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2 जून का राशिफल: राजयोग से बदलेगा भाग्य, कई राशियों को बड़ा फायदा

नई दिल्ली । 2 जून 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दिन ग्रहों की विशेष स्थिति कई शुभ योगों का निर्माण कर रही है। मंगलवार के दिन चंद्रमा का गोचर धनु राशि में होगा, जबकि इसी दिन धनु राशि के स्वामी गुरु का प्रवेश कर्क राशि में होगा। इस विशेष ग्रह स्थिति के कारण हंस नामक पंचमहापुरुष राजयोग का निर्माण हो रहा है, जो कई राशियों के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही मंगल ग्रह का अपनी स्वराशि मेष में स्थित होना भी एक शक्तिशाली राजयोग का संकेत दे रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह संयोजन विशेष रूप से मेष, मिथुन, कर्क सहित कई राशियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आएगा। इस दिन बनने वाले योग न केवल करियर बल्कि आर्थिक और पारिवारिक जीवन में भी शुभ परिणाम देने वाले माने जा रहे हैं। मेष राशि के जातकों के लिए यह दिन अत्यंत लाभकारी रहेगा। प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी और परिवार का सहयोग मिलेगा। साहसिक निर्णयों से लाभ के संकेत हैं तथा दिन के दूसरे भाग में अप्रत्याशित आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। वृषभ राशि वालों के लिए कार्यक्षेत्र में स्थिरता और सरकारी कार्यों में सफलता का योग बन रहा है। आय में वृद्धि के साथ व्यापार में अच्छी डील मिलने की संभावना है, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मिथुन राशि के जातकों के लिए करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर रहेगा। विरोधियों का व्यवहार सकारात्मक रहेगा और पुराने लेनदेन निपटाने में सफलता मिलेगी। आय में वृद्धि के योग भी बन रहे हैं। कर्क राशि के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ है क्योंकि गुरु का गोचर इस राशि में हो रहा है। नौकरी में सम्मान और प्रभाव बढ़ेगा तथा लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने के संकेत हैं। पारिवारिक जीवन में भी सुख और सामंजस्य रहेगा। सिंह राशि के लिए दिन मिश्रित फल देने वाला रहेगा। खर्चों में वृद्धि हो सकती है लेकिन यह शुभ कार्यों में होगा। यात्रा और बदलाव के योग भी बन रहे हैं, जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे। अन्य राशियों जैसे कन्या, तुला और वृश्चिक के लिए भी यह दिन आर्थिक और व्यावसायिक दृष्टि से अनुकूल रहेगा। कन्या राशि को कार्ययोजना के लिए सराहना मिलेगी, जबकि तुला राशि को अप्रत्याशित लाभ और खुशखबरी मिल सकती है। वृश्चिक राशि के जातकों को कई स्रोतों से लाभ प्राप्त होगा। धनु, मकर, कुंभ और मीन राशियों के लिए भी ग्रहों की स्थिति मिश्रित लेकिन सकारात्मक परिणाम देने वाली रहेगी। कुछ राशियों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन समग्र रूप से भाग्य का साथ बना रहेगा। कुल मिलाकर 2 जून का दिन ग्रहों के शक्तिशाली योगों के कारण कई राशियों के लिए प्रगति, लाभ और सफलता का संकेत दे रहा है। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा जो नए कार्य की शुरुआत या बड़े निर्णय लेने की योजना बना रहे हैं।

CM MOHAN YADAV STATEMENT: किसानों को मुफ्त हेलमेट बाटेंगे CM, उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का एलान

