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नवरात्रि में व्रत क्यों है जरूरी? आयुर्वेद बताता है शरीर और मन का संतुलन

नई दिल्ली। नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक आस्था का हिस्सा नहीं है बल्कि इसके पीछे गहरी आयुर्वेदिक सोच भी जुड़ी हुई है। अक्सर लोग इसे सिर्फ पूजा-पाठ और परंपरा से जोड़कर देखते हैं लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर को अंदर से रीसेट करने और संतुलित करने का एक प्राकृतिक तरीका है। दरअसल नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है। यह संक्रमण काल शरीर के लिए संवेदनशील माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान शरीर में वात और पित्त दोष असंतुलित हो सकते हैं जिससे पाचन तंत्र कमजोर पड़ जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में व्रत रखने से शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। नवरात्रि के व्रत में लोग हल्का और सात्विक भोजन जैसे फल कुट्टू सिंघाड़ा दही और साबूदाना लेते हैं। यह भोजन पचने में आसान होता है और पाचन तंत्र पर ज्यादा दबाव नहीं डालता। रोजमर्रा के तले-भुने और मसालेदार खाने से जो अतिरिक्त बोझ शरीर पर पड़ता है वह इस दौरान कम हो जाता है। इससे शरीर को खुद को ठीक करने और ऊर्जा को पुनः संतुलित करने का समय मिलता है। आयुर्वेद में पाचन शक्ति जिसे अग्नि कहा जाता है को स्वास्थ्य का आधार माना गया है। जब अग्नि कमजोर होती है तो शरीर में अपच और विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं। व्रत रखने से यह अग्नि दोबारा सक्रिय होती है और शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलने लगते हैं। यही कारण है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का ऊर्जावान और अधिक सक्रिय महसूस करते हैं। नवरात्रि का व्रत केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद होता है। इस दौरान लोग ध्यान पूजा और संयम का पालन करते हैं जिससे मानसिक शांति मिलती है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स बन जाता है जहां व्यक्ति खुद को थोड़ा धीमा करके अंदर से संतुलित करता है। इसके अलावा व्रत में खाए जाने वाले सात्विक खाद्य पदार्थ शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ-साथ इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। ये खाद्य पदार्थ न केवल हल्के होते हैं बल्कि मौसमी बीमारियों से बचाव में भी सहायक होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि नवरात्रि का व्रत शरीर और मन दोनों को संतुलित करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यह परंपरा हमें न सिर्फ आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहद लाभकारी साबित होती है।

SOLO TRIP PLACE: सोलो घूमने के लिए भारत की ये बेस्ट जगहें, जहाँ मिलेगा सुकून

  SOLO TRIP PLACE: नई दिल्ली। आज के समय में ज़्यादातर लोग अकेले ही घूमना पसंद करते हैं। अगर आप सोलो ट्रिप के लिए कोई प्लान बनाना चाहते हैं लेकिन आपको उसमें काफी टिकत आ रही हैं और जगह नहीं चुन पा रहे हैं? तो हम आपके लिए लाए हैं, भारत की कुछ ऐसी जगह जहाँ जाने पर आपको सुकून, नेचर की खूबसूरती और बहुत कुछ देखने को मिलेगा।आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में। अकेले घूमने के लिए खास जगहें अगर आप पहली बार अकेले घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो मन में थोड़ा डर और बहुत सारी उम्मीदें होती हैं। अकेले घूमना सिर्फ घूमना नहीं, बल्कि खुद को समझना, अपनी ज़िंदगी जीने और सुकून हासिल करने का मौका देता है। ऋषिकेश हिमालय की गोद में गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश अकेले घूमने के लिए एक खास जगह है। यहां का शांत वातावरण, योग और ध्यान आपको खुद से जोड़ने का मौका देता है। अगर आप एडवेंचर पसंद करते हैं, तो रिवर लिफ्टिंग, नेचर वॉक और पहाड़ी ट्रेल्स आपको रोमांच से भर देंगे। ये जगह घूमने के लिए काफी खास मानी जाती है। गोवा गोवा सिर्फ पार्टी और नाइटलाइफ़ के लिए ही मशहूर नहीं है। बल्कि, साउथ गोवा के पालोलेम और अगोंडा जैसे बीच शांत माहौल और खूबसूरत सनसेट के लिए जाने जाते हैं। यहां स्कूटर पर घूमना, समुद्र किनारे तैरते आसमान में पक्षियों को उड़ता देखना बहुत सुकून देता है। गोवा का फ्रेंडली माहौल और आसान ट्रांसपोर्टेशन इसे अकेले घूमने वालों के लिए सबसे अच्छा बनाता है। कामला अगर आप समुद्र किनारे सुकून की तलाश है तो कामला आपके लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है। अरब सागर के ऊपर ऊंची चट्टानों पर बसा यह शहर सुकून भरा अनुभव देता है। वहीं क्लिफ कैफे से सनसेट देखना या योग सीखना कामला सोलो ट्रैवलिंग के लिए परफेक्ट माना जाता है। आप यहां पर आकर आप अपना खास समय घूम सकते हैं।

