2 अप्रैल से बनेगा त्रिग्रही योग: मंगल, शनि-सूर्य की युति से इन राशियों के खुलेंगे उन्नति के रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में जब किसी एक राशि में एक से अधिक ग्रह एक साथ स्थित होते हैं, तो उसे ग्रह युति कहा जाता है। इस तरह की युति का प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर शुभ या चुनौतीपूर्ण दोनों रूपों में पड़ सकता है। कुछ युतियां राजयोग बनाकर सफलता और लाभ देती हैं, जबकि कुछ सामान्य परिणाम देती हैं। वर्तमान समय में मीन राशि में शनि देव पहले से ही विराजमान हैं और उनकी युति सूर्य के साथ बनी हुई है। मीन राशि में बनेगा त्रिग्रही योगअब इस युति में तीसरे ग्रह के रूप में मंगल का प्रवेश होने जा रहा है। मंगल को ग्रहों का सेनापति माना जाता है और यह ऊर्जा, साहस तथा क्रियाशीलता का कारक होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 2 अप्रैल 2026 को मंगल कुंभ राशि से मीन राशि में गोचर करेगा। इस गोचर के साथ मीन राशि में त्रिग्रही योग का निर्माण होगा, जिसका असर सभी राशियों पर अलग-अलग तरीके से देखने को मिलेगा। मेष राशि: करियर में मिलेगी मजबूतीमेष राशि के जातकों के लिए यह गोचर कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां और अवसर लेकर आएगा। यह समय आपकी नेतृत्व क्षमता और साहस को बढ़ाने वाला रहेगा। पुराने प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने के संकेत हैं और कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। स्वास्थ्य को लेकर हल्की सावधानी जरूरी रहेगी, लेकिन मानसिक ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। परिवार का सहयोग मिलेगा और घर का माहौल सुखद रहेगा। साथ ही निवेश और वित्तीय योजनाओं में भी अच्छे अवसर मिल सकते हैं। धनु राशि: आर्थिक स्थिति होगी मजबूतधनु राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक स्थिरता और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में संतुलन बना रहेगा। धन और संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिलने की संभावना है। नए अवसर और संपर्क आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं। स्वास्थ्य के लिहाज से हल्की थकान या तनाव महसूस हो सकता है, लेकिन योग और ध्यान से राहत मिलेगी। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से मानसिक शांति भी प्राप्त होगी। मीन राशि: नई शुरुआत के बनेंगे योगमीन राशि के जातकों के लिए मंगल का यह गोचर उत्साह और ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं और सफलता के योग बनेंगे। स्वास्थ्य और फिटनेस में सुधार होगा, जिससे आप खुद को अधिक सक्रिय और प्रेरित महसूस करेंगे। यह समय नए लक्ष्य तय करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अनुकूल है। परिवार का सहयोग मिलेगा और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। साथ ही धन और करियर में उन्नति के भी संकेत मिल रहे हैं।
Chaitra Purnima 2026: शुभ योगों के साथ खास पूर्णिमा, जानें पूजा और व्रत का सही समय

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। यह तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन स्नान, दान, जप और तप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा 1 और 2 अप्रैल को पड़ रही है, जिससे लोगों के मन में यह सवाल है कि व्रत और अनुष्ठान के लिए कौन सा दिन श्रेष्ठ रहेगा। चैत्र पूर्णिमा तिथि का समय द्रिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल सुबह 7:06 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 अप्रैल सुबह 7:41 बजे कब करें स्नान और दानहिंदू धर्म में उदयतिथि का विशेष महत्व होता है। 1 अप्रैल को पूर्णिमा सूर्योदय के बाद शुरू हो रही है 2 अप्रैल को सूर्योदय के समय पूर्णिमा विद्यमान रहेगी इसी कारण 2 अप्रैल को स्नान और दान करना अधिक शुभ माना गया है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को दान और धार्मिक कार्य करना विशेष फलदायी होता है। कब रखें व्रत पूर्णिमा व्रत आमतौर पर चंद्रोदय के आधार पर रखा जाता है। 