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केरल से शुरू हुआ ट्रेंड, तमिलनाडु-महाराष्ट्र तक फैला AI मंत्रालय का मॉडल, क्या बदल जाएगा भारत में?

नई दिल्ली । भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सरकारी स्तर पर एक नया मॉडल उभरता दिखाई दे रहा है, जहां कुछ राज्य इसे केवल तकनीकी क्षेत्र नहीं बल्कि आर्थिक विकास और प्रशासनिक भविष्य की रणनीति का प्रमुख हिस्सा मानते हुए अलग जिम्मेदारी या मंत्री स्तर पर ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस बदलाव ने नीति निर्माण के स्तर पर तकनीक की भूमिका को और अधिक केंद्रीय बना दिया है। इस पहल की शुरुआत केरल से मानी जा रही है, जहां कैबिनेट स्तर पर AI से जुड़ी जिम्मेदारियों को अलग पहचान दी गई। राज्य सरकार ने वरिष्ठ नेता को उद्योग, आईटी और AI समेत कई तकनीकी विभागों का प्रभार सौंपा है। इस निर्णय को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि AI अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक और प्रशासनिक विकास की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। केरल के बाद तमिलनाडु ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है और AI, आईटी तथा डिजिटल सेवाओं के लिए अलग जिम्मेदारी तय की गई है। राज्य में AI आधारित प्रशासन, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में AI के उपयोग को विस्तार देने की भी योजना है, जिससे सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाई जा सके। तमिलनाडु सरकार ने पहले ही अपने विजन डॉक्यूमेंट में AI आधारित विश्वविद्यालय और तकनीकी शहर विकसित करने की बात कही थी, जिसे अब धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य AI को दीर्घकालिक विकास मॉडल के रूप में देख रहा है और इसके लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जा रहा है। वहीं कर्नाटक ने इस मॉडल से अलग दृष्टिकोण अपनाया है। राज्य का मानना है कि AI के लिए अलग मंत्रालय बनाने की बजाय तकनीक-आधारित एकीकृत ढांचा अधिक व्यावहारिक है। वहां पहले से ही AI-ML सेल और जिम्मेदार AI समिति जैसे संस्थागत ढांचे सक्रिय हैं, जो तकनीकी विकास और उसके नैतिक उपयोग पर निगरानी रखते हैं। कर्नाटक का जोर इस बात पर है कि तकनीक लगातार बदलती रहती है, इसलिए प्रशासनिक ढांचे को भी लचीला होना चाहिए। महाराष्ट्र ने भी AI को लेकर व्यापक नीति और विभागीय विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और AI विभाग को एक साथ जोड़कर नई संरचना तैयार की जा रही है। इसके तहत AI इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य में AI नवाचार शहर और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है, जिससे स्टार्टअप और शोध को बढ़ावा मिल सके। विशेषज्ञों के बीच इस बात पर मतभेद है कि क्या AI के लिए अलग मंत्री या मंत्रालय वास्तव में आवश्यक है या यह केवल प्रतीकात्मक कदम है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल संरचना बनाने से बदलाव नहीं आता, इसके लिए बजट, शोध और स्पष्ट नीतियों की जरूरत होती है। वहीं कुछ का मानना है कि तकनीक की जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञ नेतृत्व जरूरी है ताकि सही दिशा में नीति निर्माण हो सके। राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार AI को लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है और इसे डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा मान रही है। साथ ही वैश्विक स्तर पर भी कई देश पहले से ही AI प्रशासन के लिए विशेष पद और संस्थाएं बना चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में AI शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।

नया साइबर स्कैम: BSNL यूजर्स को KYC सस्पेंड का डर दिखाकर ठगने की कोशिश, PIB ने नोटिस को बताया पूरी तरह फर्जी

