Chambalkichugli.com

बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन नहीं, लिवर की समस्या का भी संकेत हो सकता है

नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी समस्याओं को लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं। खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट फूलना या भारीपन महसूस होना आम बात मान ली जाती है, लेकिन बार-बार ऐसा होना शरीर के अंदर किसी गहरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल पाचन तंत्र की गड़बड़ी नहीं बल्कि लिवर की कार्यप्रणाली में कमी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। पाचन और लिवर का गहरा संबंधबहुत से लोग यह नहीं जानते कि पाचन प्रक्रिया में लिवर की अहम भूमिका होती है। लिवर पित्त (बाइल) का निर्माण करता है, जो वसा को तोड़ने और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है। जब लिवर सही मात्रा में पित्त नहीं बना पाता या उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पचता। इसका परिणाम गैस, अपच, पेट में भारीपन और ब्लोटिंग के रूप में सामने आता है। यही कारण है कि लंबे समय तक गैस की समस्या बने रहना लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकता है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाजअगर आपको बार-बार गैस बनना, पेट फूलना, हल्का दर्द, भूख कम लगना या खाना खाने के बाद असहजता महसूस होती है, तो यह केवल सामान्य समस्या नहीं है। ये लक्षण बताते हैं कि आपका पाचन तंत्र और लिवर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। समय रहते इन संकेतों को पहचानना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके। खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजहआजकल की अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहे हैं। देर रात खाना खाना, जंक फूड का अधिक सेवन, तला-भुना भोजन और अत्यधिक मीठा खाना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके कारण लिवर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और पाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर फैटी लिवर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। लिवर को स्वस्थ रखने के उपायलिवर और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। सुबह खाली पेट गिलोय का रस पीना फायदेमंद माना जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ लिवर की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना चाहिए। रिफाइंड शुगर का सेवन कम करना भी जरूरी है, क्योंकि यह लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और नियमित व्यायाम करना भी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। समय पर जांच और सावधानी है जरूरीयदि समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। केवल गैस की दवा लेने से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मूल कारण को समझना और उसका इलाज करना अधिक महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और सही उपचार से न केवल पाचन तंत्र बल्कि लिवर को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।

गर्मी में राहत का देसी उपाय: रोज पिएं आम पन्ना, मिले ठंडक और एनर्जी

नई दिल्ली।  गर्मियों का मौसम आते ही तेज धूप और बढ़ता तापमान शरीर पर भारी पड़ने लगता है। ऐसे में शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी हो जाता है। हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि इस मौसम में ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन किया जाए। इन्हीं में एक पारंपरिक और बेहद फायदेमंद पेय है आम पन्ना, जो न सिर्फ आपको ठंडक देता है बल्कि तुरंत ऊर्जा भी प्रदान करता है। नेशनल हेल्थ मिशन भी गर्मी के दिनों में पर्याप्त तरल पदार्थ लेने पर जोर देता है, ताकि शरीर डिहाइड्रेशन से बचा रहे। ऐसे में आम पन्ना एक बेहतरीन देसी विकल्प बनकर सामने आता है। कच्चे आम से तैयार यह पेय शरीर को अंदर से ठंडा करता है और लू के असर को कम करने में मदद करता है। आम पन्ना बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान है। कच्चे आमों को उबालकर या भूनकर उनका गूदा निकाला जाता है, फिर इसमें चीनी या गुड़, भुना जीरा, काला नमक, साधारण नमक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट पेय तैयार किया जाता है। इसका स्वाद जितना लाजवाब होता है, फायदे उससे कहीं ज्यादा होते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि आम पन्ना शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करता है। गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम की कमी हो जाती है, जिसे यह ड्रिंक संतुलित करता है। इससे थकान कम होती है और शरीर को इंस्टेंट एनर्जी मिलती है। इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। कच्चे आम में मौजूद फाइबर और एसिड पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, वहीं पुदीना और जीरा गैस, एसिडिटी और कब्ज जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में पेट से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए आम पन्ना बेहद कारगर माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन C इम्युनिटी को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है। साथ ही, यह शरीर के तापमान को संतुलित रखता है और हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। आम पन्ना त्वचा के लिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो त्वचा को हेल्दी और ग्लोइंग बनाते हैं। इतना ही नहीं, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह लीवर को भी सपोर्ट करता है और अगर सीमित मात्रा में लिया जाए तो वजन नियंत्रण में भी सहायक हो सकता है। कैसे बनाएं आम पन्ना:2-3 कच्चे आमों को उबाल लें या भून लें। ठंडा होने पर छीलकर गूदा निकाल लें। इसमें स्वादानुसार चीनी या गुड़, भुना जीरा पाउडर, काला नमक, सादा नमक और बारीक कटा पुदीना मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे ठंडा पानी मिलाकर सर्व करें।

