Sunny Leone CID Notice: ₹2400 करोड़ निवेश घोटाले की जांच में अभिनेत्री सनी लियोनी को CID का नोटिस, एजेंसी ने मांगी भुगतान संबंधी जानकारी

Sunny Leone CID Notice: नई दिल्ली । कर्नाटक में कथित 2,400 करोड़ रुपये के शिवम एसोसिएट्स निवेश घोटाले की जांच के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी का नाम भी चर्चा में आ गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभिनेत्री को भेजा गया नोटिस केवल जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल उनके खिलाफ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया है। मामले की जांच कर रही कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) कथित निवेश योजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह यह समझने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई कथित राशि का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया गया और उसका अंतिम लाभ किसे प्राप्त हुआ। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स के प्रमोटर और मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे शिवानंद नीलनवर द्वारा निर्मित एक कन्नड़ फिल्म में अभिनेत्री सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी। इसी संदर्भ में एजेंसी ने अभिनेत्री से उस प्रदर्शन के लिए प्राप्त भुगतान और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2023 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘चैंपियन’ के एक गीत में प्रस्तुति देने के लिए अभिनेत्री को भुगतान किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान का स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध कथित निवेश योजना से जुड़ी किसी वित्तीय गतिविधि से था। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल भुगतान प्राप्त करना किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं बनाता और जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना है। सीआईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर बिना आवश्यक अनुमति के निवेश और जमा योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से धन एकत्र किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में हजारों निवेशकों से धन जुटाए जाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी अब उन सभी वित्तीय लेनदेन की समीक्षा कर रही है जो इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों की जांच में एजेंसियां अक्सर उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से जानकारी मांगती हैं जिनके साथ संबंधित पक्षों का वित्तीय लेनदेन हुआ हो। ऐसे नोटिस का उद्देश्य तथ्यों का सत्यापन करना होता है और इसे किसी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड तथा भुगतान संबंधी सूचनाओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, सनी लियोनी के खिलाफ इस समय किसी प्रकार के अपराध में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस पूरे मामले पर मनोरंजन जगत और निवेशकों की नजर बनी हुई है, जबकि जांच एजेंसियां कथित घोटाले के वित्तीय पहलुओं को खंगालने में जुटी हैं।
सनातन धर्म क्यों कहलाता है शाश्वत? जानिए जीवन, कर्म और पुनर्जन्म से जुड़े इसके मूल सिद्धांत

नई दिल्ली । सनातन धर्म को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की आधारशिला माना जाता है। हजारों वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी करोड़ों लोगों के जीवन का मार्गदर्शन कर रही है। सनातन शब्द का अर्थ ही है – जो सदैव बना रहे, जिसका न आदि हो और न अंत। यही कारण है कि सनातन धर्म को शाश्वत धर्म भी कहा जाता है। महामंडलेश्वर स्वामी आदित्य कृष्ण गिरि महाराज के अनुसार सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के संपूर्ण जीवन को दिशा देने वाला दर्शन है। उनके अनुसार यह धर्म जीवन के उन मूल प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास करता है, जिनके बारे में प्रत्येक व्यक्ति कभी न कभी विचार करता है। जैसे मनुष्य इस संसार में क्यों आया है, उसके जीवन का उद्देश्य क्या