चोली के पीछे सही तो सरके चुनर पर बवाल क्यों? नोरा फतेही के गाने पर मचे हंगामे के बीच डायरेक्टर की पत्नी ने दागे तीखे सवाल

नई दिल्ली। साउथ की बहुप्रतीक्षित फिल्म केडी द डेविल अपनी रिलीज से पहले ही एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। फिल्म के नए गाने सरके चुनर तेरी सरके में नोरा फतेही और संजय दत्त की केमिस्ट्री को जहां कुछ लोग पसंद कर रहे थे, वहीं इसके डबल मीनिंग द्विअर्थी शब्दों ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। विवाद इतना बढ़ा कि म्यूजिक पार्टनर ‘आनंद ऑडियो’ को यूट्यूब से इस गाने के हिंदी वर्जन को हटाना पड़ा। अब इस पूरे मामले पर फिल्म के राइटर-डायरेक्टर प्रेम की पत्नी और मशहूर अभिनेत्री रक्षिता प्रेम ने खुलकर अपनी बात रखी है। रक्षिता ने इंस्टाग्राम स्टोरीज के जरिए उन आलोचकों को आड़े हाथों लिया जो इस गाने की वजह से फिल्म के डायरेक्टर और उनके पिछले काम पर सवाल उठा रहे हैं। रक्षिता ने सवाल किया कि जब भारतीय सिनेमा में चोली के पीछे क्या है, पीलिंग्स और ड्रीमम वेकअपम जैसे गाने आए थे, तब उन्हें सहजता से स्वीकार कर लिया गया था। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, जब पूरी की पूरी फिल्मों में केवल सेक्शुअल इंटरकोर्स की बातें की जाती हैं, तब किसी को ऐतराज नहीं होता, तो फिर अब इस एक गाने पर इतना बवाल क्यों? हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इसे सही नहीं ठहरा रही हैं, बल्कि केवल जनता के दोहरे रवैये को समझने की कोशिश कर रही हैं। रक्षिता ने फिल्म मेकर्स के प्रति हो रहे अभद्र व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दर्शकों को सवाल पूछने का पूरा अधिकार है, लेकिन किसी फिल्म मेकर या लेखक को गाली देना गलत है। उन्होंने कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री (सैंडलवुड) की चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि आज के समय में किसी फिल्म को ओटीटी या बड़े चैनल्स पर बेचना एक डायरेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। रक्षिता के अनुसार, केडी (KD) हमारे बच्चे की तरह है और हम अंत में वही करेंगे जो फिल्म के लिए सही होगा। गौरतलब है कि यह फिल्म 30 अप्रैल को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। गाने की शुरुआती लाइनों और इसके फिल्मांकन को लेकर मचे इस हंगामे ने फिल्म के प्रमोशन को एक अलग ही दिशा दे दी है। जहां एक तरफ फिल्म की टीम सिर्फ प्यार और भरोसे की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सेंसर बोर्ड और दर्शकों की पैनी नजर अब पूरी फिल्म पर टिकी हुई है।
नवरात्र में सफेद नमक वर्जित, लेकिन सेंधा नमक क्यों खाते हैं भक्त, जानिए क्या है कारण?

