कम रेटिंग समझकर जिन हॉरर फिल्मों को लोगों ने किया नजरअंदाज, अब वही बन रही हैं डर की सबसे बड़ी वजह, दर्शकों ने कहा- रातभर नहीं आई नींद

नई दिल्ली । अक्सर जब हम कोई नई हॉरर फिल्म देखने बैठते हैं, तो सबसे पहले उसकी IMDb रेटिंग चेक करते हैं। अगर रेटिंग 6 या 6.5 के आसपास हो, तो हम मान लेते हैं कि फिल्म ठीक ठाक होगी और उसे स्किप कर देते हैं। लेकिन हॉरर जॉनर के साथ ऐसा करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है।सिनेमा लवर्स सोशल मीडिया पर ऐसी तीन फिल्में रीकमंड कर रहे हैं जिनकी रेटिंग कम है, लेकिन डर के मामले में बेस्ट है। ये फिल्में लोगों के पसीने छुड़ा दे रही हैं। आइए आपको बताते हैं कि इन तीन फिल्मों की खास बात क्या है। द टेकिंग ऑफ डेबोरा लोगान (The Taking of Deborah Logan) क्यों देखें ये फिल्म?: अगर आपको लगता है कि आपने सबकुछ देख लिया है और अब आपको डर नहीं लगता, तो ये फिल्म आपका भ्रम तोड़ देगी। ये फिल्म ‘फाउंड फुटेज’ स्टाइल में बनी है, जिससे स्क्रीन पर दिखने वाली हर घटना एकदम असली महसूस होती है। कहानी और डर का फैक्टर: कहानी एक मेडिकल टीम की है जो अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित एक बुजुर्ग महिला पर डॉक्यूमेंट्री बना रही है। शुरुआत में ये एक इमोशनल लगती है, लेकिन धीरे-धीरे अल्जाइमर पेशेंट की हरकतें इतनी अजीब और खौफनाक होने लगती हैं कि पूरी टीम की जान पर बन आती है। लोग क्या बोल रहे: सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि फिल्म का आखिरी का 20 मिनट का एक सीन इतना भयानक और डिस्टर्बिंग है कि कमजोर दिल वाले उसे झेल नहीं पाएंगे। 2. द डार्क एंड द विक्ड (The Dark and The Wicked) क्यों देखें ये फिल्म?: यह कोई आम भूतिया फिल्म नहीं है जहां अचानक कोई सामने आकर आपको डराए, बल्कि ये एक ऐसी साइकोलॉजिकल हॉरर फिल्म है जो आपके दिमाग से खेलती है।कहानी और डर का फैक्टर: इस फिल्म में दो भाई-बहन की कहानी दिखाई गई है जो अपने बीमार पिता की देखभाल करने के लिए एक बेहद सुनसान फार्महाउस पर जाते हैं। वहां पहुंचते ही उन्हें महसूस होता है कि कोई बेहद खतरनाक ताकत उनके पूरे परिवार को खत्म करना चाहती है।लोग क्या बोल रहे: लोग कह रहे हैं कि ये फिल्म थोड़ी स्लो है, जिसकी वजह से इसकी रेटिंग कम रह गई। हालांकि हॉरर फिल्में देखने वालों के लिए ये मास्टरपीस है। यहां देखिए फिल्म का ट्रेलर क्यों देखें ये फिल्म?: थाईलैंड के काले जादू, ओझा और अंधविश्वास पर बनी ये फिल्म रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी है। इसे मॉक्युमेंट्री स्टाइल में शूट किया गया है यानी आपको ऐसा लगेगा जैसे आप कोई असली घटना लाइव देख रहे हैं। कहानी और डर का फैक्टर: ये फिल्म थाईलैंड के एक छोटे से गांव की कहानी है, जहां एक लड़की पर किसी प्राचीन और बहुत ही दुष्ट आत्मा का साया आ जाता है। फिल्म का पहला पार्ट धीरे-धीरे सस्पेंस बनाता है, लेकिन सेकेंड हाफ और इसका क्लाइमेक्स इतना ज्यादा खौफनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला है कि इसे अकेले या अंधेरे में देखने की गलती बिल्कुल न करें।
पहली ही फिल्म से मिला ऐसा नाम, जिसने राजीव भाटिया को बना दिया बॉलीवुड का सुपरस्टार अक्षय कुमार

अक्षय कुमार ने आखिर क्यों बदला अपना असली नाम? नई दिल्ली । बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई स्टार्स ऐसे हैं, जिन्होंने अपने असली नाम की जगह किसी और नाम से अपनी पहचान बनाई। इस लिस्ट में दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान जैसे सुपरस्टार्स का नाम शामिल है। वहीं, इस लिस्ट में बॉलीवुड खिलाड़ी यानी अक्षय कुमार का नाम भी शामिल है। अक्षय कुमार का असली नाम ये हैअक्षय कुमार का असली नाम राजीव हरिओम भाटिया है। उन्होंने फिल्मों में आने से पहले अपना नाम बदल कर अक्षय कुमार कर लिया। जानते हैं क्यों अक्षय कुमार ने बदला नामलेकिन इसके पीछे का