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6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

नई दिल्ली। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत हो या शुभ-अशुभ समय की जानकारी पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि शुभ समय में किया गया कार्य फलदायी वहीं, अशुभ समय में किए कार्य में बाधा आती है और सफलता भी नहीं मिलती। 6 अप्रैल को सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन चतुर्थी तिथि का ही मान होगा। नक्षत्र की बात करें तो अनुराधा नक्षत्र 6 अप्रैल की रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र लगेगा। सूर्योदय 6 अप्रैल को 6 बजकर 6 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 55 मिनट पर और चंद्रास्त अगली सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर होगा। दृक पंचांग के अनुसार 6 अप्रैल को सिद्धि योग दोपहर 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। बालव करण दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद कौलव करण लगेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 6 मिनट से अगली रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक होगी। अमृत काल दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त 7 अप्रैल की रात 12 बजे से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई महत्वपूर्ण काम शुरू न करें। यमगण्ड दोपहर 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक होगा। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 11 मिनट तक होगा। गण्ड मूल 7 अप्रैल की सुबह 2 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। बाण रज सुबह 6 बजकर 9 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगा और विंछुड़ो पूरे दिन प्रभावी रहेगा।

अक्षय तृतीया के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना समृद्धि की जगह आ सकती है परेशानी

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया सनातन परंपरा का एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व माना जाता है जो हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन इतना शुभ होता है कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है और माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं यानी उनका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। दृक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से होगी और इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। पूजा और खरीदारी के लिए विशेष शुभ समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में सोना चांदी या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीद विशेष फलदायी मानी जाती है। अक्षय तृतीया पर जहां एक ओर सोना चांदी तांबा और पीतल जैसी धातुएं खरीदना शुभ माना जाता है वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन वस्तुओं की खरीदारी से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। सबसे पहले बात करें धारदार और नुकीली वस्तुओं की तो इस दिन चाकू कैंची सुई या किसी भी प्रकार की काटने वाली चीज खरीदना अशुभ माना गया है। यह प्रतीकात्मक रूप से रिश्तों में कटुता और तनाव को बढ़ा सकता है जिससे परिवार में कलह की स्थिति बन सकती है। इसी तरह काले रंग की वस्तुओं से भी इस दिन दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों में काले रंग को शनि और राहु से जोड़कर देखा गया है और इसे शुभ कार्यों में वर्जित माना गया है। ऐसे में काले कपड़े जूते या अन्य सामान खरीदने के बजाय पीले लाल और सफेद जैसे शुभ रंगों को अपनाना बेहतर होता है। धातुओं की बात करें तो अक्षय तृतीया पर धातु खरीदना शुभ जरूर है लेकिन सही धातु का चयन बेहद जरूरी है। सोना चांदी तांबा और पीतल जहां समृद्धि के प्रतीक हैं वहीं एल्यूमीनियम और स्टील को राहु से संबंधित माना जाता है। इनकी खरीदारी इस दिन करने से घर की बरकत पर असर पड़ सकता है इसलिए इनसे बचना चाहिए। इसके अलावा घर की सजावट के लिए पौधे खरीदने का विचार कर रहे हैं तो इस दिन कांटेदार पौधों जैसे कैक्टस से दूर रहें। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसे पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं। इसके बजाय तुलसी मनी प्लांट या सुगंधित फूलों के पौधे लाना शुभ माना जाता है जो सकारात्मकता और समृद्धि को बढ़ाते हैं। अक्षय तृतीया केवल खरीदारी का पर्व नहीं बल्कि श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन सही नियमों का पालन करके और गलतियों से बचकर आप अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति को स्थायी बना सकते हैं।

6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक शुक्र का गोचर इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण, समझदारी से लें फैसले

