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90 YEARS OF AKASHVANI: सुरों और सूफी गीतों से सजी शाम; आकाशवाणी के 90 साल पूरे होने का खास जश्न

AKASHVANI ANNYVERSERY

HIGHLIGHTS: आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने पर खास आयोजन बुंदेली लोकगीतों ने बांधा समां सूफी गायन पर झूमे श्रोता ‘दमादम मस्त कलंदर’ पर थिरका पूरा हॉल संस्कृति और लोक परंपराओं को समर्पित रही शाम   90 YEARS OF AKASHVANI: भोपाल। आकाशवाणी के 90 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में भोपाल के रवींद्र भवन में एक खास सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बता दें कि संगीत और लोक परंपराओं से सजी इस शाम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत बुंदेली लोकगायिका पुष्पलता शर्मा ने पारंपरिक विवाह गीतों से की, ‘बजा बजा रमतुला’ और ‘आ गए पार्वती के दूल्हा’ जैसे गीतों ने माहौल को और ज़्यादा भक्तिमय बना दिया। Natural Beauty Care: दही और चावल का आटा त्वचा के लिए क्यों है फायदेमंद? बुंदेली गीतों ने बांधा समां पुष्पलता शर्मा ने अपने गायन में बुंदेली संस्कृति की झलक पेश की उन्होंने गारी, लगुन, दादरा और स्वांग जैसे पारंपरिक गीतों से लोगी को खूब लुभाया। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों बजाई और कई लोग को तो उनके गीतों पर झूम उठे, कार्यक्रम के दौरान पूरा सभागार लोक संगीत के रंग में रंगा नजर आया। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल सूफियाना रंग में रंगा सभागार शाम का दूसरा हिस्सा सूफियाना रंग में रंगा नजर आया जहां मशहूर सूफी गायक उस्ताद मुनव्वर मासूम ने जैसे ही बिस्मिल्लाह से अपनी प्रस्तुति की शुरुआत की, माहौल पूरी तरह बदल गया। ख्वाजा जी महाराज करम सरकार ने लोगों को आध्यात्मिक एहसास से भर दिया। वहीं छाप तिलक सब छीनी और दमादम मस्त कलंदर पर पूरा हॉल झूम उठा, कई लोग अपनी सीटों पर बैठे-बैठे ही ताल पर थिरकते नजर आए। MP: बांधवगढ़ रिजर्व क्षेत्र में बाघ ने घर में घुसकर किया हमला महिला की मौत, 3 घायल आकाशवाणी ने भारत की संस्कृति को पीढ़ियों तक पहुंचाया कार्यक्रम के दौरान आकाशवाणी भोपाल के प्रभारी समूह प्रमुख संजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि आकाशवाणी सिर्फ खबरों का माध्यम नहीं रहा, बल्कि उसने देश की लोक संस्कृति, संगीत और परंपराओं को पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम किया है। साथ ही कार्यक्रम प्रमुख शुभम तिवारी ने भी कहा कि बदलते दौर में भी आकाशवाणी अपनी सांस्कृतिक पहचान को लगातार मजबूत कर रहा है। वरिष्ठ उद्घोषक पुरुषोत्तम श्रीवास और अमिता त्रिवेदी के संचालन ने कार्यक्रम को और जीवंत बना दिया। अंत में कार्यक्रम अधिकारी योगेश नागर ने सभी कलाकारों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।   आकाशवाणी के 90 साल का यह जश्न सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था… बल्कि भारतीय लोक संस्कृति, संगीत और विरासत को समर्पित एक ऐसी शाम थी, जिसने वहां मौजूद हर इंसान के दिल में अपनी अलग छाप छोड़ दी।