कमर दर्द सिर्फ मांसपेशियों का खिंचाव नहीं ये 4 गंभीर कारण भी हो सकते हैं जिम्मेदार

नई दिल्ली: कमर दर्द आज के समय में एक आम समस्या बन चुका है लेकिन इसे हमेशा सिर्फ मांसपेशियों के खिंचाव तक सीमित मान लेना सही नहीं है। लंबे समय तक बैठने गलत पोस्चर और कम शारीरिक गतिविधि के कारण यह समस्या बढ़ जाती है। लेकिन जब दर्द लगातार बना रहे तो इसके पीछे कई गंभीर कारण भी हो सकते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कमर दर्द का एक बड़ा कारण रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क में आने वाली समस्या हो सकती है। यह डिस्क कुशन की तरह काम करती है और जब यह उभर जाती है या खराब हो जाती है तो रीढ़ पर दबाव बढ़ता है जिससे तेज और लगातार दर्द होने लगता है। इसे नजरअंदाज करना आगे चलकर और गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। इसके अलावा रीढ़ की हड्डी में छोटे फ्रैक्चर भी कमर दर्द का कारण बन सकते हैं। इन फ्रैक्चर को कंप्रेशन फ्रैक्चर कहा जाता है जो हड्डियों को कमजोर और अस्थिर बना देते हैं। यह समस्या अक्सर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों में देखने को मिलती है जहां हड्डियां इतनी कमजोर हो जाती हैं कि सामान्य गतिविधियों जैसे खांसने या झुकने पर भी फ्रैक्चर हो सकता है। एक और गंभीर कारण है स्पाइनल स्टेनोसिस। इस स्थिति में रीढ़ की हड्डी के अंदर की जगह संकरी हो जाती है जिससे नसों पर दबाव पड़ता है। इसके चलते मरीज को जलन वाला दर्द पैरों में कमजोरी ऐंठन और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। कई बार यह समस्या इतनी बढ़ जाती है कि व्यक्ति को मूत्र संबंधी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा अन्य कारणों में नसों का दबना चोट पुरानी सूजन या गलत जीवनशैली भी शामिल हो सकती है। लगातार एक ही जगह बैठना भारी वजन उठाना या गलत तरीके से झुकना भी कमर दर्द को बढ़ा सकता है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते सही जांच कराई जाए और समस्या की जड़ को समझा जाए। डॉक्टर्स की सलाह के अनुसार अगर कमर दर्द कुछ दिनों से ज्यादा बना रहे या इसके साथ सुन्नपन कमजोरी या तेज जलन महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर इलाज और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। कमर दर्द को हल्के में लेना कई बार बड़ी समस्या का कारण बन सकता है इसलिए जरूरी है कि इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते इसका सही समाधान करें।

