13 मई का दैनिक राशिफल: सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा भाग्य का साथ?

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल हर दिन का प्रभाव निर्धारित करती है। 13 मई 2026, बुधवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग-अलग परिस्थितियां लेकर आया है। कुछ लोगों के लिए यह दिन सफलता और खुशी का रहेगा, जबकि कुछ को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मेष राशि के जातकों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। प्रोफेशनल जीवन में दबाव के बावजूद आत्मविश्वास से फैसले लेने का समय है। प्रेम और आर्थिक मामलों में भी स्थिति मजबूत रहेगी। वृषभ राशि के लोगों के लिए लव लाइफ बेहतर रहने की संभावना है। पुराने मतभेद खत्म हो सकते हैं और करियर में भी प्रगति के संकेत मिलेंगे। स्वास्थ्य और धन दोनों सामान्य से अच्छे रहेंगे। मिथुन राशि वालों को रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। कार्यक्षेत्र में अच्छे परिणाम मिलेंगे और आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। कर्क राशि के जातकों के लिए व्यवसाय में लाभ के योग हैं, लेकिन प्रेम संबंधों में सावधानी जरूरी है। नौकरी में व्यवहार का विशेष ध्यान रखना होगा। सिंह राशि के लोगों के लिए प्रेम जीवन सुखद रहेगा और करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति भी अनुकूल रहेगी। कन्या राशि के जातकों की पुरानी समस्याएं सुलझ सकती हैं और कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन बेहतर रहेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। तुला राशि के लिए प्रेम जीवन अच्छा रहेगा, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी छोटी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। कार्यक्षेत्र में सफलता के योग हैं। वृश्चिक राशि के लिए दिन मिला-जुला रहेगा। प्रेम और करियर में सफलता मिलेगी, लेकिन आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव संभव है। धनु राशि के लोगों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। रिश्तों में सुधार होगा और आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।मकर राशि के जातकों को रिश्तों और कार्यस्थल दोनों जगह संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। कुंभ राशि वालों को करियर में शानदार प्रदर्शन के अवसर मिलेंगे। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी गई है। मीन राशि के लिए दिन सामान्य रहेगा। प्रेम जीवन और कार्यस्थल दोनों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। कुछ लोगों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर 13 मई का दिन कुछ राशियों के लिए अवसरों से भरा रहेगा, जबकि कुछ को धैर्य और सतर्कता से आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।
शनि गोचर 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का प्रवेश, राशियों पर कैसा पड़ेगा प्रभाव

नई दिल्ली। 17 मई 2026 को न्याय के देवता शनि मीन राशि के रेवती नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं। ज्योतिष शास्त्र में इसे एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है, क्योंकि शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा। यह गोचर करियर, धन, स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और सामाजिक स्थिति में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है। शनि गोचर 2026 का समय और महत्वशनि 17 मई 2026 को दोपहर करीब 2 बजकर 34 मिनट पर रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 9 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। रेवती नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध माना जाता है, इसलिए इस अवधि में बुद्धि, निर्णय क्षमता और संचार से जुड़े मामलों पर विशेष प्रभाव देखने को मिलेगा।ज्योतिष के अनुसार शनि कर्मों का फल देने वाला ग्रह है, इसलिए यह गोचर हर राशि के लिए “कर्म और परिणाम” की परीक्षा जैसा माना जा रहा है। किन राशियों के लिए रहेगा शुभ समय? वृषभ, मिथुन और कर्क राशिइन राशियों के लिए यह गोचर काफी लाभकारी माना जा रहा है। आय में वृद्धि के योग करियर और व्यवसाय में प्रगति रुके हुए कार्यों में सफलता सरकारी नौकरी और प्रमोशन के अवसर विशेष रूप से मिथुन राशि वालों के लिए यह समय मान-सम्मान और उन्नति लेकर आ सकता है। किन राशियों को रहना होगा सावधान? मेष और सिंह राशिइन राशियों के लिए यह समय कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है।अचानक खर्च बढ़नामानसिक तनाव और निर्णय में भ्रमकार्यों में रुकावटरिश्तों में उतार-चढ़ावसिंह राशि के जातकों को विशेष रूप से धन और स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। अन्य राशियों पर प्रभावकन्या राशि: नौकरी और करियर में सुधार के योग तुला राशि: प्रतिस्पर्धा में सफलता, लेकिन पारिवारिक तनाव संभव वृश्चिक राशि: शिक्षा और प्रेम जीवन में सुधार धनु राशि: संपत्ति और सुख-सुविधाओं में वृद्धि मकर राशि: मेहनत का अच्छा फल मिलेगा कुंभ राशि: आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ेंगे मीन राशि: आत्म-चिंतन और जिम्मेदारियों में वृद्धि, स्वास्थ्य का ध्यान जरूरी शनि गोचर का ज्योतिषीय महत्वशनि का रेवती नक्षत्र में गोचर केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि समाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी असर डाल सकता है। यह समय लोगों को अपने कर्म सुधारने, अनुशासन अपनाने और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सीख देता है।शनि गोचर 2026 एक ऐसा ज्योतिषीय परिवर्तन है जो हर राशि को किसी न किसी रूप में प्रभावित करेगा। कुछ राशियों के लिए यह सफलता और अवसर लेकर आएगा, तो कुछ के लिए यह आत्म-सुधार और सावधानी का समय होगा।ज्योतिष के अनुसार, इस अवधि में सही कर्म, संयम और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी मानी जाएगी।
