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इच्छा मृत्यु का वरदान फिर भी 58 दिन बाणों पर क्यों लेटे रहे भीष्म पितामह जानिए असली रहस्य

नई दिल्ली । महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है। कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया। सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया। उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है। उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है। बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है।  महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है। कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया। सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया। उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है। उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है। बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है। अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है।

नवरात्रि समाप्त होने से पहले करें पीली सरसों के ये महाउपाय, आर्थिक तंगी और गृह-क्लेश दूर

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि का हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा के लिए समर्पित है और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मां चंद्रघंटा अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि और धन लाभ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। इन उपायों में पीली सरसों के उपाय काफी प्रभावी माने जाते हैं। सबसे पहले नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और नवरात्रि के दिनों में अपने घर के मुख्य द्वार पर लटका दें। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती। आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए रात को एक मुट्ठी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर किसी सुनसान चौराहे या बहते जल में प्रवाहित करें। इस उपाय से धन वृद्धि में बाधाएं दूर होती हैं। यदि कर्ज से छुटकारा पाना हो तो लाल कपड़े में पीली सरसों बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखें। नजर दोष और गृह-क्लेश से मुक्ति के लिए पीली सरसों और सेंधा नमक को मिलाकर पूरे घर में घुमाएं और फिर इसे घर की सीमा से बाहर फेंक दें। ऐसा करने से घर की भारी ऊर्जा समाप्त हो जाती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। करियर और व्यापार में उन्नति के लिए मंगलवार या रविवार की शाम यह उपाय करें। थोड़ी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर या किसी चौराहे पर फेंक दें। यह प्रयोग कार्यक्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है। मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि में नियमित पूजा करें और अपनी पूजा सामग्री में पीली सरसों को भी शामिल करें। पूजा की थाली में कुछ सरसों के दाने रखने से साधना पूर्ण मानी जाती है और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इन आसान पीली सरसों उपायों को अपनाकर आप नवरात्रि समाप्त होने से पहले आर्थिक तंगी, गृह-क्लेश, नजर दोष और कार्यक्षेत्र की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि का संचार भी सुनिश्चित होता है।

दुर्गा सप्तशती का दिव्य कवच हर संकट से रक्षा और हर मनोकामना पूरी करने का रहस्य

नई दिल्ली । सनातन धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। यह समय केवल पूजा अर्चना का नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का भी अवसर होता है। इन नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना करते हैं और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने का प्रयास करते हैं। इसी दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से फलदायी माना गया है जो साधक के जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गा सप्तशती केवल एक ग्रंथ नहीं बल्कि शक्ति का स्रोत है। इसका वर्णन मार्कंडेय पुराण में मिलता है जिसमें देवी की महिमा और उनके चमत्कारी स्वरूपों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसका एक महत्वपूर्ण भाग दुर्गा कवच है जिसे अत्यंत प्रभावशाली और रक्षक माना जाता है। कहा जाता है कि इसका नियमित पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं और उसे मानसिक शांति के साथ आत्मविश्वास भी प्राप्त होता है। दुर्गा कवच को एक आध्यात्मिक सुरक्षा कवच माना गया है जो साधक के शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा करता है। इसमें बताया गया है कि मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप शरीर के अलग अलग हिस्सों की सुरक्षा करते हैं। यह केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि गहन आध्यात्मिक अर्थ से जुड़ा हुआ है जो यह दर्शाता है कि देवी शक्ति हर दिशा में साधक की रक्षा करती हैं। मान्यता है कि चामुंडा देवी सिर की रक्षा करती हैं जिससे व्यक्ति के विचार शुद्ध और सकारात्मक बने रहते हैं। शैलजा आंखों की रक्षा कर सही दृष्टिकोण प्रदान करती हैं जबकि विशालाक्षी कानों की रक्षा कर सही और शुभ बातों को सुनने की शक्ति देती हैं। माहेश्वरी नाक की रक्षा करती हैं जो जीवन में संतुलन का प्रतीक है और महाकाली मुख की रक्षा कर वाणी में शक्ति और सत्य का संचार करती हैं। सरस्वती जीभ की रक्षा कर ज्ञान और विवेक प्रदान करती हैं। इसी प्रकार वाराही गर्दन की रक्षा कर जीवन में स्थिरता लाती हैं और अंबिका हृदय की रक्षा कर भावनाओं को संतुलित करती हैं। कौमारी भुजाओं को शक्ति देती हैं जिससे व्यक्ति कर्मशील बनता है और चंडिका हाथों की रक्षा कर हर कार्य में सफलता का मार्ग प्रशस्त करती हैं। नारायणी उदर की रक्षा कर स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखती हैं जबकि माहेश्वरी कमर की रक्षा कर जीवन में मजबूती देती हैं। महालक्ष्मी जांघों की रक्षा कर समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं और भैरवी घुटनों की रक्षा कर आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं। महाकाली पिंडलियों की रक्षा करती हैं और अंत में मां दुर्गा स्वयं पूरे शरीर और पैरों की रक्षा कर साधक को संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करती हैं। नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती और विशेष रूप से दुर्गा कवच का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भय को समाप्त करता है आत्मबल बढ़ाता है और जीवन को नई दिशा देता है। नवरात्रि के दौरान इसका पाठ करना विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि इस समय देवी शक्ति का प्रभाव अत्यधिक प्रबल होता है। सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया यह पाठ न केवल कष्टों को दूर करता है बल्कि सुख शांति और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