कंगना रनौत का ट्रोलर्स पर वार: ऐश्वर्या राय को लेकर दिया सख्त जवाब

नई दिल्ली। कान फिल्म फेस्टिवल 2026 में ऐश्वर्या राय बच्चन एक बार फिर अपने ग्लैमरस और एलिगेंट लुक्स को लेकर चर्चा में आ गई हैं। रेड कार्पेट पर उनके अलग-अलग फैशन एक्सपेरिमेंट्स को जहां एक तरफ खूब सराहा गया, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। इस बीच बॉलीवुड एक्ट्रेस और राजनेता कंगना रनौत उनके समर्थन में सामने आई हैं और ट्रोलर्स को कड़ा जवाब दिया है। कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर ऐश्वर्या राय की तारीफ करते हुए कहा कि फैशन और स्टाइल किसी व्यक्ति के आत्म-अभिव्यक्ति का माध्यम होता है और किसी भी महिला को किसी को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने लिखा कि ऐश्वर्या बेहद शानदार लग रही हैं और जो लोग उन्हें आलोचना की नजर से देख रहे हैं, उन्हें पहले खुद को देखना चाहिए। कंगना ने अपनी पोस्ट में साफ कहा कि ऐश्वर्या राय किसी को खुश करने के लिए रेड कार्पेट पर नहीं आतीं, बल्कि वह अपनी मौजूदगी और आत्मविश्वास से वहां चमकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोगों को उम्रदराज महिलाओं को रेड कार्पेट पर देखने की आदत नहीं है, तो अब उन्हें इसकी आदत डाल लेनी चाहिए। कंगना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है, जहां एक वर्ग उनके समर्थन को सही ठहरा रहा है तो दूसरा इसे अलग नजरिए से देख रहा है। हालांकि, कई यूजर्स ने कंगना के बयान को महिलाओं के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से जोड़ते हुए सराहा भी है। इस बीच कान फिल्म फेस्टिवल में ऐश्वर्या राय के साथ उनकी बेटी आराध्या बच्चन भी नजर आईं, जिसने इस बार खास ध्यान खींचा। रूबी रेड गाउन में आराध्या का रेड कार्पेट डेब्यू काफी चर्चा में रहा और उनकी तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं। ऐश्वर्या राय हर साल की तरह इस बार भी अपने स्टाइल और ग्रेस के कारण सुर्खियों में बनी हुई हैं, जबकि कंगना रनौत का यह समर्थन बयान इस पूरे मामले को और अधिक चर्चित बना रहा है।

Natural Beauty Care: दही और चावल का आटा त्वचा के लिए क्यों है फायदेमंद?

नई दिल्ली । आजकल भागदौड़ भरी जिंदगी और प्रदूषण के कारण त्वचा की समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की बजाय प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों की ओर रुख कर रहे हैं। दही और चावल का आटा त्वचा की देखभाल के लिए एक बेहद सरल और प्रभावी उपाय माना जाता है, जिसे आसानी से घर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। दही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और डेड स्किन सेल्स को हटाता है। वहीं चावल का आटा एक प्राकृतिक स्क्रब की तरह काम करता है, जो त्वचा को एक्सफोलिएट कर उसे मुलायम और चमकदार बनाता है। जब इन दोनों को मिलाकर फेस पैक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो यह त्वचा पर जमी गंदगी और टैनिंग को कम करने में सहायक होता है। इस फेस पैक को बनाने के लिए दो चम्मच दही में एक से दो चम्मच चावल का आटा मिलाकर एक पेस्ट तैयार किया जाता है। इसे चेहरे पर हल्के हाथों से लगाकर 10 से 15 मिनट तक छोड़ दिया जाता है। सूखने के बाद हल्के हाथों से मसाज करते हुए धोने पर त्वचा साफ और ताजगी भरी नजर आती है। यह नुस्खा खासतौर पर ऑयली और डल स्किन के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। यह न सिर्फ चेहरे की चमक बढ़ाता है, बल्कि पिंपल्स और दाग-धब्बों को कम करने में भी मदद करता है। नियमित उपयोग से त्वचा का रंग निखरता है और चेहरा प्राकृतिक रूप से ग्लो करने लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह एक सुरक्षित और केमिकल-फ्री उपाय है, लेकिन बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को पहले पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। सप्ताह में दो से तीन बार इसका इस्तेमाल बेहतर परिणाम देता है। कुल मिलाकर दही और चावल का आटा त्वचा की देखभाल का एक आसान, सस्ता और असरदार तरीका है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने में मदद करता है।

