चेहरे पर नेचुरल ग्लो चाहते हैं? रोज़ डाइट में शामिल करें ये 5 फल, 15 दिनों में दिखेगा फर्क

नई दिल्ली । स्वस्थ और चमकदार त्वचा के लिए सिर्फ महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ फलों में मौजूद विटामिन एंटीऑक्सीडेंट और पोषक तत्व त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं और प्राकृतिक निखार लाते हैं। प्रदूषण तनाव और गलत खानपान अक्सर चेहरे पर दाग धब्बे और झुर्रियों का कारण बनते हैं। ऐसे में फलों का नियमित सेवन आपकी त्वचा को स्वस्थ जवान और ग्लोइंग बनाए रख सकता है। पपीता पपीता में पपेन नामक एंजाइम होता है जो मृत त्वचा कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। यह त्वचा की रंगत को साफ करता है और हाइड्रेशन बनाए रखता है। विटामिन ए से भरपूर पपीता पाचन सुधारने के साथ साथ त्वचा को अंदर से पोषण भी देता है। संतरा संतरा विटामिन सी और सिट्रिक एसिड का बेहतरीन स्रोत है। यह कोलेजन उत्पादन को बढ़ाता है जिससे त्वचा का ढीलापन कम होता है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार आता है। इसके नियमित सेवन से डार्क स्पॉट्स हल्के पड़ते हैं और त्वचा स्वस्थ दिखती है। अनार अनार को जवानी का फल कहा जाता है। यह शरीर में खून बढ़ाता है और चेहरे पर गुलाबी निखार लाता है। इसमें मौजूद पॉलीफेनोल्स सूरज की हानिकारक यूवी किरणों से त्वचा की सुरक्षा करते हैं और समय से पहले झुर्रियों को रोकते हैं।तरबूज तरबूज में लगभग 92% पानी होता है जो त्वचा की कोशिकाओं को अंदर से हाइड्रेटेड प्लंप और फ्रेश रखता है। इसमें मौजूद लाइकोपीन त्वचा को सूरज की जलन और लालिमा से बचाता है। गर्मियों में तरबूज का सेवन स्किन ग्लो के लिए बेहद फायदेमंद है। कीवी कीवी में विटामिन सी और ई की उच्च मात्रा होती है। यह त्वचा की मरम्मत में मदद करता है दाग धब्बों को कम करता है और आंखों के नीचे काले घेरे घटाता है। नियमित सेवन से त्वचा में कसावट और निखार आता है।कैसे और कब खाएं फलों का पूरा फायदा उठाने के लिए उन्हें सुबह खाली पेट या दोपहर के नाश्ते में खाना सबसे अच्छा है। जूस के बजाय साबुत फल खाएं ताकि फाइबर भी मिल सके। यदि आप लगातार 15 दिनों तक इन 5 फलों को अपनी डाइट में शामिल करते हैं तो चेहरे पर साफ और प्राकृतिक ग्लो महसूस किया जा सकता है।
भारत में सबसे ज्यादा बारिश कहां होती है, मेघालय का मावसिनराम क्यों है दुनिया का सबसे बरसाती इलाका

नई दिल्ली:भारत एक ऐसा देश है जहां मौसम और भौगोलिक विविधता की वजह से हर क्षेत्र का जलवायु अलग दिखाई देता है। कहीं रेगिस्तान की तपती गर्मी है तो कहीं पहाड़ों की ठंडी हवाएं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में सबसे ज्यादा बारिश किस जगह होती है। इसका जवाब है मेघालय राज्य का एक छोटा सा गांव मावसिनराम। यह स्थान न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक वर्षा वाले इलाके के रूप में जाना जाता है। Mawsynram मेघालय के East Khasi Hills जिले में स्थित है। यहां सालाना औसतन लगभग 11872 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जाती है। इतनी अधिक वर्षा के कारण इस जगह का नाम Guinness World Records में भी दर्ज किया गया है। तुलना के लिए अगर भारत के बड़े शहरों को देखें तो वहां सालभर में औसतन केवल 700 से 1000 मिलीमीटर बारिश होती है। यानी मावसिनराम में होने वाली बारिश कई शहरों की तुलना में लगभग 10 से 15 गुना ज्यादा है। इस इलाके में इतनी ज्यादा बारिश होने के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति है। मावसिनराम खासी पहाड़ियों की दक्षिणी ढलानों पर स्थित है और सीधे बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं के रास्ते में पड़ता है। जब दक्षिण पश्चिम मानसून की नमी से भरी हवाएं इन पहाड़ियों से टकराती हैं तो वे ऊपर की ओर