हनुमान जयंती 2026: कौन हैं 7 चिरंजीवी? क्या आज भी धरती पर मौजूद हैं ये अमर योद्धा

नई दिल्ली । हनुमान जयंती का पावन पर्व 2026 में 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन केवल भगवान हनुमान की भक्ति का ही नहीं, बल्कि उनकी अमरता और चिरंजीवी होने की मान्यता को भी स्मरण करने का अवसर होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसे सात महापुरुषों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें चिरंजीवी यानी अमर माना गया है और जिनके बारे में विश्वास है कि वे आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं। कौन हैं 7 चिरंजीवी धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत और विष्णु पुराण में जिन सात चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है, वे हैं हनुमान, अश्वत्थामा, विभीषण, कृपाचार्य, राजा महाबली, वेद व्यास और परशुराम। इन सभी को अलग-अलग कारणों से अमरत्व का वरदान मिला और माना जाता है कि ये धर्म की रक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए आज भी सक्रिय हैं। हनुमान जी: भक्ति और शक्ति का प्रतीक हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। उनकी निष्ठा, शक्ति और सेवा भाव से प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिला। मान्यता है कि वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और संकट में उनकी मदद करते हैं। अश्वत्थामा: अमरता जो बन गई श्राप अश्वत्थामा महाभारत के एक शक्तिशाली योद्धा थे, लेकिन उन्हें मिला अमरत्व एक श्राप बन गया। भगवान कृष्ण के श्राप के अनुसार वे कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर भटकते रहेंगे। राजा महाबली: दान और भक्ति का प्रतीक राजा महाबली को उनकी दानशीलता के लिए जाना जाता है। भगवान विष्णु के वामन अवतार ने उनकी परीक्षा ली और प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। केरल का ओणम पर्व उन्हीं की स्मृति में मनाया जाता है।वेद व्यास: ज्ञान के अमर स्रोत वेद व्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है। उन्होंने वेदों को व्यवस्थित किया और उन्हें अमर ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। विभीषण: धर्म का साथ चुनने वाला विभीषण ने अपने भाई रावण के खिलाफ जाकर धर्म का साथ दिया। भगवान राम ने उन्हें लंका का राजा बनाकर अमरत्व का आशीर्वाद दिया। कृपाचार्य: ज्ञान और निष्ठा के प्रतीक कृपाचार्य महाभारत काल के महान गुरु थे, जिन्हें उनकी विद्वता और निष्ठा के कारण चिरंजीवी माना जाता है। परशुराम: विष्णु के अवतार परशुराम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। कहा जाता है कि वे कलियुग में कल्कि के गुरु बनेंगे और धर्म की स्थापना में मदद करेंगे। क्या आज भी मौजूद हैं ये चिरंजीवी? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये सभी चिरंजीवी आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आस्था के स्तर पर लोग इन्हें धर्म और सत्य की रक्षा करने वाला मानते हैं। कहा जाता है कि कलियुग के अंत में ये सभी एक साथ प्रकट होंगे और भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि के साथ मिलकर अधर्म का नाश करेंगे। कुल मिलाकर, 7 चिरंजीवियों की ये कथाएं केवल रहस्य ही नहीं, बल्कि भक्ति, सत्य, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने का गहरा संदेश भी देती हैं।
वैशाख मास 2026: पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर, क्या करें और क्या न करें

