Animal Welfare: स्ट्रे डॉग्स विवाद पर गरमाई बहस, सोनम बाजवा ने उठाई संवेदनशील समाधान की मांग

Animal Welfare: नई दिल्ली। देश में स्ट्रे डॉग्स को लेकर चल रही बहस एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे पर अभिनेत्री सोनम बाजवा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से अपील करते हुए बेजुबान जानवरों के लिए उचित व्यवस्था और शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि समस्या का समाधान केवल हटाने से नहीं बल्कि एक व्यवस्थित और मानवीय दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। सोनम बाजवा ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को गलत तरीके से समझा जा रहा है। उनके अनुसार अदालत ने स्ट्रे डॉग्स को पूरी तरह हटाने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल, वैक्सीनेशन और शेल्टरिंग जैसे उपायों के जरिए समस्या के समाधान की बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली सवाल यह है कि आखिर इन जानवरों के लिए पर्याप्त शेल्टर और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर कहां है। अभिनेत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ दया और जिम्मेदारी का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर दोबारा विचार किया जाए और ऐसा समाधान निकाला जाए जो मानव और पशु दोनों के हित में हो। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर पशु कल्याण से जुड़े विशेषज्ञों, एनजीओ, पशु चिकित्सकों और प्रशासनिक अधिकारियों को एक साथ बैठाकर एक व्यावहारिक योजना तैयार की जानी चाहिए। उनके अनुसार केवल सख्त कदम उठाना समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता, बल्कि एक व्यवस्थित नीति और मजबूत ढांचे की जरूरत है। यह मुद्दा उस समय और अधिक चर्चा में आ गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने स्ट्रे डॉग्स से जुड़े मामलों में राज्य सरकारों को एबीसी कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी कहा है कि कई क्षेत्रों में इस कार्यक्रम के सही तरीके से लागू न होने के कारण समस्या लगातार बढ़ रही है और इससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर चिंता भी बढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कई राज्यों में इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है, जहां एक तरफ सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात हो रही है तो दूसरी तरफ पशु अधिकारों और उनके संरक्षण की मांग भी उठ रही है। सोनम बाजवा की यह अपील इसी बहस को एक नया दृष्टिकोण देती है, जिसमें समाधान को केवल नियंत्रण तक सीमित न रखकर एक संवेदनशील और व्यवस्थित नीति की जरूरत पर जोर दिया गया है।
जेनजी में बढ़ती लोकप्रियता पर बोले जैकी श्रॉफ, इंसानियत और अपनापन ही मेरी असली पहचान है

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ अपनी अलग शैली, सहज व्यक्तित्व और दमदार अभिनय के लिए लंबे समय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाए हुए हैं। 80 और 90 के दशक में बड़े पर्दे पर अपनी छाप छोड़ने के बाद भी आज वह नई पीढ़ी यानी जेनजी के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया से लेकर युवा दर्शकों तक उनकी बढ़ती लोकप्रियता लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। इसी बीच अपनी आगामी फिल्म के प्रमोशन के दौरान बातचीत में जैकी श्रॉफ ने अपनी इस लोकप्रियता का कारण बेहद सरल शब्दों में बताया। उन्होंने कहा कि वह हमेशा लोगों को उम्र के आधार पर नहीं देखते, बल्कि इंसानियत और व्यवहार को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। उनके अनुसार कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो, हर किसी के साथ समान सम्मान और अपनापन रखना ही उनके स्वभाव की असली पहचान है। अभिनेता ने कहा कि उनके लिए जीवन में सबसे महत्वपूर्ण चीज इंसानी रिश्ते हैं। वह मानते हैं कि जब कोई व्यक्ति अपने दिल को खुला रखता है और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनता है, तो संबंध अपने आप मजबूत हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, इसलिए खुद को किसी से बड़ा या बेहतर समझना सही नहीं है। जैकी श्रॉफ ने यह भी बताया कि वह हमेशा लोगों के साथ सहजता से जुड़ने की कोशिश करते हैं, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। उनके अनुसार जब व्यवहार में सादगी और अपनापन होता है, तो पीढ़ियों के बीच की दूरी अपने आप खत्म हो जाती है। यही कारण है कि वह अलग-अलग उम्र के दर्शकों से आसानी से जुड़ पाते हैं और उनकी लोकप्रियता हर पीढ़ी में बनी रहती है। नई दिल्ली। अपनी आगामी फिल्म को लेकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें एक अनोखी और अलग सोच को दिखाया गया है। फिल्म में उनका किरदार एक दादा का है, जो अपने पोते के साथ दोस्त जैसा रिश्ता साझा करता है। यह कहानी पारिवारिक संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से पेश करती है, जहां उम्र की दीवारें रिश्तों को सीमित नहीं करतीं। अभिनेता ने कहा कि इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका नया कॉन्सेप्ट है, जो पारंपरिक सोच से हटकर एक ताजा अनुभव देता है। यह फिल्म यह संदेश देती है कि प्यार, समझ और अपनापन किसी भी पीढ़ी के बीच दूरी को खत्म कर सकता है। जैकी श्रॉफ का यह नजरिया न केवल उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक कलाकार अपने व्यवहार और सोच के जरिए सभी उम्र के दर्शकों से जुड़ा रह सकता है। उनकी सरलता और मानवीय दृष्टिकोण ही उन्हें आज भी दर्शकों के बीच खास बनाता है।
कमल हासन की देशवासियों से अपील: संकट के समय राजनीति नहीं, राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने देशवासियों से एकजुटता और जिम्मेदारी की अपील की है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा समय केवल आर्थिक चुनौती नहीं है, बल्कि यह ऐसा दौर है जब पूरे देश को मिलकर राष्ट्रहित में सोचने और कार्य करने की आवश्यकता है। कमल हासन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान क्षेत्र में जारी संघर्षऔर समुद्री व्यापार मार्गों में बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं। इसके कारण पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल सरकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी जिम्मेदारी का समय है। कमल हासन ने लोगों से अपील की कि वे ईंधन और बिजली की खपत कम करने जैसे छोटे-छोटे कदम उठाकर देश की आर्थिक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश पहले ही ऊर्जा संरक्षण को लेकर सख्त नीतियां अपना चुके हैं और नागरिकों को जागरूक किया जा रहा है। अपने संदेश में उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए कहा कि संकट के समय भारत ने हमेशा एकजुटता दिखाई है। उन्होंने 1962 के युद्ध और 1965 के खाद्य संकट का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय देशवासियों ने त्याग और सहयोग की मिसाल पेश की थी। उन्होंने कहा कि आज भले ही परिस्थितियां उतनी गंभीर न हों, लेकिन सामूहिक जिम्मेदारी उतनी ही आवश्यक है। कमल हासन ने यह भी कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, कोल गैसीफिकेशन और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने इस प्रयास को सकारात्मक बताते हुए कहा कि विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करना दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से भी अपील की कि वे मिलकर ईंधन पर लगने वाले करों में संतुलन लाएं और सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ और किफायती बनाएं। उनका कहना था कि यदि बस, ट्रेन और मेट्रो जैसे साधनों को बढ़ावा दिया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ईंधन की बचत संभव होगी। कमल हासन ने अपने संदेश में प्रधानमंत्री से सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक संयुक्त बैठक बुलाने का भी आग्रह किया, ताकि ऊर्जा संकट और उससे जुड़ी चुनौतियों पर सामूहिक रणनीति बनाई जा सके। उन्होंने कहा कि देश को इस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है, क्योंकि राष्ट्रहित सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि देशवासी मिलकर ऊर्जा बचत और जिम्मेदारी से खपत की दिशा में कदम उठाते हैं, तो भारत इस वैश्विक संकट से और अधिक मजबूत होकर बाहर निकल सकता है। उनके अनुसार, आज बचाया गया हर यूनिट बिजली और हर लीटर ईंधन भविष्य की पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण निवेश है।
दूध की सही पहचान भी नहीं कर पाया AI, स्टारबक्स ने बंद किया हाईटेक इन्वेंट्री सिस्टम

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनियाभर में जहां तेज़ी से चर्चाएं हो रही हैं और इसे भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक माना जा रहा है, वहीं हाल ही में सामने आया एक मामला इस तकनीक की सीमाओं को भी उजागर कर रहा है। मशहूर कॉफी चेन स्टारबक्स को अपने AI आधारित इन्वेंट्री सिस्टम को बंद करना पड़ा, क्योंकि यह तकनीक सामान्य प्रोडक्ट्स की पहचान करने में भी लगातार गलतियां कर रही थी। कंपनी ने अपने उत्तरी अमेरिकी स्टोर्स में इन्वेंट्री मैनेजमेंट को आसान और तेज़ बनाने के लिए AI पावर्ड प्रोग्राम शुरू किया था। इसका उद्देश्य स्टोर्स में प्रोडक्ट की कमी जैसी समस्याओं को कम करना और बिक्री को बेहतर बनाना था। इस सिस्टम में कैमरे और अत्याधुनिक LIDAR तकनीक का इस्तेमाल किया गया था, जिसके जरिए अलमारियों में रखे सामान को ऑटोमेटिक तरीके से स्कैन किया जाता था। इस तकनीक का मकसद यह था कि कर्मचारियों को हाथ से सामान गिनने की जरूरत न पड़े और पूरी प्रक्रिया तेज़ व अधिक सटीक हो जाए। लेकिन वास्तविक परिस्थितियों में यह सिस्टम उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। कई मामलों में AI ने प्रोडक्ट्स की गलत गिनती की, कुछ सामानों पर गलत लेबल लगाए और कई बार कुछ चीजों को पूरी तरह पहचान ही नहीं पाया। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि सिस्टम अलग-अलग प्रकार के दूध के कार्टनों में अंतर करने में भी भ्रमित हो गया। ओट मिल्क, बादाम मिल्क और अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स के बीच सही पहचान करने में AI को कठिनाई हुई, जबकि यह काम सामान्य कर्मचारी कुछ ही सेकंड में आसानी से कर लेते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या AI वास्तव में इंसानों की जगह लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा प्रोसेसिंग और ऑटोमेशन में भले ही बेहद प्रभावशाली हो, लेकिन असली दुनिया की छोटी-छोटी बारीकियों को समझना अब भी इसके लिए चुनौती बना हुआ है। पैकेजिंग में मामूली बदलाव, लेबल का रंग या डिजाइन जैसी चीजें कई बार AI सिस्टम को भ्रमित कर देती हैं। कंपनी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, लगातार आ रही तकनीकी दिक्कतों के बाद अब ऑटोमेटेड काउंटिंग सिस्टम को बंद करने का फैसला लिया गया है। इसके साथ ही स्टोर्स में फिर से पुराने तरीके से इन्वेंट्री की गिनती शुरू कर दी गई है। यानी अब कर्मचारी खुद हाथ से