CM MOHAN YADAV

CM MOHAN YADAV STATEMENT: मध्यप्रदेश। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शाजापुर जिले के शुजालपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का 134वां संस्करण सुनने के बाद किसानों और जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने किसानों की सुरक्षा और आय बढ़ाने को लेकर कई जरुरी घोषणाएं भी कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार काम कर रही है और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए नई योजनाएं लागू की जा रही हैं। 1 जून से बदलेंगे कई नियम, यूपीआई-ATM और टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव शहर आने वाले किसानों को मिलेंगे हेलमेट मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि गांवों से शहरों में दूध, फल, सब्जियां और अन्य कृषि उत्पाद बेचने आने वाले किसानों को मुफ्त हेलमेट उपलब्ध कराए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में किसान मोटरसाइकिल के माध्यम से अपने उत्पाद बाजार तक पहुंचाते हैं, लेकिन हेलमेट का उपयोग नहीं करने से दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, इसके चलते किसानों की सुरक्षा के लिए ये कदम उठाया गया है। उड़द पर मिले 600 रूपए बोनस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए उड़द की फसल पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इसके लिए किसानों का पंजीयन शुरू हो चुका है और जल्द ही खरीदी प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी जाएगी। भारत-ओमान ट्रेड डील से किसानों और व्यापारियों को बड़ा फायदा, गोयल का बयान गेहूं खरीदी में बना नया रिकॉर्ड मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष प्रदेश सरकार ने 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से एक करोड़ मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदा है। लगभग 14 लाख किसानों से हुई यह खरीदी देश में सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादों को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है। दाल और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने पर फोकस मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में दाल उत्पादन पर ज़्यादा फोकस किया जा रहा है, मध्यप्रदेश दाल उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार दाल प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन और पशुपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है।

नेचुरल पेय से पाएं ठंडक और पोषण, गर्मी में अपनाएं हेल्दी विकल्प

नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में इस समय गर्मी अपने चरम पर है और बढ़ते तापमान ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में सेहत को बनाए रखने के लिए खानपान में बदलाव बेहद जरूरी हो जाता है। इसी कड़ी में पारंपरिक और प्राकृतिक पेयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, जो न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं बल्कि जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं। गर्मी के इस मौसम में बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स की बजाय अगर देसी और घरेलू पेयों को दिनचर्या में शामिल किया जाए तो यह शरीर के लिए अधिक लाभकारी साबित होते हैं। ये पेय बिना किसी केमिकल या प्रिजर्वेटिव के तैयार होते हैं और सीधे घर की रसोई से जुड़े होते हैं। यही वजह है कि इनका सेवन स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लगातार करने की सलाह देते हैं। आम पन्ना गर्मियों का सबसे लोकप्रिय पेय माना जाता है, जो कच्चे आम से तैयार होता है। इसमें विटामिन सी, आयरन और इलेक्ट्रोलाइट्स की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ थकान को दूर करता है और पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है। इसी तरह लस्सी, जो पंजाब और हरियाणा की पहचान मानी जाती है, दही से बनी एक पौष्टिक ड्रिंक है। यह प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ पेट को भी स्वस्थ रखती है। छाछ भी एक हल्का और पाचन के लिए बेहद लाभकारी पेय है, जो राजस्थान, गुजरात और अन्य राज्यों में भोजन के साथ नियमित रूप से लिया जाता है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय सत्तू शरबत भी गर्मी में शरीर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है, जो लंबे समय तक पेट को भरा रखता है और थकान को दूर करता है। वहीं पश्चिम भारत का प्रसिद्ध कोकम शरबत विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, जो पाचन सुधारने और शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। महाराष्ट्र और कोंकण क्षेत्र की पारंपरिक सोल कढ़ी, जो कोकम और नारियल दूध से तैयार होती है, स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने के साथ शरीर को ठंडक प्रदान करती है। दक्षिण भारत के पानकम, नीर मोर और सम्बारम जैसे पेय भी गर्मी में बेहद लोकप्रिय हैं। ये गुड़, दही, मसाले और जड़ी-बूटियों से तैयार होते हैं, जो शरीर को न केवल हाइड्रेट रखते हैं बल्कि ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। ओडिशा का बेल पना भी गर्मियों में राहत देने वाला एक पारंपरिक पेय है, जो पेट की समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है। इन सभी पेयों की खासियत यह है कि ये प्राकृतिक हैं और शरीर को अंदर से स्वस्थ रखते हैं। बदलते मौसम में अगर इन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए तो गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

