'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं। इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है। शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है। सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।
बुध के नक्षत्र परिवर्तन से इन राशियों पर बरसेगा धन और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, संचार और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026 को बुध देव राहु के आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। कब होगा बुध का नक्षत्र परिवर्तन?पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर बुध पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि बुध इस नक्षत्र में लंबे समय तक रहेंगे और 8 अगस्त 2026 तक यहीं विराजमान रहेंगे। इस दौरान बुध की वक्री और मार्गी चाल का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल का सातवां नक्षत्र माना जाता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु के नक्षत्र में बुध का प्रवेश ज्ञान, विवेक, शिक्षा और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वारवृषभ राशिबुध का यह गोचर वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनेंगे और धन आगमन के अवसर बढ़ेंगे। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा का योग बन सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की भी संभावना है। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों को करियर में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग बन सकते हैं। व्यापार में लाभ की संभावना रहेगी तथा लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिलेगा। वाणी में मधुरता बढ़ेगी, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी। संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने की संभावना है। सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का संकेत दे रहा है। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी तथा पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और कार्यस्थल पर लंबे समय से चल रहे विवादों या तनाव से राहत मिलने की संभावना है। कन्या राशिकन्या राशि के जातकों के लिए बुध का यह गोचर नई शुरुआत और उपलब्धियों का संकेत लेकर आ रहा है। नया व्यापार शुरू करने या किसी नई योजना पर काम करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। वाहन या संपत्ति खरीदने के अवसर भी बन सकते हैं। रचनात्मक क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। बैंकिंग, शिक्षा, लेखन और बौद्धिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। ज्ञान और समृद्धि का विशेष योगज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति के नक्षत्र में बुध का प्रवेश बुद्धि, शिक्षा, संवाद कौशल और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव ला सकता है। 11 जून से 8 अगस्त तक की यह अवधि कई लोगों के लिए नए अवसरों, आर्थिक मजबूती और व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाले देश के टॉप-7 फिल्म निर्देशकों की सूची आई सामने, जादुई आंकड़े से बदली फिल्म इंडस्ट्री की दशा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और बढ़ती पहुंच के बीच बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित हो रहे हैं। बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक, आज के दौर में फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना 100 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होना बन चुका है। इस जादुई और प्रतिष्ठित आंकड़े को सबसे ज्यादा बार छूने का महा-रिकॉर्ड एक्शन फिल्मों के बेताज बादशाह कहे जाने वाले निर्देशक रोहित शेट्टी के नाम दर्ज हो चुका है। रोहित शेट्टी ने अपनी बैक-टू-बैक सुपरहिट कमर्शियल फिल्मों के दम पर एसएस राजामौली और राजकुमार हिरानी जैसे धुरंधर निर्देशकों को भी संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया है। फिल्म निर्देशन की दुनिया में रोहित शेट्टी की शैली को सबसे सुरक्षित और बॉक्स ऑफिस