उठती हैं और भारी बारिश होती है। इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में Orographic Rainfall कहा जाता है। मावसिनराम में खासकर जून से सितंबर के बीच मानसून के दौरान लगातार बारिश होती रहती है। कई बार तो यहां एक ही दिन में 1000 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश भी दर्ज की गई है। यही वजह है कि यह इलाका दुनिया के सबसे ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। बारिश को मापने के लिए आमतौर पर मिलीमीटर यानी मिमी का पैमाना इस्तेमाल किया जाता है। एक मिलीमीटर बारिश का मतलब होता है कि यदि पानी जमीन से बहकर कहीं और न जाए और न ही वाष्पित हो, तो जमीन पर एक मिलीमीटर मोटी पानी की परत बन जाएगी। इस हिसाब से अगर मावसिनराम में सालभर में 11872 मिमी बारिश होती है तो इसका मतलब है कि वहां लगभग 11.8 मीटर तक पानी जमा हो सकता है। बारिश को मापने के लिए रेन गेज नामक उपकरण का उपयोग किया जाता है। भारत में मौसम संबंधी आंकड़े एकत्र करने का काम India Meteorological Department यानी आईएमडी करता है। यही संस्था देशभर में बारिश और मौसम के आंकड़ों को रिकॉर्ड करती है। मावसिनराम की अत्यधिक वर्षा इस क्षेत्र को प्राकृतिक रूप से बेहद खूबसूरत बनाती है। यहां चारों तरफ हरियाली, झरने और बादलों से ढकी पहाड़ियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इतनी ज्यादा बारिश के कारण यहां भूस्खलन और मिट्टी कटाव जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं। इस तरह कहा जा सकता है कि मेघालय का मावसिनराम भारत का सबसे ज्यादा वर्षा वाला स्थान है और अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रभाव के कारण यह दुनिया भर में खास पहचान रखता है।
हार्ट अटैक का खतरा कम! रोज सुबह खाली पेट खाएं शहद और लहसुन

नई दिल्ली । दिल की सेहत को बेहतर बनाए रखना आज के जीवन में बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार शहद और लहसुन में मौजूद पोषक तत्व हृदय और इम्यूनिटी दोनों के लिए लाभकारी हैं। आयुर्वेद और प्राचीन चिकित्सा पद्धति में इसे प्राकृतिक स्वास्थ्य संजीवनी माना जाता है। लहसुन के फायदे लहसुन सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नहीं है बल्कि यह नसों में जमा बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने में मदद करता है। इसमें एलिसिन नामक तत्व प्राकृतिक एंटीबायोटिक और एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। यह रक्त संचार को सुचारू रखता है और खून को गाढ़ा होने से रोकता है जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा कम होता है। लहसुन में मौजूद सल्फर और अन्य रसायन इसे जीवाणुरोधी बनाते हैं।शहद के फायदे शहद में फ्लेवोनोइड्स और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह इम्यूनिटी बढ़ाने के साथ साथ त्वचा के संक्रमण खुजली और लालिमा को कम करता है। इसके एंटीवायरल और एंटीफंगल गुण श्वसन रोगों में लाभकारी हैं। शहद लहसुन का मिश्रण जब लहसुन की कलियों को शहद में भिगोया जाता है तो इनके औषधीय गुण दोगुने हो जाते हैं। यह मिश्रण रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाता और ब्लड प्रेशर नियंत्रित करता है। पुरानी खांसी सर्दी जुकाम और अस्थमा में मदद करता है। शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालता और कब्ज जैसी समस्याएं दूर करता है। एंटी इंफ्लेमेटरी गुण जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करते हैं। कैसे तैयार करें एक साफ कांच की बरनी लें। उसमें ताजा लहसुन की कलियों को छीलकर डालें। बरनी को शुद्ध शहद से भरें और ढक्कन बंद कर दें। इसे 5 7 दिन के लिए छोड़ दें ताकि लहसुन और शहद फर्मेंट हो जाएं। सेवन का तरीका रोज सुबह खाली पेट इस मिश्रण से एक लहसुन की कली और थोड़ा शहद चबाकर खाएं। यह आपके हृदय और इम्यून सिस्टम के लिए बेहद फायदेमंद है।
