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Shiv Puja Tips: सोमवार को कैसे करें शिवजी की पूजा, मिलेगा विशेष फल

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। शिव को “भोलेनाथ” कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सरल भक्ति से भी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। एक लोटा जल, बेलपत्र और सच्चे मन से की गई पूजा से ही महादेव कृपा बरसाते हैं।  ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि भक्त अपनी राशि के अनुसार शिव पूजा करें तो उसका प्रभाव और भी अधिक शुभ माना जाता है। इससे न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में बाधाएं भी कम हो सकती हैं। राशि अनुसार शिव पूजा विधि- मेष राशिमेष जातक तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और लाल चंदन मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करें। बेलपत्र पर “श्रीराम” लिखकर अर्पित करना शुभ माना जाता है। वृषभ राशिवृषभ जातक दूध, दही और शक्कर से शिव अभिषेक करें। सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करें। मिथुन राशिगन्ने के रस या शहद से शिवलिंग का अभिषेक करें। इससे साधना में सफलता मिलने की मान्यता है। कर्क राशिकच्चे दूध, दही, घी और मिश्री से अभिषेक करें। सफेद पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें। सिंह राशिगुड़ मिश्रित जल और शुद्ध घी से शिव अभिषेक करें। यह सौभाग्य बढ़ाने वाला माना जाता है। कन्या राशिभांग, पान, शमीपत्र और बेलपत्र अर्पित करें और विधिवत पूजा करें। तुला राशिदही, शहद या गन्ने के रस से अभिषेक करें और सुगंधित पुष्प चढ़ाएं। वृश्चिक राशिदूध, शक्कर और शहद मिलाकर अभिषेक करें। लाल पुष्प और बेलपत्र अर्पित करें। धनु राशिकेसर या हल्दी मिले दूध से अभिषेक करें। पीले फूल और फल चढ़ाएं। मकर राशिगंगाजल अर्पित करें और नीले पुष्प चढ़ाकर रुद्राक्ष से मंत्र जप करें। कुंभ राशितिल या बादाम के तेल से अभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का जप करें। मीन राशिकेसर मिश्रित दूध और जल से अभिषेक करें। पीले फूल और फल अर्पित करें। सोमवार को की गई शिव आराधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति ला सकती है। यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक राशि अनुसार पूजा की जाए तो यह साधना और भी अधिक फलदायी मानी जाती है।

सोमवारी शिव आराधना: जल से लेकर पंचामृत तक, शिवभक्ति से बदल सकता है भाग्य का प्रवाह

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है। इस दिन की गई पूजा-अर्चना को अत्यंत शुभ और शीघ्र फल देने वाली माना जाता है। श्रद्धालु मानते हैं कि महादेव अत्यंत सरल स्वभाव के देवता हैं, जो केवल सच्चे भाव और श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। यही कारण है कि शिव उपासना में जटिल विधियों की बजाय शुद्धता और भक्ति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण साधना मानी जाती है, जिससे जीवन के कष्टों का निवारण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।  पंचामृत और पवित्र जल से अभिषेक का महत्शिव पूजन में जल और पंचामृत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल, स्वच्छ जल, दूध, दही, शहद, चीनी और घी से अभिषेक करते हैं, जिसे पंचामृत कहा जाता है। मान्यता है कि पंचामृत से किया गया अभिषेक न केवल आध्यात्मिक शुद्धि देता है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। सफेद चंदन का लेपन मानसिक शांति और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त के जीवन में संतुलन लाने में सहायक होता है। बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्तों का विशेष महत्वभगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय माना गया है। ऐसी मान्यता है कि तीन पत्तियों वाला बेलपत्र अर्पित करने से त्रिदेवों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसके साथ ही धतूरा, आंकड़े के फूल और शमी के पत्ते भी शिव पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। ये सभी सामग्री शिव के त्याग, तप और वैराग्य भाव का प्रतीक मानी जाती हैं। भक्त इन वस्तुओं को अर्पित कर अपने जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने की कामना करते हैं। भोग और प्रसाद में सात्विकता का संदेशशिव पूजन में भोग का भी विशेष महत्व है। भक्त भगवान शिव को भांग, मिश्री और सात्विक मिठाइयों का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि सात्विक भोग से मन शुद्ध होता है और आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  भांग को शिव का प्रिय माना गया है, जो उनके वैराग्य और योगी स्वरूप का प्रतीक है। वहीं मिश्री और मिठाई भक्ति में मधुरता और सौम्यता का संदेश देती हैं। श्रद्धा और विश्वास से बदलता जीवनसोमवार को की गई शिव आराधना केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माध्यम है। जल, पंचामृत और पवित्र पत्तों से की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में संतुलन, सुख और समृद्धि लाने की मान्यता रखती है। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्चे मन से की गई शिव भक्ति से जीवन के सभी कष्ट धीरे-धीरे समाप्त हो जाते हैं और भाग्य का नया मार्ग खुलता है।

