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हर मौसम में खिलेंगे रंग-बिरंगे गुलाब, जानिए पौधा लगाने से लेकर देखभाल तक के जरूरी मंत्र

नई दिल्ली । घर के बगीचे में खिले रंग-बिरंगे गुलाब न केवल वातावरण को आकर्षक बनाते हैं, बल्कि प्रकृति के प्रति लगाव को भी बढ़ाते हैं। अपनी मनमोहक खुशबू और सुंदरता के कारण गुलाब को फूलों का राजा कहा जाता है। हालांकि कई लोगों की शिकायत रहती है कि गुलाब के पौधों में अपेक्षित संख्या में फूल नहीं आते या पौधे कुछ समय बाद कमजोर पड़ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सही तरीके से पौधारोपण और नियमित देखभाल अपनाई जाए तो गुलाब का पौधा लंबे समय तक स्वस्थ रहकर भरपूर फूल दे सकता है। गुलाब की अच्छी वृद्धि के लिए सबसे पहले उपयुक्त स्थान का चयन करना आवश्यक है। यह पौधा भरपूर धूप पसंद करता है और प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे सीधी सूर्य किरणों की आवश्यकता होती है। पर्याप्त धूप मिलने से पौधा मजबूत बनता है और फूलों की संख्या भी बढ़ती है। छायादार स्थान पर लगाए गए पौधों में अक्सर फूल कम आते हैं और उनकी वृद्धि भी प्रभावित हो सकती है। मिट्टी की गुणवत्ता भी गुलाब की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बागवानी विशेषज्ञ दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी को गुलाब के लिए सबसे उपयुक्त मानते हैं। पौधा लगाने से पहले मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर खाद या जैविक कंपोस्ट मिलाने से जड़ों को आवश्यक पोषण मिलता है। इससे पौधे की विकास गति बेहतर होती है और नई शाखाएं तेजी से निकलती हैं। सिंचाई के मामले में संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अत्यधिक पानी पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि पानी की कमी भी वृद्धि को प्रभावित करती है। गर्म मौसम में नियमित और हल्की सिंचाई पौधे को स्वस्थ बनाए रखती है। वहीं ठंड के मौसम में पानी की मात्रा कम रखनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि गमले या क्यारी में पानी जमा न हो, क्योंकि इससे जड़ों के सड़ने का खतरा बढ़ जाता है। पौधे को नियमित पोषण देना भी आवश्यक है। हर पंद्रह से बीस दिनों के अंतराल पर जैविक खाद या वर्मी कंपोस्ट डालने से पौधे को पर्याप्त पोषक तत्व मिलते हैं। इससे नई कलियां बनने की प्रक्रिया तेज होती है और फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है। नीम खली जैसी प्राकृतिक खाद पौधे को पोषण देने के साथ कई प्रकार के कीटों से भी बचाने में मदद करती है। गुलाब के पौधों में समय-समय पर छंटाई करना भी जरूरी माना जाता है। सूखी, कमजोर या पुरानी टहनियों को हटाने से पौधे की ऊर्जा नई शाखाओं और कलियों के विकास में लगती है। नियमित प्रूनिंग से पौधा अधिक घना दिखाई देता है और फूलों का उत्पादन भी बढ़ता है। बागवानी विशेषज्ञ इसे गुलाब की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। कीट और रोगों से सुरक्षा भी गुलाब की अच्छी ग्रोथ के लिए आवश्यक है। कई बार पौधों पर छोटे कीट हमला कर देते हैं, जिससे पत्तियां और कलियां प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नीम तेल का छिड़काव या हल्के साबुन वाले घोल का प्रयोग प्राकृतिक और प्रभावी उपाय माना जाता है। इससे पौधा सुरक्षित रहता है और रासायनिक दवाओं की आवश्यकता भी कम पड़ती है। यदि बगीचे को और अधिक आकर्षक बनाना हो तो विभिन्न रंगों के गुलाबों का संयोजन लगाया जा सकता है। लाल, गुलाबी, पीले और सफेद गुलाब एक साथ खिलने पर बगीचे को जीवंत और बेहद सुंदर स्वरूप प्रदान करते हैं। सही देखभाल और थोड़ी सी मेहनत से घर की बगिया पूरे वर्ष रंगों और खुशबू से महक सकती है।

वजन घटाने से लेकर दिल को मजबूत बनाने तक, ओट्स बना रहा हेल्दी लाइफस्टाइल का सबसे भरोसेमंद सुपरफूड

नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश कर रहे हैं जो पौष्टिक होने के साथ-साथ आसानी से तैयार भी हो जाएं। इसी कारण ओट्स आज हेल्दी ब्रेकफास्ट की सूची में सबसे लोकप्रिय विकल्पों में शामिल हो चुका है। पोषण विशेषज्ञ भी इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं। फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्वों से भरपूर ओट्स शरीर को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ओट्स का नियमित सेवन वजन नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसमें मौजूद घुलनशील फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार भूख लगने की समस्या कम होती है। यही कारण है कि वजन घटाने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए इसे आदर्श खाद्य पदार्थ माना जाता है। ओवरईटिंग की आदत पर नियंत्रण रखने में भी ओट्स मददगार साबित हो सकता है। दिल की सेहत के लिए भी ओट्स को बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पाया जाने वाला बीटा-ग्लूकन नामक विशेष फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है। नियमित रूप से ओट्स का सेवन करने से हृदय संबंधी जोखिम कम हो सकते हैं और रक्त वाहिकाओं की कार्यक्षमता बेहतर बनी रह सकती है। इसी वजह से इसे हार्ट-फ्रेंडली फूड की श्रेणी में रखा जाता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ बनाए रखने में भी ओट्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्याप्त मात्रा में फाइबर होने के कारण यह आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाता है। इससे भोजन का पाचन सुचारु रूप से होता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। स्वस्थ पाचन तंत्र शरीर की समग्र कार्यक्षमता को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ओट्स को ऊर्जा का अच्छा स्रोत भी माना जाता है। इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे पचते हैं, जिससे शरीर को लंबे समय तक लगातार ऊर्जा मिलती रहती है। सुबह के नाश्ते में ओट्स शामिल करने से दिनभर सक्रियता बनी रह सकती है और थकान अपेक्षाकृत कम महसूस होती है। यही वजह है कि खिलाड़ी और फिटनेस के प्रति जागरूक लोग इसे अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं। ब्लड शुगर नियंत्रण के लिहाज से भी ओट्स उपयोगी माना जाता है। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे रक्त में शर्करा का स्तर अचानक नहीं बढ़ता। यही कारण है कि मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए भी इसे संतुलित मात्रा में लाभकारी विकल्प माना जाता है। हालांकि किसी भी विशेष स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सकीय सलाह आवश्यक होती है। त्वचा की सेहत के लिए भी ओट्स फायदे पहुंचा सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। नियमित सेवन से त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में सहायता मिल सकती है और ड्रायनेस या हल्की जलन जैसी समस्याओं में भी राहत मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली के साथ ओट्स का नियमित सेवन समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में योगदान दे सकता है। हालांकि किसी एक खाद्य पदार्थ को चमत्कारी समाधान मानने के बजाय संतुलित और विविध आहार को प्राथमिकता देना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है।

52 साल के साथ और 41 साल के वैवाहिक रिश्ते को किया सलाम, किरण खेर के जन्मदिन पर अनुपम खेर का भावुक संदेश चर्चा में