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में वैशाख का महीना अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। यह महीना धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख मास की शुरुआत 3 अप्रैल से हो रही है और यह 1 मई तक रहेगा। वैशाख मास का प्रारंभ चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन यानी प्रतिपदा तिथि से होता है। मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वैशाख में प्रातःकाल स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान सूर्य का मेष राशि में प्रवेश भी होता है, जिससे मौसम में गर्मी बढ़ती है और इसी कारण इस माह के नियम स्वास्थ्य से भी जुड़े हुए हैं। वैशाख माह में क्या करें वैशाख मास में जल दान का विशेष महत्व है। इस दौरान घड़े में पानी भरकर दान करना या सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही अन्न दान भी श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें सत्तू, खरबूजा और अन्य खाद्य सामग्री का दान किया जाता है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए पंखा, छाता और चप्पल दान करने की भी परंपरा है। इस महीने भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रतिदिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वैशाख में तुलसी की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। इसके अलावा रोजाना सूर्य देव को जल अर्पित करना और संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। वैशाख माह में क्या न करें इस पवित्र महीने में तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। मांस, मदिरा और भारी भोजन से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए अशुभ माना गया है। जल की बर्बादी से भी विशेष रूप से बचना चाहिए, क्योंकि वैशाख में जल का महत्व और बढ़ जाता है। इसके अलावा इस महीने तेल की मालिश करना भी वर्जित माना गया है। कुल मिलाकर, वैशाख मास आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य अर्जन और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
HANUMAN JAYANTI 2026: हनुमान जयंती पर करें ये चमत्कारी उपाय बजरंगबली की कृपा से हर संकट होगा दूर

HANUMAN JAYANTI 2026: नई दिल्ली। हनुमान जयंती का पावन पर्व हिंदू धर्म में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है और इसे संकटों को दूर करने वाला दिन माना जाता है। चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर आने वाला यह पर्व भक्तों के लिए एक ऐसा अवसर होता है जब सच्चे मन से की गई पूजा और उपाय जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली की आराधना करने से भय बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो मानसिक तनाव आर्थिक परेशानी या किसी प्रकार की रुकावट का सामना कर रहे हैं। इस दिन किए गए सरल लेकिन प्रभावी उपाय व्यक्ति के जीवन में साहस ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार करते हैं। हनुमान जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान हनुमान की पूजा करनी चाहिए। मंदिर जाकर या घर में ही उनकी प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही हनुमान चालीसा और बजरंग बाण का पाठ करने से मन की अशांति दूर होती है और मानसिक शक्ति बढ़ती है। इस दिन राम नाम का जप करना भी बेहद फलदायी माना जाता है क्योंकि भगवान हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। श्रीराम के नाम का स्मरण करने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। भक्त यदि संभव हो तो इस दिन व्रत रखकर पूरे दिन सात्विक आहार का पालन करें और शाम को विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें। हनुमान जयंती पर जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान करना भी अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। खासकर बंदरों को गुड़ और चना खिलाना शुभ फल