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चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़े महत्व

नई दिल्ली । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रहा है। पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी और प्रतिपदा आरंभ होने के साथ ही नवरात्रि प्रारंभ होगी। नवरात्रि 9 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व परंपरागत रूप से घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ आरंभ होता है।घटस्थापना का उद्देश्य घटस्थापना देवी का आह्वान करने के लिए की जाती है। इसका महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि इससे घर में सुख-शांति सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द की भावना बनी रहती है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं जिससे आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक लाभ चौघड़िया: 12:29 से 1:59 तक सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:54 से 7:57 तक शुभ चौघड़िया इन समयों में घटस्थापना और कलश स्थापना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं और पूजा का प्रभाव अधिकतम माना जाता है। पंचक और खरमास 15 मार्च से खरमास शुरू हो चुके हैं। इस दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों के साथ सूर्य देव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दौरान पंचक भी रहेगा जिसकी शुरुआत 16 मार्च शाम 6:14 से होगी और समाप्ति 20 मार्च रात 2:28 तक होगी।इस चैत्र नवरात्रि पर निर्धारित शुभ मुहूर्त में घटस्थापना और कलश स्थापना कर आप घर में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खानपान के चलते कब्ज एसिडिटी और बढ़ता वजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं जबकि एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय हमारी दिनचर्या में ही छिपा है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी-सी आदत शरीर को भीतर से साफ करने और कई समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित होती है। सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर में मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। जब आप गुनगुना पानी पीते हैं तो शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है जिससे थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू होती है। इसका सीधा असर कैलोरी बर्निंग पर पड़ता है और वजन कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से 15 दिनों तक यह आदत अपनाने पर पेट की अतिरिक्त चर्बी में कमी महसूस होने लगती है और शरीर हल्का लगने लगता है। गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रातभर शरीर में जमा हुए विषैले तत्व सुबह पानी के माध्यम से बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया किडनी और पसीने के जरिए शरीर की गहराई से सफाई करती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है। यदि आप लंबे समय से कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो गुनगुना पानी आपके लिए एक सरल और प्रभावी उपाय हो सकता है। यह आंतों की गति को सुचारू बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित सेवन से गैस एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। करीब दो हफ्तों में पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है। इस आदत का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है तो त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। गुनगुना पानी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे त्वचा की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मुंहासे कम होते हैं और चेहरे पर एक अलग ही चमक नजर आती है। इसके अलावा गुनगुना पानी बालों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाता है। वहीं जो लोग सुबह उठते ही साइनस या बंद नाक की समस्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह आदत राहत देने वाली हो सकती है। गुनगुना पानी म्यूकस को पतला कर देता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है। कुल मिलाकर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी आदत है जो शरीर को स्वस्थ ऊर्जावान और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए तो केवल 15 दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं।