2026 को लेकर भविष्यमालिका की भविष्यवाणी पर मचा बवाल: सोशल मीडिया दावों और वैश्विक हालातों के बीच बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली। सोशल मीडिया और कुछ अनौपचारिक रिपोर्ट्स में भविष्यमालिका की कथित भविष्यवाणियों को लेकर 2026-27 के दौरान बड़े वैश्विक बदलाव, आर्थिक संकट और युद्ध जैसी स्थितियों के दावे किए जा रहे हैं। इन दावों को हाल के अंतरराष्ट्रीय हालात और महंगाई जैसी आर्थिक चुनौतियों से जोड़कर वायरल किया जा रहा है, लेकिन इनकी कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि मौजूद नहीं है। वहीं भारत सरकार या प्रधानमंत्री की ओर से 2026 को लेकर सोने की खरीद, पेट्रोल-डीजल खर्च या घरेलू बचत जैसी किसी विशेष अपील का कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया गया है। ऐसे दावे अक्सर सोशल मीडिया पर संदर्भ से हटकर फैलाए जाते हैं, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। वर्तमान समय में दुनिया भर में महंगाई, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जरूर देखा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन्हें किसी “भविष्यवाणी” से जोड़कर देखना सही नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर ठोस नीतियों, युद्धों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर निर्भर करता है, न कि धार्मिक या पारंपरिक भविष्यवाणियों पर। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ऐसी भविष्यवाणियां अक्सर प्रतीकात्मक या आस्था पर आधारित होती हैं, जिनका उद्देश्य भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी करना नहीं होता। इसलिए इन्हें वास्तविक घटनाओं के रूप में प्रस्तुत करना गलत सूचना को बढ़ावा दे सकता है। फिलहाल यह पूरा मामला सोशल मीडिया दावों, धार्मिक मान्यताओं और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की चर्चाओं के बीच उलझा हुआ है, जिसकी सत्यता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
मंगलवार व्रत के नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा हनुमान जी का आशीर्वाद

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर बजरंगबली की पूजा करते हैं और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में शक्ति, साहस और सफलता लाता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्रत में नियमों का पालन न किया जाए तो उसका पूरा फल नष्ट भी हो सकता है। व्रत की सही विधि क्या है?व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से होती है। इसके बाद साफ लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। फिर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जप और मंगलवार व्रत कथा का पाठ करना जरूरी होता है। मंगलवार व्रत में जरूर बचें इन गलतियों सेधार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है:– व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया हैप्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिएमानसिक और शारीरिक पवित्रता बनाए रखना जरूरी हैव्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया हैदिनभर निराहार रहकर संयम रखना चाहिए शाम की पूजा के बाद ही गेहूं और गुड़ से बना सादा भोजन करना उचित माना जाता है, उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। आस्था और संयम का प्रतीक है मंगलवार व्रतमंगलवार व्रत केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा और नियमों के साथ हनुमान जी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से भय, संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मंगलवार के दिन करें हनुमान मंत्रों का जाप, हर संकट से मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली । मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होने और सुख-समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन हनुमान जी की उपासना करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ और विशेषकर लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए घर के ईशान कोण को साफ करके वहां हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं। इसके बाद दीपक जलाकर पुष्प, माला और लाल सिंदूर अर्पित किया जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। भोग के रूप में गुड़-चना और बूंदी चढ़ाने की परंपरा भी है। पूजा के दौरान हनुमान जी के विशेष मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। श्रद्धालु निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हैं, जिनमें शक्ति और संरक्षण का भाव निहित है- ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।इसके अलावा अन्य पवित्र मंत्रों का भी जाप किया जाता है, जिनसे मानसिक शांति और भय से मुक्ति मिलने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। मंगलवार को हनुमान जी को लाल सिंदूर और तिल का तेल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। लाल वस्त्र और लाल पुष्प भी उन्हें अत्यंत प्रिय होते हैं। इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा भक्त के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की भक्ति से व्यक्ति में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास का विकास होता है। मंगलवार का दिन उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है, जो भक्तों को हर प्रकार के संकट से उबारने की क्षमता रखता है।
वट सावित्री व्रत 2026: नए व्रतियों के लिए आसान पूजा विधि और जरूरी नियम

नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जिसमें सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे। इसी कारण यह व्रत वैवाहिक जीवन की मजबूती और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। यह तिथि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को पड़ रही है। अमावस्या तिथि का आरंभ सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा और यह देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा। जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है। इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर वट वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और कच्चा सूत बांधकर पूजा करती हैं। सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना इस व्रत का प्रमुख हिस्सा है। इसके बाद पति की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना की जाती है। पूजा के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जो अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर सौभाग्य योग और शोभन योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। वट सावित्री व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण को भी दर्शाता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वे पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा करें ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
कृतिका नक्षत्र में प्लूटो के प्रवेश से बदलेंगे इन राशियों के भाग्य, धन और सफलता के खुलेंगे नए रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 मई 2026 का दिन खास माना जा रहा है। आज सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर अरुण ग्रह यानी प्लूटो ने कृतिका नक्षत्र में प्रवेश किया है। प्लूटो बेहद धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, इसलिए इसका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह नक्षत्र परिवर्तन कई लोगों के जीवन में बड़े बदलाव, नए अवसर और अचानक मिलने वाली सफलताओं के संकेत दे सकता है। प्लूटो के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभावज्योतिष में प्लूटो को गहराई, परिवर्तन और छिपी शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। कृतिका नक्षत्र में इसका प्रवेश पुराने कार्यों के परिणाम सामने लाने और नई शुरुआत के अवसर पैदा करने वाला माना जा रहा है। खासकर उन लोगों को लाभ मिल सकता है जो लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। पुराने निवेश से फायदा मिलने और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। करियर में नई दिशा मिलने की संभावना भी है। सिंह राशिसिंह राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है। तुला राशितुला राशि के लोगों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नए अवसर मिलने और निवेश से लाभ होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश या नई जगह से जुड़े कामों में भी सफलता मिल सकती है। कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर करियर में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अचानक सफलता, आर्थिक मजबूती और नई योजनाओं में अच्छे परिणाम मिलने के संकेत हैं। इस दौरान क्या करेंज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस समय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करें और अचानक मिलने वाले अवसरों को नजरअंदाज न करें। सकारात्मक सोच बनाए रखना भी लाभकारी रहेगा।
आज ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल, जानिए हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली । आज 12 मई को ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी। इसलिए ज्येष्ठ के मंगलवार को विशेष रूप से बजरंगबली की पूजा का महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा-पाठ करने, दान देने और भंडारा करवाने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि इस बार बड़ा मंगल पंचक काल में पड़ रहा है, जिसके चलते कई लोग पूजा के शुभ समय और पंचक के प्रभाव को लेकर सवाल कर रहे हैं। पूजा का शुभ मुहूर्तदूसरे बड़े मंगल पर पूजा का शुभ समय सुबह 8:55 बजे से दोपहर 1:59 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शाम को भी पूजा की जा सकती है। संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक बताया गया है। इस दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। पंचक में भी कर सकते हैं पूजाइस बार बड़ा मंगल रोग पंचक में पड़ रहा है। सामान्य तौर पर पंचक में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा पंचक में भी की जा सकती है। कहा जाता है कि पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से भय, तनाव और शत्रु बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान भंडारा करवाना भी शुभ माना गया है। हालांकि नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजाबड़ा मंगल पर हनुमान जी को सिंदूर, लाल चंदन और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही चमेली के तेल का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। भक्त इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:- “ॐ नमो भगवते पंचवदनाय, पूर्वकपि मुखाय, सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा।”इस दिन हनुमान चालीसा, हनुमान बीसा और सुंदरकांड का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि पंचक के दौरान हवन और यज्ञ करने से बचने की सलाह दी गई है। इन बातों का रखें ध्यान– पूजा के दौरान काले और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, पीले और सफेद रंग को शुभ माना गया है।– व्रत रखने वाले लोगों को गुस्सा और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।– पूरे दिन सात्विक भोजन करें और मांसाहार व शराब से परहेज रखें।– ब्रह्मचर्य का पालन करना भी शुभ माना गया है।
पूजा में किन चीजों का दोबारा उपयोग करें और किनका नहीं? जानिए धार्मिक नियम और मान्यताएं

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और शुद्धता से जुड़ी एक गहन प्रक्रिया मानी जाती है। हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाता है ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें शुद्ध मानकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कुछ एक बार उपयोग के बाद अपवित्र मानी जाती हैं। किन चीजों का किया जा सकता है दोबारा उपयोग?पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई धातु की वस्तुएं और पवित्र सामग्री ऐसी होती हैं जिन्हें साफ-सफाई के बाद दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। धातु के पात्चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन पूजा में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद अच्छी तरह साफ करके फिर से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। पूजा सामग्रीभगवान की मूर्ति, शंख, घंटी, पूजा की माला और आसन भी बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें केवल स्वच्छता के साथ सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। तुलसीतुलसी को माता तुलसी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि तुलसी कभी अपवित्र नहीं होती। यदि नई तुलसी उपलब्ध न हो, तो पहले से चढ़ाई गई तुलसी को भी दोबारा पूजा में उपयोग किया जा सकता है। बेलपत्भगवान शिव को अर्पित किया गया बेलपत्र भी कई मान्यताओं के अनुसार 6 महीने तक उपयोग योग्य माना जाता है, बशर्ते वह फटा या खराब न हो। किन चीजों का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिएकुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है। भोग और प्रसाभगवान को चढ़ाया गया भोग और प्रसाद दोबारा उपयोग नहीं किया जाता। इसे ग्रहण या वितरण के बाद समाप्त मानना चाहिए। जल और फूलपूजा में चढ़ाया गया जल और फूल एक बार उपयोग के बाद अपवित्र माने जाते हैं, इसलिए इन्हें दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए। चंदन, कुमकुम और अक्षभगवान को अर्पित चंदन, कुमकुम और चावल (अक्षत) का दोबारा उपयोग वर्जित है। दीपक का तेल या घीपूजा में जलाए गए दीपक में बचा हुआ तेल या घी भी दोबारा प्रयोग नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता और महत्शास्त्रों के अनुसार पूजा में शुद्धता और एकाग्रता का विशेष महत्व है। माना जाता है कि अपवित्र या उपयोग हो चुकी वस्तुओं का पुनः प्रयोग करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार करना आवश्यक बताया गया है। पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली वस्तुओं का सही ज्ञान होना जरूरी है। जहां एक ओर कुछ चीजें शुद्ध मानी जाती हैं और बार-बार उपयोग की जा सकती हैं, वहीं कुछ वस्तुएं केवल एक बार के उपयोग के लिए होती हैं। इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि पूजा की पवित्रता भी बनी रहती है।
2026–2027 का सूर्य ग्रहण: 2027 क्यों कहलाएगा ‘सदी का सबसे खास नजारा’? जानें पूरी सच्चाई

नई दिल्ली। खगोल विज्ञान के अनुसार 2026 और 2027 के बीच दो महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेंगे, लेकिन इनमें 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसका कारण इसकी असाधारण लंबी अवधि और बड़े भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई देना है, जो इसे बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना बनाता है। 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहणयह पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन जैसे क्षेत्रों से दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को कुछ मिनटों के लिए ढक लेगा और आकाश में शाम जैसा नजारा बन सकता है। इसकी कुल अवधि लगभग 2 मिनट से कुछ ज्यादा होगी, इसलिए यह एक सामान्य लेकिन आकर्षक पूर्ण ग्रहण माना जा रहा है। 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण क्यों खास है?2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में से एक होगा। मिस्र के लक्सर जैसे स्थानों पर यह लगभग 6 मिनट से अधिक समय तक चलेगा। इतनी लंबी अवधि में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा और दिन में कुछ समय के लिए गहरा अंधेरा छा जाएगा। खगोलविदों के अनुसार ऐसा लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत दुर्लभ होता है और इसके बाद इतना लंबा ग्रहण 2114 तक देखने को नहीं मिलेगा। यही वजह है कि इसे “Eclipse of the Century” यानी सदी का सबसे खास खगोलीय नजारा कहा जा रहा है। देखने में क्या होगा अंतर?2026 ग्रहण: छोटा, लेकिन सुंदर सूर्यास्त के समय यूरोप में दिखाई देगा 2027 ग्रहण: लंबा, गहरा और अफ्रीका–मध्य पूर्व में व्यापक रूप से दिखेगा वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना (बाहरी चमकदार आवरण) साफ दिखाई देता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है। दोनों ग्रहण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 2027 का सूर्य ग्रहण अपनी लंबी अवधि और व्यापक दृश्यता के कारण बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जा रहा है। यही कारण है कि खगोल प्रेमियों के लिए यह घटना किसी “सदी के शो” से कम नहीं होगी।