देता है और इसे संकटों से मुक्ति का एक सरल उपाय माना जाता है। इसके अलावा पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाने और हनुमान मंदिर में जाकर प्रसाद चढ़ाने से भी जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हनुमान जी को प्रसन्न करना कठिन नहीं है बल्कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास ही उनकी कृपा पाने का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए इस दिन किए गए छोटे छोटे उपाय भी बड़े परिणाम दे सकते हैं। हनुमान जयंती केवल एक पर्व नहीं बल्कि आत्मबल और विश्वास को मजबूत करने का दिन है। यह हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस और भक्ति के बल पर हर समस्या का समाधान संभव है। यदि इस दिन पूरे मन से बजरंगबली की आराधना की जाए तो जीवन में आने वाले संकटों से राहत मिल सकती है और सफलता के नए रास्ते खुल सकते हैं।
11 अप्रैल से बनेगा नीचभंग राजयोग, बुध के राशि परिवर्तन से इन 3 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में नीचभंग राजयोग को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब भी यह योग बनता है, तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिलता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्तमान में बुध कुंभ राशि में स्थित हैं, लेकिन 11 अप्रैल 2026 को रात 1 बजकर 20 मिनट पर वे मीन राशि में प्रवेश करेंगे। वैदिक ज्योतिष के अनुसार मीन राशि बुध की नीच राशि मानी जाती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसे कमजोर स्थिति कहा जाता है। इस बार क्यों खास है बुध का गोचरहालांकि इस बार स्थिति सामान्य से अलग है। मीन राशि के स्वामी गुरु (बृहस्पति) कुंडली के केंद्र भाव में विराजमान हैं, जिसके कारण नीचभंग राजयोग का निर्माण हो रहा है। यही वजह है कि जहां कुछ लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं कुछ राशियों के लिए यह समय बेहद लाभकारी साबित होगा। बुध 30 अप्रैल 2026 तक मीन राशि में रहेंगे और इस दौरान सूर्य और शनि के साथ मिलकर अन्य महत्वपूर्ण योग भी बनाएंगे। कैसे बनता है नीचभंग राजयोगज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी नीच राशि में स्थित हो, लेकिन उस राशि का स्वामी केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भाव में मजबूत स्थिति में हो, तब नीचभंग राजयोग बनता है। इस स्थिति में ग्रह की कमजोरी कम हो जाती है और वह सकारात्मक परिणाम देने लगता है। वृषभ राशि: आर्थिक स्थिति होगी मजबूतवृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग लाभकारी साबित हो सकता है। इस दौरान आमदनी में वृद्धि के संकेत हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने के योग बन रहे हैं। व्यापारियों को अच्छा मुनाफा मिल सकता है और नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए भी नए अवसर सामने आ सकते हैं। निवेश से लाभ मिलने की संभावना है और लव लाइफ में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मिथुन राशि: करियर में मिलेगी सराहनामिथुन राशि के लोगों के लिए यह समय करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों के लिए अनुकूल रहेगा। सोचने और निर्णय लेने की क्षमता में सुधार होगा, जिससे आप सही फैसले ले पाएंगे। कार्यस्थल पर आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारी आपसे संतुष्ट रहेंगे। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और पुराने विवाद समाप्त हो सकते हैं। प्रॉपर्टी या वाहन से जुड़े कार्य भी पूरे होने के योग बन रहे हैं। मीन राशि: सोच और फैसलों में आएगा सुधारमीन राशि के लिए यह योग विशेष प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि बुध इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इससे आपकी सोचने और समझने की क्षमता बेहतर हो सकती है। यदि आप धैर्य और समझदारी से काम करेंगे, तो सफलता मिलने के प्रबल योग हैं। व्यापार में नए लोगों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे, जो भविष्य में लाभकारी साबित हो सकते हैं। परिवार, विशेषकर माता का सहयोग मिलेगा, जिससे आपके निर्णय और मजबूत होंगे।
