मई में कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026, पूजन विधि से लेकर सामग्री तक सबकुछ यहां जानें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में ज्येष्ठ माह का विशेष महत्व माना जाता है और इसी महीने में आने वाला वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण होता है यह व्रत पति की लंबी आयु सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं और माता सावित्री का स्मरण करती हैं जिन्होंने अपने तप और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को रखा जाएगा इस बार अमावस्या तिथि 16 मई शनिवार को सुबह 5 बजकर 12 मिनट से शुरू होकर देर रात 1 बजकर 31 मिनट तक रहेगी उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा इस दिन शनिवार होने के कारण शनि अमावस्या का विशेष संयोग भी बन रहा है जिससे इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ जाता है पूजन के लिए अभिजीत मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना गया है इस दिन सुबह 11 बजकर 50 मिनट से दोपहर 12 बजकर 44 मिनट तक का समय पूजा के लिए श्रेष्ठ रहेगा इस समय में विधिपूर्वक वट वृक्ष की पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है वट सावित्री व्रत के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं इसके बाद सोलह श्रृंगार कर व्रत का संकल्प लिया जाता है महिलाएं वट वृक्ष के पास जाकर पूजा करती हैं और जल अक्षत तिल फूल और सिंदूर अर्पित करती हैं इसके साथ ही कच्चे सूत को वट वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए उसकी परिक्रमा की जाती है यह परिक्रमा सात इक्कीस या एक सौ आठ बार की जा सकती है पूजा के दौरान वट सावित्री व्रत कथा का पाठ करना भी आवश्यक माना गया है कथा के माध्यम से माता सावित्री के अद्भुत साहस और पतिव्रता धर्म का स्मरण किया जाता है इसके बाद महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि की कामना करती हैं पूजन सामग्री में तांबे का लोटा गंगाजल सिंदूर रोली कलावा कच्चा सूत अगरबत्ती दीपक फूल तिल अक्षत फल मिठाई और अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल होती हैं पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं को विशेष रूप से वर वधू के प्रतीक स्वरूप वस्त्र भी रखने होते हैं धार्मिक मान्यता है कि वट वृक्ष में ब्रह्मा विष्णु और महेश तीनों का वास होता है इसलिए इसकी पूजा करने से त्रिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है यह व्रत केवल परंपरा नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम विश्वास और समर्पण का प्रतीक भी है जो परिवार में सुख शांति और समृद्धि लाने का संदेश देता है
नरसिंह जयंती पर पढ़ें अद्भुत कथा: जब खंभे से प्रकट होकर भगवान ने खत्म किया अधर्म का आतंक

नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह पावन दिन भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और कथा श्रवण करने से जीवन के सभी भय, संकट और बाधाएं दूर होती हैं तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सनातन परंपरा के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को यह जयंती मनाई जाती है। शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि इसी दिन प्रदोष काल में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण कर अधर्म का अंत किया और अपने परम भक्त Prahlada की रक्षा की। यही कारण है कि यह पर्व धर्म की विजय और आस्था की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में दिति और ऋषि कश्यप के दो पुत्र हुए जिनका नाम हिरण्याक्ष और Hiranyakashipu था। दोनों ही अत्यंत शक्तिशाली लेकिन अहंकारी दैत्य थे। हिरण्याक्ष ने अपने अभिमान में पृथ्वी को रसातल में ले जाने का प्रयास किया जिसे भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर समाप्त किया। अपने भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त किया जिससे वह लगभग अजेय हो गया। इस वरदान के कारण हिरण्यकश्यप का अहंकार बढ़ता गया और उसने स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर रोक लगा दी और सभी को अपनी ही आराधना करने के लिए बाध्य किया। इसी बीच उसके घर पुत्र प्रह्लाद का जन्म हुआ जो बचपन से ही भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को अपनी भक्ति छोड़ने के लिए कहा लेकिन वे अडिग रहे। क्रोध में आकर उसने अपने ही पुत्र को मारने के कई प्रयास किए लेकिन हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए। अंततः जब उसने प्रह्लाद से पूछा कि उसका भगवान कहां है और प्रह्लाद ने उत्तर दिया कि वह हर जगह मौजूद हैं तो हिरण्यकश्यप ने एक खंभे की ओर इशारा करते हुए चुनौती दी। तभी उस खंभे से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। यह रूप आधा मनुष्य और