मजेदार किस्सा शायद ही आप जानते होंगे। अगर नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं आखिर किस वजह से अक्षय ने अपना नाम चेंज किया। इंटरव्यू में बताया दिलचस्प किस्साGalatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था। महज 8 मिनट का रोलGalatta Plus के साथ एक इंटरव्यू में, बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार (जिनका जन्म राजीव भाटिया के रूप में हुआ था) ने अपना नाम बदलने के पीछे की दिलचस्प कहानी बताई। आम धारणा के विपरीत, उन्होंने नाम बदलने का ये फैसला किसी पंडित या ज्योतिषीय सलाह से प्रभावित होकर नहीं लिया था। एक्ट्रेस को सिखाते हैं मार्शल आर्टइंटरव्यू में अक्षय ने बताया, ‘उन्होंने महेश भट्ट की फिल्म ‘आज’ में महज 8 सेकंड का एक छोटा सा रोल किया था। इस फिल्म में वो 8 सेकंड के लिए आते हैं और एक्ट्रेस को मार्शल आर्ट सिखाते हैं और चले जाते हैं।’ कुमार गौरव की वजह से बदला नामअक्षय ने आगे कहा, ‘उस फिल्म में शायद ही किसी ने मुझे नोटिस किया हो। इस फिल्म में मेन लीड एक्टर कुमार गौरव थे और फिल्म में उनका नाम ‘अक्षय’ था। तो ये मुझे बहुत अच्छा लगा कि यार ये मेरी पहली फिल्म है और कुमार गौरव का नाम अक्षय है तो मैंने सोचा कि मैं अपना नाम बदल लेता हूं।’ ऐसे राजीव से अक्षय बने एक्टरबस फिर क्या था ये राजीव भाटिया से वो बॉलीवुड के चमकते सितारे अक्षय कुमार बन गए। आज पूरी दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है। भूत बंगला के बाद इस फिल्म में आएंगे नजरअक्षय कुमार ने अपने करियर में कई सुपरहिट फिल्में दी हैं। हाल ही में अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ रिलीज हुई थी। वहीं, इन दिनों अक्षय कुमार अपनी अपकमिंग मूवी ‘वेलकम टू द जंगल’ को लेकर सुर्खियों में हैं। ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून, 2026 को सिनेमाघरों में आएगी
जब मोहब्बत हार गई धर्म की दीवारों से, हसरत जयपुरी के दर्द ने जन्म दिया हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीत को

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के दिग्गज लिरिसिस्ट कुछ ऐसे गाने लिख गए जिन पर आज भी चर्चा होती है। ऐसा ही एक गाना है हसरत जयपुरी का लिखा गाना दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। यह गाना शम्मी कपूर पर फिल्माया गया है। वह शूट के वक्त मुश्किल से अपने आंसू रोक पाए थे। कम लोग जानते हैं कि हसरत जयपुरी ने जिस दिन यह गाना लिखा था, उनकी प्रेमिका की शादी थी। वह जिसे पसंद करते थे वह हिंदू थी। धर्म की वजह से दोनों नहीं मिल सके और उसकी डोली उठी तो हसरत ने उसकी यादों को दुलहन बनाकर दिल के पास रखने का फैसला लिया। लड़कपन में लिखा था गानाहसरत जयपुरी ने हिंदी सिनेमा को कई बेहतरीन गाने दिए। वह छोटी उम्र से ही गीत लिखने लगे थे। जब बड़े हुए तो कच्ची उम्र के प्यार के दौरान लिखे गए गाने उन्होंने फिल्मों में दे दिए। ऐसा ही एक गाना था दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर। हसरत जयपुरी को उनके पड़ोस में रहने वाली लड़की से प्यार था। उस जमाने का प्यार बस आंखों-आंखों में और लव-लेटर वाला होता था। हसरत राधा के लिए लव-लेटर और गाने लिखते लेकिन दे नहीं पाते थे। इसी डर में उन्होंने लिख डाला था, ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर कि तुम नाराज ना होना। धर्म की वजह से नहीं बनी बातदोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे। लेकिन धर्म अलग था तो राहें अलग होनी ही थीं। एक दिन आया जब राधा की शादी हो गई। हसरत को कुछ कर नहीं सकते थे लेकिन अपने दर्द को उन्होंने गाने का रूप दिया। उन्होंने लिखा, दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुलहन बनाकर, रखूंगा मैं दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास…शम्मी कपूर की फिल्म ब्रह्मचारी की सिचुएशन पर यह गाना फिट