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रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ पर फिर गरमाया मामला: कराची के पूर्व मेयर के दावे ने आलोचकों को दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत की ब्लॉकबस्टर एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल को लेकर चल रहा वैचारिक विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की इस बेहद चर्चित फिल्म को लेकर जहां भारत के भीतर ही कुछ बुद्धिजीवियों, समीक्षकों और सोशल मीडिया विश्लेषकों द्वारा इसे एक ‘प्रोपेगैंडा फिल्म’ करार दिया जा रहा था, वहीं अब इस पूरे मामले में सरहद पार से आए एक बड़े बयान ने आलोचकों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। पाकिस्तान के कराची शहर के पूर्व मेयर और वरिष्ठ पत्रकार आरिफ अजाकिया ने फिल्म के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रकारिता कार्यक्रम ‘टॉक जर्नलिज्म’ के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया कि फिल्म में दिखाई गई पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की जमीनी हकीकत और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की जो कहानी पर्दे पर उतारी गई है, वह पूरी तरह से सच पर आधारित है। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद से ही फिल्म की आलोचना करने वाले धड़ों के बीच सन्नाटा पसर गया है। आरिफ अजाकिया ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर की घटनाओं और मिशन को फिल्म ‘धुरंधर’ में फिल्माया गया है, उस समय वह स्वयं कराची के उस विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण कराची के उसी विवादित ल्यारी इलाके में हुआ है, जहां बलूच गैंग और विभिन्न आतंकी संगठनों का एक समय पर भारी वर्चस्व हुआ करता था। पूर्व मेयर के अनुसार, वह उस दौर के सुरक्षा हालातों और पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, इसलिए वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह स्वीकार करते हैं कि फिल्म के भीतर जो कुछ भी दिखाया गया है, उसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मंच से अपनी जड़ों के बारे में बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि भले ही उनका जन्म कराची में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता अविभाजित भारत के जूनागढ़, गुजरात से ताल्लुक रखते थे, इसलिए वह स्वयं को पाकिस्तानी मानने की बजाय भारतीय मूल का नागरिक कहलाना अधिक पसंद करते हैं। मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचाने वाली इस फिल्म की कहानी की बात करें तो ‘धुरंधर’ और इसका हालिया सीक्वल दर्शकों को एक बेहद संजीदा और खतरनाक खुफिया मिशन पर ले जाता है। फिल्म की पटकथा में दिखाया गया है कि किस प्रकार भारतीय खुफिया एजेंसी का एक जांबाज अधिकारी जसकीरत, विषम परिस्थितियों के बीच अपना नाम और पहचान बदलकर हमजा बन जाता है और पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील इलाके ल्यारी के एक खतरनाक बलूच गैंग में सफलतापूर्वक घुसपैठ करता है। वहां रहते हुए वह न केवल स्थानीय अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करता है बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के मंसूबों को भी नेस्तनाबूद कर देता है। रणवीर सिंह के दमदार अभिनय से सजी इस फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे स्थापित कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। जहाँ एक तरफ इस फिल्म की आलोचना करने वाले इसे केवल एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानी बता रहे थे, वहीं अब खुद कराची की कमान संभाल चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इसे सच का आईना बताए जाने के बाद इस फिल्म की प्रामाणिकता पर उठ रहे तमाम सवालों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।

बार-बार पड़ते हैं बीमार? समझिए विटामिन-सी और विटामिन-डी में कौन है इम्युनिटी का असली हीरो