कम उम्र में बढ़ रहा किडनी रोग का खतरा खराब लाइफस्टाइल और अनकंट्रोल शुगर जिम्मेदार

नई दिल्ली:आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण कई गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इनमें किडनी की बीमारियां सबसे चिंताजनक मानी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शरीर में बिना किसी स्पष्ट संकेत के धीरे धीरे विकसित होती रहती हैं। यही वजह है कि इन्हें साइलेंट किलर भी कहा जाता है। जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं तब तक कई बार बीमारी काफी गंभीर स्थिति में पहुंच चुकी होती है। देश में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और ये दोनों ही समस्याएं किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण मानी जाती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है तो उसे नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए। समय पर जांच से बीमारी को शुरुआती अवस्था में पकड़ा जा सकता है और गंभीर स्थिति से बचाव संभव हो सकता है। नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर उपेंद्र सिंह के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में किडनी से जुड़ी समस्याओं के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि देखी गई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 30 से 45 वर्ष की आयु के लोगों में भी किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसके पीछे सेडेंटरी लाइफस्टाइल अत्यधिक तनाव शरीर में पानी की कमी और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक क्रॉनिक किडनी डिजीज और किडनी स्टोन के मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। क्रॉनिक किडनी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे धीरे शरीर को प्रभावित करती है। कई मरीज अस्पताल तब पहुंचते हैं जब यह बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है और किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आज भी किडनी रोग के सबसे बड़े जोखिम कारक हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीजों में इन दोनों में से एक या दोनों समस्याएं मौजूद होती हैं। इसके अलावा दर्द निवारक दवाओं का अधिक उपयोग बिना डॉक्टर की सलाह के जिम सप्लीमेंट या स्टेरॉयड लेना शरीर में पानी की कमी और खराब जीवनशैली भी किडनी को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख कारण बन रहे हैं। कई मामलों में बीमारी की देर से पहचान होने के कारण मरीजों को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ जाती है जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है। हालांकि समय रहते सावधानी बरती जाए तो किडनी की बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति के पैरों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे पेशाब में झाग आए पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव महसूस हो या लगातार थकान और भूख में कमी महसूस हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा उल्टी आना जी मिचलाना या अचानक ब्लड प्रेशर का बढ़ जाना भी किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट क्रिएटिनिन टेस्ट और यूरिन टेस्ट करवाते रहना चाहिए। इसके साथ ही रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना नमक का सेवन सीमित करना धूम्रपान से दूर रहना और वजन को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम से किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है और किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।
LPG vs Induction: कौन सा तरीका है हेल्दी और सुरक्षित खाना बनाने के लिए?