बिना साइड इफेक्ट शुगर कंट्रोल मेथी दालचीनी तुलसी और एलोवेरा का कमाल

नई दिल्ली । आज के समय में डायबिटीज एक गंभीर लाइफस्टाइल बीमारी के रूप में तेजी से बढ़ रही है। बदलती जीवनशैली असंतुलित खानपान और तनाव के कारण यह समस्या अब हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है। ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना कई लोगों के लिए चुनौती बन जाता है और वे अक्सर दवाओं पर निर्भर हो जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही खानपान और घरेलू उपायों को अपनाया जाए तो शुगर लेवल को काफी हद तक प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। भारतीय रसोई में मौजूद कुछ सामान्य चीजें ऐसी हैं जो डायबिटीज को नियंत्रित करने में बेहद प्रभावी मानी जाती हैं। सबसे पहले बात करें मेथी दाना की तो यह घुलनशील फाइबर से भरपूर होता है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है जिससे भोजन के बाद अचानक बढ़ने वाला शुगर लेवल नियंत्रित रहता है। इसके नियमित सेवन से मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है। रात में मेथी दाना भिगोकर सुबह उसका पानी पीना और दाने चबाकर खाना फायदेमंद माना जाता है। दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है दालचीनी। यह न केवल खाने का स्वाद बढ़ाती है बल्कि शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को भी बेहतर बनाती है। नियमित सेवन से फास्टिंग ब्लड शुगर को कम करने में मदद मिलती है। इसे हर्बल चाय या भोजन के साथ आसानी से शामिल किया जा सकता है। तीसरा महत्वपूर्ण तत्व है तुलसी जो आयुर्वेद में औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। तुलसी शरीर में तनाव हार्मोन को कम करती है जिससे पैनक्रियाज बेहतर तरीके से काम करता है और ब्लड शुगर स्तर संतुलित रहता है। रोजाना कुछ तुलसी की पत्तियों का सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है। चौथा उपाय है एलोवेरा जो अपने औषधीय गुणों के कारण जाना जाता है। इसमें ऐसे सक्रिय तत्व पाए जाते हैं जो ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल को भी संतुलित रखने में सहायक होता है। हालांकि एलोवेरा का सेवन सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए। इन घरेलू उपायों के साथ साथ जीवनशैली में बदलाव भी बेहद जरूरी है। नियमित रूप से व्यायाम करना रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना संतुलित आहार लेना और समय पर भोजन करना डायबिटीज नियंत्रण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं लेकिन वे चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं हैं। इसलिए यदि आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो इन उपायों को अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। सही दिनचर्या और प्राकृतिक उपायों के साथ आप अपने शुगर लेवल को संतुलित रख सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

सेहत और ऊर्जा का राज महिलाओं के लिए ये सात फूड्स बेहद जरूरी

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में महिलाएं अक्सर अपने परिवार की देखभाल करते करते खुद की सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इसका असर यह होता है कि उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और धीरे धीरे कमजोरी हार्मोन असंतुलन और कई गंभीर बीमारियां उन्हें घेर लेती हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने दैनिक आहार में कुछ खास पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करें ताकि उनका शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहे। सबसे पहले बात करें रागी की तो यह कैल्शियम आयरन और फाइबर से भरपूर होती है। रागी का नियमित सेवन हड्डियों को मजबूत बनाता है और शरीर में ऊर्जा बनाए रखता है। इसे रोटी चीला या लड्डू के रूप में आसानी से खाया जा सकता है। इसके अलावा यह बाल और त्वचा के लिए भी बेहद फायदेमंद होती है। दूसरा महत्वपूर्ण आहार है आंवला जो विटामिन सी का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और संक्रमण से बचाने में मदद करता है। आंवले को जूस चटनी या मुरब्बे के रूप में रोजाना लिया जा सकता है। तीसरे स्थान पर चिया सीड्स आते हैं जो कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और वजन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। चिया सीड्स को पानी दूध या स्मूदी में मिलाकर आसानी से सेवन किया जा सकता है। चौथे नंबर पर अलसी के बीज हैं जो ओमेगा 3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत होते हैं। यह दिल को स्वस्थ रखते हैं और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही हार्मोन संतुलन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और यह पीसीओडी जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माने जाते हैं। पांचवें स्थान पर कद्दू के बीज आते हैं जो मैग्नीशियम और जिंक से भरपूर होते हैं। यह शरीर की कई जरूरी क्रियाओं को संतुलित रखते हैं और थायराइड जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करते हैं। रोजाना एक चम्मच कद्दू के बीज का सेवन शरीर के लिए लाभदायक होता है। छठे नंबर पर अखरोट का नाम आता है जो मस्तिष्क को मजबूत बनाने और याददाश्त को बेहतर करने में मदद करता है। इसके नियमित सेवन से नसों की कमजोरी दूर होती है और बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। सातवें और आखिरी स्थान पर चुकंदर है जो शरीर में खून की कमी को दूर करने में बेहद कारगर माना जाता है। महिलाओं में एनीमिया की समस्या आम होती है ऐसे में चुकंदर का सेवन रक्त की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है। इसे सलाद जूस या रोटी के रूप में आहार में शामिल किया जा सकता है। इन सात चीजों को अपने रोजाना के आहार में शामिल करके महिलाएं न केवल अपनी सेहत को बेहतर बना सकती हैं बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा और संतुलन बनाए रख सकती हैं। सही खानपान ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव है और छोटी छोटी आदतें ही बड़े बदलाव लाती हैं।