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को सुख, प्रेम, सुविधा और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को शुक्र देव अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। भरणी नक्षत्र के स्वामी स्वयं शुक्र देव हैं, लेकिन इसका स्वभाव उग्र माना गया है। शुक्र देव भरणी नक्षत्र में 15 अप्रैल तक रहेंगे और 16 अप्रैल को कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि शुक्र अपनी ही राशि के नक्षत्र में हैं, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि आर्थिक और व्यक्तिगत मोर्चे पर चुनौतियां लेकर आ सकती है।प्रभावित राशियां और उपाय वृषभ राशि  वृषभ राशि के स्वामी स्वयं शुक्र हैं, लेकिन भरणी नक्षत्र में गोचर के दौरान अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। इस समय सुख-सुविधा की वस्तुओं पर धन खर्च करना पड़ सकता है और बजट बिगड़ सकता है। निवेश या बड़े वित्तीय फैसलों में 15 अप्रैल तक रुकना बेहतर रहेगा।कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर मिला-जुला रहेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ वैचारिक मतभेद और सुख-सुविधाओं में अचानक कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान अपनी सेहत और खान-पान का विशेष ध्यान रखें। जीवनसाथी के साथ बातचीत में मधुरता बनाए रखें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए शत्रुओं का प्रभाव बढ़ सकता है। गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रेम संबंधों में गलतफहमियां आ सकती हैं। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और विवादों से दूरी बनाकर रखें। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए धन के मामलों में उतार-चढ़ाव संभव है। उधार देना या बड़ा कर्ज लेना हानिकारक हो सकता है। धन के अटकने के योग बन रहे हैं, जिससे भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। आर्थिक निर्णय लेने से पहले परिवार के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें।

आज का राशिफल: 5 अप्रैल 2026, मेष से लेकर मीन राशि तक जानें पूरे दिन का हाल

नई दिल्ली।5 अप्रैल 2026, शनिवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार अलग-अलग राशियों के लिए अलग अनुभव लेकर आएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ राशियों को सफलता और लाभ मिलेगा, जबकि कुछ को सतर्क रहने की जरूरत है। मेष राशिआज का दिन भागदौड़ वाला रहेगा। कामों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे थोड़ा दबाव महसूस होगा। ऑफिस में अचानक बदलाव हो सकते हैं, इसलिए पहले से प्लान बनाना जरूरी है। पैसों के मामले में जल्दबाजी से बचें। परिवार में सामान्य माहौल रहेगा, लेकिन छोटी बातों पर बहस से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान हो सकती है। वृषभ राशिआज काम में स्थिरता महसूस होगी। पिछले कुछ समय से अटके काम धीरे-धीरे बन सकते हैं। पैसों के मामले में स्थिति संभली रहेगी। खर्च रहेगा, लेकिन नियंत्रण में रहेगा। परिवार का साथ मिलेगा और किसी पुराने मित्र से बातचीत हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी, खानपान का ध्यान रखें। मिथुन राशिआज आपका ध्यान एक जगह टिकाना मुश्किल हो सकता है। काम के बीच-बीच में ध्यान भटक सकता है। जरूरी काम पहले निपटाना बेहतर रहेगा। पैसों के मामले में बड़े फैसले से बचें। रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखना जरूरी है। सेहत सामान्य रहेगी, नींद पूरी करना आवश्यक है। कर्क राशि आज मन उलझा रह सकता है। छोटी बातों को लेकर ज्यादा सोच सकते हैं। कामकाज सामान्य रहेगा, लेकिन ध्यान बार-बार भटक सकता है। परिवार में किसी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। सिंह राशि आज काम में देरी या रुकावट आ सकती है। जो चीजें जल्दी होनी चाहिए, उनमें समय लग सकता है। गुस्से से बचें और ऑफिस में किसी की बात को गलत न समझें। पैसों के मामले में सोच-समझकर खर्च करें। परिवार का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। कन्या राशिआज सोच-समझकर फैसले लें। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में बदलना पड़ सकता है। काम में धीरे-धीरे प्रगति होगी। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन खर्च पर नजर रखें। रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखें। सेहत सामान्य रहेगी। तुला राशिआज काम में संतुलन बनाकर चलें। जिम्मेदारियां एक साथ बढ़ सकती हैं। किसी के साथ मिलकर काम करना पड़े तो स्पष्टता बनाए रखें। पैसों के मामले में दिन ठीक रहेगा। रिश्तों में समझदारी दिखाएं। सेहत सामान्य रहेगी। वृश्चिक राशि पैसों के मामले में सतर्क रहें। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए योजना बनाकर चलें। कामकाज सामान्य रहेगा। ऑफिस में किसी मुद्दे पर दोबारा विचार करने की जरूरत पड़ सकती है। परिवार का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। धनु राशि आज दिन व्यस्त रहेगा। काम ज्यादा होंगे और समय कम लगेगा। प्राथमिकता तय करना जरूरी है। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। थकान से बचें। मकर राशि आज चीजों को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे। हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। कामकाज सामान्य रहेगा। पैसों में सावधानी रखें। रिश्तों में दूरी न आने दें। दिमाग को आराम देना जरूरी है। कुम्भ राशिआज घर और काम दोनों में संतुलन बनाए रखें। किसी एक चीज पर ज्यादा ध्यान देने से दूसरी प्रभावित हो सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। पुराने काम पूरे करने का मौका मिलेगा। परिवार का साथ मिलेगा। सेहत ठीक रहेगी। मीन राशिआज आप थोड़ा अंदर की ओर रह सकते हैं। ज्यादा बोलने के बजाय सोचने का मन करेगा। काम में जल्दबाजी से बचें। पैसों के मामले में बड़े फैसले टाल सकते हैं। रिश्तों में समय दें। आराम करना आवश्यक है।

Vastu Tips: शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार को करें ये आसान उपाय

  Vastu Tips:Vastu Tips:नई दिल्ली।  शनिवार के दिन शनिदेव की विशेष पूजा और वास्तु उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। शनि देव की कृपा पाने के लिए केवल पूजा ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष उपाय करना भी जरूरी है। अगर आपके घर में लगातार आर्थिक तंगी, कामों में रुकावट या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नजर आ रहा है, तो आज के दिन ये उपाय विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 1. शनि मंदिर जाएं और सरसों के तेल का दिया जलाएं शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करना बेहद लाभकारी माना गया है। इस दौरान सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए। शनि देव को काला रंग प्रिय है, इसलिए इस दिन काले कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। इसके साथ ही काली दाल का दान करने से भी शनिदेव की कृपा बनी रहती है। 2. घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाएं वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाने से घर में आने वाली नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। यह उपाय घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। 3. शमी का पौधा लगाएं और पत्तियां चढ़ाएं शनिवार को शमी का पौधा लगाना विशेष लाभकारी माना गया है। शमी देवता को प्रिय होने के कारण यह पौधा शनि देव की कृपा बढ़ाता है। शमी की पत्तियों को शनिदेव को चढ़ाने से घर में आर्थिक तंगी और अन्य परेशानियां कम होती हैं। 4. नकारात्मकता बढ़ाने वाली आदतों से बचें शनिवार के दिन कुछ विशेष सावधानियां रखना भी जरूरी है। जैसे, नाखून और बाल काटना इस दिन वर्जित माना गया है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए शनिवार को अपने बाल और नाखून न काटें। 5. नियमित पूजा और उपाय से घर में खुशहाली इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने से घर और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव प्रसन्न रहते हैं और किसी भी बाधा, आर्थिक तंगी या मानसिक परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं। शनिवार के दिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ये उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सभी सदस्य मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहते हैं।

संकटों को दूर करने वाला विकट गणेश व्रत, जानिए दिन का शुभ मुहूर्त और समय

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन पर्व 5 अप्रैल रविवार को पड़ रहा है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट स्वरूप की इस दिन विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों को सभी प्रकार के ज्ञात और अज्ञात भय रोग शोक और दुर्घटनाओं से सुरक्षित रखते हैं। भक्तों का विश्वास है कि यह व्रत न केवल व्यक्ति को निर्भीक बनाता है बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को चंद्रमा के उदय के बाद पूजा और चंद्र दर्शन के साथ व्रत का पारण करते हैं। दिन का समय भी इस पूजा और व्रत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर है। शुभ मुहूर्त के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 4 बजकर 10 मिनट तक रहेगा जिसे अत्यंत शुभ समय माना जाता है। वहीं अशुभ समयों से बचना भी आवश्यक है। राहुकाल शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। भद्रा सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार विकट संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल को भगवान गणेश की विशेष आराधना और व्रत रखने का दिन है। इस दिन की पूजा न केवल मानसिक और आध्यात्मिक बल बढ़ाती है बल्कि जीवन में आने वाले संकटों और परेशानियों से सुरक्षा का भी मार्ग प्रशस्त करती है। शुभ मुहूर्त और समय का पालन कर भक्त इस दिन की विशेष महत्ता का लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन में सुख शांति और सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

4 अप्रैल जन्म वाले जातकों के लिए विशेष राशिफल, सत्ता और सफलता के नए अवसर

नई दिल्ली । 4 अप्रैल को जन्म लेने वाले जातकों के लिए यह वर्ष विशेष अवसर और चुनौतियों से भरा होने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आपका नया वर्ष शनिवार 4 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और सत्ता व्यापार और व्यक्तिगत संबंधों के क्षेत्र में उतार चढ़ाव लेकर आएगा। वर्ष की शुरुआत में सत्ता पक्ष और प्रशासन से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। सरकारी क्षेत्र से जुड़े जातकों या किसी सरकारी टेंडर की प्रतीक्षा कर रहे लोगों के लिए यह समय लाभकारी रहेगा। परिवार के भीतर भाइयों और करीबी रिश्तेदारों का सहयोग व्यापार और व्यवसाय में विशेष वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा। साल के मध्य में सावधानी की आवश्यकता है। राजनीति में सक्रिय जातकों को अधिक परिश्रम करना होगा और इस वजह से शारीरिक और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। मित्रों या परिचितों के साथ छोटे वाद विवाद भी बड़े तनाव का कारण बन सकते हैं। ऐसे समय में संयम और समझदारी बनाए रखना आवश्यक है। वर्ष के अंतिम चरण में परिस्थितियां फिर से आपके नियंत्रण में आ जाएंगी। अटके हुए शासन या प्रशासनिक कार्य पूरे होंगे और आर्थिक लाभ की स्थिति बनेगी। स्वजनों का सहयोग मिलेगा और कुछ महत्वपूर्ण अनुबंध भविष्य के लिए मजबूत नींव साबित होंगे। विशेष राशियों के लिए यह वर्ष अलग अलग क्षेत्रों में अलग अवसर लेकर आएगा। मेष और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय साहसिक निवेश और नवीन योजनाओं के लिए उपयुक्त है। इन राशियों के लोग अपनी योजनाओं में पूंजी निवेश करेंगे और लंबी अवधि में इसका बड़ा लाभ उठा सकते हैं। वृष और तुला राशि के जातकों के लिए शासन प्रशासन और कानूनी मामलों में सफलता मिलने के संकेत हैं। सरकारी योजनाओं या अनुबंधों में लाभ प्राप्त होगा। कर्क राशि के जातकों को सत्ता पक्ष से मानसिक संतोष और सुख मिलेगा। सिंह राशि वाले जातक अपने परिवार और स्वजनों के सहयोग से व्यापारिक अनुबंध करने में सफल रहेंगे। मकर और कुम्भ राशि के जातकों के लिए यह वर्ष आराम का नहीं बल्कि कड़ी मेहनत का रहेगा। हर कार्य को सिद्ध करने के लिए उन्हें अत्यधिक परिश्रम करना होगा और यही मेहनत उनकी सफलता का आधार बनेगी। धनु और मीन राशि के जातकों को वर्ष के दौरान मानसिक तनाव और मित्रों के साथ हुए वाद विवाद से बचना होगा। सकारात्मक ऊर्जा का सही उपयोग लाभकारी रहेगा। मिथुन और कन्या राशि वाले जातकों के लिए दैनिक कार्यों में व्यस्तता अधिक रहेगी। लक्ष्य प्राप्ति के लिए उन्हें सामान्य से अधिक भागदौड़ करनी पड़ेगी लेकिन संयम और लगन से वे अपने उद्देश्यों में सफलता प्राप्त करेंगे। इस प्रकार 4 अप्रैल जन्म वाले जातकों के लिए यह वर्ष नए अवसर चुनौतियों और लाभकारी परिणामों से भरा रहेगा। सही दिशा में प्रयास और संयम के साथ कार्य करने से सत्ता व्यापार और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन और सफलता प्राप्त होगी।

शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी

नई दिल्ली।क्या आप भी शनिवार का व्रत रखने का सोच रहे हैं? तो जानिए कब और कैसे शुरू करेंशनि देव को प्रसन्न करने के लिए रखना चाहिए शनिवार का व्रत, जानिए कब रखना चाहिए ये व्रत और कैसे करें शुरू इससे जुड़ी सारी जानकारी। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन लोग उनकी पूजा अर्चन करते है। कई लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि उनकी कृपा पा सकें। अगर आप भी शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं और ये समस्या आ रही हैं कि, इसकी शुरूआत कैसे करें। तो चलिए इस व्रत से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताते हैं। कब से शुरू करें व्रतशनिवार का व्रत किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से आरंभ करना अधिक शुभ माना जाता है। व्रत शुरू करने से पहले मन में संकल्प लेना चाहिए कि आप कितने शनिवार तक व्रत रखेंगे आमतौर पर 11, 21 या 51 शनिवार का व्रत रखा जाता है। व्रत के दिन की पूजा विधिव्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनि देव की पूजा करें। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों का तेल चढ़ाएं, काले तिल अर्पित करें और दीपक जलाएं। इसके साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना बेहद फलदायी माना जाता है।शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। व्रत का महत्त्वशनिवार का व्रत नियमित रूप से करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और मानसिक शांति मिलती है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति को न्याय, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। इसलिए श्रद्धा और नियम से यह व्रत करने से अच्छे फल मिलते हैं। शनि देव की आरतीजय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय जय श्री शनिदेव…॥ श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी।नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय जय श्री शनिदेव…॥ क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है ललाट।मुक्तन की माला गले शोभित बलिहाट॥ जय जय श्री शनिदेव…॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय जय श्री शनिदेव…॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥ जय जय श्री शनिदेव…॥

वैशाख मास के दिव्य उपाय जो बदल दें आपकी किस्मत और भर दें जीवन में सुख समृद्धि

नई दिल्ली । वैशाख मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में इस शुभ महीने की शुरुआत 3 अप्रैल से हो चुकी है और यह 1 मई तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा जप और दान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है। कहा जाता है कि इस दौरान किया गया साधना और सेवा का कार्य हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर पुण्य देता है। यही कारण है कि इस माह को आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास में कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार संभव है। यदि कोई व्यक्ति अपने घर में सुख समृद्धि बढ़ाना चाहता है तो उसे प्रतिदिन भगवान विष्णु को तुलसी पत्र के साथ शहद अर्पित करना चाहिए और उनके माधव अनंत और अच्युत स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। ऐसा करने से घर का वातावरण शांत और समृद्ध बनता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। अगर जीवन में शत्रुओं या विरोधियों की समस्या अधिक है तो इस मास में भगवान विष्णु के माधव के साथ केशव और दामोदर स्वरूप का ध्यान करना लाभकारी माना गया है। तुलसी दल से विधिपूर्वक पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शत्रु स्वतः ही दूर होने लगते हैं। इसके साथ ही जीवन में सच्चे मित्रों का साथ भी मिलने लगता है। जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं या किसी भी प्रकार की प्रतिस्पर्धा में सफलता पाना चाहते हैं उन्हें वैशाख मास में भगवान विष्णु के माधव पद्मनाभ और हृषिकेष स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। भगवान को गंध और तुलसी पत्र अर्पित करने से मन एकाग्र होता है और सफलता के मार्ग खुलते हैं। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है। दाम्पत्य जीवन को सुखद और मधुर बनाने के लिए इस पवित्र महीने में माधव श्रीधर और पद्मनाभ स्वरूप का ध्यान करना चाहिए। तुलसी पत्र के साथ मिठाई या मिश्री अर्पित करने से पति पत्नी के बीच प्रेम और समझ मजबूत होती है और संबंधों में मधुरता आती है। आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए वैशाख मास में माधव गोविंद और नारायण स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। भगवान को आटे की पंजीरी में तुलसी दल मिलाकर भोग लगाने से धीरे धीरे धन लाभ के योग बनते हैं और आर्थिक स्थिरता आती है। इस प्रकार वैशाख मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि जीवन को संतुलित और सफल बनाने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए ये छोटे छोटे उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से हर क्षेत्र में उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

Murena Temple Roof Collapse : मुरैना में भूमिया बाबा मंदिर की छत गिरी, ग्रामीणों ने हटाया मलबा

Temple Roof Collapse

HIGHLIGHTS: भूमिया बाबा मंदिर की हॉल की छत गिर गई। हादसे में कोई जन हानि नहीं। मंदिर लगभग 100 साल पुराना। पटिया टूटने से छत गिरी। ग्रामीण मलबा हटाने और सुरक्षा इंतजाम में जुटे। Murena Temple Roof Collapse : मुरैना। जिले के माता बसैया थाना क्षेत्र के हुराई पुरा संगोली गांव में स्थित भूमिया बाबा मंदिर की हॉल की छत शुक्रवार शाम अचानक भरभरा कर नीचे गिर गई। हालांकि, गनीमत रही कि इस समय हॉल में कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिससे कोई जन हानि नहीं हुई। ग्रामीणों ने तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। 5 बार की चैंपियन CSK पर दाग! पंजाब किंग्स से हारते ही बना अनचाहा रिकॉर्ड, West Indies cricket team को भी छोड़ा पीछे पुराना मंदिर और हॉल की स्थिति ग्रामीणों ने बताया कि यह भूमिया बाबा मंदिर लगभग 100 साल पुराना है। पहले यहां केवल एक चबूतरा था, जिस पर बाबा का स्थान था और भक्त पूजा अर्चना करते थे। बाद में ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा करके श्रद्धालुओं की मदद से एक हॉल बनाया, जिसके ऊपर छत के रूप में पटिया चढ़ाई गई। लेकिन पटिया कब टूटी, इसका किसी को अंदाजा नहीं था। तीसरे ODI में न्यूजीलैंड का धमाका! दक्षिण अफ्रीका को 66 रन से हराया, सीरीज पर किया कब्जा हादसा टलने की कहानी माता बसैया थाना प्रभारी एसआई विवेक तोमर के अनुसार, छत गिरने के समय हॉल में कोई नहीं था। पटिया टूटने से ही छत नीचे गिर गई। अगर उस समय कोई व्यक्ति हॉल में होता, तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना ने गांववालों को सचेत किया और सभी मलबा हटाने और सुरक्षा इंतजाम करने में जुट गए। Guna Worker Bribe Case : 200 रूपए की रिश्वत लेते पकड़या कर्मचारी, नौकरी से धोना पड़ा हाथ ! ग्रामीण और प्रशासन की प्रतिक्रिया ग्रामीण अब मंदिर की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विचार कर रहे हैं। पुलिस ने बताया कि किसी तरह की शिकायत नहीं मिली थी और मंदिर का कंस्ट्रक्शन काफी पुराना था। स्थानीय लोगों ने आपसी सहयोग से मलबा हटाने और हॉल को सुरक्षित बनाने का काम शुरू कर दिया है।