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अब आप घर पर ही बना सकते हैं हेयर कलर, अपनाएं ये ट्रिक

नई दिल्ली। आज के समय में लोगों के बाल जल्दी सफेद होने लगते हैं। यह बाहरी खान-पान और पॉल्युशन के कारण से हो सकता है। हालांकि इसे ठीक करने के लिए लोग बाहर से बालों को कलर करवा लेते हैं। लेकिन कई बार यह कलर आपके बालों को भी डैमेज कर सकते हैं बार-बार अगर अधिकतर मात्रा में से उगाया जाए तो। इसके साथ ही आपको इन कलर में कई ज़्यादा पैसे भी खर्च करने पड़ते हैं। अगर आप यह सोच रहे हैं कि कुछ ऐसा हाथ लग जाए जो नेचरली हो और बाल भी कलर हो जाए। तो हम आपके लिए ऐसा ही कुछ लेकर आए हैं। घर पर बना सकते हैं हेयर कलरअब आप घर पर ही हेयर कलर बन सकते हैं और उसका इस्तेमाल घर पर ही कर सकते हैं। आप इस रंग को घर पर बनाकर बालों में अप्लाई कर सकते हैं। ऐसा करने से आपके बाल भी घुंघराले रहेंगे। इसके साथ ही आपके बाल अमोनिया और ब्लीच के इस्तेमाल से बच जाएंगे। आइए आपको बताते हैं कि कैसे घर पर ही अपने बालों का कलर करें। रंग बनाने के लिए सामग्रीचुकंदर का रस- 3 से 4 चम्मचमेहंदी- 4 चम्मचकॉफी पाउडर – 1 चम्मच इस प्रकार बनाए हेयर कलरसबसे पहले आप फ्रेश चुकंदर लें। अब इसका रस निकालना है और इसे एक कटोरी में रख दें। इसके बाद एक कटोरी में मेहंदी को डालें। इसमें चुकंदर का रस और कॉफी पाउडर को पानी में घोलकर डालें। फिर इस मिश्रण अच्छे से घोल लें। जरूरतों के हिसाब से इसमें पानी को मिक्स करें। जब घोल तैयार हो जाए, तो इसे 10 मिनट के लिए ऐसे ही छोड़ दें। लगाने का सही तरीकासबसे पहले बालों में कंघी कर लें। इस बात का ध्यान रखें कि आपके बाल उलझे नहीं। अब इसे ब्रश की मदद से सिर पर लगाएं। पूरे बालों के कवर करने के बाद वाले कैप पहन लें। इसको आप कम से कम 3 से 4 घंटे तक लगा रहने दें। इसके बाद बालों को सिर्फ उपजाऊ पानी से लगाएं, उस दिन कोमल का इस्तेमाल करें। इसलिए कलर को सेट होने के लिए 24 से 48 घंटे का समय दें, उसके बाद ही हल्के कोमल से बाल लगाएं।

Yoga Tips: रोज सिर्फ 5 मिनट करें वृक्षासन, हड्डियां होंगी मजबूत और दिमाग रहेगा शांत