नई दिल्ली । बॉलीवुड की वरिष्ठ अभिनेत्री और सांसद किरण खेर के जन्मदिन के अवसर पर अभिनेता अनुपम खेर ने एक भावुक संदेश साझा कर उन्हें विशेष अंदाज में शुभकामनाएं दी हैं। सोशल मीडिया पर साझा किया गया उनका यह पोस्ट तेजी से चर्चा का विषय बन गया है और प्रशंसकों के साथ-साथ फिल्म जगत की कई हस्तियों ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। अनुपम खेर ने अपनी पत्नी किरण खेर के साथ एक खूबसूरत तस्वीर साझा करते हुए उनके लिए प्यार, सम्मान और आभार से भरा संदेश लिखा। उन्होंने अपने लंबे साथ को याद करते हुए कहा कि वह किरण को पांच दशक से अधिक समय से जानते हैं और इस दौरान उन्होंने उनसे जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सीखे हैं। अभिनेता ने अपने संदेश में उनके अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाल जीवन और लंबी उम्र की कामना भी की। अपने भावनात्मक संदेश में अनुपम खेर ने कहा कि जीवन में कई सीखें ऐसी होती हैं जो समय के साथ धीरे-धीरे समझ में आती हैं। उन्होंने लिखा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें एहसास होता है कि उन्होंने किरण से केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि उनके जीवन जीने के तरीके से बहुत कुछ सीखा है। उन्होंने किरण की हिम्मत, ईमानदारी, मित्रता और व्यक्तित्व की सराहना करते हुए उनके जीवन में होने के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया। सोशल मीडिया पर साझा किया गया यह संदेश लोगों को काफी पसंद आ रहा है। प्रशंसकों ने इसे एक सच्चे और मजबूत रिश्ते की मिसाल बताया है। कई लोगों ने टिप्पणी करते हुए दोनों की जोड़ी की प्रशंसा की और किरण खेर को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने भी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देकर उन्हें बधाई संदेश भेजे। अनुपम और किरण खेर की प्रेम कहानी लंबे समय से लोगों के बीच चर्चा का विषय रही है। दोनों की पहली मुलाकात थिएटर के दिनों में हुई थी, जब वे अभिनय की दुनिया में अपने शुरुआती कदम रख रहे थे। समय के साथ दोनों के बीच मित्रता गहरी हुई और बाद में यह रिश्ता जीवनसाथी के रूप में आगे बढ़ा। वर्ष 1985 में दोनों ने विवाह किया और तब से वे भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे चर्चित और सम्मानित दंपतियों में गिने जाते हैं। किरण खेर ने फिल्मों, टेलीविजन और सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई है। वहीं अनुपम खेर भारतीय सिनेमा के सबसे अनुभवी और बहुमुखी कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने देश और विदेश में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। जन्मदिन के अवसर पर साझा किया गया यह संदेश केवल शुभकामना भर नहीं, बल्कि एक लंबे और मजबूत रिश्ते की झलक भी प्रस्तुत करता है। वर्षों के साथ, विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित इस संबंध ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है। सोशल मीडिया पर मिल रही प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण हैं कि दर्शक आज भी इस जोड़ी को उतना ही पसंद करते हैं जितना पहले करते थे। किरण खेर के जन्मदिन पर मिला यह विशेष संदेश उनके प्रशंसकों के लिए भी यादगार बन गया है। अभिनेता के शब्दों में झलकता स्नेह, सम्मान और अपनापन इस अवसर को और अधिक खास बना रहा है।

ड्राइविंग लाइसेंस से लेकर RC तक सब कुछ मोबाइल में, DigiLocker के बढ़ते इस्तेमाल ने बदली दस्तावेज संभालने की तस्वीर

नई दिल्ली । डिजिटल इंडिया अभियान के विस्तार के साथ सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक आसान और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इन्हीं प्रयासों में से एक DigiLocker है, जिसने दस्तावेजों को संभालने और प्रस्तुत करने की पारंपरिक व्यवस्था को काफी हद तक बदल दिया है। आज यह प्लेटफॉर्म करोड़ों भारतीयों के लिए एक भरोसेमंद डिजिटल दस्तावेज भंडार के रूप में उभर चुका है, जहां ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज सुरक्षित रखे जा सकते हैं। तेजी से डिजिटल होती जीवनशैली के बीच लोगों को अक्सर जरूरी दस्तावेज साथ रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रा के दौरान या वाहन जांच के समय दस्तावेज भूल जाने से परेशानी और जुर्माने की स्थिति पैदा हो जाती है। DigiLocker इस समस्या का व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है। मोबाइल फोन में उपलब्ध इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से नागरिक अपने प्रमाणित दस्तावेज किसी भी समय और किसी भी स्थान पर प्रस्तुत कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि DigiLocker केवल दस्तावेजों को स्टोर करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सरकारी विभागों और नागरिकों के बीच डिजिटल विश्वास का एक मजबूत तंत्र भी है। प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध दस्तावेज सीधे अधिकृत संस्थानों द्वारा जारी किए जाते हैं, जिससे उनकी प्रमाणिकता को लेकर किसी प्रकार की शंका नहीं रहती। यही कारण है कि कई सरकारी प्रक्रियाओं में इन दस्तावेजों को मूल दस्तावेजों के समान वैध माना जाता है। वाहन चालकों के लिए यह सुविधा विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है। सड़क पर पुलिस जांच के दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक रिकॉर्ड डिजिटल रूप में दिखाए जा सकते हैं। इससे कागजी दस्तावेजों के खोने, खराब होने या साथ न होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाती है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए भी यह प्लेटफॉर्म महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अपनी शैक्षणिक मार्कशीट और प्रमाणपत्र सुरक्षित रूप से डिजिटल रूप में संग्रहीत कर सकते हैं। डिजिटल दस्तावेजों की बढ़ती स्वीकार्यता ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को भी अधिक पारदर्शी और सरल बनाया है। नागरिकों को बार-बार फोटोकॉपी जमा करने या मूल दस्तावेज लेकर चलने की आवश्यकता कम हो रही है। इससे समय की बचत के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है, जो पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी सकारात्मक कदम माना जाता है। हालांकि डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना भी आवश्यक है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि उपयोगकर्ता अपने मोबाइल उपकरणों को सुरक्षित रखें, नियमित रूप से ऐप अपडेट करें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ अपनी लॉगिन जानकारी साझा न करें। इससे डिजिटल दस्तावेजों की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित की जा सकती है। वर्तमान समय में DigiLocker केवल एक मोबाइल एप्लिकेशन नहीं बल्कि डिजिटल प्रशासन की नई पहचान बन चुका है। सरकार की डिजिटल सेवाओं को आम नागरिकों तक पहुंचाने में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। दस्तावेजों को सुरक्षित, सुलभ और प्रमाणित रूप में उपलब्ध कराने वाली यह व्यवस्था आने वाले वर्षों में डिजिटल शासन व्यवस्था का और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।

नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना पर असर, Vivo और iQOO के कई डिवाइस हुए महंगे; मेमोरी चिप संकट को माना जा रहा कारण

नई दिल्ली । भारतीय स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों को एक और झटका लगा है। प्रमुख स्मार्टफोन ब्रांड Vivo और iQOO ने अपने कई लोकप्रिय मॉडलों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन बिक्री प्लेटफॉर्म पर लागू हो चुकी हैं, जिससे नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं को अब पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। सबसे अधिक प्रभाव Vivo T5 Pro सीरीज पर देखने को मिला है। इस सीरीज के विभिन्न वेरिएंट्स की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कुछ मॉडल्स पर तीन हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे यह प्रीमियम मिड-रेंज सेगमेंट के ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यह बढ़ोतरी उन उपभोक्ताओं को प्रभावित कर सकती है जो बजट और फीचर्स के बीच संतुलन बनाकर खरीदारी का निर्णय लेते हैं। वहीं iQOO ने भी अपने फ्लैगशिप और प्रीमियम श्रेणी के स्मार्टफोन्स की कीमतों में संशोधन किया है। कंपनी के प्रमुख मॉडल iQOO 15 के विभिन्न वेरिएंट अब पहले से अधिक कीमत पर उपलब्ध हैं। इसके अतिरिक्त iQOO 15R और iQOO Neo 10 जैसे डिवाइस भी महंगे हो गए हैं। इन मॉडलों की लोकप्रियता को देखते हुए कीमतों में यह बदलाव बाजार में व्यापक चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक स्तर पर मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। पिछले कुछ महीनों से सेमीकंडक्टर उद्योग में लागत बढ़ने और सप्लाई चेन पर दबाव के कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण खर्च में इजाफा हुआ है। स्मार्टफोन निर्माता कंपनियां इसी बढ़ी हुई लागत को संतुलित करने के लिए उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर रही हैं। तकनीकी बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि रैम और स्टोरेज मॉड्यूल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर केवल Vivo और iQOO तक सीमित नहीं रह सकता। यदि वैश्विक आपूर्ति स्थिति में जल्द सुधार नहीं होता है तो आने वाले महीनों में अन्य ब्रांड भी अपने स्मार्टफोन्स की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं। इससे भारतीय बाजार में स्मार्टफोन खरीदना पहले की तुलना में महंगा हो सकता है। हालांकि मूल्य वृद्धि की राशि बहुत अधिक नहीं दिखाई देती, लेकिन प्रतिस्पर्धी बाजार में एक से तीन हजार रुपये का अंतर भी ग्राहकों के खरीदारी निर्णय को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से मिड-रेंज और प्रीमियम सेगमेंट में उपभोक्ता अक्सर विभिन्न ब्रांडों और मॉडलों के बीच कीमत और फीचर्स की तुलना कर निर्णय लेते हैं। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी बिक्री रणनीतियों और उपभोक्ता प्राथमिकताओं पर भी असर डाल सकती है। उद्योग विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आगामी त्योहारी सीजन और नए लॉन्च के दौरान कंपनियां विशेष ऑफर्स, एक्सचेंज बोनस और बैंक छूट के माध्यम से ग्राहकों को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती हैं। इससे बढ़ी हुई कीमतों का कुछ हद तक प्रभाव कम किया जा सकता है। फिलहाल स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह समय बाजार की कीमतों पर नजर रखने का है। यदि वैश्विक चिप आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में अन्य मॉडलों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

