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भारत में सैटेलाइट इंटरनेट लॉन्च की तैयारी तेज, स्टारलिंक ने अफवाहों को किया खारिज, सरकार के सहयोग पर जताया भरोसा

नई दिल्ली । भारत में सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच स्टारलिंक ने अपने संचालन संबंधी लाइसेंस पर रोक लगाए जाने की खबरों को खारिज कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि भारत सरकार के साथ उसकी बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और वह देश में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है। हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण भारत सरकार ने स्टारलिंक के कमर्शियल ऑपरेशन को मंजूरी देने की प्रक्रिया रोक दी है। इन खबरों के सामने आने के बाद कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई, जिसमें ऐसे दावों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताया गया। स्टारलिंक की बिजनेस ऑपरेशन्स की वाइस प्रेसिडेंट लॉरेन ड्रायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने बयान में कहा कि कंपनी भारत सरकार के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक ने सभी आवश्यक नियमों, प्रक्रियाओं और कानूनी आवश्यकताओं का जिम्मेदारीपूर्वक पालन किया है तथा कंपनी का उद्देश्य देश में विश्वसनीय और तेज इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना है। भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाओं के विस्तार को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। विशेष रूप से दूरदराज, ग्रामीण और भौगोलिक रूप से कठिन क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाने के लिए सैटेलाइट आधारित नेटवर्क को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे इलाकों में पारंपरिक फाइबर या मोबाइल नेटवर्क का विस्तार कई बार चुनौतीपूर्ण साबित होता है। इसी वजह से स्टारलिंक जैसी सेवाओं को डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में संभावित बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। मामला उस समय चर्चा में आया जब कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि कंपनी को भारत में अंतिम लाइसेंस मिलने में देरी हो रही है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि कुछ वैश्विक घटनाओं और सैटेलाइट संचार सेवाओं के उपयोग से जुड़े सुरक्षा पहलुओं के कारण नियामकीय स्तर पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। हालांकि कंपनी ने ऐसे दावों को निर्णायक आधार वाला नहीं माना और कहा कि भारत सरकार के साथ उसका सहयोगात्मक संबंध बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी को भारत में सेवा संचालन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के तहत पहले ही कुछ महत्वपूर्ण मंजूरियां मिल चुकी हैं, जबकि अंतिम लाइसेंस प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। इसी चरण को लेकर विभिन्न प्रकार की अटकलें सामने आ रही थीं। स्टारलिंक का कहना है कि वह सभी शर्तों और दिशानिर्देशों का पालन करते हुए नियामकीय प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। कंपनी ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की दिशा में उसकी तकनीक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहां अभी भी उच्च गति इंटरनेट सेवाओं की पहुंच सीमित है, सैटेलाइट इंटरनेट एक प्रभावी विकल्प बन सकता है। इसके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के विस्तार को भी गति मिलने की संभावना है। स्टारलिंक का ताजा बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी भारतीय बाजार को लेकर गंभीर है और नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद शीघ्र संचालन शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। अब उद्योग जगत और उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर टिकी है कि अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया कब पूरी होती है और देश में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का नया अध्याय कब शुरू होता है।

2900 नए 5G टावरों से मजबूत हुई कनेक्टिविटी, लेकिन एक सेटिंग बंद रही तो नहीं मिलेगा हाई-स्पीड नेटवर्क का फायदा

