लाखों में अलग पहचान चाहिए तो अपनाएं चाणक्य की ये सीख, शब्दों से लेकर आत्मविश्वास तक सब पर दिया जोर

नई दिल्ली । आचार्य की चाणक्य नीतियां आज के समय में भी लोगों का मार्गदर्शन करती हैं. उन्होंने मानव जीवन के हरेक पहलु पर अपने विचार दिए हैं, जो कि चाणक्य नीति नामक ग्रंथ में वर्णित हैं. समाज में कई तरह के लोग होते हैं. कुछ लोग भीड़ में भी अपनी अलग पहचान रखने की चाहत रखते हैं, जबकि कुछ स्थिति को समय पर छोड़ देते हैं. आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कुछ ऐसे गुणों का उल्लेख किया है, जिन्हें जीवन में अपना लेने से व्यक्तित्व निखर सकता है. ऐसे में अगर आप भी लाखों की भीड़ में अपना अलग पहचान बनाना चाहते हैं, तो चाणक्य की इन 5 बातों को आज से ही अपने जीवन में उतारना शुरू कर दें. सोच समझकर रखें अपनी बातचाणक्य नीति के अनुसार, जल्दबाजी में लिया गया फैसला किसी भी दृष्टिकोण से अच्छा नहीं है. यह नियम संवाद में भी लागू होता है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि जल्दबाजी में जुबान से निकली हुई बातें हर वक्त सही नहीं होतीं. इसलिए, बोलने से पहले उसके संभावित परिणाम पर भी विचार कर लेना चाहिए. चाणक्य सलाह देते हैं कि व्यक्ति को कभी भी सोच-समझकर की बोलना चाहिए. आकर्षक संवाद शैलीआचार्य चाणक्य का मानना है कि इंसान को बोलचाल में आसान भाषा का प्रयोग करना चाहिए, ताकि सामने वाला भी आसानी से समझ सके. चाणक्य नीति के मुताबिक, अगर संवाद में आसान भाषा का प्रयोग किया जाता है, तो सामने वाला उसे आसानी से समझ जाता है. इन्हीं वजहों से शिक्षक, सफल वक्ता और दिग्गज नेता संवाद के क्रम में आसान भाषा का प्रयोग करते हैं. आत्मविश्वासचाणक्य नीति में आचार्य ने बताया है कि इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसका आत्मविश्वास होता है. अगर कोई व्यक्ति अपनी बात रखते वक्त झिझकता है, तो सामने वाला उसकी बातों को हल्के में लेकर टाल देता है. जबकि, अगर कोई व्यक्ति किसी बात को आत्मविश्वास के साथ रखता है, तो सामने वाला ना चाहते हुए भी उसकी बातों पर ध्यान देता है.चाणक्य की सलाह है कि आत्मविश्वास हमेशा मजबूत रखना चाहिए. प्रभावी संवाद शैलीआचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में कहा है कि व्यक्ति को संवाद में समझदारी भी रखना चाहिए, क्योंकि हर बार हर समय पर कहना उचित नहीं है. किसी भी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए उचित समय का इंतजार करना चाहिए. इसके साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि जिस बात को कहना है, उसके लिए माहौल सही है या नहीं. चाणक्य नीति कहती है कि अगर कोई व्यक्ति कोई बड़ी गलती भी करे तो उसे सार्वजनिक रूप से कहने के बजाए, व्यक्तिगत रूप से कहना उचित है. ऐसा करने से गलती करने वाले के मन पर भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. विनम्रताचाणक्य ने अपनी नीति में स्पष्ट तौर पर कहा है कि कठोर शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सामने वाले को कुछ समय से लिए भयभीत किया जा सकता है लेकिन सम्मान प्राप्त नहीं किया जा सकता. इसलिए, चाणक्य प्रत्येक मनुष्य को यह सलाद देते हैं कि किसी भी बात को विनम्रता से रखना चाहिए. विनम्रतापूर्वक रखी गई बातों का सामने वालों के मन-मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है. विनम्रता से व्यक्तित्व में निखार आता है. ऐसा करने वाला इंसान लाखों की भीड़ में भी अपनी पहचान बनाता है और सम्मान पाता है.