हजार साल पुराना ऐसा मंदिर, जिसका शिखर आज भी इंजीनियरों को करता है हैरान, जानिए क्यों जमीन पर नहीं पड़ती इसकी परछाई

नई दिल्ली । तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित Brihadeeswarar Temple भारतीय वास्तुकला, इंजीनियरिंग और शिल्पकला का ऐसा अद्भुत नमूना है, जो एक हजार साल बाद भी लोगों को आश्चर्यचकित करता है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर 11वीं शताब्दी में चोल साम्राज्य के महान शासक Rajaraja Chola I द्वारा बनवाया गया था। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह मंदिर दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला की सर्वोच्च उपलब्धियों में गिना जाता है। इतिहासकार K. A. Nilakanta Sastri की प्रसिद्ध पुस्तक The Cholas में इस मंदिर के निर्माण और चोल राजाओं की इंजीनियरिंग क्षमता का विस्तृत वर्णन मिलता है। कहा जाता है कि मंदिर के निर्माण में उस समय की उपलब्ध तकनीकों का ऐसा उपयोग किया गया, जिसे आज भी इंजीनियरिंग का चमत्कार माना जाता है। मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित बात इसकी मजबूत संरचना है। आम धारणा यह है कि यह मंदिर बिना पारंपरिक गहरी नींव के खड़ा है। निर्माण के दौरान विशाल पत्थरों को इस तरह तराशकर एक-दूसरे में फंसाया गया कि उन्हें जोड़ने के लिए आधुनिक सीमेंट या गारे की आवश्यकता नहीं पड़ी। पत्थरों की इंटरलॉकिंग तकनीक ने पूरी संरचना को असाधारण मजबूती प्रदान की। यही कारण है कि सदियों के दौरान आए कई प्राकृतिक बदलावों और भूकंपीय गतिविधियों के बावजूद यह मंदिर मजबूती से खड़ा हुआ है। मंदिर का एक और रोचक पहलू इसका विशाल शिखर है। लगभग 216 फीट ऊंचे इस शिखर के शीर्ष पर रखा गया ग्रेनाइट का विशाल पत्थर लोगों के लिए आज भी कौतूहल का विषय बना हुआ है। माना जाता है कि इस पत्थर का वजन लगभग 80 टन है। उस दौर में न तो आधुनिक क्रेन थीं और न ही भारी मशीनें, फिर भी इस विशाल पत्थर को इतनी ऊंचाई तक पहुंचाना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। इतिहासकारों के अनुसार, इसके लिए कई किलोमीटर लंबा ढलानदार मार्ग बनाया गया था, जिसके सहारे हाथियों और मजदूरों की मदद से पत्थर को ऊपर तक पहुंचाया गया। बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ा सबसे लोकप्रिय रहस्य इसकी परछाई को लेकर है। अक्सर कहा जाता है कि मंदिर के शिखर की परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि वास्तुकला और ज्यामिति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर की ऊंचाई, शिखर की बनावट और सूर्य के कोण को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया गया था। परिणामस्वरूप दिन के विशेष समय में शिखर की छाया मंदिर के आधार या चबूतरे के भीतर ही सीमित दिखाई देती है, जिससे लोगों को लगता है कि उसकी परछाई जमीन पर नहीं पड़ती। मंदिर के निर्माण में लगभग 1.30 लाख टन ग्रेनाइट पत्थरों के उपयोग का उल्लेख भी मिलता है। दिलचस्प बात यह है कि तंजावुर के आसपास बड़ी मात्रा में ग्रेनाइट उपलब्ध नहीं था। ऐसे में इन पत्थरों को दूर-दराज के क्षेत्रों से लाकर इस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया। यह तथ्य चोल साम्राज्य की संगठन क्षमता और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है। आज भी बृहदेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन वैज्ञानिक सोच, वास्तुकला और इंजीनियरिंग कौशल का जीवंत प्रमाण माना जाता है। हजार वर्षों बाद भी इसकी भव्यता और रहस्य दुनिया भर के पर्यटकों, इतिहासकारों और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

दुनिया का सबसे अमीर मंदिर कौन सा है? जानिए अरबों के खजाने और रहस्यमयी तहखानों की पूरी कहानी