नई दिल्ली । देश में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने की दिशा में दूरसंचार क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। इसी क्रम में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5G नेटवर्क के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर नए मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर नेटवर्क कवरेज, तेज इंटरनेट स्पीड और अधिक भरोसेमंद मोबाइल सेवाएं उपलब्ध कराना है। नए टावरों के स्थापित होने से शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी नेटवर्क की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, वीडियो स्ट्रीमिंग, क्लाउड सेवाओं और वर्क फ्रॉम होम जैसी गतिविधियों ने तेज और स्थिर इंटरनेट की आवश्यकता को और बढ़ा दिया है। ऐसे में 5G नेटवर्क का विस्तार दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस विस्तार का लाभ उत्तर भारत के अनेक जिलों में रहने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा। बेहतर नेटवर्क उपलब्ध होने से वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन गेमिंग, हाई-डेफिनिशन कंटेंट स्ट्रीमिंग और डिजिटल सेवाओं का अनुभव पहले की तुलना में अधिक सुगम हो सकेगा। साथ ही व्यवसाय, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी सेवाएं भी तेज कनेक्टिविटी का लाभ उठा सकेंगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल क्षेत्र में 5G नेटवर्क उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। उपभोक्ताओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनका स्मार्टफोन 5G तकनीक को सपोर्ट करता हो। इसके अलावा मोबाइल डिवाइस में 5G नेटवर्क से जुड़ी सेटिंग्स सक्रिय होना भी आवश्यक है। कई बार उपयोगकर्ताओं के क्षेत्र में 5G सेवा उपलब्ध होने के बावजूद फोन की सेटिंग्स सही न होने के कारण उन्हें अपेक्षित नेटवर्क स्पीड नहीं मिल पाती। तकनीकी जानकारों के अनुसार सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि स्मार्टफोन 5G सक्षम है या नहीं। इसके बाद यह भी देखना चाहिए कि उपयोग किया जा रहा सिम कार्ड 5G सेवाओं के अनुकूल है। मोबाइल सॉफ्टवेयर का नवीनतम संस्करण इंस्टॉल होना भी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कई बार अपडेट के माध्यम से नेटवर्क से जुड़े सुधार उपलब्ध कराए जाते हैं। एंड्रॉयड स्मार्टफोन उपयोगकर्ता मोबाइल नेटवर्क या कनेक्टिविटी सेटिंग्स में जाकर पसंदीदा नेटवर्क मोड का चयन कर सकते हैं। यदि 5G विकल्प उपलब्ध हो तो उसे सक्रिय करना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के स्मार्टफोन में यह विकल्प अलग नामों से दिखाई दे सकता है, लेकिन प्रक्रिया लगभग समान रहती है। वहीं आईफोन उपयोगकर्ता भी सेलुलर नेटवर्क सेटिंग्स के माध्यम से 5G विकल्प चुन सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में 5G तकनीक देश के डिजिटल विकास की आधारशिला बनने वाली है। स्मार्ट शहरों, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं और उद्योगों के डिजिटलीकरण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यही कारण है कि दूरसंचार कंपनियां लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं और उपभोक्ताओं को नई पीढ़ी की कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने पर जोर दे रही हैं। बढ़ती डिजिटल जरूरतों के बीच 5G नेटवर्क का विस्तार केवल बेहतर इंटरनेट स्पीड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

टेक दुनिया में नए लॉन्च और बड़े खुलासे, POVA 8 5G आया, Fitbit Air और कई स्मार्टफोन्स की जानकारी सामने आई

नई दिल्ली । भारतीय गैजेट्स बाजार में एक बार फिर नई तकनीकों और इनोवेशन की चर्चा तेज हो गई है। स्मार्टफोन कंपनियों से लेकर फिटनेस डिवाइस निर्माताओं तक कई ब्रांड अपने नए उत्पादों के जरिए उपभोक्ताओं को आकर्षित करने की तैयारी में हैं। बड़ी बैटरी, बेहतर कैमरा, एआई फीचर्स और नए डिजाइन इस समय टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी पहचान बनते जा रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में एक नया 5जी स्मार्टफोन लॉन्च किया गया है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल 8000mAh बैटरी है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां अब केवल प्रोसेसर और कैमरे पर ही नहीं बल्कि लंबे बैटरी बैकअप पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। बढ़ती डिजिटल जरूरतों और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत को देखते हुए बड़ी बैटरी वाले स्मार्टफोन्स की मांग तेजी से बढ़ी है। नए स्मार्टफोन में हाई-रिफ्रेश डिस्प्ले, बेहतर कैमरा सिस्टम और तेज चार्जिंग सपोर्ट जैसे फीचर्स भी शामिल किए गए हैं। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस लंबे समय तक गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और मल्टीटास्किंग जैसी गतिविधियों को आसानी से संभाल सकता है। यही वजह है कि यह लॉन्च टेक्नोलॉजी प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दूसरी ओर फिटनेस गैजेट्स की दुनिया में भी एक अनोखा बदलाव देखने को मिल सकता है। एक ऐसा फिटनेस ट्रैकर चर्चा में है जिसमें न तो स्क्रीन है और न ही कोई पारंपरिक बटन। इसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जो बिना किसी डिजिटल व्यवधान के केवल स्वास्थ्य और फिटनेस ट्रैकिंग पर ध्यान देना चाहते हैं। हल्के वजन और लंबे बैटरी बैकअप के कारण यह डिवाइस बाजार में एक अलग पहचान बना सकता है। फिटनेस ट्रैकिंग सेक्टर में यह नया प्रयोग इस बात का संकेत है कि कंपनियां अब मिनिमलिस्ट डिजाइन और उपयोगकर्ता अनुभव को प्राथमिकता दे रही हैं। स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपलब्ध कराने की रणनीति भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे उपकरणों की मांग और बढ़ सकती है। स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा भी लगातार तेज होती जा रही है। कई कंपनियों के आगामी डिवाइसेज से जुड़ी जानकारियां लॉन्च से पहले ही सामने आने लगी हैं। इनमें बेहतर डिस्प्ले, अधिक रैम, उन्नत कैमरा तकनीक और एआई आधारित फीचर्स को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। उपभोक्ताओं की बदलती अपेक्षाओं को देखते हुए कंपनियां अपने उत्पादों में लगातार नए प्रयोग कर रही हैं। बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में भी प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ गई है। अब उपयोगकर्ता कम कीमत में प्रीमियम अनुभव चाहते हैं। यही कारण है कि कंपनियां बेहतर डिजाइन, उच्च प्रदर्शन और लंबी बैटरी लाइफ वाले स्मार्टफोन पेश करने पर जोर दे रही हैं। इसके साथ ही 5जी तकनीक का विस्तार भी नए डिवाइसेज की मांग को बढ़ावा दे रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2026 गैजेट उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत प्रोसेसर, बेहतर बैटरी तकनीक और स्वास्थ्य केंद्रित डिवाइसेज आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करेंगे। लगातार हो रहे नए लॉन्च और उत्पादों से जुड़ी घोषणाएं इस बात का संकेत हैं कि उपभोक्ताओं को आने वाले महीनों में और भी आधुनिक तथा उन्नत तकनीकी विकल्प देखने को मिलेंगे।