Somvar Shivling Puja: सही विधि से करें पूजा, मिलेंगे सुख-शांति और मनोकामना पूर्ति के संकेत

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में भगवान शिव को अत्यंत दयालु और शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। विशेष रूप से सोमवार का दिन शिव भक्ति के लिए सबसे शुभ माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर विधि-विधान से पूजा करने और कुछ खास वस्तुएं अर्पित करने से जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर होने की मान्यता है। सोमवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भक्त शिवालय या घर के मंदिर में शिवलिंग की पूजा करते हैं। पूजा की शुरुआत गंगाजल से शिवलिंग के अभिषेक से होती है। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। यह प्रक्रिया न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी स्रोत मानी जाती है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही धतूरा, भांग और आक के फूल भी शिव पूजा में विशेष महत्व रखते हैं। सफेद पुष्प जैसे कनेर और चमेली चढ़ाने से भी भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस मंत्र के नियमित जाप से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। भक्त सोमवार का व्रत भी रखते हैं, जिसमें फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन की शुद्धि होती है और जीवन में चल रही बाधाएं दूर होती हैं। वहीं दूध अर्पित करने से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है। शहद और घी अर्पित करने से आर्थिक समृद्धि के मार्ग खुलते हैं। सोमवार की शिव पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो जीवन में तनाव, कर्ज या रिश्तों की समस्याओं से जूझ रहे हों। कहा जाता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा जीवन में चमत्कारिक बदलाव ला सकती है। कुल मिलाकर सोमवार को शिवलिंग पूजा न केवल एक धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह आत्मिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन स्थापित करने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है।

Budget Travel Guide: कम खर्च में गोवा और मनाली घूमने का पूरा प्लान

नई दिल्ली । भारत में घूमने के शौकीनों के लिए गोवा और मनाली दो ऐसे डेस्टिनेशन हैं, जिनका नाम आते ही बीच, पहाड़ और एडवेंचर की तस्वीरें सामने आ जाती हैं। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर ट्रिप टाल देते हैं कि यहां घूमना महंगा पड़ेगा। अगर सही प्लानिंग की जाए तो इन दोनों जगहों की यात्रा बहुत ही कम बजट में भी की जा सकती है। सबसे पहले बात करें ट्रैवल की, तो सस्ते सफर के लिए ट्रेन और बस सबसे बेहतर विकल्प हैं। गोवा जाने के लिए कोंकण रेलवे रूट काफी किफायती और सुंदर है, जबकि मनाली के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ से वोल्वो बसें आसानी से और कम दाम में मिल जाती हैं। अगर टिकट पहले से बुक कर ली जाए तो और भी सस्ते में सफर संभव है। रहने के लिए महंगे होटल्स की बजाय होस्टल, गेस्ट हाउस या बजट होमस्टे चुनना बेहतर होता है। गोवा में बीच के पास कई सस्ते हॉस्टल मिल जाते हैं, वहीं मनाली में वॉलनट और ओल्ड मनाली एरिया में बजट स्टे आसानी से मिल जाता है। ग्रुप में ट्रैवल करने पर रूम शेयरिंग से खर्च और कम हो जाता है। खाने-पीने के मामले में लोकल ढाबे और स्ट्रीट फूड सबसे किफायती विकल्प हैं। गोवा में सी-फूड और लोकल थाली काफी सस्ती मिलती है, जबकि मनाली में हिमाचली डिशेज जैसे धाम और राजमा चावल कम बजट में अच्छा खाना उपलब्ध कराते हैं। महंगे रेस्टोरेंट्स से बचना खर्च कम करने का सबसे आसान तरीका है। ट्रिप का सही समय चुनना भी बहुत जरूरी है। ऑफ-सीजन में यात्रा करने से होटल और ट्रैवल दोनों सस्ते मिलते हैं। गोवा में मॉनसून या ऑफ सीजन और मनाली में पीक सीजन के अलावा समय चुनना बजट ट्रिप को और आसान बनाता है। लोकल ट्रांसपोर्ट का उपयोग करना भी खर्च कम करता है। बाइक रेंट, लोकल बस और शेयर टैक्सी से घूमना काफी सस्ता पड़ता है। इसके अलावा पहले से एक रफ इटिनरेरी बनाकर चलना अनावश्यक खर्च से बचाता है। थोड़ी सी समझदारी और सही प्लानिंग के साथ गोवा की बीच लाइफ और मनाली की बर्फीली वादियों का मजा बिना ज्यादा पैसे खर्च किए भी लिया जा सकता है।

