सूर्य के नक्षत्र उत्तराफाल्गुनी में चंद्रमा का प्रवेश, इन 4 राशियों पर बरसेगी सफलता, सम्मान और धन की वर्षा

नई दिल्ली। गंगा दशहरा 2026 के पावन अवसर पर एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जिसने ज्योतिष प्रेमियों और राशि आधारित भविष्य में रुचि रखने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। 25 मई 2026 को चंद्रमा सूर्य के प्रभाव वाले उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं और यह गोचर 26 मई की सुबह तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा मन, भावनाओं और निर्णय क्षमता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता, प्रतिष्ठा और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस विशेष संयोग का असर कुछ राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला माना जा रहा है। इस नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से मिथुन राशि के जातकों के लिए शुभ संकेत दे रहा है। लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय लाभकारी माना जा रहा है, जहां नई साझेदारी या बड़ी डील सफलता का कारण बन सकती है। आर्थिक स्थिति में सुधार और रुके हुए कार्यों के पूरे होने की संभावना से मानसिक संतुष्टि बढ़ सकती है। कर्क राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर राहत और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आने वाला माना जा रहा है। परिवार में चल रही परेशानियां कम हो सकती हैं और रिश्तों में मधुरता लौटने के संकेत मिल रहे हैं। कार्यक्षेत्र में अच्छी खबर मिलने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि जैसी खुशखबरी मिल सकती है। व्यापारिक गतिविधियों में भी गति बढ़ने के संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिससे आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है। सिंह राशि के लिए यह समय विशेष रूप से प्रभावशाली माना जा रहा है। नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ सामाजिक पहचान मजबूत हो सकती है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और आय के नए स्रोत बनने की संभावना भी जताई जा रही है। समाज में सम्मान बढ़ सकता है और लोग आपके विचारों को गंभीरता से सुन सकते हैं। यह समय नई शुरुआत और बड़े निर्णय लेने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। वहीं धनु राशि के जातकों के लिए भी यह गोचर नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके हुए कार्यों में गति आने की संभावना है और सफलता के नए मार्ग खुल सकते हैं। सरकारी कार्यों से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है और यदि कोई कानूनी प्रक्रिया चल रही है तो सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने से व्यक्ति अपने फैसले अधिक स्पष्टता के साथ ले पाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो गंगा दशहरा पर बना यह चंद्र गोचर कई लोगों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का संकेत बनकर सामने आ सकता है।
बेटे वरुण संग आखिरी फिल्म के बाद रिटायरमेंट की तैयारी ने फैंस को किया भावुक

नई दिल्ली । बॉलीवुड को सालों तक अपनी कॉमेडी फिल्मों से हंसाने वाले मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है. वे अब फिल्में बनाना छोड़ रहे हैं, यानी वे रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी आखिरी फिल्म बेटे वरुण धवन के साथ ‘है जवानी तो इश्क होना है’ होगी. अपनी रिटायरमेंट का ऐलान उन्होंने हाल ही में पीवीआर के एक खास इवेंट में किया. इस खबर को सुनकर इंडस्ट्री के कई लोग और उनके फैंस को झटका लगा है, क्योंकि अब डेविड धवन फिल्मों का डायरेक्शन करते हुए नजर नहीं आएंगे. उन्होंने अपने अब तक के करियर में करीब 45 फिल्मों का निर्देशन किया है. डायरेक्टर ने अपने करियर की शुरुआत साल 1989 में आई फिल्म ‘ताकतवर’ से की थी. डेविड धवन ने बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान का भी कमबैक कराया था. डेविड धवन क्यों हुए इमोशनलफेमस डायरेक्टर डेविड धवन इन दिनों अपने बेटे की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं. इस फिल्म के ट्रेलर लॉन्च में डेविड धवन भी नजर आए थे. इस दौरान मीडिया से बात करते हुए वे इमोशनल हो गए. उन्होंने ट्रेलर इवेंट में बेटे वरुण धवन की जमकर तारीफ की. डायरेक्टर ने कहा, ‘जब मैं साल 2022 में बीमार पड़ा था, तो वह मेरे साथ अस्पताल में सोया करता था.’ पिता को इमोशनल देख एक्टर वरुण धवन ने उन्हें शांत किया. वरुण धवन की फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ सिनेमाघरों में 5 जून को रिलीज होगी, जो डेविड धवन की आखिरी फिल्म होगी.डेविड धवन ने फिल्म मेकिंग से लिया संन्यास?बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर डेविड धवन ने 23 मई 2026 को डायरेक्शन की दुनिया को अलविदा कह दिया है. उन्होंने इसका ऐलान एक इवेंट के दौरान किया. इस पार्टी में बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान, करण जौहर, पूजा हेगड़े, वरुण धवन और चंकी पांडे जैसे सितारे शामिल हुए थे. दरअसल, डायरेक्टर की रिटायरमेंट की खबर की पुष्टि करण जौहर ने की है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘कल जब मैं डेविड जी के सेलिब्रेशन में गया, तो उन्होंने मुझे बताया कि यह ‘है जवानी तो इश्क होना है’ उनकी आखिरी फिल्म होने वाली है.’ डेविड धवन ने बॉलीवुड को दी कई हिट कॉमेडीफेमस डायरेक्टर डेविड धवन को बॉलीवुड के सबसे बड़े कॉमेडी डायरेक्टर्स में गिना जाता है. उन्होंने 90 और 2000 के दशक में एक से बढ़कर एक सुपरहिट फिल्में दी हैं, जिन्होंने दर्शकों को खूब हंसाया है. उन्होंने इंडस्ट्री को राजा बाबू, जुड़वा, पार्टनर, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, हीरो नंबर 1, हसीना मान जाएगी, मुझसे शादी करोगी, कुली नंबर 1 और मैंने प्यार किया जैसी कई फिल्में दी हैं। कई बड़े कलाकारों संग किया कामडेविड धवन को बॉलीवुड इंडस्ट्री में कॉमेडी फिल्मों के सबसे सफल निर्देशकों में माना जाता है. उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में कई बड़े सितारों संग काम किया है. इसमें अमिताभ बच्चन, गोविंदा, सलमान खान, अक्षय कुमार, तापसी पन्नू, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर जैसे कई सितारे शामिल हैं. डेविड धवन ने करीब 6 साल के ब्रेक के बाद ‘है जवानी तो इश्क होना है’ के साथ डायरेक्शन में वापसी की है. इसमें उनके बेटे वरुण धवन के अलावा मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े, मौनी रॉय, राकेश बेदी, राजेश कुमार और मनीष पॉल जैसे सितारे नजर आएंगे. सिनेमाघरों में यह फिल्म 5 जून को रिलीज होगी.
मीना कुमारी के आखिरी दिनों का सबसे भावुक किस्सा, मौत के बिस्तर पर मोहम्मद रफी से सुना था अपना पसंदीदा गीत

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय और खूबसूरती से छाप छोड़ने वाली मीना कुमारी का आखिरी वक्त बुरा गुजरा। एक्ट्रेस लीवर सिरोसिस से पीड़ित थीं। और लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। लेकिन जब वो बीमार, बिस्तर पर पड़ी थीं तो अक्सर एक गाना सुना करती थीं। उन्हें हमेशा से लगता था कि ये गाना उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा हुआ है। वो एक ऐसा गीत था जो तकलीफ भरे दिनों में मीना कुमारी को राहत की सांस देता था। मीना जब-जब इस गीत को गुनगुनाया करतीं तो अपने आधे ग़मों को भूल जाया करती थीं। मीना कुमारी का इस गाने से इतना गहरा जुड़ाव था कि जब मोहम्मद रफी उनसे मिलने आए तो एक्ट्रेस ने उनसे ये गाना गाने की रिक्वेस्ट की थी। बुरे दिनों में मीना कुमारी का साथी था ये गाना 1961 में मीना कुमारी की एक रिलीज हुई थी जिसका नाम था प्यार का सागर। इस फिल्म में मीना के साथ एक्टर राजेंद्र कुमार लीड रोल में थे। इस फिल्म में वैसे कई खूबसूरत गाने थे लेकिन ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। इस गाने को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने गाया था। ये गाना मीना कुमारी के दर्द की दवा बन गया था। अपना अकेलापन, दर्द भूलने के लिए अक्सर एक्ट्रेस इसी गाने को गुनगुनाया करती थीं। ये वो समय था जब मीना बहुत बीमार पड़ चुकी थीं, मौत से लड़ रही थीं। उन्हें फिल्मों के सेट पर नहीं बल्कि घर के एक कमरे में पड़े बिस्तर पर बीमार हालत में देखा जाता था। उनके आखिरी समय में फिल्मी जगत के कई कलाकार उनसे मिलने पहुंचा करते थे। एक दिन सिंगर मोहम्मद रफी भी पहुंचे। और मौत के बिस्तर पर मीना ने मोहम्मद रफी से वो गाना गाने की रिक्वेस्ट कर दी जो उनके दिल के बहुत करीब था। आत्मा में उतर चुका था मोहम्मद रफी का ये गीतबीमार, मौत से लड़ रही मीना कुमारी की इस इच्छा को मोहम्मद रफी ने टाला नहीं। वो उनके सिरहाने बैठे थे। उन्होंने उसी दर्द, और फीलिंग्स के साथ मीना के सामने गाया ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’। ये गाना मीना की आत्मा में उतर चुका था।ऐसे बना था ये गाना इस गाने को बनाने की भी एक अलग कहानी है। फिल्म प्यार का सागर में कुल 8 गाने थे। इन सभी गानों को रवि और प्रेम धवन ने कंपोज़ किया था। असद भोपाली ने गीत लिखे थे। इन गानों को आशा भोसले। शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी और मुकेश ने गाए थे। फिल्म का गाना ‘ ‘मुझे प्यार की जिंदगी देने वाले, कभी गम न देना खुशी देने वाले’ गाने को अगले दिन फिल्माया जाना था, लेकिन उस वक़्त तक रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी। प्रेम धवन ने गाने को लिखा था और सिंगर मोहम्मद रफी को गाना रिकॉर्डिंग के लिए उसी दिन बुला लिया गया। लेकिन फीमेल सिंगर के लिए आशा भोसले और लता मंगेशकर से संपर्क नहीं हो पा रहा था। ऐसे में कंपोजर रवि ने सुमन कल्यानपुर से बात की गई। उन्होंने आने का वादा किया लेकिन वो स्टूडियो पहुंची नहीं। बहुत इंतजार के बाद अंत में एक बार फिर आशा भोसले से संपर्क किया गया और उनसे इस गाने को लेकर बात पक्की हो गई। आशा भोसले और मोहम्मद रफी ने मिलकर इस गाने को गया। अगले दिन गाने की शूटिंग को गई। मीना कुमारी और राजेंद्र इस गाने में नजर आए थे।
ज्वालामुखी की दहशत भी बेअसर: 2000 साल पुराना बाली का पुरा बेसाकिह मंदिर आज भी खड़ा है रहस्यमयी मजबूती के साथ

नई दिल्ली(New Delhi)। इंडोनेशिया के बाली द्वीप में स्थित पुरा बेसाकिह मंदिर को वहां का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र हिंदू मंदिर माना जाता है। इसे ‘मदर टेंपल’ यानी मातृ मंदिर भी कहा जाता है। करीब 2000 साल पुराने इस मंदिर को बाली की संस्कृति, आस्था और इतिहास का प्रतीक माना जाता है। पर्वतों और बादलों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता और आध्यात्मिक वातावरण के कारण हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि दर्जनों छोटे-बड़े मंदिरों का विशाल परिसर मौजूद है। ज्वालामुखी के बीच भी सुरक्षित रहने का रहस्ययह मंदिर सक्रिय ज्वालामुखी माउंट अगुंग की तलहटी में स्थित है, जो कई बार विस्फोट कर चुका है। इसके बावजूद मंदिर को बड़े नुकसान से बचा रहना स्थानीय लोगों के लिए आज भी रहस्य और आस्था का विषय है। सबसे बड़ा उदाहरण 1963 के ज्वालामुखी विस्फोट का है, जब लावा मंदिर के बेहद करीब तक पहुंच गया था, लेकिन मुख्य मंदिर सुरक्षित बच गया। इसी कारण स्थानीय लोग इसे देवताओं की कृपा और चमत्कार मानते हैं। वास्तुकला और धार्मिक महत्वपुरा बेसाकिह की वास्तुकला बेहद आकर्षक है, जिसमें ऊंची सीढ़ियां, पत्थरों के विशाल द्वार और पारंपरिक बाली शैली की संरचनाएं देखने को मिलती हैं। यहां समय-समय पर धार्मिक अनुष्ठान और बड़े उत्सव आयोजित होते हैं, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।मंत्रों की गूंज और धार्मिक वातावरण इस स्थान को और भी आध्यात्मिक बना देता है। पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्रआज यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बाली की पहचान और प्रमुख पर्यटन केंद्र भी बन चुका है। यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम महसूस करते हैं।स्थानीय मान्यता के अनुसार, सच्चे मन से यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, यही कारण है कि सदियों बाद भी इस मंदिर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