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार और तनाव से भरी जिंदगी में शारीरिक फिटनेस के साथ मानसिक संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में योग एक ऐसा प्रभावी उपाय है, जो न केवल शरीर को मजबूत बनाता है बल्कि मन को भी शांत और स्थिर करता है। खासतौर पर वृक्षासन एक ऐसा आसान लेकिन बेहद असरदार योगासन है, जिसे रोजाना सिर्फ 5 मिनट करने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। वृक्षासन का अर्थ ही है पेड़ की तरह स्थिर और मजबूत खड़े रहना। यह आसन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी कैसे संतुलन बनाए रखा जाए। जब आप एक पैर पर खड़े होकर शरीर को संतुलित करते हैं, तो यह न केवल आपकी शारीरिक क्षमता को बढ़ाता है बल्कि मानसिक एकाग्रता को भी मजबूत करता है। नियमित अभ्यास से दिमाग और मांसपेशियों के बीच तालमेल बेहतर होता है, जिससे शरीर की कार्यक्षमता बढ़ती है। इस योगासन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही पैरों की मांसपेशियां टोन होती हैं और शरीर का संतुलन सुधरता है। जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है। एक पैर पर संतुलन बनाने की प्रक्रिया फोकस और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे काम में एकाग्रता भी बेहतर होती है। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वृक्षासन बेहद लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के वात दोष को संतुलित करता है, जिससे तनाव, घबराहट और मानसिक अस्थिरता में कमी आती है। नियमित अभ्यास से मन शांत रहता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है। इस आसन को करने का सबसे सही समय सुबह का होता है, जब पेट खाली हो। अगर आप इसे शाम के समय करना चाहते हैं, तो भोजन और योग के बीच कम से कम 4 से 6 घंटे का अंतर रखना जरूरी है। अभ्यास शुरू करने से पहले शरीर को तैयार करने के लिए हल्के वार्म-अप जैसे स्ट्रेचिंग या अन्य योगासन करना फायदेमंद रहता है। हालांकि, इस आसन को करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, किसी प्रकार की गंभीर चोट या माइग्रेन की समस्या है, उन्हें इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए। बिना मार्गदर्शन के अभ्यास करने से बचना बेहतर होता है। कुल मिलाकर, वृक्षासन केवल एक योगासन नहीं, बल्कि शरीर और मन को संतुलित करने का एक सरल विज्ञान है। अगर आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में बेहतर फोकस, मजबूत हड्डियां और मानसिक शांति चाहते हैं, तो इस आसान आसन को अपनी दिनचर्या में जरूर शामिल करें।

माइग्रेन का आसान टेस्ट घर पर, समझें 5-4-3-2-1 फॉर्मूला और बचाव..

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में सिरदर्द एक आम समस्या बन चुकी है लेकिन हर सिरदर्द को नजरअंदाज करना सही नहीं होता क्योंकि यह माइग्रेन भी हो सकता है यह एक जटिल न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसकी समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी है विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन को पहचानने के लिए 5-4-3-2-1 का एक आसान फॉर्मूला अपनाया जाता है जिसे आम व्यक्ति भी समझ सकता है इस फॉर्मूले के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को जीवन में कम से कम 5 बार तेज सिरदर्द का अटैक आया हो और यह दर्द 4 घंटे से लेकर 3 दिन तक बना रहता हो तो यह एक संकेत हो सकता है इसके अलावा दर्द की 4 खासियतों में से कम से कम 2 मौजूद हों जैसे सिर के एक तरफ दर्द होना धड़कन जैसा दर्द होना दर्द बहुत तेज होना या रोजमर्रा के काम में बाधा आना तो माइग्रेन की संभावना बढ़ जाती है साथ ही 2 में से 1 लक्षण जैसे मतली उल्टी या तेज रोशनी और आवाज से परेशानी भी इसका अहम संकेत माना जाता है माइग्रेन को ट्रिगर करने वाले कारण भी काफी अहम होते हैं तेज धूप चमकदार रोशनी और शोर इस समस्या को बढ़ा सकते हैं वहीं कुछ खाने की चीजें जैसे चीज चॉकलेट कॉफी और चाइनीज फूड भी इसे ट्रिगर कर सकते हैं तेज परफ्यूम या गंध भी कई लोगों में माइग्रेन का कारण बनती है महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है खासकर हार्मोनल बदलाव के दौरान डॉक्टरों का मानना है कि माइग्रेन को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसका असर याददाश्त और ध्यान क्षमता पर पड़ सकता है लंबे समय में यह स्ट्रेस और डिप्रेशन का कारण बन सकता है और गंभीर मामलों में ब्रेन स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ा सकता है इससे बचाव के लिए कुछ आसान आदतें अपनाना जरूरी है रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें स्क्रीन टाइम कम करें और उन फूड्स से दूरी बनाए रखें जो माइग्रेन को बढ़ाते हैं नियमित दिनचर्या और संतुलित जीवनशैली इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल करने में मदद कर सकती है अगर सिरदर्द बार बार हो रहा है या ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि सही समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव है