कुंभ राशि में चंद्र मंगल की युति से बनेगा महालक्ष्मी राजयोग, इन राशियों की चमक सकती है किस्मत

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रह समय समय पर अपनी स्थिति और चाल बदलते रहते हैं जिससे कई तरह के शुभ और अशुभ योग बनते हैं। इसी क्रम में कुंभ राशि में चंद्रमा और मंगल की युति बनने जा रही है जिससे महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। ज्योतिष शास्त्र में इस योग को बेहद शुभ माना जाता है जो धन सुख सुविधा तरक्की और नए अवसरों का संकेत देता है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है जबकि मंगल ऊर्जा साहस और भूमि संपत्ति से जुड़ा ग्रह है। इन दोनों ग्रहों की युति व्यक्ति के जीवन में आर्थिक मजबूती और करियर में प्रगति के संकेत देती है। आइए जानते हैं किन राशियों पर इस राजयोग का सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता हैमेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह योग लाभकारी साबित हो सकता है। आय में वृद्धि के संकेत हैं और लंबे समय से रुके कार्य पूरे हो सकते हैं। करियर और व्यवसाय में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और किसी बड़े सौदे से लाभ होने की संभावना है। कर्क राशि कर्क राशि के लोगों के लिए यह समय आर्थिक मजबूती लाने वाला हो सकता है। नौकरी और व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे। वरिष्ठों का सहयोग मिलेगा और धन लाभ के योग बनेंगे। साथ ही बचत में बढ़ोतरी हो सकती है और परिवार से जुड़ी खुशखबरी मिल सकती है। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह योग सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है। करियर में तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं। कार्यस्थल पर आपकी पहचान मजबूत होगी और सम्मान में वृद्धि होगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत भी मिल रहे हैं।

कल्प नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा के दर्शन से मिलेगा यश और आशीर्वाद इन मंदिरों में करें पूजा

नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है नवरात्रि का चौथा दिन मां कुष्मांडा को समर्पित होता है जिन्हें सृष्टि की आदिशक्ति और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है भक्तों का विश्वास है कि मां कुष्मांडा की आराधना करने से जीवन में यश बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है देशभर में मां कुष्मांडा के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां दर्शन करने से भक्तों को विशेष कृपा का अनुभव होता है इन मंदिरों में आस्था और चमत्कार से जुड़ी मान्यताएं लोगों को दूर दूर से आकर्षित करती हैं मध्य प्रदेश के दतिया में स्थित लमान माता मंदिर एक प्राचीन और प्रसिद्ध शक्तिपीठ माना जाता है इस मंदिर को नौकरी देने वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है स्थानीय मान्यता है कि जो व्यक्ति रोजगार की समस्याओं से जूझ रहा हो वह यहां दर्शन करके मां से प्रार्थना करे तो उसकी मनोकामना पूरी हो सकती है नवरात्रि के चौथे दिन यहां विशेष रूप से मालपुए का भोग लगाया जाता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं उत्तर प्रदेश में भी मां कुष्मांडा के कई प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं कानपुर में स्थित मां कुष्मांडा देवी मंदिर एक प्राचीन शक्तिपीठ है जहां का पवित्र जल विशेष महत्व रखता है मान्यता है कि इस जल को आंखों पर लगाने से नेत्र रोगों में राहत मिलती है और कई भक्त इस जल को अपने साथ भी लेकर जाते हैं यहां मां की प्रतिमा लेटी हुई अवस्था में विराजमान है जो इस मंदिर को और भी खास बनाती है इसके अलावा वाराणसी में स्थित दुर्गाकुंड मंदिर भी मां कुष्मांडा के दर्शन के लिए एक प्रमुख स्थान है इस मंदिर के पास स्थित विशाल जलकुंड इसे और भी विशेष बनाता है नवरात्रि के दौरान यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और कुंड में स्नान कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं इस मंदिर में मां लक्ष्मी सरस्वती और काली के रूप में भी पूजा होती है और नवरात्रि के चौथे दिन इन्हें मां कुष्मांडा के रूप में सजाया जाता है मां कुष्मांडा की उपासना का सबसे बड़ा महत्व यह है कि वे अपने भक्तों के जीवन से अंधकार दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं उनकी पूजा से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है बल्कि जीवन में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी आता है नवरात्रि का चौथा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है और मां कुष्मांडा के इन पावन मंदिरों में दर्शन करने से भक्तों को आशीर्वाद और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