तपती धूप में भी फिटनेस बरकरार: जानें हेल्दी रहने के आसान टिप्स

नई दिल्ली । देशभर में गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। तेज धूप, गर्म हवाएं और बढ़ता तापमान लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। ऐसे मौसम में खुद को स्वस्थ और फिट बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। थोड़ी सी सावधानी और सही दिनचर्या अपनाकर आप इस भीषण गर्मी में भी पूरी तरह से एनर्जेटिक रह सकते हैं। सबसे जरूरी बात है शरीर में पानी की कमी न होने देना। अक्सर लोग तब तक पानी नहीं पीते जब तक उन्हें प्यास महसूस न हो, लेकिन यह आदत डिहाइड्रेशन का कारण बन सकती है। गर्मी के मौसम में भरपूर पानी पीना चाहिए और साथ ही नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और घरेलू इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स का सेवन करना चाहिए। इससे शरीर का तापमान संतुलित रहता है और लू लगने का खतरा कम होता है। गर्मी में बाहर का तला-भुना और भारी भोजन से बचना चाहिए। इसके बजाय हल्का, ताजा और सुपाच्य भोजन लेना अधिक लाभकारी होता है। मसालेदार खाना शरीर में गर्मी बढ़ा सकता है, जिससे कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है। सॉफ्ट ड्रिंक्स और अत्यधिक चाय-कॉफी का सेवन भी सीमित करना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। दिन के सबसे गर्म समय यानी दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर निकलें और पानी की बोतल साथ रखें। हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनना गर्मी से बचाव में मदद करता है। सेहत विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी में हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम सबसे अच्छा विकल्प है। सुबह या शाम के समय वॉक करने से शरीर सक्रिय रहता है और ऊर्जा बनी रहती है। बहुत ज्यादा भारी एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। गर्मी के मौसम में साफ-सफाई का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है क्योंकि इस समय संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ताजा और स्वच्छ भोजन का सेवन करें और बासी खाने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि वे जल्दी प्रभावित हो सकते हैं। यदि किसी को चक्कर, सिरदर्द या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो तुरंत आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें। सही सावधानी और संतुलित जीवनशैली अपनाकर गर्मी के मौसम में भी स्वस्थ और ऊर्जावान रहा जा सकता है।
जलसा के बाहर हंगामा: अमिताभ बच्चन के दीदार के इंतजार में फैन बेहोश, ‘दर्शन’ कल्चर पर भड़के लोग

नई दिल्ली(New Delhi)। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले जलसा के बाहर रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया। भीषण गर्मी में अमिताभ बच्चन की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार कर रहा एक फैन अचानक बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसकी मदद की और पानी डालकर उसे होश में लाया। जानकारी के मुताबिक, हर रविवार की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में फैंस अमिताभ बच्चन के वीकली अपीयरेंस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान एक अधेड़ उम्र का फैन गर्मी और भीड़ के बीच अचानक गिर पड़ा, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि समय रहते उसे राहत मिल गई