नई दिल्ली। नवरात्र के पावन पर्व पर लोग अपनी परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत रखते हैं। कुछ लोग पूरे दिन फलाहार करते हैं तो कुछ दिनभर व्रत रखकर शाम को भोजन करते हैं। कुछ श्रद्धालु मातारानी की सेवा करते हुए जलाहार ही करते हैं। ऐसे ही कई लोग नवरात्र के दौरान भोजन में सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं। खास बात यह है कि नवरात्र में साधारण या सफेद नमक का उपयोग पूरी तरह वर्जित माना जाता है लेकिन सेंधा नमक का सेवन व्रत में करना मान्य है।साधारण नमक और सेंधा नमक में अंतर धार्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टिकोण से साधारण नमक और सेंधा नमक में काफी अंतर है। साधारण नमक जो समुद्री नमक भी कहलाता है कई रासायनिक और मशीनी प्रक्रियाओं से गुजरता है। इस कारण इसे व्रत के लिए शुद्ध नहीं माना जाता। वहीं सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से हिमालय की चट्टानों से निकाला जाता है और इसे शुद्ध नमक मानकर व्रत में उपयोग किया जाता है। सेंधा नमक शुद्ध और सात्विक हिंदू धर्म में व्रत का उद्देश्य केवल भोजन पर नियंत्रण नहीं बल्कि मन को भगवान की भक्ति में लगाना और सात्विक जीवन जीना भी है। साधारण नमक कृत्रिम माना जाता है जबकि सेंधा नमक स्वयं सिद्ध और सात्विक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार सेंधा नमक शरीर में शीतलता बनाए रखता है और मन को शांत करता है। ध्यान और पूजा के समय शरीर और मन का सात्विक होना जरूरी होता है इसलिए व्रत में सेंधा नमक का महत्व बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो व्रत के दौरान अनाज या सामान्य भोजन कम लेने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। सफेद नमक की तुलना में सेंधा नमक में मैग्नीशियम पोटेशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं। इस कारण व्रत के दौरान भोजन में सेंधा नमक का उपयोग स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ यह सलाह देते हैं कि नमक का सेवन हमेशा सीमित मात्रा में करना चाहिए।
सिनेमाघरों में 'धुरंधर 2' का तांडव: 153 करोड़ की ग्लोबल ओपनिंग पक्की, सेंसर बोर्ड की कैंची के बाद भी फैंस में जबरदस्त क्रेज

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनका इंतजार दर्शक सांसें थामकर करते हैं, और रणवीर सिंह की ‘धुरंधर 2’ (धुरंधर द रिवेंज) बिल्कुल वैसी ही फिल्म साबित हो रही है। आज यानी 18 मार्च की शाम से यह फिल्म सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है, लेकिन पर्दे पर उतरने से पहले ही इस स्पाई-थ्रिलर ने कमाई के जो आंकड़े पेश किए हैं, उसने ट्रेड एनालिस्ट्स के होश उड़ा दिए हैं। आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। फिल्म की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह 3 घंटे 49 मिनट की एक लंबी और गहन सिनेमाई यात्रा है। फिल्म में दिखाए गए जबरदस्त एक्शन और बोल्ड भाषा को देखते हुए CBFC ने इसे ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है, जिसका सीधा अर्थ है कि यह फिल्म केवल वयस्क दर्शकों के लिए है, फिर भी इसकी मांग में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। कमाई के आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘धुरंधर 2’ ने एडवांस बुकिंग के मामले में पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। केवल 18 मार्च के शोज के लिए फिल्म ने “44.25 करोड़” रुपये की भारी-भरकम राशि बटोर ली है। वहीं, 19 मार्च के लिए 7 लाख से ज्यादा टिकटें बिक चुकी हैं, जिससे “33.60 करोड़” का कलेक्शन पहले ही पक्का हो गया है। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी रणवीर सिंह का जादू चल रहा है, जहाँ वीकेंड की एडवांस बुकिंग से फिल्म ने “75 करोड़” रुपये का कलेक्शन कर लिया है। यदि इन सभी आंकड़ों को जोड़ दिया जाए, तो फिल्म रिलीज से पहले ही वैश्विक स्तर पर “153 करोड़” रुपये से ज्यादा का कारोबार कर चुकी है। भारत के भीतर पांच राज्यों ने इस फिल्म को ऐतिहासिक समर्थन दिया है। महाराष्ट्र 9.47 करोड़” के साथ शीर्ष पर है, जबकि कर्नाटक, दिल्ली, गुजरात और उत्तर प्रदेश से भी करोड़ों की एडवांस बुकिंग हुई है। रणवीर सिंह ने खुद इस फिल्म को लेकर बड़ा बयान दिया है कि अब इंडियन सिनेमा का मुस्तकबिल धुरंधर द रिवेंज तय करेगा। हालांकि, फिल्म को सेंसर बोर्ड की कड़ी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा है। बोर्ड ने फिल्म के कई हिंसक दृश्यों, जैसे सिर काटना और आंख कुचलने जैसे शॉट्स पर कैंची चलाई है और कई अपशब्दों को म्यूट भी किया है, ताकि फिल्म अपनी मर्यादा बनाए रखे। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि फिल्म को सकारात्मक वर्ड-ऑफ-माउथ मिलता है, तो यह अपने पहले दिन 200 करोड़” का ग्रॉस कलेक्शन कर सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह बॉलीवुड की पहली फिल्म होगी जो ओपनिंग डे पर इस जादुई आंकड़े को छुएगी। वीकेंड तक फिल्म का भारतीय कलेक्शन 300 करोड़” और ग्लोबल कलेक्शन 500 करोड़ के पार जाने की प्रबल संभावना है। संगीत की बात करें तो इसके दो गानों का कनेक्शन पाकिस्तान से बताया जा रहा है, जो पहले ही यूट्यूब पर ट्रेंड कर रहे हैं। सारा अर्जुन ने भी दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि असली धुरंधर तो हमारी जनता ही है। अब देखना यह है कि शाम को जब पर्दे पर रणवीर सिंह का एक्शन शुरू होगा, तो बॉक्स ऑफिस के कितने और रिकॉर्ड टूटेंगे।
घर पर बनाएं रेस्टोरेंट स्टाइल पनीर लबाबदार, अपनाएं ये शाही सीक्रेट रेसिपी

नई दिल्ली । ईद 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं और त्योहार का असली मज़ा तभी आता है जब मेज़ पर स्वाद का वैरायटी हो। अगर आप शाकाहारी व्यंजन पसंद करते हैं या मेहमानों के लिए कुछ खास बनाना चाहते हैं तो पनीर लबाबदार एक बेहतरीन विकल्प है। इसका नाम ही “लबाबदार” यह दर्शाता है कि पनीर और मसाले इतनी खूबसूरती से मिलते हैं कि स्वाद सीधे दिल तक पहुंचता है।पनीर लबाबदार का असली राज इस डिश की रेस्टोरेंट जैसी रिच ग्रेवी का रहस्य है काजू और मगज खरबूजे के बीज का पेस्ट। इन्हें गरम पानी में भिगोकर बारीक पीस लें। यही ग्रेवी को शाही बनावट देता है जिससे हर क्यूब स्वाद में घुल-मिल जाता है। विधि एक कड़ाही में थोड़ा तेल और मक्खन गरम करें। खड़े मसाले तेजपत्ता दालचीनी इलायची डालकर खुशबू आने तक भूनें। बारीक कटा प्याज सुनहरा होने तक भूनें। अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और फिर टमाटर की प्यूरी मिलाएं। हल्दी कश्मीरी लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर तब तक पकाएं जब तक तेल अलग न हो जाए। काजू और मगज का पेस्ट डालें और लगातार चलाते रहें।थोड़ी मात्रा में कद्दूकस किया पनीर मिलाएं जिससे ग्रेवी और गाढ़ी हो जाएगी अंत में पनीर के क्यूब्स कसूरी मेथी और फ्रेश क्रीम डालें। गरम मसाला छिड़ककर धीमी आंच पर 2-3 मिनट पकाएं। प्रो टिप्स पनीर को हमेशा 5 मिनट गरम पानी में भिगोकर रखें ताकि वह सॉफ्ट और रसदार बने।ग्रेवी में थोड़ा शहद या चीनी डालें इससे टमाटर की खटास बैलेंस होती है।पनीर लबाबदार को गरमा-गरम बटर नान या शीरमाल के साथ सर्व करें। इस ईद इस शाही डिश के साथ आपकी दावत में चार चाँद लग जाएंगे। हर बाइट में रेस्टोरेंट जैसी क्रीमी और मसालेदार ग्रेवी का मज़ा आएगा और आपके मेहमान आपकी कुकिंग स्किल्स के कायल हो जाएंगे।
गर्मियों में त्वचा को बनाएं ग्लोइंग: अपनाएं ये समर स्किन केयर टिप्स