नई दिल्ली। मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम होना, बार-बार संक्रमण की चपेट में आना, जल्दी थक जाना और शरीर में कमजोरी महसूस होना अक्सर कमजोर इम्युनिटी के संकेत माने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। खासकर कोरोना महामारी के बाद विटामिन-सी और विटामिन-डी को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई। हालांकि आज भी बहुत से लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि इम्युनिटी मजबूत करने के लिए आखिर सबसे ज्यादा जरूरी कौन है-विटामिन-सी या विटामिन-डी? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब यह है कि दोनों ही विटामिन शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। इसलिए किसी एक को दूसरे से ज्यादा महत्वपूर्ण मानना सही नहीं होगा। मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए दोनों का संतुलित स्तर बनाए रखना आवश्यक है। विटामिन-सी को लंबे समय से प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर माना जाता रहा है। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं यानी व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। ये कोशिकाएं शरीर को वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से बचाने का काम करती हैं। इसके अलावा विटामिन-सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी है जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी का सेवन करने से सर्दी-जुकाम की अवधि और उसकी गंभीरता कुछ हद तक कम हो सकती है। दूसरी ओर विटामिन-डी को भी इम्यून सिस्टम का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। यह शरीर की टी-सेल्स और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद करता है जो संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ रक्षा कवच का काम करती हैं। विटामिन-डी शरीर में सूजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली संतुलित रूप से कार्य करती है। शोध बताते हैं कि जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें श्वसन संबंधी संक्रमण, फ्लू और अन्य बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सप्लीमेंट्स के भरोसे इम्युनिटी मजबूत नहीं की जा सकती। इसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है। यदि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते रहें तो इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। विटामिन-सी की पूर्ति के लिए आंवला, संतरा, नींबू, अमरूद, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। वहीं विटामिन-डी के लिए सुबह की धूप सबसे अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसके अलावा अंडे की जर्दी, फैटी फिश, मशरूम और फोर्टिफाइड डेयरी उत्पादों का सेवन भी लाभदायक होता है। कुल मिलाकर इम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिए विटामिन-सी और विटामिन-डी दोनों ही जरूरी हैं। एक संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है तो दूसरा इम्यून सिस्टम को सक्रिय और संतुलित बनाए रखता है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए दोनों पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

पर्दे पर रहे विरोधी, असल जिंदगी में निकले बेहद करीबी रिश्तेदार: जानिए रेखा और अभिनेता तेज सप्रू का अनोखा फैमिली कनेक्शन

नई दिल्ली। बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की सबसे रहस्यमयी और सदाबहार अभिनेत्रियां में शुमार रेखा के पेशेवर जीवन और उनकी व्यक्तिगत प्रेम कहानी से तो दुनिया भली-भांति वाकिफ है, परंतु उनके पारिवारिक ताने-बाने को लेकर आज भी कई ऐसे अनसुने पहलू हैं जिनसे आम जनमानस पूरी तरह अनजान है। साठ के दशक से सिल्वर स्क्रीन पर राज करने वाली रेखा का हिंदी सिनेमा के एक बेहद लोकप्रिय और खूंखार विलेन का किरदार निभाने वाले अभिनेता तेज सप्रू के साथ बेहद करीबी और सगा पारिवारिक संबंध है। गुजरे जमाने के इस मशहूर खलनायक और रेखा के बीच का यह रिश्ता बेहद गहरा और आत्मीय है, जिसके चलते असल जिंदगी में ये दोनों एक-दूसरे के बेहद खास रिश्तेदार माने जाते हैं। पर्दे पर एक-दूसरे के विपरीत भूमिकाओं में नजर आने वाले इन दोनों उम्दा कलाकारों के बीच जीजा और साली का एक मजबूत पारिवारिक पवित्र रिश्ता है, जिसकी जड़ें रेखा की माता के वैवाहिक जीवन के इतिहास से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इस पारिवारिक जुड़ाव की पेचीदगियों को समझने के लिए रेखा की माता पुष्पावली के जीवन चक्र को जानना बेहद आवश्यक है। अपने दौर की प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री पुष्पावली ने चालीस और पचास के दशक में कई फिल्मों में काम कर अपने बच्चों का भरण-पोषण किया था। वर्ष 1940 में आई. वी. रंगाचारी से विवाह के बाद वर्ष 1946 में उनका अलगाव हो गया, जिसके बाद उनकी नजदीकियां तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जेमिनी गणेशन के साथ बढ़ीं। इस गहरे रिश्ते के चलते रेखा और उनकी बहन राधा का जन्म हुआ, हालांकि जेमिनी गणेशन ने सार्वजनिक तौर पर कभी इस रिश्ते को पूर्ण स्वीकृति नहीं दी। जेमिनी गणेशन से अलग होने के पश्चात पुष्पावली ने अकेले ही अपनी बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई और इसी संघर्षपूर्ण दौर में उनकी जिंदगी में विख्यात सिनेमेटोग्राफर के. प्रकाश की एंट्री हुई। के. प्रकाश और पुष्पावली के विवाह के बाद उनके घर दो बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें एक बेटा सेशू और एक बेटी धनलक्ष्मी शामिल थीं। रेखा अपनी सभी बहनों और भाई के साथ एक ही छत के नीचे बड़ी हुईं और अपनी सौतेली बहन धनलक्ष्मी के साथ भी उनका बेहद गहरा और अटूट स्नेह रहा है। देशभर के सिनेमा प्रेमियों के लिए यह बेहद दिलचस्प तथ्य है कि रेखा की यही छोटी सौतेली बहन धनलक्ष्मी आगे चलकर मशहूर अभिनेता तेज सप्रू की जीवनसंगिनी बनीं। धनलक्ष्मी और तेज सप्रू के इस विवाह के बाद से ही तकनीकी और पारिवारिक रूप से तेज सप्रू रिश्ते में रेखा के सगे जीजा बन गए। रेखा और तेज सप्रू के इस बेहद करीबी पारिवारिक रिश्ते के बारे में फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों के बीच बहुत ही सीमित लोगों को जानकारी है। इन दोनों कलाकारों ने न केवल पारिवारिक स्तर पर बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी एक-दूसरे का साथ निभाया है और ‘जाल’ तथा ‘इंसाफ का तराजू’ जैसी करीब तीन सुपरहिट फिल्मों में सह-कलाकार के रूप में एक साथ स्क्रीन भी साझा की है। रेखा अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और आज भी अपनी बहनों के बेहद करीब मानी जाती हैं, जहां उनकी सगी बहन राधा विवाह के बाद अमेरिका में बस चुकी हैं, वहीं सौतेली बहन धनलक्ष्मी और जीजा तेज सप्रू के साथ उन्हें अक्सर पारिवारिक समारोहों में बेहद आत्मीयता के साथ वक्त बिताते हुए देखा जाता है।

तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ‘बिग बॉस तमिल’ से राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री जूली, जिन्हें मारिया जूलियाना के नाम से भी जाना जाता है, ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति जोसेफ विजय पर बेहद संगीन और गंभीर आरोप लगाए हैं। चेन्नई में आयोजित एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेत्री ने फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी के समर्थकों द्वारा किए गए अनवरत मानसिक उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण अपने होने वाले पहले बच्चे को खो दिया है। अभिनेत्री का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर इस कदर निशाना बनाया गया और उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनका गर्भपात यानी मिसकैरेज हो गया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति और सिनेमाई हलकों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। अभिनेत्री जूली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने राजनीतिक रूप से थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च महीने में उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चेन्नई पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कुल आठ लोगों को नामजद किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें इस मामले को आपराधिक श्रेणी में न रखकर दीवानी मानहानि के अंतर्गत दर्शाया गया था। जूली ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद इस मामले को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा आवाज उठाने के बाद उनके ऊपर पंद्रह लाख रुपए के एक फर्जी किडनी घोटाले में शामिल होने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए गए। अभिनेत्री का सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्यमंत्री की पार्टी के कुछ कट्टर समर्थक और एक कानूनी सलाहकार शामिल हैं, जिन्होंने उनके और उनके पति के खिलाफ बेहद भद्दी और अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर फैलाई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे यह सवाल पूछा कि वह इन गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से कैसे जोड़ सकती हैं, तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। जूली ने स्पष्ट किया कि वह इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल किसी भी तरह की जन-सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि वह उस कड़वे सच को सामने ला रही हैं जिससे कई महिलाएं गुजर रही हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच जाना काफी नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रति उनकी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। जूली ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया हो, लेकिन जब उनकी पार्टी के लोग एक महिला का नाम बिना किसी संकोच के खराब कर रहे थे, तब उन्होंने अपने समर्थकों को पीछे हटने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। मुख्यमंत्री की इस चुप्पी को ही उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति का सबसे बड़ा कारण माना है। इस बेहद संवेदनशील और विवादित बयान के बाद जहां थलपति विजय के प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के दावों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने तमिलनाडु की नई सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।

भोजपुरी सिनेमा के महामुकाबले में फिर गरमाया पुराना विवाद, मनोज तिवारी ने रवि किशन की पुरानी फीस को लेकर कसा तीखा तंज

