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भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के गुरुवार व्रत में जरूर करें ये काम, काम होंगे सफल

नई दिल्ली।गुरुवार का दिन भगवान श्रीहरि विष्णु और बृहस्पति देव को समर्पित होता है। इस दिन लोग पीले रंग के कपड़े पहनते हैं, बेसन से बनी चीज़ों का भोग लगाते हैं और व्रत रखते हैं। धर्म-शास्त्रों में कहा गया है कि सात consecutive गुरुवार व्रत करने से बृहस्पति ग्रह से जुड़े अशुभ फल दूर होते हैं और गुरु शुभ फल देने लगते हैं। कथाएक नगर में एक समृद्ध व्यापारी रहता था। वह जहाजों में माल भेजकर बहुत धन कमाता था और दान-पुण्य भी करता था। लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। एक बार व्यापारी जब व्यापार के लिए बाहर गया, तब बृहस्पति देव साधु वेश में उसकी पत्नी के पास आए और भिक्षा मांगी। पत्नी ने उन्हें अपमानित किया और कहा कि वह अपने धन को दान में नहीं देना चाहती। बृहस्पति देव ने उसे कई पुण्य उपाय सुझाए, लेकिन पत्नी ने उन्हें नहीं माना। बृहस्पति देव ने सलाह दी कि सात गुरुवार विशेष विधि से क्रियाएं करनी होंगी, जिससे उसका धन नष्ट हो जाएगा। पत्नी ने यही किया। केवल तीन गुरुवार बीतने पर सम्पूर्ण संपत्ति नष्ट हो गई और वह परलोक सिधार गई। व्यापारी जब वापस आया, तो उसने देखा कि सब कुछ नष्ट हो चुका है। उसने जंगल से लकड़ी काटकर बेचने का काम शुरू किया, ताकि अपनी पुत्री को जीवित रख सके। बृहस्पति देव का वरदानएक दिन व्यापारी बृहस्पतिवार को दुखी बैठा था, तभी बृहस्पति देव साधु रूप में प्रकट हुए। उन्होंने व्यापारी को गुरुवार के दिन दो पैसे के चने और गुड़ लेकर कथा पढ़ने और प्रसाद वितरित करने का निर्देश दिया। व्यापारी ने ऐसा किया और उसकी कठिनाइयाँ दूर होने लगीं। अगले गुरुवार को उसने कथा नहीं पढ़ी, और परिणामस्वरूप कुछ समस्याएँ फिर सामने आईं। राजा के यज्ञ के समय व्यापारी और उसकी पुत्री को गलत आरोप में कैद कर दिया गया। व्यापारी ने फिर गुरुवार की कथा पढ़कर प्रसाद वितरित किया, जिससे बृहस्पति देव प्रकट हुए और उनकी सभी परेशानियाँ दूर कर दीं। व्यापारी और उसकी पुत्री को मुक्त कर दिया गया और उन्हें आधा राज्य, विवाह हेतु उच्च कुल में दहेज़ और सम्मान मिला। बृहस्पतिवार व्रत का महत्वगुरुवार व्रत से बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं।सात गुरुवार व्रत करने से धन, स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख में वृद्धि होती है।व्रत के दौरान कथा पढ़ना और प्रसाद बांटना अत्यंत फलदायक है।पीले कपड़े पहनना और बेसन के व्यंजन चढ़ाना शुभ माना गया है। इस कथा से हमें यह संदेश मिलता है कि गुरु और भगवान का सम्मान करना चाहिए। व्रत और कथा से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है।

Budhwar Ka Vrat: गणेश जी की कृपा पाने के लिए अपनाएं सही नियम!