फ्रेंडली माना जाता है। अपनी खास एक्शन और कॉमेडी फिल्मों के लिए मशहूर रोहित शेट्टी के करियर में अब तक 10 से ज्यादा ऐसी फिल्में आ चुकी हैं, जिन्होंने घरेलू बाजार में 100 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई की है। उनके इस अनूठे रिकॉर्ड के आसपास फिलहाल इंडस्ट्री का कोई दूसरा निर्देशक नजर नहीं आता है, जो यह दर्शाता है कि दर्शकों की नब्ज पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। इस सूची में दूसरे पायदान पर गंभीर विषयों को बेहद हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश करने वाले निर्देशक राजकुमार हिरानी का नाम आता है। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘3 इडियट्स’, ‘पीके’ और ‘संजू’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले राजकुमार हिरानी ने अब तक 5 फिल्में ऐसी दी हैं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है। हिरानी की फिल्मों की खासियत यह है कि वे न केवल कमाई के रिकॉर्ड तोड़ती हैं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी देती हैं। कमाई के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तीसरे नंबर पर एक्शन और स्पाई थ्रिलर फिल्मों के विशेषज्ञ सिद्धार्थ आनंद का कब्जा है। ‘वॉर’, ‘पठान’ और ‘किंग’ जैसी मेगा-बजट और भव्य स्तर की एक्शन फिल्में बनाने वाले सिद्धार्थ आनंद के खाते में भी 4 से 5 ऐसी फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा का कलेक्शन दर्ज कराया है। उनके बाद चौथे नंबर पर निर्देशक आदित्य धर का नाम आता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में देशप्रेम और युद्ध पर आधारित दमदार फिल्में बनाकर इतिहास रचा है और उनके खाते में भी 5 से अधिक 100 करोड़ क्लब की फिल्में दर्ज हैं। इस सूची में साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुकुमार भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिनकी ‘आर्या’ और वैश्विक स्तर पर तहलका मचाने वाली ‘पुष्पा’ जैसी फिल्मों ने 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन आसानी से पार किया है। वहीं हिंदी सिनेमा के हॉरर-कॉमेडी जॉनर को नया जीवन देने वाले निर्देशक अमर कौशिक भी ‘भेड़िया’ और ‘स्त्री 2’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के साथ इस एलीट क्लब का हिस्सा बने हुए हैं। सूची के अंतिम छोर पर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम चमकाने वाले निर्देशक एसएस राजामौली का नाम है, जिन्होंने ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए न केवल 100 करोड़ बल्कि हजारों करोड़ की कमाई का नया इतिहास रचा है।
फिल्म 'तीसरी कसम' के सदाबहार गीत 'चलत मुसाफिर' का गहरा दर्शन, मौज-मस्ती के पीछे छिपी है एक कलावंती की बेबसी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीतों को उनके मूल संदर्भ से अलग केवल मनोरंजन के दृष्टिकोण से देखा जाता रहा है, जबकि उनके पीछे गहरे सामाजिक सरोकार छिपे होते हैं। ऐसा ही एक कालजयी उदाहरण वर्ष 1966 में प्रदर्शित निर्देशक बासु भट्टाचार्य की फिल्म ‘तीसरी कसम’ का लोकगीत ‘चलत मुसाफिर मोह लिया रे’ है। रेडियो के जमाने से लेकर आधुनिक रीमिक्स और रील्स के दौर तक इस गीत की धुन पर लोग झूमते आ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस हंसते-गाते ट्रैक के पीछे एक स्त्री की बेबसी और सामाजिक विडंबना का मर्मस्पर्शी ताना-बाना बुना गया है। प्रसिद्ध गीतकार और इस फिल्म के निर्माता शैलेंद्र द्वारा रचित यह गीत फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बावजूद इस फिल्म के गानों को आज भी संगीत की धरोहर माना जाता है। इस विशेष गीत में प्रयुक्त ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ का सीधा संबंध फिल्म की मुख्य नायिका हीराबाई के जीवन से है, जिसका किरदार अभिनेत्री वहीदा रहमान ने निभाया था। हीराबाई एक नौटंकी कलाकार है, जिसकी कला पर पूरा समाज फिदा है, लेकिन जब उसे अपनाने की बात आती है, तो वही समाज पीछे हट जाता है। फिल्म की कहानी के अनुसार, राज कपूर द्वारा अभिनीत हीरामन नाम का एक सीधा-सादा