Android 17 QPR1 Beta 4 रिलीज, कैमरा से कनेक्टिविटी तक कई बड़ी समस्याएं हुईं दूर; Pixel यूजर्स को मिलेगा ज्यादा स्मूद अनुभव

नई दिल्ली । गूगल ने अपने एंड्रॉयड बीटा प्रोग्राम से जुड़े पिक्सल स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के लिए Android 17 QPR1 Beta 4 अपडेट जारी कर दिया है। यह अपडेट किसी बड़े नए फीचर की बजाय सिस्टम की स्थिरता बढ़ाने, पुराने तकनीकी दोषों को दूर करने और समग्र उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। कंपनी का मानना है कि आगामी फीचर ड्रॉप और सार्वजनिक रिलीज से पहले यह संस्करण प्लेटफॉर्म को अधिक भरोसेमंद और परिपक्व बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एंड्रॉयड इकोसिस्टम में क्वार्टरली प्लेटफॉर्म रिलीज यानी QPR अपडेट्स की विशेष भूमिका होती है। इनके माध्यम से गूगल नए सुधारों और संभावित फीचर्स का परीक्षण करता है, ताकि अंतिम संस्करण आम उपभोक्ताओं तक अधिक स्थिर रूप में पहुंच सके। Android 17 QPR1 Beta 4 भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे विशेष रूप से उन कमियों को दूर करने के लिए तैयार किया गया है जिनकी शिकायतें बीटा परीक्षण के दौरान सामने आई थीं। नए अपडेट का सबसे बड़ा फोकस सिस्टम परफॉर्मेंस और विश्वसनीयता पर रहा है। कई उपयोगकर्ताओं को बाहरी डिस्प्ले का उपयोग करते समय माउस पॉइंटर गायब होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा था, विशेष रूप से तब जब वे वर्क प्रोफाइल या अतिरिक्त सुरक्षा वाले एप्लिकेशन का उपयोग करते थे। इस तकनीकी समस्या को अब ठीक कर दिया गया है, जिससे प्रोफेशनल और एंटरप्राइज उपयोगकर्ताओं को अधिक सहज अनुभव मिलने की उम्मीद है। गूगल ने प्राइवेट स्पेस से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या का भी समाधान किया है। कुछ परिस्थितियों में क्रेडेंशियल प्रोवाइडर सेटिंग्स खोलते समय सेटिंग्स एप्लिकेशन अचानक बंद हो जाता था। यह समस्या सुरक्षा और अकाउंट प्रबंधन से जुड़े उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन रही थी। नए अपडेट में इस बग को पूरी तरह दूर करने का दावा किया गया है। कैमरा प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं। कई पिक्सल उपयोगकर्ताओं ने 5x जूम पर वीडियो रिकॉर्डिंग के दौरान फ्रेम जंप और रिकॉर्डिंग में झटके महसूस होने की शिकायत की थी। यह समस्या वीडियो क्वालिटी को प्रभावित कर रही थी। Android 17 QPR1 Beta 4 में इस कमी को ठीक कर कैमरा अनुभव को अधिक स्थिर और पेशेवर बनाने का प्रयास किया गया है। इसके साथ ही बैक टैप जेस्चर से जुड़ी दिक्कतों का भी समाधान किया गया है, जिससे डिवाइस के शॉर्टकट फीचर्स पहले की तुलना में बेहतर ढंग से काम करेंगे। कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण सुधार शामिल किए गए हैं। वायरलेस एडीबी और लोकल नेटवर्क आधारित एप्लिकेशनों में आने वाली कनेक्शन संबंधी समस्याओं को दूर किया गया है। इससे डेवलपर्स और तकनीकी उपयोगकर्ताओं को अधिक विश्वसनीय नेटवर्क अनुभव मिलने की संभावना है। साथ ही कुछ उपकरणों में रीस्टार्ट के बाद होम स्क्रीन विजेट्स गायब हो जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं, जिन्हें इस अपडेट के माध्यम से ठीक कर दिया गया है। यह अपडेट हाल के अधिकांश पिक्सल स्मार्टफोन्स के लिए उपलब्ध कराया गया है। हालांकि पिक्सल 6 सीरीज को फिलहाल इस रिलीज में शामिल नहीं किया गया है। कंपनी ने संकेत दिया है कि भविष्य के किसी बीटा संस्करण में इस सीरीज के लिए भी सपोर्ट उपलब्ध कराया जा सकता है। अलग-अलग पिक्सल मॉडल्स के लिए अलग बिल्ड नंबर जारी किए गए हैं, ताकि डिवाइस के अनुसार अनुकूलित सुधार प्रदान किए जा सकें। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि Android 17 QPR1 Beta 4 भले ही फीचर आधारित बड़ा अपडेट न हो, लेकिन यह प्लेटफॉर्म की गुणवत्ता और स्थिरता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में एंड्रॉयड 17 के व्यापक रोलआउट से पहले यह अपडेट उपयोगकर्ताओं को अधिक भरोसेमंद, सुरक्षित और सहज अनुभव प्रदान करने में मदद करेगा।
AI ‘जेलब्रेक’ के खतरे पर सख्त हुआ अमेरिका, Anthropic के एडवांस मॉडल्स बंद, वैश्विक तकनीकी उद्योग में नई बहस शुरू