मेमोरियल डे 2026: शहीदों को श्रद्धांजलि देने का अमेरिका का राष्ट्रीय दिवस

मेमोरियल डे (Memorial Day) संयुक्त राज्य अमेरिका का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवकाश है, जिसे हर साल मई महीने के अंतिम सोमवार को मनाया जाता है। यह दिन उन अमेरिकी सैनिकों की याद में समर्पित होता है जिन्होंने देश की सेवा करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। वर्ष 2026 में यह दिन 25 मई, सोमवार को मनाया जाएगा। मेमोरियल डे का इतिहासमेमोरियल डे की शुरुआत अमेरिकी गृहयुद्ध (American Civil War) के बाद हुई थी, जब देश में हजारों सैनिकों की मृत्यु ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था। शुरुआत में इसे “Decoration Day” कहा जाता था क्योंकि लोग शहीद सैनिकों की कब्रों पर फूल और पुष्प अर्पित करते थे। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे अमेरिका में फैल गई और 1971 में इसे आधिकारिक रूप से संघीय अवकाश (Federal Holiday) घोषित कर दिया गया। तब से यह हर साल मई के अंतिम सोमवार को मनाया जाने लगा। मेमोरियल डे 2026 की तारीख2026 में मई महीने का अंतिम सोमवार 25 मई को पड़ रहा है। इसलिए इस साल मेमोरियल डे 25 मई 2026 को पूरे अमेरिका में मनाया जाएगा। इस दिन सरकारी दफ्तर, बैंक और कई संस्थान बंद रहते हैं। इस दिन क्या होता है?मेमोरियल डे केवल एक छुट्टी का दिन नहीं है, बल्कि यह गहरी श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। इस दिन अमेरिका के लोग विभिन्न तरीकों से शहीदों को याद करते हैं— सैन्य कब्रिस्तानों में जाकर पुष्प अर्पित करना“National Moment of Remembrance” के तहत एक मिनट का मौन रखना परेड और स्मृति समारोहों का आयोजन परिवारों द्वारा शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देना कई जगहों पर अमेरिकी झंडा आधा झुका (half-staff) रखा जाता है। मेमोरियल डे और वेटरन्स डे में अंतरअक्सर लोग मेमोरियल डे और वेटरन्स डे को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर है। मेमोरियल डे: उन सैनिकों के लिए जो युद्ध में शहीद हो चुके हैं। वेटरन्स डे: सभी जीवित और पूर्व सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है। मेमोरियल डे का महत्वयह दिन सिर्फ छुट्टी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है। यह अमेरिका को याद दिलाता है कि आज जो स्वतंत्रता और सुरक्षा मिली है, वह उन सैनिकों के बलिदान की वजह से संभव हुई है जिन्होंने देश के लिए अपने जीवन की आहुति दे दी। आधुनिक समय में मेमोरियल डेआज के समय में मेमोरियल डे पर लोग पारिवारिक कार्यक्रमों, पिकनिक और यात्रा की योजना भी बनाते हैं क्योंकि यह गर्मी की शुरुआत और लंबे वीकेंड का अवसर भी होता है। हालांकि इसके मूल भाव शहीदों को याद करना को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। मेमोरियल डे 2026 हमें यह याद दिलाता है कि स्वतंत्रता और शांति की कीमत बहुत बड़ी होती है। यह दिन न केवल सैनिकों के बलिदान को सम्मान देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और कृतज्ञता का संदेश भी देता है। -मेमोरियल डे (Memorial Day)