गर्मी में त्वचा रोगों का खतरा बढ़ा, घमौरियों से लेकर संक्रमण तक-लापरवाही पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस का असर लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव लोगों के स्वास्थ्य पर दिखने लगा है। तेज धूप, पसीना और नमी के कारण त्वचा संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में छोटी दिखने वाली त्वचा समस्याएं भी समय रहते ध्यान न देने पर गंभीर रूप ले सकती हैं। नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) के अनुसार, गर्मी और अधिक पसीने के कारण त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे जलन, सूजन और दाने जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इस स्थिति को आमतौर पर घमौरियां या प्रिकली हीट कहा जाता है। घमौरियों के प्रमुख लक्षणत्वचा पर छोटे लाल दाने या फुंसियांतेज खुजली और चुभन जैसा एहसासगर्दन, छाती, कमर और कांख जैसे हिस्सों में अधिक परेशानीकभी-कभी हल्का बुखार या जलनयह समस्या बच्चों, अधिक पसीना आने वाले लोगों और मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में ज्यादा देखने को मिलती है। बचाव के आसान उपायविशेषज्ञों के अनुसार, सही सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है:ठंडी और हवादार जगह पर रहेंत्वचा को साफ और सूखा रखेंनहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह पोंछेंबिना सुगंध वाले हल्के टैल्कम पाउडर का उपयोग करेंढीले और सूती कपड़े पहनेंतेज धूप से बचें और बाहर निकलते समय छाता या स्कार्फ का उपयोग करें सावधानी सबसे जरूरडॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में पानी पर्याप्त मात्रा में पीना बेहद जरूरी है और तैलीय या भारी भोजन से बचना चाहिए। बच्चों की त्वचा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। यदि दाने बढ़ जाएं, बुखार हो या संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर देखभाल से इन समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है।

म्यूजिक लवर्स के लिए बेस्ट डील? Realme Buds Air 8 Pro पर एक नजर

नई दिल्ली। भारत का ट्रू वायरलेस स्टीरियो (TWS) ईयरबड्स बाजार लगातार तेजी से विकसित हो रहा है, जहां अब यूजर्स केवल बेहतर साउंड क्वालिटी ही नहीं बल्कि प्रीमियम फीचर्स की भी उम्मीद करते हैं। इसी प्रतिस्पर्धी सेगमेंट में टेक ब्रांड Realme ने अपना नया प्रोडक्ट ‘Realme Buds Air8 Pro’ पेश किया है, जिसे खास तौर पर हाई-एंड फीचर्स के साथ बजट सेगमेंट में लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 6,699 रुपये की कीमत वाले इस नए TWS को कंपनी ने “हाई-रेज ऑडियो बीस्ट” के तौर पर पेश किया है। यह डिवाइस म्यूजिक लवर्स, गेमर्स और लगातार यात्रा करने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार, बड्स एयर8 प्रो की सबसे बड़ी खासियत इसका 6-माइक सिस्टम और डेडिकेटेड VPU (Voice Processing Unit) है, जो कॉलिंग अनुभव को काफी बेहतर बनाता है। इसमें बोन कंडक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यूजर की आवाज ज्यादा साफ तरीके से कैप्चर होती है और आसपास के शोर को कम किया जाता है। यह ईयरबड्स करीब 90 डेसिबल तक का नॉइज रिडक्शन करने में सक्षम हैं, जिससे भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी कॉलिंग अनुभव स्पष्ट बना रहता है। इसके अलावा इसमें AI-बेस्ड नॉइज रिडक्शन और एडैप्टिव ऑडियो ऑप्टिमाइजेशन जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। साउंड क्वालिटी की बात करें तो इसमें 11mm बेस ड्राइवर और 6mm माइक्रो-प्लानर ट्वीटर के साथ ड्यूल ड्राइवर सिस्टम दिया गया है, जो हाई-रेज ऑडियो सपोर्ट के साथ बेहतर बेस और क्लैरिटी प्रदान करता है। यह डिवाइस LHDC 5.0 ऑडियो को सपोर्ट करता है और 20Hz से 40kHz तक की फ्रीक्वेंसी रेंज देता है। नॉइज कैंसिलेशन के मामले में इसमें 55dB तक का एडैप्टिव एक्टिव नॉइज कैंसिलेशन (ANC) दिया गया है, जो वातावरण के अनुसार अपने आप एडजस्ट हो जाता है। साथ ही ट्रांसपेरेंसी मोड भी मौजूद है, जिससे यूजर बिना ईयरबड निकाले आसपास की आवाजें सुन सकता है। बैटरी लाइफ भी इसकी बड़ी ताकत मानी जा रही है। केस के साथ यह कुल 50 घंटे तक का प्लेबैक टाइम देता है, जबकि सिर्फ 10 मिनट की चार्जिंग में करीब 11 घंटे तक का बैकअप मिल सकता है। इसके साथ IP55 रेटिंग, टच कंट्रोल और वेयर डिटेक्शन जैसे फीचर्स भी शामिल हैं। गेमिंग यूजर्स के लिए इसमें 45 मिलीसेकंड अल्ट्रा-लो लेटेंसी मोड दिया गया है, जो ऑडियो और वीडियो को सिंक में रखता है। साथ ही ब्लूटूथ 6.1 कनेक्टिविटी इसे और ज्यादा स्टेबल बनाती है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस प्रीमियम सेगमेंट जैसी सुविधाएं किफायती कीमत में उपलब्ध कराता है। यह 3 जून 2026 से बिक्री के लिए उपलब्ध होगा और इसे ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म्स से खरीदा जा सकेगा।