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से विकसित होते क्षेत्र में एक नया मोड़ तब सामने आया जब अमेरिकी AI कंपनी Anthropic ने अपने सबसे उन्नत AI मॉडल्स की पहुंच अचानक सीमित करने का फैसला लिया। कंपनी का यह कदम अमेरिकी सरकार के उस निर्देश के बाद सामने आया है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं का हवाला देते हुए विदेशी नागरिकों के लिए कुछ अत्याधुनिक AI सिस्टम्स के उपयोग पर रोक लगाने को कहा गया। इस फैसले ने वैश्विक तकनीकी उद्योग, नीति निर्माताओं और AI विशेषज्ञों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। कंपनी ने बताया कि उसे अमेरिकी अधिकारियों की ओर से निर्यात नियंत्रण संबंधी निर्देश प्राप्त हुए हैं, जिनके तहत उसके दो प्रमुख AI मॉडल्स की उपलब्धता विदेशी उपयोगकर्ताओं के लिए सीमित करनी पड़ी। हालांकि सरकार की ओर से सार्वजनिक रूप से सुरक्षा चिंताओं का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि इन मॉडल्स की क्षमताओं के दुरुपयोग की संभावना को लेकर चिंता व्यक्त की गई थी। इस पूरे मामले का केंद्र तथाकथित “जेलब्रेक” तकनीक को माना जा रहा है। तकनीकी भाषा में जेलब्रेक का अर्थ उन तरीकों से है जिनके माध्यम से किसी AI मॉडल के सुरक्षा प्रतिबंधों और नियंत्रण प्रणालियों को दरकिनार करने का प्रयास किया जाता है। अमेरिकी अधिकारियों को आशंका है कि अत्यधिक सक्षम AI मॉडल्स का उपयोग साइबर सुरक्षा कमजोरियों की पहचान या अन्य संवेदनशील गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसी संभावना के आधार पर सरकार ने एहतियाती रुख अपनाया है। Anthropic ने अपने आधिकारिक रुख में कहा है कि उसे उपलब्ध कराए गए संकेत सीमित और संभावित जोखिमों पर आधारित हैं। कंपनी का मानना है कि किसी एक संभावित सुरक्षा कमजोरी के आधार पर व्यापक रूप से उपयोग किए जा रहे कमर्शियल AI मॉडल्स की पहुंच रोकना संतुलित नियामकीय दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह जिम्मेदार AI विकास और सुरक्षा मानकों के पक्ष में है, लेकिन नियमन तथ्यों और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर आधारित होना चाहिए। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में AI तकनीकों को लेकर निगरानी और नियंत्रण की मांग लगातार बढ़ रही है। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी प्रशासन का ध्यान मुख्य रूप से उन सेमीकंडक्टर चिप्स, हार्डवेयर और तकनीकी संसाधनों पर केंद्रित रहा है जो AI सिस्टम्स को संचालित करते हैं। हालांकि अब पहली बार AI मॉडल्स तक पहुंच को लेकर भी सख्त दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में AI निर्यात नियंत्रण और अधिक व्यापक हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल एक कंपनी या दो मॉडल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह AI शासन व्यवस्था के बदलते स्वरूप का संकेत है। दुनिया भर की सरकारें यह तय करने की कोशिश कर रही हैं कि अत्यधिक सक्षम AI प्रणालियों के विकास और उपयोग को किस प्रकार नियंत्रित किया जाए ताकि नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन बना रहे। दूसरी ओर तकनीकी कंपनियां यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि अत्यधिक प्रतिबंध अनुसंधान और व्यावसायिक विकास की गति को प्रभावित न करें। फिलहाल Anthropic और अमेरिकी प्रशासन के बीच इस मुद्दे पर मतभेद स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में यह मामला AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, क्योंकि इससे यह तय होगा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी स्वतंत्रता और वैश्विक डिजिटल प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन किस प्रकार स्थापित किया जाएगा। AI नियमन को लेकर चल रही यह बहस आने वाले वर्षों में वैश्विक तकनीकी नीति को प्रभावित कर सकती है।
महंगे होते स्मार्टफोन से बाजार में सुस्ती, मई में बिक्री 35 प्रतिशत तक घटी; लगातार बढ़ती कीमतों ने घटाई ग्राहकों की खरीदारी

नई दिल्ली । देश के स्मार्टफोन बाजार में मांग में नरमी के संकेत लगातार मजबूत होते दिखाई दे रहे हैं। मोबाइल फोन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब बिक्री के आंकड़ों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मई महीने में मोबाइल फोन की बिक्री में सालाना आधार पर 30 से 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिसे उद्योग जगत हाल के वर्षों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मान रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन लागत बढ़ने और उसके बोझ को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किए जाने के कारण खरीदारी की रफ्तार प्रभावित हुई है। मोबाइल उद्योग से जुड़े कारोबारियों के अनुसार पिछले कई महीनों से स्मार्टफोन कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में लगातार वृद्धि कर रही हैं। विशेष रूप से मेमरी चिप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने के बाद कंपनियों ने नवंबर 2025 से कीमतों में नियमित संशोधन शुरू किया था। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और खरीदारी के निर्णयों पर पड़ा है। बाजार में फिलहाल ऑफलाइन बिक्री की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत बनी हुई है, जबकि शेष बिक्री ऑनलाइन माध्यमों से होती है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों ही चैनलों पर मांग कमजोर हुई है। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि ग्राहक अब नए स्मार्टफोन खरीदने के फैसले को टाल रहे हैं या कम कीमत वाले विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे प्रीमियम और मिड-रेंज दोनों श्रेणियों की बिक्री प्रभावित हुई है। उद्योग के आंकड़े बताते हैं कि मई महीने के दौरान स्मार्टफोन शिपमेंट में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट केवल बिक्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि कंपनियों की सप्लाई चेन और वितरण रणनीतियों पर भी असर डाल रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि जून महीने में भी इसी प्रकार का दबाव बना रह सकता है, क्योंकि कई कंपनियों ने इस अवधि में भी कीमतों में वृद्धि जारी रखी है। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट में गिरावट अपेक्षाकृत सीमित रही थी, लेकिन दूसरी तिमाही में बाजार की स्थिति तेजी से बदली है। अब उद्योग को उम्मीद है कि दूसरी तिमाही के दौरान शिपमेंट में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज हो सकती है। यह संकेत देता है कि मूल्य वृद्धि का असर अब व्यापक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी से मई के बीच स्मार्टफोन की औसत कीमत में लगभग 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। यदि पिछले वर्ष की बढ़ोतरी को भी शामिल किया जाए तो कुछ मॉडलों में कुल मूल्य वृद्धि 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। ऐसे में उपभोक्ताओं के लिए नया स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है। दूसरी ओर खुदरा विक्रेता भी दबाव महसूस कर रहे हैं। कई कंपनियां कीमतें बढ़ाने के साथ-साथ रिटेल मार्जिन में भी कटौती कर रही हैं। इससे कारोबारियों की लाभप्रदता प्रभावित हो रही है। उद्योग जगत का मानना है कि यदि कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले महीनों में मांग और कमजोर हो सकती है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार आगामी त्योहारी सीजन स्मार्टफोन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। यदि कंपनियां आकर्षक ऑफर, वित्तीय योजनाएं और प्रतिस्पर्धी मूल्य रणनीति अपनाती हैं तो मांग में कुछ सुधार संभव है। फिलहाल बढ़ती लागत और कमजोर उपभोक्ता मांग के बीच स्मार्टफोन उद्योग चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।
महंगी होंगी टाटा की पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक गाड़ियां, बढ़ती लागत के बीच कंपनी ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिलने वाला है। प्रमुख वाहन निर्माता टाटा मोटर्स ने अपने यात्री वाहनों की कीमतों में वृद्धि करने का निर्णय लिया है, जो आगामी 1 जुलाई से प्रभावी होगी। कंपनी के इस फैसले का असर उसके पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहनों की पूरी रेंज पर पड़ने की संभावना है। बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को इस कदम का प्रमुख कारण माना जा रहा है। कंपनी द्वारा घोषित नई मूल्य वृद्धि के तहत विभिन्न मॉडलों और वैरिएंट्स की कीमतों में अधिकतम 1.5 प्रतिशत तक का इजाफा किया जाएगा। मौजूदा कीमतों को देखते हुए यह बढ़ोतरी लगभग 10 हजार रुपये से लेकर 30 हजार रुपये तक हो सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव वाहन के मॉडल, वैरिएंट और कीमत के आधार पर अलग-अलग होगा। ऑटोमोबाइल उद्योग पिछले कुछ समय से लागत संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। स्टील, एल्युमिनियम, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और अन्य कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण वाहन निर्माताओं पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही ऊर्जा लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च