है। गर्मियों में अक्सर गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। रोजाना सीमित मात्रा में गुलकंद का सेवन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और पेट को ठंडा रखता है। यह भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और पेट से जुड़ी असहजता को कम करता है। त्वचा और इम्यूनिटी को भी फायदागुलकंद में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। गर्मी के कारण त्वचा पर पड़ने वाले असर-जैसे रूखापन, बेजानपन और जलन को कम करने में भी यह सहायक होता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है और शरीर अंदर से तरोताजा महसूस करता है। सेवन के आसान और स्वादिष्ट तरीकेगुलकंद को कई तरह से अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। इसे सीधे चम्मच से खाया जा सकता है, ठंडे दूध या दही में मिलाकर शरबत बनाया जा सकता है या मिठाइयों जैसे हलवा, लड्डू और आइसक्रीम में इस्तेमाल किया जा सकता है। गर्मियों में गुलकंद वाला दूध या शरबत खासतौर पर लोगों का पसंदीदा पेय बन जाता है, जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है। सावधानी भी है जरूरीहालांकि गुलकंद के कई फायदे हैं, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसमें मिठास अधिक होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही, घर का बना शुद्ध गुलकंद बाजार के पैकेट वाले उत्पादों से अधिक लाभकारी होता है।