मां जगदम्बा की पूजा से लेकर शरीर की देखभाल तक, दूब घास का अद्भुत उपयोग

नई दिल्ली । घास का महत्व केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य और शरीर की देखभाल में भी अहम भूमिका निभाती है। विशेष रूप से दूब घास, जिसे आयुर्वेद में ‘अमृता’ की उपाधि दी गई है, शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी मानी जाती है। नवरात्रि में मां जगदम्बा की पूजा में दूब घास का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बिना दूब के पूजन अधूरा माना जाता है। घर में कन्या पूजन के समय भी दूब घास का इस्तेमाल पैर छूने और सम्मान के लिए किया जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा दूब घास के गुणों को आयुर्वेद में कई तरह से दर्शाया गया है। यह कफ और वात को संतुलित करने वाली औषधि मानी जाती है। यदि शरीर में वात या कफ असंतुलित हैं तो दूब घास का उचित सेवन इन दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। लेकिन इसके सही उपयोग से पहले इसके आंतरिक और बाहरी गुणों को जानना बेहद आवश्यक है। बाहरी उपयोग: दूब घास में रक्त को रोकने की क्षमता होती है। चोट लग जाने पर यदि रक्त नहीं रुक रहा है या पुराने घाव में बार-बार खून आता है, तो दूब का लेप किया जा सकता है। यह घाव को भरने और संक्रमण से बचाने में भी मदद करता है। गर्मियों में नाक से खून आना या सिरदर्द जैसी समस्याओं में दूब के रस को नाक में डालना आराम देता है। इसके अलावा, मुल्तानी मिट्टी के साथ मिलाकर सूंघने से भी राहत मिलती है। यदि गर्मियों में त्वचा जलने लगती है, तो दूब का लेप त्वचा को ठंडक और आराम प्रदान करता है।आंतरिक उपयोग: दूब घास का आंतरिक सेवन पेट संबंधी परेशानियों और मासिक धर्म के दर्द में लाभकारी होता है। इसके लिए दूब का रस लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। आयुर्वेद में इसे पाचन सुधारने और शरीर को पोषण देने वाला उपाय माना गया है। सीमित मात्रा में इसका नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा, मजबूती और आंतरिक शांति प्रदान करता है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि दूब घास का अधिक सेवन या गलत तरीके से इस्तेमाल करने से प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ सकते हैं। इसलिए बाहरी या आंतरिक उपयोग में आयुर्वेदिक और चिकित्सकीय मार्गदर्शन को अपनाना आवश्यक है। इस प्रकार दूब घास का महत्व सिर्फ धार्मिक पूजा में ही नहीं, बल्कि शरीर और स्वास्थ्य के लिए भी अद्वितीय है। बाहरी लेप के रूप में इसका प्रयोग चोट, जलन और रक्तस्राव में राहत देता है, वहीं आंतरिक रूप में इसका सेवन पेट, मासिक धर्म और दोष संतुलन के लिए उपयोगी है। नवरात्रि या किसी भी दिन इसे सही तरीके से अपनाकर व्यक्ति स्वास्थ्य और आध्यात्मिक लाभ दोनों प्राप्त कर सकता है।

LOTUS FLOWER BENEFITS : केवल बाहरी सौंदर्य ही नहीं, भीतर स्थिरता और संतुलन लाने में मदद करता है कमल का फूल