नई दिल्ली । आज के समय में रसोई में खाना बनाने के लिए LPG गैस और इंडक्शन कुकटॉप दोनों ही आम विकल्प बन गए हैं। लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि इन दोनों में से कौन ज्यादा सुरक्षित और सेहतमंद है। LPG गैस कुकिंग LPG पर खाना बनाना दशकों से हमारी आदत रही है। गैस की आंच को कंट्रोल करना आसान होता है जिससे खाने का स्वाद और टेक्सचर बरकरार रहता है। आयुर्वेद के अनुसार अग्नि पर पका खाना सुपाच्य होता है क्योंकि यह धीरे-धीरे पकता है और पोषक तत्वों को बनाए रखता है। हालांकि बंद कमरे या छोटे किचन में गैस जलाने से नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें निकलती हैं जो लंबे समय में श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।इंडक्शन कुकिंग इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के जरिए काम करता है और केवल बर्तन को गर्म करता है न कि आसपास की हवा को। इसका रेडिएशन बहुत कम होता है और केवल बर्तन तक सीमित रहता है। पेसमेकर यूज़ करने वाले मरीजों को इंडक्शन से थोड़ी दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है। पोषक तत्वों की सुरक्षा एक बड़ा मिथक यह है कि इंडक्शन खाना पोषक तत्व खो देता है। वास्तव में पोषक तत्वों का नुकसान तापमान और कुकिंग टाइम पर निर्भर करता है। इंडक्शन पर खाना जल्दी पकता है जिससे विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स सुरक्षित रहते हैं। वहीं गैस पर धीमी आंच पर पकने वाला खाना दालों और कड़े खाद्य पदार्थों के लिए बेहतर माना जाता है। सुरक्षा और सुविधा इंडक्शन गैस की तुलना में अधिक सुरक्षित है क्योंकि इसमें खुली लौ नहीं होती जिससे आग लगने का खतरा कम होता है। यह किचन के तापमान को भी सामान्य रखता है। गैस की पहुंच हर जगह है और यह बिजली पर निर्भर नहीं करती लेकिन अगर किचन में वेंटिलेशन सही नहीं है तो इंडक्शन एक बेहतर और क्लीनर विकल्प साबित हो सकता है। अगर आप जल्दी और क्लीनर कुकिंग चाहते हैं तो इंडक्शन बेहतर है।अगर आप धीमी आंच और पारंपरिक स्वाद पसंद करते हैं तो LPG गैस उपयुक्त है।स्वास्थ्य और वेंटिलेशन को ध्यान में रखते हुए दोनों विकल्प सुरक्षित हैं बस इस्तेमाल और देखभाल सही हो।
शादी और त्योहार के लिए 5 शानदार बैंगल डिज़ाइन, साधारण सूट को बनाएं रॉयल

नई दिल्ली । पारंपरिक लुक को खास बनाने में ज्वेलरी का हमेशा अहम रोल रहा है और खासकर बैंगल्स यानी चूड़ियां। ये न केवल हाथों की खूबसूरती बढ़ाती हैं बल्कि साधारण सूट या कुर्ती को भी एक डिजाइनर टच देती हैं। फैशन की दुनिया में नए ट्रेंड्स आते रहते हैं लेकिन पारंपरिक एथनिक स्टाइल का क्रेज कभी कम नहीं होता। आइए जानते हैं 5 लेटेस्ट बैंगल डिज़ाइन जो आपके लुक को रॉयल बना देंगे। ऑक्सीडाइज्ड सिल्वर बैंगल्स ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी आजकल काफी ट्रेंड में है। अगर आप कॉटन कुर्ती या इंडो वेस्टर्न सूट पहन रही हैं तो चांदी जैसी दिखने वाली ऑक्सीडाइज्ड चूड़ियां बेस्ट ऑप्शन हैं। इन्हें आप जींस कुर्ती के साथ भी पहन सकती हैं। ये स्टाइलिश होने के साथ साथ आपको बोहेमियन और एथनिक लुक भी देती हैं। सिल्क थ्रेड बैंगल्स रेशमी धागों से बनी सिल्क थ्रेड बैंगल्स इन दिनों खासा ट्रेंड में हैं। इन्हें सूट के रंग के अनुसार कस्टमाइज कराना आसान है। मोती स्टोन और मिरर वर्क इन्हें हैवी सूट या छोटे फंक्शन के लिए परफेक्ट बनाता है। ये त्योहारों और हल्के समारोहों के लिए एक बेहतरीन चॉइस हैं। कश्मीरी बैंगल्स अगर आप कुछ यूनिक और कलात्मक पहनना पसंद करती हैं तो कश्मीरी बैंगल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। इन पर की गई हैंड पेंटिंग और फ्लोरल डिज़ाइन इन्हें बाकी चूड़ियों से अलग बनाती हैं। अक्सर इन्हें स्टेटमेंट ज्वेलरी के तौर पर ही पहना जाता है। वेलवेट बैंगल्स सर्दियों और रात की शादियों के लिए वेलवेट बैंगल्स बेस्ट हैं। मखमली टेक्सचर और गहरा रंग साधारण सूट को भी रॉयल और महंगा लुक देता है। आजकल इन्हें पूरी कलाई भरकर पहनने के बजाय गोल्ड या कुंदन के कड़ों के बीच में सेट करके पहनना ट्रेंड में है। कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े शादी या बड़ी पार्टी के लिए कुंदन और स्टोन वर्क वाले कड़े सबसे शानदार विकल्प हैं। इन्हें पूरी चूड़ियों के सेट के बजाय एक एक चौड़ा कड़ा दोनों हाथों में पहनना आजकल पसंद किया जाता है। अगर आपकी कुर्ती पर हैवी एम्ब्रॉयडरी है तो ये कड़े आपको रॉयल और क्लासी लुक देंगे।बैंगल्स सही डिजाइन और सेटिंग के साथ किसी भी लुक को हाई फैशन और रॉयल बना सकते हैं। चाहे त्योहार हो या शादी इन 5 बैंगल डिज़ाइनों से आपका सूट भी एथनिक और स्टाइलिश लगेगा।