है, उसे अपने कर्म कैसे करने चाहिए और जीवन को सार्थक बनाने का मार्ग क्या है। सनातन परंपरा में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ माना गया है। इन सिद्धांतों के माध्यम से व्यक्ति को संतुलित और मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा दी जाती है। यही वजह है कि सनातन धर्म को केवल एक धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला भी माना जाता है। सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी उत्सव परंपरा भी है। वर्षभर में मनाए जाने वाले विभिन्न पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक समरसता, प्रकृति के प्रति सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति के अवसर भी प्रदान करते हैं। भारतीय संस्कृति में उत्सवों को जीवन में सकारात्मकता, ऊर्जा और सामूहिकता का प्रतीक माना गया है। पुनर्जन्म की अवधारणा भी सनातन दर्शन का एक महत्वपूर्ण अंग है। हिंदू धार्मिक ग्रंथों में कर्म और पुनर्जन्म के सिद्धांत का विस्तार से उल्लेख मिलता है। इस मान्यता के अनुसार व्यक्ति के कर्म उसके भविष्य को प्रभावित करते हैं और आत्मा जन्म-मृत्यु के चक्र से गुजरती है। मोक्ष को इस चक्र से मुक्ति की अंतिम अवस्था माना गया है। स्वामी आदित्य कृष्ण गिरि महाराज का कहना है कि सनातन धर्म प्रकृति के शाश्वत नियमों और जीवन के निरंतर परिवर्तन को स्वीकार करता है। ऋतुओं का बदलना, जीवन और मृत्यु का चक्र तथा सृष्टि के निरंतर परिवर्तन को यह धर्म प्राकृतिक सत्य के रूप में देखता है। इसी कारण यह परंपरा समय के साथ स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने में सक्षम रही है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार सनातन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापकता और समावेशी दृष्टिकोण है। यह विभिन्न विचारधाराओं, आध्यात्मिक मार्गों और उपासना पद्धतियों को स्थान देता है। यही कारण है कि हजारों वर्षों के इतिहास के बाद भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है और यह आज भी करोड़ों लोगों को जीवन के मूल्यों, कर्तव्यों और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग दिखा रहा है। सनातन धर्म का मूल संदेश यही है कि मनुष्य अपने कर्मों, नैतिक मूल्यों और आत्मिक विकास के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है। यही विचार इसे एक शाश्वत और निरंतर प्रवाहित होने वाली परंपरा के रूप में स्थापित करते हैं।
Gwalior Development Project: ग्वालियर को विकास कार्यों की सौगात, ऊर्जा मंत्री आज करेंगे 3.92 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का भूमिपूजन

Gwalior Development Project: ग्वालियर। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर आज गुरुवार को ग्वालियर में लगभग 3 करोड़ 92 लाख रुपए की लागत से होने वाले विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इन कार्यों में सीवर लाइन, सड़क निर्माण, नाली निर्माण, पार्कों के उन्नयन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। 30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें शाम 5 बजे कार्यक्रम में शामिल होंगे ऊर्जा मंत्री शाम 5 बजे वार्ड क्रमांक-32 के गांधी नगर पार्क में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां वे करीब 1.98 करोड़ रुपए की लागत से नई सीवर लाइन के संधारण कार्य की आधारशिला रखेंगे। इसके अलावा क्षेत्र की सड़कों और गलियों के डामरीकरण, नाली निर्माण, पार्कों में नए उपकरण लगाने तथा सार्वजनिक सुलभ कॉम्प्लेक्स के मरम्मत कार्यों का भी भूमिपूजन करेंगे। कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा माता मंदिर में करेंगे रात्रि विश्राम इसके बाद शाम 6 बजे वे बहोड़ापुर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-3 स्थित शहीद सरमन सिंह पार्क पहुंचेंगे, जहां 23.60 लाख रुपए की लागत से पार्क के सौंदर्यीकरण कार्य का शुभारंभ करेंगे। दिनभर के कार्यक्रमों के बाद ऊर्जा मंत्री आनंद नगर स्थित माता मंदिर में रात्रि विश्राम करेंगे। वहीं शुक्रवार सुबह मंदिर परिसर में आयोजित स्वच्छता और वृक्षारोपण कार्यक्रम में शामिल होकर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता का संदेश देंगे।