गंगा दशहरा 2026: जानें सही तिथि, ब्रह्म मुहूर्त और स्नान-दान का शुभ समय

नई दिल्ली। गंगा दशहरा हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व माना जाता है, जिसे हर वर्ष ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से धरती पर अवतरित हुई थीं, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आगमन होता है। पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि का आरंभ 25 मई 2026, सोमवार को सुबह 4 बजकर 28 मिनट पर होगा और यह तिथि 26 मई मंगलवार को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर इस वर्ष गंगा दशहरा 25 मई को ही मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु सुबह से ही पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं और भगवान शिव तथा मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को अत्यंत शुभ माना गया है। गंगा दशहरा 2026 पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 4 बजकर 30 मिनट से 5 बजकर 30 मिनट तक श्रेष्ठ रहेगा। इस अवधि में स्नान करने और दान देने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा भी सुबह के अन्य शुभ मुहूर्तों में स्नान-दान किया जा सकता है। इस पावन अवसर पर लोग गंगा स्नान के साथ-साथ जरूरतमंदों को जल, फल, वस्त्र और अन्न का दान करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि गंगा दशहरा के दिन किया गया छोटा सा पुण्य कार्य भी कई जन्मों के पापों को समाप्त करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि यह पर्व देशभर में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी माना जाता है, जो मनुष्य को सकारात्मक ऊर्जा और नए जीवन की दिशा प्रदान करता है।

घर का मुख्य द्वार: जहां छोटी-सी गलतियां रोक सकती हैं तरक्की, जानें वास्तु के जरूरी नियम

नई दिल्ली। घर का मुख्य द्वार वास्तु शास्त्र में सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है क्योंकि यहीं से सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। माना जाता है कि अगर घर के प्रवेश द्वार के आसपास गलत चीजें रखी जाएं तो इसका सीधा असर परिवार की तरक्की, सुख-शांति और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है। इसलिए वास्तु में मुख्य द्वार को साफ, खुला और रोशनी से भरपूर रखने की सलाह दी जाती है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, मुख्य द्वार पर कभी भी कूड़ा, टूटा-फूटा सामान या बेकार चीजें नहीं रखनी चाहिए। कई घरों में पुराने जूते-चप्पल या खराब सामान दरवाजे के पास रख दिया जाता है, जिसे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। इससे घर में तनाव और आर्थिक बाधाएं बढ़ सकती हैं, इसलिए ऐसे सामान को तुरंत हटा देना चाहिए। इसके अलावा, मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पलों का ढेर लगाना भी शुभ नहीं माना जाता है। इससे घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा बाधित होती है और वास्तु दोष उत्पन्न हो सकता है। जूतों को हमेशा एक निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रखना चाहिए ताकि घर का वातावरण साफ और संतुलित बना रहे। वास्तु के अनुसार, घर के प्रवेश द्वार पर सूखे या कांटेदार पौधे भी नहीं रखने चाहिए क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है। इनके स्थान पर हरे-भरे और खुशबूदार पौधे जैसे तुलसी रखना शुभ माना जाता है। साथ ही, मुख्य दरवाजे पर पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी है, क्योंकि अंधेरा नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर की सुख-समृद्धि पर असर डाल सकता है।

भुवनेश्वर: ‘मंदिरों का शहर’ जहां पत्थरों में सांस लेता है इतिहास और हर मोड़ पर झलकती है आस्था