आज का राशिफल (30 मई 2026): कुंभ राशि वालों के लिए कारोबार में मुनाफे के योग

नई दिल्ली । ज्योतिष के अनुसार 30 मई 2026 का दिन कई राशियों के लिए मिलाजुला रहने वाला है। खासकर कुंभ राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में लाभ के संकेत दिख रहे हैं, जबकि अन्य राशियों को धैर्य और संतुलन से काम लेने की सलाह दी गई है। मेष राशिकल का दिन सामान्य रहेगा। नौकरी और व्यापार में अनुशासन बनाए रखें। खर्च बढ़ सकता है, इसलिए बजट पर ध्यान दें। परिवार और रिश्तों में संयम जरूरी रहेगा। वृषभ राशिभावनात्मक संतुलन अच्छा रहेगा। कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा और नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ के संकेत हैं। मिथुन राशिआर्थिक स्थिति मिली-जुली रहेगी। खर्च और उधारी से सावधान रहें। नौकरी-व्यापार में सतर्कता जरूरी है। कर्क राशिरचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। करियर में नए अवसर बन सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। सिंह राशिपरिवार में विवाद से बचें। पुराने अनुभव काम आएंगे। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखें। कन्या राशिव्यापार और वाणिज्य में सुधार होगा। नए मौके मिल सकते हैं। पारिवारिक माहौल अच्छा रहेगा। तुला राशिघर-परिवार में खुशियां रहेंगी। बैंकिंग और धन से जुड़े कार्यों में लाभ मिलेगा। संपत्ति से जुड़े काम बन सकते हैं। वृश्चिक राशिरचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। धनु राशिआर्थिक मामलों में सावधानी रखें। निवेश सोच-समझकर करें। विवादों से दूर रहें। मकर राशिकार्यस्थल पर अच्छा प्रदर्शन रहेगा। योजनाएं सफल होंगी और लाभ मिलेगा। कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए दिन खास रहने वाला है। कारोबार में मुनाफे के योग बन रहे हैं। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और नए वाणिज्यिक अवसर मिल सकते हैं। पैतृक संपत्ति और विभिन्न स्रोतों से लाभ की संभावना है। मीन राशिभाग्य का साथ मिलेगा। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। लंबी दूरी की यात्रा के योग हैं। आज का दिन कई राशियों के लिए आर्थिक अवसर लेकर आया है, लेकिन कुछ राशियों को खर्च और निर्णयों में सावधानी रखने की जरूरत है।
लोन और कर्ज से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए ज्योतिषीय उपायों की बढ़ती चर्चा, जानें कौन से दिन माने जाते हैं शुभ

नई दिल्ली । लोन लेना या देना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन अगर कुछ बड़ी बातों का ध्यान रखें तो दिया हुआ लोन या कर्ज जल्द वापस मिल सकता है और लिया गया लोन या कर्ज जल्द चुकता किया जा सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोन लेने या देने के लिए सप्ताह के कुछ दिन ही शुभ माने गए हैं. ऐसे में एक चूक आपकी परेशानी को बढ़ा सकती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कर्ज लेने या देने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि दिन कौन सा है, साथ ही कौन से ऐसे ज्योतिष टिप्स का ध्यान रखें कि किसी तरह की बड़ी से बचा जा सके. आइए इस बारे में विस्तार से जानें. कर्ज लौटाने व देने का समय क्या हो? कर्ज लौटाने के लिए सप्ताह का मंगलवार व बुधवार का दिन सही माना जाता है. कर्ज देने लिए बुधवार और गुरुवार के दिन को कतई न चुनें. शुक्रवार को कर्ज लेना और देना ये दोनों ही काम शुभ फलदायी माने जाते हैं. अगर ऐसी कोई प्लानिंग है कि आपको किसी बचत योजनाओं में पैसे जमा करवाना है तो आपको इसके लिए बुधवार और गुरुवार का दिन चुनना चाहिए, इसके ये दोनों दिन अति शुभ होते हैं. गुरुवार के दिन भूलकर भी किसी को कर्ज दें, ऐसा करने से दो गुना धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है. गुरुवार के दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्द चुकता हो जाता है.कर्ज लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?