आधा सिंह का था। भगवान ने संध्या काल में, घर की दहलीज पर, हिरण्यकश्यप को अपनी गोद में रखकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। इस प्रकार उन्होंने ब्रह्मा के वरदान की सभी शर्तों को पूर्ण करते हुए अधर्म का अंत किया। इसके बाद भगवान नरसिंह ने अपने भक्त प्रह्लाद को आशीर्वाद दिया और सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की। यह कथा इस बात का प्रतीक है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे सबसे बड़ा अहंकार भी टिक नहीं सकता। नरसिंह जयंती का यह पर्व हमें सिखाता है कि जब भी धर्म पर संकट आता है तब भगवान स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होते हैं। इस दिन व्रत, पूजा और कथा का श्रवण करने से जीवन में साहस, सुरक्षा और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा सभी प्रकार के भय और कष्ट दूर होते हैं।
आज नरसिंह जयंती का महापर्व: दुर्लभ संयोग में करें सही पूजा, इन गलतियों से दूर रहें वरना मिलेगा विपरीत फल

नई दिल्ली । आज पूरे देश में नरसिंह जयंती का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र और रक्षक अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है जिनकी पूजा से भक्तों के जीवन से भय, बाधाएं और शत्रु समाप्त होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष फल मिलता है लेकिन छोटी-छोटी गलतियां भी पूजा का प्रभाव कम कर सकती हैं इसलिए सावधानी बेहद जरूरी मानी गई है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 29 अप्रैल की शाम से शुरू होकर 30 अप्रैल की रात तक रहेगी और उदयातिथि के आधार पर आज गुरुवार को ही नरसिंह जयंती मनाई जा रही है। इस बार का पर्व इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन दो बेहद शुभ और दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो इसकी आध्यात्मिक शक्ति को कई गुना बढ़ा देते हैं। पहला संयोग है गुरुवार का जो भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित दिन माना जाता है। ऐसे में नरसिंह जयंती का इस दिन पड़ना इसे और भी फलदायी बना देता है। दूसरा बड़ा संयोग है रवि योग का निर्माण जिसे ज्योतिष शास्त्र में सभी दोषों को समाप्त करने वाला और कार्यों में सफलता दिलाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई पूजा, व्रत और दान अक्षय फल प्रदान करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इस पावन अवसर पर भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ-सुथरे तथा पीले या केसरिया रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान नरसिंह की मूर्ति या तस्वीर का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान को प्रसन्न करने के लिए सत्तू, तिल और गुड़ का दान करना भी विशेष फलदायी बताया गया है। इन उपायों से भगवान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। लेकिन जितना जरूरी सही पूजा करना है उतना ही जरूरी कुछ गलतियों से बचना भी है। इस दिन घर में किसी भी प्रकार का झगड़ा या क्लेश करना अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और पूजा का फल नष्ट हो सकता है। इसके अलावा प्याज, लहसुन या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन सात्विकता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही किसी भी असहाय या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान करना बहुत बड़ा दोष माना गया है। नरसिंह भगवान को धर्म और न्याय का प्रतीक माना जाता है इसलिए इस दिन करुणा, दया और सेवा भाव रखना विशेष रूप से जरूरी होता है। ऐसा करने से ही पूजा का पूरा लाभ प्राप्त होता है। नरसिंह जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि यह आस्था और विश्वास का प्रतीक भी है। यह हमें सिखाता है कि यदि विश्वास अटूट हो तो भगवान किसी भी रूप में अपने भक्त की रक्षा के लिए प्रकट हो सकते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव के साथ पूजा करना ही सबसे बड़ा उपाय है जो जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा प्रदान करता है।
समानता और सेवा के संदेश के साथ मनाया गया गुरु अमरदास जी का प्रकाश पर्व, नेताओं ने किया नमन

नई दिल्ली । सिख धर्म के तीसरे गुरु श्री गुरु अमरदास जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर देशभर में श्रद्धा और सम्मान का माहौल देखने को मिला। इस पावन अवसर पर कई प्रमुख नेताओं ने गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके आदर्शों और शिक्षाओं को याद किया। पूरे देश में यह दिन सेवा, समानता और विनम्रता के संदेश के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरु अमरदास जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जीवन से हमें निस्वार्थ सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने समाज में समानता और मानवता के कल्याण के लिए जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी गुरु साहिब को नमन करते हुए उनके जीवन को समर्पण, सेवा और विनम्रता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि गुरु अमरदास जी ने समाज में महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया, जो आज भी प्रेरणादायक है। इसके अलावा अन्य नेताओं ने भी इस अवसर पर अपने संदेश साझा किए और गुरु अमरदास जी के जीवन मूल्यों को याद किया। कई संदेशों में ‘पंगत और संगत’ की परंपरा का उल्लेख किया गया, जिसे सामाजिक एकता और समानता का मजबूत आधार माना जाता है। गुरु अमरदास जी की शिक्षाओं में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने, समानता स्थापित करने और मानवता को सर्वोपरि रखने का संदेश शामिल है। उनके विचार आज भी समाज को दिशा देने का काम करते हैं और लोगों को एकता के सूत्र में बांधते हैं। इस प्रकाश पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि गुरु साहिब की शिक्षाएं केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाली हैं, जो हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
गुरुवार उपाय: केले के पेड़ में चढ़ाएं ये खास चीज, बदल सकती है किस्मत

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन बेहद खास माना जाता है। यह दिन Lord Vishnu और देवगुरु Brihaspati को समर्पित होता है। मान्यता है कि यदि कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो या जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हों, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करना बेहद फलदायी होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसलिए इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर न केवल गुरु ग्रह मजबूत होता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। गुरुवार को केले के पेड़ में क्या चढ़ाएं?अगर आप किस्मत का साथ पाना चाहते हैं, तो गुरुवार के दिन केले के पेड़ में जल के साथ गुड़ और चने की दाल जरूर चढ़ाएं। माना जाता है कि यह दोनों चीजें भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं।इसके साथ ही हल्दी मिला जल केले के पेड़ की जड़ में अर्पित करने से घर में धन-धान्य और खुशहाली का आगमन होता है। यह उपाय सोई हुई किस्मत को जगाने वाला माना जाता है। पूजा की सही विधसुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ (पीले) वस्त्र धारण करेंतांबे या पीतल के लोटे में जल लेंउसमें हल्दी, चने की दाल और गुड़ मिलाएंकेले के पेड़ की जड़ में यह जल अर्पित करेंजल चढ़ाते समय “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करेंपेड़ के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें क्यों है यह उपाय खास?ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यह उपाय गुरु ग्रह को मजबूत करता है, जिससे व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलने लगता है। साथ ही, आर्थिक स्थिति में सुधार, करियर में तरक्की और पारिवारिक सुख-शांति के योग बनते हैं। अगर आप जीवन में रुकावटों से परेशान हैं, तो इस सरल गुरुवार उपाय को अपनाकर सकारात्मक बदलाव महसूस कर सकते हैं।
गुरुवार का रहस्य: क्यों खास है पीला रंग? जानिए इसका धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन Lord Vishnu और देवगुरु Brihaspati को समर्पित होता है। इसी कारण इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व होता है। पीला रंग न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि इसे ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। क्यों पहनते हैं गुरुवार को पीले कपड़ेज्योतिष शास्त्र के अनुसार पीला रंग गुरु ग्रह यानी Brihaspati से जुड़ा होता है। यदि आप गुरुवार को पीले वस्त्र पहनते हैं, तो इससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सुख-समृद्धि के योग बनते हैं। मान्यता है कि इस दिन पीले कपड़े पहनकर Lord Vishnu की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य में पीले रंग का उपयोग अधिक किया जाता है। पूजा विधि और नियमगुरुवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करेंपीले वस्त्र धारण करेंघर में गंगाजल का छिड़काव करेंपूजा स्थल पर Lord Vishnu की मूर्ति या चित्र स्थापित करेंपीले फूल, अक्षत और चना-गुड़ अर्पित करेंविधि-विधान से पूजा करें और मंत्रों का जाप करें क्या मिलते हैं लाभ? घर में सुख-शांति और समृद्धि आती हैपितृ दोष से मुक्ति मिलती हैज्ञान और बुद्धि में वृद्धि होती हैआर्थिक स्थिति मजबूत होती हैमाता लक्ष्मी और Lord Vishnu का आशीर्वाद मिलता है गुरुवार को क्या न करेंबाल और दाढ़ी न कटवाएंकपड़े धोने से बचेंतामसिक भोजन से दूर रहेंगुरुजनों का अपमान न करें दान का विशेष महत्गुरुवार के दिन पीली चीजों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पीले वस्त्रहल्दीकेसरचने की दाल इन चीजों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। कुल मिलाकर, गुरुवार को पीले रंग का महत्व सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और सकारात्मकता से जुड़ा हुआ है। इसे अपनाकर आप अपने जीवन में संतुलन और समृद्धि ला सकते हैं।
आज नृसिंह जयंती, ऐसे करें भगवान नृसिंह की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली। आज नृसिंह जयंती पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन भगवान विष्णु के उग्र अवतार भगवान नृसिंह को समर्पित है, जिन्होंने अपने परम भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए अवतार लिया था। आधा मनुष्य और आधा सिंह के रूप में प्रकट होकर उन्होंने अधर्म का अंत किया और धर्म की स्थापना की। शुभ मुहूर्त और तिथिनृसिंह चतुर्दशी की तिथि 29 अप्रैल को शाम 7:51 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल को रात 9:12 बजे तक रहेगी। मध्याह्न संकल्प का समय सुबह 10:59 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक रहेगा।वहीं, सायंकाल पूजा का शुभ समय शाम 4:17 बजे से 6:56 बजे तक निर्धारित किया गया है।व्रत का पारण 1 मई को सुबह 5:41 बजे किया जाएगा। नृसिंह जयंती का महत्ववैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह जयंती विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इसी दिन संध्या समय खंभे से प्रकट होकर भगवान नृसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया था। यह पर्व भक्तों की रक्षा, शत्रुओं के नाश और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। भगवान नृसिंह की महिमाभगवान नृसिंह को शक्ति और संरक्षण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। उनकी आराधना से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं, विरोधियों से राहत मिलती है और भय व संकटों से सुरक्षा प्राप्त होती है। साथ ही मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पूजा विधिइस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई कर स्नान के बाद शुद्ध वस्त्र धारण करें। चूंकि भगवान नृसिंह का प्राकट्य गोधूली बेला में हुआ था, इसलिए सूर्यास्त के समय पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। पूजा के दौरान भगवान की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं, लाल फूल अर्पित करें और श्रद्धा से मंत्र जाप करते हुए अपनी मनोकामना व्यक्त करें। व्रत नियमव्रत रखने वाले भक्त इस दिन फलाहार या जलाहार ग्रहण करते हैं और संयम का पालन करते हैं। अगले दिन दान-पुण्य कर व्रत का पारण किया जाता है। जो व्रत नहीं रखते, वे भी भक्ति भाव से पूजा कर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। विशेष उपाययदि कोई व्यक्ति शत्रु या मुकदमे से परेशान है, तो भगवान नृसिंह को लाल फूल अर्पित कर लाल रेशमी धागा चढ़ाएं। इसके बाद घी का चौमुखी दीपक जलाकर “ऊं नृसिंहाय शत्रु भुजबल विधराय स्वाहा” मंत्र का 3, 5 या 11 माला जाप करें। पूजा के बाद उस धागे को दाहिने हाथ में बांधने से बाधाएं शांत होने की मान्यता है।
30 अप्रैल राशिफल: किस्मत चमकेगी या बरतनी होगी सावधानी? जानें मेष से मीन तक का हाल

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 30 अप्रैल 2026, गुरुवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के चलते कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन भगवान Lord Vishnu की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, जिससे सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशियों का दिन कैसा रहेगा- मेष राशिलव लाइफ में सुधार के प्रयास सफल होंगे। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। सेहत अच्छी रहेगी, लेकिन विवादों से दूर रहें। वृषभ राशिसमझदारी से रिश्तों की चुनौतियों को सुलझाएंगे। करियर में सफलता मिलेगी। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी, छोटी परेशानियां आ सकती हैं। मिथुन राशिरोमांस के मामले में दिन शानदार रहेगा। करियर में नए मौके मिलेंगे और धन लाभ के योग हैं। आत्मविश्वास बढ़ेगा। कर्क राशि ईमानदारी से रिश्ते मजबूत होंगे। ऑफिस में चुनौतियां आएंगी, लेकिन आप उन्हें संभाल लेंगे। सेहत सामान्य रहेगी। सिंह राशिरिश्तों में सुधार की जरूरत है। पार्टनर के साथ समय बिताएं। काम में सफलता मिलेगी, लेकिन धन और स्वास्थ्य को लेकर सावधानी रखें। कन्या राशि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ संतुलित रहेगी। ऑफिस में तारीफ मिलेगी। खान-पान का ध्यान रखें और खर्चों पर कंट्रोल करें। तुला राशिरिश्तों में अहंकार से बचें। कार्यक्षेत्र में मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक मामलों में थोड़ी परेशानी हो सकती है। वृश्चिक राशि तनाव को काबू में रखें। ऑफिस में नए मौके मिलेंगे। सेहत को लेकर सतर्क रहें और रिश्तों के लिए समय निकालें। धनु राशि लव लाइफ में खुशियां आएंगी। करियर में अच्छे अवसर मिलेंगे। धन और सेहत दोनों पक्ष मजबूत रहेंगे। मकर राशिरिश्तों में खुशी बनी रहेगी और काम में प्रोडक्टिव रहेंगे। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं। सेहत पर ध्यान दें। कुंभ राशिनौकरी में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। रिश्तों में समय देना जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने से फायदा होगा और धन लाभ के योग हैं। मीन राशिरिश्तों में सावधानी रखें। कार्यक्षेत्र में आपका व्यवहार महत्वपूर्ण रहेगा। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और सेहत अच्छी रहेगी। कुल मिलाकर, 30 अप्रैल का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आएगा, जबकि कुछ को सोच-समझकर कदम बढ़ाने की जरूरत होगी।
गुरुवार के रामबाण उपाय: शादी में आ रही रुकावटें होंगी दूर, धन की बरसात के बनेंगे योग

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन बेहद शुभ माना जाता है। यह दिन देवगुरु Brihaspati और भगवान Lord Vishnu को समर्पित होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर हो, तो उसे धन की कमी, करियर में रुकावट और विवाह में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में गुरुवार के दिन किए गए कुछ सरल उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। धन प्राप्ति के लिए उपायगुरुवार सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद Brihaspati को हल्दी, चने की दाल और गुड़ अर्पित करें। फिर “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। मान्यता है कि इससे रुका हुआ धन मिलने लगता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। नौकरी और प्रमोशन के उपाअगर करियर में तरक्की नहीं मिल रही है, तो गुरुवार के दिन गाय को पीली दाल और गुड़ खिलाएं। यह उपाय निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है और नौकरी में प्रमोशन के रास्ते खोलता है। विवाह में देरी दूर करने के उपाविवाह में रुकावट आ रही है तो गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें। पेड़ की जड़ में जल, हल्दी, चने की दाल और पीले फूल अर्पित करें। ऐसा करने से शादी में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी मिलने के योग बनते हैं। साथ ही, गाय को केला खिलाना भी शुभ माना जाता है। सफलता और सौभाग्य के उपागुरुवार के दिन केसर या हल्दी का तिलक लगाएं। इससे Brihaspati की कृपा प्राप्त होती है और हर कार्य में सफलता मिलने लगती है। इसके अलावा किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को पीला भोजन कराने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। गुरुवार को क्या न करेंइस दिन पैसों का लेन-देन करने से बचेंतामसिक भोजन (मांस-मदिरा) का सेवन न करेंगुरुजनों और बड़ों का अपमान न करेंबाल और नाखून काटने से परहेज करें अगर आप जीवन में धन, सफलता और शादी से जुड़ी समस्याओं से परेशान हैं, तो गुरुवार के ये आसान उपाय आपके लिए लाभकारी साबित हो सकते हैं।
आज का मकर राशिफल 30 अप्रैल 2026: नए संपर्क बनेंगे, बढ़ेगा मान-सम्मान

नई दिल्ली। 30 अप्रैल 2026 का दिन मकर राशि वालों के लिए सकारात्मक ऊर्जा लेकर आ रहा है। आज आप अपने व्यवहार और समझदारी से लोगों का दिल जीतने में सफल रहेंगे। खासतौर पर सामाजिक दायरा बढ़ेगा और नए संपर्क बनने की पूरी संभावना है, जो भविष्य में आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। करियर और व्यापारकार्यस्थल पर आपका प्रदर्शन सराहनीय रहेगा। नए प्रोजेक्ट्स या जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अगर आप बिजनेस करते हैं, तो किसी नए व्यक्ति से जुड़ाव भविष्य में लाभ दिला सकता है। ऑफिस पॉलिटिक्स से दूर रहकर अपने काम पर फोकस करना बेहतर रहेगा। आर्थिक स्थिति आर्थिक रूप से दिन संतुलित रहेगा। अचानक धन लाभ के छोटे मौके मिल सकते हैं। निवेश करने से पहले सोच-समझकर निर्णय लें, खासकर लंबी अवधि के प्लान पर ध्यान दें। प्रेम और संबंधरिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। परिवार और पार्टनर के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। नए लोगों से मुलाकात आपकी पर्सनल लाइफ को भी सकारात्मक दिशा दे सकती है। स्वास्थ्यसेहत सामान्य रहेगी, लेकिन भागदौड़ के कारण थकान महसूस हो सकती है। पर्याप्त आराम और संतुलित खान-पान जरूरी है। कुल मिलाकर, मकर राशि वालों के लिए यह दिन नेटवर्किंग और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ाने का है। सही लोगों से जुड़ाव आपके भविष्य के रास्ते खोल सकता है।