मौसम बदलते ही क्यों रखा जाता है नवरात्रि व्रत जानिए इसके पीछे का आयुर्वेदिक कारण

नई दिल्ली। Navratri में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरा आयुर्वेदिक विज्ञान भी छिपा हुआ है। अक्सर लोग इसे पूजा पाठ और श्रद्धा से जोड़कर देखते हैं लेकिन अगर इसे Ayurveda के नजरिए से समझें तो यह शरीर और मन दोनों के लिए एक प्राकृतिक रीसेट प्रक्रिया की तरह काम करता है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम में बदलाव हो रहा होता है। यह परिवर्तन सीधे हमारे शरीर को प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे समय में व्रत रखने और हल्का सात्विक भोजन लेने से शरीर को संतुलन में लाने में मदद मिलती है। व्रत के दौरान लोग फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना जैसे हल्के और आसानी से पचने वाले आहार लेते हैं। इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और रोजाना के भारी तले भुने और मसालेदार भोजन से जो दबाव बनता है वह कम हो जाता है। इस प्रक्रिया से शरीर को खुद को सुधारने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति यानी अग्नि को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि मजबूत होती है तो शरीर स्वस्थ रहता है। व्रत रखने से यह अग्नि पुनः सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शरीर ही नहीं बल्कि मन पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। इस दौरान ध्यान पूजा और संयम का पालन किया जाता है जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में यह एक तरह का मानसिक शुद्धिकरण है जो व्यक्ति को भीतर से संतुलित और शांत बनाता है। इसके अलावा नवरात्रि में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ न केवल पचने में आसान होते हैं बल्कि शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं। ये भोजन शरीर को हल्का रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव संभव होता है। इस तरह नवरात्रि का व्रत आस्था और स्वास्थ्य दोनों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत करता है।

नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन

नई दिल्ली। नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी आयुर्वेदिक सोच भी जुड़ी हुई है। अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ और परंपरा से जोड़कर देखते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को अंदर से रीसेट करने और संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है। यह संक्रमण काल शरीर के लिए संवेदनशील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्रत रखने से शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। नवरात्रि के व्रत में लोग हल्का और सात्विक भोजन जैसे फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना लेते हैं। यह भोजन पचने में आसान होता है और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालता। रोजमर्रा के तले-भुने और मसालेदार खाने से जो अतिरिक्त बोझ शरीर पर पड़ता है वह इस दौरान कम हो जाता है। इससे शरीर को खुद को ठीक करने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति जिसे अग्नि कहा जाता है को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि कमजोर होती है तो शरीर में अपच और विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। व्रत रखने से यह अग्नि दोबारा सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद होता है। इस दौरान लोग ध्यान पूजा और संयम का पालन करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स बन जाता है जहां व्यक्ति खुद को थोड़ा धीमा करके अंदर से संतुलित करता है। इसके अलावा व्रत में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल हल्के होते हैं बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह परंपरा हमें न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी साबित होती है।

SOLO TRIP PLACE: सोलो घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहाँ मिलेगा सुकून