MISS INDIA: मिस इंडिया से आध्यात्मिक सफर तक: तनुश्री दत्ता के जीवन के अनसुने और चौंकाने वाले किस्से

  MISS INDIA: नई दिल्ली। जमशेदपुर की गलियों से निकलकर मिस इंडिया यूनिवर्स 2004 का खिताब जीतने वाली तनुश्री दत्ता का जीवन सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उनके जीवन में कई ऐसे पहलू हैं जो किसी रहस्यमयी कहानी से कम नहीं लगते 19 मार्च को जन्मीं तनुश्री ने बॉलीवुड में अपनी पहचान फिल्म Aashiq Banaya Aapne और Dhol जैसी फिल्मों से बनाई लेकिन उनके निजी अनुभव अक्सर ज्यादा चर्चा में रहे तनुश्री दत्ता ने एक पुराने इंटरव्यू में अपने बचपन से जुड़ा ऐसा दावा किया था जिसने हर किसी को चौंका दिया उन्होंने बताया कि उन्हें बहुत छोटी उम्र से ही परलौकिक शक्तियों का अहसास होने लगा था उनका कहना था कि जब वह महज चार साल की थीं तब उन्हें अलग-अलग तरह की ऊर्जा दिखाई देती थीं जो कभी बच्चों के रूप में तो कभी किसी और रूप में उनके सामने आती थीं उन्होंने दावा किया कि ये ऊर्जा उनसे बात करती थीं उनके साथ खेलती थीं और कभी-कभी उन्हें आने वाली घटनाओं के बारे में चेतावनी भी देती थीं एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्हें छह महीने पहले ही आभास हो गया था कि उनके पड़ोस के एक घर में कुछ बुरा होने वाला है उस समय उन्होंने अपनी मां से भी कहा था कि उस जगह पर नहीं जाना चाहिए तनुश्री के मुताबिक छह महीने बाद उस घर में एक महिला की मौत हो गई जिससे उनका विश्वास और गहरा हो गया कि उन्हें मिलने वाले ये संकेत सामान्य नहीं थे उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल के दिनों में भी उन्हें ऐसी ऊर्जा बच्चों के रूप में दिखाई देती थीं और वे उनसे बातचीत करती थीं हालांकि इन दावों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं लेकिन तनुश्री हमेशा अपनी आध्यात्मिक सोच और अनुभवों को लेकर खुलकर बात करती रही हैं अपने करियर के पीक पर उन्होंने अचानक फिल्मों से दूरी बनाकर आत्मचिंतन और साधना का रास्ता चुना उन्होंने लद्दाख के मठों में समय बिताया और बाद में अमेरिका में भी अपनी आध्यात्मिक यात्रा को जारी रखा उनके इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमर की दुनिया तक सीमित नहीं रहना चाहती थीं बल्कि जीवन के गहरे पहलुओं को समझने की तलाश में थीं तनुश्री दत्ता का यह सफर उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाता है जहां एक ओर उन्होंने फिल्मों में बोल्ड इमेज से पहचान बनाई वहीं दूसरी ओर उनका आध्यात्मिक और रहस्यमयी पक्ष लोगों के लिए आज भी जिज्ञासा का विषय बना हुआ है