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में देवी-देवताओं की कृपा पाने के लिए पूजा के साथ-साथ व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है बुधवार का व्रत, जो Lord Ganesha और Budh Dev को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और विधि-विधान से यह व्रत करता है, उसे बुद्धि, विवेक, सफलता और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। खासकर करियर और कारोबार में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है। कब से शुरू करें बुधवार का व्रतधार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का व्रत किसी भी हिंदी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से शुरू करना शुभ होता है। यदि इस दिन बुध का नक्षत्र भी पड़ जाए तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। आमतौर पर यह व्रत 21 या 45 बुधवार तक किया जाता है। यदि किसी कारणवश व्रत बीच में छूट जाए, तो उसे बाद में पूरा करते हुए सही विधि से उद्यापन करना चाहिए। व्रत की विधि और पूजा का तरीकाबुधवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान और ध्यान करने के बाद Lord Ganesha और Budh Dev की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए हरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। गणेश जी को 21 गांठों वाली दूर्वा अर्पित करने से विशेष फल मिलता है। वहीं बुध देव को हरे वस्त्र, हरी मूंग या अन्य हरी वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जप करना और अंत में आरती करना जरूरी माना गया है। बुधवार व्रत का धार्मिक महत्वधार्मिक मान्यता है कि यह व्रत करने से साधक को बुद्धि, विद्या, विवेक और उत्तम स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। Lord Ganesha विघ्नहर्ता माने जाते हैं, इसलिए उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। वहीं Budh Dev की कृपा से व्यक्ति की वाणी, तर्कशक्ति और व्यापारिक समझ मजबूत होती है। इस व्रत से करियर और व्यवसाय में सफलता मिलने की भी मान्यता है। उद्यापन कैसे करेंजब व्रत की निर्धारित संख्या पूरी हो जाए, तो उसका विधि-विधान से उद्यापन करना चाहिए। उद्यापन के दिन प्रातः स्नान-ध्यान के बाद पूजा करें। मान्यता के अनुसार इस दिन बुध देव के मंत्र का कम से कम 19000 बार जप किया जाता है और अपामार्ग की लकड़ी से हवन किया जाता है। इसके बाद Lord Ganesha और Budh Dev की पूजा, कथा और आरती की जाती है। अंत में अपनी क्षमता अनुसार हरी वस्तुओं, अनाज या वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है। व्रत से जुड़ी सावधानियांव्रत के दौरान शुद्धता और नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। कड़वे या तामसिक भोजन से बचना चाहिए और मन में सकारात्मक भाव रखना चाहिए।

11 अप्रैल से मंगल और बुध की युति से इन राशियों की होगी तरक्की, बढ़ेगी आय, जानिए क्‍या होंगे लाभ?

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मंगल और बुध एक ही राशि में स्थित होते हैं, तो यह युति बहुत खास मानी जाती है। मंगल ऊर्जा, साहस और आत्मविश्वास का कारक है, जबकि बुध बुद्धि, संवाद और रणनीति का ग्रह। इन दोनों का संगम व्यक्ति की सोचने-समझने और स्मार्ट तरीके से काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह युति 11 अप्रैल 2026 को मीन राशि में बनेगी। मंगल पहले ही 2 अप्रैल को मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं, और बुध भी 11 अप्रैल को मीन राशि में आ जाएंगे। यह युति 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। ज्योतिषियों के अनुसार, इस दौरान कुछ राशियों को विशेष लाभ मिलने के संकेत हैं। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय पैसों और करियर के मामले में अनुकूल रहेगा। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे आपकी पहचान बढ़ेगी। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है। निवेश करने का समय अनुकूल रहेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात आपका दिन और बेहतर बना सकती है। मिथुन राशिमिथुन राशि वालों के लिए यह युति आर्थिक मजबूती और अवसर लेकर आएगी। धन में बढ़ोतरी के संकेत हैं और रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। नया काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल है। व्यवसाय में विस्तार और पार्टनरशिप से लाभ होने की संभावना है। नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। घर या वाहन खरीदने का विचार भी सफल हो सकता है। धनु राशिधनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और वित्तीय मामलों में फायदेमंद रहेगा। नौकरी में प्रमोशन या तरक्की के योग हैं। निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना है। 11 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच का समय आपके लिए नए अवसर और मनचाही नौकरी या नई शुरुआत के संकेत लेकर आएगा।