नई दिल्ली । भारत को मंदिरों और आध्यात्मिक विरासत की भूमि कहा जाता है। देश में ऐसे कई प्राचीन मंदिर हैं जो अपनी भव्य वास्तुकला, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन जब बात दुनिया के सबसे अमीर मंदिर की आती है, तो सबसे पहले नाम केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम स्थित Sree Padmanabhaswamy Temple का लिया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ अपार संपत्ति और रहस्यमयी खजाने के लिए भी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर सदियों पुराना है और इसकी देखरेख परंपरागत रूप से Travancore Royal Family द्वारा की जाती रही है। द्रविड़ शैली में निर्मित इस मंदिर की भव्यता और कलात्मकता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके भूमिगत तहखानों में छिपे खजाने को लेकर है। साल 2011 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर मंदिर के कुछ गुप्त तहखानों का निरीक्षण किया गया। इन तहखानों को वॉल्ट या नेत्रकल कहा जाता है। जब इनमें से कुछ कक्ष खोले गए तो वहां से सोने की मूर्तियां, स्वर्ण आभूषण, दुर्लभ हीरे-जवाहरात, प्राचीन सिक्के, स्वर्ण मुकुट और अनेक ऐतिहासिक कलाकृतियां बरामद हुईं। इन वस्तुओं की अनुमानित कीमत उस समय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी। विशेषज्ञों और इतिहासकारों का मानना है कि यह केवल आर्थिक मूल्यांकन है। वास्तविक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इस खजाने की कीमत का सही अनुमान लगाना लगभग असंभव है। कई वस्तुएं सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं और उनका ऐतिहासिक महत्व उन्हें अनमोल बनाता है। मंदिर में कुल छह प्रमुख तहखाने बताए जाते हैं, जिन्हें ए, बी, सी, डी, ई और एफ नाम दिया गया है। इनमें सबसे अधिक चर्चा वॉल्ट बी को लेकर होती है। यह तहखाना आज भी पूरी तरह नहीं खोला गया है। इसके बारे में कई तरह की लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग मानते हैं कि इस कक्ष को विशेष धार्मिक विधियों के माध्यम से सील किया गया था और इसे खोलना शुभ नहीं माना जाता। हालांकि इन दावों की कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वॉल्ट बी को लेकर फैली रहस्यमयी कहानियों ने मंदिर को और अधिक चर्चित बना दिया है। यही वजह है कि दुनियाभर के इतिहासकार, शोधकर्ता और पर्यटक इस मंदिर के बारे में जानने में विशेष रुचि रखते हैं। मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इसकी सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करती हैं। यहां चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी रखी जाती है। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल धन-संपत्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर में सुरक्षित खजाना भारतीय इतिहास के अनेक अध्यायों को अपने भीतर समेटे हुए है। यही कारण है कि यह मंदिर आज भी श्रद्धा, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम बना हुआ है।

'भारत विरोधी' आफरीदी संग नजर आए मुनव्वर फारूकी, दुबई मुलाकात का वीडियो सामने आने के बाद इंटरनेट पर कॉमेडियन की जमकर ट्रोलिंग