विश्व ड्रैकुला दिवस (25 मई): रहस्य, डर और साहित्यिक अमरता का अनोखा उत्सव

हर साल 25 मई को “विश्व ड्रैकुला दिवस” (World Dracula Day) मनाया जाता है, जो दुनिया के सबसे प्रसिद्ध काल्पनिक चरित्रों में से एक काउंट ड्रैकुला को समर्पित है। यह दिन केवल डरावनी कहानियों या हॉरर फिल्मों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह साहित्य, इतिहास, लोककथाओं और पॉप संस्कृति के उस अद्भुत संगम को दर्शाता है जिसने ड्रैकुला को अमर बना दिया। ड्रैकुला कौन है?ड्रैकुला एक काल्पनिक पिशाच (Vampire) पात्र है, जिसे आयरिश लेखक ब्रैम स्टोकर (Bram Stoker) ने 1897 में अपने प्रसिद्ध उपन्यास Dracula में प्रस्तुत किया था। यह कहानी एक रहस्यमयी ट्रांसिल्वेनियाई काउंट की है जो रात में जीवित रहने वाले पिशाच के रूप में इंसानों का खून पीकर अपनी शक्ति बढ़ाता है। इस उपन्यास ने दुनिया भर में हॉरर साहित्य की परिभाषा बदल दी। 25 मई का महत्व क्यों?विश्व ड्रैकुला दिवस 25 मई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि माना जाता है कि इसी तारीख के आसपास ब्रैम स्टोकर ने ड्रैकुला की कहानी लिखने की शुरुआत की थी। यह दिन उनके साहित्यिक योगदान और हॉरर शैली को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। समय के साथ यह दिन ड्रैकुला के चाहने वालों और हॉरर प्रेमियों के लिए एक खास अवसर बन गया है। इतिहास और प्रेरणाड्रैकुला के चरित्र की प्रेरणा वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति व्लाद द इम्पेलर (Vlad the Impaler) से ली गई मानी जाती है, जो 15वीं शताब्दी का एक रोमानियाई शासक था। वह अपनी क्रूरता और दुश्मनों को सूली पर चढ़ाने की सजा के लिए प्रसिद्ध था। हालांकि ब्रैम स्टोकर ने इसे पूरी तरह काल्पनिक और रहस्यमय पिशाच में बदल दिया। ड्रैकुला और पॉप संस्कृतिड्रैकुला केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फिल्मों, टीवी सीरीज, कॉमिक्स और वीडियो गेम्स में भी उसकी छवि अमर हो गई। 1922 की फिल्म Nosferatu से लेकर आधुनिक हॉलीवुड फिल्मों तक, ड्रैकुला का किरदार बार-बार अलग-अलग रूपों में सामने आया है। बेला लुगोसी और क्रिस्टोफर ली जैसे अभिनेताओं ने इस किरदार को वैश्विक पहचान दिलाई।आज ड्रैकुला को हॉरर का प्रतीक माना जाता है। उसकी छवि काले लबादे, नुकीले दांत और रहस्यमयी महल के साथ जुड़ी हुई है, जो डर और आकर्षण दोनों का मिश्रण है। विश्व ड्रैकुला दिवस का महत्वयह दिन हॉरर साहित्य के प्रशंसकों के लिए एक उत्सव है। कई देशों में इस दिन थीम पार्टी, कॉस्प्ले इवेंट, फिल्म स्क्रीनिंग और साहित्यिक चर्चा आयोजित की जाती है। लोग ड्रैकुला की कहानियों को फिर से पढ़ते हैं और इस किरदार के सांस्कृतिक प्रभाव को समझते हैं। डर के पीछे छिपा संदेशहालांकि ड्रैकुला एक डरावना पात्र है, लेकिन उसकी कहानी मानवीय भय, अमरता की इच्छा और अंधकार बनाम प्रकाश जैसे गहरे विषयों को भी दर्शाती है। यह हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि डर केवल बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अंदर भी मौजूद होता है। विश्व ड्रैकुला दिवस केवल एक काल्पनिक पिशाच का उत्सव नहीं है, बल्कि यह साहित्य, कल्पना और मानवीय भावनाओं की गहराई को समझने का अवसर है। ड्रैकुला आज भी हमें यह याद दिलाता है कि कहानियां समय के साथ खत्म नहीं होतीं, बल्कि और अधिक शक्तिशाली बन जाती हैं। -विश्व ड्रैकुला दिवस