आज का राशिफल: 31 मार्च 2026 – मेष से मीन तक जानें अपनी दिनचर्या और भाग्य

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह-नक्षत्रों की चाल से कल का दिन कुछ राशियों के लिए शुभ रहेगा तो कुछ के लिए सामान्य परिणाम ला सकता है। पढ़ें मेष से लेकर मीन राशि तक का हाल: मेष (Aries) – दिन भागदौड़ वाला रहेगा। काम की रफ्तार तेज रहेगी, लेकिन महंगाई और घर के मामलों में सतर्क रहें। शाम को थोड़ी राहत और सुकून मिलेगा। वृष (Taurus) – चीजें धीरे-धीरे आगे बढ़ेंगी। धैर्य रखना जरूरी है। पुराने काम से फायदा हो सकता है। महंगाई के फैसले सोच-समझकर लें। मिथुन (Gemini) – दिन आपके पक्ष में रहेगा। नए संपर्क और दोस्ती के मौके मिलेंगे। ऑफिस में मेहनत का फल मिलेगा। खर्च पर नियंत्रण रखें। कर्क (Cancer) – मन उलझा रहेगा। काम का दबाव रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे सब ठीक होगा। परिवार को समय दें। महंगाई के मामले में बड़ा फैसला टालें। सिंह (Leo) – आत्मविश्वास अच्छा रहेगा। अटके हुए काम में हलचल आएगी। ऑफिस में कामयाब मिल सकती है। खर्च जरूरी चीजों पर ही करें। दिन पॉजिटिव रहेगा। कन्या (Virgo) – बुजुर्गों का दबाव रहेगा। मेहनत रंग लाएगी। सीनियर्स का सपोर्ट मिलेगा। बुजुर्गों की सोच-समझ कर करें। दिन के अंत में राहत मिलेगी। तुला (Libra) – काम में प्लानिंग जरूरी। मेहनत का नुकसान पहुंचा सकती है। ऑफिस में दबाव रहेगा लेकिन संभाल लेंगे। महंगाई और खान-पान पर ध्यान दें। वृश्चिक (Scorpio) – दिन अच्छा रहेगा। नई प्लानिंग पर काम कर सकते हैं। आइडिया और सहयोग मिलेगा। खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन मैनेज हो जाएगा। धनु (Sagittarius) – संतुलित दिन। काम और घर दोनों ठीक चलेंगे। ऑफिस में सहयोग मिलेगा। पार्टनर के साथ समय अच्छा गुजरेगा। मन शांत रहेगा। मकर (Capricorn) – संभलकर चलें। छोटी बात विवाद में बदल सकती है। काम में फोकस बनाए रखें। महंगाई में रिस्क न लें। दिन के दूसरे हिस्से में हालात सामान्य होंगे। कुंभ (Aquarius) – दिन अच्छा रहेगा। काम में तरक्की होगी। नए मौके सामने आएंगे। आत्मविश्वास बना रहेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। यात्रा के योग बन सकते हैं। मीन (Pisces) – थोड़ा कंफ्यूजन रहेगा। निर्णय में जल्दबाजी न करें। फलों में सतर्क रहें। दिन के अंत में चीजें स्पष्ट होने लगेंगी। अकेले समय उन्नतिशील लाभकारी रहेगा।
इस दिन से खुलेगा केदारनाथ का कपाट, जानिए 6 महीने क्यों बंद रहता है मंदिर

नई दिल्ली। केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Dham) जो भगवान शिव का एक प्राचीन और प्रमुख तीर्थस्थल है, हर साल लगभग यहां लाखों लोग आते हैं और पूजा अर्चना करते हैं। अब मंदिर की यात्रा शुरू होने वाली है यानि इसका कपाट खुलने जा रहा है। आपको बता दें कि, ये मंदिर हर 6 महीने बंद रहता है। इस दौरान भक्तगण बाबा केदारनाथ के दर्शन ऊखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में कर सकते हैं। इस कारण बंद रहता हैं मंदिरकेदारनाथ मंदिर के बंद होने का मुख्य कारण है भारी बर्फबारी और मौसम की कठिनाइयाँ, जो नवंबर से मई तक रहती हैं। इस दौरान मंदिर और आसपास के क्षेत्र में भारी बर्फबारी हो जाती है और रास्ते अवरुद्ध हो जाते हैं, जिससे तीर्थयात्रियों