HOME MADE SCRUB: चेहरे पर जमी टैनिंग की हो जाएगी छुट्टी, बस अपनाएं यह ट्रिक

HOME MADE SCRUB:  नई दिल्ली। आज के समय में देखा जाता है कि महिलाएं अपने चेहरे को सुंदर और ग्लोइंग बनाने के लिए मार्केट से कई सारे प्रोडक्ट बेचती हैं, जबकि उनका उतना अच्छा रिस्पॉन्स उन्हें नहीं मिल पाता है। कई बार बार-बार धूप में जाना काम करना इसके साथ ही घर पर भी स्किन केयर को ज्यादा अच्छे से फॉलो ना कर पाने की वजह से आपके चेहरे को काफी डैमेज हो जाते हैं कई तरह की स्किन प्रॉब्लम आपको होने लगती है। सबसे छुटकारा पाने के लिए आपके घर में ही एक खास स्क्रब बनाना चाहिए तो भरोसे उसके बारे में बताते हैं।घर में ही बना सकती हैं होममेड स्क्रब अगर आप भी अपने चेहरे की खूबसूरती बढ़ाना चाहती हैं, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। आप घर में आसानी से डी टैन स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसे बनाने के लिए कुछ सामग्री की ज़रूरत पड़ेगी। बनाने के लिए उसकी सामग्री शहद चावल का आटा ग्लिसरीन नारियल तेल स्क्रब बनाने का तरीका इसे बनाने के लिए एक कटोरी में थोड़ा सा चावल का आटा लें। फिर इसमें थोड़ा सा शहद और ग्लिसरीन मिला लें। अब सभी को अच्छे से मिक्स कर लें और नारियल तेल मिक्स करें। इन सभी चीज़ों को तब तक फेंटे, जब तक यह गाढ़ा न हो जाए। अब इसको स्क्रब को मिक्स कर लें, और इसको एयर टाइट डिश में भरकर रख दें। इस स्क्रब को आप रात में सोने से पहले फेस पर 30-40 मिनट के लिए लगाएं। अब कच्चा दूध हाथ में लेकर हल्के हाथों से फेस की मसाज करें। इन बातों का ध्यान रखें अगर आप इसको पहली बार इस्तेमाल कर रही हैं, तो पहले स्क्रब टेस्ट जरूर करें। इस स्क्रब को लगाने के बाद आपके चेहरे में कई तरह के बदलाव आए ना शुरू हो जाएंगे हफ्ते में दो-तीन बार अगर आपको इस स्क्रब को लगते हैं तब धीरे-धीरे आपका चेहरा साफ होने लगेगा और काफी निखरने लगेगा हालांकि इसके साथ-साथ आपको अपने खान-पान पर भी पूरा ध्यान रखना चाहिए ताकि आपका चेहरा हमेशा अच्छा और ताजगी भरा रहे ताकि आपको मार्केट के बड़े प्रोडक्ट की जरूरत ना पड़े।

GWALIOR NAGAR NIGAM: ग्वालियर में बड़ा बदलाव; अब सरकारी दफ्तर भी देंगे सेवा शुल्क,नगर निगम का बड़ा रेवेन्यू प्लान शुरू