नई दिल्ली । देशभर में BSNL उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर एक नया साइबर फ्रॉड सामने आया है, जिसमें KYC अपडेट के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है। इस नोटिस में दावा किया जा रहा है कि यूजर की सिम KYC सस्पेंड कर दी गई है और अगले 24 घंटे में सिम ब्लॉक हो सकती है। इसमें BSNL और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के लोगो का भी इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे असली दिखाया जा सके। सरकारी एजेंसियों की फैक्ट चेक यूनिट ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट किया है कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी है और BSNL की ओर से ऐसा कोई संदेश जारी नहीं किया जाता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान संदेश, ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें और न ही उसमें दिए गए नंबर या लिंक पर संपर्क करें। यह फर्जी नोटिस इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें उपभोक्ता को तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जाए। इसमें लिखा होता है कि KYC न होने पर सिम सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। साइबर ठग इसी डर का फायदा उठाकर लोगों को कॉल करने या लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति दिए गए संपर्क माध्यम से जुड़ता है, उससे बैंक डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील जानकारी मांग ली जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के स्कैम में सबसे बड़ा हथियार डर और जल्दबाजी होता है। ठग समय सीमा का दबाव बनाकर यूजर को सोचने का मौका नहीं देते। कई मामलों में लोग बिना जांच किए जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे उनके बैंक खातों से रकम चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है। PIB फैक्ट चेक ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि BSNL या किसी भी सरकारी दूरसंचार संस्था द्वारा इस तरह के KYC सस्पेंशन नोटिस नहीं भेजे जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में उपयोगकर्ताओं को अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या OTP किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी आई है और इसमें टेलीकॉम कंपनियों के नाम का दुरुपयोग आम हो गया है। ऐसे में उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जा रही है। सरकारी एजेंसियों ने यह भी कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसा कोई संदेश मिलता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए और संदेश में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। साथ ही मोबाइल और एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट रखना भी साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया है। डिजिटल भुगतान और मोबाइल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच इस तरह के फर्जीवाड़े लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव उपाय माना जा रहा है।

भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा ताकतवर बेड़ा, ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट प्रोजेक्ट को 40,000 करोड़ की मंजूरी का इंतजार

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को नई दिशा देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट अंतिम मंजूरी के चरण में पहुंच गया है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी के बाद नौसेना को आठ आधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा मिलेगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करेंगे। इस परियोजना के तहत दो प्रमुख सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनियों को निर्माण कार्य सौंपे जाने की संभावना है। इनमें Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) को पांच कॉर्वेट और Goa Shipyard Limited (GSL) को तीन युद्धपोत बनाने का दायित्व मिल सकता है। यह कदम देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी मजबूती देगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाएगा। लगभग 3,500 टन विस्थापन वाले ये कॉर्वेट आधुनिक युद्ध तकनीक से लैस होंगे। इन्हें “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा के आधार पर डिजाइन किया जा रहा है, जिससे छोटे आकार के बावजूद ये युद्धपोत लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति लगभग 32 नॉट्स होगी और ये बिना किसी बाहरी सहायता के लगभग 30 दिनों तक समुद्र में तैनात रह सकेंगे। इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें होंगी। प्रत्येक कॉर्वेट पर आठ एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई जाएंगी, जो दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही वर्टिकल लॉन्च सिस्टम आधारित शॉर्ट-रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। निकट दूरी के खतरों को निष्क्रिय करने के लिए AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी शामिल होगा। पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए इन जहाजों में हल-माउंटेड सोनार, टोव्ड ऐरे सोनार और टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे। इससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और उन पर हमला करना आसान होगा। साथ ही हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे निगरानी और मिशन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इन कॉर्वेट्स में आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी होंगे, जिनमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट सिस्टम और उन्नत ट्रैकिंग तकनीक शामिल है। ये सिस्टम युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार और मिसाइल हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि योजना समय पर आगे बढ़ती है, तो 2026 में CCS की मंजूरी के बाद निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। 2027 में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और पहला युद्धपोत 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है। पूरी परियोजना 2036 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी होने का अनुमान है। इस परियोजना के पूरा होने पर भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में देश की रणनीतिक स्थिति और निगरानी क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।

अदालतों में AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी, 20 जून तक आम जनता से सुझाव आमंत्रित