बैलगाड़ी चालक अनजाने में एक नौटंकी डांसर को अपनी गाड़ी में बिठा लेता है। यात्रा के दौरान दोनों के बीच एक गहरा आत्मीय रिश्ता पनपने लगता है, लेकिन मेले में पहुंचने पर जब हीरामन को हीराबाई के पेशे की असलियत और समाज द्वारा उसे वेश्या जैसी नजरों से देखने का पता चलता है, तो वह टूट जाता है। वह हीराबाई को यह काम छोड़ने की सलाह देता है, परंतु अपनी मजबूरियों के चलते वह ऐसा नहीं कर पाती, जिसके बाद हीरामन जीवन की ‘तीसरी कसम’ खाता है कि वह कभी किसी नौटंकी वाली को अपनी गाड़ी में नहीं बिठाएगा। इसी पृष्ठभूमि में ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ शब्द उस नाचने वाली महिला का प्रतीक बनकर उभरता है, जो अपनी कला से हर राहगीर और मुसाफिर का मन तो मोह लेती है, लेकिन खुद एक अदृश्य पिंजरे में कैद रहने को अभिशप्त है। गीत के अंतर्निहित अर्थ में समाज के दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रहार किया गया है। गीत के बोलों में बताया गया है कि वह मुनिया जब हलवाई की दुकान पर जाती है या पनवाड़ी के पास जाती है, तो हर कोई उसके रस और आकर्षण में डूब जाना चाहता है। हर वर्ग का पुरुष उसके मोहपाश में बंधने को तैयार है, लेकिन उसे अपनी गृहस्थी या सम्मानजनक जीवन का हिस्सा बनाने का साहस किसी में नहीं होता। शैलेंद्र ने बेहद चतुराई से एक बेहद चुलबुली लोकधुन का सहारा लेकर उस दौर की कलावंती और नौटंकी महिलाओं की उस नियति को उजागर किया था, जो जिंदगी भर दर्शकों की तालियों के पिंजरे में घुटती रहती थीं। आज के दौर में जब इस गाने की तर्ज पर नए रीमिक्स बनाए जा रहे हैं, तब इस गाने के वास्तविक साहित्यिक और सामाजिक अर्थ को समझना सिनेमा और समाज के अंतर्संबंधों को देखने का एक नया नजरिया प्रदान करता है। यह गीत केवल नाचने-गाने का जरिया नहीं, बल्कि एक मूक विलाप है जिसे उत्सव की तरह गाया जाता रहा है।
सरहद पार के संगीत का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जलवा, यूट्यूब और स्पॉटिफाई पर करोड़ों व्यूज बटोर रहे इंडिपेंडेंट सिंगल्स

नई दिल्ली। सोशल मीडिया के इस दौर में संगीत की कोई सीमा नहीं रह गई है और यही वजह है कि इंस्टाग्राम रील्स पर रोजाना जिन गानों पर करोड़ों लोग शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, उनमें से अधिकांश गानों का कनेक्शन सरहद पार से है। भारतीय यूजर्स अक्सर जिन भावुक या रोमांटिक धुनों को देश का समझकर अपनी रील्स में इस्तेमाल करते हैं, वे असल में पाकिस्तान के उभरते हुए इंडी-पॉप कलाकारों की रचनाएं हैं। आज के समय में इंटरनेट और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने दोनों देशों के संगीत प्रेमियों को एक अनूठे धागे में पिरो दिया है। डिजिटल दुनिया में इस वक्त शेहरयार रेहान और जोहा वसीम का गाना ‘मजबूर’ यानी ‘आपका ही कहना बनता’ जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रहा है। यूट्यूब पर 65 मिलियन से अधिक व्यूज बटोर चुका यह एक स्वतंत्र सिंगल ट्रैक है, जो दिल टूटने और बेबसी के अहसास को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। इस गाने के बोल और इसकी धीमी धुन ने भारतीय रील्स क्रिएटर्स को अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके चलते लोग इसे भारतीय संगीत उद्योग का हिस्सा मान बैठते हैं। इसी तरह अन्नुरल खालिद और मानू का दर्द भरा गाना ‘झोल’ यूट्यूब पर 571 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज हासिल कर चुका है। पाकिस्तान की मशहूर आर-एंड-बी सिंगर अन्नुरल और रैपर मानू का यह नॉन-फिल्मी गाना युवाओं के बीच इस कदर लोकप्रिय है कि इसकी पंक्तियां हर दूसरी रील में सुनाई दे जाती हैं। इसके साथ ही अली सूमरो और अफ्यूजिक का गाना ‘पल पल जीना मुहाल’ भी इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस गाने को लेकर भारतीय श्रोताओं में अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसे गायक तलविंदर ने गाया है, जबकि इसके मूल निर्माता पाकिस्तान के नए जमाने के कलाकार हैं। अब्दुल हन्नान और रोवालियो का गाना ‘इरादे’ भी इस सूची में एक कल्ट हिट बनकर उभरा है, जिसने 125 