NAGAR NIGAM

HIGHLIGHTS: सरकारी भवनों से भी अब सेवा शुल्क वसूली नगर निगम को 300 करोड़ वसूली की उम्मीद 410 करोड़ का कुल बकाया सामने आया अधिकारियों पर कार्रवाई और नोटिस जारी 30 मार्च तक विशेष अभियान जारी GWALIOR NAGAR NIGAM: मध्यप्रदेश। ग्वालियर में नगर निगम ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बड़ा फैसला लिया है। बता दें कि अब कलेक्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक कार्यालय समेत सभी सरकारी भवनों से भी सेवा शुल्क वसूला जाएगा। यह कदम नगर निगम के लिए करीब 300 करोड़ रुपए की वसूली का रास्ता खोल सकता है। नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे निगम को मिलेगी राहत ग्वालियर नगर निगम लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। शहर में पानी, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर भारी खर्च होता है, लेकिन पर्याप्त राजस्व नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे। इसके चलते अब सरकारी संस्थानों को भी निजी संस्थानों की तरह शुल्क देना होगा। सलकनपुर में चैत्र नवरात्रि की धूम, मां विजयासन देवी मंदिर सज-धज कर स्वागत को तैयार सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिला आधार इस निर्णय की नींव सुप्रीम कोर्ट के 2009 के फैसले पर रखी गई है, जिसमें नगरीय निकायों को सरकारी संपत्तियों से भी सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया था। नियमों के अनुसार 33% से 75% तक शुल्क तय किया जा सकता है। मराठा आरक्षण पर फिर गरमाई राजनीति मुंबई मार्च की तैयारी साथ ही मालाड जमीन आवंटन पर 300 करोड़ से ज्यादा बकाया, सख्ती शुरू नगर निगम की जांच में सामने आया है कि करीब 410 करोड़ रुपए बकाया हैं, जिसमें 300 करोड़ सिर्फ सरकारी विभागों पर लंबित हैं। वसूली के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिसमें अधिकारियों पर कार्रवाई और नोटिस शामिल हैं। शेयर बाजार में बुल्स का दबदबा जारी, सेंसेक्स लगातार तीसरे दिन मजबूती के साथ बढ़ा 30 मार्च तक चलेगा विशेष अभियान अपर आयुक्त प्रदीप तोमर के अनुसार 30 मार्च तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। टीमों को मैदान में उतार दिया गया है और रोजाना कार्रवाई की जा रही है।

CHETRA NAVRATRI 2026 : नवरात्र में मां दुर्गा को अर्पित करें यह लाल फल, मिलेगा सुख समृद्धि और सेहत का आशीर्वाद

  CHETRA NAVRATRI 2026 : नई दिल्ली। चैत्र नवरात्र का पावन पर्व शुरू होते ही पूरे देश में भक्ति और आस्था का माहौल बन जाता है इस दौरान भक्त मां दुर्गा की आराधना में विभिन्न प्रकार के फल फूल और प्रसाद अर्पित करते हैं लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एक ऐसा विशेष फल है जो भगवती को अत्यंत प्रिय माना जाता है और वह है अनार जिसे दादिमा भी कहा जाता है मान्यता है कि मां दुर्गा को लाल रंग अत्यधिक प्रिय है और अनार के लाल दाने शक्ति ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक होते हैं यही कारण है कि नवरात्र के दौरान अनार चढ़ाने की परंपरा बेहद शुभ मानी जाती है शास्त्रों में भी इसका उल्लेख मिलता है कि सभी फलों में अनार देवी को विशेष प्रिय है और इसे अर्पित करने से सुख समृद्धि संतान सुख और कर्ज मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है धार्मिक दृष्टि से अनार को अखंड और पवित्र फल माना गया है जैसे नारियल को श्रीफल कहा जाता है उसी तरह अनार भी पूजा में विशेष स्थान रखता है इसकी लालिमा मां दुर्गा के शक्ति स्वरूप से जुड़ी मानी जाती है और इसे अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार में सौभाग्य बढ़ता है नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु विशेष रूप से आर्थिक समृद्धि और जीवन की परेशानियों से मुक्ति के लिए अनार चढ़ाते हैं ऐसा माना जाता है कि यह फल न केवल देवी को प्रसन्न करता है बल्कि भक्तों के जीवन में संतुलन और शांति भी लाता है धार्मिक महत्व के साथ-साथ अनार स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी फल बताया गया है यह रक्त को शुद्ध करता है और शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को दूर करने में मदद करता है इसके नियमित सेवन से पाचन तंत्र मजबूत होता है और हृदय को भी लाभ मिलता है अनार में विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट फाइबर और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं गर्मियों में यह शरीर को ठंडक देता है और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है अनार का जूस पीने से थकान दूर होती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है इस तरह अनार एक ऐसा फल है जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है नवरात्र के इस पावन अवसर पर मां दुर्गा को अनार अर्पित करना जीवन में सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना का सुंदर माध्यम बन सकता है