नई दिल्ली। मनोरंजन जगत के मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन और रियलिटी शो विजेता मुनव्वर फारूकी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक नए विवाद के केंद्र में आ गए हैं। इंटरनेट पर उनका एक ताजा वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वे पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और आक्रामक ऑलराउंडर शाहिद आफरीदी के साथ नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग कॉमेडियन को उनके इस कदम के लिए बुरी तरह से आड़े हाथों ले रहे हैं। यह पूरी घटना संयुक्त अरब अमीरात के दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की बताई जा रही है, जहां दोनों की अचानक मुलाकात हुई थी। वायरल हो रहे वीडियो के दृश्यों में देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद आफरीदी अपने मोबाइल फोन पर किसी अन्य व्यक्ति से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत कर रहे हैं। इसी दौरान उनके ठीक पीछे मुनव्वर फारूकी खड़े हुए दिखाई देते हैं, जो काफी सहज और मुस्कुराते हुए फ्रेम में नजर आ रहे हैं। इस संक्षिप्त मुलाकात के फुटेज जैसे ही विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड हुए, वैसे ही इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। भारतीय खेल प्रशंसकों और आम नागरिकों के बीच शाहिद आफरीदी की छवि लगातार विवादों से घिरी रही है। आफरीदी अक्सर विभिन्न वैश्विक मंचों और सार्वजनिक बयानों में भारत, भारतीय नीतियों और देश के अंदरूनी मामलों के खिलाफ जहर उगलते हुए नजर आते हैं। उनके कई पुराने और नए बयान भारतीय नागरिकों को आहत करने वाले रहे हैं, जिसके कारण भारत में उन्हें लेकर भारी नाराजगी और विरोध की भावना रहती है। ऐसे में एक लोकप्रिय भारतीय हस्ती का उनके साथ इस तरह दोस्ताना अंदाज में दिखना कई लोगों को रास नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया पर मुनव्वर फारूकी को ट्रोल करने वाले यूजर्स लगातार उनके इस रवैए पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति लगातार भारत के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बयानबाजी करता है, उसके साथ भारतीय कलाकारों का इस तरह का जुड़ाव देश की भावनाओं का अपमान है। एक्स और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर नेटिजंस मुनव्वर को देशभक्ति और अपनी प्राथमिकताओं को लेकर नसीहत दे रहे हैं। कुछ यूजर्स ने इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करार दिया है, तो कुछ इसे केवल पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं। मुनव्वर फारूकी के करियर और विवादों का पुराना नाता रहा है, लेकिन इस बार का विवाद सीधे तौर पर राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा होने के कारण अधिक तूल पकड़ता जा रहा है। खेल और मनोरंजन के वैश्विक गढ़ दुबई में हुई इस मुलाकात ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच के संवेदनशील सांस्कृतिक और राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आलोचकों का मानना है कि भारतीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय दौरों पर ऐसी हस्तियों के साथ दिखने से बचना चाहिए जिनकी पहचान भारत विरोधी बयानों से जुड़ी हो। फिलहाल इस पूरे मामले पर और सोशल मीडिया पर हो रही चौतरफा फजीहत को लेकर मुनव्वर फारूकी या उनकी टीम की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इंटरनेट पर इस वीडियो को लेकर शुरू हुआ विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है और नेटिजंस लगातार उनके इस वीडियो को शेयर कर अपनी नाराजगी दर्ज करा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस भारी विरोध का मुनव्वर के आगामी शोज और उनकी फैन फॉलोइंग पर क्या असर पड़ता है।

‘तड़प-तड़प’ सुनकर फूट-फूटकर रो पड़े थे सलमान खान! इस्माइल दरबार ने सुनाया भावुक किस्सा

नई दिल्ली । बॉलीवुड की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों और यादगार फिल्मों में शामिल Hum Dil De Chuke Sanam आज भी दर्शकों के दिलों में खास जगह रखती है। फिल्म की कहानी, किरदारों और संगीत ने इसे एक क्लासिक फिल्म का दर्जा दिलाया। खासकर इसका दर्दभरा गीत Tadap Tadap Ke आज भी लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है। अब फिल्म के संगीतकार Ismail Darbar ने इस गाने से जुड़ा एक भावुक किस्सा साझा किया है। एक हालिया इंटरव्यू में इस्माइल दरबार ने बताया कि यह गाना सिर्फ दर्शकों को ही नहीं, बल्कि फिल्म के मुख्य अभिनेता Salman Khan को भी गहराई से प्रभावित करता था। उनके अनुसार, जब भी सलमान यह गाना सुनते थे तो भावुक हो जाते थे और कई बार उनकी आंखों से आंसू निकल आते थे। इस्माइल दरबार ने बताया कि एक दिन फिल्म के निर्देशक Sanjay Leela Bhansali के साथ गाने की रिकॉर्डिंग और सुनवाई का दौर चल रहा था। उसी दौरान माहौल अचानक गंभीर हो गया। जब उन्होंने कारण पूछा तो सलमान ने कहा कि यह गाना उन्हें बेहद दर्द देता है और जब भी वह इसे सुनते हैं तो भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। संगीतकार के मुताबिक सलमान ने उनसे अनुरोध भी किया था कि इस गाने को उनके सामने बार-बार न बजाया जाए, क्योंकि इसके बोल और संगीत उनके दिल को गहराई से छू जाते हैं। इस्माइल दरबार ने कहा कि उन्होंने सलमान को उस समय बेहद बेचैन और भावुक अवस्था में देखा था। उनके अनुसार, अभिनेता को कई बार रोते और दर्द में चिल्लाते हुए भी देखा गया। फिल्म से जुड़ी यादों को साझा करते हुए इस्माइल दरबार ने यह भी कहा कि उस दौर में पूरी टीम के बीच पारिवारिक माहौल था। यही वजह थी कि फिल्म में दिखी भावनाएं पर्दे पर भी वास्तविक महसूस हुईं। इससे पहले निर्देशक Sanjay Leela Bhansali भी फिल्म के सेट के माहौल को याद कर चुके हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि फिल्म के दौरान कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच सिर्फ पेशेवर रिश्ता नहीं था, बल्कि सभी एक परिवार की तरह जुड़े हुए थे। सेट पर प्यार, सम्मान और अपनापन साफ दिखाई देता था। गौरतलब है कि फिल्म में Aishwarya Rai Bachchan और सलमान खान की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। फिल्म की रिलीज के बाद दोनों के रिश्तों को लेकर भी काफी चर्चाएं हुईं। हालांकि बाद के वर्षों में दोनों ने कभी साथ काम नहीं किया। वर्क फ्रंट की बात करें तो सलमान खान हाल ही में Sikandar में नजर आए थे। वहीं आने वाले समय में वह नई फिल्मों के जरिए दर्शकों का मनोरंजन करते दिखाई देंगे। दूसरी ओर, ‘तड़प-तड़प’ जैसे गीत आज भी यह साबित करते हैं कि अच्छा संगीत समय की सीमाओं से परे जाकर लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहता है।