करवटों से परेशान हैं? इन 5 टिप्स से पाएं गहरी और आरामदायक नींद

नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अच्छी और सुकूनभरी नींद लेना कई लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। देर रात तक मोबाइल चलाना, तनाव, अनियमित दिनचर्या और गलत खान-पान जैसी आदतें नींद को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। नतीजा यह होता है कि रातभर नींद नहीं आती और सुबह उठते ही थकान महसूस होती है। अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो कुछ आसान घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय आपकी मदद कर सकते हैं। 1. सोने से पहले पिएं गुनगुना दूधरात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुना दूध पीना बेहद फायदेमंद माना जाता है। दूध में मौजूद पोषक तत्व शरीर और दिमाग को रिलैक्स करते हैं, जिससे नींद जल्दी आने लगती है। यह एक पुराना और असरदार घरेलू उपाय है, जिसे रोजाना अपनाया जा सकता है। 2. तलवों की करें तेल या घी से मालिशआयुर्वेद के अनुसार, सोने से पहले पैरों के तलवों पर सरसों के तेल या घी से हल्की मालिश करना काफी लाभकारी होता है। इससे शरीर को गहरा आराम मिलता है और तनाव कम होता है। तलवों की मालिश से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जिससे गहरी नींद आने में मदद मिलती है। 3. सोने से पहले स्क्रीन से बनाएं दूरीआजकल नींद खराब होने का सबसे बड़ा कारण मोबाइल और स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल है। मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट दिमाग को एक्टिव बनाए रखती है, जिससे नींद आने में देरी होती है। इसलिए सोने से कम से कम 30 मिनट पहले मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें। 4. रात में खाएं हल्का और सुपाच्य भोजनभारी, तला-भुना और मसालेदार खाना पाचन को प्रभावित करता है और नींद में बाधा डालता है। इसलिए रात के समय हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए। इससे पेट भी आराम में रहता है और नींद बेहतर आती है। 5. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का लें सहाराआयुर्वेद में कुछ जड़ी-बूटियां जैसे Ashwagandha और Brahmi को नींद सुधारने में उपयोगी माना गया है। ये तनाव को कम करती हैं और दिमाग को शांत करती हैं, जिससे अच्छी नींद आती है। हालांकि इनका सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। क्यों जरूरी है अच्छी नींदअच्छी नींद न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी बेहद जरूरी है। नींद पूरी न होने से चिड़चिड़ापन, कमजोरी और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। छोटी-छोटी आदतें, बड़ा असरअगर आप रोजाना इन आसान आदतों को अपनाते हैं, तो धीरे-धीरे आपकी नींद में सुधार देखने को मिलेगा। बिना दवाइयों के भी आप बेहतर और गहरी नींद पा सकते हैं।

ईद पर चमकती त्वचा का राज: घर बैठे आसान स्किन केयर टिप्स

नई दिल्ली। ईद का त्योहार नजदीक आते ही हर कोई अपने लुक को लेकर खास तैयारी शुरू कर देता है। खासकर महिलाएं चाहती हैं कि इस मौके पर उनका चेहरा साफ, चमकदार और हेल्दी दिखे। लेकिन हर बार पार्लर जाना जरूरी नहीं है। अगर आप सही स्किन केयर रूटीन अपनाएं, तो घर पर ही नेचुरल ग्लो पाया जा सकता है। कुछ आसान घरेलू उपाय आपकी त्वचा को फ्रेश, सॉफ्ट और चमकदार बना सकते हैं। सबसे जरूरी है सही क्लीनिंग स्किन केयर की शुरुआत हमेशा क्लीनिंग से होती है। दिन में कम से कम दो बार हल्के फेसवॉश से चेहरा साफ करें। इससे चेहरे पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट जाता है। साफ त्वचा ही ग्लोइंग स्किन की पहली सीढ़ी होती है। डेड स्किन हटाने के लिए हल्का स्क्रब चेहरे की डेड स्किन हटाना भी बहुत जरूरी है, लेकिन ध्यान रखें कि ज्यादा स्क्रब न करें। हफ्ते में 2–3 बार हल्का स्क्रब पर्याप्त होता है। घर पर स्क्रब बनाने के लिए एक चम्मच कॉफी और एक चम्मच शहद मिलाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे स्किन साफ और मुलायम बनती है। बेसन-दही फेस पैक से आएगा निखार ईद से पहले चेहरे पर इंस्टेंट ग्लो पाने के लिए फेस पैक बेहद फायदेमंद होता है। इसके लिए दो चम्मच बेसन, एक चम्मच दही और थोड़ा सा हल्दी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट तक चेहरे पर लगाकर धो लें। यह पैक स्किन को साफ करने के साथ-साथ नेचुरल चमक भी देता है। एलोवेरा जेल से करें नाइट केयर रात में सोने से पहले एलोवेरा जेल लगाना स्किन के लिए बहुत फायदेमंद होता है। यह त्वचा को हाइड्रेट करता है और ठंडक पहुंचाता है। नियमित इस्तेमाल से चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है और स्किन हेल्दी रहती है। इंस्टेंट ग्लो के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय अगर आपके पास ज्यादा समय नहीं है, तो कुछ आसान उपाय तुरंत निखार दे सकते हैं गुलाब जल से चेहरा साफ करें कच्चे दूध से क्लीनिंग करें खीरे का रस लगाएं शहद और नींबू का फेस पैक इस्तेमाल करें ये उपाय त्वचा को तुरंत फ्रेश और चमकदार बना देते हैं। अच्छी नींद और हेल्दी डाइट भी जरूरी सिर्फ बाहरी देखभाल ही नहीं, बल्कि अंदर से हेल्दी रहना भी जरूरी है। रोज 7–8 घंटे की नींद लें, ताकि डार्क सर्कल और डलनेस से बचा जा सके। साथ ही फलों और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाएं। इनमें मौजूद विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं। हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान दिनभर में कम से कम 7–8 गिलास पानी जरूर पिएं। पर्याप्त पानी पीने से त्वचा हाइड्रेट रहती है और उसका नेचुरल ग्लो बरकरार रहता है। ध्यान रखने वाली जरूरी बातें स्किन केयर करते समय नए प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। धूप में निकलते समय सनस्क्रीन लगाएं और स्किन को हमेशा मॉइश्चराइज रखें।