णवीर सिंह की 'धुरंधर' को मिला सरहद पार से समर्थन, पूर्व मेयर आरिफ अजाकिया बोले— मैं खुद गवाह हूं, सब कुछ सच दिखाया गया

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत की ब्लॉकबस्टर एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल को लेकर चल रहा वैचारिक विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की इस बेहद चर्चित फिल्म को लेकर जहां भारत के भीतर ही कुछ बुद्धिजीवियों, समीक्षकों और सोशल मीडिया विश्लेषकों द्वारा इसे एक ‘प्रोपेगैंडा फिल्म’ करार दिया जा रहा था, वहीं अब इस पूरे मामले में सरहद पार से आए एक बड़े बयान ने आलोचकों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। पाकिस्तान के कराची शहर के पूर्व मेयर और वरिष्ठ पत्रकार आरिफ अजाकिया ने फिल्म के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रकारिता कार्यक्रम ‘टॉक जर्नलिज्म’ के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया कि फिल्म में दिखाई गई पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की जमीनी हकीकत और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की जो कहानी पर्दे पर उतारी गई है, वह पूरी तरह से सच पर आधारित है। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद से ही फिल्म की आलोचना करने वाले धड़ों के बीच सन्नाटा पसर गया है। आरिफ अजाकिया ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर की घटनाओं और मिशन को फिल्म ‘धुरंधर’ में फिल्माया गया है, उस समय वह स्वयं कराची के उस विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण कराची के उसी विवादित ल्यारी इलाके में हुआ है, जहां बलूच गैंग और विभिन्न आतंकी संगठनों का एक समय पर भारी वर्चस्व हुआ करता था। पूर्व मेयर के अनुसार, वह उस दौर के सुरक्षा हालातों और पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, इसलिए वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह स्वीकार करते हैं कि फिल्म के भीतर जो कुछ भी दिखाया गया है, उसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मंच से अपनी जड़ों के बारे में बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि भले ही उनका जन्म कराची में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता अविभाजित भारत के जूनागढ़, गुजरात से ताल्लुक रखते थे, इसलिए वह स्वयं को पाकिस्तानी मानने की बजाय भारतीय मूल का नागरिक कहलाना अधिक पसंद करते हैं। मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचाने वाली इस फिल्म की कहानी की बात करें तो ‘धुरंधर’ और इसका हालिया सीक्वल दर्शकों को एक बेहद संजीदा और खतरनाक खुफिया मिशन पर ले जाता है। फिल्म की पटकथा में दिखाया गया है कि किस प्रकार भारतीय खुफिया एजेंसी का एक जांबाज अधिकारी जसकीरत, विषम परिस्थितियों के बीच अपना नाम और पहचान बदलकर हमजा बन जाता है और पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील इलाके ल्यारी के एक खतरनाक बलूच गैंग में सफलतापूर्वक घुसपैठ करता है। वहां रहते हुए वह न केवल स्थानीय अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करता है बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के मंसूबों को भी नेस्तनाबूद कर देता है। रणवीर सिंह के दमदार अभिनय से सजी इस फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे स्थापित कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। जहाँ एक तरफ इस फिल्म की आलोचना करने वाले इसे केवल एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानी बता रहे थे, वहीं अब खुद कराची की कमान संभाल चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इसे सच का आईना बताए जाने के बाद इस फिल्म की प्रामाणिकता पर उठ रहे तमाम सवालों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।

रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ पर फिर गरमाया मामला: कराची के पूर्व मेयर के दावे ने आलोचकों को दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा जगत की ब्लॉकबस्टर एक्शन-थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर’ और उसके सीक्वल को लेकर चल रहा वैचारिक विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अभिनेता रणवीर सिंह और निर्देशक आदित्य धर की इस बेहद चर्चित फिल्म को लेकर जहां भारत के भीतर ही कुछ बुद्धिजीवियों, समीक्षकों और सोशल मीडिया विश्लेषकों द्वारा इसे एक ‘प्रोपेगैंडा फिल्म’ करार दिया जा रहा था, वहीं अब इस पूरे मामले में सरहद पार से आए एक बड़े बयान ने आलोचकों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। पाकिस्तान के कराची शहर के पूर्व मेयर और वरिष्ठ पत्रकार आरिफ अजाकिया ने फिल्म के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने एक प्रतिष्ठित वैश्विक पत्रकारिता कार्यक्रम ‘टॉक जर्नलिज्म’ के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया कि फिल्म में दिखाई गई पाकिस्तान के ल्यारी इलाके की जमीनी हकीकत और आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की जो कहानी पर्दे पर उतारी गई है, वह पूरी तरह से सच पर आधारित है। इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद से ही फिल्म की आलोचना करने वाले धड़ों के बीच सन्नाटा पसर गया है। आरिफ अजाकिया ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों और अपनी पुरानी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि जिस दौर की घटनाओं और मिशन को फिल्म ‘धुरंधर’ में फिल्माया गया है, उस समय वह स्वयं कराची के उस विशेष प्रशासनिक क्षेत्र के मेयर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उनका जन्म और पालन-पोषण कराची के उसी विवादित ल्यारी इलाके में हुआ है, जहां बलूच गैंग और विभिन्न आतंकी संगठनों का एक समय पर भारी वर्चस्व हुआ करता था। पूर्व मेयर के अनुसार, वह उस दौर के सुरक्षा हालातों और पर्दे के पीछे चलने वाली गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी रहे हैं, इसलिए वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह स्वीकार करते हैं कि फिल्म के भीतर जो कुछ भी दिखाया गया है, उसमें रत्ती भर भी झूठ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने मंच से अपनी जड़ों के बारे में बात करते हुए यह भी स्वीकार किया कि भले ही उनका जन्म कराची में हुआ हो, लेकिन उनके माता-पिता अविभाजित भारत के जूनागढ़, गुजरात से ताल्लुक रखते थे, इसलिए वह स्वयं को पाकिस्तानी मानने की बजाय भारतीय मूल का नागरिक कहलाना अधिक पसंद करते हैं। मध्य प्रदेश सहित देशभर के सिनेमाघरों में धूम मचाने वाली इस फिल्म की कहानी की बात करें तो ‘धुरंधर’ और इसका हालिया सीक्वल दर्शकों को एक बेहद संजीदा और खतरनाक खुफिया मिशन पर ले जाता है। फिल्म की पटकथा में दिखाया गया है कि किस प्रकार भारतीय खुफिया एजेंसी का एक जांबाज अधिकारी जसकीरत, विषम परिस्थितियों के बीच अपना नाम और पहचान बदलकर हमजा बन जाता है और पाकिस्तान के सबसे संवेदनशील इलाके ल्यारी के एक खतरनाक बलूच गैंग में सफलतापूर्वक घुसपैठ करता है। वहां रहते हुए वह न केवल स्थानीय अपराधियों के तंत्र को ध्वस्त करता है बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन के मंसूबों को भी नेस्तनाबूद कर देता है। रणवीर सिंह के दमदार अभिनय से सजी इस फिल्म में सारा अर्जुन, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन जैसे स्थापित कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। जहाँ एक तरफ इस फिल्म की आलोचना करने वाले इसे केवल एक काल्पनिक और अतिशयोक्तिपूर्ण कहानी बता रहे थे, वहीं अब खुद कराची की कमान संभाल चुके एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी द्वारा इसे सच का आईना बताए जाने के बाद इस फिल्म की प्रामाणिकता पर उठ रहे तमाम सवालों पर पूरी तरह से विराम लग गया है।