बैठ गया। हसरत ने यह गाना दिया। जब शम्मी कपूर नहीं रोक पाए अपने आंसूइस गाने की शूटिंग से जुड़ा किस्सा भी इंट्रेस्टिंग है। इंडियन आइडल के एपिसोड में मनोज मुंतशिर ने बताया था कि गाना गाने के लिए शम्मी कपूर ने पहले मना कर दिया था। उन्होंने जब गाना सुना तो इस सिचुएशन को विजुअलाइज किया। वह इमोशंस कंट्रोल नहीं कर पाए और उनके आंसू आने लगे। उन्होंने गाना सुनकर मना कर दिया और बोले, प्लीज इसे बदल दो। दरअसल इस सीन में उनको रोना नहीं था। शम्मी को लग रहा था कि सीन में घुस गए तो आंसू रोकना मुश्किल हो जाएगा।
अजय देवगन का भोजपुरी कनेक्शन: मनोज तिवारी के साथ सुपरहिट फिल्म का जलवा

नई दिल्ली। बॉलीवुड के दमदार अभिनेता Ajay Devgn अपनी बहुआयामी अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में एक्शन, रोमांस और कॉमेडी जैसे हर जॉनर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अजय देवगन ने भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी और वहां भी दर्शकों के बीच जबरदस्त प्रभाव छोड़ा था। साल 2006 में आई भोजपुरी फिल्म ‘धरती कहे पुकार के’ में अजय देवगन ने स्पेशल अपीयरेंस किया था। इस फिल्म में उनके साथ भोजपुरी सुपरस्टार Manoj Tiwari मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में अजय देवगन के साथ बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्बानी मुखर्जी भी अहम किरदार में थीं। फिल्म का निर्देशन असलम शेख ने किया था। फिल्म की कहानी एक ग्रामीण परिवेश पर आधारित थी, जहां एक गांव को एक अत्याचारी विलेन “वीर मंगिया” के जुल्मों से परेशान दिखाया गया। इसी संघर्ष में मनोज तिवारी और अजय देवगन मिलकर गांव की रक्षा करते हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं। अजय देवगन ने फिल्म में एक पुलिस अधिकारी एसपी कुणाल सिंह का किरदार निभाया था, जो कहानी में निर्णायक मोड़ लेकर आता है। फिल्म का एक खास सीन आज भी दर्शकों को याद है, जिसमें मनोज तिवारी पर हमला होता है और अजय देवगन की एंट्री होती है। वह अपनी जान पर खेलकर उन्हें बचाते हैं और गुंडों का सामना करते हैं। यही सीन फिल्म का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ था। ‘धरती कहे पुकार के’ सिर्फ अपनी कहानी के कारण ही नहीं, बल्कि अपने गानों और संगीत के कारण भी सुपरहिट रही। फिल्म के गाने मनोज तिवारी, पामेला जैन, मधुश्री, अनुराधा पौडवाल, कैलाश खेर, सोनू कक्कड़ और उदित नारायण जैसे बड़े गायकों ने गाए थे। संगीत निर्देशन धनंजय मिश्रा ने किया था और गीत विनय बिहारी ने लिखे थे। फिल्म का बजट लगभग 2 करोड़ रुपये बताया जाता है, जबकि इसका कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंचा था, जिससे यह उस समय की सुपरहिट भोजपुरी फिल्मों में शामिल हो गई। IMDb पर भी फिल्म को अच्छी रेटिंग मिली है। आज भी यह फिल्म यूट्यूब पर उपलब्ध है और करोड़ों दर्शक इसे देख चुके हैं। टी-सीरीज के भोजपुरी चैनल पर मौजूद इस फिल्म को अब तक 1 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है, जो इसकी लोकप्रियता को साबित करता है। कुल मिलाकर, अजय देवगन का यह भोजपुरी अवतार उनके करियर का एक अनोखा और यादगार हिस्सा बन गया, जिसने साबित किया कि असली स्टारडम भाषा या इंडस्ट्री का मोहताज नहीं होता।
पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में Purushottam Maas को अत्यंत पवित्र और विशेष महीना माना जाता है। यह अवधि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए शुभ कार्य कई गुना फल देते हैं, लेकिन इसी के साथ वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के दौरान घर में रखी कुछ वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और परिवार की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया जाता है। सबसे पहले जिन चीजों से बचने की सलाह दी गई है, वे हैं टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां। घर में किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पारिवारिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नदी या पवित्र जल में विसर्जित करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी इस पवित्र माह में अशुभ माने गए हैं। घर में रखे सूखे पौधे न केवल वातावरण की ताजगी को कम करते हैं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। इसके स्थान पर हरे-भरे पौधे, विशेषकर तुलसी का पौधा, अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है। वास्तु शास्त्र में टूटे-फूटे कांच के बर्तनों को भी अशुभ बताया गया है। ऐसे बर्तन घर में रखने से आर्थिक परेशानियों और बाधाओं का संकेत मिलता है। इसलिए पुरुषोत्तम मास में इन्हें तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि घर में समृद्धि और स्थिरता बनी रहे। इसी तरह बंद पड़ी या खराब घड़ियां भी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। समय रुकना प्रगति में बाधा का संकेत माना जाता है, और वास्तु के अनुसार यह परिवार के विकास और तरक्की को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसी घड़ियों को या तो ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से हटा देना चाहिए। पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के वातावरण को भी शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किया गया हर छोटा सुधार भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है। कुल मिलाकर यह पवित्र महीना भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है, और साथ ही यह समय घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने और सकारात्मकता बढ़ाने का भी संदेश देता है।
Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट

नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन और महत्वपूर्ण महीना Shravan Month हर साल श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दौरान शिवभक्त उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के जरिए भोलेनाथ की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में भी सावन का यह पवित्र महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है। पंचांग गणना के अनुसार सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी, जब सावन कृष्ण प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। वहीं यह पावन महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस धार्मिक काल में वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है और हर तरफ “ॐ नमः शिवाय” के जयकारे गूंजने लगते हैं। इस बार सावन के दौरान कुल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें शिवभक्त अत्यंत शुभ मानते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासकर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए व्रत रखते हैं। सावन 2026 के सावन सोमवार इस प्रकार रहेंगे-पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026 इन सभी सोमवारों पर देशभर के शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलेगी। भक्त सुबह से ही शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस समय भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के अधिक करीब माने जाते हैं। इसी कारण इस महीने को शिव कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम समय माना गया है। पूजा विधि की बात करें तो श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और चंदन चढ़ाते हैं। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। अंत में शिव चालीसा और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है। कुल मिलाकर सावन 2026 शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक विशेष संगम लेकर आ रहा है, जिसका इंतजार हर श्रद्धालु पूरे वर्ष करता है।