मसल्स मजबूत करने से लेकर हार्ट हेल्थ तक लोबिया दाल के फायदे जानकर रह जाएंगे हैरान

नई दिल्ली:आजकल फिटनेस को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। मसल्स बनाने और शरीर को मजबूत रखने के लिए लोग जिम में घंटों मेहनत करते हैं और कई बार महंगे सप्लीमेंट का भी सहारा लेते हैं। हालांकि शरीर को मजबूत बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज संतुलित आहार और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन है। कई लोग नॉनवेज फूड्स से प्रोटीन की कमी पूरी कर लेते हैं लेकिन शाकाहारी लोगों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में लोबिया दाल एक बेहतरीन विकल्प के रूप में सामने आती है जो स्वाद के साथ साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। लोबिया दाल को प्लांट बेस्ड प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों की मरम्मत और उनके विकास के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। अगर आप नियमित रूप से लोबिया दाल का सेवन करते हैं तो इससे मसल्स मजबूत बनने में मदद मिल सकती है। लगभग सौ ग्राम उबले हुए लोबिया में करीब आठ से दस ग्राम प्रोटीन पाया जाता है जो शरीर को ऊर्जा देने और मांसपेशियों को ताकत देने में सहायक होता है। यही वजह है कि जिम जाने वाले युवाओं और बढ़ते बच्चों के लिए यह दाल काफी फायदेमंद मानी जाती है। लोबिया दाल वजन कम करने में भी मददगार हो सकती है। इसमें डाइटरी फाइबर की मात्रा अधिक होती है जो पाचन प्रक्रिया को धीरे चलने में मदद करती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराती है। इससे बार बार भूख लगने की समस्या कम हो जाती है और व्यक्ति अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाता है। इसके साथ ही लोबिया में कैलोरी की मात्रा कम होती है और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद रहते हैं जिससे यह वजन घटाने वाले लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प बन जाती है। पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में भी लोबिया दाल का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसमें मौजूद घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पेट से जुड़ी कई समस्याओं को दूर करने में मदद करते हैं। इसका नियमित सेवन कब्ज की समस्या को कम करने और आंतों की सफाई करने में सहायक माना जाता है। फाइबर शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे शरीर हल्का और ऊर्जावान महसूस करता है। लोबिया दाल केवल मसल्स और पाचन के लिए ही नहीं बल्कि दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। इसमें पोटैशियम मैग्नीशियम और फ्लेवोनोइड्स जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इसके अलावा लोबिया बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होती है जिससे हार्ट डिजीज का खतरा भी कम हो सकता है। भारत में महिलाओं और बच्चों में आयरन की कमी एक आम समस्या है। लोबिया दाल आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत मानी जाती है जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहतर हो सकता है और थकान तथा कमजोरी की समस्या कम हो सकती है। इसके अलावा लोबिया में मौजूद जिंक और विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाते हैं। इससे शरीर संक्रमण और बीमारियों से लड़ने में सक्षम बनता है। इसलिए अगर आप अपनी डाइट में पौष्टिक और संतुलित भोजन शामिल करना चाहते हैं तो लोबिया दाल को नियमित रूप से खाना एक अच्छा और फायदेमंद विकल्प साबित हो सकता है।