नई दिल्ली । न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में AI के औपचारिक उपयोग को लेकर “रेगुलेशन्स फॉर यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर सभी हितधारकों तथा आम जनता से 20 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग को संतुलित और नियंत्रित ढंग से लागू करना है, ताकि आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिले और न्यायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा मानवीय निर्णय की प्रधानता भी बनी रहे। प्रस्तावित ढांचे में यह स्पष्ट किया गया है कि AI सिस्टम केवल सहायक उपकरण के रूप में काम करेंगे और किसी भी स्थिति में न्यायाधीशों का स्थान नहीं लेंगे। ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास रहेगा। AI को किसी भी तरह से सजा सुनाने, कानूनी निष्कर्ष निकालने या मानवीय विवेक की जगह निर्णय देने की अनुमति नहीं होगी। इसका उपयोग केवल सहायता, विश्लेषण और प्रक्रियागत दक्षता बढ़ाने तक सीमित रहेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा कर रहे हैं, में जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस राजा विजयराघवन वी., जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सूरज गोविंदराज शामिल हैं। इस समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह ड्राफ्ट तैयार किया है और अब इसे अंतिम रूप देने से पहले व्यापक जनसुझाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायिक प्रणाली में उपयोग होने वाले सभी AI सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन और लागू किया जाएगा कि वे निष्पक्षता को बढ़ावा दें और किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकें। इसमें नस्ल, धर्म, जाति, लिंग, भाषा, आर्थिक स्थिति या किसी भी संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित आधार पर भेदभाव को रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांग व्यक्तियों, अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। यह सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि AI आधारित किसी भी प्रणाली से इन समूहों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। प्रस्तावित ढांचे में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी प्रमुख स्तंभों के रूप में शामिल किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक AI सिस्टम को उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा ताकि संवेदनशील न्यायिक डेटा सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय न्याय प्रणाली में तकनीक के उपयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकती है। हालांकि इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का उपयोग मानव न्यायिक विवेक को प्रभावित न करे और न्याय की मूल भावना सुरक्षित रहे। आने वाले दिनों में प्राप्त सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इसे न्यायालयों में AI के नियंत्रित उपयोग के लिए लागू किया जा सकता है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।

साई पल्लवी और रुक्मिणी वसंत के बाद अब रश्मिका मंदाना के नाम की चर्चा तेज, आधिकारिक घोषणा का इंतजार

नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत की सर्वकालिक महान विभूतियों में शुमार और भारत रत्न से सम्मानित कर्नाटक संगीत की दिग्गज गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की गौरवशाली जीवन यात्रा जल्द ही बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है। इस ऐतिहासिक और संगीत से ओतप्रोत बायोपिक फिल्म को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सिनेमाई गलियारों और सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य किरदार अर्थात एमएस सुब्बुलक्ष्मी की प्रतिष्ठित भूमिका को पर्दे पर जीवंत करने के लिए दक्षिण भारतीय और हिंदी सिनेमा की शीर्ष अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के नाम पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इस बहुप्रतीक्षित बायोपिक फिल्म के तकनीकी और रचनात्मक पहलुओं की जिम्मेदारी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने निर्देशक गौतम तिन्ननुरी संभाल रहे हैं। गौतम तिन्ननुरी को समीक्षकों द्वारा प्रशंसित और व्यावसायिक रूप से बेहद सफल रही फिल्म ‘जर्सी’ के निर्देशन के लिए विशेष पहचान हासिल है। प्राप्त विवरण के अनुसार, निर्देशक पिछले एक लंबे समय से महान गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, उनके संगीत के सफर और उनके ऐतिहासिक योगदान पर गहन शोध (रिसर्च) कर रहे हैं, ताकि कहानी को पूरी प्रामाणिकता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री के चयन को लेकर वर्तमान में फिल्म उद्योग के भीतर गहरा सस्पेंस बना हुआ है, जिसके कारण विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं। तेलुगु सिनेमाई मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार, रश्मिका मंदाना को इस ऐतिहासिक भूमिका के लिए लगभग तय माना जा रहा है और हाल ही में उनके आवास पर इस किरदार से जुड़े पहनावे और स्वरूप को लेकर एक गुप्त लुक टेस्ट भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया है। रश्मिका के इस प्रोजेक्ट से जुड़ने की खबर ने उनके प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह पैदा कर दिया है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए रश्मिका मंदाना के अलावा इंडस्ट्री की कुछ अन्य प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों के नाम भी पूर्व में सामने आते रहे हैं। कुछ समय पहले तक यह चर्चा बेहद गर्म थी कि अपनी संजीदा अदाकारी के लिए मशहूर साई पल्लवी इस बायोपिक का हिस्सा होंगी और उन्होंने इस किरदार की तैयारी के लिए बकायदा कर्नाटक संगीत की बुनियादी बारीकियां सीखना भी शुरू कर दिया था। इसके बाद बीच में उभरती हुई अभिनेत्री रुक्मिणी वसंत को भी इस रोल के लिए साइन किए जाने की खबरें आईं। चूंकि फिल्म के निर्माताओं ने अभी तक कास्टिंग को लेकर कोई औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की है, इसलिए अंतिम नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। दूसरी ओर, रश्मिका मंदाना वर्तमान में अपनी एक अन्य बड़ी और आधुनिक प्रेम कहानी पर आधारित फिल्म ‘कॉकटेल 2’ के प्रचार-प्रसार में व्यस्त हैं। हाल ही में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुए ‘कॉकटेल 2’ के आधिकारिक ट्रेलर को दर्शकों और नेटिजन्स की ओर से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिसके लिए रश्मिका ने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार भी व्यक्त किया है। होमी अदजानिया के निर्देशन में बनी यह फिल्म आगामी 19 जून 2026 को देश भर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसमें रश्मिका के साथ शाहिद कपूर और कृति सेनन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस व्यावसायिक फिल्म के तुरंत बाद एमएस सुब्बुलक्ष्मी जैसी ऐतिहासिक शख्सियत की बायोपिक रश्मिका के करियर के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है।