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल किए हैं। सिंपल अकॉस्टिक संगीत और मखमली आवाज के कॉम्बिनेशन वाले इस गाने का इस्तेमाल लोग अपने प्यार का इजहार करने के लिए धड़ल्ले से कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, एक अनोखे क्रॉस-बॉर्डर कोलैबोरेशन के तहत हसन रहीम, उमेर और भारत के तलविंदर का हिप-हॉप ट्रैक ‘विशेस’ भी 134 मिलियन से ज्यादा व्यूज के साथ रील्स पर तहलका मचा रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तानी टेलीविजन सीरियल्स के टाइटल ट्रैक्स और वहां के पॉप स्टार्स का जादू भी भारतीय दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। असीम अजहर का गाया हुआ ‘कैसी दिल लगी है तू’ का स्लो इंटरनेट वर्जन, जिसे विजार्डो ने रीमिक्स किया है, इन दिनों काफी सुना जा रहा है। साथ ही असीम अजहर का ही भावुक सिंगल ट्रैक ‘जो तू ना मिला’, जिसे भारतीय म्यूजिक लेबल के तहत रिलीज किया गया था, वह भी एकतरफा प्यार के दर्द को दर्शाने के कारण रील्स का एक पसंदीदा ट्रैक बना हुआ है। यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि मौजूदा दौर में फिल्मों से इतर इंडिपेंडेंट सिंगल्स का चलन काफी बढ़ गया है।
एक फिल्म, 9 किरदार और चौंकाने वाली भविष्यवाणी! बॉलीवुड स्टार की कहानी है बेहद दिलचस्प

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से अभिनय की परिभाषा बदल दी। उनमें से एक नाम है Sanjeev Kumar। संजीव कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे अभिनय की ऐसी पाठशाला थे, जिनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। चाहे फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार हो या फिर गंभीर और भावनात्मक भूमिकाएं, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। बॉलीवुड में डबल और ट्रिपल रोल निभाने वाले कलाकारों की लंबी सूची रही है। कई सितारों ने एक ही फिल्म में दो या तीन किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया है। लेकिन संजीव कुमार ने वह कर दिखाया जो उनके दौर में किसी अन्य अभिनेता ने नहीं किया था। वर्ष 1974 में रिलीज हुई Naya Din Nai Raat में उन्होंने पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाए और अभिनय की नई मिसाल कायम कर दी। इस फिल्म में उनके साथ Jaya Bhaduri मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की कहानी एक युवती सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी से बचने के लिए घर छोड़ देती है। इसके बाद उसकी जिंदगी में अलग-अलग तरह के लोगों का सामना होता है। इन सभी किरदारों को संजीव कुमार ने निभाया था। खास बात यह थी कि उनके नौ किरदार जीवन के नौ रसों का प्रतीक माने गए थे। फिल्म में संजीव कुमार कभी डॉक्टर के रूप में नजर आए, तो कभी डाकू, साधु, पंडित और अन्य विविध व्यक्तित्वों के रूप में दिखाई दिए। हर किरदार का हावभाव, बोलने का अंदाज, शारीरिक भाषा और व्यक्तित्व अलग था। यही वजह थी कि दर्शकों को ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि पर्दे पर एक ही अभिनेता कई भूमिकाएं निभा रहा है। उनके अभिनय की यही ताकत उन्हें अपने समय के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती है। फिल्म का निर्देशन ए. भीमसिंह ने किया था। यह दक्षिण भारतीय अभिनेता Sivaji Ganesan की तमिल फिल्म Navarathri का हिंदी रीमेक थी। हालांकि हिंदी संस्करण में संजीव कुमार ने अपनी अदाकारी से किरदारों को नई पहचान दी और फिल्म को यादगार बना दिया। संजीव कुमार का जीवन भी उतना ही चर्चित रहा जितना उनका करियर। उनके बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि उन्होंने अपनी कम उम्र में मृत्यु की आशंका जताई थी। हालांकि इस तरह की बातें वर्षों से चर्चा का विषय रही हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी अद्भुत अभिनय क्षमता और सिनेमा को दिए गए अमूल्य योगदान से है। आज भी जब हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं की बात होती है, तो संजीव कुमार का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। एक ही फिल्म में नौ किरदार निभाने का उनका रिकॉर्ड भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