83 की उम्र में भी नहीं थम रहा अमिताभ बच्चन का जुनून, एक ही दिन में शूट कर डालीं 12 शॉर्ट फिल्में

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महानायक Amitabh Bachchan आज भी अपनी ऊर्जा, अनुशासन और काम के प्रति समर्पण से नई पीढ़ी को प्रेरित कर रहे हैं। 83 वर्ष की उम्र में जहां अधिकांश लोग आरामदायक जीवन की ओर बढ़ते हैं, वहीं अमिताभ बच्चन लगातार काम में व्यस्त हैं और अपने प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को पूरी गंभीरता से निभा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसने उनके प्रशंसकों को हैरान और प्रभावित दोनों कर दिया है। अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लॉग के जरिए जानकारी दी कि उन्होंने एक ही दिन में 12 शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग पूरी की है। उन्होंने देर रात अपने ब्लॉग में लिखा कि काम तो काम है और उसे पूरी ईमानदारी के साथ करना ही उनकी प्राथमिकता है। बिग बी ने बताया कि 12 शॉर्ट फिल्मों की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अभी दो और शूट बाकी हैं। इसके बाद भी वह अपने प्रशंसकों से जुड़ने के लिए ब्लॉग लिख रहे थे। उन्होंने लिखा कि कई दिनों की तैयारी, लगातार पढ़ाई और कठिन परिश्रम के बाद भी वह अपने इरादों और काम करने के तरीके से कभी समझौता नहीं करते। उनके अनुसार, किसी भी काम को पूरी लगन और समर्पण के साथ करना ही सफलता की कुंजी है। ब्लॉग के अंत में उन्होंने यह भी लिखा कि अब वह आराम करने जा रहे हैं क्योंकि लंबे दिन के बाद शरीर को विश्राम की भी जरूरत होती है। बिग बी ने अपने प्रशंसकों के साथ अपने खास रिश्ते का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि फैंस के साथ उनका जुड़ाव कभी नहीं टूटना चाहिए। बाकी चीजें समय के साथ बदल सकती हैं, लेकिन दर्शकों का प्यार और संवाद उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अमिताभ बच्चन की इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रशंसकों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने उन्हें प्रेरणा का स्रोत बताया। एक यूजर ने लिखा कि अमिताभ बच्चन की कार्यशैली और अनुशासन युवाओं के लिए सीख है। वहीं दूसरे प्रशंसक ने लिखा कि इतनी उम्र में भी जिस तरह वह लगातार काम कर रहे हैं, वह अविश्वसनीय है। हालांकि कुछ प्रशंसकों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता भी जताई और उन्हें पर्याप्त आराम करने की सलाह दी। वर्क फ्रंट की बात करें तो अमिताभ बच्चन आखिरी बार Vettaiyan में नजर आए थे, जिसमें उनके साथ Rajinikanth मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में दोनों दिग्गज कलाकारों की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। आने वाले समय में अमिताभ बच्चन Kalki 2898 AD Part 2 में दिखाई देंगे। इस फिल्म में उनके साथ Prabhas और Kamal Haasan भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में होंगे। फिल्म का पहला भाग Kalki 2898 AD बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुआ था और दुनियाभर में 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार करने में सफल रहा था। फिलहाल अमिताभ बच्चन की यह उपलब्धि एक बार फिर साबित करती है कि समर्पण, अनुशासन और मेहनत के सामने उम्र कोई मायने नहीं रखती।