दूध, सिरप और ड्रिंक बनाने के अन्य सामान की जांच करेंगे। यह मामला केवल एक तकनीकी असफलता नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे AI की वास्तविक क्षमता और उसकी सीमाओं को समझने वाले बड़े उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में AI को लेकर यह धारणा तेजी से बनी कि यह इंसानी नौकरियों की जगह ले सकता है, लेकिन इस घटना ने यह दिखाया है कि अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इंसानी अनुभव, समझ और बारीकी से काम करने की क्षमता मशीनों से कहीं आगे है। फिलहाल यह स्पष्ट हो गया है कि तकनीक कितनी भी आधुनिक क्यों न हो, लेकिन हर स्थिति में इंसानी निगरानी और अनुभव की भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती।
घर में लगा Smart TV बढ़ा रहा है बिजली बिल? जानिए कौन सा मॉडल खाता है सबसे ज्यादा बिजली और कैसे करें बचत

नई दिल्ली। आधुनिक दौर में Smart TV सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि यह हर घर का अहम हिस्सा बन चुका है। बड़ी स्क्रीन, 4K क्वालिटी और ऑनलाइन कंटेंट देखने की बढ़ती आदतों के कारण लोग अब पहले से ज्यादा समय टीवी के सामने बिताने लगे हैं। हालांकि इसी के साथ एक सवाल भी तेजी से चर्चा में है कि क्या Smart TV वास्तव में बिजली बिल को बढ़ा देता है और अगर हां, तो कौन से मॉडल सबसे ज्यादा बिजली की खपत करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी Smart TV की बिजली खपत उसकी वॉट क्षमता, स्क्रीन साइज और डिस्प्ले तकनीक पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर छोटे स्क्रीन वाले टीवी कम बिजली इस्तेमाल करते हैं, जबकि बड़े और हाई-रिजॉल्यूशन मॉडल ज्यादा पावर खपत करते हैं। उदाहरण के लिए 32 इंच का सामान्य LED Smart TV सीमित बिजली उपयोग करता है, लेकिन 55 इंच या उससे बड़े 4K टीवी लंबे समय तक चलने पर बिजली बिल में बड़ा अंतर पैदा कर सकते हैं। डिस्प्ले टेक्नोलॉजी भी बिजली खपत में अहम भूमिका निभाती है। OLED टीवी अपनी शानदार पिक्चर क्वालिटी और गहरे रंगों के लिए पसंद किए जाते हैं, लेकिन इनकी स्क्रीन ब्राइटनेस अधिक होने पर बिजली खपत भी बढ़ जाती है। खासकर बड़े OLED मॉडल लंबे समय तक उपयोग में अधिक यूनिट खर्च कर सकते हैं। वहीं QLED टीवी भी हाई ब्राइटनेस और बेहतर कलर क्वालिटी के कारण मध्यम से अधिक बिजली उपयोग करते हैं, हालांकि कुछ मामलों में इनकी खपत OLED से कम मानी जाती है। इसके मुकाबले सामान्य LED Smart TV बिजली बचाने के लिहाज से बेहतर विकल्प माने जाते हैं। छोटे और मिड-साइज LED टीवी घरेलू उपयोग के लिए काफी संतुलित माने जाते हैं क्योंकि इनमें बिजली की खपत अपेक्षाकृत कम होती है। यही कारण है कि बजट और बिजली बचत दोनों को ध्यान में रखने वाले लोग LED मॉडल को प्राथमिकता देते हैं। स्क्रीन साइज बढ़ने के साथ बिजली खपत भी बढ़ती जाती है। छोटे टीवी सामान्य उपयोग में कम यूनिट खर्च करते हैं, जबकि बड़े स्क्रीन वाले मॉडल लगातार चलने पर मासिक बिजली बिल पर सीधा असर डालते हैं। खासकर अगर टीवी रोज कई घंटे तक चलता है तो उसका प्रभाव साफ दिखाई देता है। हालांकि कुछ आसान आदतों को अपनाकर बिजली खर्च को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। टीवी की ब्राइटनेस जरूरत से ज्यादा न रखना, उपयोग के बाद उसे पूरी तरह बंद करना और पावर सेविंग मोड का इस्तेमाल करना बिजली बचाने में मददगार साबित होता है। कई लोग टीवी को केवल रिमोट से बंद कर स्टैंडबाय मोड में छोड़ देते हैं, जिससे भी लगातार बिजली खर्च होती रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि नया Smart TV खरीदते समय सिर्फ स्क्रीन साइज और फीचर्स पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी बिजली खपत को समझना भी जरूरी है। सही मॉडल का चयन और संतुलित उपयोग न केवल बिजली बिल को नियंत्रित कर सकता है बल्कि लंबे समय में आर्थिक बचत भी सुनिश्चित करता है।