नई दिल्ली। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर को भारत का “टेंपल सिटी ऑफ इंडिया” कहा जाता है, जहां हर मोड़ पर आस्था और इतिहास की झलक देखने को मिलती है। यह शहर अपने प्राचीन मंदिरों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के कारण दुनियाभर में प्रसिद्ध है, और यहां आने वाले पर्यटकों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव मिलता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, एक समय भुवनेश्वर में 2000 से भी अधिक मंदिर हुआ करते थे, हालांकि समय के साथ कई मंदिर नष्ट हो गए, लेकिन आज भी यहां 700 से ज्यादा प्राचीन मंदिर मौजूद हैं। इन मंदिरों में सबसे प्रमुख लिंगराज मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है और लगभग एक हजार साल पुराना माना जाता है। यह मंदिर कलिंग शैली की अद्भुत वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है, जिसकी ऊंची मीनारें और पत्थरों पर की गई नक्काशी लोगों को आकर्षित करती है। भुवनेश्वर सिर्फ मंदिरों का शहर ही नहीं, बल्कि यहां की रोजमर्रा की जिंदगी भी धार्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ी हुई है। सुबह की शुरुआत मंदिरों की घंटियों और भजनों से होती है, जबकि फूल, दीपक और पूजा सामग्री से जुड़ा स्थानीय कारोबार भी इसी आस्था पर आधारित है। यहां के त्योहार पूरे शहर को आध्यात्मिक रंग में रंग देते हैं और ओडिया व्यंजनों में भी धार्मिक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। आज भुवनेश्वर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, जहां नई इमारतें और बेहतर सुविधाएं विकसित हो रही हैं, लेकिन इसके बीच सदियों पुराने मंदिर आज भी अपनी पहचान बनाए हुए हैं। यही परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम भुवनेश्वर को एक खास और अद्वितीय शहर बनाता है, जहां हर आगंतुक इतिहास, संस्कृति और भक्ति का अनुभव एक साथ करता है।

भगवान शिव के गले में क्यों रहता है नाग, जानिए इस रहस्य से जुड़ी पौराणिक कथा?

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में भगवान शिव की छवि जितनी रहस्यमयी है, उतनी ही गहरी उनके प्रतीकों की भी मान्यता है। उनके गले में लिपटा हुआ नाग अक्सर लोगों के मन में सवाल खड़ा करता है कि आखिर भोलेनाथ ने डर और विष के प्रतीक माने जाने वाले सांप को अपने आभूषण के रूप में क्यों धारण किया। इसके पीछे केवल एक नहीं, बल्कि कई पौराणिक और आध्यात्मिक कारण बताए जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब वासुकी नाग को रस्सी बनाकर देवताओं और दानवों ने मिलकर मंथन किया था, तब यह घटना शिव और नागों के बीच गहरे संबंध की शुरुआत मानी जाती है। मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो पूरी सृष्टि संकट में आ गई। ऐसे समय में भगवान शिव ने उस विष को पीकर संसार की रक्षा की और उसे अपने कंठ में रोक लिया। इसी कारण उनका नाम नीलकंठ पड़ा। माना जाता है कि इसी घटना के बाद नागों की भक्ति और समर्पण शिव के प्रति और मजबूत हो गया। धार्मिक मान्यता यह भी कहती है कि भगवान शिव ने नाग को अपने गले में स्थान देकर यह संदेश दिया कि सृष्टि का हर जीव समान है, चाहे वह डरावना ही क्यों न लगे। सांप सामान्यतः भय और मृत्यु का प्रतीक माना जाता है, लेकिन शिव ने उसे अपनाकर यह सिद्ध किया कि सच्चा योगी वही है जो भय पर विजय पा ले। उनके लिए जीवन और मृत्यु दोनों समान हैं, इसलिए नाग उनके लिए आभूषण बन गया। आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो नाग को ऊर्जा और जागृति का प्रतीक माना जाता है। योग परंपरा में कुंडलिनी शक्ति को सर्प के रूप में दर्शाया जाता है, जो मानव शरीर में सुप्त अवस्था में रहती है। भगवान शिव को योग और ध्यान का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है, इसलिए उनके गले में नाग इस बात का संकेत है कि वे जाग्रत चेतना और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के स्वामी हैं। आज भी शिवभक्त सावन, महाशिवरात्रि और नाग पंचमी जैसे पर्वों पर शिव और नाग देवता की एक साथ पूजा करते हैं। शिव मंदिरों में शिवलिंग पर नाग की आकृति इस बात का प्रतीक है कि भगवान शिव अपने भक्तों को हर प्रकार के भय और संकट से मुक्ति दिलाते हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, संतुलन और निडरता का संदेश देता है, जो जीवन के हर पहलू में प्रेरणा बनकर सामने आता है।

Ravivar Ke Upay: सूर्यदेव की कृपा पाने के आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में रविवार का दिन Surya Dev को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और दरिद्रता दूर करने में सहायक होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव शक्ति, आत्मविश्वास और सम्मान के कारक माने जाते हैं। इसलिए रविवार की सुबह कुछ सरल उपाय करके उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। रविवार के 5 चमत्कारी उपाय- 1. सूर्य नमस्कार करेंसुबह उठकर सूर्य नमस्कार करने से शरीर स्वस्थ रहता है और सूर्य देव की कृपा मिलती है। इसे ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला उपाय माना जाता है। 2. सूर्य को अर्घ्य देंतांबे के लोटे में जल भरकर उसमें रोली, लाल फूल और चावल मिलाकर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। साथ ही इस मंत्र का जाप करें:ॐ सूर्याय नमःॐ आदित्याय नमःॐ वासुदेवाय नमः 3. दान करेंरविवार के दिन गुड़, चावल, तांबा या लाल वस्त्र का दान करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं और आर्थिक बाधाएं कम होती हैं। 4. लाल रंग का उपयोग करेंइस दिन लाल वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इससे आत्मबल बढ़ता है और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। 5. दीपक जलाएंघर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। रविवार के ये सरल उपाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं, बल्कि इन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रतीक भी माना जाता है।

Aaj Ka Rashifal 17 मई 2026: सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा दिन?