1 अप्रैल को चंद्रोदय शाम 6:11 बजे होगा 2 अप्रैल को चंद्रोदय प्रतिपदा तिथि में होगा इसलिए चैत्र पूर्णिमा का व्रत 1 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। शुभ मुहूर्त और पूजा का समय 1 अप्रैल (व्रत और पूजा के लिए) भगवान सत्यनारायण पूजा समय: सुबह 6:11 से 9:18 बजे शाम को सूर्यास्त (6:39 बजे) के बाद प्रदोष काल में मां लक्ष्मी की पूजा करें रात में चंद्रमा को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है 2 अप्रैल (स्नान और दान के लिए) ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:38 से 5:24 अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:50 शुभ योगों का संयोग 1 अप्रैल को कई शुभ योग बन रहे हैं: रवि योग: सुबह 6:11 से शाम 4:17 सर्वार्थ सिद्धि योग: शाम 4:17 से अगले दिन सुबह 6:10 तक वृद्धि योग: दोपहर 2:51 तक इसके बाद ध्रुव योग शुरू होगा ये सभी योग पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। चैत्र पूर्णिमा का महत्व चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने, स्नान और दान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। साथ ही सत्यनारायण कथा करने का भी विशेष महत्व होता है।
भगवान विष्णु की कृपा के लिए अप्रैल एकादशी 2026: पूरी जानकारी

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। एकादशी का पालन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और पाप नष्ट होते हैं। अप्रैल 2026 में दो विशेष एकादशी पड़ रही हैं – वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी, और खास बात यह है कि दोनों सोमवार को पड़ रही हैं। इस कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का भी शुभ संयोग बन रहा है। वरुथिनी एकादशी 2026 तारीख: 13 अप्रैल 2026 समय: 13 अप्रैल सुबह 1:16 स 14 अप्रैल सुबह 1:08 तक पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:58 से 7:34 राहुकाल: सुबह 7:34 से 9:10 शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 से 10:46 व्रत पारण: 14 अप्रैल सुबह 6:54 से 8:31 महत्व वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से हजारों साल की तपस्या का फल प्राप्त होता है। यह व्रत पापों को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे सौभाग्य और परिवार में शांति बनी रहती है। मोहिनी एकादशी 2026 तारीख: 27 अप्रैल 2026 समय: 26 अप्रैल शाम 6:06 से 27 अप्रैल शाम 6:15 तक पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 9:02 से 10:40 राहुकाल: सुबह 7:23 से 9:02 व्रत पारण: 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21 महत्व: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से मन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में शांति और सुख की प्राप्ति कराता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने भी कठिन समय में इस व्रत का पालन किया था। अप्रैल 2026 की ये दोनों एकादशियां विशेष रूप से भगवान विष्णु की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन व्रतों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।
मौली बांधने का सही नियम: कितने दिन बाद उतारना जरूरी और क्या करें बाद में

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में कलावा जिसे मौली या रक्षासूत्र भी कहा जाता है, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह लाल और पीले रंग का पवित्र धागा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि इसे सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा और ग्रहों के संतुलन से भी जोड़ा जाता है। कलावा का महत्व ज्योतिष शास्त्र के अनुसार: लाल रंग मंगल ग्रह से जुड़ा होता है, जो ऊर्जा और साहस का प्रतीक है पीला रंग गुरु ग्रह से संबंधित है, जो ज्ञान और शुभता का प्रतिनिधित्व करता है कलावा बांधने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और ग्रह दोषों से सुरक्षा मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। कितने दिन बाद उतारना चाहिए कलावा? धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष के अनुसार, कलावा का प्रभाव लगभग 21 दिनों तक रहता है। इसके बाद इसकी ऊर्जा कम होने लगती है। इसलिए: 21 दिन बाद कलावा उतार देना चाहिए लंबे समय तक एक ही कलावा बांधे रखना अशुभ माना जाता है पुराने कलावे के ऊपर नया बांधना भी गलत माना गया है अगर कलावा टूटा, गंदा या खराब हो जाए, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। कलावा उतारने के बाद क्या करें?कलावा को उतारने के बाद उसे कहीं भी फेंकना नहीं चाहिए, क्योंकि यह पवित्र होता है। सही तरीका: इसे गमले की मिट्टी में दबा दें या किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करें उतारते समय आप ॐ नमो भगवते वासुदेवाय या ॐ शांति मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके बाद हाथ को गंगाजल से शुद्ध करना शुभ माना जाता है। नया कलावा कब और कैसे बांधेंपुरुष दाहिने हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में कलावा बांधें हमेशा शुभ मुहूर्त और शांत मन से बांधें नया कलावा बांधने से पहले पुराना अवश्य उतारेंकलावा बांधने के फायदे सही नियम से कलावा बांधने से: मंगल और गुरु ग्रह मजबूत होते हैं बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है ध्यान रखने वाली बातें कलावा को कभी भी गंदे स्थान पर न रखें जूते-चप्पल या शौचालय के पास इसे रखना अशुभ माना जाता है बांधते समय नकारात्मक विचार या गुस्सा न रखें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सही नियमों के साथ कलावा बांधना और समय पर उतारना ही इसके शुभ प्रभाव को बनाए रखता है।
आज का राशिफल 29 मार्च 2026: मेष से मीन तक हर राशि की दैनिक स्थिति

नई दिल्ली 29 मार्च 2026 का दिन साइन की चाल के अनुसार कुछ के लिए शुभ और कुछ के लिए सामान्य परिणाम लेकर आया है। जानें मेष राशि से लेकर मीन राशि तक का पूरा हाल और किन राशि वालों को लाभ और किन्हें सख्त रहने की जरूरत है। मेष राशिमेष राशि वालों के लिए दिन ठीक-ठाक रहेगा। सुबह से काम का दबाव रह सकता है, लेकिन धीरे-धीरे स्थिति आपके पक्ष में आ जाएगी। नौकरी में किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या फ़ाइल में प्रगति हो सकती है। घर का भी सांकेतिक रहना। मेट्रिक्स को लेकर रिलीफ मीटिंग की संभावना है। वृषभ राशिवृषभ राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य रहेगा। काम में लैपटॉप से लेकर ऑफिस में किसी भी चर्चा में संयम रखना। बिजनेस में छोटा लेकिन जरूरी फायदा मिल सकता है। परिवार में किसी भी सदस्य की बात को एकल से सर्वोत्तम बने रहें। खर्च में थोड़ी वृद्धि हो सकती है, इसलिए डॉक्टरों के डॉक्टर। मिथुन राशिमिथुन राशि के लोग दिन अच्छा पाएंगे। नौकरी और बिजनेस दोनों में नए अवसर सामने आ सकते हैं। पुराने इन्वेंट्री वाले से संपर्क करें मॅवी रहेंगे। परिवार में प्रभावशाली और सामान्य जीवन। नई योजना शुरू करने का दिन ठीक है। कर्क राशिकर्क राशि वालों के लिए दिन थोड़ा उदास रह सकता है। घर और परिवार के अवशेषों में समय अधिक होगा। ऑफिस में काम बढ़ सकता है, लेकिन आप उसे बनाए रखेंगे। आर्थिक मामलों में बड़ा फैसला लेना बेहतर रहेगा। शाम तक मन प्रभाव महसूस होगा। सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए दिन अच्छा है। नौकरी में मेहनत का असर दिख सकता है और वरिष्ठ अधिकारी आपकी बात सुन सकते हैं। बिज़नेस में लाभ के अवसर हैं। परिवार में खुशियों का महोबाँ रहता है। किसी भी शुभ समाचार से दिन बेहतर हो सकता है। कन्या राशिकन्या राशि वालों को मेहनत का फल मिल सकता है। लम्बे समय से रिकार्ड किये गए काम में सफलता मिलेगी। विद्यार्थियों के लिए दिन उपयुक्त है। परिवार में महत्वपूर्ण बातचीत संभव है। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन थोड़ी थकान हो सकती है। तुला राशि तुला राशि के लिए दिन का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। ऑफिस में पब्लिश करने का मौका मिलेगा। परिवार और साथी का सहयोग रहेगा। दवाइयों में राहत मिल सकती है, लेकिन रोजमर्रा का खर्चा छूट जाता है। वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि वालों का दिन साथ रहेगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मीटिंग के संकेत हैं। बिजनेस में पुराने निवेश से हो सकता है फायदा। परिवार में किसी भी सदस्य की निर्धारित नौकरी हो सकती है। शाम के समय थोड़ा आराम की आवश्यकता है। धनु राशिधनु राशि वालों के लिए भाग्य का साथ है। नया काम शुरू करने या किसी महत्वपूर्ण निर्णय के लिए दिन शुभ रहेगा। यात्रा का योग भी बन रहा है। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं। परिवार के साथ समय अच्छा लगेगा। मकर राशिमकर राशि वालों के लिए दिन में कार्यभार के साथ अच्छा जीवन रहेगा। ऑफिस में काम का असरदार। बिज़नेस में लाभ मिलने की संभावना है। घर का सामान्य सामान्य जीवन। पुरानी फिल्मों को पूरा करने का मौका मिल सकता है। कुम्भ राशिकुंभ राशि वालों के लिए दिन नया अवसर लेकर आएं। नौकरी में बदलाव या नई ज़िम्मेदारी की संभावना। कारोबार में स्थिति बेहतर रहेगी। परिवार के साथ समय अच्छा लगेगा। खर्च पर थोड़ा नियंत्रण रखना जरूरी है। मीन राशिमीन राशि वालों के लिए दिन राहत भरा रहेगा। लंबे समय तक रुका काम पूरा हो सकता है। नौकरी और व्यवसाय दोनों में लाभ के संकेत हैं। परिवार में शांति बनी रहे। मन पहले से बेहतर जीवन।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखें ये चीजें, बढ़ेगा समृद्धि और सुख-शांति

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे आस-पास हर वस्तु अपनी खास ऊर्जा रखती है, जिसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है। जहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। सही वास्तु वाला घर सुख-समृद्धि और शांति लेकर आता है, जबकि वास्तु दोष होने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। घर में कुछ विशेष शुभ वस्तुएं रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और करियर तथा व्यवसाय में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। आइए जानते हैं उन 5 चीजों के बारे में। श्रीमद् भगवद् गीता भगवद् गीता को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र ग्रंथ माना जाता है। घर में गीता रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित पाठ से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं। चांदी का सिक्का चांदी का सिक्का वास्तु में शुभ माना जाता है। चांदी का संबंध चंद्र ग्रह से है, जो मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है। इसे तिजोरी या धन स्थान पर रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। पांच कौड़ियां कौड़ियों को मां लक्ष्मी से जोड़ा गया है और इन्हें धन का प्रतीक माना जाता है। वास्तु के अनुसार शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन 5 साबुत कौड़ियों को हल्दी लगाकर पूजा स्थान या धन स्थान पर रखने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। हल्दी की गांठ हल्दी का संबंध भगवान विष्णु से है। जहां भगवान विष्णु का वास होता है, वहां मां लक्ष्मी भी निवास करती हैं। तिजोरी या धन स्थान पर हल्दी की गांठ रखने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है और घर में धन-धान्य में वृद्धि होती है। गुलाब का पौधा गुलाब का फूल मां लक्ष्मी को प्रिय माना जाता है। वास्तु के अनुसार सही दिशा में गुलाब का पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे घर का वातावरण सुखद बनता है, मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और वास्तु दोष दूर होते हैं। इन 5 वास्तु उपायों को अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा, धन-संपन्नता और शांति बनी रहती है। नियमित रूप से इन वस्तुओं की देखभाल और सही दिशा में रखकर आप मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
सपनों का रहस्य: ये 4 प्रकार के सपने कभी न बताएं, वरना बिगड़ सकता है काम

नई दिल्ली । स्वप्न शास्त्र के अनुसार नींद में आने वाले सपनों का हमारे जीवन पर गहरा असर होता है। हर सपना किसी न किसी रूप में हमारी भावनाओं भविष्य या जीवन की परिस्थितियों का संकेत देता है। कुछ सपने हमें खुशी और सुकून देते हैं तो कुछ चिंता और डर भी पैदा कर सकते हैं। हालांकि सभी सपनों को दूसरों के साथ साझा करना शुभ नहीं माना जाता। कुछ खास प्रकार के सपनों को गुप्त रखना आवश्यक है क्योंकि इन्हें दूसरों के साथ बताने से उनके सकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। आध्यात्मिक अनुभव वाले सपने यदि सपनों में आप किसी तीर्थ स्थान पूजा-अर्चना या देवी-देवताओं के दर्शन करते हैं तो यह आपके जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक बदलाव का संकेत है। ये सपने आपके करियर और मानसिक शांति के लिए शुभ माने जाते हैं। लेकिन इन्हें दूसरों को बताने से उनकी शक्ति कमजोर हो सकती है जिससे तरक्की में रुकावट आ सकती है। ऐसे सपनों को अपने तक ही सीमित रखना सर्वोत्तम होता है। प्रकृति से जुड़े सपने हरे-भरे जंगल पहाड़ बहती नदियां झरने या बाग-बगीचे देखने वाले सपने सुख शांति और शुभ समाचार का संकेत होते हैं। ये भविष्य में सकारात्मक बदलाव और नए अवसरों की ओर इशारा करते हैं। हालांकि यदि इन सपनों को दूसरों के साथ साझा किया जाए तो उनका शुभ प्रभाव धीरे-धीरे कम हो सकता है। इसलिए इन्हें निजी रखना ही बुद्धिमानी मानी जाती है। मृत्यु से जुड़े सपने सपनों में किसी की मृत्यु देखना अक्सर डरावना लगता है लेकिन स्वप्न शास्त्र में इसे नकारात्मक नहीं बल्कि सकारात्मक संकेत माना गया है। यह दर्शाता है कि आपकी जीवन की परेशानियां समाप्त होने वाली हैं और नई शुरुआत होने जा रही है। हालांकि ऐसे सपनों को दूसरों के साथ साझा करना अशुभ हो सकता है क्योंकि इससे सकारात्मक परिणाम प्रभावित हो सकते हैं और परिवार में अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है। धन और संपत्ति से जुड़े सपने यदि सपनों में आप धन प्राप्त करते हुए खजाना पाते हुए या नई संपत्ति खरीदते हुए दिखाई देते हैं तो यह आर्थिक प्रगति और समृद्धि का संकेत है। ये सपने बताते हैं कि आने वाले समय में आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। लेकिन इन्हें किसी के साथ साझा करने से धन लाभ के योग कमजोर पड़ सकते हैं और आर्थिक उन्नति में बाधा आ सकती है। इसलिए इन्हें गुप्त रखना ही सही माना जाता है। स्वप्न शास्त्र में इन 4 प्रकार के सपनों को निजी रखने की सलाह इसलिए दी गई है ताकि उनके शुभ प्रभाव पूरे रूप में आपके जीवन में बने रहें। यह न केवल भविष्य की परिस्थितियों को सकारात्मक बनाए रखता है बल्कि मानसिक शांति और व्यक्तिगत उन्नति में भी मदद करता है।
रविवार का पंचांग अपडेट: कामदा एकादशी, मुहूर्त और राहुकाल की पूरी जानकारी

नई दिल्ली:29 मार्च 2026, रविवार का दिन सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस दिन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। इसे कामदा एकादशी या अमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है और यह दिन नारायण भगवान की आराधना और व्रत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस वर्ष रविवार को एकादशी तिथि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगी और उसके बाद द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी। हालांकि, सूर्य उदय के समय के अनुसार पूरे दिन एकादशी का ही महत्व रहेगा। सूर्योदय इस दिन 6 बजकर 14 मिनट पर होगा और सूर्यास्त 6 बजकर 37 मिनट पर होगा। पंचांग के अनुसार नक्षत्र अश्लेषा दोपहर 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और उसके बाद मघा नक्षत्र शुरू होगा। योग धृति शाम 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा और करण विष्टि सुबह 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। 29 मार्च को कई शुभ मुहूर्त भी निर्धारित हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 42 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक रहेगा और इस दौरान पूजा-अर्चना करना अत्यंत फलदायी माना गया है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 51 मिनट तक रहेगा जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। शाम के समय गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 36 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा और सायाह्न संध्या 6 बजकर 37 मिनट से 7 बजकर 47 मिनट तक होगी। इसके अलावा अमृत काल दोपहर 1 बजकर 2 मिनट से 2 बजकर 38 मिनट तक रहेगा और इसे किसी भी शुभ कार्य के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। अशुभ समय की जानकारी भी महत्वपूर्ण है ताकि इस दौरान कोई महत्वपूर्ण कार्य न किया जाए। राहुकाल शाम 5 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। यमगंड दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल शाम 3 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 4 मिनट तक रहेगा और दुर्मुहूर्त शाम 4 बजकर 58 मिनट से 5 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। भद्रा सुबह 6 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट तक रहेगा जबकि गंड मूल पूरे दिन प्रभाव में रहेगा। भक्त इस दिन कामदा एकादशी व्रत कर सकते हैं और शुभ मुहूर्त के अनुसार पूजा-अर्चना या धार्मिक कार्य संपन्न कर सकते हैं। राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दुर्मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य करने से बचना चाहिए। पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त और अमृत काल का लाभ उठाकर दिन को विशेष बनाया जा सकता है। इस प्रकार रविवार का यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण और फलदायी माना जाता है।
VASTU TIPS : वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रखें ये चीजें, बढ़ेगा समृद्धि और सुख-शांति

VASTU TIPS : नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। हमारे आस-पास हर वस्तु अपनी खास ऊर्जा रखती है, जिसका असर हमारे जीवन पर पड़ता है। जहां सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। सही वास्तु वाला घर सुख-समृद्धि और शांति लेकर आता है, जबकि वास्तु दोष होने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। घर में कुछ विशेष शुभ वस्तुएं रखने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और करियर तथा व्यवसाय में उन्नति के मार्ग खुलते हैं। आइए जानते हैं उन 5 चीजों के बारे में। श्रीमद् भगवद् गीता भगवद् गीता को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र ग्रंथ माना जाता है। घर में गीता रखने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नियमित पाठ से मानसिक शांति मिलती है और जीवन की परेशानियां कम होती हैं। चांदी का सिक्का चांदी का सिक्का वास्तु में शुभ माना जाता है। चांदी का संबंध चंद्र ग्रह से है, जो मन को शांत और स्थिर रखने में मदद करता है। इसे तिजोरी या धन स्थान पर रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। पांच कौड़ियां कौड़ियों को मां लक्ष्मी से जोड़ा गया है और इन्हें धन का प्रतीक माना जाता है। वास्तु के अनुसार शुक्रवार या पूर्णिमा के दिन 5 साबुत कौड़ियों को हल्दी लगाकर पूजा स्थान या धन स्थान पर रखने से धन प्राप्ति के योग बनते हैं और मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। हल्दी की गांठ हल्दी का संबंध भगवान विष्णु से है। जहां भगवान विष्णु का वास होता है, वहां मां लक्ष्मी भी निवास करती हैं। तिजोरी या धन स्थान पर हल्दी की गांठ रखने से आर्थिक समृद्धि बढ़ती है और घर में धन-धान्य में वृद्धि होती है। गुलाब का पौधा गुलाब का फूल मां लक्ष्मी को प्रिय माना जाता है। वास्तु के अनुसार सही दिशा में गुलाब का पौधा लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे घर का वातावरण सुखद बनता है, मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और वास्तु दोष दूर होते हैं। इन 5 वास्तु उपायों को अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा, धन-संपन्नता और शांति बनी रहती है। नियमित रूप से इन वस्तुओं की देखभाल और सही दिशा में रखकर आप मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
EKADASHI 2026 : भगवान विष्णु की कृपा के लिए अप्रैल एकादशी 2026: पूरी जानकारी

EKADASHI 2026 : नई दिल्ली । हिंदू धर्म में एकादशी व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और कृपा प्राप्त करने का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। एकादशी का पालन करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और पाप नष्ट होते हैं। अप्रैल 2026 में दो विशेष एकादशी पड़ रही हैं – वरुथिनी एकादशी और मोहिनी एकादशी, और खास बात यह है कि दोनों सोमवार को पड़ रही हैं। इस कारण भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का भी शुभ संयोग बन रहा है। वरुथिनी एकादशी 2026 तारीख: 13 अप्रैल 2026 समय: 13 अप्रैल सुबह 1:16 स 14 अप्रैल सुबह 1:08 तक पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:58 से 7:34 राहुकाल: सुबह 7:34 से 9:10 शुभ चौघड़िया: सुबह 9:10 से 10:46 व्रत पारण: 14 अप्रैल सुबह 6:54 से 8:31 महत्व वरुथिनी एकादशी का व्रत रखने से हजारों साल की तपस्या का फल प्राप्त होता है। यह व्रत पापों को दूर करके जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे सौभाग्य और परिवार में शांति बनी रहती है। मोहिनी एकादशी 2026 तारीख: 27 अप्रैल 2026 समय: 26 अप्रैल शाम 6:06 से 27 अप्रैल शाम 6:15 तक पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 9:02 से 10:40 राहुकाल: सुबह 7:23 से 9:02 व्रत पारण: 28 अप्रैल सुबह 5:43 से 8:21 महत्व: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से मन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं। यह व्रत पापों से मुक्ति दिलाता है और जीवन में शांति और सुख की प्राप्ति कराता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने भी कठिन समय में इस व्रत का पालन किया था। अप्रैल 2026 की ये दोनों एकादशियां विशेष रूप से भगवान विष्णु की भक्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन व्रतों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति, और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है।