इस होली कम समय में बनाए गुझिया, तलते वक्त फट जाती है तो यहां देखें आसान रेसिपी

नई दिल्ली । होली का त्योहार गुझिया के बिना अधूरी है। गुझिया की तैयारी कुछ दिनों पहले से ही शुरु हो जाती है। लेकिन ऑफिस और भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास समय की कमी है। ऐसे में काफी लोग होली के मौके पर गुझिया बना नहीं पाते हैं और बाजार से खरीद कर लाते हैं। बाजार की गुझिया का स्वाद घर जैसा नहीं होता है। साथ बाजार की गुझिया में चीनी की मात्रा काफी अधिक होती है जिसकी चलते यह सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकती है। कुछ आसान तरीके हैं जिनकी मदद से आप होली के मौके पर कम समय में गुझिया बना सकते हैं। इसके साथ ही गुझिया बनाने में लोगों को एक और समस्या रहती है कि तलते समय यह फट जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं किस तरह कम समय में गुझिया बनाएं और वह भी बिना फटे। गुझिया की सामग्री मैदा- दो कपघी- 1 कपपानी- 1 कपखोया- 1 कपचीनी- 1 कप1 छोटा चम्मच छोटी इलायची1 चम्मच कद्दूकस किया हुआ बादामनारियल का बुरादाकाजूकिशमिशचिरौंजी गुझिया बनाने की विधि मैदे में आधा कप घी और पानी मिलाकर अच्छे से गूंथकर आधे घंटे के लिए ढककर रख दें। खोए को हल्की आंच पर थोड़ी देर के लिए भून लें। खोया जब ठंडा हो जाए तो इसमें बादाम, इलायची पाउडर और चीनी मिला दें। गूंथे हुए मैदे की लोई बनाकर उसे गोल पूरी की तरह बेल लें। अब उसमें तैयार मिश्रण भरकर किनारों पर हल्का पानी लगाकर उसे बंद करें। फैंसी कटर की मदद से गुझिया के किनारों को शेप दे सकते हैं। एक कढ़ाई में घी डालकर गर्म कर लें। हल्की आंच पर गुझिया को तब तक तलें जब तक वह हल्के भूरे रंग की न हो जाए। एक बड़े प्लेट में टिश्यू पेपर बिछाकर उसपर गुझिया निकाल लें। जब ये ठंडा हो जाए तो उसे एक डिब्बे में बंद करके रख दें। फट जाती है तो अपनाएं ये तरीके गुझिया तलने के लिए हमेशा मोटी तली वाली कढ़ाई लेना चाहिए। पतली कढ़ाई में गुझिया जल्दी जल जाती है। गुझिया तलने के लिए तेल न तो ज्यादा होना चाहिए और न ही कम। तेल को मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल से धुआं नहीं उठना चाहिए। तेल तैयार हो जाए तो कढ़ाई के हिसाब से गुझिया डालें। गुझिया डालते ही उसे हिलाना नहीं चाहिए। इससे फटने का डर रहता है। गुझिया को 7-10 मिनट तक धीमी आंच पर पकाना चाहिए। तेज आंच पर पकाने से ये अंदर से कच्ची रह सकती है और साथ ही फट भी सकती है। जब गुझिया एक तरह से सुनहरी हो जाए तब इसे पलटें।
तनाव मुक्त जीवन के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..

नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोग जिम और कसरत का सहारा लेते हैं, लेकिन मन का स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मन को स्वस्थ रखने के लिए योग में चित्त की मुख्य 5 वृत्तियों का अभ्यास किया जाता है। इन वृत्तियों की समझ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है और जीवनशैली सुधारने में मदद मिलती है। चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे सभी प्रकार के बोझ और विकारों से मुक्त करना। योग में पांच प्रमुख वृत्तियां बताई गई हैं: प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति। 1. प्रमाणवृत्ति: यह ध्यान का पहला चरण है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है। आँखों और कानों से प्राप्त अनुभव के माध्यम से मन को वास्तविकता से जोड़ा जाता है। 2. विपर्ययवृत्ति: इसमें मन में उत्पन्न भ्रम और गलत ज्ञान को दूर किया जाता है। विपर्ययवृत्ति का लक्ष्य मन के भीतर पल रहे विरोधाभासी विचारों को संशोधित करना है। 3. विकल्प वृत्ति: यह कल्पनाशील ज्ञान से संबंधित है, जिसे वस्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे शब्द ज्ञान या कल्पना द्वारा प्राप्त ज्ञान कहा जा सकता है। 4. निद्रावृत्ति: इसका अर्थ है ज्ञान की कमी। इस अवस्था में मन ज्ञान की स्थिति से दूर होता है और अज्ञान या तमस का अनुभव करता है। 5. स्मृतिवृत्ति: जब मन बार-बार पुरानी यादों को याद करता है और अतीत के सुखद पलों में खुद को डुबो देता है। इन पांच वृत्तियों का अभ्यास मानसिक विकारों और तनाव को हटाने में सक्षम है। योग के माध्यम से इन पर ध्यान केंद्रित कर मन को शांत, सशक्त और बोझ-मुक्त बनाया जा सकता है। तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना जरूरी है, और चित्त की ये पाँच वृत्तियां इसे संभव बनाती हैं।
Holi Skincare Tips: रंगों का त्योहार खुशी से मनाएं, स्किन और बालों को रखें सुरक्षित

नई दिल्ली । होली का त्योहार नजदीक है और रंग-गुलाल की तैयारी जोरों पर है। लेकिन उत्साह के बीच अक्सर लोग अपनी त्वचा और बालों की देखभाल को नजरअंदाज कर देते हैं। केमिकल युक्त रंगों से स्किन इरीटेशन, एलर्जी, रैशेज और बालों के रूखेपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप रंगों का मजा बिना किसी नुकसान के ले सकते हैं। होली खेलने से पहले अपनाएं ये उपाय, मॉइस्चराइजर की मोटी परत लगाएं होली से एक रात पहले चेहरे और शरीर पर अच्छी तरह मॉइस्चराइजर लगाएं। होली खेलने से ठीक पहले भी इसकी मोटी परत लगाएं। इससे त्वचा पर एक सुरक्षा कवच बन जाता है और रंग गहराई तक नहीं जाता।सनस्क्रीन जरूर लगाएं अक्सर होली खुले मैदान या छत पर खेली जाती है। ऐसे में धूप से बचाव जरूरी है। एसपीएफ 50 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाएं ताकि यूवी किरणों से त्वचा सुरक्षित रहे। नारियल तेल और हल्दी का इस्तेमाल होली से एक-दो दिन पहले त्वचा पर नारियल तेल और हल्दी लगाने से त्वचा मजबूत होती है और रंगों का असर कम पड़ता है। बालों में भी नारियल तेल लगाकर रखें, इससे रंग आसानी से निकल जाता है। होली खेलने के बाद रखें इन बातों का ध्यान जोर से स्क्रबिंग न करें रंग हटाने के लिए त्वचा को बार-बार रगड़ना नुकसानदायक हो सकता है। इससे त्वचा में जलन और रैशेज बढ़ सकते हैं। पहले सादे पानी से धोएं होली के बाद सबसे पहले सादे पानी से रंग धोएं। तुरंत साबुन या बॉडी वॉश का उपयोग न करें। जब ज्यादातर रंग निकल जाए तब हल्के क्लींजर का इस्तेमाल करें। एलोवेरा जेल लगाएं त्वचा साफ करने के बाद एलोवेरा जेल लगाएं। यह स्किन को ठंडक देता है और डैमेज हुई त्वचा की मरम्मत में मदद करता है। आंखों और बालों की सुरक्षा भी जरूरी होली के दौरान आंखों में रंग जाने से संक्रमण का खतरा रहता है। इसलिए सनग्लासेस पहनें। बालों को सुरक्षित रखने के लिए पहले से तेल लगाएं या हेयर मास्क का उपयोग करें। जिन्हें सांस की समस्या है, वे गुलाल से दूरी बनाए रखें। हर्बल गुलाल है सुरक्षित विकल्प पक्के रंगों में मेटल साल्ट्स, सिंथेटिक डाई और इंडस्ट्रियल पिगमेंट हो सकते हैं, जो त्वचा और बालों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए हर्बल या प्राकृतिक गुलाल से होली खेलना बेहतर और सुरक्षित विकल्प है।
क्यों ड्रैगन फ्रूट बन रहा है हेल्थ प्रेमियों की पहली पसंद: जानें इसके सम्पूर्ण लाभ