इस दिन रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्य देव…. नौतपा में पड़ेगी प्रचंड गर्मी

नई दिल्ली। ज्येष्ठ महीने (Jyeshtha month) के शुरू होते ही गर्मी अपना प्रचंड (Extreme Heat) रूप दिखाने लगी है. लेकिन अब नौतपा (Nautapa) के चलते सूरज आग के गोले की तरह तपने वाला है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 25 मई 2026 को दोपहर 03:37 बजे ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने मित्र चंद्रमा के नक्षत्र ‘रोहिणी’ (Nakshatra ‘Rohini’) में प्रवेश कर रहे हैं. सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन (Surya Nakshatra Parivartan 2026) प्रकृति और मानव जीवन पर बड़ा असर डालेगा. सूर्य के रोहिणी में आते ही 25 मई से 2 जून 2026 तक ‘नौतपा’ रहेगा, जिसके कारण उत्तर और मध्य भारत में भीषण हीटवेव (लू) की स्थिति बनेगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो शीतलता के प्रतीक हैं. जब अग्नि तत्व सूर्य देव इस नक्षत्र में आते हैं, तो वे इसकी शीतलता को सोख लेते हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है. सूर्य का यह उग्र रूप 8 जून 2026 तक रहेगा, लेकिन शुरुआती 9 दिन यानी नौतपा का समय सबसे ज्यादा कष्टप्रद होगा. सूर्य के इस गोचर से जहां कुछ राशियों को लाभ होगा, वहीं 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य के मोर्चे पर भारी नुकसान और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 1. वृषभ राशि (Taurus)चूंकि सूर्य देव आपकी ही राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इसका सबसे सीधा और गहरा प्रभाव आप पर पड़ेगा. इस अवधि में आपके स्वभाव में बेवजह का गुस्सा, अहंकार और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों या बिजनेस में पार्टनर के साथ गंभीर विवाद हो सकते हैं. 25 मई से 8 जून के बीच पार्टनरशिप के कामों में कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनते काम बिगड़ सकते हैं. 2. मिथुन राशि (Gemini)मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव यानी व्यय और हानि के भाव में होने जा रहा है. इस दौरान आपके खर्चों में अप्रत्याशित रूप से भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा. धन हानि के प्रबल योग बन रहे हैं. किसी कानूनी मामले या कोर्ट-कचहरी के चक्कर में दौड़भाग और मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इस समय अवधि में किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने से बचें. पैसों के लेनदेन में पूरी सतर्कता बरतें. 3. वृश्चिक राशि (Scorpio)सूर्य देव आपकी राशि से सातवें भाव (साझेदारी और वैवाहिक जीवन) में गोचर करेंगे, जो सीधे आपके रिश्तों को प्रभावित करेगा. दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां और तनाव बढ़ सकता है. व्यापार में यदि पार्टनरशिप है, तो वहां भी मतभेद उभर सकते हैं. कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा को थोड़ी ठेस पहुंचने की आशंका है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. किसी भी व्यावसायिक दस्तावेज पर बिना अच्छी तरह पढ़े हस्ताक्षर न करें. 4. कुंभ राशि (Aquarius)कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर चौथे भाव में होने जा रहा है, जिसे सुख, संपत्ति और माता का भाव माना जाता है. पारिवारिक सुख-शांति में कमी आ सकती है और घरेलू मोर्चे पर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है. भूमि, मकान या वाहन से जुड़े मामलों में अचानक रुकावटें आ सकती हैं. इसके अलावा, सेहत में गिरावट आ सकती है. अपनी माता के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें. सीने में तकलीफ या हाई ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) के मरीज इस दौरान अपनी दवाइयां समय पर लें और धूप में निकलने से बचें.