और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद लोगों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। इंस्टाग्राम पर पोस्ट किए गए वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई यूजर्स ने इस तरह की भीड़ और “दर्शन संस्कृति” पर सवाल उठाए हैं। कुछ लोगों ने लिखा कि “ये कोई भगवान नहीं हैं”, तो कुछ ने भीड़ को गैरजरूरी बताया। वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने फैन के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि भीषण गर्मी में इस तरह घंटों इंतजार करना खतरनाक हो सकता है और ऐसी भीड़ पर नियंत्रण जरूरी है। View this post on Instagram A post shared by Viral Bhayani (@viralbhayani) बताया जा रहा है कि अमिताभ बच्चन हर रविवार अपने फैंस से जलसा के बाहर मिलते हैं और उनके साथ तस्वीरें भी साझा करते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने ब्लॉग में फैंस के प्रति आभार जताते हुए उनके साथ अच्छे व्यवहार की बात भी कही थी। इस घटना के बाद एक बार फिर फैंस की सुरक्षा और इस तरह के सार्वजनिक जमावड़े को लेकर बहस तेज हो गई है।
बॉलीवुड का ऐतिहासिक डुएट: किशोर कुमार बनाम मोहम्मद रफी की जादुई जुगलबंदी

नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुनहरे दौर में जब मोहम्मद रफी और किशोर कुमार जैसे दिग्गज गायक एक साथ किसी गाने में अपनी आवाज देते थे, तो वह सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि इतिहास बन जाता था। ऐसा ही एक यादगार किस्सा फिल्म दोस्ताना (1980) से जुड़ा है, जिसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिकाओं में थे। इस फिल्म के मशहूर डुएट गीत “सलामत रहे दोस्ताना हमारा” की रिकॉर्डिंग के दौरान स्टूडियो में एक दिलचस्प माहौल देखने को मिला। बताया जाता है कि मोहम्मद रफी समय पर स्टूडियो पहुंच गए थे और उन्होंने गाने की रिहर्सल भी पूरी तैयारी के साथ की थी। उनकी क्लासिकल और मधुर आवाज ने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित कर दिया था। लेकिन जब किशोर कुमार स्टूडियो पहुंचे तो उन्होंने माहौल को गंभीर बनाने के बजाय हल्का-फुल्का कर दिया। वे रफी साहब के साथ मजाक-मस्ती करने लगे, जिससे कई लोगों को लगा कि वह गाने को लेकर गंभीर नहीं हैं। उस समय कई लोगों को लगा कि रफी साहब अपनी परफॉर्मेंस से बाजी मार लेंगे। हालांकि, जैसे ही रिकॉर्डिंग शुरू हुई, पूरा माहौल बदल गया। पहले मोहम्मद रफी ने अपने हिस्से को बेहद खूबसूरती और गहराई के साथ गाया। लेकिन जब किशोर कुमार की बारी आई, तो उनकी आवाज ने स्टूडियो में मौजूद हर शख्स को हैरान कर दिया। उनकी गायकी में जो ऊर्जा, भाव और सहजता थी, उसने गाने को एक अलग ही ऊंचाई पर पहुंचा दिया। संगीतकार पंडित रोनू मजुमदार के अनुसार, उस दिन दोनों ही दिग्गजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन किशोर कुमार की आवाज में एक अलग तरह का जादू था, जिसने माहौल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी परफॉर्मेंस को कई लोग उस दौर की सबसे यादगार रिकॉर्डिंग्स में से एक मानते हैं। फिल्म दोस्ताना के अन्य गीत भी सुपरहिट साबित हुए और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। लेकिन यह डुएट गाना आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें दो महान गायकों की अद्भुत टक्कर और संगीत की असली ताकत देखने को मिली।
अक्षय कुमार का बड़ा भोजपुरी अवतार: ‘वेलकम टू द जंगल’ में दिखेगा नया रंग, अक्षरा सिंह ने कराई खास तैयारी