नई दिल्ली । आज के समय में लोग अपनी सेहत के प्रति जागरूक हो गए हैं। लोग स्वस्थ रहने के लिए फल, सब्जियां और हेल्दी डाइट का सेवन करना पसंद कर रहे हैं। ऐसे ही एक फल है ड्रैगन फ्रूट जिसे कुछ लोग पिटाया भी कहते हैं। इसका छिलका गुलाबी और अंदर का गूदा सफेद या हल्का गुलाबी होता है। इसके छोटे-छोटे काले बीज इसे और आकर्षक बनाते हैं। यह फल मुख्य रूप से थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया और भारत के कुछ हिस्सों में उगाया जाता है और गर्मियों में खाने के लिए उत्तम माना जाता है। ड्रैगन फ्रूट में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, मैग्नीशियम और विभिन्न विटामिन्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें पॉलीफेनोल्स, कैरोटीनॉयड और बीटासायनिन जैसे पौधे यौगिक होते हैं। विटामिन सी, बीटा-कैरोटीन, लाइकोपीन और बीटालेन जैसी एंटीऑक्सीडेंट्स की मौजूदगी इसे सेहत के लिए और प्रभावशाली बनाती है। ड्रैगन फ्रूट पाचन के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उच्च मात्रा में फाइबर होता है जो कब्ज और अन्य पाचन समस्याओं को दूर करता है। फाइबर आंतों की गतिविधियों को नियमित करता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखता है। इम्यूनिटी बढ़ाने में भी ड्रैगन फ्रूट की अहम भूमिका है। विटामिन-सी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। इस कारण इसे अपनी डाइट में शामिल करना सेहत के लिए लाभकारी है। ड्रैगन फ्रूट ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके फाइबर ब्लड फ्लो में शुगर के अवशोषण को धीमा कर देते हैं, जिससे शुगर लेवल संतुलित रहता है। डायबिटीज के मरीजों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। वजन घटाने वालों के लिए ड्रैगन फ्रूट एक बेहतरीन विकल्प है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है और बार-बार भूख लगने से रोकता है। इसके अलावा ड्रैगन फ्रूट शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है। इसमें पानी की पर्याप्त मात्रा होती है, जिससे शरीर तरोताजा रहता है और वजन कम करने में भी सहायता मिलती है। दिल के स्वास्थ्य के लिए भी ड्रैगन फ्रूट फायदेमंद है। इसमें प्राकृतिक स्वस्थ वसा विशेष रूप से ओमेगा-3 और ओमेगा-9 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं और दिल की बीमारियों के जोखिम को कम कर सकते हैं। त्वचा के लिए ड्रैगन फ्रूट का सेवन बेहद लाभकारी है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विशेषकर विटामिन सी, त्वचा को झुर्रियों और महीन रेखाओं से बचाते हैं। इसके नमी बनाए रखने वाले गुण त्वचा को मुलायम, चमकदार और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इस तरह ड्रैगन फ्रूट न सिर्फ स्वाद में अनोखा और आकर्षक है, बल्कि यह शरीर और त्वचा के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करके आप पाचन सुधार, इम्यूनिटी बढ़ाने, ब्लड शुगर कंट्रोल और त्वचा की सुंदरता सभी का लाभ पा सकते हैं।
जानें सुबह की सैर का सही तरीका, जो बीपी और शुगर दोनों को नियंत्रित रखे

नई दिल्ली: आज के समय में लगभग हर घर में हाई बीपी और शुगर के मरीज मिल जाते हैं। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही सुबह की सैर को स्वास्थ्य का संजीवनी मानते हैं। नियमित सुबह की सैर इन रोगों को नियंत्रित रखने में दवा की तरह काम करती है। कैसे होती है फायदा?सुबह के वक्त शरीर ‘बायोकेमिकल’ प्रक्रिया से गुजरता है। ठंडी हवा में निकलने से शरीर प्राकृतिक इंसुलिन का निर्माण करता है। तेज़ कदमों से सैर करने पर मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदल देती हैं। यह प्रक्रिया शुगर नियंत्रण में दवा की तरह काम करती है। सैर करने से धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ बढ़ता है, जिससे हाई बीपी प्रभावित नहीं होता। शोध से पता चला है कि लगातार 3 महीने तक रोज़ाना 30 मिनट की सुबह की सैर शुगर लेवल कम कर सकती है। सैर के अन्य लाभ: गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और रक्त धमनियों पर दबाव कम होता है। दिल की सेहत बेहतर होती है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है। रक्त संचार बेहतर होने से पूरे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है। सैर का सही तरीका: सैर ब्रह्म मुहूर्त में करें, जब वायुमंडल में ऑक्सीजन भरपूर हो। तेज़-तेज़ और लंबे कदमों से चलें, लेकिन हांफे नहीं। शुरुआत में 30 मिनट से करें, धीरे-धीरे समय और रफ्तार बढ़ाएं। रोजाना कम से कम 1 घंटे की सैर को लक्ष्य बनाएं। सुबह की नियमित सैर न केवल बीपी और शुगर, बल्कि हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसे जीवनशैली में शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
STRESS FREE LIFE : स्ट्रेस फ्री लाइफ के लिए योग: मन की 5 वृत्तियों का सरल ज्ञान..

