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Vat Savitri Vrat 2026: पूजा में बांस के पंखे का धार्मिक महत्व जानिए

नई दिल्ली। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत रखती हैं और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। इस पूजा में कई प्रकार की सामग्री का उपयोग किया जाता है, लेकिन बांस से बना पारंपरिक हाथ पंखा, जिसे कई जगह ‘बेना’ कहा जाता है, विशेष महत्व रखता है। सत्यवान-सावित्री कथा से जुड़ा है संबंधधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने के लिए यमराज के पीछे-पीछे जा रही थीं, तब ज्येष्ठ महीने की भीषण गर्मी में सत्यवान का शरीर निढाल हो गया था। कथा के अनुसार, सावित्री ने बांस के हाथ पंखे से उन्हें हवा देकर राहत पहुंचाई थी। तभी से वट सावित्री व्रत में बांस के पंखे का उपयोग परंपरा का हिस्सा बन गया। पूजा में क्यों खरीदे जाते हैं दो पंखे?मान्यता है कि वट सावित्री व्रत के दौरान महिलाएं दो बांस के पंखे खरीदती हैं। पूजा के बाद इन पंखों को दान किया जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। पूजा के दौरान पंखे को सेवा, समर्पण और पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। पंखा दान को माना गया है महादानशास्त्रों में ज्येष्ठ माह की तपती गर्मी में पंखा दान करना बेहद पुण्यकारी बताया गया है। विशेष रूप से बांस का पंखा दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जरूरतमंदों को राहत मिलती है। इसी वजह से वट सावित्री व्रत की पूजा के बाद महिलाएं पंखा दान करने की परंपरा निभाती हैं। बांस को माना जाता है वंश वृद्धि का प्रतीकहिंदू धर्म में बांस को शुभ और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए बांस से बने पंखे का उपयोग केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा माना जाता है।

Vat Savitri Vrat 2026: घर के पास वट वृक्ष नहीं? जानिए आसान पूजा विधि

नई दिल्ली। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वट वृक्ष के नीचे ही यमराज से वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण ज्येष्ठ अमावस्या के दिन बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा विशेष रूप से की जाती है। इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। घर के पास बरगद का पेड़ न हो तो क्या करें?आजकल शहरों और हाईराइज सोसायटियों में बरगद के पेड़ आसानी से नहीं मिलते। ऐसे में महिलाएं पूजा को लेकर परेशान हो जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आसपास वट वृक्ष न हो तो व्रत से एक दिन पहले बरगद की छोटी टहनी लाकर उसे गमले में स्थापित किया जा सकता है। इसके बाद उसी टहनी के पास देवी सावित्री, सत्यवान और यमराज की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधिपूर्वक पूजा की जा सकती है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है। ऐसे करें वट सावित्री पूजापूजा के दौरान सबसे पहले वट वृक्ष या उसकी टहनी को जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद रोली, हल्दी, अक्षत और फूल चढ़ाएं। फिर कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें और पति की लंबी आयु की कामना करें। पूजा के बाद वट सावित्री व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है। पूजा के समय जरूर बोलें यह मंत्रबरगद की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है-“मम सौभाग्यं देहि, आयुष्यम् आरोग्यं देहि मे।पतिसुखं च देहि त्वं, वटवृक्ष नमोऽस्तु ते॥” मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