'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी। यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे। शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ। इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा। सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।

विद्या बालन ने की माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की तारीफ, सोशल मीडिया पर दिया खास रिव्यू

नई दिल्ली । नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई डार्क कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘मां बहन’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ फिल्म जगत से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने भी फिल्म की सराहना करते हुए इसकी स्टारकास्ट और कहानी की प्रशंसा की है। विद्या बालन ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आपकी तो मां-बहन एक हो गई नेटफ्लिक्स पर।” इसके साथ ही उन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाली माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा की केमिस्ट्री को बेहद मनोरंजक और प्रभावशाली बताया। विद्या की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फिल्म के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म ‘मां बहन’ की रिलीज से पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में विद्या बालन से संपर्क किया गया था। हालांकि बाद में यह भूमिका माधुरी दीक्षित के हिस्से में चली गई। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन विद्या द्वारा फिल्म की खुलकर तारीफ किए जाने को उनके पेशेवर दृष्टिकोण और सहकर्मियों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि विद्या बालन और फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी पहले भी साथ काम कर चुके हैं। दोनों ने चर्चित फिल्म तुम्हारी सुलु में साथ काम किया था, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों का अच्छा समर्थन मिला था। इसके बाद वे जलसा में भी साथ नजर आए। ऐसे में विद्या और सुरेश त्रिवेणी के बीच लंबे समय से मजबूत पेशेवर संबंध रहे हैं। फिल्म ‘मां बहन’ की कहानी एक ऐसी गायिका मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे समाज अक्सर संदेह और पूर्वाग्रह की नजर से देखता है। उसकी जिंदगी तब अप्रत्याशित मोड़ लेती है जब उसके पड़ोसी की मौत उसके घर में हो जाती है। इस मुश्किल परिस्थिति में उसकी दोनों बेटियां उसकी मदद के लिए सामने आती हैं। इसके बाद कहानी रहस्य, हास्य और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है। फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जबकि निर्माण विक्रम मल्होत्रा और सुरेश त्रिवेणी ने संयुक्त रूप से किया है। फिल्म में माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा के अलावा रवि किशन भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देते हैं। विशेष बात यह है कि इस फिल्म के माध्यम से पहली बार माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी ने एक साथ स्क्रीन साझा की है। फिल्म में माधुरी ने तृप्ति की मां का किरदार निभाया है। एक साक्षात्कार में माधुरी ने बताया था कि उन्होंने यह भूमिका इसलिए स्वीकार की क्योंकि यह पारंपरिक फिल्मी मां के किरदारों से अलग और अधिक जटिल व्यक्तित्व वाला चरित्र है। फिल्म की अनूठी कहानी, दमदार अभिनय और हास्य-रोमांच से भरपूर प्रस्तुति को देखते हुए ‘मां बहन’ को ओटीटी दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह फिल्म लोकप्रियता के नए आयाम स्थापित कर पाती है या नहीं।

अंतरिक्ष में ग्रहों का बड़ा फेरबदल: 28 जून से मंगल-गुरु की युति बदलेगी कई राशियों की तकदीर, धन और उन्नति के प्रबल योग