Summer Skin Care Tips: गर्मियों में त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये 5 असरदार टिप्स

नई दिल्ली:गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और लगातार बढ़ते तापमान के साथ लोगों को तेज धूप और पसीने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस मौसम में केवल सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा का ख्याल रखना भी बेहद जरूरी हो जाता है। चिलचिलाती धूप में बाहर निकलते ही त्वचा टैनिंग, सनबर्न और रूखी हो सकती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी त्वचा गर्मियों में भी हेल्दी और चमकदार बनी रहे तो कुछ आसान और असरदार उपाय अपनाना जरूरी है। 1. सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल यदि आप छात्र हैं या काम के सिलसिले में घर से बाहर निकलते हैं, तो एसपीएफ 30+ वाला सनस्क्रीन चेहरे और हाथ-पांव पर रोजाना लगाना बेहद जरूरी है। इसे दिन में 3 से 4 बार दोहराना चाहिए। इससे त्वचा टैन होने, सनबर्न और रूखेपन से बची रहती है। 2. पर्याप्त पानी पिएं गर्मियों में शरीर में पानी की कमी होने का खतरा अधिक होता है। इसलिए दिन भर में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी पीना चाहिए। यह न केवल त्वचा को हाइड्रेट रखता है बल्कि पूरे शरीर को भी ठंडक और ऊर्जा देता है। 3. मौसमी फल शामिल करें फलों में पानी की मात्रा अधिक होती है और ये विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। गर्मियों में तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा जैसे मौसमी फल न सिर्फ ताजगी देते हैं बल्कि त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखते हैं। 4. हल्के और सूती कपड़े पहनें भीषण गर्मी में हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें। इससे शरीर में गर्मी कम लगेगी और पसीने की समस्या भी कम होगी। घर से बाहर निकलते समय स्कार्फ, टोपी, धूप का चश्मा या छाता का इस्तेमाल करें ताकि त्वचा तेज धूप से सुरक्षित रहे। 5. तेज धूप में बाहर निकलने से बचें सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे तेज होती है। इस समय बाहर निकलने से त्वचा टैन और सनबर्न होने का खतरा बढ़ जाता है। कोशिश करें कि इस समय बाहर जाना जरूरी न हो। टैनिंग को दूर करने के घरेलू उपाय अगर धूप में त्वचा टैन हो जाती है, तो घर पर कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। एलोवेरा जेल, दही, खीरे या टमाटर का रस टैनिंग हटाने में मदद करते हैं। इन्हें त्वचा पर हल्के हाथों से लगाएं और 15-20 मिनट बाद धो लें। ये उपाय त्वचा को ठंडक देने के साथ-साथ उसका नमी स्तर भी बनाए रखते हैं। गर्मी में थोड़ी सावधानी और सही दिनचर्या से आपकी त्वचा लंबे समय तक स्वस्थ, चमकदार और हाइड्रेटेड बनी रहेगी।
कीवी का जूस पीना बेहतर या फल खाना? जानिए सेहत के लिए कौन सा तरीका है ज्यादा फायदेमंद

नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों से भरपूर फलों को डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन्हीं फलों में से एक है कीवी, जिसे औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। हल्का खट्टा-मीठा स्वाद रखने वाला यह फल न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है बल्कि शरीर को कई तरह के स्वास्थ्य लाभ भी देता है। अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि कीवी को जूस के रूप में पीना ज्यादा फायदेमंद है या इसे सीधे फल के रूप में खाना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार दोनों ही तरीके लाभकारी हैं, लेकिन साबुत फल खाने से शरीर को ज्यादा फाइबर मिलता है, जबकि जूस जल्दी ऊर्जा देने में मदद करता है। कीवी पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन-सी, विटामिन-के, विटामिन-ई, पोटैशियम, फोलेट, फाइबर, कॉपर और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इसका सेवन शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में