अक्षय तृतीया पर बनेगा खास संयोग, ‘अक्षय योग’ से इन राशियों पर होगी धन वर्षा

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ‘अक्षय योग’ को बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है। ‘अक्षय’ का अर्थ होता है-जो कभी समाप्त न हो, यानी इस योग में किए गए कार्यों का शुभ फल लंबे समय तक मिलता है। यह योग तब बनता है, जब सूर्य और चंद्रमा अपनी-अपनी उच्च राशियों में स्थित होते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में रहेंगे, जिससे यह विशेष योग बनेगा। ज्योतिषियों का मानना है कि इस संयोग से कई राशियों के जीवन में धन, सफलता और समृद्धि का प्रवेश होगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और आर्थिक स्थिति मजबूत बनेगी। आइए जानते हैं किन राशियों को मिलेगा इस शुभ योग का विशेष लाभ।मेष राशि (Aries)इस राशि के जातकों के लिए यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में लाभदायक साबित होंगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन के संकेत हैं, जबकि व्यापारियों को नए अवसर मिल सकते हैं। सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और निवेश में फायदा होने की संभावना है। वृषभ राशि (Taurus)वृषभ राशि वालों के लिए यह योग सुख-सुविधाओं में वृद्धि का संकेत दे रहा है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। घर, जमीन या वाहन खरीदने की इच्छा पूरी हो सकती है। परिवार का सहयोग मिलेगा और कार्यों में सफलता के योग बनेंगे। सिंह राशि (Leo)सिंह राशि के जातकों के लिए यह समय भाग्य का साथ लेकर आएगा। लंबे समय से अटके काम पूरे होंगे। व्यापार से जुड़े लोगों को विशेष लाभ मिल सकता है और कोई बड़ा अवसर हाथ लग सकता है, जो आगे चलकर लगातार फायदा देगा। वृश्चिक राशि (Scorpio)वृश्चिक राशि वालों के लिए यह अवधि आर्थिक दृष्टि से लाभकारी रहेगी। अचानक धन लाभ के संकेत हैं और पुराने निवेश से भी अच्छा रिटर्न मिल सकता है। विदेश यात्रा की योजना सफल हो सकती है। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई उपलब्धि मिलने के योग हैं, जिससे करियर में उन्नति होगी।

हनुमान जी को प्रसन्न करने का आसान उपाय मंगलवार व्रत के नियम और पूजन विधि जरूर जानें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन अत्यंत पवित्र और विशेष माना जाता है। यह दिन हनुमान जी को समर्पित होता है जिन्हें संकट मोचन और भक्तों के कष्ट हरने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा और नियमों के साथ मंगलवार का व्रत रखकर बजरंगबली की आराधना करता है उसके जीवन के सभी दुख और बाधाएं धीरे धीरे समाप्त हो जाती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंगलवार व्रत की महिमा केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह व्रत व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाता है मानसिक शक्ति प्रदान करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। विशेष रूप से जिन लोगों के जीवन में बार बार बाधाएं आती हैं उन्हें यह व्रत करने की सलाह दी जाती है। मंगलवार व्रत रखने के लिए कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी होता है। सबसे पहले साधक को प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा के समय यदि संभव हो तो लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए क्योंकि यह रंग हनुमान जी को प्रिय माना जाता है। पूजा के लिए हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान का चयन करें और लाल रंग के ऊनी आसन पर बैठकर साधना करें। पूजा करते समय साधक का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए क्योंकि इसे शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4 से 6 बजे के बीच पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा संध्या के समय प्रदोष काल में भी पूजा की जा सकती है। व्रत के दौरान खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और तामसिक चीजों से दूर रहना चाहिए। व्रत करने वाले व्यक्ति फलाहार कर सकते हैं और दिनभर संयम और सात्विकता बनाए रखना आवश्यक होता है। धूम्रपान और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए। कुछ विशेष नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना जरूरी है। जैसे महिलाओं को हनुमान जी को चोला अर्पित नहीं करना चाहिए और पूजा के दौरान हनुमान जी को चरणामृत से स्नान नहीं कराया जाता है। यह परंपराएं शास्त्रों में वर्णित हैं और इनका पालन करना शुभ माना जाता है। मंगलवार व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि अनुशासन और श्रद्धा का प्रतीक है। जब व्यक्ति पूरे मन से इस व्रत का पालन करता है तो उसे न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलते हैं। ऐसे में यदि आप भी मंगलवार का व्रत रखते हैं तो इन नियमों का पालन जरूर करें ताकि आपका व्रत पूर्ण और फलदायी बन सके।