राम चरण की तारीफ में बोले जगपति बाबू, कहा- वह किसी सुपरमैन से कम नहीं

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Ram Charan की फिल्म Peddi इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ विवादों के कारण भी चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक ओर इसके कुछ दृश्यों और प्रस्तुति को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर फिल्म की टीम इसे बड़ी सफलता बता रही है। इसी बीच फिल्म में अप्पलसूरी का अहम किरदार निभाने वाले Jagapathi Babu ने ऐसा बयान दिया है, जिसने फिल्म को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हैदराबाद में आयोजित फिल्म के सक्सेस इवेंट के दौरान जगपति बाबू ने कहा कि *पेद्दी* की सफलता केवल कमाई के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे रिलीज के बाद भी अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उनके मुताबिक, फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई और आलोचनाओं का सामना करते हुए आगे बढ़ी। जगपति बाबू ने कहा कि किसी भी फिल्म का भविष्य अंततः दर्शकों के हाथ में होता है। एक आम दर्शक जो टिकट खरीदकर सिनेमाघर पहुंचता है, वही तय करता है कि फिल्म सफल होगी या नहीं। उन्होंने माना कि इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाना और उसमें राम चरण जैसे बड़े सितारे को शामिल करना आसान नहीं था। लेकिन पूरी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाया। अपने संबोधन में अभिनेता ने राम चरण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्म में राम चरण सिर्फ एक अभिनेता की तरह नहीं दिखे, बल्कि उन्होंने अपने किरदार को जिस तरह निभाया, उससे वह किसी सुपरहीरो जैसे नजर आए। जगपति बाबू के अनुसार, राम चरण ने फिल्म की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और हर चुनौती का सामना किया। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने फिल्म के आलोचकों और नकारात्मक रिव्यू देने वालों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने फिल्म के खिलाफ खराब समीक्षाएं लिखीं, उन्होंने भी अनजाने में फिल्म की मदद की। उनके अनुसार, नकारात्मक चर्चाओं ने भी दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाई और लोगों को सिनेमाघरों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। फिल्म की कमाई की बात करें तो शुरुआती दिनों में *पेद्दी* ने दुनिया भर में शानदार कारोबार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने पहले चार दिनों में 250 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया। हालांकि तेलुगू बाजार में फिल्म को बेहतर प्रतिक्रिया मिली है, जबकि हिंदी बेल्ट में इसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा बताया जा रहा है। फिलहाल फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बॉक्स ऑफिस पर इसके आगे के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि *पेद्दी* अपने लाइफटाइम कलेक्शन में कितना बड़ा मुकाम हासिल कर पाती है और क्या यह वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो सकेगी।
जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार। जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है। यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं। यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।
किन लोगों को होता है टीबी का सबसे ज्यादा खतरा? समय रहते जांच कराना क्यों है जरूरी, जानिए