STRESS FREE LIFE : नई दिल्ली: शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए लोग जिम और कसरत का सहारा लेते हैं, लेकिन मन का स्वास्थ्य उतना ही जरूरी है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, मन को स्वस्थ रखने के लिए योग में चित्त की मुख्य 5 वृत्तियों का अभ्यास किया जाता है। इन वृत्तियों की समझ से मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है और जीवनशैली सुधारने में मदद मिलती है। चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन का अध्ययन करना और उसे सभी प्रकार के बोझ और विकारों से मुक्त करना। योग में पांच प्रमुख वृत्तियां बताई गई हैं: प्रमाणवृत्ति, विपर्ययवृत्ति, विकल्प वृत्ति, निद्रावृत्ति और स्मृतिवृत्ति। 1. प्रमाणवृत्ति: यह ध्यान का पहला चरण है। इसमें मन को सही ज्ञान और धारणा की स्थिति में लाया जाता है। आँखों और कानों से प्राप्त अनुभव के माध्यम से मन को वास्तविकता से जोड़ा जाता है। 2. विपर्ययवृत्ति: इसमें मन में उत्पन्न भ्रम और गलत ज्ञान को दूर किया जाता है। विपर्ययवृत्ति का लक्ष्य मन के भीतर पल रहे विरोधाभासी विचारों को संशोधित करना है। 3. विकल्प वृत्ति: यह कल्पनाशील ज्ञान से संबंधित है, जिसे वस्तु से कोई लेना-देना नहीं होता। इसे शब्द ज्ञान या कल्पना द्वारा प्राप्त ज्ञान कहा जा सकता है। 4. निद्रावृत्ति: इसका अर्थ है ज्ञान की कमी। इस अवस्था में मन ज्ञान की स्थिति से दूर होता है और अज्ञान या तमस का अनुभव करता है। 5. स्मृतिवृत्ति: जब मन बार-बार पुरानी यादों को याद करता है और अतीत के सुखद पलों में खुद को डुबो देता है। इन पांच वृत्तियों का अभ्यास मानसिक विकारों और तनाव को हटाने में सक्षम है। योग के माध्यम से इन पर ध्यान केंद्रित कर मन को शांत, सशक्त और बोझ-मुक्त बनाया जा सकता है। तन की तरह मन को भी स्वस्थ रखना जरूरी है, और चित्त की ये पाँच वृत्तियां इसे संभव बनाती हैं।
MotivationTips: कॉन्फिडेंस की कमी बन रही है सफलता में रुकावट जानिए आत्मविश्वास बढ़ाने के असरदार तरीके

MotivationTips: नई दिल्ली। Confidence Gain। कई बार हम पूरी मेहनत और तैयारी के साथ आगे बढ़ते हैं लेकिन आखिरी समय पर आत्मविश्वास की कमी हमें पीछे धकेल देती है। इंटरव्यू हो प्रेजेंटेशन हो या कोई नया काम शुरू करना हो यदि खुद पर भरोसा कमजोर पड़ जाए तो आसान काम भी कठिन लगने लगता है। यही वजह है कि कई लोग प्रतिभाशाली और मेहनती होने के बावजूद अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाते। आत्मविश्वास कोई जन्म से मिला गुण नहीं है बल्कि इसे रोजमर्रा की आदतों से विकसित किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि छोटे छोटे बदलाव अपनाकर अपने भीतर छिपी क्षमता को बाहर लाया जा सकता है। जब हम खुद को समझते हैं और अपनी प्रगति को पहचानते हैं तो धीरे धीरे आत्मबल मजबूत होने लगता है। सबसे पहले जरूरी है कि छोटी छोटी सफलताओं को नजरअंदाज न किया जाए। अक्सर लोग दिनभर की उपलब्धियों को महत्व नहीं देते लेकिन हर छोटा कदम आगे बढ़ने का संकेत होता है। यदि आप अपनी छोटी उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं तो दिमाग सकारात्मक संकेत देता है और आत्मविश्वास बढ़ता है। स्पष्ट लक्ष्य तय करना भी बेहद जरूरी है। बिना दिशा के आगे बढ़ना मुश्किल होता है। छोटे और व्यावहारिक लक्ष्य बनाएं और उन्हें समय सीमा में पूरा करने की कोशिश करें। जब लक्ष्य पूरे