बार-बार पड़ते हैं बीमार? समझिए विटामिन-सी और विटामिन-डी में कौन है इम्युनिटी का असली हीरो

नई दिल्ली। मौसम बदलते ही सर्दी-जुकाम होना, बार-बार संक्रमण की चपेट में आना, जल्दी थक जाना और शरीर में कमजोरी महसूस होना अक्सर कमजोर इम्युनिटी के संकेत माने जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है। खासकर कोरोना महामारी के बाद विटामिन-सी और विटामिन-डी को लेकर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई। हालांकि आज भी बहुत से लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि इम्युनिटी मजबूत करने के लिए आखिर सबसे ज्यादा जरूरी कौन है-विटामिन-सी या विटामिन-डी? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा जवाब यह है कि दोनों ही विटामिन शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और दोनों की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। इसलिए किसी एक को दूसरे से ज्यादा महत्वपूर्ण मानना सही नहीं होगा। मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए दोनों का संतुलित स्तर बनाए रखना आवश्यक है। विटामिन-सी को लंबे समय से प्राकृतिक इम्युनिटी बूस्टर माना जाता रहा है। यह शरीर में श्वेत रक्त कोशिकाओं यानी व्हाइट ब्लड सेल्स की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। ये कोशिकाएं शरीर को वायरस, बैक्टीरिया और अन्य संक्रमणों से बचाने का काम करती हैं। इसके अलावा विटामिन-सी एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी है जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी का सेवन करने से सर्दी-जुकाम की अवधि और उसकी गंभीरता कुछ हद तक कम हो सकती है। दूसरी ओर विटामिन-डी को भी इम्यून सिस्टम का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। यह शरीर की टी-सेल्स और अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को सक्रिय करने में मदद करता है जो संक्रमण पैदा करने वाले वायरस और बैक्टीरिया के खिलाफ रक्षा कवच का काम करती हैं। विटामिन-डी शरीर में सूजन को नियंत्रित रखने में भी सहायक होता है जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली संतुलित रूप से कार्य करती है। शोध बताते हैं कि जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें श्वसन संबंधी संक्रमण, फ्लू और अन्य बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सप्लीमेंट्स के भरोसे इम्युनिटी मजबूत नहीं की जा सकती। इसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, तनाव पर नियंत्रण और स्वस्थ जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है। यदि शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व सही मात्रा में मिलते रहें तो इम्यून सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। विटामिन-सी की पूर्ति के लिए आंवला, संतरा, नींबू, अमरूद, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे खाद्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। वहीं विटामिन-डी के लिए सुबह की धूप सबसे अच्छा स्रोत मानी जाती है। इसके अलावा अंडे की जर्दी, फैटी फिश, मशरूम और फोर्टिफाइड डेयरी उत्पादों का सेवन भी लाभदायक होता है। कुल मिलाकर इम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिए विटामिन-सी और विटामिन-डी दोनों ही जरूरी हैं। एक संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है तो दूसरा इम्यून सिस्टम को सक्रिय और संतुलित बनाए रखता है। इसलिए बेहतर स्वास्थ्य के लिए दोनों पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा सुनिश्चित करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

पर्दे पर रहे विरोधी, असल जिंदगी में निकले बेहद करीबी रिश्तेदार: जानिए रेखा और अभिनेता तेज सप्रू का अनोखा फैमिली कनेक्शन