नई दिल्ली । तपेदिक यानी टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) आज भी भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अनुसार, कुछ विशेष वर्गों के लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है। ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी जाती है। सबसे अधिक जोखिम उन लोगों को होता है जो किसी टीबी मरीज के संपर्क में रहते हैं। यदि परिवार, घर या आसपास किसी व्यक्ति को सक्रिय टीबी है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में नियमित स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कुपोषण से पीड़ित लोग भी टीबी की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के खिलाफ लड़ने की ताकत को कम कर देती है। यही कारण है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक पाया जाता है। जो लोग पिछले पांच वर्षों में टीबी से ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों में भी टीबी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे टीबी का संक्रमण तेजी से फैल सकता है और गंभीर रूप ले सकता है। मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीज भी इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में भी उम्र बढ़ने के साथ इम्युनिटी कमजोर होने लगती है, जिससे टीबी का जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले लोगों को भी विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि अत्यधिक शराब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। इससे टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, झुग्गी बस्तियों, जेलों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों में भी टीबी तेजी से फैल सकती है। खराब स्वच्छता, सीमित संसाधन और नजदीकी संपर्क संक्रमण के प्रसार को आसान बना देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में ज्यादा पसीना आना, भूख कम लगना या लगातार थकान महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, स्वच्छता, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा समय पर उपचार ही टीबी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन जागरूकता, समय पर जांच और सही इलाज से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। इसलिए जोखिम वाले वर्गों को अपनी सेहत के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और नियमित जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
Gwalior Board Exam Error: 11 अंक दिखाकर फेल, री-चेक में 71; बोर्ड की लापरवाही से छात्रा डिप्रेस्ड!

Gwalior Board Exam Error: ग्वालियर। बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रा ने साल भर मेहनत की थी, लेकिन जब परिणाम घोषित हुए तो वह हैरान रह गई। क्योंकि अंग्रेजी के विषय में उसे मात्र 11 अंक देकर फेल घोषित कर दिया गया। अपनी मेहनत पर भरोसा रखने वाली छात्रा इस नतीजे को स्वीकार नहीं कर पाई और मानसिक तनाव में चली गई। बाद में री-टोटलिंग में पता चला कि उसके अंग्रेजी में 11 नहीं, बल्कि 71 अंक थे। 10 फरवरी को हुई अंग्रेजी परीक्षा में अनामिका को पूरा भरोसा था कि उसका प्रदर्शन अच्छा रहेगा। लेकिन 15 अप्रैल को घोषित रिजल्ट ने उसकी उम्मीदों को झटका दे दिया। उसे सिर्फ 11 अंक मिले और फेल घोषित कर दिया गया। इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें” खाना पीना छोड़ चुकी थी छात्रा परिवार वालों का कहना है कि रिजल्ट के बाद उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। उसने लोगों से बातचीत बंद कर दी, खाना छोड़ दिया और अधिकतर समय अकेले रहने लगी। स्थिति गंभीर होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। छात्रा ने बताया कि इस दौरान उसके मन में निराशा और आत्महत्या जैसे विचार भी आने लगे थे। परिवार लगातार उसकी हालत को लेकर चिंतित रहा। भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक री-टोटलिंग में सामने आई सच्चाई परिजनों ने 16 अप्रैल को री-टोटलिंग के लिए आवेदन किया। शुरुआती जांच में ‘नो चेंज’ बताया गया, लेकिन परिवार ने प्रयास जारी रखा। आखिरकार 29 मई को दोबारा जांच में बड़ा खुलासा हुआ अनामिका को 11 नहीं, बल्कि 71 अंक मिले थे। परिवार ने उठाए सवाल इस बड़ी गलती ने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा की मां हेमलता रावत ने कहा कि बेटी की इस हालत को देखकर पूरा परिवार डर और तनाव में रहा। उन्हें हर समय यह आशंका बनी रहती थी कि कहीं वह कोई गलत कदम न उठा ले। परिवार ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है।