नई दिल्ली । गर्मियों का मौसम आते ही त्वचा को अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है। तेज यूवी किरणें पसीना और धूल मिलकर चेहरे के रोमछिद्र बंद कर देते हैं जिससे मुंहासे डलनेस और टैनिंग जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। कई लोग सर्दियों वाला स्किन केयर ही फॉलो करते हैं जो गर्मियों में त्वचा के लिए धीमे जहर की तरह काम करता है। इस मौसम में हल्के सांस लेने वाले और हाइड्रेटिंग प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना बेहद जरूरी है।क्लींजिंग और हाइड्रेशन का सही बैलेंस बार-बार चेहरा धोना त्वचा को ताज़गी तो देता है लेकिन ज्यादा फेस वॉश प्राकृतिक ऑयल्स को खत्म कर सकता है। दिन में दो बार फोम-बेस्ड क्लींजर का इस्तेमाल करें और भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड मॉइस्चराइजर चुनें। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है बिना चिपचिपा किए।सनस्क्रीन घर के अंदर या बाहर सनस्क्रीन लगाना कभी न भूलें। कम से कम 30-50 SPF वाली ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज़ाना लगाएं। हर 3 घंटे में इसे दोबारा लगाना जरूरी है क्योंकि पसीने से इसकी परत हट सकती है। यह टैनिंग सनबर्न और झुर्रियों से बचाने का सबसे कारगर तरीका है। प्राकृतिक कूलिंग एजेंट धूप से लौटते ही सीधे बर्फ या ठंडा पानी न डालें। इसके बजाय एलोवेरा जेल या गुलाब जल का स्प्रे करें। एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो रेडनेस और सनबर्न को तुरंत शांत करते हैं। हफ्ते में एक बार मुल्तानी मिट्टी और चंदन का फेस पैक लगाएं जो त्वचा की गर्मी को सोख लेता है।एक्सफोलिएशन पसीना और तेल के कारण डेड स्किन जम जाती है। हफ्ते में 1-2 बार हल्के स्क्रब से चेहरे को एक्सफोलिएट करें। इससे रोमछिद्र खुलते हैं और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। ध्यान रखें धूप में निकलने से ठीक पहले स्क्रब न करें।खान-पान और ब्यूटी स्लीप आंतरिक पोषण भी त्वचा के लिए जरूरी है। तरबूज खीरा और नारियल पानी जैसे फलों का सेवन करें जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। दिन में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं ताकि टॉक्सिन बाहर निकल सकें।
हर सुबह अलार्म से उठना कर सकता है नुकसान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

नई दिल्ली : आज की तेज रफ्तार जिंदगी में सुबह समय पर उठने के लिए अलार्म लगाना एक आम आदत बन चुकी है। ज्यादातर लोग मोबाइल या घड़ी में अलार्म सेट करके सोते हैं, ताकि उनकी दिनचर्या समय पर शुरू हो सके। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी आदत आपकी सेहत, खासकर दिल और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमारा शरीर एक प्राकृतिक सिस्टम यानी Circadian Rhythm पर काम करता है, जिसे आम भाषा में बॉडी क्लॉक कहा जाता है। यह सिस्टम सूरज के उगने और ढलने के अनुसार हमारे सोने और जागने के समय को नियंत्रित करता है। जब हम इस प्राकृतिक प्रक्रिया को नजरअंदाज कर अलार्म के जरिए अचानक जागते हैं, तो शरीर को झटका लगता है। अलार्म की तेज आवाज नींद के गहरे चरण को अचानक तोड़ देती है, जिससे Sleep Inertia नाम की स्थिति पैदा होती है। इस अवस्था में व्यक्ति जाग तो जाता है, लेकिन उसका दिमाग पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाता। यही कारण है कि कई लोग सुबह उठने के बाद भी थकान, सुस्ती और भ्रम महसूस करते हैं। सबसे बड़ा खतरा तब होता है जब अलार्म की आवाज शरीर में Fight or Flight Response को सक्रिय कर देती है। यह वही प्रतिक्रिया है, जो किसी खतरे की स्थिति में शरीर में होती है। अचानक तेज आवाज से शरीर में तनाव हार्मोन जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन का स्तर बढ़ जाता है। इससे ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट तेजी से बढ़ते हैं। अगर यह प्रक्रिया रोज होती है, तो लंबे समय में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखने के लिए भी जरूरी होती है। जब अलार्म बार-बार नींद को बाधित करता है, तो यह आपके मूड और इमोशनल हेल्थ को भी प्रभावित करता है। सुबह की शुरुआत अगर घबराहट और तनाव के साथ होती है, तो इसका असर पूरे दिन पर पड़ता है। व्यक्ति चिड़चिड़ा, चिंतित और थका हुआ महसूस कर सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अलार्म पूरी तरह से खतरनाक है, लेकिन इसका गलत तरीके से इस्तेमाल जरूर नुकसानदायक हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लोगों को धीरे-धीरे अपनी लाइफस्टाइल को इस तरह ढालना चाहिए कि वे बिना अलार्म के स्वाभाविक रूप से जाग सकें। इसके लिए सबसे जरूरी है एक निश्चित स्लीप रूटीन अपनाना। रोज एक ही समय पर सोने और उठने की आदत डालें, ताकि आपकी बॉडी क्लॉक खुद सेट हो सके। सोने से पहले मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और रिलैक्सिंग गतिविधियां जैसे किताब पढ़ना, हल्का योग या ध्यान करें। सुबह की प्राकृतिक रोशनी भी शरीर को जगाने में अहम भूमिका निभाती है। अगर आप अपने कमरे में हल्की रोशनी आने देते हैं, तो शरीर खुद ही जागने के संकेत देने लगता है। इसके अलावा, रोज 7 से 9 घंटे की पर्याप्त नींद लेना भी बेहद जरूरी है। अंत में यही कहा जा सकता है कि अलार्म की आदत को पूरी तरह छोड़ना आसान नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे बदलाव करके आप अपने शरीर को प्राकृतिक तरीके से जगने के लिए तैयार कर सकते हैं। यह न केवल आपकी नींद को बेहतर बनाएगा, बल्कि आपके दिल और मानसिक स्वास्थ्य को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखेगा।
बुध की सीधी चाल से इन राशियों में आ सकती हैं बाधाएं, जानें उपाय और सावधानियां

नई दिल्ली : वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की चाल का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसी कड़ी में ग्रहों के राजकुमार कहे जाने वाले बुध ग्रह 21 मार्च 2026 से अपनी चाल में बदलाव करने जा रहे हैं। बुध का मार्गी होना आम तौर पर शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था चल रही थी, जो 21 मार्च को समाप्त हो जाएगी। बुध का मार्गी होना कार्यों में गति लाने वाला माना जाता है। वक्री अवस्था में अक्सर कार्यों में रुकावट, भ्रम और देरी की स्थिति बनी रहती है। वहीं मार्गी होने पर हालात सामान्य होने लगते हैं और अटके काम आगे बढ़ते हैं। हालांकि, यदि बुध कमजोर या नकारात्मक प्रभाव में हो, तो मार्गी अवस्था में भी कुछ जातकों को तनाव, गलतफहमियों और बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिष के अनुसार, बुध बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार और तकनीकी क्षमताओं का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए इसकी चाल में बदलाव सीधे व्यक्ति के सोचने-समझने, निर्णय लेने और कामकाज पर असर डालता है। तुला राशि:तुला राशि के जातकों के लिए 21 मार्च से बुध का मार्गी होना नुकसानदायक साबित हो सकता है। इस दौरान आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है और हर कार्य में चुनौती आ सकती है। सबसे जरूरी है कि इस समय अपनी वाणी पर विशेष ध्यान दें। किसी को कटु या अपमानजनक शब्द नहीं बोलने चाहिए, अन्यथा बड़े विवाद की संभावना बढ़ सकती है। बुध को शांत करने के लिए गरीबों को दान देना और भगवान गणेश की सेवा करना शुभ रहेगा। कुंभ राशि:कुंभ राशि के जातकों के लिए भी बुध का मार्गी होना सुखद नहीं होगा। शारीरिक परेशानियां, मानसिक तनाव और कारोबार में नुकसान की संभावना है। इस समय नए कार्य की शुरुआत करने से बचना चाहिए और सभी काम सोच-समझकर करें। किसी को कठोर वचन देने से बचें, अन्यथा विवाद के कारण कोर्ट-कचहरी का सामना करना पड़ सकता है। उपाय के तौर पर भगवान गणेश की सेवा करें, उन्हें हरे रंग का भोग लगाएं, हरे वस्त्र दान करें और गरीबों की मदद करें। मीन राशि:मीन राशि के जातकों के लिए बुध का मार्गी होना चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है। इस दौरान व्यापार में नुकसान और आर्थिक तंगी की संभावना है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें क्योंकि दुर्घटना की आशंका भी हो सकती है। उपाय के तौर पर गणेश भगवान के मंत्रों का जाप करें, उन्हें हरे रंग की मिठाई का भोग लगाएं और पशुओं को हरा चारा खिलाना शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज का कहना है कि इन उपायों से बुध के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और इन राशियों के जातक कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रख सकते हैं। बुध की मार्गी चाल से धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होंगी, लेकिन सावधानी और उपायों को अपनाना आवश्यक है। इस प्रकार, 21 मार्च 2026 से तुला, कुंभ और मीन राशियों के जातकों को अपने व्यवहार, निर्णय और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उचित उपाय और सतर्कता अपनाकर बुध के प्रभाव को सकारात्मक बनाया जा सकता है और आने वाले समय में राहत मिल सकती है।
हिंदू नववर्ष 2026: ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ कार्य, पूरे साल मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नववर्ष का विशेष महत्व माना गया है जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। वर्ष 2026 में यह पावन अवसर 19 मार्च को पड़ रहा है इसी दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष का पहला दिन पूरे साल की दिशा तय करता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ समय में किया गया हर सकारात्मक प्रयास पूरे वर्ष जीवन में खुशियां सफलता और समृद्धि लेकर आता है। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार नववर्ष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध और ऊर्जा से भरपूर होता है जो मन और शरीर को सकारात्मकता से भर देता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें। विशेष रूप से भगवान विष्णु मां दुर्गा और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और पूरे वर्ष ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। नववर्ष के पहले दिन घर की साफ सफाई का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि स्वच्छ और सुसज्जित घर में देवी देवताओं का वास होता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार को सजाना चाहिए रंगोली बनानी चाहिए और आम के पत्तों या फूलों से तोरण लगाना चाहिए। यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है और नकारात्मकता को दूर करता है। इसके साथ ही दान पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। दान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि यह हमारे भीतर करुणा और सेवा की भावना को भी जागृत करता है। ऐसा करने से जीवन में समृद्धि और संतोष का भाव बना रहता है। हिंदू नववर्ष को नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन व्यक्ति को अपने जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लेना चाहिए। जैसे नियमित पूजा करना अच्छे कर्म करना दूसरों की सहायता करना और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने का प्रण लेना। कई लोग इस शुभ अवसर पर नया व्यवसाय नई योजना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत भी करते हैं क्योंकि इसे अत्यंत शुभ समय माना गया है। अंतत ब्रह्म मुहूर्त में किया गया हर शुभ कार्य व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि इस पावन दिन को श्रद्धा भक्ति और सकारात्मकता के साथ मनाया जाए तो पूरे वर्ष जीवन में खुशहाली सफलता और मानसिक शांति बनी रहती है।
चैत्र नवरात्रि 2026: घट स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजन से जुड़े महत्व

नई दिल्ली । चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च गुरुवार से शुरू हो रहा है। पंचांग के अनुसार चैत्र अमावस्या 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे समाप्त होगी और प्रतिपदा आरंभ होने के साथ ही नवरात्रि प्रारंभ होगी। नवरात्रि 9 दिनों तक चलने वाला यह पावन पर्व परंपरागत रूप से घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ आरंभ होता है।घटस्थापना का उद्देश्य घटस्थापना देवी का आह्वान करने के लिए की जाती है। इसका महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है बल्कि इससे घर में सुख-शांति सकारात्मक ऊर्जा और सौहार्द की भावना बनी रहती है। परिवार के सभी सदस्य मिलकर पूजा करते हैं जिससे आपसी प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 से 12:53 तक लाभ चौघड़िया: 12:29 से 1:59 तक सुबह का शुभ मुहूर्त: सुबह 6:54 से 7:57 तक शुभ चौघड़िया इन समयों में घटस्थापना और कलश स्थापना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं और पूजा का प्रभाव अधिकतम माना जाता है। पंचक और खरमास 15 मार्च से खरमास शुरू हो चुके हैं। इस दौरान मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों के साथ सूर्य देव की पूजा करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। नवरात्रि के दौरान पंचक भी रहेगा जिसकी शुरुआत 16 मार्च शाम 6:14 से होगी और समाप्ति 20 मार्च रात 2:28 तक होगी।इस चैत्र नवरात्रि पर निर्धारित शुभ मुहूर्त में घटस्थापना और कलश स्थापना कर आप घर में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने की आदत: सिर्फ 15 दिन में दिखेंगे शरीर में ये 5 बड़े बदलाव

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी और अनियमित खानपान के चलते कब्ज एसिडिटी और बढ़ता वजन जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में लोग अक्सर महंगी दवाइयों और सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं जबकि एक बेहद आसान और प्रभावी उपाय हमारी दिनचर्या में ही छिपा है सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना। आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह छोटी-सी आदत शरीर को भीतर से साफ करने और कई समस्याओं को दूर करने में बेहद कारगर साबित होती है। सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने से शरीर में मेटाबॉलिज्म सक्रिय हो जाता है। जब आप गुनगुना पानी पीते हैं तो शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ता है जिससे थर्मोजेनेसिस की प्रक्रिया शुरू होती है। इसका सीधा असर कैलोरी बर्निंग पर पड़ता है और वजन कम करने में मदद मिलती है। नियमित रूप से 15 दिनों तक यह आदत अपनाने पर पेट की अतिरिक्त चर्बी में कमी महसूस होने लगती है और शरीर हल्का लगने लगता है। गुनगुना पानी शरीर को डिटॉक्स करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रातभर शरीर में जमा हुए विषैले तत्व सुबह पानी के माध्यम से बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया किडनी और पसीने के जरिए शरीर की गहराई से सफाई करती है। परिणामस्वरूप व्यक्ति दिनभर तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करता है। यदि आप लंबे समय से कब्ज या पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान हैं तो गुनगुना पानी आपके लिए एक सरल और प्रभावी उपाय हो सकता है। यह आंतों की गति को सुचारू बनाता है और मल त्याग को आसान करता है। नियमित सेवन से गैस एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं में भी राहत मिलती है। करीब दो हफ्तों में पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करने लगता है। इस आदत का असर सिर्फ शरीर के अंदर ही नहीं बल्कि बाहरी रूप पर भी दिखाई देता है। जब शरीर अंदर से साफ होता है तो त्वचा पर प्राकृतिक निखार आता है। गुनगुना पानी ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है जिससे त्वचा की कोशिकाओं को पर्याप्त पोषण मिलता है। इससे मुंहासे कम होते हैं और चेहरे पर एक अलग ही चमक नजर आती है। इसके अलावा गुनगुना पानी बालों की सेहत के लिए भी लाभकारी माना जाता है। यह बालों की जड़ों को पोषण देकर उन्हें मजबूत और चमकदार बनाता है। वहीं जो लोग सुबह उठते ही साइनस या बंद नाक की समस्या से परेशान रहते हैं उनके लिए यह आदत राहत देने वाली हो सकती है। गुनगुना पानी म्यूकस को पतला कर देता है जिससे सांस लेना आसान हो जाता है। कुल मिलाकर सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीना एक सरल लेकिन बेहद प्रभावी आदत है जो शरीर को स्वस्थ ऊर्जावान और संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यदि इसे नियमित रूप से अपनाया जाए तो केवल 15 दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम स्पष्ट रूप से महसूस किए जा सकते हैं।