  LOTUS FLOWER BENEFITS : नई दिल्ली कमल को पूज्यनीय फूलों में गिना जाता है क्योंकि यह महालक्ष्मी को बहुत प्रिय है। मां लक्ष्मी की आराधना कमल के फूल से की जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि कमल का फूल औधषीय गुणों से भरपूर है। फूलों में सबसे सुंदर दिखने वाला कमल शुद्धता, शीतलता और संतुलन का प्रतीक है। आयुर्वेद में कमल को शीतल, मन को शांत और त्वचा और पेट को शांति देने वाला फूल माना जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक कमल केवल बाहरी सौंदर्य नहीं बढ़ाता बल्कि भीतर की स्थिरता और संतुलन का भी स्मरण कराता है। कीचड़ में जन्म लेने के बाद भी कमल में कई औषधीय गुण विद्यमान होते हैं, जो इसे बाकी सुंदर फूलों से अलग बनाते हैं। कमल पित्त को संतुलित करता है और शरीर में रक्त का संचार को भी ठीक करता है, जिससे हृदय पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। गर्मियों में पाचन की गड़बड़ी और ज्यादा तेलीय और तीखा खाने की वजह से पेट से जुड़े समस्याओं परेशान करने लगती है। गर्मियों में अतिसार की परेशानी आम है। ऐसे में कमल के पत्तों का ताजा रस पेट को ठंडक देकर अतिसार को रोकता है। यह बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए लाभकारी है। बवासीर की परेशानी में भी कमल का उपयोग लाभकारी माना गया है। आयुर्वेद में कमल के पत्तों का चूर्ण या कंद के चूर्ण को ठंडे दूध में मिलाकर दिन में दो बार लेना चाहिए। इससे पेट में शीतलता बनी रहती है और बवासीर की वजह से होने वाला मल से रक्त का रिसाव भी कम हो जाता है। हालांकि उसका इस्तेमाल शुरुआती स्टेज में ही करें। गंभीर लक्षण होने पर चिकित्सक के पास जरूर जाएं। गर्मियों में तापमान बढ़ने की वजह से उच्च रक्तचाप की परेशानी आम है। इसके लिए कमल के फूल से बनी औषधि बाजार में आसानी से मिल जाती है। औषधि के साथ (चिकित्सक की सलाह पर) दूध का सेवन भोजन से पहले करें। औषधि का सेवन बिना चिकित्सक की सलाह के न करें। गर्मियों में यूटीआई और जलन की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती है। दूषित पानी पीने या फिर कम पानी पीने की वजह से यूटीआई की परेशानी होती है। ऐसे में गुलकंद और दूध का सेवन यूटीआई में होने वाली जलन को कम करने में मदद करता है।

रोज ट्रैवल के दौरान कैसे रखें स्किन का ध्यान? अपनाएं ये ट्रिक

नई दिल्ली ऑफिस के दौरान महिलाओं को अक्सर घर से बाहर जाना ही पड़ता है। ऐसे में सबसे पहले यह ख्याल आता है कि गर्मी की शुरुआत में ही वह अपनी स्क्रीन पर ध्यान कैसे देंगी।धूप, धूल और पॉल्यूशन की वजह का बुरा असर स्किन पर पड़ता है। यही वजह है कि आज के समय में कम उम्र में ही स्किन में डलनेस, ऑयल, एक्ने यहां तक कि एजिंग के साइन भी नजर आने लगते हैं। लेकिन आपको डरने की जरूरत नहीं है बस आपको इस ट्रिक को अपनाने की जरूरत है। इस प्रकार रखें स्क्रीन का ध्यानकई बार देखा जाता है कि हम अपनी स्कीम में निखार लाने के चक्कर में कई बार प्रोडक्ट भी बदलते रहते हैं ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए बार-बार अलग-अलग तरीके का प्रोडक्ट उसे करने से भी आपकी स्क्रीन डैमेज हो जाती है। क्योंकि कभी वह प्रोडक्ट आपको शूट करते हैं और कभी नहीं। इसलिए आपको घर पर ही कुछ खास पेस्ट और उबटन बनाकर स्क्रीन पर अप्लाई करना चाहिए। रूखी व बेजान स्किनजब आप ट्रैवल करते हैं तो इस दौरान एसी, हीट व पॉल्यूशन की वजह से स्किन रूखी व बेजान हो जाती है। इसलिए आपको घर आने के बाद बेसन हल्दी दही शहद मिलाकर एक पेस्ट तैयार कर लेना चाहिए और इसको हफ्ते में तीन-चार दिन अपने स्क्रीन पर और चेहरे पर अप्लाई करना चाहिए फिर इसे धूल देना चाहिए ऐसा करने से आपकी स्किन में रूखापन चला जाएगा और त्वचा मुलायम रहेगी और निखार भी दिखेगा। स्किन प्रोटेक्शनअगर आप रोज ट्रैवल करती हैं तो स्किन प्रोटेक्शन के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं। यह यूवी किरणें और पॉल्यूशन से स्किन को प्रोटेक्ट करने में मदद करता है। इसके साथ ही आप चाहें तो रोजाना रात में एक बार अपने चेहरे पर एलोवेरा पेस्ट जरूर लगाएं। इसे आप घर पर ही बना सकती हैं। एलोवेरा को एक बॉल में निकाल कर रोजाना अप्लाई करें इससे आपके चेहरे की रंगत हमेशा बनी रहेगी।

