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शिमला जाने से पहले क्या तैयारी करें? सफर को आरामदायक बनाने के जरूरी टिप्स

नई दिल्ली । अगर आप शिमला घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहद जरूरी है। सही प्लानिंग आपके ट्रिप को ज्यादा आरामदायक और बजट फ्रेंडली बना सकती है। खासकर पहाड़ी इलाकों में मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए तैयारी पहले से होना जरूरी है। 1. मौसम की जानकारी जरूर लेशिमला में मौसम जल्दी बदलता है।गर्मियों में हल्की ठंड रहती हैसर्दियों में बर्फबारी और तेज ठंड पड़ती हैमानसून में फिसलन और भूस्खलन का खतरा रहता हैयात्रा से पहले मौसम अपडेट जरूर चेक करें। 2. कपड़े सही पैक करेंगर्मियों में भी हल्की जैकेट रखेंसर्दियों में भारी ऊनी कपड़े, ग्लव्स और कैप जरूरी हैंआरामदायक स्पोर्ट्स शूज़ या ग्रिप वाले जूते पहनेंबारिश के मौसम में रेनकोट या छाता साथ रखें 3. होटल पहले से बुक करेसीजन के समय शिमला में होटल जल्दी फुल हो जाते हैं। इसलिए ऑनलाइन एडवांस बुकिंग करना बेहतर रहता है। मॉल रोड के पास होटल महंगे हो सकते हैं, जबकि थोड़ा दूर रहने पर बजट विकल्प मिल जाते हैं। 4. यात्रा के जरूरी दस्तावेज रखेंआधार कार्ड या अन्य आईडी प्रूफहोटल बुकिंग की कॉपीट्रेन/बस/फ्लाइट टिकटजरूरी दवाइयां और मेडिकल किट 5. रास्ते की तैयारी करेंअगर आप सड़क मार्ग से जा रहे हैं तो:गाड़ी की सर्विस पहले करा लेंब्रेक और टायर जरूर चेक करेंपहाड़ी रास्तों के लिए अनुभवी ड्राइवर बेहतर रहता है 6. घूमने की जगहों की लिस्ट बना लेंमॉल रोड, जाखू मंदिर, कुफरी और द रिज जैसी जगहें पहले से प्लान कर लें ताकि समय बच सके। 7. कैश और नेटवर्क का ध्यान रखेंकुछ पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क कमजोर हो सकता है। डिजिटल पेमेंट हर जगह उपलब्ध नहीं होता, इसलिए थोड़ा कैश साथ रखें। 8. स्वास्थ्य का रखें ध्याऊंचाई वाले इलाकों में कुछ लोगों को चक्कर या सांस की दिक्कत हो सकती है।पानी पर्याप्त पिएंज्यादा दौड़भाग से बचेंजरूरी दवाइयां साथ रखेंयात्रा को यादगार बनाने के लिएस्थानीय खानपान का आनंद लें, लेकिन साफ-सफाई का ध्यान रखें। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों से बचें और पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता का सम्मान करें।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों के लिए गाइड, इन बातों की अनदेखी पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली । कैलाश मानसरोवर यात्रा को हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन यह यात्रा जितनी आध्यात्मिक है, उतनी ही कठिन और चुनौतीपूर्ण भी है। तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक पहुंचने के लिए यात्रियों को 5000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों से गुजरना पड़ता है, जहां ऑक्सीजन का स्तर कम होता है और मौसम बेहद अनिश्चित रहता है। ऊंचाई और मौसम सबसे बड़ी चुनौतीइस यात्रा में सबसे बड़ी परेशानी हाई एल्टीट्यूड की होती है। यहां कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा तेज हवाएं, बर्फबारी और अचानक तापमान गिरना आम बात है, जिससे यात्रा और कठिन हो जाती है। यात्रा से पहले हेल्थ चेकअप जरूरविशेषज्ञों के अनुसार यात्रा पर जाने से पहले पूरी मेडिकल जांच कराना बेहद जरूरी है। खासकर जिन लोगों को–दिल की बीमारीब्लड प्रेशरडायबिटीजसांस से जुड़ी समस्याउनके लिए डॉक्टर की अनुमति के बिना यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। फिटनेस और तैयारी सबसे जरूरकैलाश मानसरोवर यात्रा में शारीरिक सहनशक्ति बेहद अहम भूमिका निभाती है। इसलिए यात्रा से कुछ महीने पहले ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए।रोजाना वॉक और हल्की दौड़प्राणायाम और एक्सरसाइजस्टैमिना बढ़ाने वाली गतिविधियांइससे शरीर ऊंचाई वाले वातावरण के लिए तैयार हो जाता है। सही समय का चयन भी जरूरीयात्रा के लिए मई से जून का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम अपेक्षाकृत साफ रहता है। जुलाई से सितंबर में बारिश और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जबकि नवंबर से अप्रैल तक भारी बर्फबारी के कारण यात्रा लगभग बंद रहती है। दस्तावेज और अनुमति जरूरीइस यात्रा के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज और अनुमति अनिवार्य हैं-वैध पासपोर्टचीन ग्रुप वीजातिब्बत ट्रैवल परमिटसरकारी अनुमतिआमतौर पर यह यात्रा अधिकृत एजेंसियों या सरकारी कार्यक्रमों के जरिए ही कराई जाती है। क्या-क्या सामान साथ रखें?यात्रा के दौरान मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए सही पैकिंग बहुत जरूरी है—गर्म कपड़े और थर्मल वियरवॉटरप्रूफ जैकेटमजबूत ट्रैकिंग शूजसनस्क्रीन, सनग्लासेस और टोपीग्लव्स और मफलर मेडिकल किट और जरूरी सामानयात्रा में सीमित सुविधाओं को देखते हुए मेडिकल किट साथ रखना जरूरी है, जिसमें शामिल हों—बुखार और दर्द की दवाएंडिहाइड्रेशन की दवाऊंचाई पर होने वाली समस्याओं की दवाएंएनर्जी बार और सूखे मेवेपानी शुद्ध करने वाली टेबलेट कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल आस्था की नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक तैयारी की भी परीक्षा है। सही योजना, फिटनेस और सावधानियों के साथ यह यात्रा सुरक्षित और यादगार अनुभव बन सकती है।