होते हैं तो खुद पर भरोसा मजबूत होता है। बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटकर पूरा करना ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक तरीका है। पॉजिटिव सेल्फ टॉक आत्मविश्वास बढ़ाने का शक्तिशाली साधन है। अक्सर हम खुद से नकारात्मक बातें करते हैं जिससे मनोबल गिरता है। यदि इन विचारों को बदलकर सकारात्मक संवाद अपनाया जाए तो बड़ा फर्क पड़ सकता है। मैं सक्षम हूं और मैं कोशिश करूंगा जैसे वाक्य मन को मजबूत बनाते हैं और डर को कम करते हैं। नई स्किल सीखना भी आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रभावी तरीका है। जब आप कोई नया कौशल सीखते हैं या नई जानकारी हासिल करते हैं तो भीतर से आत्मसंतोष मिलता है। यह अनुभव धीरे धीरे आत्मविश्वास को मजबूत करता है। चाहे कोई कोर्स हो नई भाषा हो या कोई रचनात्मक गतिविधि सीखना हमेशा फायदेमंद रहता है। बॉडी लैंग्वेज पर ध्यान देना भी जरूरी है। सीधा खड़े होना आंखों में देखकर बात करना और हल्की मुस्कान बनाए रखना ये छोटी बातें भी आत्मविश्वास को दर्शाती हैं। सकारात्मक शारीरिक हावभाव अपनाने से न केवल दूसरों पर अच्छा प्रभाव पड़ता है बल्कि खुद को भी भीतर से मजबूती महसूस होती है। साथ ही सकारात्मक लोगों के साथ समय बिताना आत्मविश्वास के लिए लाभकारी है। हमारा वातावरण हमारी सोच को प्रभावित करता है। ऐसे लोगों के साथ रहें जो प्रेरित करें और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें। नकारात्मक माहौल से दूरी बनाकर ही आत्मबल को सुरक्षित रखा जा सकता है। आत्मविश्वास धीरे धीरे विकसित होने वाली शक्ति है। निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से इसे मजबूत बनाया जा सकता है। जब खुद पर भरोसा मजबूत होता है तो सफलता की राह भी आसान लगने लगती है।
HOLI 2026 PRECAUTIONS: होली 2026: बालों की सुरक्षा और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बिनेशन

HOLI 2026 PRECAUTIONS: नई दिल्ली । होली का त्योहार आते ही रंग गुलाल मस्ती और धूमधाम शुरू हो जाती है लेकिन अक्सर यह हमारी सुंदरता और बालों की सेहत पर असर डाल देता है। रंग खेलने के बाद बाल रूखे बेजान और नुकसान पहुंचने वाले दिखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप होली पर बालों की सुरक्षा और स्टाइल दोनों का ध्यान रखें। इस बार होली 2026 पर कुछ आसान ट्रेंडी और सुरक्षित हेयरस्टाइल्स अपनाकर आप न सिर्फ खूबसूरत दिख सकती हैं बल्कि बालों को भी रंग और धूप से बचा सकती हैं। सबसे पहले बात करते हैं रोप ब्रेड पोनीटेल की। यह स्टाइल फ्रेंच ब्रेड से अलग और अधिक कूल लगती है। इसे बनाने के लिए बालों को दो हिस्सों में बांटकर ट्विस्ट करें और फिर रस्सी जैसी चोटी बनाकर पोनीटेल में बांध लें। होली खेलने के दौरान यह हेयरस्टाइल बालों को व्यवस्थित और सुरक्षित रखती है। दूसरी स्टाइल है साइड ट्विस्ट लो बन। लो बन हर किसी को पसंद आता है लेकिन साइड ट्विस्ट जोड़ने से यह अधिक आकर्षक और एलिगेंट लगती है। यह हेयरस्टाइल चेहरे की शेप को निखारती है और कुर्ता पलाजो या साड़ी हर आउटफिट के साथ परफेक्ट बैठती है। इसके बाद आती है क्राउन ब्रेड पोनीटेल। इसमें सिर के आगे से पतली चोटी बनाकर इसे क्राउन की तरह घुमाया जाता है और पोनीटेल में जोड़ दिया जाता है। यह स्टाइल खुली बालों जैसा लुक देती है लेकिन बाल पूरी तरह बंधे रहते हैं जिससे रंग गुलाल से बाल सुरक्षित रहते हैं। अगर आप कुछ यूनिक और परफेक्ट होली लुक चाहती हैं तो स्कार्फ बन हेयरस्टाइल ट्राई कर सकती हैं। इसमें बालों में रंगीन स्कार्फ या दुपट्टा लपेटकर बन बनाया जाता है। यह स्टाइल बालों को रंग और धूप से बचाती है और साथ ही ट्रेडिशनल और बोहो लुक देती है। अंत में स्पेस बन हेयरस्टाइल भी होली पार्टी के लिए बेहतरीन है। इसमें बालों को दो हिस्सों में बांटकर दो छोटे छोटे बन बनाए जाते हैं। यह हेयरस्टाइल यंग फन और क्यूट लुक देती है। दोस्तों के साथ होली पार्टी में यह स्टाइल आपके पूरे लुक को चार चांद लगा देती है। इस होली बालों की सुरक्षा और खूबसूरती को ध्यान में रखते हुए इन आसान और ट्रेंडी हेयरस्टाइल्स को अपनाएं। रोप ब्रेड साइड ट्विस्ट लो बन क्राउन ब्रेड पोनीटेल स्कार्फ बन और स्पेस बन जैसे विकल्प आपके होली लुक को परफेक्ट बनाएंगे और बालों को भी सुरक्षित रखेंगे।
गर्मियों में नहीं होगा चेहरा काला और ऑयली! अपनी डेली रूटीन में शामिल करें ये 3 जादुई बदलाव

नई दिल्ली । गर्मी का मौसम शुरू होते ही हमारी त्वचा की परेशानियां भी बढ़ने लगती हैं. तेज धूप और पसीने की वजह से चेहरा न सिर्फ काला पड़ने लगता है बल्कि बार-बार तेल आने से चेहरे की चमक भी खो जाती है. बहुत से लोग महंगे क्रीम और फेशवॉश इस्तेमाल करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें सही रिजल्टनहीं मिलता. असल में गर्मियों में त्वचा का ख्याल रखने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है. बस अपनी रोज की आदतों में कुछ छोटे और सही बदलाव करने से आप धूप से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं. इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे 3 आसान और जादुई तरीकों के बारे में बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप तपती गर्मी में भी अपने चेहरे को ठंडा साफ और चमकदार बनाए रख सकते हैं.चेहरे को धोने का सही तरीका और समय गर्मियों में बार-बार चेहरा धोने से त्वचा का कुदरती तेल खत्म हो जाता है जिससे चेहरा और ज्यादा ऑयली हो जाता है. दिन में सिर्फ दो या तीन बार ही अच्छे फेसवाश का इस्तेमाल करें. जब भी आप बाहर से आएं तो चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे जरूर मारें. इससे धूल-मिट्टी साफ हो जाएगी और चेहरे की गर्मी भी कम होगी. रात को सोने से पहले चेहरा साफ करना कभी न भूलें ताकि आपकी स्किन रात भर सांस ले सके. सनस्क्रीन को अपनी आदत बना लें सूरज की तेज किरणें चेहरे को काला करने और झुर्रियां पैदा करने का सबसे बड़ा कारण होती हैं. बहुत से लोग सोचते हैं कि घर के अंदर सनस्क्रीन की जरूरत नहीं है लेकिन यह गलत है. घर के अंदर हों या बाहर सनस्क्रीन जरूर लगाएं. यह आपके चेहरे पर एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है और धूप से होने वाले कालेपन को रोकती है. हर 3 से 4 घंटे बाद इसे दोबारा लगाना सबसे अच्छा रहता है. पानी और खानपान पर खास ध्यान दें बाहर से महंगी क्रीम लगाने से ज्यादा जरूरी है कि आप अंदर से अपनी स्किन का ख्याल रखें. गर्मियों में ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि शरीर की गंदगी बाहर निकल सके और स्किन हाइड्रेटेड रहे. अपनी डाइट में खीरा तरबूज और नींबू पानी जैसी ठंडी चीजें शामिल करें. तेल-मसाले वाला खाना कम खाएं क्योंकि इससे चेहरे पर पिंपल्स और तेल आने की समस्या बढ़ जाती है. जितना ज्यादा आप फल और सब्जियां खाएंगे आपका चेहरा उतना ही ज्यादा चमकेगा.
