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नवरात्रि का अंतिम दिन: मां सिद्धिदात्री की महिमा और कथा से मिलेगा सुख समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी पर मां सिद्धिदात्री पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन मां दुर्गा के नौवें और पूर्ण स्वरूप की आराधना का होता है, जिसे सिद्धियों की दात्री कहा गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा के बाद उनकी कथा का पाठ करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख समृद्धि तथा आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। धर्म शास्त्रों के अनुसार मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। कहा जाता है कि शिवने भी मां की कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें अष्टसिद्धियां प्रदान कीं। यही कारण है कि भगवान शिव का एक रूप अर्धनारीश्वर कहलाता है, जिसमें वे आधे शिव और आधी शक्ति के रूप में विराजमान हैं। पौराणिक कथा के अनुसार जब असुरों का अत्याचार बढ़ गया और देवता परेशान हो उठे, तब सभी देवताओं ने विष्णुऔर भगवान शिव से सहायता की प्रार्थना की। इसके बाद सभी देवताओं के तेज से एक दिव्य शक्ति प्रकट हुई, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा गया। यह स्वरूप अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी माना जाता है, जो भक्तों के जीवन से भय और बाधाओं को दूर करता है। ऐसी मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की आराधना के बिना किसी भी देवी-देवता की पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती। देवी हिमालय के शिखर पर विराजमान होकर समस्त सिद्धियों की रक्षा करती हैं और अपने भक्तों को ज्ञान, बुद्धि, स्वास्थ्य और धन का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। महानवमी के दिन भक्त पूरे श्रद्धा भाव से मां की पूजा करते हैं, कथा सुनते और पढ़ते हैं तथा अंत में आरती कर भोग अर्पित करते हैं। पूजा के समापन पर मां से क्षमा याचना करना भी अत्यंत आवश्यक माना गया है। भक्त विनम्र भाव से प्रार्थना करते हैं कि पूजा में हुई किसी भी त्रुटि को मां क्षमा करें और अपने आशीर्वाद से जीवन को सुखमय बनाएं। यह पावन दिन हमें यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से जीवन की हर बाधा दूर की जा सकती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की कथा और पूजा से न केवल आध्यात्मिक बल मिलता है बल्कि जीवन में सफलता और संतुलन भी प्राप्त होता है।

अष्टसिद्धियों का दिव्य ज्ञान: महानवमी पर जानें 8 शक्तियां और सूर्य पुत्री से हनुमान विवाह का रहस्य

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ उनकी आराधना करता है, उसे जीवन में सुख समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। मां सिद्धिदात्री को सभी प्रकार की सिद्धियों की दात्री कहा गया है और वे अपने भक्तों को अष्टसिद्धियां प्रदान करती हैं। धार्मिक ग्रंथों विशेष रूप से मार्कण्डेय पुराण में इन आठ सिद्धियों का वर्णन मिलता है। ये सिद्धियां केवल अलौकिक शक्तियां नहीं बल्कि साधक के आत्मिक विकास और जीवन की उन्नति का प्रतीक मानी जाती हैं। अष्टसिद्धियों के नाम और अर्थ अणिमा – स्वयं को अत्यंत सूक्ष्म बना लेने की शक्तिमहिमा – शरीर को अत्यंत विशाल रूप में विस्तार करने की क्षमतागरिमा – शरीर को अत्यधिक भारी बना लेनालघिमा – स्वयं को अत्यंत हल्का कर लेनाप्राप्ति – इच्छित स्थान या वस्तु को प्राप्त करने की शक्तिप्राकाम्य – मनचाही इच्छा को पूर्ण करने की क्षमताईशित्व – समस्त जगत पर प्रभुत्व की शक्तिवशित्व – दूसरों को अपने नियंत्रण में करने की क्षमता इन सिद्धियों को पाने वाला साधक जीवन में सफलता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा को अत्यंत फलदायी माना गया है। इसी संदर्भ में  हनुमान जी से जुड़ी एक रोचक कथा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार हनुमान जी ने शिक्षा प्राप्त करने के लिए सूर्य देव को गुरु बनाया था। सूर्यदेव ने उन्हें न केवल समस्त ज्ञान दिया बल्कि अपना तेज भी प्रदान किया। कथा के अनुसार सूर्यदेव ने हनुमान जी को बताया कि वे अष्टसिद्धियां केवल एक गृहस्थ को ही प्रदान कर सकते हैं। ऐसे में हनुमान जी को उनकी पुत्री सुवर्चला से विवाह करना पड़ा ताकि वे पूर्ण ज्ञान और सिद्धियां प्राप्त कर सकें। हालांकि यह विवाह केवल एक आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक रूप में माना जाता है। इसके अलावा मान्यता यह भी है कि हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नव निधि का वरदान Sita माता से प्राप्त हुआ था, जिसका उल्लेख हनुमान चालीसा में भी मिलता है। महानवमी का यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति और साधना से व्यक्ति अपने भीतर की शक्तियों को जागृत कर सकता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

RAM NAVAMI UTSAV : रामनवमी पर भिंड हुआ राममय, हवन पूजन के साथ नवदुर्गा उत्सव का भव्य समापन

RAM NAVAMI UTSAV

HIGHLIGHTS: भिंड में नवदुर्गा उत्सव का अंतिम दिन रामनवमी पर भव्य आयोजन। मंदिरों में कन्या पूजन और हवन-पूजन संपन्न। लहार कस्बे में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने देवी उपासना और राम आराधना में भाग लिया। नौ दिवसीय उत्सव का समापन भक्ति और आस्था के संगम के साथ। RAM NAVAMI UTSAV : भिंड। शहर में नवदुर्गा उत्सव के अंतिम दिन रामनवमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। शहर के प्रमुख मंदिरों जैसे काली माता मंदिर, शीतला माता मंदिर, पावई वाली माता मंदिर, मंगला देवी मंदिर और संतोषी माता मंदिर में विशेष सजावट की गई थी। साथ ही श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान राम का प्रकट उत्सव मनाया और मां दुर्गा का पूजन कर नवरात्रि का समापन किया। ADR रिपोर्ट में खुलासा: BSP को 19 साल से नहीं मिला बड़ा चंदा, BJP को मिला भारी फंड कन्या पूजन और हवन-पूजन से धार्मिक कार्यक्रम रामनवमी के दिन घरों और मंदिरों में कन्या पूजन, हवन-पूजन और जवारे विसर्जन के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। छोटे बच्चों को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया गया और उन्हें भोज कराकर आशीर्वाद लिया गया। कई स्थानों पर लांगुरिया, भजन-कीर्तन और देवी पाठ का आयोजन भी किया गया।   लहार में भव्य शोभायात्रा सकल हिंदू समाज, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के तत्वावधान में लहार कस्बे में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ बस स्टैंड से भगवान श्रीराम की आरती-पूजन के साथ हुआ। रास्ते में भक्ति गीत, जयकारों और धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा। “मां का सम” में मां-बेटे का अनोखा रिश्ता, ट्रेलर में दिखा इमोशन और ह्यूमर का संगम श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम पिछले नौ दिनों से शहर में देवी उपासना का वातावरण बना हुआ था। रामनवमी के साथ नौ दिवसीय नवदुर्गा उत्सव का समापन हुआ, जिसमें श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।   भक्ति और समाज जागरूकता का संदेश शोभायात्रा में वक्ताओं ने भगवान राम के आदर्शों को अपनाने और समाज में जागरूकता लाने का आह्वान किया। यात्रा में बड़ी संख्या में नागरिक, कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल हुए। श्रीराम जन्मोत्सव पर राज्यपाल ने लोकभवन में की विधिवत पूजा-अर्चना, प्रदेशवासियों के लिए मंगलकामना

आज का राशिफल 27 मार्च: मेष से मीन, जानें दिनभर का आपका भाग्य और भविष्य

नई दिल्ली।  27 मार्च 2026, शुक्रवार को रामनवमी का पर्व भी है। इस दिन भगवान राम और मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आती है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल सभी 12 राशियों पर अलग-अलग असर डाल सकती है। इस दिन किन राशियों को लाभ होगा और किन लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, जानिए विस्तार से। मेष – लव लाइफ में उथल-पुथल रहेगी, लेकिन समय रहते मामला सुलझाएं। प्रोफेशनल जीवन में सकारात्मक रुख अपनाएं। पैसों की जरूरतों को बिना हिचकिचाहट पूरा करें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। वृषभ – लव लाइफ की समस्याओं का समाधान आज संभव है। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। पैसों के मामलों में सावधानी रखें। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। मिथुन – रिश्तों में हलचल हो सकती है। ऑफिस में रवैया प्रभावशाली रहेगा और उम्मीदों पर खरे उतरने में सफल होंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। कर्क – रिलेशनशिप की समस्याओं को सुलझाकर खुश रहें। प्रोफेशनल चैलेंज से परेशान न हों। आर्थिक रूप से मजबूत रहेंगे। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। सिंह – प्रेम में अहंकार को दूर रखें और संबंधों का जश्न मनाएं। नए काम हाथ में लें, पेशेवर क्षमता साबित होगी। धन लाभ का योग है। तुला – साथी के साथ ज्यादा समय बिताने पर ध्यान दें। काम पर सकारात्मक प्रभाव रहेगा। जीवन में समृद्धि बनी रहेगी। लव लाइफ की समस्याओं को सुलझाएं। धनु – लव लाइफ खुशनुमा रहेगी। ऑफिस में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे। धन का प्रबंधन सावधानी से करें। पर्सनल जीवन में संतुलन बनाए रखें। मकर – प्रेम जीवन में ईमानदारी अच्छे परिणाम लाएगी। पेशेवर जीवन में सिद्धांतों से समझौता न करें। स्वास्थ्य और वित्तीय स्थिति अच्छी रहेगी। कुम्भ – समस्याओं को डिप्लोमेटिक तरीके से संभालें। फाइनेंशियल लाइफ स्थिर रहेगी। पर्सनल लाइफ में डिसिप्लिन झलकेगा। हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखें। कन्या – बड़ी वित्तीय समस्या परेशान नहीं करेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। ऑफिस में काम का दबाव होगा, लेकिन सफलतापूर्वक पार पाएंगे। वृश्चिक – लव लाइफ से जुड़ी समस्याओं को सुलझाएं। करियर में परेशानियां आएंगी, लेकिन कॉन्फिडेंस बनाए रखें। मीन – महिला जातकों का प्रेम जीवन रोमांचक रहेगा। कार्यस्थल पर अनुशासन बनाए रखें, बेहतर प्रदर्शन होगा। स्वास्थ्य अच्छा और समृद्धि रहेगी।

Chaitra Purnima 2026: कब है चैत्र पूर्णिमा ? जानें व्रत, स्नान-दान और मुहूर्त की सही तिथि

नई दिल्ली। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन व्रत, स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस साल चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 और 2 अप्रैल दोनों दिन है, जिससे लोग भ्रमित हैं कि व्रत और स्नान-दान किस दिन करना चाहिए। पंचांग के अनुसार, स्नान और दान सूर्योदय के आधार पर, जबकि व्रत चंद्रोदय के आधार पर किया जाता है।चैत्र पूर्णिमा तिथि कब से कब तक पंचांग के अनुसार, चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल बुधवार को सुबह 7:06 बजे शुरू होकर 2 अप्रैल गुरुवार को सुबह 7:41 बजे समाप्त होगी। सूर्योदय और स्नान-दान का समय 1 अप्रैल: सूर्योदय 06:11 AM2 अप्रैल: सूर्योदय 06:10 AMइस आधार पर, चैत्र पूर्णिमा का स्नान और दान 2 अप्रैल गुरुवार को करना शुभ माना गया है। चंद्रोदय और व्रत की तिथि 1 अप्रैल: चंद्रोदय 06:11 PM2 अप्रैल: चंद्रोदय 07:07 PM (वैशाख प्रतिपदा)इसलिए, चैत्र पूर्णिमा व्रत 1 अप्रैल को रखना उचित है। इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करके अर्घ्य दिया जाता है। चैत्र पूर्णिमा 2026 मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त (स्नान के लिए उत्तम): 2 अप्रैल, 04:38 AM – 05:24 AMअभिजीत मुहूर्त: 2 अप्रैल, 12:00 PM – 12:50 PMव्रत पूजा मुहूर्त: 1 अप्रैल, 06:11 AM – 09:18 AMप्रदोष काल: सूर्यास्त 06:39 PM के बाद माता लक्ष्मी की पूजारात में चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य4 शुभ योग में व्रत 1 अप्रैल को चैत्र पूर्णिमा का व्रत चार शुभ योग में आता है:- रवि योग: सुबह 06:11 AM – 04:17 PMसर्वार्थ सिद्धि योग: 04:17 PM – 2 अप्रैल सुबह 06:10 AMवृद्धि योग: प्रात:काल – दोपहर 02:51 PMध्रुव योग: उसके बाद चैत्र पूर्णिमा का महत्व – व्रत और पूजा से परिवार में सुख-शांति आती है।– माता लक्ष्मी की पूजा से दरिद्रता और धन संकट दूर होता है।– रात में चंद्रमा की पूजा और अर्घ्य से मनोबल बढ़ता है और चंद्र दोष मिटता है।– स्नान और दान करने से पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।– स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण और दान करने से उनका आशीर्वाद मिलता है।

अप्रैल 2026 के व्रत त्योहारों की पूरी लिस्ट हनुमान जयंती से अक्षय तृतीया तक जानें सभी तिथियां

नई दिल्ली । मार्च माह के समापन के साथ ही अब अप्रैल 2026 की शुरुआत होने जा रही है जो धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। इस माह में जहां एक ओर चैत्र मास का समापन होगा वहीं दूसरी ओर पवित्र वैशाख माह का आरंभ भी होगा। इस पूरे महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं जिनका विशेष धार्मिक महत्व है और जिनका पालन करने से श्रद्धालुओं को पुण्य की प्राप्ति होती है। अप्रैल माह की शुरुआत के साथ ही 2 अप्रैल को हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा का व्रत मनाया जाएगा। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इसके अगले दिन 3 अप्रैल से वैशाख माह का आरंभ हो जाएगा जो हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। महीने के प्रारंभिक दिनों में 5 अप्रैल को विकट संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा जबकि 9 अप्रैल को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी और 10 अप्रैल को कालाष्टमी का व्रत मनाया जाएगा। इसके बाद 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इसी दिन वल्लभाचार्य जयंती भी मनाई जाएगी। 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ सूर्य के राशि परिवर्तन का पर्व मनाया जाएगा जबकि 15 अप्रैल को मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का संयोग रहेगा। 17 अप्रैल को वैशाख अमावस्या का दिन होगा जो पितरों के तर्पण और दान पुण्य के लिए विशेष माना जाता है। अप्रैल माह के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन किए गए शुभ कार्य और दान का फल अक्षय माना जाता है यानी कभी समाप्त नहीं होता। इसी दिन परशुराम जयंती भी मनाई जाती है। इसके अलावा 21 अप्रैल को आदि शंकराचार्य जयंती और सूरदास जयंती मनाई जाएगी जबकि 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। 24 अप्रैल को बगलामुखी जयंती और मासिक दुर्गाष्टमी का संयोग रहेगा। महीने के अंतिम दिनों में 25 अप्रैल को सीता नवमी व्रत रखा जाएगा और 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का महत्व रहेगा। इसके बाद 28 अप्रैल को प्रदोष व्रत और 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती मनाई जाएगी जो भगवान विष्णु के अवतार से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। वैशाख माह का विशेष महत्व भी इस पूरे महीने को और अधिक पावन बनाता है। इस दौरान गंगा स्नान दान पुण्य और भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अक्षय होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इस प्रकार अप्रैल 2026 का महीना आस्था भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है जिसमें अनेक महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करेंगे।

26 मार्च का दिन कैसा रहेगा? जानें आज का राशिफल सभी 12 राशियों के लिए

नई दिल्ली वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 26 मार्च 2026, गुरुवार को ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति कुछ राशियों के लिए लाभकारी अवसर और सफलता लेकर आएगी, जबकि कुछ राशियों के लिए सावधानी और संयम जरूरी है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। मेष (Aries)आज अपने जीवनसाथी या प्रियजन के साथ समय बिताएं और भावनाओं को खुलकर साझा करें। दफ्तर में उत्पादक बने रहें, सभी सौंपे गए काम पूरे करें और अपने सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें। लंबी दूरी की यात्रा पर निकल रहे हैं तो मेडिकल किट और जरूरी दवाइयाँ साथ रखें। खर्च पर नियंत्रण रखें और अनावश्यक खरीदारी से बचें। स्वास्थ्य की दृष्टि से हल्की थकान महसूस हो सकती है, इसलिए दिनभर पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं।धन: खर्च में संयम जरूरी, निवेश टालें।रिश्ते: साथी के साथ समझौता और सहयोग जरूरी।स्वास्थ्य: हल्की थकान या माइग्रेन संभव।करियर: ऑफिस में सहयोगियों के साथ तालमेल बढ़ाएं, काम समय पर पूरा करें। वृषभ (Taurus)आज अपने पार्टनर से किसी भी तरह की बहस से बचें। पेशेवर जीवन में पूरी मेहनत करें और अपनी पूरी क्षमता का प्रदर्शन करें। पैसे के मामलों में सावधानी रखें और फालतू खर्च से बचें। स्वास्थ्य की दृष्टि से छोटी-मोटी समस्या, जैसे हल्का सिरदर्द या पेट में गड़बड़ी, हो सकती है।धन: अनावश्यक खर्च पर रोक रखें।रिश्ते: परिवार के साथ संवाद और समझौता आवश्यक।स्वास्थ्य: हल्की समस्या, तनाव न लें।करियर: कार्यस्थल पर फोकस बढ़ाएं, महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें। मिथुन (Gemini)आज धन के नए स्रोत आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। किसी भी बदलाव को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करें। दिन के दौरान सकारात्मक परिणाम और सराहना मिलने की संभावना है। खान-पान पर विशेष ध्यान दें।धन: निवेश या आय के नए अवसर मिल सकते हैं।रिश्ते: परिवार और मित्रों से सहयोग मिलेगा।स्वास्थ्य: संतुलित आहार और हल्की एक्सरसाइज जरूरी।करियर: बदलावों को सकारात्मक दृष्टिकोण से अपनाएं। कर्क (Cancer)पेशेवर स्किल्स दिखाने के कई अवसर आज मिलेंगे। रोमांटिक जीवन में सरप्राइज गिफ्ट या डिनर रिश्ते को मजबूत करेगा। नई साझेदारी पर हस्ताक्षर करने के लिए समय अनुकूल है, जिससे आर्थिक लाभ भी संभव है।धन: नई साझेदारी से लाभ।रिश्ते: रोमांटिक समय का आनंद लें।स्वास्थ्य: दिनभर ऊर्जा बनी रहेगी।करियर: प्रोफेशनल अवसरों का फायदा उठाएं। सिंह (Leo)आज रोमांटिक जीवन में भाग्य आपका साथ देगा। ऑफिस में व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित रहेगी। धन और स्वास्थ्य दोनों स्थिति अच्छी रहेगी। किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।धन: निवेश और वित्तीय योजना मजबूत रहेंगी।रिश्ते: साथी के साथ समय बिताएं और भावनाओं में गहराई बढ़ाएं।स्वास्थ्य: ऊर्जा और स्टैमिना अच्छी रहेगी।करियर: कार्यक्षेत्र में सफलता और मान्यता मिल सकती है। कन्या (Virgo)आज लव लाइफ में शांति बनाए रखें। ऑफिस में भावनाओं को हावी न होने दें। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। प्रेम संबंधों को सुलझाने का समय है। पेशेवर मामलों में धैर्य और संयम महत्वपूर्ण रहेगा।धन: आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें।रिश्ते: पुराने मुद्दों को सुलझाएं।स्वास्थ्य: मानसिक संतुलन बनाए रखें।करियर: ऑफिस में तर्कपूर्ण निर्णय लें। तुला (Libra) आज हेल्दी और संतुलित भोजन पर ध्यान दें। रिश्तों में ईमानदारी बनाए रखें। पेशेवर बाधाएं कम रहेंगी। शेयर या निवेश के मामले में अवसर हैं, लेकिन एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहेगा।धन: निवेश से लाभ संभव, पर सलाह जरूरी।रिश्ते: रिश्तों में स्पष्टता और ईमानदारी रखें।स्वास्थ्य: जंक फूड से बचें, हाइड्रेटेड रहें।करियर: प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ाएं। वृश्चिक (Scorpio)आज रोमांटिक जीवन में किसी समस्या की पहचान जरूरी है। प्रोफेशनल चुनौतियां रह सकती हैं, लेकिन धन और स्वास्थ्य संतुलित रहेंगे। जीवन में संतुलन बनाए रखें और अत्यधिक तनाव से बचें।धन: स्थिर रहेगा, जोखिम से बचें।रिश्ते: साथी के साथ संवाद में स्पष्टता।स्वास्थ्य: मानसिक और शारीरिक संतुलन रखें।करियर: चुनौतीपूर्ण कार्य पर फोकस और धैर्य जरूरी। धनु (Sagittarius)आज बातचीत में सावधानी बरतें। पिछले निवेश से धन लाभ की संभावना है। वाहन सावधानी से चलाएं। सट्टेबाजी या जोखिम वाले निवेश से बचें।धन: निवेश लाभदायक, लेकिन सावधानी जरूरी।रिश्ते: पारिवारिक सहयोग मिलेगा।स्वास्थ्य: वाहन और यात्रा में सतर्क रहें।करियर: पेशेवर निर्णय सोच-समझकर लें। मकर (Capricorn)आज डेडलाइन वाले महत्वपूर्ण कार्य पूरे कर सकते हैं। छोटी वित्तीय समस्याएं हो सकती हैं। कुछ महिला जातक पुराने रिश्ते में लौट सकती हैं, जिससे खुशी मिल सकती है।धन: वित्तीय मामलों में संयम।रिश्ते: पुराने रिश्तों में सुधार संभव।स्वास्थ्य: सामान्य रहेगा।करियर: डेडलाइन पर फोकस करें। कुंभ (Aquarius)आज ऑफिस में नई जिम्मेदारियां आपको व्यस्त रखेंगी। स्वास्थ्य और धन दोनों स्थिति सकारात्मक रहेंगी। छोटे प्रोफेशनल मुद्दों का ध्यान रखें।धन: स्थिर और संतुलित।रिश्ते: सहयोगी और परिवार का समर्थन मिलेगा।स्वास्थ्य: सामान्य, हल्की एक्सरसाइज रखें।करियर: नई जिम्मेदारियों पर ध्यान दें। मीन (Pisces)आज प्रेम जीवन सामान्य रखें। कोई बड़ी प्रोफेशनल चुनौती प्रभावित नहीं करेगी। डिटेल्स पर ध्यान दें और आर्थिक मामलों में सतर्क रहें।धन: खर्च में संयम और निवेश पर ध्यान।रिश्ते: साथी के साथ संवाद और सहयोग।स्वास्थ्य: मानसिक संतुलन बनाए रखें।करियर: महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें।

अयोध्या में कब मनेगी राम नवमी जानिए तिथि मुहूर्त और सूर्य तिलक का समय

नई दिल्ली । पूरे देश में राम नवमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं लेकिन इस वर्ष तिथि को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से अयोध्या में इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है क्योंकि यह भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है और यहां राम नवमी का उत्सव अत्यंत भव्य रूप में मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च 2026 को सुबह 11 बजकर 46 मिनट पर प्रारंभ हो रही है और 27 मार्च 2026 को सुबह 10 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। भगवान श्रीराम का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था इसलिए कई श्रद्धालु 26 मार्च को भी राम नवमी मना रहे हैं। वहीं उदया तिथि के आधार पर 27 मार्च को भी इस पर्व का आयोजन किया जा रहा है जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अयोध्या में राम नवमी 27 मार्च 2026 शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन राम मंदिर में रामलला का भव्य जन्मोत्सव आयोजित किया जाएगा। दोपहर 12 बजकर 27 मिनट पर मध्याह्न मुहूर्त में भगवान श्रीराम का जन्म उत्सव मनाया जाएगा जो इस पर्व का सबसे महत्वपूर्ण क्षण माना जाता है। राम नवमी के अवसर पर अयोध्या में एक विशेष आकर्षण सूर्य तिलक होता है। इस बार भी वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की किरणें सीधे भगवान राम के मस्तक पर पड़ेंगी और यह अद्भुत दृश्य लगभग चार से पांच मिनट तक दिखाई देगा। यह नजारा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम होता है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग अयोध्या पहुंचते हैं। राम नवमी का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्म का प्रतीक है जो धर्म सत्य और मर्यादा के आदर्श माने जाते हैं। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में सत्य और धर्म का मार्ग ही सर्वोपरि है और अंततः अच्छाई की ही जीत होती है। अयोध्या में इस अवसर पर मंदिरों को भव्य रूप से सजाया जाता है और विशेष पूजा अर्चना भजन कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में सरयू नदी में स्नान कर भगवान राम के दर्शन करते हैं और अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। इस प्रकार राम नवमी 2026 का पर्व अयोध्या में 27 मार्च को अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाएगा। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि आस्था और संस्कृति का भी प्रतीक है जो हर भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और प्रेरणा लेकर आता है।

घर पर बनाएं स्वादिष्ट दानेदार सूजी का हलवा भंडारे जैसा स्वाद पाएं आसान टिप्स के साथ

नई दिल्ली:  नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दौरान कन्या पूजन के साथ बनाए जाने वाले भोग में सूजी का हलवा विशेष स्थान रखता है। सूजी का हलवा को आमतौर पर भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार बनाने की कोशिश की जाती है लेकिन घर पर वही स्वाद और बनावट पाना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। दरअसल भंडारे जैसा हलवा बनाने के पीछे कुछ खास तकनीक और सही अनुपात का बड़ा योगदान होता है। अगर सामग्री और प्रक्रिया का सही ध्यान रखा जाए तो घर पर भी हलवाई जैसा स्वाद और बनावट हासिल की जा सकती है। सबसे पहले सामग्री का सही संतुलन जरूरी होता है। इसके लिए एक कप सूजी एक कप देसी घी एक कप चीनी और तीन कप पानी लिया जाता है। यह अनुपात हलवे को न तो ज्यादा सूखा बनने देता है और न ही चिपचिपा। इसी के साथ चाशनी तैयार करने में भी एक अहम भूमिका होती है। पानी में चीनी इलायची और केसर डालकर हल्की चाशनी तैयार की जाती है लेकिन इसे एक तार की चाशनी तक नहीं पकाना चाहिए। इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण आता है सूजी को भूनना। एक भारी तले वाले पैन में देसी घी गर्म करके उसमें सूजी डाली जाती है। इस दौरान अगर सूजी के साथ थोड़ी मात्रा में बेसन मिलाया जाए तो हलवे का रंग और बनावट और भी बेहतर हो जाती है। सूजी को धीमी आंच पर तब तक भूनना चाहिए जब तक वह सुनहरी भूरी न हो जाए और उसमें से घी अलग होता दिखे। इस प्रक्रिया में जल्दबाजी करने से हलवे का स्वाद बिगड़ सकता है। जब सूजी अच्छे से भुन जाए तो तैयार की गई गर्म चाशनी को धीरे-धीरे उसमें मिलाया जाता है। इस समय सावधानी रखना जरूरी है क्योंकि मिश्रण उछल सकता है। लगातार चलाते रहने से गुठलियां नहीं बनतीं और हलवा एकसार बनता है। हलवे में स्वाद और पौष्टिकता बढ़ाने के लिए इसमें काजू और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं। अंत में एक चम्मच घी डालने से हलवे में एक सुंदर चमक आती है। इसके बाद इसे ढककर कुछ मिनट के लिए धीमी आंच पर छोड़ दिया जाता है जिससे सूजी के दाने अच्छी तरह फूल जाते हैं और हलवा दानेदार बन जाता है। इस तरह कुछ आसान टिप्स और सही विधि अपनाकर आप घर पर भी भंडारे जैसा स्वादिष्ट और दानेदार सूजी का हलवा बना सकते हैं। यह न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है बल्कि पूजा के लिए एक शुद्ध और पारंपरिक प्रसाद के रूप में भी खास माना जाता है।

कल है दुर्गा अष्टमी 2026 इस शुभ मुहूर्त में करें कन्या पूजन मिलेगा मां महागौरी का आशीर्वाद

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और अब भक्तों को महाअष्टमी का बेसब्री से इंतजार है। दुर्गा अष्टमी का दिन नवरात्र के सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की जाती है और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष अष्टमी तिथि 25 मार्च को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। ऐसे में महाअष्टमी का पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन शुभ मुहूर्त में कन्या पूजन करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कन्या पूजन के लिए इस बार तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला मुहूर्त सुबह 6 बजकर 16 मिनट से लेकर 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। दूसरा मुहूर्त सुबह 10 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 2 मिनट से लेकर 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। इन सभी समयों में श्रद्धालु कन्या पूजन कर सकते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस वर्ष दुर्गा अष्टमी पर विशेष योग का भी संयोग बन रहा है जो इसे और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का निर्माण हो रहा है। यह योग शाम 4 बजकर 19 मिनट से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा। ऐसे योग में किए गए धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र में अष्टमी और नवमी दोनों दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जहां कन्याओं का सम्मान होता है वहां देवी का वास होता है। इसलिए इस दिन नौ कन्याओं को माता का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। उन्हें भोजन के रूप में हलवा पूरी और चने का प्रसाद दिया जाता है और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। कन्या पूजन केवल एक धार्मिक परंपरा ही नहीं बल्कि नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि समाज में महिलाओं का सम्मान और आदर करना कितना महत्वपूर्ण है। इस प्रकार दुर्गा अष्टमी का दिन श्रद्धा भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर सही मुहूर्त में कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति और समृद्धि का आगमन होता है।