ब्राइडल लुक के लिए परफेक्ट: पायल के साथ खूब जचेंगे बिछिया के ये 6 यूनिक डिज़ाइन

नई दिल्ली । भारतीय परंपरा में बिछिया और पायल को सुहाग और सौंदर्य का खास प्रतीक माना जाता है। शादी या किसी खास मौके पर अगर पायल के साथ सही डिजाइन की बिछिया पहनी जाए तो दुल्हन का पूरा लुक और भी आकर्षक नजर आता है। अक्सर दुल्हनें अपने लहंगे, ज्वेलरी और मेकअप पर ज्यादा ध्यान देती हैं, लेकिन पैरों का श्रृंगार भी ब्राइडल लुक का अहम हिस्सा होता है।अगर आप भी अपने पैरों को खास और स्टाइलिश बनाना चाहती हैं, तो इन ट्रेंडी बिछिया डिजाइन्स को ट्राई कर सकती हैं। मल्टी-लेयर या चेन बिछिया आजकल पायल से जुड़ी चेन वाली बिछिया काफी ट्रेंड में हैं। इसमें पायल से एक पतली चेन निकलकर बिछिया से जुड़ी होती है, जो पैरों को हेवी और रॉयल ब्राइडल लुक देती है। कुंदन और स्टोन वर्क बिछिया रॉयल लुक के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाली बिछिया बेहतरीन विकल्प है। भारी पायल के साथ पहनने पर यह डिजाइन पैरों को बेहद आकर्षक बनाता है। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बिछिया अगर आपकी पायल एंटीक या ऑक्सीडाइज्ड फिनिश वाली है तो उसी स्टाइल की बिछिया चुनना बेहतर रहेगा। इनमें छोटे घुंघरू या नक्काशीदार पैटर्न बहुत पसंद किए जाते हैं। मीनाकारी बिछिया रंग-बिरंगी मीनाकारी वाली बिछिया इन दिनों काफी ट्रेंड में है। आप अपने लहंगे के रंग के अनुसार लाल, हरे या गुलाबी रंग की मीनाकारी डिज़ाइन चुन सकती हैं। फ्लोरल और लीफ पैटर्न फूल और पत्तियों से प्रेरित डिजाइन हमेशा फैशन में बने रहते हैं। हल्की पायल के साथ यह डिजाइन बेहद एलिगेंट और नाजुक लुक देता है। एडजस्टेबल विंटेज बैंड अगर आप आरामदायक और सिंपल स्टाइल चाहती हैं तो चौड़े विंटेज बैंड वाली बिछिया ट्राई करें। ये हर साइज की उंगली में आसानी से फिट हो जाती हैं और बोहो-चिक लुक देती हैं। अगर आप अपने ब्राइडल लुक को हेड-टू-टो परफेक्ट बनाना चाहती हैं, तो पायल के साथ सही बिछिया डिजाइन चुनना न भूलें। सही ज्वेलरी आपके पूरे लुक को और भी खास बना सकती है।