का पहुंचना असंभव हो जाता है। मौसम की यह चुनौती न केवल यात्रियों के लिए जोखिमपूर्ण होती है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को बनाए रखना मुश्किल कर देती है। उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, शीतकालीन महीनों में रास्तों पर हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा सबसे अधिक होता है। इसलिए मंदिर को बंद करना अनिवार्य हो जाता है। भाई दूज के दिन ही बंद होते हैं केदारनाथ मंदिर के कपाटकेदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने और बंद होने की एक तिथि भी तय होती है। इसी तिथि में मंदिर के कपाट खोले और बंद किए जाते हैं। बाबा केदारनाथ धाम के कपाट भी हर भाई दूज यानी दिवाली के दो दिन बाद बंद कर दिए जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ हिमालय पहुंचे जहां उन्होंने भगवान शिव के मंदिर का निर्माण किया। इसके बाद उन्होंने यहीं पर अपने पितरों का तर्पण किया है। इसके बाद ही उन्हें स्वर्ग की प्राप्ति हुई। कहते हैं कि जिस दिन पांडवों ने अपने पूर्वजों का तर्पण किया था वो भाई दूज का ही दिन था, इसलिए तब से इसी दिन केदारनाथ के कपाट बंद होने लगे। एक और वजहदूसरी वजह यह है कि भैया दूज के दिन से ही शीतकाल का आरंभ होता है। इस दौरान हिमालय क्षेत्र में रहना बहुत मुश्किल होता है। दरअसल, शीतकाल के समय हिमालय में जबरदस्त बर्फबारी होती है। इन कारणों से भी भैया दूज के बाद बाबा केदारनाथ के दर्शन रोक दिए जाते हैं और मंदिर के कपाट अगले 6 महीनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस दिन खुलेगा कपाटकेदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने ही वाले हैं। उत्तराखंड में इस समय सरकार चार धाम यात्रा की तैयारियों में जुटी हुई है। इस वर्ष केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को खुलेंगे। हालांकि, गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को खुलने के साथ ही प्रदेश की पवित्र चार धाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने हैं। केदारनाथ धाम पहुंचने के लिएKedarnath Temple तक पहुंचना अपने आप में एक आध्यात्मिक और रोमांचक यात्रा है। इस पवित्र धाम के दर्शन के लिए सबसे पहले श्रद्धालुओं कोहरिद्वार/ऋषिकेश पहुंचना होता है। यहां से सड़क मार्ग द्वारा बस या टैक्सी के जरिए सोनप्रयाग तक सफर किया जाता है। सोनप्रयाग से आगे का रास्ता और भी दिलचस्प हो जाता है। यहां से छोटी गाड़ियों के माध्यम से यात्रियों को गौरीकुंड पहुंचाया जाता है, जो केदारनाथ यात्रा का मुख्य बेस कैंप है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक लगभग 16-18 किलोमीटर का ट्रेक शुरू होता है। यह रास्ता पहाड़ों, झरनों और हरियाली से भरपूर होता है, जो यात्रा को और भी यादगार बना देता है। गौरीकुंड से केदारनाथ धाम तकइस ट्रेक को पैदल तय कर सकते हैं या फिर घोड़ा, खच्चर और पालकी का सहारा ले सकते हैं। वहीं, जो लोग कम समय में यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है, जिससे वे सीधे मंदिर के पास पहुंच सकते हैं। केदारनाथ धाम जाने की प्रमुख तिथियाअक्षय तृतीया: इसी दिन केदारनाथ के कपाट खोले जाते हैं।श्रावण मास: भगवान शिव की पूजा का सबसे शुभ समय होता है ।भैया दूज: इस दिन मंदिर के कपाट बंद किए जाते हैं।
कामदा एकादशी व्रत कथा: पति-पत्नी की खुशहाली और पापों का नाश केवल आज