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 17 मई 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस दिन कुछ लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में लाभ मिलेगा, जबकि कुछ को धैर्य और सावधानी से आगे बढ़ने की सलाह दी गई है। मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए दिन सामान्य रूप से सकारात्मक रहेगा। पुराने रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं और कार्यस्थल पर मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। घर का माहौल शांत और सहयोगी रहेगा। आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिलेगा। वृषभ राशि वृषभ राशि वालों के खर्चों में वृद्धि हो सकती है। घरेलू जरूरतों पर अधिक धन खर्च होने की संभावना है। हालांकि नौकरी और व्यापार में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और लाभ के योग भी बन रहे हैं। मिथुन राशि मिथुन राशि के लिए दिन राहत देने वाला रहेगा। पुराने अटके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और नौकरी-व्यापार में प्रगति के संकेत हैं। थोड़ी थकान महसूस हो सकती है। कर्क राशि कर्क राशि के जातकों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पारिवारिक जीवन में खुशहाली रहेगी और मानसिक तनाव कम होगा। सिंह राशि सिंह राशि वालों को जल्दबाजी से बचना होगा। कार्यभार अधिक रह सकता है और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। पारिवारिक रिश्तों में संयम रखना जरूरी होगा। कन्या राशि कन्या राशि के लिए दिन शुभ संकेत दे रहा है। मेहनत का पूरा फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए दिन प्रगति लेकर आएगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और पारिवारिक सहयोग बना रहेगा। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों को धैर्य रखने की सलाह दी गई है। कार्यों में देरी हो सकती है और आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लेना होगा। धनु राशि धनु राशि वालों के लिए दिन अच्छा रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और नौकरी-व्यापार में लाभ के संकेत हैं। मानसिक तनाव कम होगा। मकर राशि मकर राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा। कार्यों में व्यस्तता रहेगी लेकिन धीरे-धीरे परिणाम मिलेंगे। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी होगा। कुंभ राशि कुंभ राशि के लिए समय बेहतर हो रहा है। मेहनत का फल मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। परिवार में खुशी का माहौल रहेगा। मीन राशि मीन राशि वालों को धैर्य रखने की जरूरत है। कार्यों में देरी हो सकती है और नौकरी में दबाव महसूस हो सकता है। खर्चों और रिश्तों में सावधानी बरतें।