स्टोर रूम की सफाई से लेकर वन विभाग की मदद तक, बारिश के मौसम में इन जरूरी घरेलू सुरक्षा नियमों का करें पालन

नई दिल्ली । देश के विभिन्न हिस्सों में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही आम नागरिकों के लिए मौसमी बीमारियों के अलावा एक और बड़ा और गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। भारी बारिश, जलभराव और जमीन के भीतर नमी बढ़ने के कारण सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले रेंगने वाले जीव अपने प्राकृतिक आवासों यानी बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में ये जीव अक्सर इंसानी बस्तियों, घरों के बगीचों, स्टोर रूम और बेसमेंट जैसी जगहों पर शरण ले लेते हैं। इस स्थिति से निपटने और अपने परिवार को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए गृह स्वामियों को कुछ विशेष और महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों को अमल में लाने की तत्काल आवश्यकता है। घरेलू सुरक्षा के दृष्टिकोण से सबसे पहला और बुनियादी कदम घर के आसपास के बाहरी वातावरण को पूरी तरह से साफ-सुथरा रखना है। घर के परिसर या बगीचे में जमा होने वाले कचरे, सूखी लकड़ियों के गट्ठर, पुरानी ईंटों के ढेर और बेतरतीब उगी झाड़ियों को तुरंत साफ किया जाना चाहिए, क्योंकि ये स्थान सांप और बिच्छुओं के छिपने के लिए सबसे अनुकूल माने जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि घर के लॉन या आसपास के मैदान में घास अधिक बढ़ गई है, तो उसकी नियमित रूप से छंटाई कराना अनिवार्य है, ताकि खुले और साफ स्थान पर ये जीव ठहर न सकें। सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के अगले चरण में घर के भौतिक ढांचे का बारीकी से निरीक्षण करना आवश्यक है। भवन की दीवारों, खिड़कियों के कोनों, मुख्य दरवाजों के निचले हिस्सों और फर्श में मौजूद किसी भी प्रकार की छोटी-बड़ी दरारों या गैप की सघन जांच की जानी चाहिए। बिच्छू और छोटे सांप बेहद महीन दरारों के रास्ते भी घर के भीतर सुगमता से प्रवेश कर जाते हैं। अतः ऐसी किसी भी संभावित एंट्री पॉइंट या झिरी के दिखाई देने पर उसे अविलंब सीमेंट, सिलिकॉन सीलेंट या अन्य मजबूत निर्माण सामग्री की सहायता से पूरी तरह एयरटाइट बंद कर देना चाहिए। बरसात के दिनों में घर के आंतरिक वातावरण को सूखा रखना और वहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करना भी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। स्टोर रूम, बेसमेंट और घर के उन कोनों में जहां हवा और रोशनी कम पहुंचती है, वहां नियमित रूप से सफाई और कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जाना चाहिए। अक्सर लोग जूते, चप्पल, पुराने कपड़े या कार्डबोर्ड के बक्से लंबे समय तक एक ही स्थान पर रख देते हैं, जो इन जीवों के लिए छिपने का आदर्श स्थान बन जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस मौसम में किसी भी रखे हुए सामान, कपड़ों या जूतों का उपयोग करने से पहले उन्हें एक बार अच्छी तरह से झाड़कर और जांचकर ही इस्तेमाल में लाएं। इन तमाम सावधानियों के बावजूद यदि कभी घर के भीतर या आसपास कोई जहरीला सांप अथवा अन्य जीव दिखाई दे, तो नागरिकों को अत्यधिक संयम बरतने की आवश्यकता है। ऐसी आपातकालीन स्थिति में जीव को खुद पकड़ने, सहलाने या लाठी-डंडों से मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि भयभीत होने पर ये जीव और अधिक आक्रामक होकर हमला कर सकते हैं। इसके स्थान पर स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों, पशु बचाव दल (एनिमल रेस्क्यू टीम) या किसी प्रमाणित और प्रशिक्षित सर्प विशेषज्ञ से तुरंत संपर्क करना चाहिए, जो आधुनिक उपकरणों की मदद से सुरक्षित रूप से जीव को वहां से रेस्क्यू कर सकें।