आज का राशिफल 8 अप्रैल 2026: मेष से मीन राशि तक, जानें कल का दिन कैसा रहेगा

नई दिल्ली।आज आपकी फाइनेंशियल स्थिति मजबूत रहेगी। हेल्थ भी अच्छी बनी रहेगी। लव लाइफ का आनंद लें और पुराने मतभेदों को सुलझाएँ। कुल मिलाकर धन और सेहत दोनों ही पॉजिटिव रहेंगे। सिंह (Leo)आज आप अपनी काबिलियत साबित करने के लिए हर मौके का लाभ उठाएँ। रिलेशनशिप को रोमांचक और प्रोडक्टिव बनाए रखें। पॉजिटिव सोच से वर्क स्ट्रेस कम होगा और दिन बेहतर बीतेगा। कन्या (Virgo)आज का दिन आपके लिए खुशहाल पर्सनल और प्रोफेशनल रहेगा। ऑफिस में अपने सीनियर्स को परफॉर्मेंस से संतुष्ट रखें। हेल्थ सामान्य है, लेकिन खान-पान पर ध्यान देना जरूरी है। तुला (Libra)रिलेशन में पार्टनर के साथ असहमति सुलझाएँ। प्रोफेशनल नतीजे शानदार रहेंगे। पैसों को समझदारी से इन्वेस्ट करें। कोई बड़ी हेल्थ समस्या परेशान नहीं करेगी। वृश्चिक (Scorpio)नौकरी में जरूरी काम ध्यान से करें। पार्टनर के साथ समय बिताएँ। सही लाइफस्टाइल अपनाएँ और हेल्दी रहें। आज धन लाभ होगा। रिलेशन में अहंकार के लिए कोई जगह नहीं रहेगी। धनु (Sagittarius)आज रोमांस से जुड़े मामलों को संभालें। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में सावधानी बरतें। हेल्थ पर विशेष ध्यान दें। मकर (Capricorn)ऑफिस में आपका रवैया महत्वपूर्ण रहेगा। धन की कमी नहीं होगी। अधिक से अधिक सेविंग्स करने के विकल्प दिखेंगे। हेल्थ से समझौता न करें। कुंभ (Aquarius)रोमांस में संतुलन बनाएं। ऑफिस में नई जिम्मेदारियां लें। फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में सावधान रहें। प्रेम संबंध सफल रहेंगे और पार्टनर के लिए अपने जुनून को साबित करने के मौके मिलेंगे। मीन (Pisces)आज आपकी ईमानदारी का असर रोमांटिक रिश्तों पर पड़ेगा। काम की जगह चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहें। सुरक्षित पैसों के निवेश को प्राथमिकता दें।

गजकेसरी योग का बड़ा असर अक्षय तृतीया पर मेष से धनु तक धन सफलता और समृद्धि के खुलेंगे द्वार