नई दिल्ली। बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री की सबसे रहस्यमयी और सदाबहार अभिनेत्रियां में शुमार रेखा के पेशेवर जीवन और उनकी व्यक्तिगत प्रेम कहानी से तो दुनिया भली-भांति वाकिफ है, परंतु उनके पारिवारिक ताने-बाने को लेकर आज भी कई ऐसे अनसुने पहलू हैं जिनसे आम जनमानस पूरी तरह अनजान है। साठ के दशक से सिल्वर स्क्रीन पर राज करने वाली रेखा का हिंदी सिनेमा के एक बेहद लोकप्रिय और खूंखार विलेन का किरदार निभाने वाले अभिनेता तेज सप्रू के साथ बेहद करीबी और सगा पारिवारिक संबंध है। गुजरे जमाने के इस मशहूर खलनायक और रेखा के बीच का यह रिश्ता बेहद गहरा और आत्मीय है, जिसके चलते असल जिंदगी में ये दोनों एक-दूसरे के बेहद खास रिश्तेदार माने जाते हैं। पर्दे पर एक-दूसरे के विपरीत भूमिकाओं में नजर आने वाले इन दोनों उम्दा कलाकारों के बीच जीजा और साली का एक मजबूत पारिवारिक पवित्र रिश्ता है, जिसकी जड़ें रेखा की माता के वैवाहिक जीवन के इतिहास से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं। इस पारिवारिक जुड़ाव की पेचीदगियों को समझने के लिए रेखा की माता पुष्पावली के जीवन चक्र को जानना बेहद आवश्यक है। अपने दौर की प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय अभिनेत्री पुष्पावली ने चालीस और पचास के दशक में कई फिल्मों में काम कर अपने बच्चों का भरण-पोषण किया था। वर्ष 1940 में आई. वी. रंगाचारी से विवाह के बाद वर्ष 1946 में उनका अलगाव हो गया, जिसके बाद उनकी नजदीकियां तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जेमिनी गणेशन के साथ बढ़ीं। इस गहरे रिश्ते के चलते रेखा और उनकी बहन राधा का जन्म हुआ, हालांकि जेमिनी गणेशन ने सार्वजनिक तौर पर कभी इस रिश्ते को पूर्ण स्वीकृति नहीं दी। जेमिनी गणेशन से अलग होने के पश्चात पुष्पावली ने अकेले ही अपनी बेटियों की परवरिश की जिम्मेदारी उठाई और इसी संघर्षपूर्ण दौर में उनकी जिंदगी में विख्यात सिनेमेटोग्राफर के. प्रकाश की एंट्री हुई। के. प्रकाश और पुष्पावली के विवाह के बाद उनके घर दो बच्चों का जन्म हुआ, जिनमें एक बेटा सेशू और एक बेटी धनलक्ष्मी शामिल थीं। रेखा अपनी सभी बहनों और भाई के साथ एक ही छत के नीचे बड़ी हुईं और अपनी सौतेली बहन धनलक्ष्मी के साथ भी उनका बेहद गहरा और अटूट स्नेह रहा है। देशभर के सिनेमा प्रेमियों के लिए यह बेहद दिलचस्प तथ्य है कि रेखा की यही छोटी सौतेली बहन धनलक्ष्मी आगे चलकर मशहूर अभिनेता तेज सप्रू की जीवनसंगिनी बनीं। धनलक्ष्मी और तेज सप्रू के इस विवाह के बाद से ही तकनीकी और पारिवारिक रूप से तेज सप्रू रिश्ते में रेखा के सगे जीजा बन गए। रेखा और तेज सप्रू के इस बेहद करीबी पारिवारिक रिश्ते के बारे में फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों के बीच बहुत ही सीमित लोगों को जानकारी है। इन दोनों कलाकारों ने न केवल पारिवारिक स्तर पर बल्कि पेशेवर मोर्चे पर भी एक-दूसरे का साथ निभाया है और ‘जाल’ तथा ‘इंसाफ का तराजू’ जैसी करीब तीन सुपरहिट फिल्मों में सह-कलाकार के रूप में एक साथ स्क्रीन भी साझा की है। रेखा अपने सभी भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं और आज भी अपनी बहनों के बेहद करीब मानी जाती हैं, जहां उनकी सगी बहन राधा विवाह के बाद अमेरिका में बस चुकी हैं, वहीं सौतेली बहन धनलक्ष्मी और जीजा तेज सप्रू के साथ उन्हें अक्सर पारिवारिक समारोहों में बेहद आत्मीयता के साथ वक्त बिताते हुए देखा जाता है।