1927, 1939 और 1941 की ऐतिहासिक घटनाएं: भूकंप, युद्ध और वैश्विक बदलाव की कहानी

इतिहास में 20वीं सदी की शुरुआत से मध्य तक का समय दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण और उथल-पुथल भरा रहा। 1927, 1939 और 1941 की ये तीन घटनाएं अलग-अलग क्षेत्रों में हुईं, लेकिन इन्होंने वैश्विक इतिहास पर गहरा असर डाला। 1927 का विनाशकारी चीन भूकंप1927 में चीन के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र (गांसू और शान्शी प्रांत के आसपास) में एक भीषण भूकंप आया, जिसकी तीव्रता लगभग 8.0 से 8.3 के बीच मानी जाती है। इसे दुनिया के सबसे घातक भूकंपों में से एक माना जाता है। इस आपदा में करीब 2 लाख लोगों की मौत हुई और हजारों गांव पूरी तरह तबाह हो गए। उस समय भूस्खलन, मकानों का ढहना और राहत व्यवस्था की कमी ने स्थिति को और भयावह बना दिया। आधुनिक आपदा प्रबंधन प्रणाली न होने के कारण इतनी बड़ी संख्या में जनहानि हुई। 1939 की इस्पात संधि (Pact of Steel)22 मई 1939 को द्वितीय विश्व युद्ध से ठीक पहले जर्मनी और इटली ने “इस्पात संधि” पर हस्ताक्षर किए। यह एक सैन्य और राजनीतिक गठबंधन था, जिसमें दोनों देशों ने युद्ध की स्थिति में एक-दूसरे का पूरा समर्थन करने का वादा किया। इस समझौते ने यूरोप में शक्ति संतुलन को बदल दिया और धुरी शक्तियों (Axis Powers) के गठन की दिशा को मजबूत किया, जिसमें बाद में जापान भी शामिल हुआ। यह संधि द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में एक बड़ा रणनीतिक कदम थी। 1941 का एंग्लो-इराकी युद्ध और फालुजा पर कब्जा1941 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इराक में ब्रिटिश प्रभाव के खिलाफ राजनीतिक अस्थिरता और विद्रोह बढ़ गया। इस स्थिति में एंग्लो-इराकी युद्ध छिड़ गया। मई 1941 में ब्रिटिश सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शहर फालुजा पर कब्जा कर लिया। यह कार्रवाई बगदाद की ओर बढ़ने और इराक में ब्रिटिश नियंत्रण बहाल करने की रणनीति का हिस्सा थी। इस युद्ध ने मध्य पूर्व में ब्रिटेन की सैन्य और राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। ये तीनों घटनाएं दिखाती हैं कि कैसे प्राकृतिक आपदाएं और वैश्विक युद्ध मानव सभ्यता को गहराई से प्रभावित करते हैं। एक ओर भूकंप जैसी त्रासदी जीवन की नाजुकता को दर्शाती है, तो दूसरी ओर युद्ध अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल देते हैं। -22मई
22 मई: मार्टिनिक में दास प्रथा उन्मूलन दिवस- स्वतंत्रता, संघर्ष और मानव गरिमा का प्रतीक

हर साल 22 मई को कैरिबियाई द्वीप मार्टिनिक में दास प्रथा उन्मूलन दिवस (Abolition of Slavery Day) बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह दिन केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं है, बल्कि मानव स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों के लिए लड़े गए लंबे संघर्ष का प्रतीक है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि गुलामी की अमानवीय व्यवस्था को खत्म करने के लिए कितनी पीढ़ियों ने संघर्ष किया और बलिदान दिया। मार्टिनिक और दास प्रथा का इतिहासमार्टिनिक एक फ्रांसीसी विदेशी क्षेत्र है, जो कैरिबियन सागर में स्थित है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में यह द्वीप चीनी (sugar) और कॉफी के बागानों के लिए प्रसिद्ध था। इन बागानों में काम करने के लिए अफ्रीका से लाखों लोगों को जबरन गुलाम बनाकर लाया गया। इन गुलामों को अमानवीय परिस्थितियों में काम करना पड़ता था, जहां उन्हें न अधिकार थे, न स्वतंत्रता और न ही सम्मान। फ्रांसीसी औपनिवेशिक शासन के दौरान दास प्रथा (Slavery) इस क्षेत्र की आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी थी। लेकिन समय के साथ इसके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। 