नई दिल्ली। क्षेत्रीय सिनेमा के इतिहास में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले भोजपुरी फिल्म जगत के दो सबसे बड़े सूरमाओं के बीच की पुरानी अदावत एक बार फिर से खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ गई है। लंबे समय तक एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे मनोज तिवारी और रवि किशन के बीच की खाई राजनीतिक रूप से भले ही पट गई हो, लेकिन अतीत के व्यावसायिक मतभेद आज भी पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं। हाल ही में दिए गए एक बेबाक साक्षात्कार के दौरान मनोज तिवारी ने भोजपुरी सिनेमा के उत्थान और उसकी वैश्विक लोकप्रियता को लेकर कई ऐसे दावे किए हैं, जिससे दोनों कलाकारों के प्रशंसकों के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस बातचीत के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि इस फिल्म जगत को पुनर्जीवित करने और एक-दूसरे को मुख्यधारा में लाने का असल श्रेय किसे जाता है, तो मनोज तिवारी ने बिना किसी हिचकिचाहट के खुद को भोजपुरी के तीसरे दौर का मार्गदर्शक घोषित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके आने से पहले रवि किशन सहित कई अन्य कलाकार इस फिल्म जगत में सक्रिय तो थे, लेकिन वे कोई खास प्रभाव छोड़ने या इस सिनेमा को एक मुनाफे वाले उद्योग में बदलने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे थे। इस वैचारिक जंग में अपने पक्ष को मजबूती से रखने के लिए मनोज तिवारी ने अपनी ऐतिहासिक फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों का भी खुलकर हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उनकी बेहद चर्चित फिल्म ने मात्र तीस लाख रुपए के अत्यंत सीमित बजट में बनकर रिकॉर्ड तोड़ कमाई का इतिहास रचा था, जिसने न केवल पूरे देश का ध्यान इस क्षेत्रीय सिनेमा की तरफ आकर्षित किया बल्कि इसी एकलौती फिल्म की ऐतिहासिक सफलता के बाद से भोजपुरी में लगभग दो हजार नई फिल्मों के निर्माण का रास्ता साफ हुआ। अपनी बात को और अधिक आक्रामक मोड़ देते हुए उन्होंने समकालीन कलाकारों की उस दौर की आर्थिक स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि जब वे सफलता के शिखर पर थे और बतौर मुख्य अभिनेता फिल्मों के लिए प्रतिदिन के हिसाब से एक से डेढ़ लाख रुपए तक की भारी-भरकम फीस ले रहे थे, उस दौर में रवि किशन को पूरी फिल्म के काम के एवज में केवल पच्चीस हजार रुपए ही मिलते थे। उन्होंने कटाक्ष करते हुए यह भी कहा कि उन्होंने ही इन सभी कलाकारों को यह सिखाया कि किस प्रकार फिल्म उद्योग में अपनी कड़ी मेहनत के लिए सही और बड़ा पारिश्रमिक मांगा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके। हालांकि, वर्तमान परिदृश्य की बात करते हुए मनोज तिवारी ने यह भी साफ किया कि समय के साथ अब उनके आपसी संबंधों में काफी बदलाव आ चुका है। वर्तमान में दोनों ही दिग्गज कलाकार भारतीय जनता पार्टी के बैनर तले सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं और एक ही दल में होने के कारण अब उनके बीच पहले जैसी सीधे तौर पर कोई व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता नहीं बची है। वे दोनों अब अच्छे मित्र के रूप में एक-दूसरे के साथ खड़े दिखाई देते हैं और राजनीतिक रैलियों तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक मंच भी साझा करते हैं। परंतु, जब बात भोजपुरी सिनेमा को देश-दुनिया में असली पहचान दिलाने और उसकी रीढ़ बनने की आती है, तो दोनों के बीच की यह वैचारिक जंग और खुद को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी सालों पहले फिल्मों के बॉक्स ऑफिस क्लैश के दौरान हुआ करती थी। इस ताजा बयानबाजी ने यह साफ कर दिया है कि भले ही समय बदल गया हो और दोनों के रास्ते राजनीति में आकर मिल गए हों, लेकिन भोजपुरी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम सबसे ऊपर दर्ज कराने की यह लड़ाई इतनी जल्दी शांत होने वाली नहीं है।