30 साल बाद फिर साथ दिखे अक्षय, सुनील और रवीना, ‘वेलकम टू द जंगल’ ने ताजा कर दी ‘मोहरा’ की यादें

नई दिल्ली । बॉलीवुड की यादगार फिल्मों में शुमार ‘मोहरा’ को रिलीज हुए तीन दशक से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन फिल्म की लोकप्रियता आज भी दर्शकों के दिलों में बरकरार है। अब इस फिल्म की चर्चित तिकड़ी एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ दिखाई देने जा रही है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन आगामी कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ में एक साथ नजर आएंगे। फिल्म की रिलीज से पहले सामने आई कुछ खास तस्वीरों ने दर्शकों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है। अभिनेत्री रवीना टंडन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ‘वेलकम टू द जंगल’ के सेट से कई बिहाइंड द सीन्स (बीटीएस) तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों में फिल्म की स्टारकास्ट के साथ बिताए गए यादगार पलों की झलक देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा ध्यान उस तस्वीर ने खींचा जिसमें रवीना, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी एक साथ नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर ने फैंस को सीधे 1994 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘मोहरा’ की याद दिला दी। ‘मोहरा’ बॉलीवुड की उन फिल्मों में गिनी जाती है जिसने एक्शन, रोमांस और संगीत के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। फिल्म का लोकप्रिय गीत ‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ आज भी लोगों की पसंदीदा सूची में शामिल है। ऐसे में जब तीनों कलाकारों को एक साथ देखा गया तो सोशल मीडिया पर पुरानी यादों की चर्चा तेज हो गई। रवीना टंडन ने तस्वीरें साझा करते हुए पूरी टीम के प्रति अपना स्नेह व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने पर अपने सह-कलाकारों और यूनिट के सदस्यों को यादगार सफर का हिस्सा बताया। उनके पोस्ट पर फैंस ने भी उत्साह दिखाया और ‘मोहरा’ की तिकड़ी को दोबारा साथ देखने की खुशी जाहिर की। ‘वेलकम टू द जंगल’ मशहूर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी है। कॉमेडी, एक्शन और मनोरंजन से भरपूर इस फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया है, जबकि इसके निर्माता फिरोज नाडियाडवाला हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब बीटीएस तस्वीरों ने इस उत्साह को और बढ़ा दिया है। फिल्म की खास बात केवल अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी और रवीना टंडन की वापसी नहीं है, बल्कि इसमें बॉलीवुड के कई लोकप्रिय कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म की स्टारकास्ट में परेश रावल, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडीज, राजपाल यादव, जॉनी लीवर, लारा दत्ता, आफताब शिवदासानी, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े और दलेर मेहंदी जैसे कलाकार शामिल हैं। निर्माताओं के अनुसार फिल्म का ट्रेलर बड़े स्तर पर लॉन्च किया जाएगा, जिसके बाद दर्शकों को इसकी कहानी और किरदारों की अधिक झलक देखने को मिलेगी। फिल्म 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों ने यह साबित कर दिया है कि ‘मोहरा’ की यादें आज भी दर्शकों के दिलों में ताजा हैं। तीन दशक बाद अक्षय, सुनील और रवीना को एक साथ देखना फैंस के लिए किसी खास तोहफे से कम नहीं माना जा रहा है।
कैसे बने ‘कल्याण कुमार’ से ‘पवन कल्याण’? आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम ने सुनाया दिलचस्प किस्सा