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का गोचर और उनकी युति मानव जीवन के साथ-साथ संपूर्ण चराचर जगत को गहराई से प्रभावित करती है। इसी कड़ी में आगामी 28 जून को अंतरिक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है। ग्रहों के सेनापति और ऊर्जा के कारक मंगल देव तथा देवताओं के गुरु और ज्ञान के प्रदाता बृहस्पति की स्थिति में होने वाला बदलाव एक महासंयोग को जन्म दे रहा है। इन दोनों बड़े ग्रहों के आपसी संबंध और दृष्टि से ब्रह्मांड में ‘लाभ दृष्टि राजयोग’ का निर्माण होने जा रहा है जिसे ज्योतिषीय गणनाओं में अत्यंत परोपकारी और भाग्य को बदलने वाला माना गया है। इस विशिष्ट राजयोग के सक्रिय होते ही कई राशियों के जीवन में सकारात्मकता का संचार होने की उम्मीद जताई जा रही है। ज्योतिषविदों का मानना है कि मंगल की शक्ति और गुरु की कृपा का यह अनूठा मिलन आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलताएं लेकर आता है। इस अवधि के दौरान रुकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी और व्यापारिक क्षेत्र में निवेश करने वाले लोगों को अप्रत्याशित लाभ मिलने के संकेत हैं। खासकर नौकरीपेशा जातकों के लिए यह समय पदोन्नति और कार्यस्थल पर मान-सम्मान में वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही आर्थिक तंगी दूर होने की संभावना प्रबल हो जाती है। ग्रहों के इस महापरिवर्तन का असर विभिन्न प्रदेशों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजयोग के प्रभाव से कृषि और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। शासन और प्रशासन के स्तर पर लिए गए नीतिगत निर्णय जनता के लिए हितकारी साबित हो सकते हैं। चूंकि बृहस्पति को ज्ञान और न्याय का कारक माना जाता है और मंगल को पराक्रम का, इसलिए इस अवधि में लिए गए साहसिक और सूझबूझ से भरे फैसले समाज में स्थिरता और समृद्धि लाने का काम करेंगे। जमीन-जायदाद और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में भी इस दौरान बड़ा उछाल देखा जा सकता है। पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन के दृष्टिकोण से भी यह लाभ दृष्टि राजयोग कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाला है। जिन जातकों की कुंडली में इन दोनों ग्रहों की स्थिति अनुकूल है, उन्हें पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए भी यह समय उच्च शिक्षा के नए अवसर प्रदान करने वाला साबित होगा। बौद्धिक क्षमताओं में विकास होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इस दौरान राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि मंगल शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यह कालखंड बेहद पवित्र माना जा रहा है। गुरु और मंगल का यह शुभ संयोग समाज में परोपकार, दान-पुण्य और मांगलिक कार्यों की रूपरेखा तैयार करेगा। विभिन्न क्षेत्रों में इस योग के कारण मांगलिक आयोजन संपन्न होंगे जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, 28 जून से शुरू होने वाला यह ज्योतिषीय घटनाक्रम न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की तकदीर बदलने की क्षमता रखता है, बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक सुधारों की दृष्टि से भी इसे एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में पटकथाओं की मांग और निर्देशकों के प्रयोगों ने समय-समय पर अभिनेताओं को अपनी अभिनय क्षमता की सीमाओं को लांघने का अवसर दिया है। बॉलीवुड में दोहरे किरदारों यानी डबल रोल का चलन दशकों पुराना है, लेकिन इस विधा में सबसे कठिन और प्रभावकारी प्रयोग तब माना जाता है जब एक ही अभिनेता को एक ही फिल्म के भीतर पिता और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यह प्रयोग न केवल अभिनेता के कौशल की परीक्षा लेता है बल्कि दर्शकों को भी एक ही पर्दे पर दो अलग-अलग पीढ़ियों के दृष्टिकोण को देखने का अवसर देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे बड़े अभिनेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने किरदारों से सिनेमाघरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का आता है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कई बार इस तरह के चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म सूर्यवंशम में ठाकुर भानुप्रताप सिंह और उनके सीधे-सादे बेटे हीरा ठाकुर के रूप में उनका अभिनय आज भी टेलीविजन संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने अदालत, आखिरी रास्ता और महान जैसी फिल्मों में भी पिता और पुत्र की भूमिकाएं बहुत ही संजीदगी के साथ निभाई थीं। महान फिल्म में तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पिता और दो बेटों का ट्रिपल रोल निभाकर सबको हैरत में डाल दिया था। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज कराया है। फिल्म इंग्लिश बाबू देसी मैम में बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान में इस कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम राठौड़ के रूप में एक निडर पिता और आजाद के रूप में एक न्यायप्रिय बेटे का किरदार निभाया था। दोनों किरदारों के बीच का तालमेल और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार थी कि दर्शकों ने सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों के साथ इसका स्वागत किया और फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस प्रकार के किरदारों को निभाने में एक्शन और फिक्शन फिल्मों के सुपरस्टार ऋतिक रोशन भी पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहद लोकप्रिय सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष और कृष 3 में एक साथ दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। एक तरफ जहां उन्होंने मानसिक रूप से विशेष और बाद में बुजुर्ग हो चुके वैज्ञानिक पिता रोहित मेहरा का किरदार निभाया, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली और रक्षक बेटे कृष्णा उर्फ कृष के रूप में भी खुद को स्थापित किया। एक ही फ्रेम में दो अलग उम्र और शारीरिक हाव-भाव वाले किरदारों को एक साथ निभाना ऋतिक रोशन के करियर के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है। समकालीन अभिनेताओं में रणबीर कपूर ने भी इस श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बड़े बजट की पीरियड ड्रामा फिल्म शमशेरा में पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में उन्होंने डकैत शमशेरा और उसके विद्रोही बेटे बल्ली के किरदारों को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मेहनत की थी। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन रणबीर कपूर के इस दोहरे प्रयास और अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई थी। इसी तरह एक्शन स्टार जॉन अब्राहम ने भी अपनी फिल्म सत्यमेव जयते के दूसरे भाग में इसी तरह का प्रयोग दोहराया था, जहां उन्होंने एक किसान पिता और उसके जुड़वां बेटों की तिहरी भूमिका निभाई थी। वहीं अभिनेता सलमान खान की फिल्म वीर में भी एक ऐसी ही कहानी देखने को मिली थी, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटे का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार जैसे कलाकार भी अपनी आने वाली फिल्मों और पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स में इस तरह के किरदारों की संभावनाओं को टटोलते नजर आए हैं। कुल मिलाकर, एक ही फिल्म में पिता और बेटे का किरदार निभाना बॉलीवुड एक्टर्स के लिए हमेशा से अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।

बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने के साथ ही निर्माताओं और कलाकारों के समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण हालिया विवाद में देखने को मिल रहा है। पंजाबी फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता और गायक एमी विर्क ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह के पक्ष में खड़े होते हुए फिल्म ‘डॉन 3’ के निर्माताओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि जब अभिनेता का समय खराब चल रहा था और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही थीं, तब निर्माताओं ने उनके साथ अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म ‘डॉन 3’ की घोषणा और उसके बाद बदले हालातों से जुड़ी हुई हैं। लगभग तीन साल पहले घोषित हुई इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्माण कार्य काफी समय तक अटका रहा। इसी बीच रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और वह देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। एमी विर्क का कहना है कि जैसे ही रणवीर की इस फिल्म ने सफलता के नए आयाम छुए, वैसे ही निर्माताओं ने ‘डॉन 3’ पर जल्द से जल्द काम शुरू करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया ताकि वे अभिनेता की नई स्टार वैल्यू का आर्थिक लाभ उठा सकें। विवाद तब और गहरा गया जब ‘धुरंधर’ की भारी सफलता के तुरंत बाद रणवीर सिंह ने किन्हीं कारणों से ‘डॉन 3’ परियोजना से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने फिल्म की आउटडोर लोकेशंस की रेकी, अनुमति और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे, जो अभिनेता के हटने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। इस नुकसान की भरपाई के लिए निर्माण कंपनी ने अभिनेता से 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है। हालांकि रणवीर सिंह ने शुरुआत में इस मांग को खारिज करते हुए आंशिक समझौते के तहत केवल 10 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किया। इस गतिरोध के बीच मनोरंजन उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी हस्तक्षेप किया था और अभिनेता के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म वितरकों और सिनेमा जगत के विशेषज्ञों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। एमी विर्क ने इस वित्तीय मांग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यदि निर्माताओं को लगता है कि उनका वास्तविक नुकसान हुआ है तो वे मामूली बकाया राशि लेकर मामला सुलझा सकते हैं, न कि इतनी बड़ी रकम का दबाव बनाएं। उन्होंने अभिनेता को कानूनी राह अपनाने और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की सलाह दी है। साक्षात्कार के दौरान विर्क ने रणवीर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों और उनकी हालिया व्यक्तिगत खुशियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर’ की सफलता और रणवीर के घर बेटी के जन्म के बाद उनकी अभिनेता से लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें रणवीर ने फिल्म के लिए की गई अपनी कड़ी मेहनत को साझा किया था। विर्क ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म का मुख्य हिस्सा उनका एक करीबी दोस्त है। फिलहाल यह विवाद अदालती नोटिसों और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत का यह बड़ा विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।

बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं। इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है। मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।