  SOLO TRIP PLACE: नई दिल्ली। आज के समय में ज़्यादातर लोग अकेले ही घूमना पसंद करते हैं। अगर आप सोलो ट्रिप के लिए कोई प्लान बनाना चाहते हैं लेकिन आपको उसमें काफी टिकत आ रही हैं और जगह नहीं चुन पा रहे हैं? तो हम आपके लिए लाए हैं, भारत की कुछ ऐसी जगह जहाँ जाने पर आपको सुकून, नेचर की खूबसूरती और बहुत कुछ देखने को मिलेगा।आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में। अकेले घूमने के लिए खास जगहें अगर आप पहली बार अकेले घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मन में थोड़ा डर और बहुत सारी उम्मीदें होती हैं। अकेले घूमना सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि खुद को समझना, अपनी ज़िंदगी जीने और सुकून हासिल करने का मौका देता है। ऋषिकेश हिमालय की गोद में गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश अकेले घूमने के लिए एक खास जगह है। यहां का शांत वातावरण, योग और ध्यान आपको खुद से जोड़ने का मौका देता है। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो रिवर लिफ्टिंग, नेचर वॉक और पहाड़ी ट्रेल्स आपको रोमांच से भर देंगे। ये जगह घूमने के लिए काफी खास मानी जाती है। गोवा गोवा सिर्फ पार्टी और नाइटलाइफ़ के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि, साउथ गोवा के पालोलेम और अगोंडा जैसे बीच शांत माहौल और खूबसूरत सनसेट के लिए जाने जाते हैं। यहां स्कूटर पर घूमना, समुद्र किनारे तैरते आसमान में पक्षियों को उड़ता देखना बहुत सुकून देता है। गोवा का फ्रेंडली माहौल और आसान ट्रांसपोर्टेशन इसे अकेले घूमने वालों के लिए सबसे अच्छा बनाता है। कामला अगर आप समुद्र किनारे सुकून की तलाश है तो कामला आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अरब सागर के ऊपर ऊंची चट्टानों पर बसा यह शहर सुकून भरा अनुभव देता है। वहीं क्लिफ कैफे से सनसेट देखना या योग सीखना कामला सोलो ट्रैवलिंग के लिए परफेक्ट माना जाता है। आप यहां पर आकर आप अपना खास समय घूम सकते हैं।

HOME MADE SCRUB: चेहरे पर जमी टैनिंग की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक

HOME MADE SCRUB:  नई दिल्ली। आज के समय में देखा जाता है कि महिलाएं अपने चेहरे को सुंदर और ग्लोइंग बनाने के लिए मार्केट से कई सारे प्रोडक्ट बेचती हैं, जबकि उनका उतना अच्छा रिस्पॉन्स उन्हें नहीं मिल पाता है। कई बार बार-बार धूप में जाना काम करना इसके साथ ही घर पर भी स्किन केयर को ज्यादा अच्छे से फॉलो ना कर पाने की वजह से आपके चेहरे को काफी डैमेज हो जाते हैं कई तरह की स्किन प्रॉब्लम आपको होने लगती है। सबसे छुटकारा पाने के लिए आपके घर में ही एक खास स्क्रब बनाना चाहिए तो भरोसे उसके बारे में बताते हैं।घर में ही बना सकती हैं होममेड स्क्रब अगर आप भी अपने चेहरे की खूबसूरती बढ़ाना चाहती हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप घर में आसानी से डी टैन स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसे बनाने के लिए कुछ सामग्री की ज़रूरत पड़ेगी। बनाने के लिए उसकी सामग्री शहद चावल का आटा ग्लिसरीन नारियल तेल स्क्रब बनाने का तरीका इसे बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा चावल का आटा लें। फिर इसमें थोड़ा सा शहद और ग्लिसरीन मिला लें। अब सभी को अच्छे से मिक्स कर लें और नारियल तेल मिक्स करें। इन सभी चीज़ों को तब तक फेंटे, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। अब इसको स्क्रब को मिक्स कर लें, और इसको एयर टाइट डिश में भरकर रख दें। इस स्क्रब को आप रात में सोने से पहले फेस पर 30-40 मिनट के लिए लगाएं। अब कच्चा दूध हाथ में लेकर हल्के हाथों से फेस की मसाज करें। इन बातों का ध्यान रखें अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रही हैं, तो पहले स्क्रब टेस्ट जरूर करें। इस स्क्रब को लगाने के बाद आपके चेहरे में कई तरह के बदलाव आए ना शुरू हो जाएंगे हफ्ते में दो-तीन बार अगर आपको इस स्क्रब को लगते हैं तब धीरे-धीरे आपका चेहरा साफ होने लगेगा और काफी निखरने लगेगा हालांकि इसके साथ-साथ आपको अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका चेहरा हमेशा अच्छा और ताजगी भरा रहे ताकि आपको मार्केट के बड़े प्रोडक्ट की जरूरत ना पड़े।