Vastu Tips: शनिवार को नमक दान करना शुभ है या अशुभ? जानें नियम

नई दिल्ली । वास्तु और ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन नमक का दान करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि इस दिन नमक दान करने से शनिदेव नाराज हो सकते हैं, जिससे व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।शनिवार को नमक दान करने से क्या हो सकते हैं नुकसान? आर्थिक तंगी और बरकत में कममान्यता है कि शनिवार को नमक दान करने से घर की सुख-समृद्धि प्रभावित हो सकती है। इससे धन हानि और आर्थिक परेशानियां बढ़ने की आशंका रहती है। नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाववास्तु शास्त्र के अनुसार नमक ऊर्जा से जुड़ी वस्तु माना जाता है। शनिवार को इसका दान या खरीदारी करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और कर्ज संबंधी परेशानियां सामने आ सकती हैं। परिवार में तनावऐसी भी मान्यता है कि शनिवार को नमक देने से परिवार के सदस्यों के बीच मतभेद और दूरी बढ़ सकती है। घर का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है। शनिवार को किन चीजों का दान करना शुभ माना गया है?शनिवार के दिन शनिदेव की कृपा पाने और शनि दोष कम करने के लिए इन चीजों का दान शुभ माना जाता है-सरसों का तेलकाले तिलउड़द की दालकाले कपड़े या कंबललोहे की वस्तुएंमान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। क्या करेंअगर शनिवार को किसी जरूरतमंद की मदद करनी हो, तो नमक की जगह अन्न, वस्त्र या तेल का दान करना बेहतर माना जाता है। साथ ही शनिदेव की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

शनिवार व्रत से जुड़े जरूरी नियम और धार्मिक मान्यताएं

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष चल रहा हो, उनके लिए शनिवार का व्रत बेहद लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक रखा गया शनिवार व्रत जीवन की बाधाओं, आर्थिक परेशानियों और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। हालांकि, कई लोग यह सवाल करते हैं कि क्या शनिदेव के लिए व्रत रखना सही है? ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यदि पूरी श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ व्रत रखा जाए तो यह शुभ फलदायी माना जाता है। शनिवार व्रत के प्रमुख नियम– सुबह जल्दी उठकर स्नान करेंशनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ काले, नीले या गहरे रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का ध्यान करें। पीपल के पेड़ की पूजाशनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे शनि दोष कम होता है। इन चीजों का करें दानशनिवार को काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, लोहे की वस्तुएं और कंबल का दान करना शुभ माना जाता है। हनुमानजी की पूजा भी करेंज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमानजी की पूजा करने से भी शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। शनिवार को हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ लाभकारी माना जाता है।