चने के सेवन के सही तरीके: भुना, भीगा या पकाया हुआ कौन फायदेमंद

नई दिल्ली : शरीर के स्वस्थ संचालन और मांसपेशियों की मजबूती के लिए प्रोटीन बेहद जरूरी है। महंगे सप्लीमेंट की बजाय किचन में मौजूद चना प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत है। चना आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर माना जाता है और इसमें प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स जैसे जरूरी पोषक तत्व होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार भुना चना, भीगा हुआ चना, पकाया हुआ चना और चने से बना सत्तू अलग-अलग तरीकों से शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। इसका सही मात्रा और सही तरीके से सेवन करना जरूरी है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा फायदा मिले। भुना चनाभुने हुए चने में कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है। यह वजन नियंत्रण में मदद करता है और कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और हृदय रोगों में लाभकारी है। भुना चना सुबह या दोपहर के समय सेवन करना सबसे अच्छा माना जाता है। भीगा और पकाया हुआ चनाकाला चना रात में भिगोकर सुबह उबालकर खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह वजन बढ़ाने में मददगार है। जिम जाने वाले या पसीना बहाने वाले लोग इसके सेवन से ताकत और ऊर्जा पा सकते हैं। अगर इसे देसी घी के साथ हल्का सा छौंक लगाकर पकाया जाए तो यह वात दोष को कम करने और चने की रूखापन दूर करने में भी मदद करता है। इसे नाश्ते या शाम में हल्की भूख लगने पर खाया जा सकता है। चने से बना सत्तूसत्तू प्रोटीन से भरपूर होता है और गर्मियों में इसे खाने से पेट को ठंडक मिलती है। इसके सेवन से थकान कम होती है और नेत्र से जुड़े रोगों में भी राहत मिलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में तीनों प्रकार के चने का सेवन किया जा सकता है। हालांकि, वात दोष की अधिकता वाले लोग चने का सेवन सावधानी से करें।इस प्रकार चना केवल प्रोटीन का स्रोत ही नहीं बल्कि ऊर्जा देने और शरीर को स्वस्थ रखने का प्राकृतिक उपाय भी है।

हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…

नई दिल्ली: हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। आयुर्वेद में भी हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने का सही तरीका बताया गया है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा पोषण मिल सके। हालांकि आजकल सैंडविच, सलाद और नूडल्स में कच्ची सब्जियों का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई हरी सब्जियां कच्ची खाने से पाचन में समस्या हो सकती है और वात दोष बढ़ा सकती हैं। कैसे खाएं हरी सब्जियां: पालक, शिमला मिर्च और गोभी जैसी हरी सब्जियों को कच्चा खाने से बचें। इनमें परजीवी टेपवर्म होने का खतरा रहता है। सब्जियों को पहले उबालें, फिर अतिरिक्त पानी निचोड़कर घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं। बुजुर्ग और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन कम मात्रा में दें। आयुर्वेद में बुजुर्गों और बच्चों के पाचन को ध्यान में रखते हुए कुछ सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इनमें तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू शामिल हैं। ये हरी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक होती हैं और पचाने में हल्की होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करें, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे के रूप में दिया जा सकता है। सही मात्रा और सही तरीके से हरी सब्जियों का सेवन करने से पाचन बेहतर रहता है, प्रतिरक्षा मजबूत होती है और हृदय स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।