नई दिल्ली । तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के लोकप्रिय अभिनेता और आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। फिल्मों में ‘पावर स्टार’ के नाम से प्रसिद्ध पवन कल्याण ने राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि उनका चर्चित नाम ‘पवन कल्याण’ आखिर उन्हें कैसे मिला। हाल ही में एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी साझा की। पवन कल्याण ने बताया कि उनका जन्म नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ था। उनका नामकरण तिरुमाला देवस्थानम के भगवान योग नरसिम्हा मंदिर में हुआ था, जहां परिवार ने उनका नाम ‘श्री कल्याण कुमार’ रखा। बाद में जब उनका स्कूल में दाखिला हुआ, तो नाम से ‘श्री’ शब्द हटा दिया गया और पारिवारिक उपनाम जुड़ने के कारण उनका नाम ‘के. कल्याण कुमार’ हो गया। उन्होंने बताया कि युवावस्था में उन्हें मार्शल आर्ट्स का काफी शौक था और वे इसके लिए कड़ी मेहनत करते थे। फिल्मों में आने से पहले उन्होंने लंबे समय तक मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षण लिया। इसी दौरान उन्होंने कई सार्वजनिक प्रदर्शनों में अपनी शारीरिक क्षमता और ताकत का प्रदर्शन भी किया। पवन कल्याण के अनुसार, प्रशिक्षण के दिनों में वे अपनी छाती पर भारी वजन उठाने और कठिन स्टंट करने के लिए जाने जाते थे। प्रदर्शन के दौरान उनकी छाती पर भारी पत्थर की सिल्लियां रखकर उन्हें तोड़ा जाता था। उनकी शारीरिक शक्ति और साहस को देखकर उनके मार्शल आर्ट्स शिक्षक काफी प्रभावित हुए। यहीं से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। उनके शिक्षक ने उनकी तुलना भगवान हनुमान से करते हुए कहा कि उनमें ‘पवन पुत्र हनुमान’ जैसी ऊर्जा, शक्ति और साहस दिखाई देता है। इसी भावना के साथ शिक्षक ने उनके नाम के आगे ‘पवन’ शब्द जोड़ दिया। इसके बाद ‘कल्याण कुमार’ धीरे-धीरे ‘पवन कल्याण’ के नाम से पहचाने जाने लगे। समय के साथ यही नाम उनकी पहचान बन गया। जब उन्होंने फिल्मी दुनिया में कदम रखा, तब भी उन्होंने इसी नाम को अपनाया। देखते ही देखते पवन कल्याण तेलुगु सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए। उनकी फिल्मों को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक अलग मुकाम हासिल किया। फिल्मों में सफलता के बाद उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई और अपनी पार्टी के जरिए जनता के बीच मजबूत आधार तैयार किया। आज वे आंध्र प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री के पद पर कार्यरत हैं और राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। पवन कल्याण की यह कहानी केवल नाम बदलने की नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और व्यक्तित्व निर्माण की भी कहानी है। एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षु से सुपरस्टार और फिर उपमुख्यमंत्री तक का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। उनके नाम के पीछे छिपी यह रोचक कहानी आज भी उनके प्रशंसकों के बीच उत्सुकता का विषय बनी हुई है।
बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली । सनातन परंपरा में बुधवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और कुछ विशेष वास्तु उपाय अपनाने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। वहीं वास्तु शास्त्र भी इस दिन को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और घर-परिवार में खुशहाली लाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। घर के मुख्य द्वार को साफ रखकर वहां रंगोली बनाना या हरे रंग के पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या गंदा नहीं रखना चाहिए। बुधवार को हरे रंग का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हरे रंग के पौधे लगाना, हरे वस्त्र पहनना या पूजा में हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। तुलसी का पौधा विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो बुधवार को उसकी पूजा करने और दीपक जलाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को घर के उत्तर दिशा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना गया है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए। ऐसा करने से धन और करियर से जुड़े अवसरों में वृद्धि होने की मान्यता है। भगवान गणेश की पूजा भी बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और हरे रंग के फूल अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्यवसाय