ज्येष्ठ मास में आठ साल बाद बना महासंयोग, 'ब्लू मून' और 'माइक्रोमून' के दुर्लभ मिलन से खुला सौभाग्य का द्वार

नई दिल्ली । भारतीय सनातन परंपरा और खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से वर्ष का एक अत्यंत दुर्लभ और महत्वपूर्ण संयोग सामने आया है, जहां ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर कई अद्भुत ग्रह-नक्षत्रों की जुगलबंदी देखने को मिली है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार की ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पूरे आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आई है। यद्यपि हिंदू पंचांग में अधिकमास की आवृत्ति अमूमन हर तीन वर्ष में हो जाती है, परंतु इसका विशेष रूप से ज्येष्ठ के महीने में आना एक विरल घटना मानी जाती है, जो इससे पूर्व वर्ष 2018 में देखी गई थी। इस बार इस धार्मिक तिथि के साथ कुछ विशेष खगोलीय घटनाएं भी जुड़ गई हैं, जिन्होंने इसके महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है। मई के महीने में ही दो पूर्णिमा तिथियों के आने के कारण इस चांद को विज्ञान की भाषा में ‘ब्लू मून’ का नाम दिया गया है, जो एक अनूठी प्राकृतिक घटना है। इसके अतिरिक्त, इस समय चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर स्थित है, जिसके कारण आकार में यह सामान्य से थोड़ा छोटा दिखाई दे रहा है और वैज्ञानिक शब्दावली में इसे ‘माइक्रोमून’ की संज्ञा दी जा रही है। इस प्रकार धार्मिक आस्था और आधुनिक विज्ञान का यह अनूठा संगम जनमानस के लिए विशेष कौतूहल और कल्याणकारी प्रभाव लेकर आया है। पंचांगीय गणना के अनुसार यह विशेष तिथि शनिवार सुबह ग्यारह बजकर अट्ठावन मिनट से प्रारंभ होकर रविवार दोपहर दो बजकर चौदह मिनट तक प्रभावी रही, जिसके चलते उदयातिथि की महत्ता को देखते हुए रविवार को स्नान और दान की पूर्णिमा के रूप में पूर्ण विधि-विधान से मनाया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष कालखंड में पवित्र नदियों में स्नान करने और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की आराधना करने से मनुष्य के जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के आर्थिक संकटों का समूल नाश होता है और बंद किस्मत के दरवाजे पूरी तरह से खुल जाते हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में सुबह से ही पवित्र घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। इस पावन अवसर पर किए जाने वाले कुछ विशेष उपायों और दान-पुण्य को सीधे तौर पर व्यक्ति की आय में वृद्धि और भाग्य्योदय से जोड़कर देखा जा रहा है। इस महासंयोग के दौरान जरूरतमंदों, निर्धनों और ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देना अक्षय पुण्य फल प्रदाता माना गया है। चूंकि ज्येष्ठ का महीना भीषण गर्मी और तपन के लिए जाना जाता है, इसलिए इस समय ठंडी और शीतलता प्रदान करने वाली वस्तुओं का दान ग्रहों के दोष को शांत करने में सहायक होता है। इस दिन आम, खरबूज और तरबूज जैसे रसीले फलों का दान करने से कुंडली में सूर्य और मंगल ग्रह से जुड़े तमाम विकार दूर होते हैं और व्यक्ति के तेज में वृद्धि होती है। इसके अलावा, इस तपन भरे मौसम में जल का दान महादान की श्रेणी में रखा गया है, जिसके अंतर्गत राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, मिट्टी के घड़ों का वितरण करना, शीतल शरबत पिलाना और बेजुबान पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना सर्वोत्तम परोपकार माना गया है। मौसम की तीव्रता को देखते हुए समाज के वंचित वर्गों को जूते, चप्पल और छाते जैसी आवश्यक सामग्रियां भेंट करना भी आने वाले समय में समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करता है। ज्योतिषविदों का मानना है कि इस दुर्लभ संयोग में श्रद्धापूर्वक किया गया अन्न और वस्त्र का दान माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रसन्न करता है, जिससे न केवल आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है बल्कि व्यापार और नौकरी में भी उन्नति के नए अवसर प्राप्त होते हैं।