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग मल्टीस्टारर फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। फिल्म में वह इस बार एक अलग अंदाज में नजर आने वाले हैं, जहां वह एक भोजपुरी एक्टर का किरदार निभाते दिखेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय कुमार ने इस किरदार को रियलिस्टिक बनाने के लिए भोजपुरी भाषा और स्टाइल पर खास काम किया है। बताया जा रहा है कि इस तैयारी में भोजपुरी एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने उनकी मदद की, जिससे वह किरदार की बारीकियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अक्षय ने अपने बॉडी लैंग्वेज से लेकर बोलने के अंदाज तक में बदलाव किया है ताकि किरदार पूरी तरह से असरदार लगे। फिल्म में उनका कॉमिक और एनर्जी से भरपूर अवतार दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ चौंका भी सकता है। फिल्म के एक गाने ‘घिस घिस घिस’ में अक्षय कुमार भोजपुरी आइटम बॉय के रूप में भी नजर आएंगे, जिसे जल्द ही रिलीज किया जाएगा। मेकर्स को उम्मीद है कि यह गाना फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ाएगा। ‘वेलकम टू द जंगल’ का बजट लगभग 250 से 300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अनिल कपूर, संजय दत्त, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन और राजपाल यादव जैसे कई बड़े सितारे नजर आएंगे। फिल्म के टीजर को पहले ही अच्छा रिस्पॉन्स मिल चुका है और अब दर्शकों को इसके रिलीज का बेसब्री से इंतजार है।
जॉन एफ. कैनेडी का ऐतिहासिक भाषण: चाँद पर अमेरिका उतारने का सपना बना अंतरिक्ष युग की शुरुआत

25 मई 1961 को अमेरिकी इतिहास और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक ऐसा क्षण आया जिसने पूरी दुनिया की सोच बदल दी। इस दिन राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए वह ऐतिहासिक घोषणा की, जिसने “स्पेस रेस” यानी अंतरिक्ष दौड़ को एक नई दिशा और गति दे दी। यह भाषण केवल एक राजनीतिक बयान नहीं था, बल्कि विज्ञान, तकनीक और राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का एक साहसिक संकल्प था, जिसने आने वाले दशक की दिशा तय कर दी। कैनेडी ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका को इस दशक के अंत से पहले किसी इंसान को चंद्रमा पर उतारना चाहिए और उसे सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना चाहिए। उस समय यह लक्ष्य बेहद कठिन और लगभग असंभव माना जा रहा था, क्योंकि अंतरिक्ष तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और सोवियत संघ पहले ही अंतरिक्ष दौड़ में अमेरिका से आगे निकल चुका था। 1957 में स्पुतनिक उपग्रह और 1961 में यूरी गगारिन की अंतरिक्ष यात्रा ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया था। कैनेडी का यह भाषण उस समय आया जब शीत युद्ध अपने चरम पर था। अमेरिका और सोवियत संघ के बीच केवल सैन्य या राजनीतिक प्रतिस्पर्धा नहीं थी, बल्कि तकनीकी और वैज्ञानिक श्रेष्ठता की भी होड़ थी। अंतरिक्ष इस प्रतिस्पर्धा का सबसे बड़ा मंच बन चुका था। ऐसे में कैनेडी ने अंतरिक्ष कार्यक्रम को राष्ट्रीय सम्मान और सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि यह केवल विज्ञान का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र की शक्ति और नेतृत्व का प्रतीक है। उनकी यह घोषणा अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के लिए एक ऐतिहासिक आदेश बन गई। इसके बाद अपोलो कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर मानव भेजना था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए हजारों वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों ने दिन-रात काम किया। नई रॉकेट तकनीक, जीवन समर्थन प्रणाली, अंतरिक्ष यान डिजाइन और कंप्यूटिंग सिस्टम में बड़े पैमाने पर विकास किया गया। कैनेडी के इस भाषण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह था कि उन्होंने जनता को एक बड़े सपने से जोड़ा। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों को यह विश्वास दिलाया कि असंभव लगने वाला लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सकता है, यदि राष्ट्र एकजुट होकर प्रयास करे। उनके शब्दों ने पूरे देश में एक नई ऊर्जा और उत्साह पैदा किया। इस भाषण के आठ साल बाद, 1969 में, अपोलो-11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रॉन्ग और बज़ एल्ड्रिन ने चंद्रमा की सतह पर कदम रखा। जब नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा “यह मनुष्य के लिए एक छोटा कदम, लेकिन मानवता के लिए एक बड़ी छलांग है,” तो वह वास्तव में कैनेडी के सपने की पूर्ति थी। कैनेडी का 25 मई 1961 का भाषण आज भी इतिहास में एक प्रेरणादायक क्षण के रूप में याद किया जाता है। यह केवल अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत नहीं थी, बल्कि मानव क्षमता, साहस और दूरदृष्टि का प्रतीक था। इसने यह साबित किया कि जब नेतृत्व स्पष्ट और लक्ष्य बड़ा हो, तो मानवता किसी भी सीमा को पार कर सकती है। आज भी यह भाषण वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह हमें याद दिलाता है कि बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प कितना महत्वपूर्ण होता है। -25 मई 1961 कैनेडी का भाषण
90 YEARS OF AKASHVANI: सुरों और सूफी गीतों से सजी शाम; आकाशवाणी के 90 साल पूरे होने का खास जश्न

HIGHLIGHTS: आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने पर खास आयोजन बुंदेली लोकगीतों ने बांधा समां सूफी गायन पर झूमे श्रोता ‘दमादम मस्त कलंदर’ पर थिरका पूरा हॉल संस्कृति और लोक परंपराओं को समर्पित रही शाम 90 YEARS OF AKASHVANI: भोपाल। आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में भोपाल के रवींद्र भवन में एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बता दें कि संगीत और लोक परंपराओं से सजी इस शाम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत बुंदेली लोकगायिका पुष्पलता शर्मा ने पारंपरिक विवाह गीतों से की, ‘बजा बजा रमतुला’ और ‘आ गए पार्वती के दूल्हा’ जैसे गीतों ने माहौल को और ज़्यादा भक्तिमय बना दिया। Natural Beauty Care: दही और चावल का आटा त्वचा के लिए क्यों है फायदेमंद? बुंदेली गीतों ने बांधा समां पुष्पलता शर्मा ने अपने गायन में बुंदेली संस्कृति की झलक पेश की उन्होंने गारी, लगुन, दादरा और स्वांग जैसे पारंपरिक गीतों से लोगी को खूब लुभाया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों बजाई और कई लोग को तो उनके गीतों पर झूम उठे, कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार लोक संगीत के रंग में रंगा नजर आया। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल सूफियाना रंग में रंगा सभागार शाम का दूसरा हिस्सा सूफियाना रंग में रंगा नजर आया जहां मशहूर सूफी गायक उस्ताद मुनव्वर मासूम ने जैसे ही बिस्मिल्लाह से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की, माहौल पूरी तरह बदल गया। ख्वाजा जी महाराज करम सरकार ने लोगों को आध्यात्मिक एहसास से भर दिया। वहीं छाप तिलक सब छीनी और दमादम मस्त कलंदर पर पूरा हॉल झूम उठा, कई लोग अपनी सीटों पर बैठे-बैठे ही ताल पर थिरकते नजर आए। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल आकाशवाणी ने भारत की संस्कृति को पीढ़ियों तक पहुंचाया कार्यक्रम के दौरान आकाशवाणी भोपाल के प्रभारी समूह प्रमुख संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आकाशवाणी सिर्फ खबरों का माध्यम नहीं रहा, बल्कि उसने देश की लोक संस्कृति, संगीत और परंपराओं को पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही कार्यक्रम प्रमुख शुभम तिवारी ने भी कहा कि बदलते दौर में भी आकाशवाणी अपनी सांस्कृतिक पहचान को लगातार मजबूत कर रहा है। वरिष्ठ उद्घोषक पुरुषोत्तम श्रीवास और अमिता त्रिवेदी के संचालन ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। अंत में कार्यक्रम अधिकारी योगेश नागर ने सभी कलाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। आकाशवाणी के 90 साल का यह जश्न सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था… बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, संगीत और विरासत को समर्पित एक ऐसी शाम थी, जिसने वहां मौजूद हर इंसान के दिल में अपनी अलग छाप छोड़ दी।