'गाड़ी रोको, मैं यह फिल्म नहीं कर रहा!' जब ऋषि कपूर ने पहला सीन सुनते ही निर्देशक को बीच सड़क पर उतारा

नई दिल्ली। बॉलीवुड के ‘चिंटू जी’ यानी ऋषि कपूर अपनी बेबाकी और बेहतरीन अदाकारी के लिए तो मशहूर थे ही, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में उनके अनुशासन और समय की पाबंदी के किस्से भी कम नहीं हैं। फिल्ममेकर डेविड धवन ने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ऋषि कपूर की वर्किंग स्टाइल से जुड़ा एक ऐसा वाकया साझा किया, जो आज के दौर के एक्टर्स के लिए हैरान करने वाला हो सकता है। ऋषि कपूर का एक अटूट नियम था-वे शाम 7 बजे के बाद काम नहीं करते थे और ‘नाइट शिफ्ट’ के नाम से ही चिढ़ जाते थे। डेविड धवन ने कपिल शर्मा के शो पर बताया कि एक बार एक निर्देशक ऋषि कपूर को अपनी फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाने आए थे। ऋषि कपूर उस वक्त घर के लिए निकल रहे थे, तो उन्होंने निर्देशक से कहा कि वे रास्ते में गाड़ी में ही कहानी सुना दें। जैसे ही निर्देशक ने नरेशन शुरू किया और पहले ही सीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह एक नाइट सीन (रात का दृश्य) है, ऋषि कपूर ने तुरंत अपना आपा खो दिया। उन्होंने बीच रास्ते में ही ड्राइवर को चिल्लाकर कहा, गाड़ी रोको! ऋषि कपूर ने उस निर्देशक से दो टूक शब्दों में कह दिया, मैं उन फिल्मों में काम नहीं करता जिनमें रात की शूटिंग होती है। चाहे कुछ भी हो जाए, मेरा पैकअप 7 बजे हो जाता है। उस बेचारे निर्देशक का नरेशन पहले ही सीन पर खत्म हो गया और फिल्म वहीं रिजेक्ट हो गई। डेविड धवन के अनुसार, ऋषि कपूर को नाइट शूटिंग से सख्त नफरत थी और वे अपनी शर्तों पर ही काम करना पसंद करते थे। सिर्फ समय ही नहीं, ऋषि कपूर हर सीन के पीछे तर्क (Logic) भी तलाशते थे। डेविड धवन बताते हैं कि वे एक बेहद बुद्धिमान अभिनेता थे। अगर उन्हें कोई सीन समझ नहीं आता, तो वे डायरेक्टर से सवाल करते थे- मैं इसे इसी तरह क्यों करूँ? जब तक डायरेक्टर उन्हें संतुष्ट नहीं कर देता था, वे काम आगे नहीं बढ़ाते थे। ‘अमर अकबर एंथनी’ और ‘चांदनी’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले ऋषि कपूर का यही अनुशासन और स्पष्टवादिता उन्हें फिल्म जगत का एक ऐसा सितारा बनाती है, जिसकी कमी आज भी सिनेमा को खलती है।

छोटे रोल, बड़ा धमाका: 'धुरंधर' ने सिर्फ अक्षय खन्ना ही नहीं, इन 6 गुमनाम कलाकारों की भी बदल दी किस्मत; अब पार्ट-2 का है इंतज़ार