देशभर में आज शनि जयंती की धूम… जानिए साढ़ेसाती-ढैय्या से मुक्ति के उपाय

नई दिल्ली। आज ज्येष्ठ मास (Jyeshtha month) की अमावस्या (Amavasya) है और आज के ही दिन शनि जयंती भी है। देशभर में आज शनि जयंती (Shani Jayanti 2026) धूमधाम से मनाई जा रही है। इस अवसर पर शनि मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही मंदिर परिसर में यज्ञ अनुष्ठान का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां डालीं। भक्तों ने न्याय के देवता शनि देव को सरसों का तेल और काले तिल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। इसी के साथ, बट सावित्री पर्व भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में शनि देव (Shani Dev) को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है. मान्यता है कि आज ही के दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म हुआ था. आज शनिवार का दिन होने के कारण इस जयंती का महत्व अनंत गुना बढ़ गया है, क्योंकि शनिवार स्वयं शनि देव को समर्पित है. 1. आज का शुभ मुहूर्त (Shani Jayanti 2026 Muhurat)आज 16 मई को पूजा के लिए कई शुभ संयोग बन रहे हैं. ज्योतिष गणना के अनुसार अमावस्या तिथि का विवरण इस प्रकार है:– अमावस्या तिथि का आरंभ: 15 मई 2026 को दोपहर से. – अमावस्या तिथि का समापन: आज 16 मई 2026 को शाम 05:40 बजे तक. – अमृत काल (पूजा के लिए श्रेष्ठ): सुबह 09:15 से 10:45 तक. – संध्या काल पूजा: शाम 06:30 से रात 08:30 तक (शनि देव की पूजा सूर्यास्त के बाद विशेष फलदायी होती है. 2. शनि जयंती पूजा विधिआज के दिन शनि देव की कृपा पाने के लिए भक्त इन चरणों का पालन करें.– ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: आज सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी या घर के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. – संकल्प: हाथ में जल लेकर शनि देव के व्रत या विशेष पूजा का संकल्प लें. – मंदिर दर्शन: पास के शनि मंदिर जाएं. यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर के पश्चिम कोने में एक चौकी पर काला कपड़ा बिछाकर शनि देव की यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें. – तैल अभिषेक: शनि देव की शिला या प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करें. ध्यान रहे कि तेल चढ़ाते समय उनकी आंखों में न देखें, बल्कि चरणों की ओर दृष्टि रखें. – नैवेद्य: उन्हें नीले फूल, काले तिल, अक्षत और भोग में इमरती या काली उड़द की खिचड़ी अर्पित करें. – मंत्र जाप: आज कम से कम 108 बार “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” इस मंत्र का जाप करें. 3. शनि दोष से मुक्ति के अचूक उपाय (Effective Remedies)अगर आपकी कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष है, तो आज 16 मई को ये उपाय जरूर करें. – पीपल के पेड़ की पूजा: आज शाम पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें. – छाया दान: एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें, फिर उस तेल को दान कर दें या मंदिर में रख आएं. – हनुमान जी की भक्ति: शनि देव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वह उनके भक्तों को परेशान नहीं करेंगे. इसलिए आज हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें. 4. क्या दान करें? (Donation Guide)आज के दिन दान का फल कई जन्मों तक मिलता है. इन वस्तुओं का दान करना शुभ है. – काले वस्त्र और छाता. – लोहे के बर्तन या जूते-चप्पल.– काली उड़द की दाल और काले तिल.– जरूरतमंदों और कुष्ठ रोगियों को भोजन कराना. 5. राशि अनुसार विशेष लाभ (Zodiac Insights)आज का दिन विशेष रूप से कुंभ, मकर और मीन राशि (साढ़ेसाती के प्रभाव वाली), कर्क और वृश्चिक राशि (ढैय्या के प्रभाव वाली) के जातकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इन राशियों के जातकों को आज सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए ताकि शनि देव के प्रतिकूल प्रभाव कम हो सकें.

शनि गोचर से बड़ा बदलाव: इन राशियों पर बरसेगी कृपा, बन सकता है धन लाभ

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में शनि को न्याय और कर्म का ग्रह माना जाता है, जो धीरे-धीरे लेकिन गहरा प्रभाव डालता है। 16 मई 2026 को शनि रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जो बुध ग्रह का नक्षत्र माना जाता है और धन, बुद्धि तथा समृद्धि से जुड़ा हुआ है।ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह गोचर आईटी, बैंकिंग, मैनेजमेंट और तकनीकी क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। साथ ही रोजगार और व्यापार के क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। वृषभ राशि (Taurus): आर्थिक मजबूती और करियर ग्रोथवृषभ राशि के जातकों के लिए यह गोचर स्थिरता और आर्थिक सुधार के संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिल सकती है। व्यापार में रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है और नई साझेदारियों से लाभ हो सकता है। मिथुन राशि (Gemini): नए अवसरों का द्वार खुलेगामिथुन राशि के लिए यह समय करियर में बदलाव और नई नौकरी के अवसर लेकर आ सकता है। मीडिया, टेक्नोलॉजी और कम्युनिकेशन से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में सुधार और आय के नए स्रोत बनने के संकेत हैं। सिंह राशि (Leo): प्रतिष्ठा और सफलता में वृद्धिसिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर करियर में मजबूती लेकर आ सकता है। रुके हुए कार्यों में गति आएगी और कार्यस्थल पर सम्मान बढ़ेगा। व्यापार में लाभ और निवेश से अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। तुला राशि (Libra): संतुलन और आर्थिक सुधारतुला राशि के लोगों के लिए यह समय स्थिरता और संतुलन का संकेत दे रहा है। नौकरी में पदोन्नति और व्यापार में नई डील मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और मानसिक तनाव में कमी आने के योग हैं। मकर राशि (Capricorn): करियर में बड़ी उपलब्धियांमकर राशि के लिए यह गोचर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी में सम्मान, रुका हुआ धन वापस मिलने और व्यापार में विस्तार के संकेत हैं। आईटी और फाइनेंस सेक्टर से जुड़े लोगों के लिए यह समय विशेष रूप से लाभकारी रह सकता है। शनि का यह नक्षत्र गोचर कई राशियों के लिए करियर, धन और सामाजिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की कुंडली और कर्मों पर भी निर्भर करते हैं, इसलिए निर्णय सोच-समझकर लेना ही बेहतर माना जाता है।

शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी

नई दिल्ली । शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। शनि देव को कर्मफलदाता कहा जाता है, जो व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनिवार व्रत का उद्देश्य जीवन में शांति, स्थिरता और समृद्धि प्राप्त करना होता है। ज्योतिष के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती का प्रभाव होता है, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। शनिवार व्रत की विधि और नियमशनिवार व्रत की शुरुआत सूर्योदय से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन काले या नीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा में शनिदेव को काले तिल, काली उड़द दाल, सरसों का तेल और काले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कुछ भक्त पीपल वृक्ष की पूजा भी करते हैं, जिसमें दीपक जलाकर धागा बांधने की परंपरा है। व्रत के दौरान कई लोग दिनभर उपवास रखते हैं और सूर्यास्त के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। शनिवार व्रत के प्रमुख लाभशनिवार व्रत के कई आध्यात्मिक और व्यावहारिक लाभ बताए गए हैं। यह व्रत शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक माना जाता है। इस व्रत से व्यक्ति में अनुशासन, संयम और आत्म-नियंत्रण बढ़ता है। मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार और कार्यों में सफलता मिलने की भी मान्यता है। दान और सेवा का विशेष महत्वशनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन काले तिल, उड़द दाल, तेल, लोहे की वस्तुएं और काले कपड़ों का दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा जरूरतमंदों की सेवा और गरीबों को भोजन कराना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का श्रेष्ठ उपाय माना गया है। हनुमान जी और पीपल पूजा का महत्वमान्यता है कि शनिदेव की कृपा पाने के लिए हनुमान जी की पूजा भी अत्यंत लाभकारी होती है। इसके साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना और उसकी परिक्रमा करना शनि दोष को शांत करने में सहायक माना जाता है। शनिवार व्रत का आध्यात्मिक महत्वशनिवार व्रत केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने का माध्यम माना जाता है। यह व्रत व्यक्ति को आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से शनिदेव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

मेष राशि का आज का दिन (16 मई 2026): मिले-जुले परिणाम, धैर्य से बनेंगे काम

नई दिल्ली । आज का दिन मेष राशि के जातकों के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। ग्रहों की स्थिति संकेत दे रही है कि आपको आज हर काम में सोच-समझकर कदम बढ़ाने की जरूरत है। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि धैर्य से किए गए काम अच्छे परिणाम दे सकते हैं। करियर और नौकरीकार्यस्थल पर आज कुछ बाधाएं आ सकती हैं। किसी सहकर्मी के साथ मतभेद होने की संभावना है, इसलिए वाणी पर नियंत्रण रखें। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम को समय पर पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। हालांकि दिन के दूसरे हिस्से में स्थितियां थोड़ी बेहतर होती नजर आएंगी और रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। आर्थिक स्थितिआर्थिक मामलों में आज सतर्क रहने की जरूरत है। अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे बजट बिगड़ सकता है। किसी भी बड़े निवेश या लेन-देन से पहले अच्छी तरह विचार करना जरूरी होगा। धन प्राप्ति के नए स्रोत अभी धीमे रह सकते हैं, इसलिए फिजूलखर्ची से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा।  पारिवारिक और प्रेम जीवनपरिवार में छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव की स्थिति बन सकती है, लेकिन बातचीत से समस्या का समाधान संभव है। रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए आपको धैर्य और समझदारी से काम लेना होगा। प्रेम संबंधों में भी आज भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, इसलिए किसी भी बात को बढ़ाने से बचें। स्वास्थ्यसेहत के मामले में आज थोड़ा ध्यान रखने की आवश्यकता है। थकान, सिरदर्द या मानसिक तनाव महसूस हो सकता है। काम के बीच में आराम जरूर करें और पर्याप्त पानी पिएं। बाहर के खाने से परहेज करना बेहतर रहेगा।  उपायआज हनुमान जी को लाल फूल चढ़ाएं और “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 108 बार जप करें। इससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होगी। कुल मिलाकर, मेष राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य से थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन धैर्य, संयम और सही निर्णय आपको सफलता की ओर ले जाएंगे।

शनिवार व्रत के जरूरी नियम: शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही विधि

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय के देवता और कर्मफलदाता माना गया है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार के दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में चल रही बाधाएं कम होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। लेकिन यह व्रत तभी पूर्ण फल देता है जब इसके नियमों का सही तरीके से पालन किया जाए। शनिवार व्रत के महत्वपूर्ण नियशनिवार व्रत रखने वाले साधक को कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। व्रत के दौरान तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही किसी भी व्यक्ति का अपमान या बुरा बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि शनिदेव कर्मों के आधार पर ही फल देते हैं। व्रत के दिन अन्न का सेवन न करने की परंपरा भी कई जगहों पर निभाई जाती है। व्रत समाप्ति यानी पारण के समय खिचड़ी और काली उड़द दाल का सेवन शुभ माना गया है। दान और सेवा का विशेष महत्वशनिवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा अनुसार काले तिल, लोहे की वस्तुएं, कंबल, जूते-चप्पल और धन का दान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है। गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का एक श्रेष्ठ उपाय माना गया है। पूजा विधि और मंत्र जापशनिवार के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद शनिदेव की पूजा करनी चाहिए। पूजा में शनि देव को काले तिल, फूल, धूप, दीप और सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। पूजा के दौरान “ॐ शं शनैश्चराय नमः” और “शनि मंत्र” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद शनि चालीसा और आरती करने से पूजा पूर्ण फल देती है। शनि दोष से मुक्ति के विशेष उपायज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही हो तो शनिवार के दिन शनि कवच का पाठ करना लाभकारी माना गया है। इसके साथ ही लगातार आठ शनिवार तक सरसों का तेल शनिदेव को अर्पित करने से शनि दोष के प्रभाव में कमी आने की मान्यता है। शनिवार व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अनुशासन, संयम और कर्म सुधार का प्रतीक माना जाता है। यदि श्रद्धा और नियमों के साथ इस व्रत का पालन किया जाए तो जीवन में स्थिरता, सफलता और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

शनिवार व्रत के असरदार उपाय, शनि देव की कृपा पाने के लिए जानें सही तरीका

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित होता है। शनि कर्मों के अनुसार फल देते हैं, इसलिए इस दिन की गई पूजा और व्रत जीवन की बाधाओं को कम करने में मदद करता है। माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से शनिवार व्रत करता है, उसके कार्यों में रुकावटें कम होती हैं और भाग्य का साथ मिलने लगता है। शनिवार व्रत का आसान उपाय (सबसे असरदार तरीका)शनिवार के दिन एक बेहद सरल लेकिन प्रभावशाली उपाय बताया जाता है: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलानाकैसे करें:शनिवार सुबह या शाम पीपल के पेड़ के पास जाएंसरसों के तेल का दीपक जलाएंउसमें एक काले तिल डाल दें“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जप करेंपेड़ की 7 बार परिक्रमा करें  शनिवार व्रत में क्या करें?काले कपड़े या गहरे रंग के वस्त्र पहनेंशनि मंदिर में तेल चढ़ाएंजरूरतमंदों को काले तिल, कंबल या भोजन दान करेंहनुमान चालीसा का पाठ करें (शनि देव प्रसन्न होते हैं)दिनभर संयम और अनुशासन बनाए रखें क्या नहीं करना चाहिएझूठ बोलने और विवाद से बचेंमांसाहार और शराब से दूर रहेंकिसी का अपमान न करेंक्रोध और जल्दबाजी से बचें शनिवार व्रत से मिलने वाले लाभनौकरी और व्यवसाय में स्थिरताकोर्ट-कचहरी के मामलों में राहतआर्थिक परेशानियों में कमीमानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धिशनि दोष और साढ़ेसाती के प्रभाव में कमी शनिवार व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन और सकारात्मक कर्मों का प्रतीक है। यदि इसे श्रद्धा और सही विधि से किया जाए, तो जीवन में धीरे-धीरे बाधाएं कम होकर सफलता के रास्ते खुलने लगते हैं।

अधिकमास 2026 की शुरुआत: विवाह और मुंडन पर विराम, पूजा-पाठ रहेगा फलदायी

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार ज्येष्ठ मास में ही अधिकमास लग रहा है, जिसके कारण यह महीना सामान्य 30 दिनों का न होकर लगभग 60 दिनों तक चलेगा। 16 मई तक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष रहेगा और 17 मई से अधिकमास की शुरुआत होगी। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय में किए गए धार्मिक कार्य कई गुना फल देते हैं। अधिकमास 2026 की तारीखें प्रारंभ: 17 मई 2026समाप्ति: 15 जून 2026 सामान्य ज्येष्ठ मास: 22 मई से 29 जून 2026 विशेष स्थिति: दोनों मास एक-दूसरे के साथ ओवरलैप करेंगे यह वर्ष 13 महीनों का माना जाएगा (हिंदू पंचांग अनुसार) कौन से कार्य रहेंगे वर्जित? अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से “मलमास” भी कहा जाता है, इसलिए इस अवधि में कुछ मांगलिक कार्य नहीं किए जाते:विवाह संस्कारगृह प्रवेशमुंडनजनेऊ संस्कारनया व्यापार या शुभ शुरुआतमान्यता है कि इस समय किए गए शुभ कार्यों का अपेक्षित फल नहीं मिलता।  अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?इस पवित्र महीने में धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है: पूजा-पाठ और मंत्र जापभगवान विष्णु की आराधनासत्यनारायण कथा“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र जापश्रीमद्भागवत और रामायण पाठ  दान-पुण्यअनाज, कपड़े और धन का दानगरीबों और जरूरतमंदों की मददमंदिरों में दानगायों को भोजन कराना विशेष धार्मिक कार्यतीर्थ स्नानशिवलिंग पर अभिषेकयज्ञ और अनुष्ठानब्रजभूमि और तीर्थ स्थलों की यात्रा अधिकमास का धार्मिक महत्मान्यता है कि सौर और चंद्र कैलेंडर के अंतर को संतुलित करने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी कारण इसे अधिकमास कहा जाता है। कथा के अनुसार, जब महीनों का बंटवारा हुआ तो अधिकमास को स्थान नहीं मिला, तब भगवान विष्णु ने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम देकर अपना प्रिय मास घोषित किया। अधिकमास 2026 आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण समय है। यह अवधि भले ही मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित हो, लेकिन पूजा, तप, दान और सेवा के लिए इसे सबसे शुभ माना गया है। जो लोग इस दौरान भक्ति और संयम से जीवन व्यतीत करते हैं, उन्हें विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है।

शनिवार की सुबह करें ये 3 काम, दूर होंगी परेशानियां और बढ़ेगी सफलता

नई दिल्ली । शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन सुबह कुछ सरल उपाय करने से जीवन में चल रही रुकावटें कम होती हैं और रुके हुए कामों में गति आने लगती है।  1. घर के मुख्य द्वार की साफ-सफाई करेंवास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है।अगर यह जगह साफ और व्यवस्थित रहती है तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। क्या करें:सुबह उठकर दरवाजे की अच्छे से सफाई करेंपानी छिड़ककर हल्के कपड़े से पोछा लगाएंचाहें तो हल्दी या कुमकुम से शुभ चिन्ह बनाएं  2. पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएशनिवार को पीपल के पेड़ का विशेष महत्व माना जाता है। क्या करें:स्नान के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाएंदीपक जलाते समय मन शांत रखें और अच्छी कामना करेंयदि पेड़ न मिले तो घर के मंदिर में दीपक जला सकते हैं  3. घर के कोनों से बेकार सामान हटाएंघर के कोनों में जमा कबाड़ और पुरानी चीजें नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं। क्या करें:टूटे-फूटे सामान को हटा देंकोनों की अच्छे से सफाई करेंघर को खुला और व्यवस्थित रखेंइससे घर हल्का और सकारात्मक महसूस होता है। शनिवार की सुबह किए गए ये छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। साफ-सफाई, सकारात्मक सोच और श्रद्धा के साथ किए गए ये काम घर में शांति और स्थिरता लाने में मदद करते हैं।