घर पर बनाएं रेस्टोरेंट स्टाइल पनीर लबाबदार, अपनाएं ये शाही सीक्रेट रेसिपी

नई दिल्ली । ईद 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं और त्योहार का असली मज़ा तभी आता है जब मेज़ पर स्वाद का वैरायटी हो। अगर आप शाकाहारी व्यंजन पसंद करते हैं या मेहमानों के लिए कुछ खास बनाना चाहते हैं तो पनीर लबाबदार एक बेहतरीन विकल्प है। इसका नाम ही “लबाबदार” यह दर्शाता है कि पनीर और मसाले इतनी खूबसूरती से मिलते हैं कि स्वाद सीधे दिल तक पहुंचता है।पनीर लबाबदार का असली राज इस डिश की रेस्टोरेंट जैसी रिच ग्रेवी का रहस्य है काजू और मगज खरबूजे के बीज का पेस्ट। इन्हें गरम पानी में भिगोकर बारीक पीस लें। यही ग्रेवी को शाही बनावट देता है जिससे हर क्यूब स्वाद में घुल-मिल जाता है। विधि एक कड़ाही में थोड़ा तेल और मक्खन गरम करें। खड़े मसाले तेजपत्ता दालचीनी इलायची डालकर खुशबू आने तक भूनें। बारीक कटा प्याज सुनहरा होने तक भूनें। अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और फिर टमाटर की प्यूरी मिलाएं। हल्दी कश्मीरी लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न हो जाए। काजू और मगज का पेस्ट डालें और लगातार चलाते रहें।थोड़ी मात्रा में कद्दूकस किया पनीर मिलाएं जिससे ग्रेवी और गाढ़ी हो जाएगी अंत में पनीर के क्यूब्स कसूरी मेथी और फ्रेश क्रीम डालें। गरम मसाला छिड़ककर धीमी आंच पर 2-3 मिनट पकाएं। प्रो टिप्स पनीर को हमेशा 5 मिनट गरम पानी में भिगोकर रखें ताकि वह सॉफ्ट और रसदार बने।ग्रेवी में थोड़ा शहद या चीनी डालें इससे टमाटर की खटास बैलेंस होती है।पनीर लबाबदार को गरमा-गरम बटर नान या शीरमाल के साथ सर्व करें। इस ईद इस शाही डिश के साथ आपकी दावत में चार चाँद लग जाएंगे। हर बाइट में रेस्टोरेंट जैसी क्रीमी और मसालेदार ग्रेवी का मज़ा आएगा और आपके मेहमान आपकी कुकिंग स्किल्स के कायल हो जाएंगे।

गर्मियों में त्वचा को बनाएं ग्लोइंग: अपनाएं ये समर स्किन केयर टिप्स

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। तेज यूवी किरणें पसीना और धूल मिलकर चेहरे के रोमछिद्र बंद कर देते हैं जिससे मुंहासे डलनेस और टैनिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई लोग सर्दियों वाला स्किन केयर ही फॉलो करते हैं जो गर्मियों में त्वचा के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। इस मौसम में हल्के सांस लेने वाले और हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।क्लींजिंग और हाइड्रेशन का सही बैलेंस बार-बार चेहरा धोना त्वचा को ताज़गी तो देता है लेकिन ज्यादा फेस वॉश प्राकृतिक ऑयल्स को खत्म कर सकता है। दिन में दो बार फोम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर चुनें। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है बिना चिपचिपा किए।सनस्क्रीन घर के अंदर या बाहर सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। कम से कम 30-50 SPF वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज़ाना लगाएं। हर 3 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है क्योंकि पसीने से इसकी परत हट सकती है। यह टैनिंग सनबर्न और झुर्रियों से बचाने का सबसे कारगर तरीका है। प्राकृतिक कूलिंग एजेंट धूप से लौटते ही सीधे बर्फ या ठंडा पानी न डालें। इसके बजाय एलोवेरा जेल या गुलाब जल का स्प्रे करें। एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो रेडनेस और सनबर्न को तुरंत शांत करते हैं। हफ्ते में एक बार मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक लगाएं जो त्वचा की गर्मी को सोख लेता है।एक्सफोलिएशन पसीना और तेल के कारण डेड स्किन जम जाती है। हफ्ते में 1-2 बार हल्के स्क्रब से चेहरे को एक्सफोलिएट करें। इससे रोमछिद्र खुलते हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। ध्यान रखें धूप में निकलने से ठीक पहले स्क्रब न करें।खान-पान और ब्यूटी स्लीप आंतरिक पोषण भी त्वचा के लिए जरूरी है। तरबूज खीरा और नारियल पानी जैसे फलों का सेवन करें जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन बाहर निकल सकें।