बांसुरी, मोर पंख और देसी अंदाज: कान्स में सान्या ठाकुर ने भारतीय परंपरा को बनाया ग्लोबल आकर्षण

नई दिल्ली । दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल कान्स फिल्म फेस्टिवल में इस बार भारतीय संस्कृति की एक अनोखी और आध्यात्मिक झलक देखने को मिली, जब बिहार की अभिनेत्री सान्या ठाकुर ने ‘राधा रानी’ से प्रेरित अपने विशेष लुक के साथ रेड कार्पेट पर कदम रखा। ग्लैमर और फैशन से भरे इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर सान्या का यह पारंपरिक और सांस्कृतिक अंदाज हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचता नजर आया। सान्या ठाकुर का यह लुक केवल फैशन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारतीय परंपरा, कृष्ण भक्ति और सांस्कृतिक सौंदर्य का गहरा समावेश दिखाई दिया। जैसे ही उन्होंने रेड कार्पेट पर एंट्री ली, उनका देसी अंदाज विदेशी मेहमानों और फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया। बांसुरी, मोर पंख और पारंपरिक श्रृंगार के साथ सान्या ने ऐसा प्रभाव छोड़ा, जिसने उनके लुक को साधारण फैशन से कहीं आगे पहुंचा दिया। सान्या ने इस खास मौके के लिए भारी कढ़ाई वाला पारंपरिक लहंगा चुना, जिसमें भारतीय कला और शिल्प की खूबसूरत झलक दिखाई दी। उनके लहंगे में ऑफ-व्हाइट और क्रीम बेस के साथ पेस्टल रंगों की बारीक कढ़ाई की गई थी। फ्लोरल और ट्रेडिशनल मोटिफ्स से सजा यह परिधान बेहद आकर्षक और शाही नजर आ रहा था। सिल्वर थ्रेड, मिरर वर्क और सेक्विन डिटेलिंग ने पूरे आउटफिट को और अधिक भव्य बना दिया। लहंगे के साथ उन्होंने मैचिंग ब्लाउज और हल्के डिजाइन वाला नेट दुपट्टा कैरी किया, जिसने उनके लुक में संतुलन और ग्रेस जोड़ दिया। सान्या की स्टाइलिंग में हर छोटी डिटेल पर विशेष ध्यान दिया गया था। माथा पट्टी, बड़े झुमके, रंग-बिरंगी चूड़ियां और हाथों में आलता उनके पारंपरिक रूप को और निखार रहे थे। वहीं नथ और हल्के नेकलेस ने पूरे लुक को एक शास्त्रीय और पौराणिक स्पर्श दिया। हालांकि उनके पूरे लुक की सबसे बड़ी खासियत रही बांसुरी और मोर पंख की डिटेलिंग, जिसने ‘राधा रानी’ की थीम को जीवंत कर दिया। बालों को सॉफ्ट कर्ल्स के साथ स्टाइल करते हुए उसमें गजरा लगाया गया था, जबकि हाथ में थामी बांसुरी और उस पर सजा मोर पंख उनके कृष्ण भक्ति वाले रूप को और प्रभावशाली बना रहा था। मेकअप को भी बेहद सॉफ्ट और पारंपरिक रखा गया। ग्लॉसी पिंक लिप्स, हल्के रंगों का प्रयोग और माथे पर कुमकुम से बनाई गई फूलों जैसी बिंदी ने उनके चेहरे की सुंदरता को और उभार दिया। यह पूरा अंदाज किसी पौराणिक चित्र या सांस्कृतिक प्रस्तुति जैसा प्रतीत हो रहा था, जिसने रेड कार्पेट पर मौजूद लोगों को खासा प्रभावित किया। कुल मिलाकर, सान्या ठाकुर का यह कान्स डेब्यू केवल एक फैशन स्टेटमेंट नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अंतरराष्ट्रीय मंच पर खूबसूरत प्रदर्शन बन गया। आधुनिक ग्लैमर की भीड़ में उनका यह एथनिक और सांस्कृतिक रूप सबसे अलग और यादगार नजर आया।
MP SUGAM PARIVAHAN YOJNA: गांव से शहर तक आसान सफर! MP में शुरू होगी ‘सुगम परिवहन सेवा योजना’