सोमवार का दिन कर्ज के लेन-देन के लिए शुभ माना गया है. मंगलवार कर्ज लेने से धन की हानि की संभावना बढ़ जाती है और आर्थिक तंगी भी बढ़ सकती है. बुधवार को कर्ज देने वाले व्यक्ति को हानि होता है. शुक्रवार का दिन ऋण लेने और देने दोनों के लिए शुभ होता है. शनिवार को लिया ऋण जल्द उतरता है. रविवार ऋण विनाशक भगवान सूर्य नारायण का दिन है और पैसों का लेन-देन के लिए इन दिन को शुभ नहीं माना गया है. लोन चुकाने में दिक्कतें आती रहती हैं. रविवार के दिन न तो कर्ज दें और न लें. लोन लेने और देने के लिए जरूरी टिप्स• पंचांग की माने तो वृद्धि योग, द्विपुष्कर योग के अलावा त्रिपुष्कर योग में कोई भी नया कर्ज न लें.• कोई भी बड़ा आर्थिक लेनदेन करना हो तो इस बात का ध्यान रखें कि उस तय समय पर राहुकाल न चल रहा हो.• लोन लौटाने के लिए वृद्धि योग अति शुभ माना गया है. हस्ति नक्षत्र में कर्ज चुकाएं तो धन हानि या लेट लतीफी नहीं होगी.• लोन उतर नहीं पा रहा है तो मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करें. हनुमान जी के सामने बैठकर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें.• अगर बैंक से लोन ले रहे हैं तो लोन के पेपर्स पर सिग्नेचर करने या कुछ भी लिखने के लिए काले पेन का इस्तेमान न करें. नीले या लाल रंग शुभ होगा.• लोन की फाइल पर सिग्नेचर कर रहे हैं या लोन की किस्त जमा कर रहे हैं तो दिशा का ध्यान रखें. इस दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें.
8 जून को शुक्र का राशि परिवर्तन, इन जातकों पर बढ़ेगा खर्च और तनाव, रिश्तों में आ सकती हैं परेशानियां

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। 8 जून 2026 को शुक्र देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क जल तत्व की राशि मानी जाती है, ऐसे में शुक्र का यह राशि परिवर्तन कुछ जातकों के जीवन में आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव और रिश्तों में उतार-चढ़ाव ला सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर खास तौर पर चार राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मिथुन राशिशुक्र का गोचर मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में परेशानी बढ़ा सकता है। इस दौरान सुख-सुविधाओं और दिखावे पर जरूरत से ज्यादा खर्च होने की संभावना है, जिससे बचत प्रभावित हो सकती है। किसी को पैसा उधार देने से बचें। परिवार में बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच-समझकर करें, नहीं तो विवाद की स्थिति बन सकती है। तुला राशितुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, इसलिए यह गोचर आपके लिए विशेष प्रभाव डाल सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और सहकर्मियों के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलें आ सकती हैं। ऑफिस पॉलिटिक्स से छवि प्रभावित होने की आशंका रहेगी। इस समय जल्दबाजी में नौकरी बदलने या नया निवेश करने से बचना बेहतर रहेगा। धनु राशिधनु राशि वालों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन अष्टम भाव में होगा, जिसे ज्योतिष में संवेदनशील स्थिति माना जाता है। सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं, खासकर आंखों और पेट संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। वहीं जीवनसाथी या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां बढ़ने की आशंका भी रहेगी। मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर वैवाहिक और साझेदारी के मामलों में चुनौतियां ला सकता है। जीवनसाथी के साथ विचारों में मतभेद बढ़ सकते हैं और छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो सकता है। यदि आप पार्टनरशिप में व्यापार करते हैं, तो लेनदेन को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, जिससे कामकाज प्रभावित होगा। परेशानियों से बचने के उपायशुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद मिठाई का दान करें।नियमित रूप से “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।घर की महिलाओं और जीवनसाथी का सम्मान करें।शुक्रवार को साफ-सुथरे और हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना गया है।
29 मई का राशिफल: किस राशि की चमकेगी किस्मत और किसे बरतनी होगी सावधानी

नई दिल्ली। 29 मई 2026 शुक्रवार का दिन कई राशियों के लिए नई संभावनाएं और सकारात्मक बदलाव लेकर आने वाला है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति जहां कुछ राशियों को आर्थिक लाभ और करियर में सफलता दिलाएगी, वहीं कुछ लोगों को लेनदेन और रिश्तों में सतर्क रहने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशि के जातकों के लिए दिन व्यापार और साझेदारी के मामलों में लाभकारी रहेगा। रुके हुए काम पूरे होंगे और भूमि-भवन से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी और आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। वृष राशि वालों को आज अपने बजट पर विशेष ध्यान देना होगा। खर्चों में संतुलन बनाए रखना जरूरी रहेगा। किसी भी प्रकार के उधार लेनदेन से दूरी बनाकर रखें। कार्यक्षेत्र में कला और कौशल के दम पर पहचान मजबूत होगी। मिथुन राशि के लोगों के लिए दिन उत्साह से भरा रहेगा। मित्रों और करीबियों का सहयोग मिलेगा। आर्थिक लाभ के नए अवसर बनेंगे और कार्यक्षेत्र में नए प्रस्ताव मिल सकते हैं। सीखने और सिखाने की दिशा में भी प्रगति होगी। कर्क राशि वालों का ध्यान घर-परिवार और निजी सुख-सुविधाओं पर रहेगा। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी। कार्यक्षेत्र में संयम और सम्मानजनक व्यवहार आपको लाभ दिलाएगा। सिंह राशि के जातकों को पद और प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और प्रभावशाली लोगों से संपर्क मजबूत होंगे। कार्यक्षेत्र में आपकी दूरदर्शिता लाभ दिलाएगी। कन्या राशि वालों के लिए दिन रिश्तों को मजबूत करने वाला रहेगा। पुराने मतभेद दूर होंगे और प्रियजनों से मुलाकात संभव है। सामाजिक सम्मान बढ़ेगा और लोग आपकी बातों को महत्व देंगे। तुला राशि के जातक अपने काम और व्यापार में नया प्रयोग कर सकते हैं। साझेदारी के व्यवसाय में सफलता मिलेगी और आय के नए स्रोत बनेंगे। रचनात्मकता से लाभ होगा। वृश्चिक राशि वालों को आर्थिक मामलों में बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। लेनदेन में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और बजट बनाकर आगे बढ़ें। धनु राशि वालों के लिए दिन सबसे ज्यादा लाभकारी साबित हो सकता है। आर्थिक लाभ उम्मीद से बेहतर रहेगा। पढ़ाई और करियर से जुड़ी योजनाओं को गति मिलेगी। आत्मविश्वास के दम पर आप नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। मकर राशि के लोगों को कार्यक्षेत्र में अनुशासन और बेहतर प्रबंधन का फायदा मिलेगा। वाहन और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी के संकेत हैं। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि वालों का भाग्य पक्ष मजबूत रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। लंबी दूरी की यात्रा के योग बन सकते हैं। करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के अवसर मिलेंगे। मीन राशि के जातकों को अपनी वाणी और व्यवहार में संतुलन बनाए रखना होगा। आर्थिक मामलों में अचानक बदलाव संभव हैं। किसी भी निर्णय में जल्दबाजी से बचें और अपनों की सलाह को नजरअंदाज न करें। सभी राशियों के लिए आज मां दुर्गा की पूजा और ‘ओम् शुं शुक्राय नमः’ मंत्र का जाप शुभ फल देने वाला माना गया है। मीठा बांटने और विनम्र व्यवहार रखने से सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी।
Hast Rekha: हथेली के सूर्य पर्वत पर हों ये 5 निशान तो मिलती है खूब प्रसिद्धि, धन-दौलत की भी नहीं रहती कमी

नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं और पर्वतों का विशेष महत्व बताया गया है। इनमें सूर्य पर्वत को बेहद प्रभावशाली माना जाता है। यह पर्वत अनामिका यानी रिंग फिंगर के नीचे स्थित होता है और व्यक्ति की प्रसिद्धि, आत्मविश्वास, मान-सम्मान, सरकारी सफलता और कला के क्षेत्र में उपलब्धियों का संकेत देता है। हस्तरेखा विशेषज्ञों के मुताबिक सूर्य पर्वत पर बने कुछ खास चिह्न जीवन में बड़ी सफलता और आर्थिक समृद्धि का संकेत माने जाते हैं। अगर किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य पर्वत उभरा हुआ और साफ दिखाई देता है तो यह शुभ माना जाता है। वहीं इस पर्वत पर मौजूद कुछ विशेष निशान भविष्य के कई गहरे राज खोलते हैं। आइए जानते हैं सूर्य पर्वत पर बनने वाले उन 5 शुभ चिह्नों के बारे में जो व्यक्ति को प्रसिद्धि और धन लाभ दिला सकते हैं। सबसे पहले बात करते हैं वर्ग यानी चौकोर निशान की। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार सूर्य पर्वत पर वर्ग का निशान होना बेहद शुभ माना जाता है। ऐसे लोग समाज में अलग पहचान बनाते हैं और उन्हें खूब सम्मान मिलता है। ये लोग सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं और सरकारी क्षेत्र से भी लाभ प्राप्त करते हैं। इनका जीवन आमतौर पर सुख-सुविधाओं से भरपूर रहता है। सूर्य पर्वत पर वृत्त यानी गोल निशान भी खास महत्व रखता है। यह चिह्न बहुत कम लोगों की हथेली में दिखाई देता है। जिन लोगों के हाथ में यह निशान होता है, उन्हें जीवन में विदेश यात्रा के कई अवसर मिलते हैं। साथ ही ऐसे लोग मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल करते हैं और धीरे-धीरे उनका भाग्योदय होता है। त्रिकोण का निशान भी सूर्य पर्वत पर अत्यंत शुभ माना गया है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की हथेली में यह चिह्न होता है, वे कला, संगीत, अभिनय या रचनात्मक क्षेत्रों में खूब नाम कमाते हैं। उनकी प्रतिभा लोगों को आकर्षित करती है और समाज में उनकी विशेष पहचान बनती है। इसके अलावा सूर्य पर्वत पर नक्षत्र जैसा चिह्न होना भी बेहद शुभ संकेत माना जाता है। ऐसे लोगों के सरकारी नौकरी पाने की संभावना काफी मजबूत मानी जाती है। ये लोग प्रशासनिक या सरकारी क्षेत्र में ऊंचे पद तक पहुंच सकते हैं। साथ ही इन्हें जीवन में धन, प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान भी भरपूर मिलता है। हस्तरेखा शास्त्र में सूर्य पर्वत पर कई सीधी रेखाओं का होना भी शुभ संकेत माना गया है। यह व्यक्ति के मजबूत करियर और मेहनत से सफलता पाने की ओर इशारा करता है। ऐसे लोग जिम्मेदारियों को अच्छी तरह निभाते हैं और अपने कार्यक्षेत्र में ऊंचा मुकाम हासिल करते हैं। हालांकि हस्तरेखा शास्त्र को आस्था और पारंपरिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है। इसे वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जाता, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग हस्तरेखा के जरिए अपने भविष्य और व्यक्तित्व को समझने की कोशिश करते हैं।
चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें। चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
व्रत-त्योहारों का विशेष संगम बनेगा जून 2026, निर्जला एकादशी और कामाख्या अंबुबाची मेला रहेंगे मुख्य आकर्षण

नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दौरान कई प्रमुख व्रत, पर्व और धार्मिक आयोजन एक साथ देखने को मिलेंगे। पूरे महीने श्रद्धालुओं के लिए उपवास, पूजा-पाठ और तीर्थ से जुड़े अवसरों की श्रृंखला रहेगी, जिससे यह अवधि भक्ति और परंपरा का विशेष संगम बन जाएगी। इस महीने का धार्मिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें कई ऐसे व्रत और पर्व शामिल हैं जिनका पालन देशभर में बड़ी आस्था के साथ किया जाता है। जून की शुरुआत से ही विभिन्न मासिक व्रत और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हो जाएगा। श्रद्धालु इस दौरान उपवास रखकर भगवान की आराधना करेंगे और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा। महीने के मध्य में एकादशी, प्रदोष व्रत और अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण पर्वों का संयोग देखने को मिलेगा, जिन्हें हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इन अवसरों पर भक्तगण आध्यात्मिक शुद्धि और मन की शांति के लिए विशेष साधना करते हैं। मध्य जून में ज्येष्ठ मास से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहेगा, जिसमें दान-पुण्य और व्रत का पालन प्रमुख रूप से किया जाता है। इस अवधि में विभिन्न देवताओं की आराधना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। यह समय आध्यात्मिक दृष्टि से आत्मचिंतन और साधना का माना जाता है, जिसमें लोग अपने जीवन में सकारात्मकता और संतुलन लाने का प्रयास करते हैं। जून 2026 का सबसे महत्वपूर्ण व्रत निर्जला एकादशी रहेगा, जिसे वर्ष की सबसे कठिन एकादशियों में से एक माना जाता है। इस व्रत में श्रद्धालु बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं और भगवान विष्णु की विशेष आराधना करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत के पालन से सभी एकादशियों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन कई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इसी महीने असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में प्रसिद्ध अंबुबाची मेला भी आयोजित होगा, जो शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह मेला 22 जून से 26 जून तक आयोजित होने की संभावना है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। मान्यता के अनुसार इस दौरान देवी कामाख्या का वार्षिक रजस्वला काल माना जाता है, जिसके चलते मंदिर कुछ दिनों के लिए बंद रहता है और बाद में विशेष पूजा के साथ पुनः दर्शन शुरू होते हैं। यह आयोजन तांत्रिक साधना और शक्ति आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। महीने के अंत में वट पूर्णिमा व्रत और शनि प्रदोष जैसे कई अन्य धार्मिक पर्व भी मनाए जाएंगे, जिनका विशेष महत्व परिवारिक सुख-समृद्धि और आस्था से जुड़ा होता है। वट पूर्णिमा विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाने वाला व्रत है, जिसमें वे वट वृक्ष की पूजा कर अपने परिवार की दीर्घायु और खुशहाली की कामना करती हैं। इस दौरान मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना का माहौल रहता है। इस प्रकार जून 2026 का पूरा महीना धार्मिक गतिविधियों, व्रत-त्योहारों और आध्यात्मिक आयोजनों से परिपूर्ण रहेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था, परंपरा और भक्ति का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।
Ganga Dussehra 2026: शिप्रा के शुद्ध जल से होगा सिंहस्थ स्नान, उज्जैन में CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान

HIGHLIGHTS: CM मोहन यादव बोले- शुद्ध शिप्रा जल से होगा सिंहस्थ स्नान पहले नर्मदा-शिप्रा लिंक से लाया जाता था पानी रामघाट पर मां शिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित मैथिली ठाकुर की भजन संध्या बनी आकर्षण का केंद्र विक्रमोत्सव 2026 के लिए CM को गोल्ड और सिल्वर अवॉर्ड मिला Ganga Dussehra 2026: मध्यप्रदेश। उज्जैन में गंगा दशहरा के अवसर पर मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा का भव्य समापन हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मां शिप्रा को 351 फीट लंबी चुनरी अर्पित कर पूजा-अर्चना की। बता दें कि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को शिप्रा के शुद्ध जल से स्नान कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार जल संरक्षण और घाटों के विकास पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। साथ ही शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर 30 किलोमीटर लंबे घाटों का निर्माण भी कराया जा रहा है। पहले लाया जाता था नर्मदा का पानी दरअसल, पिछले सिंहस्थ और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान शिप्रा नदी में पानी की कमी होने पर नर्मदा नदी का पानी पाइपलाइन के जरिए उज्जैन लाया गया था। यह काम नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना के तहत किया गया था, ताकि घाटों पर जलस्तर बना रहे और श्रद्धालुओं को स्नान में परेशानी न हो। हालांकि उस समय विपक्ष और कई संतों ने सवाल उठाए थे कि सिंहस्थ में स्नान प्राकृतिक शिप्रा जल से ही होना चाहिए न कि दूसरी नदी के पानी से। ऐसे में CM मोहन यादव का यह बयान अहम माना जा रहा है। बकरीद का अवकाश 27 या 28 मई को…. जानिए किस दिन रहेगी बैंक की छुट्टी? रामघाट पर मैथिली ठाकुर के भजनों ने बांधा समां गंगा दशहरा के मौके पर रामघाट पर श्रद्धालुओं भरी भीड़ देखने को मिली। लोगों ने दीपदान कर मां शिप्रा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। साथ ही कार्यक्रम में भारतीय नौसेना ने बैंड की प्रस्तुति भी की। वहीं भाजपा विधायक और लोक गायिका मैथिलि ठाकुर की भजन संध्या ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। उनके साथ कई लोक कलाकारों ने भी प्रस्तुतियां दीं जिससे आयोजन में सांस्कृतिक रंग देखने को मिले। CM को मिला राष्ट्रीय सम्मान मां शिप्रा तीर्थ परिक्रमा यात्रा सोमवार से शुरू हुई थी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा रामघाट से शुरू होकर कालभैरव, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम और भर्तृहरि गुफा जैसे धार्मिक स्थलों से होकर निकली गयी। इसी दौरान विक्रमोत्सव 2026 के सफल आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को कल्चरल लाइव इवेंट ऑफ द ईयर से गोल्ड अवॉर्ड और बेस्ट गवर्नमेंट इंटीग्रेशन फॉर ए लाइव इवेंट से सिल्वर अवॉर्ड के साथ सम्मानित किया गया।
पद्मिनी एकादशी आज….. तीन साल में एक बार आता है ये व्रत… जानें इसके नियम एवं विधि

नई दिल्ली। पद्मिनी एकादशी (Padmini Ekadashi 2026)/ कमला एकादशी (Kamala Ekadashi) का व्रत अधिक मास में किया जाता है। पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) में एकादशी तिथि होने के कारण पद्मिनी एकादशी का व्रत तीन साल में एक बार ही आता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की अधिक कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत की महिमा का वर्णन पद्म पुराण में भी किया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा भाव से जो कोई भी इस व्रत को करेगा उसे जन्म जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही वह व्यक्ति अक्षय पुण्य प्राप्त करता है। इस व्रत को करने वालों को विशेष नियमों का पालन करना चाहिए। साथ ही इस दिन दान पुण्य करने से व्यक्ति की सारी इच्छाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी पर किन किन चीजों का दान करना चाहिए साथ ही जानें व्रत का नियम। पद्मिनी एकादशी व्रत के नियमपद्म पुराण में बताया गया है कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। साथ ही हाथ में थोड़ा जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इस दिन विशेष रुप से पीले रंग के वस्त्र धारण करें। एकादशी के दिन अन्न का त्याग करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ही करना शुभ फलदायी माना गया है। एकादशी के व्रत में नमक नहीं खाना चाहिए। पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन बाल आदि कटवाना नहीं चाहिए। पद्म पुराण में बताया गया है कि पद्मिनी एकादशी के दिन जो व्यक्ति घर पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करता है उसे एक गुना फल मिलता है। वहीं, नदी के तट पर जप करने से दो गुना, गोशाला में जाकर जप करने से सहस्त्र गुना, अग्निहोत्र गृहं में जप करने से एक हजार गुना, भगवान शिव के मंदिर में जप करने और तुलसी के पास जप करने से लाख गुना फल मिलता है। पद्मिनी एकादशी पर क्या दान करेंपद्मिनी एकादशी के दिन अन्न और फल का दान करना बहुत ही पुण्य फलदायी माना गया है। इस दिन अन्न और फल का दान करना चाहिए। पुरुषोत्तम मास के दौरान अधिक गर्मी के चलते जल से भरा घड़ा, मौसमी फल जैसे आम, खरबूजा, तरबूज और बाकी फलों का दान करना चाहिए। अधिक मास के दौरान गुड़ और तिल का दान करना भी सर्वोत्तम माना गया है। इस दिन जरुरतमंद लोगों को चप्पल, वस्त्र और छाता आदि चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। पुरुषोत्तम मास की यह पद्मिनी एकादशी तीन साल में एक बार आती है इसलिए इस दिन दान के अलावा मंदिरों में दीप दान भी करना चाहिए। मंदिर में घी के कम से कम पांच दीपक जरुर जलाने चाहिए।