कामा अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सों के अदम्य साहस पर आधारित सिनेमाई कहानी में स्टाफ नर्स की भूमिका निभाएंगी कंगना रनौत

Ranaut, Mumbai, Hospital, Tribute, Screening नई दिल्ली । मुंबई में हुए 26/11 के भीषण आतंकवादी हमलों की त्रासदी के बीच मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की एक ऐसी अनसुनी गाथा अब बड़े पर्दे पर अवतरित होने जा रही है, जिसने चिकित्सा जगत के सर्वोच्च सेवा भाव को रेखांकित किया था। प्रख्यात अभिनेत्री और भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर व्यापक रूप से चर्चा में हैं। इस फिल्म के माध्यम से मुंबई आतंकी हमले के दौरान कामा अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दिखाई गई अदम्य वीरता और अप्रतिम साहस की वास्तविक कहानी को देश के सामने लाया जा रहा है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बात करते हुए कंगना रनौत ने एक साक्षात्कार में बताया कि जब पूरा मुंबई शहर आतंकी हमलों और विस्फोटों से थर्रा रहा था, उस भयावह दौर में कामा अस्पताल के भीतर एक अलग ही संघर्ष चल रहा था। अस्पताल परिसर के ठीक बाहर और भीतर लगातार गोलियां चल रही थीं और चारों तरफ दहशत का माहौल था। ऐसी विकट और जानलेवा परिस्थितियों में भी अस्पताल की नर्सों और डॉक्टरों ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे। चिकित्सा कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए न केवल मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की, बल्कि उस भीषण अफरा-तफरी के बीच 20 गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी भी करवाई। फिल्म की मुख्य विषयवस्तु और प्रेरणा के संबंध में जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने कहा कि संकट के समय स्वास्थ्य कर्मियों का यह समर्पण देश के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि डॉक्टर और नर्सें हर परिस्थिति में समाज के रक्षक बनकर सामने आते हैं। कंगना ने विशेष रूप से अस्पताल की उन नर्सों के साहस की सराहना की, जो बम धमाकों के बीच भी मरीजों की सुध लेने के लिए अस्पताल की विभिन्न मंजिलों पर दौड़ती रहीं और अपने मानवीय दायित्वों को पूरा किया। व्यावसायिक और रणनीतिक मोर्चे पर इस फिल्म की एक विशेष स्क्रीनिंग हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित की गई थी। इस उच्च स्तरीय स्क्रीनिंग के दौरान ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव सहित कई वरिष्ठ राजनेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर कंगना रनौत ने फिल्म को राष्ट्र निर्माण में अदृश्य भूमिका निभाने वाले मेहनतकश लोगों को समर्पित करते हुए इसे राज्य में टैक्स फ्री करने की आधिकारिक मांग की, जिस पर उन्हें राज्य सरकार की ओर से सकारात्मक आश्वासन भी प्राप्त हुआ है। फिल्म के शीर्षक ‘भारत भाग्य विधाता’ के चयन के पीछे की पृष्ठभूमि को साझा करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि यह नाम देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक विशेष संबोधन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने अपने एक भाषण के दौरान देश के श्रमिकों, कारीगरों और समाज के निचले पायदान पर काम करने वाले मेहनतकश लोगों को ‘भारत भाग्य विधाता’ कहकर सम्मानित किया था। इसी विचार को आत्मसात करते हुए फिल्म का नाम तय किया गया, जिसमें कंगना रनौत स्वयं एक साधारण स्टाफ नर्स के रूप में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जो व्यवस्था की एक अत्यंत महत्वपूर्ण कड़ी है। फिल्म के हालिया आधिकारिक ट्रेलर में यह स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है कि किस प्रकार कुछ बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले वार्ड बॉयज और नर्सों ने 26/11 के उस काले दौर में सूझबूझ का परिचय देते हुए 400 से अधिक नागरिकों की जान बचाई थी। यह फिल्म न केवल एक आतंकी हमले की पृष्ठभूमि पर बनी थ्रिलर है, बल्कि यह देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले ग्राउंड स्टाफ के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक गंभीर सिनेमाई प्रयास है। यह बहुप्रतीक्षित फिल्म आगामी 12 जून को देश भर के सिनेमाघरों में आधिकारिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी।

अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

नई दिल्ली । देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों को सम्मान देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुरों से सजाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। महान संगीतकार और ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर लाइव परफॉर्मेंस देकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस अनूठे और भव्य कॉन्सर्ट का आयोजन देश के वीर जवानों को समर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष सिनेमाई कलाकृति के प्रचार के उद्देश्य से किया गया था। मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रमोशन के लिए एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली रास्ता चुना। वे फिल्म की मुख्य संगीत टीम, जिसमें दिग्गज संगीतकार ए आर रहमान और लोकप्रिय पार्श्व गायक मोहित चौहान शामिल थे, के साथ सीधे भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष म्यूजिकल ट्रिब्यूट का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभ्वल कर दिया। अटारी बॉर्डर पोस्ट पर आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट के दौरान ए आर रहमान ने जब अपनी सुरीली और जादुई आवाज में कालजयी गीत ‘वंदे मातरम’ गाना शुरू किया, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों और सुरों से गूंज उठा। सीमाओं की रक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए यह एक बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण था। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति में गायक मोहित चौहान ने भी सुर से सुर मिलाकर समां बांध दिया, जिससे वहां उपस्थित जवानों और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया। फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के प्रमोशन को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रहरियों को केंद्र में रखा गया। इम्तियाज अली और ए आर रहमान की इस जोड़ी ने हमेशा अपने संगीत और फिल्मों से दर्शकों के दिलों को छुआ है, लेकिन इस बार सरहद पर दी गई इस लाइव प्रस्तुति ने कला और राष्ट्र सेवा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने इस सम्मान के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया है कि कला और संस्कृति देश के रक्षकों के योगदान की सदैव ऋणी रहेगी। अटारी बॉर्डर पर गूंजे ए आर रहमान के सुरों की गूंज और जवानों के चेहरों पर तैरती मुस्कान सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। देशभक्ति से ओतप्रोत यह कॉन्सर्ट आने वाले लंबे समय तक भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में याद रखा जाएगा।