राहु-चंद्र की युति बिगाड़ सकती है मानसिक संतुलन, हर समय डर-उलझन और बेचैनी का बनता है कारण

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक ग्रह माना गया है। माना जाता है कि अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो जाए या राहु, शनि जैसे अशुभ ग्रहों के साथ युति बना ले, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, डर, भ्रम, बेचैनी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आजकल बढ़ती एंजायटी और मानसिक अस्थिरता के पीछे कई बार ग्रहों की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। विशेष रूप से राहु और चंद्रमा की युति को बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस योग में व्यक्ति हर समय किसी न किसी उलझन में फंसा रहता है। छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल हो जाता है और मन लगातार नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है। ऐसे लोगों में भौतिक सुख पाने की इच्छा तो अधिक होती है, लेकिन संतोष की कमी बनी रहती है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद अंदर बेचैनी बनी रहती है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु-चंद्र की युति होती है, उन्हें खुद को हमेशा व्यस्त रखना चाहिए। लंबे समय तक खाली रहने पर नकारात्मक सोच और तनाव तेजी से बढ़ सकता है। यही स्थिति धीरे-धीरे एंजायटी और डिप्रेशन का रूप भी ले सकती है। वहीं शनि और चंद्रमा की युति भी मानसिक बोझ और उदासी का कारण मानी जाती है। ऐसे लोगों को रात में डरावने सपने आना, बार-बार नींद टूटना, पुरानी बातें याद कर परेशान होना और हर छोटी बात को जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत हो सकती है। यदि यह योग कुंडली के अष्टम भाव में बन जाए तो व्यक्ति की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ सकती है और जीवन में निराशा बढ़ सकती है। ज्योतिष में चंद्रमा और बुध को भी मानसिक स्थिति से जुड़ा ग्रह माना गया है। अगर इन ग्रहों पर राहु, केतु या शनि की अशुभ दृष्टि पड़ जाए, तो व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो सकता है। वह छोटी-छोटी बातों को दिल पर लेने लगता है और धीरे-धीरे अकेलेपन की ओर बढ़ सकता है। मान्यताओं के अनुसार मानसिक तनाव कम करने के लिए भगवान शिव की उपासना लाभकारी मानी गई है। चंद्रमा का संबंध शिव से माना जाता है, इसलिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का नियमित जाप मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। सोमवार का व्रत, शिवलिंग पर जल अर्पित करना और ध्यान लगाना भी सकारात्मक प्रभाव देने वाला माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सही दिनचर्या, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उपायों से मानसिक संतुलन बेहतर किया जा सकता है।

किस राशि को सताती है सबसे ज्यादा गर्मी? जानिए अपना तत्व, शरीर पर असर और राहत के ज्योतिषीय उपाय

नई दिल्ली। भीषण गर्मी और तेज धूप का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग तरीके से पड़ता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसका संबंध केवल मौसम से नहीं बल्कि व्यक्ति की राशि और उसके तत्व से भी माना जाता है। मेडिकल ज्योतिष में राशियों के तत्व और प्रकृति के आधार पर शरीर की संवेदनशीलता, रोगों की प्रवृत्ति और मौसम का प्रभाव समझा जाता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मेष, सिंह और धनु अग्नि तत्व की राशियां हैं, जिनकी प्रकृति पित्त प्रधान मानी जाती है। यही कारण है कि इन राशियों के लोगों को गर्मी, लू, शरीर में जलन और त्वचा संबंधी परेशानियां ज्यादा प्रभावित करती हैं। वहीं वृष, कन्या और मकर पृथ्वी तत्व की राशियां हैं, जिनकी प्रकृति वायु प्रधान मानी जाती है। मिथुन, तुला और कुम्भ वायु तत्व से जुड़ी मिश्रित प्रकृति की राशियां हैं, जबकि कर्क, वृश्चिक और मीन जल तत्व की राशियां हैं, जिनमें कफ प्रकृति अधिक होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है तो गर्मी का असर बढ़ना शुरू हो जाता है और वृष राशि में पहुंचते-पहुंचते तापमान चरम पर पहुंच जाता है। इस दौरान शरीर के जलीय तत्व तेजी से कम होने लगते हैं और पंचतत्वों से बने शरीर पर गर्मी का प्रभाव बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्रमा जल तत्व और बुध त्वचा व हरियाली का कारक माना जाता है, इसलिए गर्मी से बचाव के लिए इन दोनों ग्रहों को मजबूत करना जरूरी माना गया है। कहा जाता है कि बुध को मजबूत करने के लिए खीरा, तरबूज, खरबूजा और अन्य जलयुक्त फलों का सेवन लाभकारी होता है, जबकि चंद्रमा को बलवान बनाए रखने के लिए पर्याप्त पानी और शीतल पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। ज्योतिषीय मान्यता है कि यदि चंद्रमा और बुध मजबूत रहें तो व्यक्ति सूर्य की तेज तपिश को बेहतर तरीके से सहन कर सकता है। गर्मी और लू से बचने के लिए राशि के अनुसार पेय पदार्थों का सेवन, मंगल से जुड़ी वस्तुओं का दान, लाल रंग के कपड़ों से परहेज और सफेद या हल्के रंग के वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है। धर्मशास्त्रों में सूर्योदय से पहले स्नान को स्वास्थ्यवर्धक बताया गया है, क्योंकि इस समय जल में सकारात्मक और ऊर्जावान तत्व अधिक सक्रिय माने जाते हैं, जो शरीर को ठंडक और ऊर्जा प्रदान करते हैं।

सोमवार वास्तु उपाय: शिव कृपा और घर में सकारात्मक ऊर्जा पाने के आसान टिप्स

नई दिल्ली । हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होने के साथ-साथ सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति के लिए भी विशेष महत्व रखता है। माना जाता है कि यदि इस दिन कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाए जाएं, तो घर में सुख-समृद्धि, शांति और सौभाग्य का वास होता है। सोमवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सुबह स्नान के बाद घर के मुख्य द्वार को साफ करें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। मुख्य दरवाजे पर स्वस्तिक या ॐ का चिन्ह बनाना भी शुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) को सबसे पवित्र स्थान माना गया है। सोमवार के दिन इस दिशा को विशेष रूप से स्वच्छ रखें और वहां भगवान शिव या शिवलिंग की तस्वीर स्थापित करें। इससे घर में मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। सोमवार को घर में सफेद रंग का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन सफेद फूल, सफेद कपड़े या सफेद मिठाई का प्रयोग करना शुभ माना जाता है। साथ ही घर में दूध से बनी चीजों का दान या भगवान शिव को अर्पण करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। इसके अलावा, घर में जल से भरा हुआ बर्तन या गंगाजल का कलश रखना भी सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है। वास्तु के अनुसार जल तत्व का संतुलन जीवन में स्थिरता और समृद्धि लाता है। सोमवार के दिन घर में झगड़ा या नकारात्मक बातचीत से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिन वातावरण बहुत संवेदनशील माना जाता है। शांत मन से पूजा-पाठ करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से घर का माहौल सकारात्मक बनता है। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोमवार को नियमित रूप से दीपक जलाकर घर के मंदिर में शिवजी की आराधना की जाए, तो घर में दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। कुल मिलाकर, सोमवार का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही दिशा, सही ऊर्जा और सकारात्मक विचारों के साथ किया गया छोटा सा प्रयास भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।