Travel Tips: बिना देरी के निकल जाएं इन जगहों पर, सुंदर हरा -भरा दिखेगा नजारा

नई दिल्ली  अगर आप कई दिनों से घूमने की इच्छा रख रहे हैं तो यह समय आपके लिए बिल्कुल सही है। इस समय मार्च के महीने में ना तो ठंडी लगेगी और ना तो गर्मी। यह मौसम घूमने के लिए काफी अच्छा माना जाता है। तो अगर आपको घूमने की जगह समझ नहीं आ रही है तो चलिए आपके लिए हम ऐसे कई जगहों के बारे में पूरी जानकारी लेकर आए हैं। मनालीइस समय मनाली का मौसम काफी सुनहरा है। यहां पर अभी भी काफी तेजी से बर्फबारी हो रही है तो अगर आपको मार्च और अप्रैल के महीने में भी बर्फबारी का आनंद उठाना है तो आप मनाली की तरह रख कर सकते हैं। मनाली में आपको कई ऐसी जगह मिल जाएगी जहां पर आप काफी अच्छी एक्टिविटी भी कर सकेंगे। इसके साथ ही वहां के स्ट्रीट फूड और वहां के सुंदर-सुंदर नजारे आप अपने कमरे में रिकॉर्ड कर सकते हैं और अच्छी यादें बना सकते हैं। शिमलाइस समय मौसम काफी अच्छा है हल्की-हल्की बारिश भी हो रही है तो ऐसे में आपको शिमला जरूर जाना चाहिए।अगर आपको पहाड़ों की ठंडी हवा और हरियाली से प्यार है आप ह‍िमाचल का रुख कर सकते हैं। इन हिल स्टेशन पर जाना आपके लिए स्वर्ग से कम नहीं होगा। अप्रैल में यहां का मौसम काफी रोमांट‍िक होता है। हरी-भरी वादियां आपको मंत्रमुग्‍ध कर सकती हैं। आप यहां कई तरह के एडवेंचर स्‍पोर्ट्स में भी ह‍िस्‍सा ले सकते हैं। मेघायलमेघालय घूमने का प्‍लान है तो मार्च और अप्रैल का महीना बेस्ट माना जाता है। इस दाैरान यहां न बहुत ज्यादा सर्दी होती है और न ही गर्मी। एडवेंचर और नेचर लवर्स के लिए तो ये जगह जन्नत से कम नहीं है। हर थोड़ी दूर पर यहां आपको वाटरफॉल्स देखने को म‍िल जाएंगे। हालांकि कुछ वाटरफॉल्स को देखने के लिए आपको लंबी ट्रैकिंग भी करनी पड़ सकती है। आपको वहां पहुंचकर अलग ही नजारा देखने को मिलेगा।

भूटान का पारो फेस्टिवल संस्कृति आस्था और रंगों का अद्भुत उत्सव..

नई दिल्ली:  भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां मनाए जाने वाले विभिन्न त्योहार लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं और सामाजिक एकता को मजबूत करते हैं। इन्हीं में से सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध उत्सव है पारो त्शेचू फेस्टिवल यह उत्सव हर साल वसंत ऋतु में मनाया जाता है, आमतौर पर अप्रैल के शुरुआती दिनों में। इस वर्ष यह फेस्टिवल 29 मार्च से 2 अप्रैल तक आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भूटान की आस्था, संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रदर्शन है पारो त्शेचू के दौरान भिक्षु और स्थानीय लोग पारंपरिक मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं और बौद्ध मंत्रों का जाप करते हैं। यह नृत्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरी धार्मिक मान्यताओं और कहानियों को दर्शाता है इस उत्सव में लोग रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में शामिल होते हैं, जिससे पूरा वातावरण जीवंत और आकर्षक बन जाता है। यहां होने वाले मुखौटा नृत्य प्राचीन बौद्ध कथाओं और ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं इस फेस्टिवल में गुरु पद्मसंभव की कहानियों को भी दर्शाया जाता है, जिन्होंने भूटान में बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। माना जाता है कि उन्होंने भूटान के सम्राट को ठीक करने में मदद की थी और इसी से तिब्बती बौद्ध धर्म की शुरुआत हुई पारो त्शेचू फेस्टिवल केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भूटान की संस्कृति, आस्था और विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने वाला एक भव्य उत्सव है