पंचतत्व और हमारी उंगलियां: जानें शरीर में इन्हें सक्रिय करने के आसान तरीके

नई दिल्ली: हमारा शरीर पंचभूतों से बना है -पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। आयुर्वेद और प्राचीन ज्ञान के अनुसार ये पंचतत्व हमारे शरीर और स्वास्थ्य के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन जीवन में इनके संतुलन और सक्रियता को बनाए रखना भी जरूरी है। हाथ की पांचों उंगलियां हमारे शरीर के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा पृथ्वी तत्व, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका अग्नि और कनिष्ठा जल का प्रतीक है। पृथ्वी तत्व अंगूठा:प्रकृति से जुड़ने से पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है। हरियाली के बीच समय बिताएं, नंगे पैर घास पर चलें, मिट्टी को हाथ लगाएं और बागवानी करें। वायु तत्व तर्जनी:सांस और प्राणायाम से वायु तत्व संतुलित होता है। रोजाना खुली हवा में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। आहार में हल्की कड़वी चीजें शामिल करें। आकाश तत्व मध्यमा:आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए ध्यान और मौन की प्रक्रिया अपनाएं। ध्यान मुद्रा में बैठकर ओम का उच्चारण करें। यह मानसिक चेतना बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है। अग्नि तत्व अनामिका:अग्नि तत्व पाचन से जुड़ा है। इसे सक्रिय करने के लिए सूर्य नमस्कार, नौकासन और कपालभाति जैसी योग मुद्राएं करें। साथ ही हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। सही पाचन से कई रोग अपने आप ठीक हो सकते हैं। जल तत्व कनिष्ठा:जल तत्व हमारे शरीर का 50-65 फीसदी हिस्सा बनाता है। इसे सक्रिय करने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें, जल मुद्रा का अभ्यास करें और स्विमिंग करें।इस प्रकार पंचतत्वों को सक्रिय और संतुलित रखने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बढ़ती है।

पेड़ पर खिलने वाला यह लाल फूल सेहत का खजाना: डायबिटीज से इम्यूनिटी तक देता है कई फायदे

नई दिल्ली । अनार फल तो लगभग हर कोई खाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके लाल फूल भी सेहत के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अनार के फूलों का उपयोग सदियों से कई बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है।पोषक तत्वों से भरपूर अनार का फूल देखने में जितना सुंदर होता है, इसके अंदर मौजूद तत्व उतने ही प्रभावशाली होते हैं। इसमें टैनिन, गैलिक एसिड और ट्राइटरपेनॉइड्स जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।डायबिटीज नियंत्रण में सहायक अनार के फूल मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। कई शोधों के अनुसार इसमें ऐसे गुण होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं और शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर बनाते हैं। आयुर्वेद में अक्सर इसके सूखे फूलों से बने चूर्ण के सेवन की सलाह दी जाती है। घाव और सूजन में फायदेमंद अगर शरीर में चोट या सूजन हो तो अनार का फूल प्राकृतिक मरहम की तरह काम कर सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण त्वचा की कोशिकाओं को जल्दी ठीक करने और सूजन कम करने में मदद करते हैं। पुराने समय में इसके सूखे फूलों का लेप घावों पर लगाया जाता था ताकि संक्रमण न फैले। इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार अनार के फूलों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। उपयोग से पहले रखें सावधानी हालांकि अनार का फूल प्राकृतिक औषधि माना जाता है, लेकिन इसका सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए सही मात्रा और सही तरीका जानना जरूरी होता है।

व्रत में मीठा भी और हेल्दी भी, खजूर से बने साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड की आसान रेसिपी