और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। आर्थिक उन्नति के लिए बुधवार को हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र या हरी मूंग दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यदायी माना गया है। यदि घर में लगातार तनाव या नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो बुधवार को कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है। कुल मिलाकर बुधवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में संतुलन और सफलता के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे। इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा। अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला। सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी की लाडली ने झेले जिंदगी के सबसे कड़े इम्तिहान: पहले पति की अचानक मौत और दूसरी शादी के टूटने की भावुक दास्तान

नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार परिवारों में से एक, मेगास्टार चिरंजीवी के ‘कोनिडेला परिवार’ को हमेशा उनकी एकजुटता और सफलता के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसी परिवार के मुख्य स्तंभ और ग्लोबल स्टार राम चरण की छोटी बहन श्रीजा कोनिडेला की व्यक्तिगत जिंदगी स्क्रीन पर दिखने वाली चमक-दमक से बिल्कुल उलट, भारी भावनात्मक संघर्षों और दुखों से भरी रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए उनके कुछ भावुक बयानों के बाद, एक बार फिर उनकी जिंदगी के वे कड़वे पन्ने चर्चा में आ गए हैं, जिन्होंने उन्हें कम उम्र में ही गहरे मानसिक दर्द से गुजरने पर मजबूर कर दिया था। श्रीजा की जिंदगी का पहला बड़ा और विवादास्पद मोड़ तब आया जब वे महज 19 वर्ष की थीं। साल 2007 में उन्होंने अपने तत्कालीन बॉयफ्रेंड सिरीश भारद्वाज के साथ शादी करने के लिए अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भागने का फैसला किया था। उस दौर में इस हाई-प्रोफाइल कदम ने पूरे दक्षिण भारतीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भारी तहलका मचा दिया था। सुरक्षा कारणों से इस युवा जोड़े को कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा था। इस शादी से श्रीजा ने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही वर्षों में उनके रिश्ते में कड़वाहट आ गई और उन्होंने सिरीश पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी रूप से दूरी बना ली। बाद में, सिरीश भारद्वाज के अचानक हुए निधन ने श्रीजा को जिंदगी का पहला बड़ा झटका और दर्द दिया। इस दर्दनाक दौर से उबरने में उनके पिता चिरंजीवी और भाई राम चरण ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें वापस परिवार में ससम्मान शामिल किया। जीवन को एक नया मौका देने के उद्देश्य से, कोनिडेला परिवार ने साल 2016 में बेहद भव्य स्तर पर श्रीजा की दूसरी शादी का आयोजन किया। उनकी यह शादी उनके बचपन के दोस्त और बिजनेसमैन कल्याण देव के साथ हुई थी, जिसमें देश भर की बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी। शादी के बाद दोनों के घर एक बेटी का जन्म हुआ और कुछ समय तक सब कुछ बेहद सामान्य और खुशहाल नजर आ रहा था, जिससे प्रशंसकों को लगा कि श्रीजा की जिंदगी में अब स्थिरता आ चुकी है। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और श्रीजा की यह दूसरी शादी भी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद इस कदर बढ़ गए कि उन्होंने एक-दूसरे से पूरी तरह दूरी बना ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से एक-दूसरे की तस्वीरें हटाने और उपनाम बदलने के बाद इस रिश्ते के टूटने की आधिकारिक पुष्टि भी हो गई। अपनी दूसरी शादी का भी इस तरह दर्दनाक और असमय अंत देखना श्रीजा के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक आघात था, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर कर रख दिया था। मौजूदा समय में, दो शादियों के बेहद कड़वे और दर्दनाक अनुभवों से गुजरने के बाद श्रीजा पूरी तरह से एकांत में अपनी दोनों बेटियों की परवरिश कर रही हैं। एक सिंगल मदर के रूप में अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी श्रीजा ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए बताया था कि कैसे जीवन की इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें अंदर से मजबूत बनाया है। मुश्किल समय में उनका पूरा परिवार, विशेषकर उनके भाई राम चरण, एक मजबूत ढाल की तरह उनके साथ खड़े हैं, ताकि वे अपने जीवन के इस सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से बाहर निकलकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत कर सकें।