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाला पावन पर्व अक्षय तृतीया इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा और इस बार इसका महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस दिन अत्यंत शुभ माने जाने वाला गजकेसरी योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को राजयोग के समान प्रभावशाली माना जाता है जो व्यक्ति के जीवन में धन समृद्धि और सफलता के नए द्वार खोल सकता है। ज्योतिष के अनुसार जब चंद्रमा और गुरु एक दूसरे से केंद्र स्थान में होते हैं तब यह विशेष योग बनता है। इस बार यह संयोग अक्षय तृतीया के दिन बन रहा है जिसे बेहद शुभ संकेत माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्य और निवेश अक्षय फल देते हैं यानी उनका लाभ लंबे समय तक बना रहता है। यही कारण है कि इस दिन सोना खरीदने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है और इसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस बार गजकेसरी योग का सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रभाव मेष तुला और धनु राशि के जातकों पर देखने को मिल सकता है। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं माना जा रहा है। लंबे समय से रुके हुए कामों में तेजी आ सकती है और नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह बेहद अनुकूल समय है। व्यापार से जुड़े लोगों को अचानक धन लाभ हो सकता है और मेहनत का पूरा फल मिलने की संभावना है। तुला राशि के जातकों के लिए यह योग सुख सुविधाओं और मान सम्मान में वृद्धि का संकेत दे रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छे अवसर मिल सकते हैं और जो लोग बदलाव की सोच रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत खुल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। वहीं धनु राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव सबसे अधिक देखा जा सकता है क्योंकि गुरु इस राशि के स्वामी माने जाते हैं। इस दौरान बौद्धिक क्षमता में वृद्धि हो सकती है और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है। आर्थिक दृष्टि से यह समय बेहद लाभकारी रहने की संभावना है और कर्ज से मुक्ति मिलने के संकेत भी मिल रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र के प्राचीन ग्रंथ बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में गजकेसरी योग का विस्तार से वर्णन किया गया है जिसमें बताया गया है कि यह योग व्यक्ति को हाथी जैसी शक्ति और सिंह जैसा साहस प्रदान करता है। वहीं फल दीपिका में भी उल्लेख मिलता है कि इस योग में किए गए कार्य लंबे समय तक शुभ फल देते हैं। कुल मिलाकर इस वर्ष की अक्षय तृतीया केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत खास मानी जा रही है। ऐसे में इस शुभ अवसर पर सही निर्णय और सकारात्मक प्रयास जीवन में नई दिशा दे सकते हैं और आने वाले समय को समृद्ध बना सकते हैं।

कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा। ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादकथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है। ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णुमहादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्यलंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मानचूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला। कालाष्टमी कब हैहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी। (Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)

हनुमान जी की पूजा: मंगलवार का महाउपाय और सरल उपाय

नई दिल्ली। हनुमान जी, जिन्हें राम भक्तों में बजरंगी या महाबली संकट मोचन के नाम से जाना जाता है, हिन्दू धर्म में शक्ति, बुद्धि और साहस के प्रतीक हैं। सनातन परंपरा में हनुमान साधना का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि उनकी कृपा से भय, रोग, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। मंगलवार को उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 1. हनुमान चालीसा का पाठहनुमान जी की महिमा का गुणगान करना उनके प्रसन्न होने का प्रमुख मार्ग है। मंगलवार को हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करने से: दुर्भाग्य दूर होता हैमानसिक शांति मिलती हैसौभाग्य और सफलता प्राप्त होती हैसाधक पर हर समय बजरंगी की कृपा बनी रहती हैचालीसा पढ़ते समय अपने मनोकामनाओं का ध्यान करें और पूरी श्रद्धा से पढ़ें। 2. सिंदूर का महाउपायहनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है। इसलिए मंगलवार की पूजा में उन्हें सिंदूर का चोला चढ़ाना विशेष फलदायी है।सिंदूर अर्पित करते समय मंत्र का उच्चारण करें: “सिंदूरं रक्तवर्णं च सिंदूरतिलकप्रिये, भक्तायन दत्तं मया देव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्” इस मंत्र का पाठ करते समय अपनी मनोकामनाओं को हृदय में संजोएं। मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर हनुमान जी सभी कष्ट दूर करते हैं और इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। 3. भोग और प्रसादहनुमान जी को भोग अर्पित करना भी उनकी प्रसन्नता का मार्ग है। मंगलवार को पूजा करते समय आप निम्न चीजें अर्पित कर सकते हैं: बूंदीलड्डूचूरमागुड़चनाये सामग्री बजरंगी जी को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। भोग अर्पित करते समय भक्तों को अपनी श्रद्धा और भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करना चाहिए। 4. साधारण नियम और मंत्रपूजा के समय स्वच्छ कपड़े पहनें और ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय श्रेष्ठ मानें।मंत्र जाप और भोग के साथ मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या नकारात्मकता न रखें।पूजा के बाद भोग का वितरण कर दें और शांति भाव बनाए रखें। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, सिंदूर का चोला अर्पित करना, प्रिय भोग चढ़ाना, और श्रद्धा भाव से साधना करना अत्यंत फलदायी है। इन उपायों से सभी कष्ट, भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता, सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