HIGHLIGHTS: MP में जल्द शुरू होगी सुगम परिवहन सेवा योजना पहले चरण में 5,206 बसें सड़कों पर उतरेंगी 1,164 मार्गों पर दो साल में होगा संचालन 7 बड़े क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से चलेगी योजना सभी बसों की मॉनिटरिंग के लिए बनेगा इंटेलीजेंट सिस्टम MP SUGAM PARIVAHAN YOJNA: भोपाल। मध्य प्रदेश में जल्द ही सार्वजनिक परिवहन का चेहरा बदलने वाला है। चूँकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘सुगम परिवहन सेवा योजना’ शुरू करने का बड़ा ऐलान किया है। बता दें कि इस योजना के तहत प्रदेशभर में हजारों नई बसें चलाई जाएंगी, ताकि आम लोगों को सुरक्षित, सुलभ और बेहतर यात्रा सुविधा मिल सके। सरकार का दावा है कि यह योजना सिर्फ सफर आसान नहीं बनाएगी, बल्कि प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी नई रफ्तार देगी। विधायक अरुण भीमावद ने किया गौशाला का शिलान्यास, परिसर में बनेगा तालाब पहले चरण में 5 हजार से ज्यादा बसें दौड़ेंगी मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में कुल 5,206 बसें चलाई जाएंगी। साथ ही इन बसों का संचालन अगले दो वर्षों में 1,164 मार्गों पर किया जाएगा। बताया जा रहा है कि सरकार ने इसके लिए विभागीय अधिसूचना भी जारी कर दी है। खास बात यह है कि बसों को क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय और ग्रामीण इलाकों तक जोड़ा जाएगा, जिससे दूरदराज के लोगों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। माचलपुर नाइट क्रिकेट टूर्नामेंट में रोमांच, कई टीमों ने दिखाया दम 7 बड़े क्षेत्रों में चलेगी योजना सूचना को मुताबिक यह योजना दो चरणों में लागू की जाएगी इसके लिए प्रदेश को 7 प्रमुख क्षेत्र इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सागर, ग्वालियर और रीवा में बांटा गया है। सरकार का कहना है कि ग्रामीण नेटवर्क विस्तार और महिला सुरक्षा इस योजना की सबसे बड़ी प्राथमिकता होंगी। पहले चरण में इंदौर क्षेत्र में 608 बसें, उज्जैन में 371 और भोपाल क्षेत्र में 398 बसें चलाई जाएंगी। सभी बसों का रंग एक जैसा होगा, ताकि प्रदेशभर में एक समान परिवहन पहचान बनाई जा सके। MP सरकार के नए ट्रांसफर नियम लागू, कर्मचारियों के लिए अहम अपडेट सिर्फ बसें नहीं, पूरा सिस्टम बदलेगा सरकार इस योजना को हाईटेक बनाने की तैयारी कर रही है। बसों की निगरानी और संचालन के लिए इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जा रहा है, जिससे रूट, टाइमिंग और सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा सके।
गजकेसरी और बुधादित्य योग का शुभ संयोग, आज से इन 5 राशियों के तरक्की और धन लाभ के योग

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज ग्रहों की विशेष स्थिति से गजकेसरी योग और बुधादित्य योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह योग बेहद शुभ माना जाता है और इसका प्रभाव कई राशियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। गजकेसरी योग गुरु बृहस्पति और चंद्रमा की युति से बनता है, जो सुख-समृद्धि और मान-सम्मान प्रदान करता है। वहीं सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग बुद्धि, करियर और व्यापार में सफलता दिलाने वाला माना गया है। इन दोनों शुभ योगों के प्रभाव से 5 राशियों के लिए आज से अच्छे दिनों की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से अटके कार्य पूरे हो सकते हैं और आर्थिक लाभ के भी मजबूत योग बन रहे हैं। मेष राशिमेष राशि वालों के लिए यह समय बेहद अनुकूल रहने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। व्यापार में नई डील या बड़ा लाभ मिलने के संकेत हैं। सरकारी कार्यों या कानूनी मामलों में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों को बुध की शुभ स्थिति का विशेष लाभ मिल सकता है। धन लाभ के प्रबल योग बन रहे हैं। पुराने निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है। निर्णय क्षमता मजबूत रहेगी। सिंह राशिसिंह राशि वालों का आत्मविश्वास और प्रभाव बढ़ने वाला है। नौकरी बदलने की कोशिश कर रहे लोगों को सफलता मिल सकती है। कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी। वाहन या प्रॉपर्टी खरीदने की योजना साकार हो सकती है। तुला राशितुला राशि के लिए यह योग आर्थिक और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं, जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पुराने कर्ज से राहत मिलने की संभावना है। परिवार में चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिलने के योग हैं। धनु राशिगुरु ग्रह की कृपा से धनु राशि पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक शुभ माना जा रहा है। रुके हुए कार्यों में तेजी आएगी। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास सफल हो सकते हैं। कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं। बड़े प्रोजेक्ट या ऑर्डर मिलने से प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
OTT से बॉलीवुड तक अपनी अदाओं का जादू बिखेर चुकी सपना पब्बी अब ‘बंदर’ में बनेंगी बॉबी देओल की सबसे बड़ी मुसीबत

नई दिल्ली । टीवी शो ‘घर आजा परदेसी’ और ’24’ में उन्हें अहम किरदार निभाते देखा गया. एक वक्त पर वो यामी गौतम के साथ ‘फेयर एंड लवली’ के विज्ञापन में भी नजर आई करती थीं. 2015 में फिल्म ‘खामोशियां’ से उन्होंने अपना बॉलीवुड डेब्यू किया था. पिक्चर में अली फजल संग केमिस्ट्री और बोल्ड सीन्स के चलते उनके खूब चर्चे हुए थे. हिंदी के साथ-साथ सपना पब्बी ने पंजाबी और तेलुगू सिनेमा में भी काम किया है. उन्हें ‘टोली प्रेमा’, ‘मार गए ओए लोको’, ‘अरदास करां’, ‘ड्राइव’, ‘सार्जेंट’, ‘सरदार जी 3’ जैसी फिल्मों में देखा गया है. जल्द सपना, फिल्म ‘बंदर’ में नजर आएंगी. इस पिक्चर का प्रीमियर 2025 में हुए टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल यानी TIFF में हुआ था. टेलीवीजन और फिल्मी दुनिया के साथ-साथ सपना पब्बी का दबदबा ओटीटी की दुनिया में भी खूब है. उन्हें ‘द ट्रिप’, ‘ब्रीद’, ‘बॉम्बर्स’, ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’, ‘इनसाइड एज’, ‘लंदन फाइल्स’, नेवर किस योर बेस्ट फ्रेंड 2′ समेत यूनाइटेड कच्चे’ जैसी सीरीज में देखा जा चुका है. 2012 से लेकर अभी तक सपना पब्बी काफी काम कर चुकी हैं. उन्होंने अपने करियर के साथ-साथ ढेरों एक्सपेरिमेंट कर खुद को बेहतर बनाया है और अपने टैलेंट को साबित करके दिखाया है. देखना होगा कि फिल्म ‘बंदर’ में वो क्या कमाल करती हैं. ये फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में हो रही है.
2.30 घंटे का धैर्य टेस्ट! ‘चांद मेरा दिल’ में प्यार तो है, लेकिन कहानी और लेखन ने किया निराश

नई दिल्ली । ‘चांद मेरा दिल’ को सबसे खतरनाक यूजलेस फिल्म क्या बनाता है? क्या वो पिक्चर की खराब कहानी है? या उसके क्रिंज डायलॉग या फिर डायरेक्टर विवेक सोनी की ऑडेसिटी जो ये सोच रहे थे कि वो इस जमाने की सबसे बेहतरीन रोमांटिक फिल्म बना रहे हैं? इसका जवाब है- सबकुछ.बॉलीवुड में बीते काफी वक्त से रीमेक और सीक्वल बन रहे हैं. ऐसे में कोई नई कहानी ऑडियंस को परोसना मेकर्स के लिए शायद मुश्किल हो गया है, या फिर हमने पूरी तरह से कोशिश करना छोड़ दिया है. जो भी है… ओटीटी के जमाने में जनता को फिल्म देखने के लिए थिएटर तक खींचना बड़ी बात हो गई है. ऐसे में आपकी पिक्चर एकदम बेदम हो तो चीजें और खराब हो जाती हैं.कुछ कहानियां आइडिया में बहुत अच्छी लगती हैं. मगर इसका मतलब यह नहीं है कि वो पर्दे परभी उतनी ही खूबसूरत लगें, जितनी पन्ने पर लग रही थी. ‘चांद मेरा दिल’ भी कुछ ऐसी ही है. किसी नए राइटर की नई-सी किताब में अगर इस कहानी को पढ़ा होता तो 14-15 साल की बच्चियां फिर भी इसे पचा लेतीं. पर हमसे ये न हो पाई, भैया!क्या है फिल्म की कहानी?कहानी है आरव रावत (लक्ष्य) और चांदनी प्रसाद (अनन्या पांडे) की. 