नई दिल्ली:नवरात्रि के व्रत शुरू होते ही ज्यादातर घरों में खाने का मेन्यू लगभग एक जैसा हो जाता है। साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा या फिर साधारण फलाहार बार-बार बनने लगता है। कुछ ही दिनों में लोगों को कुछ अलग और हल्का खाने का मन होने लगता है। ऐसे समय में अगर व्रत के दौरान कुछ मीठा, ठंडा और हेल्दी मिल जाए तो स्वाद के साथ ऊर्जा भी मिलती है। इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी ही एक खास रेसिपी तेजी से ट्रेंड कर रही है, जिसे बिना चीनी का साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड कहा जा रहा है। इस रेसिपी को फूड कंटेंट क्रिएटर वृत्ता साहनी ने शेयर किया है और खास बात यह है कि इसमें चीनी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया जाता। मिठास के लिए खजूर का उपयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक स्वीटनर की तरह काम करता है। इसके साथ मखाने, बादाम, काजू और ताजे फलों का मिश्रण इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाता है। यही वजह है कि यह डिश व्रत रखने वालों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। नवरात्रि के दौरान लोग सात्विक और हल्का भोजन करना पसंद करते हैं, लेकिन विकल्प सीमित होने की वजह से अक्सर एक ही तरह का खाना बनता है। साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड इसी पारंपरिक फलाहार का एक नया और हेल्दी रूप है। इसमें साबूदाना, दूध, ड्राई फ्रूट्स और ताजे फलों का संतुलित मिश्रण होता है, जिससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है और स्वाद भी बरकरार रहता है। इस रेसिपी की एक और खासियत यह है कि इसमें बाजार में मिलने वाले कस्टर्ड पाउडर की जरूरत नहीं पड़ती। कस्टर्ड का बेस पूरी तरह से मखाने और मेवों से तैयार किया जाता है। इसके लिए लगभग एक कप भुने हुए मखाने, आधा कप बादाम, दस काजू, थोड़ा केसर और इलायची पाउडर लिया जाता है। मिठास के लिए लगभग बारह से पंद्रह खजूर का इस्तेमाल किया जाता है। ये सभी चीजें स्वाद बढ़ाने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देती हैं, जो व्रत के दिनों में काफी फायदेमंद होता है। कस्टर्ड बनाने के लिए सबसे पहले बादाम, काजू, मखाने, खजूर, केसर और इलायची को एक बाउल में डालकर उसमें एक कप गर्म दूध मिला दिया जाता है। इस मिश्रण को लगभग तीस मिनट तक भिगोकर रखा जाता है ताकि खजूर मुलायम हो जाएं और मेवे अच्छी तरह फूल जाएं। इसके बाद इन सभी चीजों को मिक्सर में पीसकर गाढ़ा और क्रीमी पेस्ट तैयार किया जाता है। यही पेस्ट पूरे कस्टर्ड का बेस बनता है और इसमें खजूर की हल्की मिठास और केसर की खुशबू स्वाद को खास बना देती है। इसके बाद एक बर्तन में करीब दो कप दूध हल्का गर्म किया जाता है और उसमें तैयार किया हुआ मेवों का पेस्ट डालकर धीमी आंच पर चलाया जाता है। अब इसमें पहले से उबला या स्टीम किया हुआ साबूदाना मिलाया जाता है। पकने के बाद साबूदाना पारदर्शी मोतियों जैसा दिखने लगता है, जो कस्टर्ड में अच्छा टेक्सचर देता है। कुछ देर तक मिश्रण को चलाने के बाद यह कस्टर्ड जैसा गाढ़ा हो जाता है। जब यह थोड़ा ठंडा हो जाए तो इसमें कटे हुए ताजे फल जैसे आम, केला, अनार और अंगूर मिलाए जाते हैं। फल न केवल स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि शरीर को विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भी देते हैं। तैयार साबूदाना फ्रूट कस्टर्ड को एक से दो घंटे के लिए फ्रिज में रख दिया जाए तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। परोसते समय ऊपर से कटे हुए पिस्ता या गुलाब की पंखुड़ियां डालकर इसे और आकर्षक बनाया जा सकता है। यह डिश न केवल स्वादिष्ट है बल्कि मखाने, दूध और ड्राई फ्रूट्स की वजह से लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इसी कारण इसे नवरात्रि व्रत के दौरान एक हेल्दी और एनर्जी देने वाला विकल्प माना जा रहा है।