नई दिल्ली । आज 29 मार्च 2026 को कामदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर पड़ता है और हिन्दू नववर्ष का पहला एकादशी माना जाता है इसे हिन्दू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना जाता है और इस दिन व्रत रखने वालों के लिए कथा का पाठ करना बेहद शुभ होता है क्योंकि बिना कथा का पाठ किए पूजा अधूरी रह सकती है कथा के अनुसार प्राचीन काल में भोगीपुर नामक नगर में पुण्डरीक नामक राजा राज्य करता था वहां ललित और ललिता नामक पति-पत्न रहते थे जिनके बीच गहरा प्रेम था ललित राजा पुण्डरीक के दरबार में संगीत सुनाता था और एक बार गंधर्वों के साथ संगीत प्रस्तुत करते समय उसका ध्यान अपनी पत्नी पर गया और उसका सुर बिगड़ गया राजा ने इसे अपमान माना और क्रोध में आकर ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया श्राप के प्रभाव से ललित मांस खाने लगा और उसका चेहरा भी भयानक हो गया लेकिन ललिता ने पति का साथ निभाना जारी रखा और लोगों से उपाय पूछने लगी दिन-ब-दिन ललित का स्वरूप और विकराल होता गया एक दिन वह जंगल की ओर गया और उसकी पत्नी भी पीछे-पीछे चली जंगल में ललिता को एक सुंदर आश्रम दिखाई दिया वहां उसने ऋषियों का प्रणाम किया ऋषि ने पूछा कि तुम कौन हो और ललिता ने अपना नाम बताया और अपने पति को मिले श्राप के बारे में बताया ऋषि ने ललिता को बताया कि इस समय चैत्र माह की एकादशी का व्रत रखने और इसका पुण्य अपने पति को देने से ललित ठीक हो सकता है विधि-विधान से ललिता ने कामदा एकादशी का व्रत रखा और द्वादशी तिथि को व्रत का पारण ऋषि के सामने किया और पुण्यफल अपने पति को दिया इसके परिणामस्वरूप ललित धीरे-धीरे ठीक होने लगा इसके बाद पति-पत्नी ने निरंतर एकादशी व्रत का पालन करना शुरू किया और उनके जीवन में खुशहाली लौट आई कामदा एकादशी का व्रत रखने वालों के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है आज के दिन व्रत का पालन करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं यह व्रत माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को समर्पित है व्रत रखने वाले को शारीरिक और मानसिक सुख की प्राप्ति होती है पितरों और पूर्वजों की कृपा मिलती है और परिवार में खुशहाली कायम होती है इस दिन कथा का पाठ करने से व्रत पूर्ण फल देता है और जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं इस अवसर पर भक्तों को चाहिए कि वे व्रत के दिन विधि-विधान से निर्जला या अन्न जल का व्रत करें और भगवान विष्णु की पूजा अर्चना के साथ कथा का पाठ अवश्य करें ताकि उनके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली आए व्रत का पालन केवल आध्यात्मिक लाभ ही नहीं बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में भी शांति और सौभाग्य लेकर आता है कामदा एकादशी का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक दिशा देने वाला है व्रत और कथा का पालन करने से व्यक्ति का मन शुद्ध होता है उसका जीवन धर्म और भक्ति में समर्पित होता है और सभी पापों से मुक्ति मिलती है इस प्रकार आज कामदा एकादशी का व्रत रखने से जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि सुनिश्चित होती है और पूजा अधूरी नहीं रहती
हनुमान जयंती 2 अप्रैल को, बजरंगबली को प्रसन्न करने करें ये आसान और अचूक उपाय

नई दिल्ली। हर साल चैत्र माह की पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव 2 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन पूरे विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा और उपासना की जाती है। मंगलवार का विशेष महत्व हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसलिए हर मंगलवार उनकी विशेष पूजा होती है। इसके अलावा शनिवार भी हनुमान जी को प्रिय माना गया है। त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा की सुबह हनुमान जी का जन्म हुआ था, उनके माता-पिता अंजनी और केसरी थे। भगवान शिव के अवतार हिंदू ग्रंथों के अनुसार हनुमान जी महादेव के 11वें अवतार माने जाते हैं। वे बल, बुद्धि और विद्या के दाता हैं और अष्ट सिद्धि एवं नवनिधि के स्वामी हैं। हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है, क्योंकि उनकी पूजा और व्रत रखने से जीवन के संकट दूर होते हैं। अष्ट चिरंजीवी में शामिल धर्मग्रंथों में हनुमान जी को आठ अमर पात्रों में से एक माना गया है। अन्य सात हैं अश्वत्थामा, बलि, महर्षि वेद व्यास, विभीषण, कृपाचार्य, परशुराम और मार्कण्डेय। इनका रोज स्मरण करने से लंबी आयु और निरोगी जीवन मिलता है। पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करनी चाहिए।घर की सफाई और गंगाजल से पवित्रता करें।मंदिर या घर पर हनुमान जी की पूजा करते समय सिंदूर और चोला अर्पित करें।चमेली का तेल चढ़ाने से भगवान प्रसन्न होते हैं।जल, पंचामृत, अबीर, गुलाल, अक्षत, फूल, धूप-दीप और भोग अर्पित करें।सरसों के तेल का दीपक जलाएं।पान का बीड़ा जिसमें गुलकंद और बादाम हो, अर्पित करें।हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और हनुमान आरती का पाठ करें। हनुमान जी के 12 नाम ॐ हनुमान, ॐ अंजनी सुत, ॐ वायु पुत्र, ॐ महाबल, ॐ रामेष्ठ,ॐ फाल्गुण सखा, ॐ पिंगाक्ष, ॐ अमित विक्रम, ॐ उदधिक्रमण,ॐ सीता शोक विनाशन, ॐ लक्ष्मण प्राण दाता, ॐ दशग्रीव दर्पहा। राशि अनुसार मंत्र मेष: ॐ सर्वदुखहराय नमःवृषभ: ॐ कपिसेनानायक नमःमिथुन: ॐ मनोजवाय नमःकर्क: ॐ लक्ष्मणप्राणदात्रे नमःसिंह: ॐ परशौर्य विनाशन नमःकन्या: ॐ पंचवक्त्र नमःतुला: ॐ सर्वग्रह विनाशिने नमःवृश्चिक: ॐ सर्वबन्धविमोक्त्रे नमःधनु: ॐ चिरंजीविते नमःमकर: ॐ सुरार्चिते नमःकुंभ: ॐ वज्रकाय नमःमीन: ॐ कामरूपिणे नमः
सिर्फ 1 कपूर की टिकिया बदल देगी किस्मत दूर होगा कर्ज क्लेश और वास्तु दोष..

नई दिल्ली:भारतीय परंपरा में कपूर का उपयोग केवल पूजा पाठ और आरती तक सीमित नहीं है बल्कि इसे वास्तु शास्त्र में भी बेहद प्रभावशाली माना गया है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कपूर वातावरण को शुद्ध करने के साथ नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और सकारात्मकता का संचार करता है यही कारण है कि वास्तु दोष को दूर करने के लिए कपूर के कई सरल और असरदार उपाय बताए गए हैं कहा जाता है कि यदि घर में लगातार आर्थिक समस्याएं बनी रहती हैं या मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलती तो कपूर का उपाय बेहद लाभकारी साबित हो सकता है इसके लिए रात में किचन का काम समाप्त होने के बाद एक कटोरी में कपूर और लौंग रखकर जलाएं और उसे पूरे घर में घुमाएं मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और नौकरी तथा व्यापार में तरक्की के रास्ते खुलने लगते हैं धन संकट से जूझ रहे लोगों के लिए भी कपूर का उपाय किसी वरदान से कम नहीं माना जाता है वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा हो या आर्थिक स्थिति कमजोर हो तो रोजाना चांदी की कटोरी में कपूर और लौंग जलाना चाहिए इसके साथ ही घर की दक्षिण पूर्व दिशा में नियमित रूप से कपूर जलाने से धन लाभ के योग बनने लगते हैं और धीरे धीरे आर्थिक परेशानियां कम होने लगती हैं घर में यदि अक्सर झगड़े और क्लेश का माहौल बना रहता है तो भी कपूर का प्रयोग लाभकारी माना गया है इसके लिए देसी घी में कपूर को भिगोकर रोजाना जलाएं और इसे ऐसे स्थान पर रखें जहां से उसकी सुगंध पूरे घर में फैल सके ऐसा करने से वातावरण शुद्ध होता है और परिवार के सदस्यों के बीच आपसी प्रेम और समझ बढ़ती है जिससे घर का माहौल शांत और सुखद बनता है दांपत्य जीवन में चल रही कड़वाहट को दूर करने के लिए भी कपूर का एक खास उपाय बताया गया है यदि पति पत्नी के बीच तनाव अधिक हो गया हो तो रात के समय पति के तकिए के नीचे कपूर रख दें और सुबह उठकर उसे बिना बताए जला दें मान्यता है कि इस उपाय से संबंधों में मधुरता आती है और आपसी मनमुटाव दूर होने लगता है वास्तु दोष को दूर करने के लिए सबसे सरल उपाय यह माना जाता है कि घर के अलग अलग कमरों में कपूर की टिकिया रख दी जाए जब यह टिकिया पूरी तरह से खत्म हो जाए तो उसकी जगह नई टिकिया रख दें ऐसा करने से धीरे धीरे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है जिससे घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है वास्तु शास्त्र के इन उपायों का मुख्य उद्देश्य घर के वातावरण को शुद्ध और संतुलित बनाए रखना है हालांकि इन उपायों के साथ साथ मेहनत और सकारात्मक सोच भी उतनी ही जरूरी है तभी जीवन में स्थायी सफलता और खुशहाली प्राप्त की जा सकती है
नुमान जन्मोत्सव 2026 में महिलाओं के लिए खास नियम जानें पूजा में छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली: हनुमान जन्मोत्सव का पर्व भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और पावन अवसर माना जाता है इस दिन श्रद्धालु पूरी आस्था और भक्ति के साथ बजरंगबली की पूजा अर्चना करते हैं मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर जीवन के बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था और वर्ष 2026 में यह पर्व 2 अप्रैल को मनाया जाएगा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं खासकर महिलाओं के लिए कुछ अलग सावधानियां रखने की परंपरा रही है इन नियमों का पालन श्रद्धा और मर्यादा के साथ करना शुभ माना जाता है सबसे पहले यह ध्यान रखना जरूरी है कि महिलाएं हनुमान जी की मूर्ति को स्पर्श न करें मान्यता के अनुसार हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं इसलिए उनकी प्रतिमा को बिना छुए ही फूल और प्रसाद अर्पित करना उचित माना जाता है भक्तिभाव से दूर से ही प्रणाम करना भी उतना ही फलदायी माना गया है इसी प्रकार पूजा के दौरान पंचामृत स्नान कराने से भी महिलाओं को बचना चाहिए हालांकि हनुमान जी की पूजा में पंचामृत का विशेष महत्व है लेकिन परंपरा के अनुसार महिलाओं द्वारा यह क्रिया करना उचित नहीं माना गया है इसे मर्यादा का पालन समझा जाता है हनुमान जयंती के दिन महिलाओं को हनुमान जी के चरण स्पर्श करने से भी बचना चाहिए धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी सभी महिलाओं को माता सीता के रूप में देखते हैं ऐसे में उनके चरण स्पर्श करना उचित नहीं माना गया है महिलाएं हाथ जोड़कर विनम्रता से आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं सिंदूर चढ़ाने को लेकर भी विशेष नियम बताए गए हैं हनुमान जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है लेकिन महिलाओं को स्वयं सिंदूर अर्पित करने से बचना चाहिए इसके बजाय वे दीप जलाकर और भोग अर्पित करके अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकती हैं पाठ और मंत्रों के संदर्भ में भी कुछ सावधानियां रखनी चाहिए परंपरानुसार महिलाओं को बजरंग बाण का पाठ नहीं करना चाहिए हालांकि वे हनुमान चालीसा और आरती का पाठ कर सकती हैं जिससे उन्हें समान रूप से पुण्य फल प्राप्त होता है शुद्धता का विशेष ध्यान रखना भी आवश्यक है यदि महिलाएं मासिक धर्म के दौरान हों तो उन्हें पूजा से दूरी बनानी चाहिए इसके अलावा यदि घर में सूतक की स्थिति हो तो भी पूजा करना वर्जित माना जाता है ऐसे समय में मानसिक रूप से स्मरण करना अधिक उचित होता है अंत में यह भी ध्यान रखें कि हनुमान जन्मोत्सव पर चोला और जनेऊ अर्पित करने की परंपरा है लेकिन महिलाओं को यह कार्य नहीं करना चाहिए इन सभी नियमों का उद्देश्य केवल परंपरा और आस्था की मर्यादा को बनाए रखना है हनुमान जी की सच्ची भक्ति मन की पवित्रता और श्रद्धा में होती है यदि कोई भक्त सच्चे मन से उनका स्मरण करता है तो उसे अवश्य ही बजरंगबली की कृपा प्राप्त होती है