बढ़ते स्क्रीन टाइम के दौर में आंखों की सुरक्षा का आधार बना विटामिन-ए, विशेषज्ञों ने दी संतुलित आहार की सलाह

नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में तेजी से बढ़ते स्क्रीन टाइम और अनियमित खान-पान का असर अब लोगों की आंखों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मोबाइल फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप और टेलीविजन के सामने लंबे समय तक समय बिताने के कारण आंखों में थकान, सूखापन, जलन, धुंधला दिखाई देना और दृष्टि कमजोर होने जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आंखों की बेहतर देखभाल केवल बाहरी उपायों से नहीं बल्कि संतुलित और पौष्टिक आहार से भी संभव है। विशेष रूप से विटामिन-ए को आंखों की सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में शामिल किया जाता है, जो दृष्टि को स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार विटामिन-ए आंखों की रेटिना के सामान्य कार्य में मदद करता है और कम रोशनी या रात के समय देखने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में योगदान देता है। इसके अलावा यह आंखों को संक्रमण और अन्य कई समस्याओं से बचाने में भी सहायक माना जाता है। शरीर में विटामिन-ए की कमी होने पर दृष्टि संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं, इसलिए नियमित रूप से इस पोषक तत्व से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन आवश्यक माना जाता है। आहार विशेषज्ञों का कहना है कि गाजर विटामिन-ए का सबसे लोकप्रिय और प्रभावी स्रोत माना जाता है। इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन-ए में परिवर्तित होता है, जो आंखों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से गाजर का सेवन करने से आंखों को आवश्यक पोषण मिलता है और दृष्टि संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में सहायता मिल सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां भी आंखों की सेहत के लिए बेहद लाभकारी मानी जाती हैं। पालक, मेथी, सरसों और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन-ए के साथ कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो आंखों के साथ-साथ पूरे शरीर को पोषण प्रदान करते हैं। इनका नियमित सेवन आंखों को स्वस्थ रखने और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मददगार माना जाता है। मौसमी फलों में आम भी विटामिन-ए का अच्छा स्रोत है। गर्मियों के मौसम में इसका संतुलित सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ आंखों के लिए आवश्यक पोषण भी प्रदान करता है। इसके अलावा दूध और दूध से बने उत्पाद जैसे दही, पनीर और छाछ में भी विटामिन-ए पाया जाता है, जो आंखों की देखभाल में उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केवल पोषण पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आंखों को आराम देना भी जरूरी है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने के दौरान नियमित अंतराल पर आंखों को विश्राम देना चाहिए। 20-20-20 नियम अपनाना लाभदायक माना जाता है, जिसके तहत हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने की सलाह दी जाती है। यह आंखों पर पड़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को अपने दैनिक भोजन में विटामिन-ए युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए। सही पोषण, संतुलित जीवनशैली और आंखों की नियमित देखभाल के माध्यम से लंबे समय तक बेहतर दृष्टि और स्वस्थ आंखों को बनाए रखा जा सकता है। छोटी-छोटी सावधानियां भविष्य में बड़ी समस्याओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

40 के बाद हड्डियों की कमजोरी से बचना है तो डाइट में शामिल करें ये पोषण से भरपूर चीजें

नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ शरीर में कई प्रकार के प्राकृतिक बदलाव होने लगते हैं, जिनमें हड्डियों की मजबूती में कमी सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद शरीर की बोन डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे हड्डियां पहले की तुलना में अधिक कमजोर और संवेदनशील हो सकती हैं। महिलाओं में यह स्थिति मेनोपॉज के बाद और अधिक तेजी से विकसित हो सकती है। हालांकि संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है। हड्डियों की मजबूती बनाए रखने में कैल्शियम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यही कारण है कि दूध और दूध से बने उत्पादों को बोन हेल्थ के लिए सबसे उपयोगी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। दूध, दही, पनीर और छाछ जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को पर्याप्त कैल्शियम उपलब्ध कराते हैं, जो हड्डियों के निर्माण और उनकी मजबूती बनाए रखने में मदद करता है। नियमित रूप से इनका सेवन करने से उम्र बढ़ने के बावजूद हड्डियों की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है। हरी पत्तेदार सब्जियां भी बोन हेल्थ के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। पालक, मेथी, सरसों और बथुआ जैसी सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये सभी तत्व हड्डियों के विकास और उनकी संरचना को मजबूत बनाए रखने में योगदान देते हैं। दैनिक भोजन में हरी सब्जियों को शामिल करने से शरीर को प्राकृतिक रूप से आवश्यक पोषण प्राप्त होता है। ड्राई फ्रूट्स भी हड्डियों को मजबूती देने वाले महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थों में शामिल हैं। बादाम, अखरोट और अंजीर जैसे सूखे मेवों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व मौजूद होते हैं। सीमित मात्रा में इनका नियमित सेवन न केवल हड्डियों बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है। तिल के बीज भी कैल्शियम का समृद्ध स्रोत माने जाते हैं। कम मात्रा में सेवन करने पर भी तिल शरीर को पर्याप्त पोषण प्रदान कर सकता है। इसे सलाद, चटनी या अन्य व्यंजनों के माध्यम से आहार में शामिल किया जा सकता है। पारंपरिक भारतीय खानपान में तिल का उपयोग लंबे समय से हड्डियों की मजबूती से जोड़कर देखा जाता रहा है। विटामिन डी भी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए उतना ही आवश्यक है जितना कैल्शियम। फैटी फिश में विटामिन डी और ओमेगा-3 फैटी एसिड अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो कैल्शियम के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं। जो लोग मछली का सेवन नहीं करते, वे विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों और नियमित धूप के माध्यम से इसकी आवश्यकता पूरी कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खानपान ही नहीं, बल्कि रोजाना हल्की एक्सरसाइज, नियमित वॉक, पर्याप्त पानी का सेवन और संतुलित प्रोटीन युक्त आहार भी हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वहीं धूम्रपान, अत्यधिक शराब, अधिक नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड्स के सेवन से बचना भी जरूरी है। सही आदतों और संतुलित पोषण के माध्यम से बढ़ती उम्र में भी हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखा जा सकता है।

सोमवार का भविष्यफल: धनु राशि वालों को खर्च में बरतनी होगी सावधानी, कई राशियों के लिए बन रहे सफलता के योग

नई दिल्ली ।  जून महीने की शुरुआत कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव और नए अवसरों के संकेत लेकर आ रही है। ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार 1 जून 2026 का दिन आर्थिक मामलों, करियर, पारिवारिक संबंधों और स्वास्थ्य के लिहाज से विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ राशियों को लंबे समय से रुके कार्यों में सफलता मिल सकती है, जबकि कुछ लोगों को निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। दिनभर की गतिविधियों पर ग्रहों का प्रभाव दिखाई देगा और कई लोगों के लिए यह समय आत्ममंथन और भविष्य की योजनाओं को मजबूत करने का अवसर बन सकता है। मेष राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना बन सकती है। वृषभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना होगा। निवेश संबंधी निर्णय सोच-समझकर लेने की सलाह दी जा रही है। मिथुन राशि के लोगों के लिए सामाजिक और व्यावसायिक संबंध मजबूत हो सकते हैं। नई मुलाकातें भविष्य में लाभदायक साबित हो सकती हैं। कर्क राशि के जातकों को पारिवारिक मामलों में संयम और समझदारी से काम लेने की जरूरत होगी। सिंह राशि वालों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रह सकता है। करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में सफलता मिलने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। कन्या राशि के लोगों को कार्यों में अपेक्षित परिणाम पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि दिन के अंत तक परिस्थितियां अनुकूल होने लगेंगी। तुला राशि के जातकों के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन संतोषजनक रह सकता है। लंबे समय से चल रही किसी चिंता का समाधान मिलने की संभावना है। वृश्चिक राशि वालों को अपने व्यवहार और वाणी पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि छोटी बात विवाद का कारण बन सकती है। वहीं धनु राशि के जातकों के लिए खर्चों में वृद्धि के संकेत दिखाई दे रहे हैं। अनावश्यक खर्चों से बचना और बजट के अनुसार चलना अधिक लाभदायक रहेगा। आर्थिक निर्णयों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। मकर राशि के लोगों को करियर और व्यवसाय में नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने से महत्वपूर्ण कार्य पूरे होने की संभावना है। कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत होगी। काम का दबाव मानसिक थकान बढ़ा सकता है, इसलिए आराम और संतुलित दिनचर्या पर ध्यान देना आवश्यक रहेगा। मीन राशि वालों के लिए दिन रचनात्मक गतिविधियों और नए विचारों के लिहाज से अनुकूल माना जा रहा है। परिवार और मित्रों का सहयोग मनोबल बढ़ाएगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार जून महीने का पहला दिन कई लोगों के लिए नई योजनाओं की शुरुआत का संकेत दे सकता है। हालांकि ग्रहों की स्थिति यह भी बताती है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले परिस्थितियों का सही आकलन करना आवश्यक होगा। आर्थिक मामलों में सतर्कता, रिश्तों में संतुलन और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बनाए रखने से दिन अधिक सकारात्मक और लाभकारी बन सकता है। आने वाले दिनों में ग्रहों की बदलती चाल कई राशियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