22 मई 1848: ऐतिहासिक स्वतंत्रता का दिन22 मई 1848 को मार्टिनिक में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब गुलामों ने अपने उत्पीड़न के खिलाफ बड़ा विद्रोह किया। यह आंदोलन इतना प्रभावशाली था कि तत्कालीन फ्रांसीसी प्रशासन को मजबूर होकर उसी दिन दास प्रथा को समाप्त करना पड़ा। यह दिन मार्टिनिक के इतिहास में स्वतंत्रता की जीत के रूप में दर्ज हो गया। इस घटना के बाद हजारों गुलामों को आजादी मिली और यह द्वीप धीरे-धीरे एक नए सामाजिक और आर्थिक ढांचे की ओर बढ़ा। दास प्रथा उन्मूलन का महत्वदास प्रथा उन्मूलन केवल एक कानूनी बदलाव नहीं था, बल्कि यह मानवाधिकारों की जीत थी। इसने यह साबित किया कि कोई भी इंसान किसी दूसरे इंसान की संपत्ति नहीं हो सकता। यह दिवस समानता, स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा का प्रतीक बन गया। आज के समय में इसका महत्वआज भी 22 मई को मार्टिनिक में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ऐतिहासिक परेड और सांस्कृतिक आयोजन गुलामों के संघर्ष की कहानियों का स्मरण स्कूलों और संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि यह दिन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और मानवाधिकारों के महत्व को समझाने का काम करता है।मार्टिनिक का दास प्रथा उन्मूलन दिवस हमें यह सिखाता है कि स्वतंत्रता कोई दी हुई चीज नहीं है, बल्कि यह संघर्ष और बलिदान का परिणाम है। यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि समाज में समानता और न्याय की रक्षा करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। 22 मई केवल एक तारीख नहीं, बल्कि मानवता की जीत का प्रतीक है। -मार्टिनिक दास प्रथा उन्मूलन दिवस
चिलचिलाती धूप में शरीर को ठंडा रखने का आसान तरीका, घर पर बनाएं फालसा छाछ और पाएं ताजगी का अहसास

नई दिल्ली ।भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच शरीर को ठंडा और हाइड्रेट रखना एक बड़ी जरूरत बन जाता है। ऐसे समय में लोग आमतौर पर छाछ, लस्सी और नींबू पानी का सहारा लेते हैं, लेकिन रोज एक ही स्वाद से मन ऊब जाता है। इसी वजह से फालसा छाछ एक बेहतरीन और पारंपरिक विकल्प के रूप में सामने आती है, जो न केवल शरीर को ठंडक देती है बल्कि अपने खट्टे-मीठे स्वाद से ताजगी का नया अनुभव भी कराती है। यह पेय गर्मियों में शरीर को अंदर से ठंडा रखने और लू के असर को कम करने में मददगार माना जाता है। फालसा एक मौसमी फल है जिसमें प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाले गुण पाए जाते हैं। जब इसे दही और मसालों के साथ मिलाकर छाछ के रूप में तैयार किया जाता है तो यह एक सुपर समर ड्रिंक बन जाता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करता है और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। फालसा छाछ बनाने के लिए सबसे पहले ताजे फालसा को अच्छी तरह धोकर एक बर्तन में लिया जाता है। इसमें हल्की मात्रा में चीनी या मिश्री और थोड़ा पानी मिलाकर इसे हाथों से अच्छे से मसल लिया जाता है ताकि इसका गूदा अलग हो जाए और स्वाद पूरी तरह निकल आए। इसके बाद इस मिश्रण को छानकर बीज अलग कर दिए जाते हैं और एक गाढ़ा खट्टा-मीठा जूस तैयार किया जाता है। इसके बाद एक बड़े बर्तन में ताजा दही लिया जाता है और उसमें ठंडा पानी मिलाया जाता है। इसी में तैयार फालसा जूस डाला जाता है। स्वाद को संतुलित बनाने के लिए काला नमक और भुना जीरा पाउडर मिलाया जाता है। इन सभी चीजों को अच्छे से मथकर तब तक फेंटा जाता है जब तक मिश्रण हल्का झागदार और स्मूद न हो जाए। यह प्रक्रिया छाछ को और अधिक स्वादिष्ट और पाचक बना देती है। तैयार छाछ को सर्व करने के लिए गिलास में बर्फ के टुकड़े डाले जाते हैं और ऊपर से यह ठंडी फालसा छाछ डाली जाती है। इसे पुदीने की पत्तियों और भुने जीरे से सजाकर परोसा जाता है। इसका स्वाद न केवल शरीर को ठंडक देता है बल्कि मानसिक रूप से भी ताजगी का अहसास कराता है। गर्मी के मौसम में यह पेय शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद दही के प्रोबायोटिक्स पाचन को सुधारते हैं और पेट की जलन को कम करते हैं। वहीं फालसा में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन C शरीर को लू और तेज धूप के असर से बचाने में मदद करते हैं। यह ड्रिंक शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखकर डिहाइड्रेशन से भी राहत दिलाती है। इस तरह फालसा छाछ सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि गर्मियों में शरीर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखने का एक आसान और स्वादिष्ट उपाय है, जिसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और रोजाना सेवन किया जा सकता है।