नई दिल्ली । राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी धाम भारत का एक अनोखा हनुमान मंदिर है यहां विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी-मूंछों वाली है जो पूरे देश में एकमात्र है यही वजह है कि लाखों भक्त सालाना यहां दर्शन करने आते हैं और मानते हैं कि सालासर बालाजी अपनी भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी करते हैं सालासर बालाजी धाम जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर आसोटा गांव के पास स्थित है यह मंदिर 19वीं शताब्दी में स्थापित हुआ और आज पूरे देश में प्रसिद्ध है यहाँ रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं खासतौर पर हनुमान जयंती और शरद पूर्णिमा के मेले में मंदिर में भक्तों की भीड़ हमेशा रहती है सालासर बालाजी की मूर्ति की खोज की कहानी भी बहुत रोचक है कहा जाता है कि साल 1811 में आसोटा गांव के किसान मोहनदास खेत में हल जोत रहे थे तभी हल किसी नुकीली चीज से टकराया जब उन्होंने खुदाई की तो उन्हें हनुमान जी की मूर्ति मिली मोहनदास उस समय दोपहर का भोजन चूरमा लेकर आए थे उन्होंने उसी चूरमा का भोग अर्पित कर मूर्ति की पूजा की और रात को उन्हें हनुमान जी का सपना आया सपने में हनुमान जी मोहनदास को दाढ़ी-मूंछों वाले रूप में दिखाई दिए उन्होंने मोहनदास को निर्देश दिया कि मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर वहीं स्थापित करें जहाँ बैल खुद रुक जाए मोहनदास ने वैसा ही किया और बैलगाड़ी वहीं रुकी जहाँ आज सालासर बालाजी धाम स्थित है चूंकि सपने में हनुमान जी दाढ़ी-मूंछों में दिखाई दिए इसलिए मोहनदास ने मूर्ति का शृंगार उसी रूप में किया यही कारण है कि सालासर बालाजी की मूर्ति पूरे देश में अनोखी मानी जाती है भारत के अधिकांश हनुमान मंदिरों में मूर्तियां युवा और बिना दाढ़ी-मूंछ वाली होती हैं लेकिन सालासर बालाजी इस नियम का अपवाद हैं उनकी दाढ़ी-मूंछ उन्हें प्रौढ़, गंभीर और संकट मोचन स्वरूप में प्रस्तुत करती है भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप से बालाजी अधिक शक्तिशाली और भक्तों के लिए तुरंत संकट मोचन बन जाते हैं सालासर बालाजी धाम में दो प्रमुख मेले लगते हैं पहला मेला हनुमान जयंती पर और दूसरा शरद पूर्णिमा पर इन मेलों में दूर-दूर से भक्त आते हैं यहाँ धार्मिक किताबें हनुमान जी के चित्र चूरमा प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध होती है मेले के दौरान मंदिर में भारी भीड़ लगती है सालासर बालाजी में नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर लाल कपड़े में नारियल बांधकर मंदिर परिसर के खेजड़ी पेड़ पर चढ़ाते हैं ये नारियल ना तो फेंके जाते हैं ना जलाए जाते हैं इन्हें मंदिर से करीब 11 किलोमीटर दूर मुरड़ाकिया गांव के खेत में गाड़ दिया जाता है यह परंपरा भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है सालासर बालाजी धाम भक्ति और विश्वास का केंद्र है यहाँ की दाढ़ी-मूंछ वाली मूर्ति भक्तों के हर संकट को दूर करती है और चूरमा प्रसाद हर भक्त के मन को शांति और विश्वास देता है यदि आप जीवन में किसी समस्या से गुजर रहे हैं तो सालासर बालाजी के दर्शन अवश्य करें