शनि देव की कृपा से चमकेगी इन राशियों की किस्मत, बढ़ सकती है सैलेरी

नई दिल्ली। शनिवार, 16 मई 2026 को शनि जयंती और ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई राशियों के लिए शुभ संकेत दे रही है। जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का करियर, पैसा, प्रेम, स्वास्थ्य, शुभ रंग, शुभ अंक और उपाय। मेष राशिआज आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। नौकरी और व्यापार में नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और प्रेम संबंध मजबूत होंगे। आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं।शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 8उपाय: शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। वृषभ राशिपारिवारिक मामलों में धैर्य रखने की जरूरत होगी। कार्यक्षेत्र में जल्दबाजी नुकसान दे सकती है। प्रेम संबंधों में संवाद बनाए रखें। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी रहेगा।शुभ रंग: सफेदशुभ अंक: 6उपाय: पीपल के नीचे दीपक जलाएं। मिथुन राशिआज का दिन करियर और व्यापार के लिए बेहद शुभ रहेगा। आपकी बातचीत और बुद्धिमत्ता से लाभ मिलेगा। प्रेम जीवन में मिठास बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।शुभ रंग: हराशुभ अंक: 5उपाय: काले तिल का दान करें। कर्क राशिमानसिक तनाव थोड़ा परेशान कर सकता है, लेकिन परिवार का सहयोग मिलेगा। नौकरी में धैर्य बनाए रखें। रिश्तों में पारदर्शिता जरूरी होगी।शुभ रंग: सिल्वरशुभ अंक: 2उपाय: चंद्रमा को जल अर्पित करें। सिंह राशिछोटी बातों पर विवाद से बचें। करियर में सामान्य स्थिति रहेगी लेकिन समझदारी से काम लेने पर लाभ होगा। प्रेम जीवन में संयम जरूरी रहेगा।शुभ रंग: लालशुभ अंक: 9उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। कन्या राशिआज सफलता के अच्छे संकेत मिल रहे हैं। नौकरी और व्यापार में प्रशंसा मिलेगी। प्रेम जीवन में विश्वास और नजदीकियां बढ़ेंगी। स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा।शुभ रंग: हराशुभ अंक: 5उपाय: हरी मूंग का दान करें। तुला राशिपारिवारिक जीवन में सामंजस्य रहेगा। नए कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। प्रेम संबंध मजबूत होंगे और मानसिक शांति बनी रहेगी।शुभ रंग: सफेदशुभ अंक: 6उपाय: माता लक्ष्मी को सफेद फूल चढ़ाएं। वृश्चिक राशिआज बातचीत में संयम रखना जरूरी होगा। कार्यक्षेत्र में धीरे-धीरे प्रगति होगी। प्रेम संबंधों में खुलकर संवाद करें। तनाव से बचें।शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 7उपाय: शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। धनु राशिभावनात्मक उतार-चढ़ाव रह सकते हैं। किसी भी निर्णय में जल्दबाजी न करें। प्रेम संबंधों में विश्वास बनाए रखना जरूरी होगा।शुभ रंग: ग्रेशुभ अंक: 4उपाय: पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं। मकर राशिआज आत्मविश्वास और मानसिक शांति बनी रहेगी। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। परिवार और प्रेम जीवन दोनों में खुशियां रहेंगी।शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 8उपाय: काले कपड़े का दान करें।  कुंभ राशिनई पहचान और सम्मान मिलने के संकेत हैं। व्यापार और नौकरी में लाभ मिलेगा। प्रेम संबंधों में ईमानदारी रिश्तों को मजबूत करेगी।शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 4उपाय: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। मीन राशिभावनात्मक मामलों में धैर्य रखें। नौकरी और व्यापार में सोच-समझकर फैसले लें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें।शुभ रंग: हल्का नीलाशुभ अंक: 7उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें। किन राशियों पर रहेगी शनि देव की विशेष कृपा?आज मेष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए शनि जयंती बेहद शुभ मानी जा रही है। इन राशियों के लोगों को करियर, धन और सम्मान के मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

Adhik Maas 2026: पूजा-पाठ और दान का बढ़ेगा महत्व, मिलेगा विशेष फल

नई दिल्ली।  हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह में अधिकमास का संयोग बन रहा है। अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में अधिकमास को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?मान्यता है कि अधिकमास में जप, तप, दान, कथा, गीता पाठ, भजन-कीर्तन और तीर्थ यात्रा करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। इसी वजह से इस महीने आने वाले व्रत और त्योहारों का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। भक्त पूरे महीने भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। अधिकमास 2026 व्रत-त्योहार कैलेंडर17 मई – अधिकमास प्रारंभ19 मई – बड़ा मंगल20 मई – वरदा चतुर्थी21 मई – अधिक स्कंद षष्ठी, गुरु पुष्य नक्षत्र23 मई – अधिक मासिक दुर्गाष्टमी25 मई – गंगा दशहरा26 मई – बड़ा मंगल27 मई – अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी, पद्मिनी एकादशी28 मई – गुरु प्रदोष व्रत31 मई – अधिकमास पूर्णिमा व्रत3 जून – विभुवन संकष्टी चतुर्थी6 जून – मृत्यु पंचक8 जून – अधिक कालाष्टमी11 जून – परम एकादशी12 जून – शुक्र प्रदोष व्रत13 जून – अधिक मासिक शिवरात्रि15 जून – ज्येष्ठ अधिकमास अमावस्या, मिथुन संक्रांति, अधिकमास समाप्त अधिकमास में तीर्थ यात्रा का विशेष महत्वधार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिकमास आत्मचिंतन, साधना और भक्ति का समय माना जाता है। इस दौरान सांसारिक कार्यों से दूरी बनाकर ईश्वर भक्ति में मन लगाने की सलाह दी जाती है। पद्म पुराण के अनुसार इस महीने बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, द्वारका, वृंदावन, हरिद्वार और प्रयागराज जैसे तीर्थों की यात्रा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन दिनों करें भगवान विष्णु की पूजाअधिकमास में प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना गया है। यदि प्रतिदिन संभव न हो, तो पद्मिनी एकादशी, परम एकादशी, गुरु प्रदोष, पूर्णिमा और अमावस्या के दिन श्रीहरि की विशेष आराधना करनी चाहिए।