संगीतकारों की पहली और आखिरी उम्मीद थे स्वर कोकिला के हमसफर मोहम्मद रफी: जानिए कैसे बिना किसी पूर्व योजना के रच दिया था संगीत का नया इतिहास

नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत के सुनहरे दौर में पार्श्वगायक मोहम्मद रफी एक ऐसे अनमोल रत्न थे, जिनकी आवाज का जादुई दायरा हर प्रकार के भावों और गीतों को खुद में समेटने की अद्भुत क्षमता रखता था। रफी साहब की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे जिस भी अभिनेता के लिए पर्दे पर पार्श्वगायन करते थे, उनकी आवाज हुबहू उस अभिनेता के हाव-भाव और अंदाज में ढल जाती थी। अस्सी और नब्बे के दशक से बहुत पहले, वर्ष 1964 में आई निर्देशक के. शंकर की कल्ट क्लासिक फिल्म ‘राजकुमार’ की रिकॉर्डिंग के दौरान रफी साहब ने अपनी गायकी का एक ऐसा ही अकल्पनीय करिश्मा दिखाया था, जिसने संगीत के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ दिया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बैकग्राउंड को समझें तो फिल्म ‘राजकुमार’ में शम्मी कपूर, साधना, पृथ्वीराज कपूर और प्राण जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी उस दौर की सबसे सफल और कल्ट जोड़ी शंकर-जयकिशन के कंधों पर थी। इस फिल्म के गानों को सजाने के लिए मोहम्मद रफी के साथ लता मंगेशकर, आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर जैसे महान गायकों को चुना गया था। शम्मी कपूर अपने गानों के फिल्मांकन और उनकी मेकिंग को लेकर हमेशा से बेहद गंभीर रहते थे, इसलिए वे अक्सर गानों की लाइव रिकॉर्डिंग के समय म्यूजिक स्टूडियो में खुद मौजूद रहा करते थे। इस फिल्म का एक विशेष और बेहद जोशीला गीत था— ‘दिलरुबा दिल पे तू सितम किए जाए’, जिसे मोहम्मद रफी और आशा भोसले को मिलकर गाना था। कहानी के दृश्य के अनुसार, रात के समय एक अस्तबल (तबेले) में कुछ लोग जश्न मना रहे थे और इसी पृष्ठभूमि के अनुरूप शंकर-जयकिशन ने गाने में बेहद अनूठे और भारी वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल किया था। आशा भोसले ने अपने हिस्से की रिकॉर्डिंग पूरी सहजता से कर ली थी, जिसके बाद मोहम्मद रफी ने अपनी कड़क आवाज में ‘हम भी तो आग में जलते रहे’ पंक्ति के साथ गाने में शानदार एंट्री ली। गाना अपनी पूरी लय में आगे बढ़ रहा था कि तभी इसके अंतिम अंतरे में कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको चौंका दिया। गीत की आखिरी पंक्तियों तक पहुंचते-पहुंचते मोहम्मद रफी ने संगीत की तय धुन से हटकर अचानक अपनी आवाज के स्केल और अंदाज को पूरी तरह से बदल दिया। उनके गले से निकली वह एकदम नई और अप्रत्याशित तान सुनकर रिकॉर्डिस्ट ने घबराकर संगीतकार शंकर-जयकिशन की तरफ देखा, लेकिन अनुभवी संगीतकारों ने तुरंत भांप लिया कि यह कोई गलती नहीं बल्कि एक महान कलाकार की रूहानी कला है और उन्होंने गाने को बिना रोके जारी रखने का इशारा किया। पास ही खड़ीं आशा भोसले भी रफी साहब के इस अचानक बदले और रौद्र-जोशीले अंदाज को देखकर पूरी तरह हैरान रह गईं। रिकॉर्डिंग का फाइनल कट पूरा होने के बाद स्टूडियो का माहौल पूरी तरह से बदल चुका था और वहां मौजूद हर व्यक्ति रफी साहब की इस अद्वितीय प्रतिभा की सराहना कर रहा था। तब सह-गायिका आशा भोसले ने राहत की सांस लेते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा था कि यह बेहद अच्छा हुआ कि रफी साहब ने यह चमत्कारी बदलाव उनके गाने के बाद किया, अन्यथा वे डरकर वहीं रुक जातीं। अमूमन माना जाता था कि रफी साहब तय धुनों में बहुत ज्यादा फेरबदल नहीं करते थे, लेकिन जब भी वे अपनी मर्जी से ऐसा करते थे, तो वह गाना मील का पत्थर बन जाता था। यही कारण था कि जब भी कोई कठिन गाना अन्य गायकों के वश का नहीं होता था, तब पूरी इंडस्ट्री आंख मूंदकर मोहम्मद रफी के पास ही पहुंचती थी।