होली 2026: राजस्थान से बिहार तक, मालपुआ से मिठास का त्योहार

नई दिल्ली । होली का त्योहार रंगों और मस्ती के साथ साथ स्वाद और पारंपरिक व्यंजनों का भी अवसर है। फाल्गुन के महीने में घरों में गुजिया ठंडाई दही भल्ले और तरह तरह के पकवान बनने लगते हैं लेकिन होली पर एक खास मिठाई है जो पूरे भारत में लोकप्रिय है मालपुआ। यह पारंपरिक मिठाई हर राज्य में अलग अंदाज में बनाई जाती है लेकिन स्वाद में हर जगह लाजवाब होती है। कहीं इसे दूध और खोये से बनाया जाता है तो कहीं गुड़ से। भारत में कई राज्यों में होली और मालपुआ का रिश्ता बहुत पुराना है और बिना मालपुआ के होली अधूरी मानी जाती है। राजस्थान रबड़ी वाला शाही मालपुआ राजस्थान में मालपुआ को खासतौर पर रबड़ी के साथ तैयार किया जाता है। इसके लिए मैदा खोया और दूध मिलाकर गाढ़ा बैटर तैयार किया जाता है फिर इसमें इलायची और सौंफ डालकर स्वाद बढ़ाया जाता है। बैटर को घी में गोल आकार में तलकर चीनी की चाशनी में डुबोया जाता है और ऊपर से ठंडी रबड़ी डालकर मेहमानों को परोसा जाता है। यह शाही अंदाज इसे खास बनाता है। बिहार केला मालपुआ बिहार में मालपुआ का स्वाद थोड़ी अलग दिशा में जाता है। यहाँ केले का इस्तेमाल किया जाता है और यह अक्सर बिना चाशनी के ही खाया जाता है। पके केले मैदा खोया और दूध का बैटर बनाकर घी में तलने पर यह नरम और खुशबूदार मालपुआ तैयार होता है। मथुरा पारंपरिक मालपुआ मथुरा में होली का रंग और स्वाद दोनों खास होते हैं। यहाँ मालपुआ मैदा और सूजी से बनाया जाता है। बैटर तैयार करने के लिए मैदा सूजी और दूध मिलाकर घी में तला जाता है और हल्की चाशनी में डुबोकर परोसा जाता है। इसका स्वाद ज्यादा मीठा नहीं होता लेकिन पारंपरिक लुत्फ देता है। ओडिशा अंपुआ ओडिशा में मालपुआ को अंपुआ कहा जाता है। यहाँ चावल के आटे और नारियल के साथ गुड़ मिलाकर बैटर तैयार किया जाता है। तेल में तलकर बनाई गई अंपुआ हल्की मीठी और बेहद स्वादिष्ट होती है। झारखंड होली पर घर घर में मालपुआ झारखंड में भी होली पर मालपुआ बनती है और इसकी रेसिपी बिहार से काफी मिलती जुलती है। घर घर में इसे बनाया जाता है और त्योहार की मिठास को बढ़ाता है।इस तरह होली 2026 पर राजस्थान बिहार मथुरा ओडिशा और झारखंड में मालपुआ का अपना अलग महत्व है। यह सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि त्योहार की रंगीन यादों और पारंपरिक स्वाद का प्रतीक है। चाहे आप शाही रबड़ी वाला मालपुआ पसंद करें या केले वाला हर प्रकार में इसका स्वाद लाजवाब और होली के जश्न को और खास बना देता है।