शनि दोष से बचना है तो जान लें जूते-चप्पल खरीदने के सही और गलत दिन

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र और ज्योतिष मान्यताओं में रोजमर्रा की चीजों की खरीदारी को भी शुभ-अशुभ से जोड़ा गया है। खासतौर पर जूते-चप्पल खरीदने को लेकर कई नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि गलत दिन पर जूते-चप्पल खरीदने से जीवन में नकारात्मकता, आर्थिक परेशानी और शनिदेव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। अमावस्या, मंगलवार, शनिवार और ग्रहण वाले दिन जूते-चप्पल खरीदने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन दिनों खरीदे गए फुटवियर दुर्भाग्य और मानसिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। शनिवार को जूते-चप्पल खरीदना क्यों माना जाता है अशुभ?ज्योतिष शास्त्र में पैरों का संबंध शनिदेव से माना गया है। इसलिए शनिवार के दिन जूते-चप्पल खरीदना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे शनि दोष बढ़ सकता है और व्यक्ति को आर्थिक तंगी, तनाव और पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। नए जूते-चप्पल खरीदने का सबसे शुभ दिन कौन सा है?वास्तु शास्त्र के अनुसार शुक्रवार का दिन नए जूते-चप्पल खरीदने और पहनने के लिए सबसे शुभ माना गया है। कहा जाता है कि शुक्रवार को खरीदे गए फुटवियर सुख-सुविधा और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आते हैं। पुराने जूते-चप्पल कब हटाने चाहिएमान्यता के अनुसार फटे-पुराने या इस्तेमाल में नहीं आने वाले जूते-चप्पल शनिवार के दिन किसी शनि मंदिर के बाहर छोड़ना शुभ माना जाता है। इससे शनि की अशुभ दृष्टि कम होती है और नकारात्मकता दूर होती है। जूते-चप्पल रखने से जुड़े वास्तु नियम बेड के नीचे जूते-चप्पल नहीं रखने चाहिएपूजा घर के पास फुटवियर रखना अशुभ माना जाता हैघर के मुख्य दरवाजे पर बिखरे जूते नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैंगंदे और टूटे फुटवियर घर में रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता हैवास्तु मान्यताओं के अनुसार साफ-सुथरे और व्यवस्थित जूते-चप्पल घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करते हैं।