जानिए क्यों आर माधवन के लिए आत्मघाती साबित हुआ था 'बी और सी' सेंटर्स को रिझाने का फॉर्मूला

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेहतरीन अदाकारी और चॉकलेटी बॉय की छवि से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाने वाले अभिनेता आर माधवन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। हाल ही में आई उनकी फिल्म ‘धुरंधर 2’ की शानदार व्यावसायिक सफलता और उसमें उनके अभिनय की चौतरफा तारीफ हो रही है। इस बड़ी कामयाबी के बीच, माधवन ने अपने करियर के उस शुरुआती और अंधकारमय दौर को याद किया है, जब उन्होंने दूसरों की सलाह मानकर फिल्म इंडस्ट्री के ‘थलाइवा’ यानी महानायक रजनीकांत के नक्शेकदम पर चलने की कोशिश की थी और उन्हें अपने जीवन के सबसे बड़े वित्तीय और व्यावसायिक संकट का सामना करना पड़ा था। एक मशहूर मीडिया प्लेटफॉर्म को दिए इंटरव्यू में अपने पुराने दिनों को याद करते हुए आर माधवन ने बताया कि जब वे साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे, तब कई कथित विशेषज्ञों और शुभचिंतकों ने उन्हें करियर को लेकर एक विशेष सलाह दी थी। उन लोगों का कहना था कि यदि माधवन को दक्षिण भारत का असली सुपरस्टार बनना है, तो उन्हें केवल शहरी दर्शकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। सलाहकारों के मुताबिक, जब तक कोई अभिनेता ‘बी और सी’ सेंटर्स यानी ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों के दर्शकों के बीच अपनी पैठ नहीं बनाता और वहां के लोग उसे स्वीकार नहीं करते, तब तक वह रजनीकांत जैसा बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर सकता। इस तरह के आंकड़ों और सलाहों के दबाव में आकर माधवन ने अपनी स्वाभाविक शैली के विपरीत जाकर एक ऐसी फिल्म साइन कर ली, जो पूरी तरह ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित थी। इस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे अनपढ़, बेहद गरीब और कमजोर ग्रामीण युवक की भूमिका निभाई थी जिसके पास खाने के भी लाले थे, लेकिन वह एक पेशेवर क्रिकेटर बनने का सपना देखता था। माधवन के करियर का यह प्रयोग बॉक्स ऑफिस पर इतनी बुरी तरह से पिटा कि फिल्म अपनी लागत निकालना तो दूर, इतिहास की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में शुमार हो गई। इस फिल्म के डूबने का खामियाजा इतना बड़ा था कि फिल्म का निर्माण करने वाले पूरे प्रोडक्शन स्टूडियो को हमेशा के लिए अपना ताला बंद करना पड़ गया था। इस बेहद दर्दनाक और अप्रत्याशित विफलता पर बात करते हुए माधवन ने बेहद ईमानदारी से स्वीकार किया कि वह उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा कि फिल्म के इस महाडिजास्टर ने उनके चेहरे पर एक जोरदार थप्पड़ की तरह काम किया, जिसने उन्हें गहरे अवसाद से निकालकर हकीकत का आईना दिखाया। माधवन के अनुसार, उन्हें यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि उन्हें किसी दूसरे सुपरस्टार की नकल करने के बजाय अपनी खुद की मौलिकता और पहचान पर भरोसा करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सलाह देने वाले लोग अपने नजरिए से सही हो सकते थे, लेकिन उनकी गलती यह थी कि उन्होंने बिना सोचे-समझे उस फॉर्मूले को हूबहू अपने ऊपर लागू कर लिया था। इस बड़े झटके के बाद माधवन ने सबक लिया और दूसरों की तरह बनने की अंधी दौड़ से खुद को पूरी तरह बाहर कर लिया। उन्होंने इसके बाद अपनी खुद की अनूठी शैली विकसित की और ‘बी और सी’ सेंटर्स के लिए भी ऐसी फिल्मों का चयन किया जो उनके अपने व्यक्तित्व को सूट करती थीं। इस साक्षात्कार में माधवन ने अपनी व्यक्तिगत जिंदगी पर भी खुलकर बात की और मजाकिया अंदाज में बताया कि कैसे वे अपनी पत्नी सरिता के साथ पिछले 27 वर्षों से एक खुशहाल वैवाहिक जीवन जी रहे हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वे एक सीधे-साधे मिडिल क्लास मद्रासी आदमी हैं और उनकी पत्नी के पास उनके फोन से लेकर ईमेल और बैंक खातों तक का पूरा एक्सेस रहता है, इसलिए उनसे कुछ भी छिपा पाना नामुमकिन है।