21 साल की उम्र में इंजीनियरिंग कॉलेज में मिले आरव और चांदनी को एक-दूसरे से प्यार हो जाता है. मगर एक दूसरे की आंखों में खोए, मैसेज में एम्बेरेसिंग बातें करने वाले ‘आरु और चांद’ नहीं जानते कि जिंदगी में सिर्फ प्यार काफी नहीं होता. दोनों एकदम अलग परिवारों से आए हैं. चांदनी ऐसे घर में पली-बढ़ी है, जिसमें उसने अपनी मां को घरेलू हिंसा का शिकार होते देखा है. तो वहीं आरव के मां-बाप को हमेशा से अपने बच्चों से ज्यादा इमेज की चिंता रही है. अपने घरों में अनदेखे हुए और कम प्यार पाकर जिए आरव-चांदनी एक दूसरे के लिए ‘दुनिया खूबसूरत’ बना रहे हैं. दोनों की जिंदगी में एक क्राइसिस आता है और परिवार उनसे मुंह फेर लेता है. अब आरव और चांदनी दुनिया में एक दूसरे का सहारा हैं. उनके पास बड़ी जिम्मेदारी है, जिसके बोझ तले वो दब रहे हैं. एक दिन वो होता है, जो किसी ने नहीं सोचा और दोनों की जिंदगी बदल जाती है. इमेजिन करने में कहानी प्यारी लग रही है, है न? देखने में नहीं है! देखने में ये बॉलीवुड की बहुत ही पुराने जमाने की कहानी है, जिसमें बच्चे खुद को समझदार समझकर बड़े फैसले ले लेते हैं और फिर उन्हें समझ आता है कि अब हमारे बस की तो ये है नहीं, अब हम फंस गए. ऐसी कहानियां हम बहुत बार बॉलीवुड में बनते देख चुके हैं. अगर ये कोई शॉर्ट फिल्म भी होती तो शायद खूबसूरत लगती. मगर एक पूरी लगभग 2.30 घंटे की पिक्चर के रूप में ‘चांद मेरा दिल’, बोरिंग, प्रेडिक्टेबल और क्रिंज है. परफॉरमेंसआरव के रोल में लक्ष्य ने बढ़िया काम किया है. वो अच्छे एक्टर हैं, इस बात में कोई दोराय नहीं है. मगर ये फिल्म उनके टैलेंट के हिसाब की है ही नहीं. ‘किल’ और ‘बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के साथ लक्ष्य ने अपने एक्टिंग टैलेंट को साबित किया है. ‘चांद मेरा दिल’ में उनका किरदार फिर भी समझदार था. अनन्या पांडे ने भी पिक्चर में अच्छा काम किया है. मगर उनका किरदार चांदनी इतना इरिटेटिंग है कि आपका उसपर चिल्लाने का मन करता है. चांदनी इस रिश्ते में टॉक्सिक इंसान है. वो डेलुलु में जीती है और कन्फ्यूज ही रहती है. बेवकूफी भरी हरकत करती है, लेकिन अगर कोई बोल दे दो तो उसे बुरा लग जाता है. फिल्म में मनीष चौधरी और चारु शंकर संग अन्य कलाकारों ने भी काम किया है. उनका काम लिमिटेड था और सही भी रहा. सब्र का लेगी इम्तिहान डायरेक्टर विवेक सोनी और तुषार परांजपे का स्क्रीनप्ले काफी खराब और बोरिंग है. इसको और खराब बनाते हैं पिक्चर के डायलॉग. आरव और चांदनी, दोनों के ही किरदार आपको शुरुआत से पसंद नहीं आते. दोनों बेहद चीजी हरकतें करते हैं, बचपना दिखाते हैं और फिर आप सोचते हो कि अभी तो ये बच्चे हैं कोई बात नहीं. मगर इस सबका अंत कहीं नहीं होता. पिक्चर की कहानी आप बैठे-बैठे जो सोच रहे हैं वही जाती है. आपको ये जानने के लिए इसे देखने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी कि इसमें आखिर क्या हुआ. ‘चांद मेरा दिल’ शुरुआत से ही आपका ध्यान अपनी ओर खींचने में नाकाम होती है. इंटरवल आते-आते आप सोचने लगते हैं कि क्या इसे छोड़कर घर वापस लौट जाना चाहिए. आप खुद को इसे अंत तक देखने के लिए फोर्स करते हैं और फिर आरव और चांदनी के बीच एक बात आपकी हिट करती है. पिक्चर के अंत में आरव, चांदनी से पूछता है, ‘कहीं हम गलती तो नहीं कर रहे?’ वो कहती है, ‘अगर गलत है तो गलत सही.’ यहां थिएटर में बैठे आप सोचते हो, ‘गलती तो मैंने कर दी इस मूवी को देखने आकर.’ ‘चांद मेरा दिल’ की अच्छी बात सिर्फ उसके गाने हैं. इस फिल्म को देखने के एक्सपीरिएंस की सबसे अच्छी बात थी चांद देखना. नहीं, फिल्म में किसी चांद को नहीं, बल्कि थिएटर से बाहर निकलकर घर आते हुए असली चांद को. वो सुंदर लग रहा था.