छोटे बच्चों में मोटापा बढ़ना क्यों है चिंता की बात? जानें संभावित बीमारी

नई दिल्ली । आजकल छोटे बच्चों में तेजी से बढ़ता वजन माता-पिता के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है। अक्सर इसे ज्यादा खाना, जंक फूड या कम खेलकूद का असर मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार यह समस्या शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी, खासकर थायरॉइड बीमारी का संकेत हो सकती है। यदि बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा हो और साथ में थकान, सुस्ती, कमजोरी या पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी परेशानियां भी दिखाई दें, तो तुरंत सतर्क होने की जरूरत है। क्या होता है थायरॉइड और क्यों है जरूरी?थायरॉइड गले के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, ग्रोथ और दिमाग के विकास को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तो बच्चों की शारीरिक और मानसिक वृद्धि प्रभावित होने लगती है। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में सबसे आम समस्या हाइपोथायरॉइडिज्म होती है। इसमें थायरॉइड ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है। यह बीमारी कई बार आनुवंशिक भी हो सकती है और परिवार में पहले से मौजूद रहती है। बच्चों में दिख सकते हैं ये लक्षणअगर बच्चे में नीचे दिए गए लक्षण लगातार दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो जाता है—तेजी से वजन बढ़नाहमेशा थकान और सुस्ती रहनाकब्ज की समस्याठंड ज्यादा लगनाबालों का रूखा होनापढ़ाई में ध्यान कम लगनालंबाई की ग्रोथ धीमी होनागले में सूजन दिखाई देनाडॉक्टरों का कहना है कि केवल मोटापा हमेशा थायरॉइड का संकेत नहीं होता, लेकिन मोटापे के साथ सुस्ती और ग्रोथ रुकने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जन्म से भी हो सकती है बीमारीबाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ बच्चों में जन्म के समय से ही थायरॉइड की समस्या हो सकती है, जिसे जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज्म कहा जाता है। वहीं कई बच्चों में यह समस्या धीरे-धीरे बड़े होने के साथ विकसित होती है। हाइपरथायरॉइडिज्म भी बन सकता है परेशानीकुछ मामलों में बच्चों में हाइपरथायरॉइडिज्म भी देखने को मिलता है। इसमें थायरॉइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है। इसके कारण बच्चे का वजन तेजी से कम होने लगता है और घबराहट, चिड़चिड़ापन, दस्त और आंखों का उभरना जैसी समस्याएं सामने आती हैं। समय पर इलाज बेहद जरूरीविशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और इलाज शुरू कर दिया जाए तो थायरॉइड को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। इसकी पहचान साधारण ब्लड टेस्ट से हो जाती है। अधिकतर मामलों में बच्चों को रोजाना दवा देकर हार्मोन संतुलित रखे जाते हैं। अगर इलाज में देरी हो जाए तो बच्चे की शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास और पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए बच्चों के वजन और व्यवहार में अचानक बदलाव को सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

मिथुन राशि वालों के लिए सफलता और लाभ का दिन, कारोबार में बढ़ेंगे आय के स्रोत

नई दिल्ली। मिथुन राशि के जातकों के लिए 23 मई 2026 का दिन ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मक अवसरों से भरा रहेगा। कारोबार में नए आय स्रोत बनने के संकेत हैं, वहीं कार्यक्षेत्र में आपकी प्रभावशाली शैली लोगों को प्रभावित करेगी। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और मित्रों व सहकर्मियों से बेहतर तालमेल बना रहेगा। आपको व्यापार में तेजी देखने को मिल सकती है। पुराने रुके हुए काम गति पकड़ेंगे और नए संपर्क भविष्य में लाभ दिला सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी दिन अनुकूल रहेगा। अधिकारी आपके काम से प्रभावित होंगे और टीमवर्क मजबूत होगा। पारिवारिक जीवन में सुखद वातावरण बना रहेगा। भाईचारा और रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी। मन की बात खुलकर कह पाएंगे और परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। यात्रा के योग भी बन रहे हैं, जो लाभदायक साबित हो सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। निवेश और नए कार्यों में लाभ मिलने की संभावना है। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से दिन अच्छा रहेगा। मानसिक उत्साह और ऊर्जा बनी रहेगी। योग और ध्यान से और अधिक सकारात्मकता महसूस करेंगे। शुभ रंग: आसमानीशुभ अंक: 2, 5, 8उपाय: शनिदेव और हनुमानजी का स्मरण करें, तिल का दान करें और सभी के प्रति समभाव बनाए रखें।