कीवी का जूस पीना शरीर को तरोताजा रखने में सहायक होता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुबह के समय इसका सेवन करना ज्यादा फायदेमंद मानते हैं। कीवी या उसके जूस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी को मजबूत बनाता है। इसमें मौजूद विटामिन-सी शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे कब्ज और अपच से राहत दिलाने में मदद करता है। कई बार डॉक्टर डेंगू बुखार के दौरान भी कीवी या कीवी के जूस का सेवन करने की सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर की ताकत बनाए रखने में सहायक होता है। कीवी का सेवन दिल की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। साथ ही यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में भी सहायक हो सकता है, जिससे दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। यही नहीं, इसमें मौजूद पोषक तत्व जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में भी मददगार माने जाते हैं। कीवी आंखों की सेहत के लिए भी फायदेमंद है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन-सी आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं और उम्र के साथ होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम कर सकते हैं। अगर आप कीवी का जूस बनाना चाहते हैं तो इसे अच्छी तरह धोकर छील लें और छोटे टुकड़ों में काट लें। इसके बाद इसे मिक्सर में डालकर थोड़ा पानी, स्वादानुसार काला नमक और चाहें तो थोड़ी चीनी मिलाकर ब्लेंड कर लें। अंत में इसमें थोड़ा नींबू का रस मिलाकर ताजगी से भरपूर जूस तैयार किया जा सकता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संभव हो तो कीवी को जूस के बजाय साबुत फल के रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद होता है, क्योंकि इससे शरीर को फाइबर भी पर्याप्त मात्रा में मिलता है।
सिर्फ 5 मिनट में तैयार करें चटपटा महाराष्ट्रीयन ठेचा, बढ़ाए खाने का मज़ा

नई दिल्ली । भारतीय खाने में चटनी का खास महत्व होता है जो साधारण भोजन का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देती है। महाराष्ट्रीयन ठेचा ऐसी ही तीखी और चटपटी चटनी है जो दाल-चावल या साधारण रोटियों के साथ खाने के मज़े को दोगुना कर देती है। अगर सब्जी बनाने का मन न हो तो यह रेसिपी आपकी रसोई की रेस्क्यू साबित हो सकती है। महाराष्ट्रीयन ठेचा क्या है?ठेचा महाराष्ट्र की पारंपरिक चटनी है जिसे मुख्य रूप से हरी मिर्च लहसुन और मूंगफली से बनाया जाता है। इसे ज्वार या बाजरे की भाकरी के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसे ओखली या सिलबट्टे पर दरदरा कुचला जाता है जिससे इसका टेक्सचर और स्वाद देसी और अनोखा होता है।सिर्फ 5 मिनट में तैयार ठेचा बनाने के लिए किसी लंबी तैयारी की जरूरत नहीं है। केवल हरी मिर्च लहसुन की कलियां मूंगफली थोड़ा जीरा और नमक का इस्तेमाल करके मिनटों में इसे तैयार किया जा सकता है। यह रेसिपी खासकर हॉस्टल स्टूडेंट्स या व्यस्त लोगों के लिए परफेक्ट है। बनाने की आसान विधि एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें।हरी मिर्च डंठल हटाकर लहसुन की कलियां और मूंगफली डालें।इन्हें तब तक भूनें जब तक मिर्च पर हल्के भूरे धब्बे न आएं और मूंगफली कुरकुरी न हो जाए। थोड़ा जीरा भी डालें। भुनी हुई सामग्री को ओखली में निकालें और स्वादानुसार नमक मिलाएं। इसे दरदरा कूट लें बारीक पेस्ट नहीं बनाना है। इच्छानुसार नींबू का रस या बारीक कटा हरा धनिया डाल सकते हैं। सेवन और स्टोरेज टिप्स ठेचा पराठे पूरी दाल-चावल या सादी रोटी के साथ खाया जा सकता है। इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज में 5-7 दिन तक फ्रेश रखा जा सकता है। सफर में यह त्वरित और स्वादिष्ट विकल्प साबित होता है। स्वाद और सेहत मिर्च और लहसुन का यह मेल सिर्फ खाने का मज़ा नहीं बढ़ाता बल्कि मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। अगली बार जब सब्जी बनाने का मन न हो तो इस चटपटी महाराष्ट्रीयन ठेचा को ट्राई जरूर करें।