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा प्रेमियों के लिए 18 मार्च की शाम बेहद खास होने वाली है, क्योंकि बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘धुरंधर 2’ सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फिल्म के पहले भाग ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़े थे, बल्कि इसने कई ऐसे कलाकारों को पहचान दिलाई जो लंबे समय से बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। हालांकि ‘धुरंधर’ की सफलता का बड़ा श्रेय मुख्य भूमिका निभा रहे अक्षय खन्ना को जाता है, लेकिन इस फिल्म की असली ताकत इसके वे सहायक कलाकार भी रहे, जिन्होंने अपने छोटे मगर प्रभावशाली किरदारों से जान फूँक दी। इस सूची में सबसे पहला नाम बिमल ओबेरॉय का आता है, जिन्होंने फिल्म में बलूच यूनाइटेड फोर्स (BUF) के लीडर ‘शिरानी अहमद बलोच’ की भूमिका निभाई। सालों तक छोटे-मोटे किरदारों में नजर आने वाले बिमल के लिए यह फिल्म एक रिफ्रेशिंग इमेज लेकर आई, जिससे उनकी पहचान एक गंभीर अभिनेता के रूप में स्थापित हुई। वहीं, रजत अरोड़ा ने ‘मुक्का गुरसेवक सिंह’ के किरदार में सीमित समय के बावजूद अपनी बॉडी लैंग्वेज और एक्टिंग से सबका ध्यान खींचा। रजत, जो रणवीर सिंह को अपनी प्रेरणा मानते हैं, इस फिल्म की सफलता के बाद रातों-रात चर्चा का केंद्र बन गए। फिल्म में ‘डोंगा’ का किरदार निभाने वाले नवीन कौशिक की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। ‘रॉकेट सिंह’ जैसी फिल्मों में काम करने के बावजूद उन्हें असली शोहरत ‘धुरंधर’ से मिली। नवीन ने खुद स्वीकार किया कि एक समय वह अपनी मेहनत पर संदेह करने लगे थे, लेकिन इस फिल्म की सफलता ने उनका आत्मविश्वास लौटा दिया। इसी तरह, दानिश पंडोर के लिए साल 2025 एक ‘टर्निंग ईयर’ साबित हुआ। ‘छावा’ में इखलास खान और ‘धुरंधर’ में ‘उजैर बलूच’ बनकर उन्होंने साबित कर दिया कि मॉडलिंग से एक्टिंग तक का उनका सफर अब एक सफल मुकाम पर है। एंटी-हीरो के रूप में मशहूर अमरोही ने ‘नवाब शफीक’ के किरदार को इतनी शिद्दत से निभाया कि वे दर्शकों की यादों में बस गए। उनकी सहज अदाकारी ने उन्हें भीड़ से अलग खड़ा कर दिया। अंत में, आसिफ अली हैदर खान ने ‘बाबू डकैत’ यानी रहमान के पिता के रूप में एक बड़े स्केल की बॉलीवुड एक्शन फिल्म में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराई। इन सभी कलाकारों के लिए ‘धुरंधर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके करियर की नई उड़ान का जरिया बनी है। अब देखना यह है कि इनमें से कौन-कौन से सितारे ‘धुरंधर 2’ में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरते नजर आएंगे।

चोली के पीछे सही तो सरके चुनर पर बवाल क्यों? नोरा फतेही के गाने पर मचे हंगामे के बीच डायरेक्टर की पत्नी ने दागे तीखे सवाल