और विनिर्माण प्रक्रियाओं पर बढ़ते खर्च ने भी कंपनियों की लागत संरचना को प्रभावित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले वाहन निर्माता आमतौर पर वर्ष की शुरुआत में एकमुश्त कीमतों में संशोधन करते थे, लेकिन अब कंपनियां चरणबद्ध तरीके से कीमतें बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इससे ग्राहकों पर अचानक बड़ा बोझ नहीं पड़ता और कंपनियों को भी लागत वृद्धि की भरपाई करने में सुविधा मिलती है। इसी रणनीति के तहत कई वाहन निर्माता इस वर्ष अलग-अलग समय पर कीमतों में संशोधन कर चुके हैं। टाटा मोटर्स ने इससे पहले भी वर्ष के शुरुआती महीनों में अपने कुछ वाहनों की कीमतों में वृद्धि की थी। अब तीन महीने के भीतर दूसरी बार मूल्य संशोधन का फैसला यह संकेत देता है कि उद्योग पर लागत संबंधी दबाव अभी भी बना हुआ है। कंपनी का मानना है कि बढ़ते खर्चों के बीच व्यवसाय की स्थिरता बनाए रखने के लिए मूल्य वृद्धि आवश्यक हो गई है। सिर्फ टाटा मोटर्स ही नहीं, बल्कि देश की अन्य प्रमुख वाहन कंपनियां भी इसी राह पर आगे बढ़ रही हैं। विभिन्न निर्माता उत्पादन लागत और बाजार परिस्थितियों के अनुरूप अपने वाहनों की कीमतों में समय-समय पर बदलाव कर रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि ऑटो उद्योग वर्तमान समय में लागत प्रबंधन और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में भी लागत दबाव महसूस किया जा रहा है। बैटरी, सेमीकंडक्टर और अन्य तकनीकी उपकरणों की कीमतों में बदलाव का असर वाहन निर्माताओं की लागत पर पड़ रहा है। ऐसे में कंपनियां मूल्य निर्धारण की रणनीति को लगातार अपडेट कर रही हैं ताकि लाभप्रदता और बाजार हिस्सेदारी दोनों को बनाए रखा जा सके। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में यदि कच्चे माल और ऊर्जा लागत में स्थिरता नहीं आती है तो वाहन कंपनियां आगे भी सीमित स्तर पर कीमतों में संशोधन कर सकती हैं। ऐसे में वाहन खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए वर्तमान कीमतों पर खरीदारी का अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फीफा का नया मॉडल: खेल, दर्शक और बढ़ता व्यावसायीकरण..

फीफा द्वारा आयोजित 23वें फुटबॉल विश्व कप की शुरुआत हो गई है। इस बार 39 दिन चलने वाले इस टूर्नामेंट की सबसे गौर करने वाली बात यही है कि यह अपने सर्जक जूल्स रिमेट द्वारा प्रतिपादित मूल मूल्यों से कितना भटक गया है। पहला विश्व कप 1930 में उरुग्वे में खेला गया था। उस समय फीफा अध्यक्ष ने विश्व कप को श्रमिक वर्ग के खिलाड़ियों के लिए एक पेशेवर मंच बनाकर इसे सार्वभौमिक एकजुटता और शांति को बढ़ावा देने के साधन के रूप में देखा था। हालांकि 18 कैरट सोने की ट्रॉफी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे 1,248 फुटबॉलर अभी भी साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन यह कहना उचित होगा कि खेल संस्था के नियंत्रण से बाहर के कारणों से वैश्विक शांति हासिल करना असंभव हो गया है। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि फीफा द्वारा इस टूर्नामेंट से अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए आक्रामक रूप से किए जा रहे प्रयासों से सार्वभौमिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, जो अब उसका सबसे बड़ा आय का स्रोत बन गया है। वर्ष 2010 से यही चलन रहा है। उस साल फीफा ने मेजबान देश के साथ प्रसारण अधिकार, प्रायोजन, टिकट और व्यापारिक वस्तुओं से होने वाली आय साझा करना बंद कर दिया था। इस कदम से खेल संस्था उन देशों से मेजबानी के प्रस्ताव स्वीकार करने लगी जो स्टेडियम और संबंधित बुनियादी ढांचे के निर्माण का भारी खर्च उठा सकते थे, न कि उन देशों से जिनकी फुटबॉल में मजबूत साख थी। व्लादीमिर पुतिन द्वारा क्राइमिया पर आक्रमण के चार साल बाद 2018 के टूर्नामेंट का आयोजन रूस को दिया जाना फीफा की अनैतिकता का पहला संकेत था। वर्ष 2022 में कतर का चयन व्यापक रूप से वोट खरीदने और धांधली का परिणाम था। वह एक ऐसा देश है जिसकी फुटबॉल में कोई साख नहीं है और लोकतांत्रिक साख तो उससे भी कम है। हालांकि नवीनतम त्रिपक्षीय आयोजन तीन लोकतांत्रिक देशों-अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको-में आयोजित किया जा रहा है लेकिन यह रिमेट की उम्मीदों से बिल्कुल परे है। सबसे पहले, जिस देश में सबसे अधिक मैच (कुल 104 में से 78) आयोजित होंगे, वह ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है, ग्रीनहाउस गैसों का दूसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, और एक हानिकारक आप्रवासन-विरोधी नीति का पालन करता है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को एक विशेष शांति पुरस्कार से सम्मानित करने के बाद, फीफा ने मेजबान देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अमेरिका में होने वाले विश्व कप मैचों के लिए ईरानी प्रशंसकों के टिकट आवंटन रद्द कर दिए हैं। ईरानी टीम को अपने प्रतिनिधिमंडल के कई सदस्यों, जिनमें फुटबॉल महासंघ के प्रमुख भी शामिल थे, को वीजा नहीं मिलने के बाद अमेरिका से मेक्सिको में अपना ठिकाना बदलना पड़ा। एक सोमाली रेफरी को 11 घंटे की पूछताछ के बाद मियामी से वापस भेज दिया गया। कई गैर-श्वेत देशों के प्रशंसकों को दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश से इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद है। अन्य लोग आईसीई एजेंटों द्वारा मनमानी गिरफ्तारी के डर से दूर रह रहे हैं। टिकटों की कीमतें भी कम चौंकाने वाली नहीं हैं। ग्रुप स्टेज के टिकट न केवल चार साल पहले कतर में टिकटों की कीमतों से दोगुने महंगे हैं, बल्कि फीफा वेबसाइट पर गतिशील दाम वाले टिकट और द्वितीयक मूल्य निर्धारण सुविधाओं की शुरुआत ने टिकटों की कीमतों को आसमान छूने लायक बना दिया है, जिससे आम प्रशंसक के लिए टिकट खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है। फाइनल के टिकट की कीमत 7,500 डॉलर से अधिक है, जो 2022 के फाइनल की कीमत से चार गुना से भी अधिक है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो बहुचर्चित इंगलिश प्रीमियर लीग (19 मैच) के एक सीजन टिकट की कीमत 900 डॉलर है और लोकप्रिय यूएफा चैंपियंस लीग के द्वितीयक बिक्री पर एक टिकट की कीमत 348 डॉलर है। अंततः, फीफा दशकों से खेल को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले वास्तविक मेहनतकश प्रशंसकों को नाराज करके खुद ही अपना नुकसान करने का जोखिम उठा रहा है।
शनिवार पूजा विधि: शनि देव की कृपा पाने के लिए ऐसे करें पूजा, दूर होंगी बाधाएं और मिलेगा शुभ फल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता और कर्मफलदाता भगवान शनि की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक शनि देव की पूजा करने से व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार शुभ फल प्राप्त होते हैं तथा जीवन में आने वाली बाधाओं और परेशानियों से राहत मिलती है। ज्योतिष शास्त्र में भी शनिवार के दिन किए गए कुछ विशेष उपायों और पूजा-विधि का उल्लेख मिलता है, जिन्हें अपनाने से शनि की कृपा प्राप्त हो सकती है। शनिवार की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश, भगवान शिव और शनि देव का स्मरण करें। शनि देव की पूजा में काले तिल, सरसों का तेल, नीले या काले रंग के फूल तथा उड़द की दाल का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके बाद काले तिल अर्पित करें और शनि मंत्रों का जाप करें। “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ भी करें। इससे मानसिक शांति मिलने के साथ-साथ नकारात्मक प्रभावों में कमी आने की मान्यता है। शनिवार के दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शिवलिंग पर जल और काले तिल अर्पित करने से शनि दोष का प्रभाव कम होने की मान्यता है। इसके अलावा पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और वृक्ष की परिक्रमा करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को जरूरतमंद लोगों को दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है। काले तिल, कंबल, काली उड़द, लोहे के पात्र या भोजन का दान करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं। साथ ही गरीबों और असहाय लोगों की सहायता करना भी विशेष पुण्यदायी माना जाता है। शनिवार के दिन हनुमान जी की पूजा करने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना से शनि देव के कष्टकारी प्रभावों से राहत मिलती है। इसलिए इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करना और मंदिर में जाकर दर्शन करना लाभकारी माना जाता है। धार्मिक विश्वासों के अनुसार नियमित रूप से शनिवार की पूजा और सद्कर्म करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। हालांकि पूजा के साथ-साथ अच्छे कर्म, अनुशासित जीवनशैली और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है।
शनिवार को अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय, शनि देव की कृपा से दूर हो सकती हैं बाधाएं

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन भगवान शनि देव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष और वास्तु शास्त्र दोनों में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि शनिवार को किए गए कुछ सरल उपाय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। यदि घर में लगातार आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह या कार्यों में रुकावटें आ रही हैं तो वास्तु के कुछ उपाय लाभदायक साबित हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार शनिवार के दिन घर की पश्चिम और दक्षिण दिशा की विशेष सफाई करनी चाहिए। इन दिशाओं का संबंध शनि ग्रह से माना जाता है। साफ-सुथरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद करता है। शनिवार को घर के मुख्य द्वार के आसपास गंदगी नहीं रहने देना चाहिए। मुख्य द्वार से ही सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इस दिन सरसों के तेल का दीपक मुख्य द्वार या पीपल के पेड़ के नीचे जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। यदि घर में लोहे का कोई टूटा-फूटा सामान लंबे समय से पड़ा है तो शनिवार को उसे हटाना या ठीक करवाना बेहतर माना जाता है। वास्तु के अनुसार बेकार और अनुपयोगी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती हैं। घर में कबाड़ जमा होने से आर्थिक प्रगति भी प्रभावित हो सकती है। शनिवार के दिन काले तिल, उड़द दाल या लोहे से बनी वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं और जीवन में स्थिरता आती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार शनिवार को घर के दक्षिण-पश्चिम कोने में भारी वस्तुएं रखना लाभकारी माना जाता है। इससे घर में स्थिरता बनी रहती है और परिवार के सदस्यों का आत्मविश्वास बढ़ता है। वहीं इस दिशा में अनावश्यक खाली स्थान या गंदगी रखने से बचना चाहिए। शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा और परिक्रमा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। हालांकि पूजा करते समय श्रद्धा और सकारात्मक भावना का होना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। ध्यान रखें कि वास्तु उपायों के साथ-साथ सकारात्मक सोच, परिश्रम और अच्छे कर्म भी सफलता और सुख-समृद्धि के लिए आवश्यक हैं। शनिवार के दिन इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर घर में सकारात्मक वातावरण बनाया जा सकता है।
सोमवती अमावस्या 2026: कुंडली के गृह दोषों को शांत करने के लिए अपनी राशि के मुताबिक करें शिवजी का जलाभिषेक, कटेंगे सारे पाप

नई दिल्ली। सनातन धर्म में सोमवती अमावस्या को एक अत्यंत पवित्र, कल्याणकारी और आध्यात्मिक रूप से प्रभावशाली तिथि माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अधिकमास के दौरान आने वाली सोमवती अमावस्या आगामी 15 जून 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह विशेष तिथि मुख्य रूप से पितरों की तृप्ति और तर्पण के लिए समर्पित होती है, लेकिन सोमवार के दिन अमावस्या का होना इसे शिव साधना के लिए सर्वोत्तम बनाता है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दिव्य संयोग पर यदि कोई जातक अपनी राशि के अनुसार विशेष पूजन सामग्री से शिवलिंग का अभिषेक करता है, तो उसके संचित पापों का नाश होता है, अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और कुंडली में प्रतिकूल ग्रहों की स्थिति भी संतुलित हो जाती है। धार्मिक दृष्टिकोण से सोमवार का दिन देवों के देव महादेव की उपासना के लिए पहले से ही निश्चित है, और इसी दिन अमावस्या तिथि का आना एक दुर्लभ और महासंयोग का निर्माण करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इसके पश्चात पास के किसी भी प्राचीन या सिद्ध शिव मंदिर में जाकर पूरी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर राशि आधारित द्रव्यों से अभिषेक करना जीवन के बड़े से बड़े संकटों को दूर करने वाला माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस विधि से की गई पूजा जीवन में अटूट सुख, समृद्धि और मानसिक शांति लेकर आती है। ज्योतिष शास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर सभी बारह राशियों के लिए अलग-अलग अभिषेक पद्धतियां बताई गई हैं, जो जातक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। मेष राशि के जातकों को इस पावन दिन पर शिवलिंग पर केवल पवित्र गंगाजल अर्पित करते हुए अभिषेक करना चाहिए, जिससे उनकी ऊर्जा सही दिशा में प्रवाहित हो सके। वृषभ राशि के जातकों के लिए सलाह दी जाती है कि वे गंगाजल में थोड़ा सा शुद्ध दूध मिलाकर महादेव का अभिषेक करें। मिथुन राशि के लोगों को दूध में दूर्वा (दूब घास) मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करनी चाहिए, जबकि कर्क राशि के जातकों के लिए इस दिन ताजे दही से भगवान शिव का अभिषेक करना अत्यंत शुभ और मानसिक शांति प्रदायक रहेगा। सिंह राशि के जातकों को सूर्य देव के प्रभाव के कारण गंगाजल में लाल रंग के फूल (विशेषकर गुड़हल या गुलाब) डालकर शिव जी को अर्पित करना चाहिए। कन्या राशि के लोगों के लिए गंगाजल में दूर्वा डालकर अभिषेक करना व्यापार और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी रहेगा। तुला राशि के जातकों को सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए दूध, दही, घी, शहद और चीनी के मिश्रण यानी पंचामृत से शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक करना चाहिए। वृश्चिक राशि के लोगों को मंगल के प्रभाव स्वरूप दूध में शुद्ध शहद मिलाकर महादेव पर चढ़ाना चाहिए, जिससे उनके पराक्रम में वृद्धि होगी और शत्रुओं का शमन होगा। ज्ञान और धर्म के प्रतीक धनु राशि के जातकों के लिए सोमवती अमावस्या पर दूध में केसर की कुछ पत्तियां या केसरिया चंदन डालकर शिवलिंग का अभिषेक करना सर्वोत्तम फल देने वाला रहेगा। शनि देव के स्वामित्व वाली मकर राशि के लोगों को अपने कष्टों की निवृत्ति के लिए गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का तर्पण और अभिषेक करना चाहिए। वहीं कुंभ राशि के जातकों के लिए इस विशिष्ट तिथि पर नारियल के जल से शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी और धन-धान्य बढ़ाने वाला बताया गया है। अंत में, मीन राशि के जातकों को अपने करियर और आध्यात्मिक उन्नति के लिए गन्ने के शुद्ध रस से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए, जिससे उनके जीवन की सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाएंगी।
फिल्म 'काला हिरण' की रिलीज और प्रमोशन पर रोक लगाने की मांग, दिल्ली उच्च न्यायालय में अब 19 जून को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान द्वारा फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ की रिलीज और इसके प्रचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने फिल्म के निर्माता अमित जानी, जानी फायरफॉक्स फिल्म्स और अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अदालत ने इस संवेदनशील कानूनी विवाद की अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की है। सलमान खान ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि फिल्म के जरिए उनके व्यक्तित्व अधिकारों (पर्सनैलिटी राइट्स) का व्यावसायिक लाभ के लिए खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। अदालती कार्यवाही के दौरान सलमान खान का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने दलील दी कि अभिनेता के व्यक्तित्व अधिकार पहले से ही उच्च न्यायालय द्वारा संरक्षित हैं। इन विधिक अधिकारों के दायरे में सलमान खान की छवि, उनकी सार्वजनिक पहचान, उनके जैसा दिखने वाला स्वरूप और उनसे जुड़ी अन्य विशिष्ट व्यक्तिगत विशेषताएं शामिल हैं। याचिका में मुख्य रूप से 29 मई को जारी किए गए फिल्म के एक पोस्टर पर आपत्ति जताई गई है। वकील ने अदालत को बताया कि इस पोस्टर में एक व्यक्ति को हूबहू सलमान खान जैसा दिखाया गया है, जिसने कलाई में वही खास फिरोजा ब्रेसलेट पहना हुआ है, जो लंबे समय से सलमान खान की अनूठी पहचान रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि फिल्म के प्रचार-प्रसार में उनकी इस पहचान का इस्तेमाल बिना किसी पूर्व अनुमति के किया जा रहा है। कानूनी टीम ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि साल 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से जुड़े कुल चार मुकदमों में से तीन में सलमान खान को कानूनी रूप से राहत मिल चुकी है, जबकि केवल एक मामला वर्तमान में अपील के साथ अदालत में लंबित है। इसके बावजूद फिल्म और उससे जुड़े प्रचार प्रसार की सामग्रियों के माध्यम से अभिनेता के नाम को लगातार विवादों के साथ घसीटा जा रहा है। सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान दिए जा रहे हैं जो उनकी सामाजिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। अभिनेता ने अपनी इस याचिका में निर्माता अमित जानी के साथ-साथ निर्देशक भरत एस. श्रीनाते, अक्षय पांडेय और अन्य संबंधित सहयोगियों को मुख्य पक्षकार बनाया है। सलमान खान की मांग है कि अदालत इस फिल्म के निर्माण, वितरण, डिजिटल या सैटेलाइट रिलीज और किसी भी प्रकार के विज्ञापन पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाए। उनका तर्क है कि उनकी सार्वजनिक छवि का इस तरह उपयोग करना कानूनी और नैतिक रूप से गलत है। उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘काला हिरण : द बैटल फॉर लेगेसी’ साल 1998 के चर्चित शिकार मामले और उसके बाद के घटनाक्रमों पर आधारित बताई जा रही है, जिसका फर्स्ट लुक और ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया था। इस कंटेंट के सामने आने के बाद सलमान खान की कानूनी टीम ने पहले ही निर्माताओं को एक कानूनी नोटिस भेजा था और अब यह मामला पूरी तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के विचाराधीन है, जहां 19 जून को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
उदय शेट्टी और मजनू भाई के ऑरा पर नाना पाटेकर के बयान का सच; अक्षय कुमार की बड़ी स्टारकास्ट वाली फिल्म को लेकर हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ का आधिकारिक ट्रेलर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट के बीच दर्शकों और प्रशंसकों ने पहले दो भागों के मुख्य आकर्षण रहे उदय शेट्टी यानी नाना पाटेकर और मजनू भाई यानी अनिल कपूर को काफी मिस किया। इसी बीच इंटरनेट पर एक स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें दावा किया गया कि नाना पाटेकर ने इस तीसरी किस्त में अपनी अनुपस्थिति को लेकर फिल्म मेकर्स पर तीखा तंज कसा है। वायरल पोस्ट में लिखा था कि आप 25 एक्टर्स को तो फिल्म में ले लोगे, लेकिन उदय शेट्टी और मजनू भाई जैसा ऑरा कहां से लाओगे। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई, लेकिन अब इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ चुकी है। तथ्यों की जांच करने पर पता चला है कि इंटरनेट पर घूम रहा यह विवादित पोस्ट पूरी तरह से फर्जी और एआई जनरेटेड है। अभिनेता नाना पाटेकर ने ‘वेलकम टू द जंगल’ या उसकी स्टारकास्ट को लेकर ऐसा कोई भी कमेंट या पोस्ट अपने किसी भी सोशल मीडिया हैंडल पर साझा नहीं किया है। तकनीकी उपकरणों की मदद से तैयार किए गए इस झूठे स्क्रीनशॉट ने कुछ ही घंटों में प्रशंसकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी, जिसे अब पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। फिल्म के ट्रेलर लॉन्च कार्यक्रम के दौरान खुद मुख्य अभिनेता अक्षय कुमार ने इस विषय पर बात की और स्वीकार किया कि टीम ने नाना पाटेकर और अनिल कपूर को बहुत मिस किया। अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस बार स्क्रिप्ट की मांग के अनुसार कहानी में बदलाव किए गए हैं। फिल्म की नई पटकथा के अनुसार, इस बार उदय और मजनू भाई के भाइयों की एंट्री कहानी में दिखाई गई है। इन नए किरदारों को बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी और अरशद वारसी निभा रहे हैं। सुनील शेट्टी जहां उदय के भाई की भूमिका में नजर आएंगे, वहीं अरशद वारसी ने मजनू के भाई का किरदार निभाया है। फिल्म की विशाल स्टारकास्ट में सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, राजपाल यादव और कृष्णा अभिषेक जैसे कई बड़े नाम शामिल हैं। रिलीज हुए ट्रेलर की कहानी की बात करें तो इसमें दिखाया गया है कि एक फ्लॉप एक्टर अपने डूबते करियर को बचाने के लिए एक सुपरहिट एक्ट्रेस के साथ फिल्म साइन करता है। इस काल्पनिक फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू शूटिंग के सिलसिले में एक सुदूर गांव में जाती है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब गांव वाले इस फिल्मी क्रू को सचमुच की भारतीय सेना समझ बैठते हैं और उनसे गुंडा गैंग के लीडर जैकी श्रॉफ से अपनी सुरक्षा करने की गुहार लगाते हैं। ट्रेलर के अनुसार, इस नकली फिल्म का बजट 2000 करोड़ रुपये दिखाया गया है, जो पूरी कहानी में हास्य और भ्रम की स्थितियां पैदा करता है। यह फिल्म सुपरहिट फ्रेंचाइजी ‘वेलकम’ का तीसरा पार्ट है। इस सिलसिले की पहली फिल्म साल 2007 में आई थी, जिसमें अक्षय कुमार, कटरीना कैफ, नाना पाटेकर, अनिल कपूर और परेश रावल मुख्य भूमिकाओं में थे। इसके बाद साल 2015 में इसका दूसरा भाग ‘वेलकम बैक’ रिलीज हुआ, जिसमें जॉन अब्राहम और श्रुति हासन के साथ नाना पाटेकर और अनिल कपूर की जोड़ी बरकरार रही थी। अब इस फ्रेंचाइजी का यह तीसरा भाग नए किरदारों और नए ट्विस्ट के साथ 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके प्रति दर्शकों में भारी उत्सुकता बनी हुई है।