हर सुबह अलार्म से उठना कर सकता है नुकसान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

नई दिल्ली : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह समय पर उठने के लिए अलार्म लगाना एक आम आदत बन चुकी है। ज्यादातर लोग मोबाइल या घड़ी में अलार्म सेट करके सोते हैं, ताकि उनकी दिनचर्या समय पर शुरू हो सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी सेहत, खासकर दिल और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमारा शरीर एक प्राकृतिक सिस्टम यानी Circadian Rhythm पर काम करता है, जिसे आम भाषा में बॉडी क्लॉक कहा जाता है। यह सिस्टम सूरज के उगने और ढलने के अनुसार हमारे सोने और जागने के समय को नियंत्रित करता है। जब हम इस प्राकृतिक प्रक्रिया को नजरअंदाज कर अलार्म के जरिए अचानक जागते हैं, तो शरीर को झटका लगता है। अलार्म की तेज आवाज नींद के गहरे चरण को अचानक तोड़ देती है, जिससे Sleep Inertia नाम की स्थिति पैदा होती है। इस अवस्था में व्यक्ति जाग तो जाता है, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता। यही कारण है कि कई लोग सुबह उठने के बाद भी थकान, सुस्ती और भ्रम महसूस करते हैं। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब अलार्म की आवाज शरीर में Fight or Flight Response को सक्रिय कर देती है। यह वही प्रतिक्रिया है, जो किसी खतरे की स्थिति में शरीर में होती है। अचानक तेज आवाज से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेजी से बढ़ते हैं। अगर यह प्रक्रिया रोज होती है, तो लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी होती है। जब अलार्म बार-बार नींद को बाधित करता है, तो यह आपके मूड और इमोशनल हेल्थ को भी प्रभावित करता है। सुबह की शुरुआत अगर घबराहट और तनाव के साथ होती है, तो इसका असर पूरे दिन पर पड़ता है। व्यक्ति चिड़चिड़ा, चिंतित और थका हुआ महसूस कर सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अलार्म पूरी तरह से खतरनाक है, लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल जरूर नुकसानदायक हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों को धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाइल को इस तरह ढालना चाहिए कि वे बिना अलार्म के स्वाभाविक रूप से जाग सकें। इसके लिए सबसे जरूरी है एक निश्चित स्लीप रूटीन अपनाना। रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, ताकि आपकी बॉडी क्लॉक खुद सेट हो सके। सोने से पहले मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और रिलैक्सिंग गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, हल्का योग या ध्यान करें। सुबह की प्राकृतिक रोशनी भी शरीर को जगाने में अहम भूमिका निभाती है। अगर आप अपने कमरे में हल्की रोशनी आने देते हैं, तो शरीर खुद ही जागने के संकेत देने लगता है। इसके अलावा, रोज 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी है। अंत में यही कहा जा सकता है कि अलार्म की आदत को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे बदलाव करके आप अपने शरीर को प्राकृतिक तरीके से जगने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह न केवल आपकी नींद को बेहतर बनाएगा, बल्कि आपके दिल और मानसिक स्वास्थ्य को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा।