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DABRA STAMPEDE NEWS: डबरा में कलश वितरण के दौरान भगदड़, महिला की मौत; बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल

GWALIOR STAMPEDE

HIGHLIGHTS: डबरा के नवग्रह मंदिर में कलश वितरण के दौरान मची भगदड़। भगदड़ में 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत । बच्ची समेत 8 श्रद्धालु घायल हुए, कुछ की हालत गंभीर। परिजनों ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर लगाए लापरवाही के आरोप।  पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने किया कार्यक्रम का आयोजन । DABRA STAMPEDE NEWS: ग्वालियर। जिले के डबरा में नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जहां कलश यात्रा शुरू होने से पहले कलश वितरण के समय अचानक भगदड़ मच गई। इस हादसे में 70 वर्षीय महिला रति साहू की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत आठ लोग घायल हो गए। भारी भीड़ से मचा हड़कंप घटना उस समय हुई जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में मौजूद थी। जिसके बाद कलश वितरण शुरू होते ही पहले कलश लेने की होड़ मच गई। इसके बाद भीड़ लगातार बढ़ती चली गई और कुछ ही देर में हालात बेकाबू हो गए। इसी दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग गिर पड़े और कुचल दिए गए। PF निकासी होगी अब और आसान, EPFO लाएगा नया मोबाइल एप UPI इंटीग्रेशन के साथ घायलों को डबरा सिविल अस्पताल में किया भर्ती हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घायलों को तुरंत डबरा के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल लोगों को ग्वालियर रेफर किया गया। प्रशासन के अनुसार सभी घायलों का इलाज जारी है और उनकी हालत पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप मृतक महिला की बहू ने पुलिस और अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने अचानक गेट खोल दिया, जिससे भीड़ एक साथ अंदर घुस गई और भगदड़ मच गई। आरोप है कि भगदड़ में महिला को कुचल दिया गया। परिजनों का यह भी कहना है कि अस्पताल में समय पर इलाज नहीं मिला और महिला करीब 30 मिनट तक तड़पती रही। कार्यक्रम के आयोजक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा बताया जा रहा है कि नवग्रह मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के आयोजक पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा हैं। हादसे के बाद कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी। एआई कंपनी का बड़ा आईपीओ फ्रैक्टल एनालिटिक्स रिटेल और एनआईआई निवेशकों के लिए समीक्षा

सनातन परंपरा का महापर्व विजया एकादशी: इन 10 उपायों से घर में बरसेगा लक्ष्मी-नारायण का आशीर्वाद

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में फाल्गुन माह के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है. सनातन परंपरा में विजया एकादशी की पूजा और व्रत को विधि-विधान से करने पर बड़े से बड़ा संकट दूर और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इस व्रत के पुण्य प्रताप से भगवान राम ने भी त्रेतायुग में लंका के राजा रावण पर विजय प्राप्त की थी. सुख, सौभाग्य, सफलता और विजय का आशीर्वाद दिलाने वाली विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा. आइए विजया एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु की सरल सनातनी विधि से की जाने वाली पूजा के उन 10 अचूक उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं, जिसे करते ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. 1. विजया एकादशी के दिन गंगा नदी अथवा किसी पवित्र जल तीर्थ पर स्नान करने का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. यदि आप इस दिन किसी कारण से गंगा तट पर न जा पाएं तो पुण्य की प्राप्ति के लिए घर में ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. 2. हिंदू धर्म में व्रत एवं पूजा के दिन स्नान के साथ दान का भी बहत ज्यादा महत्व माना गया है, इसलिए इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर करें. विजया एकादशी के दिन किसी मंदिर के पुजारी या फिर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें. 3. यदि आपके जीवन में इन दिनों आर्थिक संकट बना हुआ है या फिर आप किसी कार्य विशेष में सफलता पाना चाहते हैं तो आपको विजया एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु की पूजा में विशेष रूप से एक पीले कपड़े में हल्दी की दो गांठें अर्पित करना चाहिए. पूजा के बाद उसे अपने कार्यस्थल या बैग में रख लें. 4. हिंदू मान्यता के अनुसार विजया एकादशी के दिन विष्णु भगवान का दक्षिणावर्ती शंख से जलाभिषेक करने से उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. यदि संभव हो तो शंख से केसर मिले दूध या फिर पंचामृत से श्री हरि का अभिषेक करें. 5. हिंदू धर्म में किसी भी मनोकामना को पूरा करने के लिए मंत्र जप को उत्तम उपाय माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी व्रत वाले दिन साधक को भगवान श्री विष्णु के मंत्र ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ का तुलसी की माला से अधिक से अधिक जप करना चाहिए. 6. हिंदू मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ऐसे में विजया एकादशी के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु की पूजा में पीले रंग के पुष्प, पीले फल और पीले रंग की मिठाई अर्पित करें. 7. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु से सुख-सौभाग्य का आशीर्वाद पाने के लिए उन्हें पीला चंदन या ​केसर का तिलक अर्पित करके उसे प्रसाद स्वरूप अपने माथे पर लगाएं. इसी प्रकार श्री हरि को पीले रंग का धागा अर्पित करके अपने दाहिने हाथ में बाधें. 8. हिंदू धर्म में तुलसी जी को विष्णुप्रिया कहा गया है. ऐसे में आपकी विजया एकादशी की पूजा और व्रत तब तक अधूरा है जब तक आप श्री हरि की पूजा में तुलसी दल नहीं चढ़ाते हैं.  हादेव को मनाना है तो महाशिवरात्रि पर राशि के अनुसार ही करें ज्योर्तिलिंग का दर्शन और पूजन 9. यदि आप चाहते हैं कि आपको श्री हरि संग माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिले तो आपको विजया एकादशी वाले दिन तुलसी माता को जल देने के बाद शुद्ध देशी घी का दीया जलाना चाहिए और उनकी परिक्रमा करनी चाहिए. 10. विजया एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करते समय न सिर्फ एकादशी व्रत की कथा सुनें या फिर पढ़ें बल्कि इसके साथ श्री विष्णु सहस्त्रनाम, नारायण कवच या फिर श्रीमद्भागवत कथा का पाठ भी जरूर करें.

300 साल बाद महाशिवरात्रि पर दुर्लभ ज्योतिष संयोग: 15 फरवरी को भगवान शिव से आपकी हर मनोकामना हो सकती है पूरी

नई दिल्ली। हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व महाशिवरात्रि इस बार 15 फरवरी, 2026 को मनाया जाएगा। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन तथा शिव के भक्ति, साधना और उपवास से जुड़े अनगिनत धार्मिक महत्वों से संपन्न है। इस वर्ष महाशिवरात्रि को ज्योतिषीय दृष्टि से भी एक दुर्लभ और शक्तिशाली संयोग के साथ जोड़ा जा रहा है, जिसे करीब 300 साल बाद बन रहा शुभ योग माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन कई प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव देखने को मिलेगा, जिसमें सूर्य, बुध और शुक्र के संयोग जैसे दुर्लभ ग्रह-योग शामिल हैं, जो जीवन में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले बताए जा रहे हैं। इसी के साथ चंद्रमा का मकर राशि में गोचर, बुध का शतभिषा से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश और मंगल का श्रवण से धनिष्ठा नक्षत्र में जाना भी इसी दिन विशेष शुभ माना जा रहा है। आधिकारिक पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से आरंभ होकर 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी, और इस दिन भक्त शिवलिंग पर विधिवत पूजा, रुद्राभिषेक और निशीथ-काल में जागरण कर भोलेनाथ का आह्वान करते हैं। इस रात को शिव के तत्त्वों का प्रभाप्रवाह बढ़ा हुआ माना जाता है, जिससे शिवभक्ति, ध्यान और मंत्र जाप का विशेष फल प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर श्रवण नक्षत्र का संयोग भी विशेष रूप से शुभ माना जाता है, क्योंकि यह नक्षत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसका प्रभाव साधक के जीवन में दिव्य ऊर्जा को प्रेरित कर सकता है। इस संयोग को सर्वार्थ सिद्धि योग भी कहा जा रहा है, जिसमें साधना, पूजा, व्रत और दान-पुण्य का असर असाधारण फल प्रदान कर सकता है। शास्त्रों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दूध-दही-गंगा जल का समर्पण, बेलपत्र-धतूरा चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और ध्यान करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है। इससे कष्टों का निवारण, मनोकामना की सिद्धि, मानसिक शांति, जीवन में सकारात्मक बदलाव और समृद्धि की संभावनाओं में वृद्धि होती है। विशेष रूप से यह माना जाता है कि महाशिवरात्रि पर जो साधक श्रद्धा, भक्ति और संतुलित साधना के साथ पूजा-अर्चना करता है, उसे भगवान शिव की आशीर्वाद से आध्यात्मिक उन्नति, कठिनाइयों से मुक्ति तथा जीवन की हर मनोकामना की पूर्ति के मार्ग खुलते दिखाई देते हैं। यह दिन केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, कर्म-निवृति और शिव-तत्त्व से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी है।

चंद्रमा का वृश्चिक गोचर बढ़ाएगा मानसिक दबाव जानिए किन राशियों पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव

नई दिल्ली :ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन और भावनाओं का सबसे बड़ा कारक माना गया है। चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति की मानसिक अवस्था से लेकर सेहत और निर्णय क्षमता तक को प्रभावित करती है। यही कारण है कि चंद्रमा के गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। चंद्रमा सबसे तेज गति से चलने वाले ग्रह हैं और लगभग ढाई दिन में एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस बार चंद्रमा का गोचर कुछ राशियों के लिए चिंता और चुनौतियां लेकर आ रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार वर्तमान समय में चंद्रमा तुला राशि में विराजमान हैं और 10 फरवरी को देर रात 1 बजकर 11 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। वृश्चिक राशि चंद्रमा की नीच राशि मानी जाती है। नीच अवस्था में चंद्रमा का प्रभाव मन को अस्थिर कर सकता है। इससे तनाव बढ़ता है और व्यक्ति छोटी छोटी बातों को लेकर भी मानसिक दबाव महसूस करता है। ऐसे में कुछ राशि वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। मेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। बीती बातों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकता है। मन अशांत रहेगा और स्वयं को थका हुआ महसूस कर सकते हैं। इस समय किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना आवश्यक होगा। पारिवारिक या कार्यस्थल से जुड़ी किसी बात पर बहस की स्थिति बन सकती है। प्रेम संबंधों में भी संयम बरतने की आवश्यकता रहेगी। धैर्य और समझदारी से काम लेना इस समय सबसे जरूरी होगा। मिथुन राशि वालों के लिए चंद्रमा का यह गोचर कुछ उलझनें लेकर आ सकता है। किसी नए रिश्ते में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए क्योंकि इससे मतभेद बढ़ सकते हैं। नौकरी परिवर्तन या यात्रा को लेकर मन में असमंजस बना रह सकता है। स्वास्थ्य के लिहाज से मौसमी बीमारियां परेशान कर सकती हैं इसलिए खानपान और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी होगा। कला और रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को किसी बात को लेकर मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। धनु राशि के जातकों को इस समय सेहत के प्रति विशेष सतर्कता बरतनी होगी। थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो सकते हैं। मनचाहे परिणाम पाने के लिए अपेक्षा से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी होगा और अहंकार से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। मानसिक बेचैनी और अनावश्यक चिंताएं परेशान कर सकती हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सोच विचार करना लाभकारी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि चंद्रमा का यह गोचर स्थायी प्रभाव नहीं डालेगा लेकिन इन कुछ दिनों में मानसिक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। ध्यान योग और सकारात्मक सोच से इस प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही निर्णय और संयम से इन चुनौतियों को अवसर में बदला जा सकता है।

विजया एकादशी 2026: तुलसी के विशेष उपाय से दूर होंगी दरिद्रता, घर में आएगी मां लक्ष्मी की कृपा

नई दिल्ली ।  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह की विजया एकादशी 13 फरवरी, 2026 को मनाई जाएगी, जो कृष्ण पक्ष की ग्यारस तिथि पर पड़ती है। विजया शब्द का अर्थ ही विजय है और इस पावन दिन का महत्व प्राचीन धर्मग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने लंका-यात्रा से पूर्व उसी एकादशी का व्रत रखकर विजय प्राप्त की थी, इसी से इस दिन का नाम विजया एकादशी पड़ा। धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत कर लेने से जीवन में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं, मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आंतरिक विजय प्राप्त होती है। भक्त सुबह स्नान, भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा सुनकर दिनभर साधना में लीन रहते हैं। पारण व्रत समाप्ति 14 फरवरी को द्वादशी तिथि में निर्धारित शुभ समय में किया जाता है, जो विशेष मान्यता रखता है। इस पावन दिन तुलसी के साथ किए गए उपायों को भी बेहद शुभ माना जाता है। तुलसी का पौधा भगवान विष्णु का प्रिय माना जाता है और पूजा में उसकी महिमा वर्णित है। धार्मिक परंपरा के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी के पास दीपक जलाना, फल-भोग अर्पित करना और परिक्रमा करना विशेष फलदायी होता है। तुलसी के पास घी का दीपक प्रज्वलित करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा मिटती है और सुख-शांति तथा धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। भक्त भगवान विष्णु को भोग में फल और मिठाई अर्पित करते हैं और उसमें तुलसी के कुछ पत्थर भी शामिल करते हैं। ऐसा करने से भगवान विष्णु के साक्षात आशीर्वाद की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में विजय-आत्मबल और बाधा-उन्मूलन की मान्यता जुड़ी हुई है। पौराणिक आस्था के अनुसार विजया एकादशी के दिन तुलसी की पूजा के समय तुलसी के 7 या 11 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। इस दौरान तुलसी के मंत्रों का जप और अपने जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना चाहिए। ऐसा करने से कहा जाता है कि मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और इच्छित फल मिलने में सहायता मिलती है। विजया एकादशी का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्म-शुद्धि, भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा के आराधना का एक अवसर भी है। भक्त इस दिन भगवान विष्णु और तुलसी की पूजा कर अपने जीवन में धन, समृद्धि, भय मोचन और मानसिक स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक परंपरा में यह भी कहा जाता है कि तुलसी को जल न देना चाहिए क्योंकि एकादशी के दिन तुलसी स्वयम् निर्जला व्रत करती हैं, इसलिए तुलसी को जल देना वर्जित माना जाता है। पूजा के दौरान तुलसी को छूना भी वर्जित बताया जाता है, और आसपास की जगह को स्वच्छ रखना अत्यंत आवश्यक होता है ताकि पवित्रता बनी रहे और व्रत के शुभ फल प्राप्त हों

धर्म कर्म: फाल्गुन अमावस्या पर पितरों के लिए करें यह पवित्र कर्म, पितृ दोष से मिलेगी मुक्ति

नई दिल्ली। फाल्गुन मास की अमावस्या हिंदू धर्म में पितरों की शांति और पितृ दोष से मुक्ति के लिए एक अत्यंत शुभ और पुण्यदायी दिन माना जाता है। इस वर्ष यह तिथि 16 फरवरी, 2026 की शाम 05:34 बजे से प्रारंभ होकर 17 फरवरी, 2026 की सायं 05:30 बजे तक रहेगी, इसलिए साल 2026 में फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी, मंगलवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा अर्चना, तर्पण पिंडदान और दान पुण्य कर्म से पितृ दोष होने पर भी मुक्ति प्राप्त होती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है। यह अवसर आत्मिक शुद्धि, मृत्यु के बाद के कर्जों का निवारण तथा परिवार में सुख शांति, समृद्धि और संतुलन लाने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। सबसे पहले पवित्र स्नान करना शुभफलदायी होता है। ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर आप पवित्र नदी जैसे गंगा में स्नान करें। यदि नदी का स्नान संभव न हो, तो घर पर गंगाजल में तिल, कुश और काले तिल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यदायी माना जाता है। स्नान के बाद अपने पूर्वजों को पितृ तर्पण और पिंडदान करना चाहिए, जिसमें जल, तिल, अन्न और शुद्ध मन से प्रार्थना शामिल हो। तर्पण करते समय दक्षिण की ओर मुख करके जल को कंठ के पास से बहाते हुए ॐ पितृभ्यो नमः जैसे मंत्र का उच्चारण किया जाता है, जिससे पूर्वजों को शांति स्वास्थ्य और मोक्ष प्राप्त होने की मान्यता प्रचलित है। पिंडदान में शुद्ध अन्न और तिल से बनाए गए पिंड को गंगा यमुना जैसे पवित्र नदी के तट पर या किसी पवित्र स्थान पर अर्पित करें। इससे पितृलोक में निवास करने वाले पूर्वजों को संतुष्टि और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि में दान पुण्य का भी विशेष महत्व है। ब्राह्मणों को भोजन कराना, गरीबों को अन्न, वस्त्र, मसाले, दाल चावल आदि दान करना तथा गो दैनिक सेवा या पशु पक्षियों को पानी भोजन देना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इससे जीवन में नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और संपन्नता आती है। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और उसके चारों ओर सात परिक्रमा करना लाभकारी होता है। इससे पितरों की शांति और परिवार में सुख समृद्धि का आगमन होता है, साथ ही गृहस्थ जीवन में बाधाएँ कम होती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार अमावस्या पितरों से जुड़ी तिथि है, इसलिए इस दिन स्नान, दान पुण्य, तर्पण पिंडदान तथा मंत्र जाप करने से पितृ दोष से मुक्ति पाई जा सकती है और पूर्वजों की कृपा प्राप्त होती है।

Grah Gochar 2026: महाशिवरात्रि पर 3 ग्रहों की चाल बदलेगी, इन 7 राशियों के जीवन में आएगी समृद्धि

नई दिल्ली । साल 2026 की महाशिवरात्रि इस बार केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि 15 फरवरी, रविवार को पड़ रही है और इस दिन तीन प्रमुख ग्रहों की चाल में बदलाव होगा। मंगल श्रवण नक्षत्र से निकलकर धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, चंद्रमा शनि की राशि मकर में गोचर करेगा और बुध ग्रह रात में शतभिषा नक्षत्र से पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में गोचर करेगा। खास बात यह है कि इस दिन बुध दक्षिणावर्ती से उत्तरवर्ती होंगे, जिसे ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है।इन ग्रहों के गोचर का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन विशेष रूप से सात राशियों के लिए यह दिन बेहद फलदायी रहेगा। कहा जाता है कि इस अवसर पर शिव की विशेष कृपा इन राशियों पर रहेगी और उनके जीवन में धन, सफलता और समृद्धि के नए अवसर उत्पन्न होंगे। मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह समय नई ऊर्जा और सकारात्मक अवसर लेकर आएगा। करियर और व्यवसाय में अचानक लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय से रुके काम इस समय पूरे हो सकते हैं और घर में सुख-शांति का माहौल बना रहेगा। धन की स्थिति मजबूत रहेगी और आपकी मेहनत का फल जल्दी दिखाई देगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन लंबे काम और तनाव से बचने के लिए आराम जरूरी है। किसी नए निवेश या पैसे से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें, ताकि भविष्य में फायदे के अवसर बनें।मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय बदलाव और सफलता लेकर आएगा। नौकरी या व्यवसाय में बदलाव आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास सफल रहेंगे और मनोवांछित परिणाम मिलेंगे। परिवार में प्रेम और सहयोग बना रहेगा और मानसिक तनाव कम होगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। इस समय नए कौशल सीखना या किसी प्रशिक्षण में भाग लेना भविष्य में फायदेमंद रहेगा। कर्क राशि कर्क राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा। घरेलू मामलों में मनचाही सफलता मिलेगी और माता-पिता या बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और पुराने आर्थिक तनाव दूर होंगे। यात्रा के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन समय-समय पर आराम लेना आवश्यक है। परिवार के साथ अधिक समय बिताने से मानसिक शांति बढ़ेगी।सिंह राशि सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय करियर में लाभ और समाज में मान-सम्मान बढ़ाने वाला रहेगा। पुराने निवेश या संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना है। शिक्षा और बच्चों के मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। मित्र और परिवार का सहयोग सहायक रहेगा। व्यापार या नौकरी में नए प्रस्तावों पर ध्यान दें, क्योंकि इस समय लाभ की संभावना अधिक है। तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए यह समय नए अवसर और खुशियाँ लेकर आएगा। जीवनसाथी और परिवार के साथ संबंध मजबूत होंगे। व्यापार या पेशेवर क्षेत्र में नई योजनाएं सफल होंगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा और मानसिक संतुलन बना रहेगा। यात्रा और शौक के लिए समय अनुकूल है। इस समय अपने लक्ष्यों को लिखकर प्राथमिकता देना लाभकारी रहेगा। मकर राशि मकर राशि के जातकों के लिए यह समय भावनात्मक और आर्थिक रूप से सशक्त रहने वाला है। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं और परिवार में सुख-शांति का माहौल रहेगा। धन लाभ के नए अवसर सामने आएंगे और नए काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। दोस्तों और सामाजिक संपर्कों में वृद्धि होगी। अपने विचारों और योजनाओं को लिखकर उनका पालन करना लाभकारी रहेगा। मीन राशि मीन राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। नौकरी या व्यवसाय में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। पुराने कर्ज या परेशानियों से मुक्ति मिलेगी। शिक्षा और कौशल क्षेत्र में सफलता मिलेगी और मित्र व परिवार का सहयोग सहायक साबित होगा। वित्तीय मामलों में साफ-सफाई और रिकॉर्ड रखना भविष्य में फायदे का कारण बनेगा। इस समय अपने प्रयासों को सही दिशा में लगाने से लंबे समय के लिए लाभ सुनिश्चित होगा।

आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

मेष राशि :- व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। घर में शुभ समाचारों का संचार होगा। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। शुभांक-6-7-9वृष राशि :- बुजुर्गों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूति साथ रहेंगी। शुभांक-2-7-9मिथुन राशि :- अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। होश में रहकर कार्य करें। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। आत्मीय श्रेष्ठता बनेगी। शुभांक-3-7-8कर्क राशि :- राजकीय कार्यों से लाभ। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। कामकाज की अधिकता रहेगी। शुभांक-4-8-9सिंह राशि :- शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। स्वास्थ्य का पाया कमजोर रहेगा। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। शुभांक-3-6-9कन्या राशि :- मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। शुभांक-4-5-9तुला राशि :- यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार है। परिवारजनों का सहयोग बना रहेगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-3-7-9वृश्चिक राशि :- मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। नैतिक दायरे में रहें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। वाहन चालन में सावधानी बरतें। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। मान-सम्मान बढ़ेगा। शुभांक-2-7-8धनु राशि :- आय के योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। आत्मचिंतन करे। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करे। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। इच्छित कार्य सफल होंगें। दैनिक सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-3-6-9मकर राशि :- परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। नये व्यावसायिक अनुबन्ध होंगे। ‘आगे-आगे गौरख जागे’ वाली कहावत चरितार्थ होगी। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-4-6-8कुम्भ राशि :- जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। शुभांक-1-3-7मीन राशि :- लाभ में आशातीत वृद्घि तय है मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। विशिष्ट जनों से मुलाकात होगी। शुभांक-1-5-9

मंगलवार: हनुमानजी की आराधना से कठिनाइयाँ दूर, जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली। हिंदू धार्मिक परंपरा में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार को हनुमानजी की पूजा-अर्चना करने से जीवन में बाधाएँ कम होती हैं, मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन किये गए विशेष उपायों से देवी-देवताओं की कृपा पाकर कठिनाइयों से भी मुक्ति मिल सकती है। धार्मिक आस्था के अनुसार मंगलवार को सुबह स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद हनुमान चालीसा, बजरंगबाण या मारुति स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आने वाली परेशानियों का नाश होता है और संकट दूर हो जाते हैं। हनुमान चालीसा की भक्ति से हनुमानजी संकटों से रक्षा करते हैं और भक्त को साहस तथा शक्ति प्रदान करते हैं। इस दिन श्रीराम के नाम का स्मरण तथा जाप भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। हनुमानजी को प्रभु राम का नाम अत्यंत प्रिय है, इसलिए मंगलवार के दिन राम नाम का उच्चारण निरंतर करने से मन और बुद्धि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आस्था अनुसार मंगलवार को तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ फलदायी होता है। तुलसी के पास जल या दीपक प्रज्वलित करने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। तुलसी के उपाय से गृहस्थ जीवन में सुख-शांति तथा लक्ष्मीजी का आगमन भी माना जाता है। लाल जनेऊ अर्पण तथा विशेष विधि से पूजा करना भी मंगलमय फल देता है। मंगलवार को मंदिर में जाकर या घर में ही हनुमानजी को लाल जनेऊ अर्पित करने से कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं और बिगड़े हुए कार्यों के सफल होने की संभावनाएँ बढ़ती हैं। अन्य उपायों में हनुमानजी के मंदिर में दीपक जलाना, लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर पूजा करना और प्रसाद के रूप में गुड़-चना, मेवा-फल अर्पित करना शामिल है। इस प्रकार की भक्ति और उपायों से मनोबल उच्च रहता है तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ बलवान उपाय के रूप में कमजोर पड़ती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगलवार को हनुमानजी की भक्ति निरंतर करने से न केवल भौतिक जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि मानसिक संतुलन, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। इससे घर-परिवार में समृद्धि तथा संतोषपूर्ण जीवन का अनुभव होता है, जिससे भक्त का संपूर्ण कल्याण सुनिश्चित होता है।

Wealth Dreams Signs: अगर नींद में आते हैं ये 7 सपने, समझ लें जल्द ही होंगे मालामाल

नई दिल्ली। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने केवल हमारी कल्पना नहीं होते बल्कि कई बार वे भविष्य की संभावनाओं के संकेत भी देते हैं। इंसान दो तरह के सपने देखता है एक वे जिन्हें वह जागते हुए देखता है और मेहनत के बल पर पूरा करने की कोशिश करता है और दूसरे वे सपने जो नींद के दौरान अचानक दिखाई देते हैं। जागते हुए सपनों पर हमारा नियंत्रण होता है लेकिन नींद में आने वाले सपनों को हम रोक नहीं सकते। स्वप्न शास्त्र में नींद में दिखाई देने वाले कई दृश्य शुभ या अशुभ घटनाओं की भविष्यवाणी करते हैं। खासतौर पर कुछ सपने ऐसे होते हैं जो अचानक धन लाभ और आर्थिक मजबूती की ओर संकेत करते हैं। अगर आपको भी ऐसे सपने आते हैं तो समझिए आपकी किस्मत बदलने वाली है। सबसे पहले बात करें मंदिर के ध्वज सूर्य या पूर्णिमा के चंद्रमा की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार सपने में मंदिर का लहराता हुआ ध्वज आकाश में सूर्य देव का प्रकाश या पूर्णिमा का चंद्रमा दिखना धन लाभ का संकेत माना जाता है। यदि काले बादलों के बीच से सूर्य निकलता हुआ दिखाई दे तो यह आर्थिक परेशानियों के समाप्त होने की ओर संकेत करता है। ऐसे सपने देखने वाले व्यक्ति को आने वाले समय में स्थिरता और बढ़ती आमदनी की संभावना रहती है। दूसरा और सबसे शुभ संकेत है मां लक्ष्मी के दर्शन। सपने में धन की देवी मां लक्ष्मी का किसी भी रूप में दिखाई देना बेहद शुभ माना जाता है। यह सपना इस बात की ओर संकेत करता है कि व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होने वाली है और उसे बड़ा आर्थिक लाभ लाभकारी अवसर या अचानक धन प्राप्ति हो सकती है। तीसरा संकेत है कमल का फूल। यदि सपने में तालाब बगीचे या गुलदस्ते में कमल दिखाई दे तो इसे सुख-समृद्धि के आगमन का प्रतीक माना जाता है। चूंकि कमल मां लक्ष्मी से जुड़ा है इसलिए यह सपना धन वृद्धि की ओर संकेत करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला होता है। सपनों में पशु-पक्षियों का दिखना भी शुभ माना जाता है। स्वप्न में हंस सारस या मोर जैसे पक्षियों का दिखाई देना सौभाग्य का प्रतीक है। वहीं हाथी का दिखना किस्मत का साथ मिलने का संकेत देता है। अगर सपने में गाय को बछड़े के साथ या दूध देते हुए देखा जाए तो यह भी धन लाभ का संकेत माना जाता है और पारिवारिक सुख-शांति का संकेत भी देता है। पानी से भरा कलश या जल से जुड़ा सपना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। सपने में पानी से भरा कलश या घड़ा दिखना नदी या समुद्र देखना या खुद को पानी में तैरते हुए देखना आर्थिक उन्नति का प्रतीक होता है। पानी का स्वभाव प्रवाहशील होता है इसलिए ऐसे सपने जीवन में धन के प्रवाह की ओर इशारा करते हैं। सनातन परंपरा में हल्दी को शुभता का प्रतीक माना गया है। यदि कोई व्यक्ति सपने में खुद को हल्दी लगे हुए देखे तो यह आने वाले समय में धन लाभ और शुभ घटनाओं का संकेत हो सकता है।आखिरी और बेहद खास संकेत है मधुमक्खी या उसका छत्ता। सपने में मधुमक्खी या छत्ता दिखाई देना तरक्की और मेहनत का फल मिलने का संकेत माना जाता है। यह सपना बताता है कि आपकी मेहनत का परिणाम अब मिलने वाला है और आपको जल्द ही सफलता और लाभ मिल सकता है।