23 मई 2026 का राशिफल: किस राशि का दिन रहेगा शानदार, जानें भविष्यफल

नई दिल्ली। 23 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं लेकर आ रहा है। खासतौर पर कुंभ राशि वालों के रुके हुए काम पूरे हो सकते हैं, जबकि तुला राशि के जातकों को व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के योग हैं। मिथुन और सिंह राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, वहीं मकर और कन्या राशि को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेषमेष राशि वालों के लिए दिन उत्साह और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता बढ़ेगी और विरोधी भी दबाव में रहेंगे। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक स्थिति संतुलित बनी रहेगी। योग और ध्यान से स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वृषवृष राशि वालों को पारिवारिक मामलों में धैर्य रखने की जरूरत है। जल्दबाजी से नुकसान हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और वाहन या संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। मिथुनमिथुन राशि वालों के लिए दिन बेहद सकारात्मक रहेगा। व्यापार में तेजी आएगी और सामाजिक दायरा बढ़ेगा। भाईचारा और रिश्तों में मजबूती आएगी। यात्रा लाभकारी साबित हो सकती है। मन प्रसन्न रहेगा। कर्ककर्क राशि वालों को आर्थिक मामलों में सफलता मिल सकती है। परिवार में सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी। व्यापार में आकर्षक अवसर मिलेंगे। प्रियजनों से मुलाकात संभव है और मानसिक उत्साह बना रहेगा। सिंहसिंह राशि वालों का प्रभाव और सम्मान बढ़ेगा। नई योजनाओं को गति मिलेगी। मित्रों और सहयोगियों का साथ मिलेगा। यात्रा के योग बन रहे हैं। परिवार में प्रेम और भावनात्मक संतुलन बना रहेगा। कन्याकन्या राशि वालों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। निवेश और लेनदेन में सावधानी बरतें। कार्यस्थल पर नियमों की अनदेखी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। तुलातुला राशि वालों के लिए व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। पुराने रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा और प्रभावशाली लोगों का सहयोग मिलेगा। रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। वृश्चिकवृश्चिक राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के अवसर बन रहे हैं। प्रशासन और अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के योग हैं। स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। धनुधनु राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलने वाला है। धार्मिक गतिविधियों और यात्राओं में रुचि बढ़ेगी। नए अनुबंध और लाभ के अवसर सामने आएंगे। मित्रों का सहयोग मिलेगा। मकरमकर राशि वालों को स्वास्थ्य और खर्चों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। भावनात्मक दबाव बढ़ सकता है। लेनदेन में स्पष्टता रखें और किसी भी निर्णय में जल्दबाजी न करें। कुंभकुंभ राशि वालों के लिए दिन बेहद शुभ संकेत लेकर आया है। लंबे समय से रुका हुआ बड़ा काम पूरा हो सकता है। व्यापार में लाभ बढ़ेगा और टीमवर्क से सफलता मिलेगी। परिवार में सामंजस्य रहेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मीनमीन राशि वालों को कामकाज में अनुशासन बनाए रखने की जरूरत है। निवेश सोच-समझकर करें। रिश्तों में धैर्य रखें और अफवाहों से दूर रहें। स्वास्थ्य को लेकर सजग रहना जरूरी होगा।

राम गोपाल वर्मा का अजीब बयान, माइकल जैक्सन से नफरत के बावजूद दिल आज भी भारी

नई दिल्ली । फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा एक बार फिर अपने बेबाक और अप्रत्याशित बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने विश्वविख्यात पॉप स्टार माइकल जैक्सन को लेकर ऐसा भावुक और विरोधाभासी बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वर्मा ने अपने एक पोस्ट में न केवल माइकल जैक्सन के प्रति अपने गहरे जुड़ाव का जिक्र किया, बल्कि यह भी कहा कि वे उनसे ‘नफरत’ करते हैं, हालांकि यह भावना उनके अत्यंत सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हुई है। निर्देशक ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि माइकल जैक्सन के काम ने उनके जीवन और सोच पर गहरा प्रभाव डाला था। उन्होंने कहा कि 1984 में विजयवाड़ा में एक छोटे से अंधेरे वीडियो पार्लर में पहली बार उन्होंने माइकल का प्रसिद्ध म्यूजिक वीडियो देखा था। उस अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वह केवल एक गाना या प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक असाधारण ऊर्जा और कला का विस्फोट था, जिसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनके अनुसार माइकल की स्टेज प्रेजेंस, डांस और संगीत की शक्ति इतनी प्रभावशाली थी कि वह किसी अलौकिक अनुभव जैसी लगती थी। राम गोपाल वर्मा ने यह भी कहा कि माइकल जैक्सन के कई गाने और वीडियो उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। “बीट इट”, “बिली जीन”, “स्मूथ क्रिमिनल” और “ब्लैक ऑर व्हाइट” जैसे गीत उनके लिए केवल संगीत नहीं बल्कि एक तरह की कला की पाठशाला जैसे थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कई बार माइकल की शैली और प्रस्तुति से प्रेरणा ली। हालांकि, उनके बयान का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब उन्होंने माइकल जैक्सन की मृत्यु को याद किया। उन्होंने बताया कि 25 जून 2009 की सुबह जब उन्होंने समाचार देखा कि माइकल अब नहीं रहे, तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। यह खबर उनके लिए बेहद सदमे वाली थी और उन्होंने इसे एक बुरे सपने जैसा महसूस किया। लंबे समय तक यह खबर उनके मन को विचलित करती रही। वर्मा ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि वे माइकल जैक्सन से ‘नफरत’ करते हैं, लेकिन यह नफरत किसी नकारात्मक भावना से नहीं बल्कि उस दर्द से जुड़ी है जो उनकी मृत्यु ने उन्हें दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि माइकल भी एक सामान्य इंसान थे, जिनका दिल रुक सकता था और जिन्हें सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत थी। यही वास्तविकता उन्हें सबसे ज्यादा आहत करती है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि माइकल के प्रति उनका सम्मान और प्रेम इतना गहरा है कि उसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार माइकल जैक्सन आज भी अपने संगीत और कला के माध्यम से जीवित हैं और शायद किसी अलग आकाशीय दुनिया में अपनी अनोखी “मूनवॉक” जारी रखे हुए हैं।

आर.डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जादुई रचना का खुलासा, विशाल ददलानी ने बताया ‘चिंगारी कोई भड़के’ का अनसुना किस्सा

नई दिल्ली /मुंबई। हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर के कई गीत आज भी लोगों की यादों में उतने ही ताज़ा हैं जितने अपने समय में थे। ऐसे ही एक अमर गीत ‘चिंगारी कोई भड़के’ के बनने की कहानी हाल ही में संगीतकार और गायक विशाल ददलानी ने साझा की, जिसने एक बार फिर इस क्लासिक गीत के प्रति लोगों की रुचि बढ़ा दी है। यह किस्सा न केवल संगीत की रचनात्मकता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक साधारण जीवन अनुभव कालजयी कला में बदल सकता है। विशाल ददलानी ने एक सिंगिंग रियलिटी शो के दौरान इस गीत की पृष्ठभूमि का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस गीत की धुन मशहूर संगीतकार आर. डी. बर्मन ने तैयार की थी, जिन्हें संगीत की दुनिया में पंचम दा के नाम से जाना जाता है। धुन तैयार होने के बाद इसे गीतकार आनंद बख्शी को दिया गया ताकि वह इसके बोल लिख सकें। कहानी के अनुसार, उस समय मौसम बेहद सुहावना था और बारिश हो रही थी। आनंद बख्शी देर रात घर लौट रहे थे, और रास्ते में उन्होंने सिगरेट जलाने की कोशिश की। लेकिन लगातार बारिश की वजह से उनका लाइटर बार-बार बुझ जा रहा था। यह बेहद साधारण सा पल था, लेकिन इसी क्षण ने उनके मन में एक गहरी कल्पना को जन्म दिया। उन्हीं परिस्थितियों में उनके दिमाग में एक ऐसी पंक्ति आई, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार गीतों में से एक बन गई—“चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए।” यह पंक्ति केवल एक गीत का हिस्सा नहीं बनी, बल्कि भावनाओं और प्रतीकों का ऐसा संगम बन गई, जिसने सुनने वालों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। विशाल ददलानी ने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि असली कलाकार वही होता है जो जीवन के छोटे-छोटे पलों को भी गहराई से महसूस करता है और उन्हें कला में बदल देता है। उनके अनुसार, सामान्य लोग ऐसे अनुभवों को शायद नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन महान रचनाकार उन्हीं क्षणों को अमर बना देते हैं। उन्होंने आर. डी. बर्मन और आनंद बख्शी की जोड़ी को भारतीय संगीत का एक अनमोल रत्न बताया। यह गीत वर्ष 1972 में रिलीज हुई फिल्म ‘अमर प्रेम’ का हिस्सा था, जिसमें राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। फिल्म के साथ-साथ इसके गीतों ने भी दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ‘चिंगारी कोई भड़के’ को प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी, जिसने इस गीत को और भी भावनात्मक और प्रभावशाली बना दिया। आज भी यह गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतनी ही लोकप्रियता रखता है जितनी इसके रिलीज के समय थी। इसकी गहराई, शब्दों की सादगी और संगीत की भावनात्मक पकड़ इसे समय से परे एक क्लासिक बनाती है। विशाल ददलानी द्वारा साझा किया गया यह किस्सा एक बार फिर याद दिलाता है कि महान कला अक्सर सबसे साधारण क्षणों से जन्म लेती है।