समस्याओं को सुलझाने का आसान तरीका बताया, अमिताभ बच्चन का अनुभव आया सामने

नई दिल्ली। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपने अनुशासन और कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने अपने हालिया ब्लॉग में बताया कि वह देर रात तक काम करते हैं और कई बार सुबह 4 बजे तक अपने प्रोजेक्ट्स में व्यस्त रहते हैं। 83 साल की उम्र में भी उनका काम के प्रति समर्पण पहले जैसा ही मजबूत है। ब्लॉग में उन्होंने फैंस को भी स्वास्थ्य का ध्यान रखने और गर्मी में हाइड्रेटेड रहने की सलाह दी। ‘प्रॉब्लम हमेशा प्रॉब्लम रहती है’  बिग बी का जीवन मंत्रअमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग में समस्याओं को लेकर एक गहरी सोच साझा की। उनके अनुसार,“प्रॉब्लम की अच्छी बात यह है कि वे बाद में भी प्रॉब्लम ही रहती हैं, इसलिए उन्हें तुरंत हल करने का दबाव नहीं होना चाहिए।” उनका कहना है कि हर समस्या हमें कुछ नया सिखाती है और समय के साथ हम उनसे निपटना सीखते हैं। यह अनुभव इंसान को अधिक समझदार बनाता है। पॉजिटिविटी और कॉन्फिडेंस पर जोरउन्होंने आगे लिखा कि जीवन में केवल समस्याओं को हल करना ही जरूरी नहीं, बल्कि अनिश्चितताओं को स्वीकार करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बिग बी के अनुसार, कॉन्फिडेंस और पॉजिटिविटी ही वह आधार हैं, जिनसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों का सामना बेहतर तरीके से कर सकता है। उनका मानना है कि अनिश्चितताएं ही जीवन को दिलचस्प और जीने योग्य बनाती हैं। लगातार सक्रिय है करियरवर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन जल्द ही फिल्म सेक्शन 84 में नजर आ सकते हैं। इसके अलावा वह बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट कल्कि 2898 एडी -पार्ट 2 का भी हिस्सा हैं, जिसमें उन्होंने अश्वत्थामा का किरदार निभाया है। पहले भाग में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई थी, और दूसरे पार्ट से भी दर्शकों को बड़ी उम्मीदें हैं। एक प्रेरणा बने हुए हैं बिग बीसमय बदल गया है, उम्र बढ़ गई है, लेकिन अमिताभ बच्चन का काम करने का जुनून और जीवन को देखने का नजरिया आज भी उतना ही मजबूत है। उनका यह संदेश कि “समस्याएं जीवन का हिस्सा हैं” हर उम्र के लोगों के लिए एक सीख की तरह है।

गाने ने बदल दिया इतिहास, किशोर कुमार की बात आखिरकार साबित हुई सही

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज पार्श्वगायक किशोर कुमार अपनी बेहतरीन आवाज और बहुआयामी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हजारों गीत गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में बसे हुए हैं। उनके एक खास गाने “मेरे ये गीत याद रखना” को लेकर एक बेहद भावुक किस्सा जुड़ा है, जिसे फिल्म चलते-चलते के लिए रिकॉर्ड किया गया था। गाते-गाते भावुक हो उठे थे किशोर कुमारकहा जाता है कि जब किशोर कुमार इस गाने को रिकॉर्ड कर रहे थे, तब वह बार-बार भावुक हो जाते थे। गीत के बोल और संगीत ने उनकी निजी यादों को ताजा कर दिया, जिससे उनकी आंखें नम हो जाती थीं। रिकॉर्डिंग के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि उन्हें खुद को संभालना पड़ा, क्योंकि गाने की भावनात्मक गहराई उन्हें भीतर तक छू रही थी। ‘ये गाना हिट होगा’ किशोर कुमार की भविष्यवाणीइस गाने को लेकर एक दिलचस्प बात यह भी कही जाती है कि किशोर कुमार ने इसके रिकॉर्डिंग के दौरान ही कह दिया था कि यह गीत दर्शकों के दिलों में जगह बनाएगा। उनकी यह बात आगे चलकर सही साबित हुई और यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय माना जाता है। संगीत और फिल्म की यादगार टीमयह गीत फिल्म चलते-चलते का हिस्सा था, जिसमें कलाकारों की भूमिका भी बेहद यादगार रही। इसके बोल लेखक अमित खन्ना ने लिखे थे, जबकि संगीत निर्देशन बप्पी लाहिड़ी ने किया था। बप्पी लाहिड़ी ने इस गीत के लिए ऐसी धुन तैयार की थी जो सीधे दिल को छू जाए, और यही इसकी सफलता का बड़ा कारण बनी। किशोर कुमार की विरासतकिशोर कुमार सिर्फ गायक ही नहीं, बल्कि अभिनेता, निर्देशक और निर्माता भी थे। उन्होंने अपने करियर में हजारों गाने गाए और कई सुपरस्टार्स के लिए अपनी आवाज दी। उनकी गायकी की खासियत यह थी कि वह हर तरह के गीत रोमांटिक, दर्दभरे, भजन या मस्तीभरे सबमें समान रूप से जान डाल देते थे। एक अमर कलाकार की अमर कहानीकिशोर कुमार का नाम भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनकी आवाज, उनका अंदाज और उनके गीत आज भी लोगों को भावनाओं से जोड़ते हैं। यह किस्सा उनके उसी जादू को याद दिलाता है, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है।