ऐप्पल को मिलेगी कड़ी टक्कर, मेटा अगले साल शुरू करेगी AI Pendant की टेस्टिंग, वियरेबल टेक्नोलॉजी में बढ़ेगा मुकाबला

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वियरेबल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। स्मार्टफोन और स्मार्टवॉच के बाद अब कंपनियां ऐसे उपकरण विकसित करने में जुटी हैं जो उपयोगकर्ताओं के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन सकें। इसी दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मेटा नए AI Pendant पर काम कर रही है, जिसकी टेस्टिंग अगले वर्ष शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। यह डिवाइस कंपनी की वियरेबल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है और इसे भविष्य की एआई-केंद्रित तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में मेटा ने वियरेबल टेक्नोलॉजी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए हैं। स्मार्ट ग्लासेस के क्षेत्र में कंपनी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है और अब वह ऐसे उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जो उपयोगकर्ताओं को बिना स्क्रीन के भी एआई सुविधाओं का लाभ प्रदान कर सकें। AI Pendant इसी सोच का हिस्सा माना जा रहा है। यह डिवाइस उपयोगकर्ता के साथ लगातार संवाद करने, जानकारी को समझने और उसे व्यवस्थित करने जैसी क्षमताओं से लैस हो सकता है। तकनीकी जानकारों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित व्यक्तिगत डिवाइस स्मार्टफोन पर निर्भरता को कुछ हद तक कम कर सकते हैं। AI Pendant को भी इसी श्रेणी के उत्पाद के रूप में देखा जा रहा है, जो उपयोगकर्ता की बातचीत, दैनिक गतिविधियों और आवश्यक जानकारियों को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद कर सकता है। इसके जरिए उपयोगकर्ता को रियल-टाइम सहायता, नोट्स प्रबंधन, वॉयस इंटरैक्शन और अन्य एआई सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मेटा की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब कंपनी अपने एआई इकोसिस्टम को तेजी से विस्तार देने में जुटी हुई है। हाल के महीनों में उसने एआई सेवाओं के लिए नए सब्सक्रिप्शन मॉडल भी पेश किए हैं, जिनका उद्देश्य उन्नत एआई सुविधाओं का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों स्तरों पर निवेश करके मेटा भविष्य के डिजिटल इकोसिस्टम में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। दूसरी ओर, तकनीकी उद्योग में यह चर्चा भी तेज है कि ऐप्पल भी इसी प्रकार के एआई आधारित वियरेबल डिवाइस पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि यह डिवाइस हार या क्लिप के रूप में उपयोग किया जा सकेगा और इसमें कैमरा, माइक्रोफोन तथा स्पीकर जैसी सुविधाएं दी जा सकती हैं। इसका उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को विकल्प उपलब्ध कराना होगा जो स्मार्ट ग्लासेस या अन्य पारंपरिक वियरेबल डिवाइस का उपयोग नहीं करना चाहते। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों कंपनियां अपने एआई पेंडेंट बाजार में उतारती हैं तो वियरेबल टेक्नोलॉजी का नया दौर शुरू हो सकता है। यह केवल एक गैजेट नहीं बल्कि एआई को रोजमर्रा के जीवन में और अधिक सहज तरीके से शामिल करने का प्रयास होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उपयोगकर्ता इस नई तकनीक को किस तरह अपनाते हैं और क्या AI Pendant वास्तव में डिजिटल जीवनशैली का अगला बड़ा उपकरण बन पाता है।