तमिलनाडु की राजनीति में भूचाल: 'बिग बॉस' फेम तमिल अभिनेत्री का बड़ा दावा, मुख्यमंत्री विजय समर्थकों की ट्रोलिंग से हुआ मिसकैरेज

नई दिल्ली। दक्षिण भारतीय सिनेमा और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसने पूरी इंडस्ट्री में सनसनी फैला दी है। ‘बिग बॉस तमिल’ से राष्ट्रव्यापी लोकप्रियता हासिल करने वाली अभिनेत्री जूली, जिन्हें मारिया जूलियाना के नाम से भी जाना जाता है, ने तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री और तमिल सिनेमा के सुपरस्टार थलपति जोसेफ विजय पर बेहद संगीन और गंभीर आरोप लगाए हैं। चेन्नई में आयोजित एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिनेत्री ने फूट-फूटकर रोते हुए दावा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री थलपति विजय की पार्टी के समर्थकों द्वारा किए गए अनवरत मानसिक उत्पीड़न और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के कारण अपने होने वाले पहले बच्चे को खो दिया है। अभिनेत्री का आरोप है कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर इस कदर निशाना बनाया गया और उनके चरित्र पर कीचड़ उछाला गया कि वह अत्यधिक मानसिक तनाव का शिकार हो गईं, जिसके परिणामस्वरूप उनका गर्भपात यानी मिसकैरेज हो गया। इस बयान के सामने आने के बाद से ही राज्य की राजनीति और सिनेमाई हलकों में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर तेज हो गया है। अभिनेत्री जूली ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन्होंने राजनीतिक रूप से थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ के खिलाफ अपनी आवाज उठाई। उन्होंने बताया कि इस वर्ष मार्च महीने में उन्होंने अपने खिलाफ हो रहे लगातार ऑनलाइन उत्पीड़न को लेकर चेन्नई पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें कुल आठ लोगों को नामजद किया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें पुलिस विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें इस मामले को आपराधिक श्रेणी में न रखकर दीवानी मानहानि के अंतर्गत दर्शाया गया था। जूली ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ता में हुए परिवर्तन के बाद इस मामले को जानबूझकर कमजोर करने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा आवाज उठाने के बाद उनके ऊपर पंद्रह लाख रुपए के एक फर्जी किडनी घोटाले में शामिल होने के मनगढ़ंत आरोप मढ़ दिए गए। अभिनेत्री का सीधा आरोप है कि इस पूरी साजिश के पीछे मुख्यमंत्री की पार्टी के कुछ कट्टर समर्थक और एक कानूनी सलाहकार शामिल हैं, जिन्होंने उनके और उनके पति के खिलाफ बेहद भद्दी और अपमानजनक बातें सोशल मीडिया पर फैलाई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब मीडिया कर्मियों ने उनसे यह सवाल पूछा कि वह इन गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री से कैसे जोड़ सकती हैं, तो उन्होंने बेहद तीखा जवाब दिया। जूली ने स्पष्ट किया कि वह इस दर्दनाक घटना का इस्तेमाल किसी भी तरह की जन-सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं कर रही हैं, बल्कि वह उस कड़वे सच को सामने ला रही हैं जिससे कई महिलाएं गुजर रही हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता के दम पर सत्ता के शीर्ष तक पहुंच जाना काफी नहीं है, बल्कि एक मुख्यमंत्री के रूप में जनता के प्रति उनकी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। जूली ने कहा कि भले ही मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाया हो, लेकिन जब उनकी पार्टी के लोग एक महिला का नाम बिना किसी संकोच के खराब कर रहे थे, तब उन्होंने अपने समर्थकों को पीछे हटने के लिए एक शब्द भी नहीं कहा। मुख्यमंत्री की इस चुप्पी को ही उन्होंने अपनी इस व्यक्तिगत क्षति का सबसे बड़ा कारण माना है। इस बेहद संवेदनशील और विवादित बयान के बाद जहां थलपति विजय के प्रशंसक और पार्टी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अभिनेत्री के दावों का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इस घटना ने तमिलनाडु की नई सरकार के सामने एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।