नई दिल्ली। साउथ की बहुप्रतीक्षित फिल्म केडी द डेविल अपनी रिलीज से पहले ही एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। फिल्म के नए गाने सरके चुनर तेरी सरके में नोरा फतेही और संजय दत्त की केमिस्ट्री को जहां कुछ लोग पसंद कर रहे थे, वहीं इसके डबल मीनिंग द्विअर्थी शब्दों ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। विवाद इतना बढ़ा कि म्यूजिक पार्टनर ‘आनंद ऑडियो’ को यूट्यूब से इस गाने के हिंदी वर्जन को हटाना पड़ा। अब इस पूरे मामले पर फिल्म के राइटर-डायरेक्टर प्रेम की पत्नी और मशहूर अभिनेत्री रक्षिता प्रेम ने खुलकर अपनी बात रखी है। रक्षिता ने इंस्टाग्राम स्टोरीज के जरिए उन आलोचकों को आड़े हाथों लिया जो इस गाने की वजह से फिल्म के डायरेक्टर और उनके पिछले काम पर सवाल उठा रहे हैं। रक्षिता ने सवाल किया कि जब भारतीय सिनेमा में चोली के पीछे क्या है, पीलिंग्स और ड्रीमम वेकअपम जैसे गाने आए थे, तब उन्हें सहजता से स्वीकार कर लिया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, जब पूरी की पूरी फिल्मों में केवल सेक्शुअल इंटरकोर्स की बातें की जाती हैं, तब किसी को ऐतराज नहीं होता, तो फिर अब इस एक गाने पर इतना बवाल क्यों? हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इसे सही नहीं ठहरा रही हैं, बल्कि केवल जनता के दोहरे रवैये को समझने की कोशिश कर रही हैं। रक्षिता ने फिल्म मेकर्स के प्रति हो रहे अभद्र व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दर्शकों को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी फिल्म मेकर या लेखक को गाली देना गलत है। उन्होंने कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री (सैंडलवुड) की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि आज के समय में किसी फिल्म को ओटीटी या बड़े चैनल्स पर बेचना एक डायरेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। रक्षिता के अनुसार, केडी (KD) हमारे बच्चे की तरह है और हम अंत में वही करेंगे जो फिल्म के लिए सही होगा। गौरतलब है कि यह फिल्म 30 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। गाने की शुरुआती लाइनों और इसके फिल्मांकन को लेकर मचे इस हंगामे ने फिल्म के प्रमोशन को एक अलग ही दिशा दे दी है। जहां एक तरफ फिल्म की टीम सिर्फ प्यार और भरोसे की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सेंसर बोर्ड और दर्शकों की पैनी नजर अब पूरी फिल्म पर टिकी हुई है।

नवरात्र में सफेद नमक वर्जित, लेकिन सेंधा नमक क्यों खाते हैं भक्त, जानिए क्‍या है कारण?

नई दिल्ली। नवरात्र के पावन पर्व पर लोग अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं तो कुछ दिनभर व्रत रखकर शाम को भोजन करते हैं। कुछ श्रद्धालु मातारानी की सेवा करते हुए जलाहार ही करते हैं। ऐसे ही कई लोग नवरात्र के दौरान भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं। खास बात यह है कि नवरात्र में साधारण या सफेद नमक का उपयोग पूरी तरह वर्जित माना जाता है लेकिन सेंधा नमक का सेवन व्रत में करना मान्य है।साधारण नमक और सेंधा नमक में अंतर धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टिकोण से साधारण नमक और सेंधा नमक में काफी अंतर है। साधारण नमक जो समुद्री नमक भी कहलाता है कई रासायनिक और मशीनी प्रक्रियाओं से गुजरता है। इस कारण इसे व्रत के लिए शुद्ध नहीं माना जाता। वहीं सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से हिमालय की चट्टानों से निकाला जाता है और इसे शुद्ध नमक मानकर व्रत में उपयोग किया जाता है। सेंधा नमक शुद्ध और सात्विक हिंदू धर्म में व्रत का उद्देश्य केवल भोजन पर नियंत्रण नहीं बल्कि मन को भगवान की भक्ति में लगाना और सात्विक जीवन जीना भी है। साधारण नमक कृत्रिम माना जाता है जबकि सेंधा नमक स्वयं सिद्ध और सात्विक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक शरीर में शीतलता बनाए रखता है और मन को शांत करता है। ध्यान और पूजा के समय शरीर और मन का सात्विक होना जरूरी होता है इसलिए व्रत में सेंधा नमक का महत्व बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो व्रत के दौरान अनाज या सामान्य भोजन कम लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। सफेद नमक की तुलना में सेंधा नमक में मैग्नीशियम पोटेशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इस कारण व्रत के दौरान भोजन में सेंधा नमक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि नमक का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए।