17 अप्रैल का राशिफल: जानें कैसा रहेगा आज आपका दिन, किसे मिलेगा लाभ-किसे रहना होगा सावधान

नई दिल्ली । आज 17 अप्रैल है और दिन शुक्रवार है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र है, जिसे धन, वाहन, वैवाहिक सुख और स्त्री तत्व से जुड़ा माना जाता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर राशिफल का आकलन किया जाता है। इसी क्रम में 17 अप्रैल 2026 का दिन कुछ राशियों के लिए शुभ तो कुछ के लिए सामान्य या सावधानी भरा रह सकता है। आइए जानें मेष से मीन तक सभी राशियों का हाल- मेष राशि मेष राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। आपका मिलनसार स्वभाव लोगों को प्रभावित करेगा और अचानक धन लाभ के योग बन सकते हैं। घर से जुड़े कार्यों में रुचि बढ़ेगी, हालांकि परिवार में हल्की नोकझोंक संभव है। सामाजिक कार्यों में भागीदारी बढ़ेगी और जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। वृषभ राशि वृषभ राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। व्यक्तित्व प्रभावशाली रहेगा, लेकिन कार्यस्थल पर सावधानी जरूरी है। पुराने उधार चुकाने और घरेलू काम पूरे करने के लिए दिन अनुकूल है। आर्थिक रूप से अच्छी खबर मिल सकती है और स्वास्थ्य के लिए नई शुरुआत लाभकारी होगी। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। काम का दबाव थकान दे सकता है, लेकिन आय में वृद्धि के संकेत हैं। संतान से जुड़ी शुभ सूचना मिल सकती है। पुराने मित्रों से मुलाकात खुशी देगी, हालांकि अपेक्षाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। प्रेम जीवन अच्छा रहेगा। कर्क राशि कर्क राशि के लिए दिन सामान्य से बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और ध्यान-योग से लाभ मिलेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है। सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी और परिवार में सुखद माहौल रहेगा। सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए दिन संतुलित और आरामदायक रहेगा। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा और भाई-बहनों का सहयोग मिलेगा। किसी सामाजिक आयोजन में शामिल हो सकते हैं। नए कार्य की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है। कन्या राशि कन्या राशि वालों को आज सावधानी रखनी होगी। व्यवहार में संयम जरूरी है, नहीं तो रिश्तों में तनाव आ सकता है। आर्थिक लेन-देन में सतर्क रहें। स्वास्थ्य और विवादों से दूरी बनाए रखना लाभकारी रहेगा। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए दिन लाभदायक रहेगा। निवेश से फायदा मिल सकता है और व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। नए आइडिया सफल होंगे और प्रॉपर्टी से जुड़े कार्य आगे बढ़ सकते हैं। दोस्तों का सहयोग मिलेगा।वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के लिए दिन अच्छा रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा और रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। परिवार के साथ समय बितेगा और नई योजनाएं बन सकती हैं।धनु राशि धनु राशि वालों के लिए दिन प्रगति देने वाला रहेगा। आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा, लेकिन सेहत का ध्यान रखें। मकर राशि मकर राशि वालों के लिए दिन मेहनत का फल देने वाला रहेगा। नौकरी और व्यवसाय में लाभ के संकेत हैं। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा, जबकि प्रेम जीवन सुखद रहेगा। कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। दोस्तों के साथ समय बिताकर मन प्रसन्न रहेगा। करियर में मित्रों का सहयोग मिलेगा, हालांकि परिवार में हल्की चिंता रह सकती है। मीन राशि मीन राशि वालों को आज सावधानी रखनी होगी। कार्यस्थल पर सतर्क रहें और अनावश्यक विवादों से बचें। खर्च बढ़ सकते हैं, लेकिन परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताकर मानसिक सुकून मिलेगा। प्रेम जीवन में उतार-चढ़ाव संभव है।
धार्मिक आस्था का पावन पर्व अक्षय तृतीया पर मंदिरों में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब और विशेष परंपराएं

नई दिल्ली । सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत पवित्र और शुभ तिथि माना जाता है जिसे अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाले पुण्य का प्रतीक कहा गया है। यह तिथि वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है और मान्यता है कि इस दिन किए गए दान, पुण्य और शुभ कार्यों का फल अक्षय रूप से प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दिन पूरे 24 घंटे को शुभ मुहूर्त माना जाता है और किसी विशेष समय की आवश्यकता नहीं पड़ती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन नए कार्यों की शुरुआत, विवाह, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन से कई महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं और परंपराओं की शुरुआत भी होती है, जिनमें चार धाम यात्रा का शुभारंभ प्रमुख है। गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं, जबकि केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम भी इसी शुभ अवसर पर भक्तों के लिए दर्शन हेतु खुलते हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध रथ यात्रा की तैयारियों की शुरुआत भी अक्षय तृतीया से ही मानी जाती है। इसी दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के तीन विशाल रथों का निर्माण कार्य विधिवत रूप से प्रारंभ होता है। मंदिर के पुजारी भगवान को माला अर्पित कर रथ निर्माण की परंपरा का शुभारंभ करते हैं, जो आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का स्वरूप लेती है। वृंदावन में अक्षय तृतीया का विशेष महत्व देखने को मिलता है। यहां बांके बिहारी मंदिर में भगवान के चरण कमलों के दर्शन वर्ष में केवल इसी दिन भक्तों को होते हैं। इसके अलावा मंदिरों में फूलों और चंदन से विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिससे पूरे वातावरण में भक्ति और उल्लास का माहौल बन जाता है। दक्षिण भारत में भी इस पर्व की अनूठी परंपराएं देखने को मिलती हैं। आंध्र प्रदेश के सिंहाचलम मंदिर में इस दिन भगवान वराह नरसिंह पर लगी चंदन की परत हटाकर उनके वास्तविक स्वरूप के दर्शन भक्तों को कराए जाते हैं। वहीं तमिलनाडु के कई विष्णु मंदिरों में गरुड़ वाहन पर भव्य शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं। ओडिशा के रेमुना मंदिर में भगवान क्षीरचोरा गोपीनाथ को चंदन का लेप लगाकर गर्मी से राहत देने की परंपरा निभाई जाती है। यह आयोजन भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया का संबंध कई पौराणिक घटनाओं से भी जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था, गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, महाभारत की रचना शुरू हुई थी और भगवान परशुराम का अवतार भी इसी दिन माना जाता है। साथ ही माता अन्नपूर्णा का प्राकट्य और कुबेर को धन के देवता का स्थान भी इसी तिथि से जुड़ा हुआ बताया जाता है। इस दिन सोना, हल्दी, पीली सरसों, रूई और कौड़ी जैसी वस्तुओं की खरीद को शुभ माना जाता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, दान और सत्कर्म कर जीवन में सुख, समृद्धि और अक्षय पुण्य की कामना करते हैं। अक्षय तृतीया केवल एक पर्व नहीं बल्कि आस्था, परंपरा और शुभता का अद्भुत संगम माना जाता है जो भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
अमावस्या के दिन लाल वस्तुओं, गुड़ और अनाज का दान करने से ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव समाप्त होकर मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

नई दिल्ली :आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से वर्ष 2026 की चैत्र अमावस्या अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रही है। इस विशिष्ट तिथि पर ग्रहों के राजा सूर्य और मन के कारक चंद्रमा एक साथ मेष राशि में विराजमान होकर एक दुर्लभ युति का निर्माण कर रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और चंद्रमा के इस मिलन को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है, विशेषकर जब यह मेष जैसी ऊर्जावान राशि में घटित हो रहा हो। इस खगोलीय घटना के प्रभाव से न केवल चराचर जगत में ऊर्जा का संचार होगा, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में पितृ दोष से मुक्ति और संचित पापों के शमन के लिए भी यह समय सर्वोत्तम माना जा रहा है। ग्रहों का महामिलन और आध्यात्मिक महत्वशास्त्रों के अनुसार अमावस्या की तिथि पितरों को समर्पित होती है और मेष राशि में इस युति के होने से दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के पश्चात अपनी सामर्थ्य अनुसार दान करने की प्राचीन परंपरा रही है। मेष राशि अग्नि तत्व की राशि है और इसके स्वामी मंगल हैं, इसलिए इस दौरान लाल रंग की वस्तुओं, जैसे मसूर की दाल, तांबा या लाल वस्त्रों का दान विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन निष्काम भाव से जरूरतमंदों की सहायता करता है, उसके जीवन से मानसिक अशांति और कार्यक्षेत्र में आ रही बाधाएं स्वतः ही समाप्त होने लगती हैं। दान की महिमा और सुख-समृद्धि के उपायइस विशिष्ट योग के दौरान गुड़ और गेहूं का दान करने से कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है, जिससे समाज में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। वहीं चंद्रमा की शांति के लिए दूध, चावल या चांदी का दान करना उत्तम रहता है, जो मानसिक स्थिरता और पारिवारिक सुख-शांति में वृद्धि करता है। विद्वानों का मत है कि अमावस्या पर किया गया तर्पण और दान न केवल पूर्वजों को तृप्त करता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सौभाग्य के द्वार खोलता है। विशेष रूप से इस वर्ष मेष राशि की युति आत्म-साक्षात्कार और नई शुरुआत के लिए एक सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर रही है। नकारात्मकता का नाश और पुण्य की प्राप्तिधार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे दीप प्रज्वलित करना और विशेष उपासना करना कष्टों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। चूंकि मेष राशि चक्र की प्रथम राशि है, इसलिए इस युति के दौरान किया गया संकल्प और दान पूरे वर्ष के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। इस समय काल में सात्विकता बनाए रखना और वाणी पर संयम रखना अनिवार्य बताया गया है। दान की प्रक्रिया में स्वच्छता और श्रद्धा का होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि बिना भाव के किया गया दान पूर्ण फल प्रदान नहीं करता है। जीव सेवा से संवरेगा भविष्यअमावस्या के इस पावन अवसर पर चींटियों को आटा डालना और पक्षियों को दाना खिलाना भी विशेष पुण्यकारी माना गया है। प्रकृति और जीव-जंतुओं की सेवा का यह मार्ग व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक ले जाता है। कुल मिलाकर यह समय आत्म-शुद्धि और परोपकार के माध्यम से अपने भाग्य को संवारने का एक अनमोल अवसर है। जो लोग लंबे समय से आर्थिक तंगी या स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए मेष राशि की यह सूर्य-चंद्र युति और अमावस्या का विधान एक नई आशा की किरण लेकर आया है।
48 घंटे का चतुर्ग्रही योग आज से शुरू, इन राशि वालों को होगी तरक्की, मिलेगा धन लाभ

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब एक ही राशि में चार ग्रह एक साथ स्थित होते हैं, तो चतुर्ग्रही योग बनता है, जिसे बेहद प्रभावशाली माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक 16 अप्रैल से 17 अप्रैल के बीच ऐसा ही खास संयोग बन रहा है, जो करीब 48 घंटे तक सक्रिय रहेगा। इसका असर सभी 12 राशियों पर देखने को मिलेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इस दौरान मेष, मिथुन, सिंह और धनु राशि के जातकों के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है। धन, करियर और भाग्य से जुड़े मामलों में सकारात्मक बदलाव संभव हैं। साथ ही इस अवधि में मां लक्ष्मी और कुबेर देव की कृपा भी इन राशियों पर बनी रह सकती है। चतुर्ग्रही योग का असरचतुर्ग्रही राजयोग का प्रभाव पूरी तरह ग्रहों की स्थिति और व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। यह योग कभी अत्यंत शुभ तो कभी सामान्य फल भी दे सकता है, लेकिन इस बार यह कई लोगों के लिए उन्नति के नए अवसर लेकर आ सकता है। मेष राशिमेष राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं और पहले की तुलना में वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। रुका हुआ पैसा मिलने की संभावना है और व्यापार में नए मौके सामने आ सकते हैं। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए यह अवधि निवेश के लिहाज से फायदेमंद रह सकती है। धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात आगे बढ़ने में सहायक हो सकती है। सिंह राशिसिंह राशि के लोगों के लिए यह योग प्रतिष्ठा और सम्मान बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी और धन लाभ के कई अवसर मिल सकते हैं। विदेश से जुड़े कार्यों में सफलता और पैतृक संपत्ति से लाभ के संकेत हैं। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में सराहना मिलेगी और पदोन्नति के योग बन सकते हैं। यदि कोई कानूनी मामला चल रहा है, तो उसमें राहत मिलने की संभावना है। साथ ही पुराने कर्ज से मुक्ति और आय में वृद्धि के संकेत हैं।
आज का राशिफल 16 अप्रैल 2026: मिथुन और मीन राशि को मिलेगा आर्थिक लाभ

नई दिल्ली। 16 अप्रैल 2026 को ग्रहों की विशेष चाल और चंद्रमा का मेष राशि में गोचर मिलकर कई राशियों के लिए नए अवसर और आर्थिक उतार-चढ़ाव के संकेत दे रहे हैं। इस दिन सूर्य और शुक्र की युति जहां कुछ राशियों के लिए लाभदायक साबित होगी, वहीं कुछ को खर्च और सावधानी की जरूरत भी रहेगी। ग्रहों की स्थिति का प्रभावआज चंद्रमा मेष राशि में सूर्य के साथ युति बना रहा है, जिससे आत्मविश्वास और नई शुरुआत के अवसर बढ़ सकते हैं। वहीं एकादश और दशम भाव की सक्रियता आर्थिक लाभ के योग बना रही है। दूसरी ओर, अष्टम और द्वादश भाव के प्रभाव से अनचाहे खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए वित्तीय मामलों में सतर्कता जरूरी है। मेष राशि आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ने की संभावना है। निवेश से बचें और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखें। करियर: काम की गति धीमी रह सकती है, कोई बड़ा निर्णय फिलहाल टालना बेहतर रहेगा। वृषभ राशि आर्थिक स्थिति: आय बढ़ सकती है लेकिन खर्च भी साथ बढ़ेंगे। संतुलन जरूरी है। करियर: कार्यस्थल पर दबाव रहेगा, लेकिन नए अवसर भी मिल सकते हैं। मिथुन राशि (लाभकारी संकेत) आर्थिक स्थिति: आर्थिक लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं। संपर्कों से फायदा मिलेगा। करियर: जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, मेहनत से पहचान मिलेगी। कर्क राशि आर्थिक स्थिति: खर्च बढ़ सकते हैं, सावधानी जरूरी। करियर: पद और जिम्मेदारी बढ़ने के संकेत हैं। सिंह राशि आर्थिक स्थिति: अनिश्चितता रहेगी, निवेश से बचें। करियर: अचानक बदलाव संभव हैं, धैर्य रखें। कन्या राशि आर्थिक स्थिति: स्थिति स्थिर रहेगी लेकिन अचानक खर्च संभव है। करियर: काम में सराहना मिलेगी। तुला राशि आर्थिक स्थिति: सामान्य स्थिति, खर्च पर नियंत्रण रखें। करियर: जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। वृश्चिक राशि आर्थिक स्थिति: जोखिम से बचें, खर्च बढ़ सकते हैं। करियर: काम का दबाव अधिक रहेगा। धनु राशि आर्थिक स्थिति: घर संबंधी खर्च बढ़ सकते हैं। करियर: ध्यान भटक सकता है, सतर्क रहें। मकर राशि आर्थिक स्थिति: आय-व्यय में उतार-चढ़ाव रहेगा। करियर: मेहनत से ही सफलता मिलेगी। कुंभ राशि आर्थिक स्थिति: खर्च पर नियंत्रण जरूरी है। करियर: बातचीत और कम्युनिकेशन से लाभ मिलेगा। मीन राशि (सबसे शुभ संकेत) आर्थिक स्थिति: आय बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं, आर्थिक उन्नति के योग। करियर: थोड़ी उलझन के बावजूद स्थिर प्रगति के संकेत।
श्रीशैलम का रहस्यमयी मंदिर: जहां ज्योतिर्लिंग बदलता है रंग और दिव्य सर्प करता है सुरक्षा

नई दिल्ली । भारत के प्राचीन मंदिरों में कई ऐसे स्थान हैं जो रहस्यों और आस्था से भरे हुए हैं। ऐसा ही एक अद्भुत मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में स्थित है, जिसे श्री भ्रामरांबा मल्लिकार्जुन स्वामी मंदिर कहा जाता है। यह पवित्र धाम नल्लमाला की पहाड़ियों और कृष्णा नदी के किनारे बसा हुआ है। यह स्थान ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। यहां भगवान शिव को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग और माता शक्ति को भ्रामरांबा शक्ति पीठ के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहां पुरुष और स्त्री ऊर्जा का दिव्य संगम देखने को मिलता है, जो इस स्थान को और भी विशेष बनाता है। ज्योतिर्लिंग का बदलता रंग श्रीशैलम के इस पवित्र ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा जाता है कि यह दिन के अलग-अलग समय पर अपना रंग बदलता है। सुबह यह हल्का सफेद दिखाई देता है, दोपहर में पीला और शाम को इसमें लालिमा झलकती है। लोककथाओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने वनवास के दौरान यहां पांच गुप्त शिवलिंगों की स्थापना की थी।मल्लिकार्जुन नाम की पौराणिक कथा मल्लिकार्जुन नाम के पीछे एक रोचक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि देवी पार्वती ने शिवलिंग पर मल्लिका चमेली के फूल अर्पित किए थे, जिससे वह शिवलिंग सुरक्षित रहा और भगवान शिव प्रकट हुए। तभी से भगवान को मल्लिकार्जुन नाम से जाना जाता है और उन्हें चमेली के फूल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।दिव्य सर्प करता है मंदिर की रक्षा लोक मान्यताओं के अनुसार 16वीं सदी से एक दिव्य नाग अंपला इस मंदिर की रक्षा करता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह सर्प अदृश्य रूप में मंदिर की परिक्रमा करता है और भक्तों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है। इसे नाग देवता का स्वरूप माना जाता है। दक्षिण कैलाश के रूप में प्रसिद्ध धाम प्राचीन ग्रंथों में इस पवित्र स्थल को दक्षिण कैलाश के नाम से वर्णित किया गया है। एक मान्यता यह भी है कि माता पार्वती ने यहां भौंरे का रूप धारण कर तपस्या की थी, जिसके कारण उन्हें भ्रामरांबा नाम से पूजा जाता है। साथ ही एक लोककथा यह भी प्रचलित है कि मंदिर के प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश एक अदृश्य लेखा-जोखा रखते हैं, जिसमें हर भक्त के कर्म दर्ज होते हैं। मान्यता है कि यहां साधना करने से व्यक्ति की चंद्र-शक्ति और सूर्य-ऊर्जा में संतुलन आता है और जीवन में आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
वैशाख अमावस्या पर रहेगा पंचक का प्रभाव, रखें विशेष सावधानी, भूलकर भी न करें ये काम

नई दिल्ली। अमावस्या तिथि पितरों की पूजा और आत्मिक शुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन स्नान और दान करने से पुण्य लाभ प्राप्त होता है। लेकिन इस बार वैशाख अमावस्या पर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, जिससे यह समय ज्योतिषीय दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना जा रहा है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान की गई गलतियां जीवन में बाधाएं, अशांति और परेशानियां बढ़ा सकती हैं। 17 अप्रैल को अमावस्या, पहले से चल रहे हैं पंचक 17 अप्रैल 2026 को वैशाख अमावस्या मनाई जाएगी। पंचक 13 अप्रैल 2026 की तड़के सुबह से शुरू होकर 17 अप्रैल को दोपहर 12:02 बजे समाप्त होंगे। ऐसे में अमावस्या का स्नान-दान और पितृ कर्म पंचक के प्रभाव में संपन्न होंगे।इन कार्यों से बचना माना गया आवश्यक ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कुछ कार्यों से बचना बेहद जरूरी है। जैसे कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या जनेऊ जैसे मांगलिक कार्य टालने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा दक्षिण दिशा की यात्रा से बचना भी शुभ माना गया है।लकड़ी, निर्माण और खरीदारी में बरतें सावधानी पंचक के दौरान लकड़ी या ज्वलनशील वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा पलंग या बिस्तर जैसी वस्तुएं खरीदना भी अशुभ माना जाता है। इसी तरह घर के निर्माण की शुरुआत या छत डालने का काम भी इस समय नहीं करना चाहिए। रात के समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह अमावस्या की रात को नकारात्मक शक्तियों की सक्रियता की मान्यता के चलते सुनसान जगहों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है। साथ ही बुजुर्गों और पितरों के सम्मान का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है, क्योंकि इस दिन इसका उल्लंघन अत्यंत अशुभ माना जाता है।शुभ फल पाने के लिए किए जाने वाले उपाय इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना और गंगाजल का छिड़काव करना भी सकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से बचाव के उपाय के रूप में बताया गया है।
आज का राशिफल: 15 अप्रैल को इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, हर काम में सफलता

नई दिल्ली। 15 अप्रैल का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। वैशाख माह की द्वितीया तिथि, विशाखा नक्षत्और सिद्धि योग के संयोग के कारण इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई राशियों के लिए भाग्यवृद्धि का संकेत दे रही है। मीन लग्न की कुंडली में शुक्र, बुध, शनि और राहु की युति विशेष प्रभाव उत्पन्न कर रही है, जबकि सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा तुला राशि में स्थित हैं। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार यह दिन पांच राशियों के लिए अत्यंत शुभ और लाभकारी साबित हो सकता है। मेष राशि: आत्मविश्वास और धन लाभ के मजबूत योगमेष राशि के जातकों के लिए 15 अप्रैल का दिन बेहद शुभ रहने वाला है। आत्मविश्वास में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिलेगा और धन लाभ के नए स्रोत बन सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतोष बढ़ेगा। नौकरी और व्यापार दोनों क्षेत्रों में प्रगति के संकेत हैं। मिथुन राशि: नए संपर्क और लाभ के अवसर बढ़ेंगेमिथुन राशि के लोगों के लिए यह दिन उपलब्धियों से भरा रहेगा। सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्र में नए संपर्क बनेंगे, जो भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में आपकी पहचान मजबूत होगी। आर्थिक रूप से लाभ के अवसर बढ़ेंगे और धन संचय की स्थिति बेहतर होगी। आत्मविश्वास में वृद्धि के साथ आप अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ेंगे। सिंह राशि: मान-सम्मान और अचानक लाभ के संकेतसिंह राशि के जातकों के लिए यह दिन बेहद अनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर प्राप्त होंगे और कोई नई शुरुआत हो सकती है। अचानक धन लाभ की संभावनाएं बन रही हैं। पद-प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि होगी। परिवार के साथ समय आनंदपूर्ण रहेगा और मन प्रसन्न रहेगा। कार्यों में सफलता मिलने से उत्साह बढ़ेगा। मकर राशि: करियर में बड़ी उपलब्धि और प्रमोशन के योगमकर राशि वालों के लिए 15 अप्रैल का दिन महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। व्यापार और नौकरी दोनों में बड़ी उपलब्धियां मिलने के संकेत हैं। नई योजनाएं लाभकारी सिद्ध होंगी और व्यवसाय में विस्तार संभव है। नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि या प्रमोशन मिल सकता है। विचारों को सही तरीके से प्रस्तुत करने में सफलता मिलेगी, जिससे आपकी छवि मजबूत होगी। कुंभ राशि: तकनीकी क्षेत्र में सफलता और आर्थिक लाभकुंभ राशि के जातकों के लिए यह दिन बेहद शुभ रहेगा। करियर में तेजी से प्रगति देखने को मिलेगी और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ेंगे। तकनीकी और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में सफलता मिलने की संभावना है। नई योजनाएं शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल रहेगा। व्यापार में लाभ और निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं। 15 अप्रैल का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई राशियों के लिए सौभाग्य लेकर आ रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति विशेष रूप से मेष, मिथुन, सिंह, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए प्रगति, लाभ और सफलता के अवसर प्रदान कर सकती है। सही निर्णय और सकारात्मक सोच इस दिन को और भी फलदायी बना सकती है।
अक्षय तृतीया पर करें ये अचूक उपाय घर में स्थायी लक्ष्मी वास और बढ़ता रहेगा धन

नई दिल्ली । अक्षय तृतीया हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और स्वयंसिद्ध मुहूर्त माना जाता है इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी क्षय नहीं होता और वह निरंतर बढ़ता रहता है वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया उन्नीस अप्रैल को मनाई जाएगी इस बार का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इस दिन कृतिका नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस योग में किए गए उपाय कई गुना फल देने वाले होते हैं और धन समृद्धि के नए द्वार खोलते हैं धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए यदि कुछ विशेष वस्तुएं तिजोरी या धन स्थान में रखी जाएं तो घर में स्थायी रूप से समृद्धि का वास होता है और आर्थिक समस्याएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं इस दिन किया गया छोटा सा उपाय भी जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकता है सबसे पहले पीली कौड़ियों का उपाय अत्यंत प्रभावी माना जाता है पीली कौड़ियां मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय होती हैं पांच पीली कौड़ियों को पीले रेशमी कपड़े में केसर की कुछ पत्तियों और एक चांदी के सिक्के के साथ बांधकर एक छोटी पोटली तैयार करें इस पोटली की पूजा करें और इसे श्रद्धा पूर्वक तिजोरी में रख दें ऐसा करने से धन आकर्षण बढ़ता है और आय के स्रोत मजबूत होते हैं दूसरा उपाय दक्षिणावर्ती शंख का है यह शंख समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है इसे गंगाजल और केसर से शुद्ध करके पूजा स्थान या तिजोरी में स्थापित करना चाहिए मान्यता है कि जिस घर में यह शंख स्थापित होता है वहां दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है तीसरा उपाय बहेड़ा वृक्ष की जड़ या पत्तों से जुड़ा है इसे अक्षय तृतीया के दिन घर लाकर गंगाजल से शुद्ध करें धूप दीप दिखाएं और लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या गल्ले में रख दें यह उपाय आर्थिक स्थिरता प्रदान करता है और धन वृद्धि में सहायक माना जाता है चौथा उपाय धनदा यंत्र या वृद्धि यंत्र की स्थापना का है इस दिन यंत्र को सामने रखकर श्री सूक्त का पाठ करने के बाद इसे व्यवसाय स्थल या धन रखने के स्थान पर स्थापित करें यह यंत्र सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है और नए आर्थिक अवसर प्रदान करता है पांचवां उपाय श्रीफल यानी नारियल से जुड़ा है एक छोटा श्रीफल लेकर उसे लाल कपड़े में लपेटें उस पर सिंदूर कपूर और लौंग अर्पित करें धूप दीप दिखाकर तिजोरी में रख दें यह उपाय नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और घर में मां लक्ष्मी के स्थायी वास का प्रतीक माना जाता है अक्षय तृतीया का यह पावन दिन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है बल्कि यह जीवन में समृद्धि और सकारात्मक बदलाव का अवसर भी प्रदान करता है सही श्रद्धा और विधि से किए गए उपाय जीवन में धन वैभव और शांति लेकर आते हैं
budhpradosh vrat 2026 : 15 अप्रैल 2026 बुध प्रदोष व्रत, पर शिव आराधना से मिल सकता है धन लाभ और उन्नति का वरदान

budhpradosh vrat 2026 : नई दिल्ली । 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत का अत्यंत विशेष संयोग बन रहा है। यह दिन बुधवार को पड़ने के कारण बुध प्रदोष कहलाएगा। वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस दिन रात के समय प्रभावी रहेगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस अवसर पर ब्रह्म योग और इंद्र योग का दुर्लभ मेल बन रहा है। यह संयोग धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है और शिव आराधना के लिए उत्तम फलदायी माना जाता है। इस दिन बनने वाला ब्रह्म योग दोपहर तक रहेगा और इसे आध्यात्मिक साधना तथा मन की शांति के लिए विशेष फल देने वाला माना गया है। इसके बाद इंद्र योग का निर्माण होगा जिसे कार्य सिद्धि और सफलता का कारक कहा जाता है। ऐसे में इस दिन किया गया शिव पूजन जीवन में स्थिरता और प्रगति का मार्ग खोल सकता है। विशेषकर व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह दिन लाभ और उन्नति का संकेत माना जा रहा है। बुध प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की उपासना प्रदोष काल में करने का विधान है। सूर्यास्त के समय स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर घी का दीपक जलाना चाहिए। भक्त को भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद शिवलिंग का अभिषेक शुद्ध जल कच्चा दूध और गंगाजल से करना चाहिए। यह प्रक्रिया मन को शुद्ध करती है और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। पूजन के दौरान शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धतूरा और सफेद पुष्प भी अर्पित किए जाते हैं। इस समय निरंतर मन में ओम नमः शिवाय का जाप करना चाहिए। ऐसा करने से मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है और घर में सुख समृद्धि का वातावरण बनता है। शिव पूजा के साथ माता पार्वती की आराधना करने से पारिवारिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। घर में शांति बनी रहती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। पूजा के अंत में आरती करनी चाहिए और किसी भी त्रुटि के लिए भगवान शिव से क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए। शांत और श्रद्धा भाव से की गई यह पूजा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली मानी जाती है। इस विशेष बुध प्रदोष व्रत पर ब्रह्म और इंद्र योग का संयोग इसे और भी अधिक फलदायी बना रहा है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में समृद्धि के नए द्वार खोल सकती है और रुके हुए कार्यों में सफलता दिला सकती है।