22 मार्च का राशिफल: जानिए किन राशियों के लिए शुभ संकेत और किसे रहना होगा सतर्क

नई दिल्ली आज रविवार, 22 मार्च का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर विशेष महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विधान है और मान्यता है कि इससे जीवन में मान-सम्मान बना रहता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह दिन कुछ राशियों के लिए शुभ फल देने वाला है, वहीं कुछ लोगों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का हाल— मेषआज का दिन सामान्य रहेगा और कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी। हालांकि काम में लापरवाही ऑफिस पर असर डाल सकती है। आर्थिक लाभ के योग हैं, लेकिन ऑनलाइन लेन-देन में सावधानी रखें। दिन की शुरुआत व्यायाम से करना फायदेमंद रहेगा। वृषभआज सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में मिलने वाली चुनौतियां सफलता दिला सकती हैं। धन और स्वास्थ्य दोनों पक्ष मजबूत रहेंगे। प्रेम जीवन में भी मधुरता बनी रहेगी। मिथुनरिश्तों में सामंजस्य बनाए रखना जरूरी होगा। मेहनत का अच्छा फल करियर में मिलेगा। आर्थिक और स्वास्थ्य की स्थिति संतोषजनक रहेगी। प्रेम संबंधों में संवाद अहम भूमिका निभाएगा। कर्कआप अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की योजना बना सकते हैं। कुछ रिश्ते तनावपूर्ण महसूस हो सकते हैं, जिनसे दूरी बनाना बेहतर रहेगा। आर्थिक मामलों में किसी की मदद के लिए धन की जरूरत पड़ सकती है। सिंहआपकी योग्यता से क्लाइंट प्रभावित होंगे। यात्रा या किसी कार्यक्रम में खास मुलाकात संभव है। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। कन्याप्रेम संबंधों में विवाद से बचने की कोशिश करें। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी। मानसिक और शारीरिक रूप से आप स्वस्थ महसूस करेंगे। तुलाछोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याएं परेशान कर सकती हैं। साथी के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे। कामकाज में कुछ छोटी बाधाएं आ सकती हैं, जो दिन को प्रभावित करेंगी। धनुरिश्तों की समस्याओं को समझदारी से सुलझाने की जरूरत है। करियर में नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जो भविष्य में लाभ देंगी। आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी। मकरप्रेम जीवन में अहंकार से दूरी बनाकर रखें। आपका अनुशासन कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाएगा। स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है। कुंभआज आपको आगे बढ़ने के कई मौके मिल सकते हैं। किसी भी योजना को लागू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। टीम में विवाद से बचें। रिश्तों में बदलाव संभव है। मीनप्रेम जीवन सुखद रहेगा और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी और जरूरतों को आसानी से पूरा कर पाएंगे। स्वास्थ्य भी अनुकूल रहेगा। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

रविवार का राशिफल

युगाब्ध-5127, विक्रम संवत 2083, राष्ट्रीय शक संवत-1948, सूर्योदय 06.14, सूर्यास्त 06.20, ऋतु – ग्रीष्मचैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी, रविवार, 22 मार्च 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।मेष राशि :- सुबह-सुबह की महत्वपूूर्ण सिद्घि के बाद दिन-भर उत्साह रहेगा। किसी लाभदायक कार्य के लिए व्ययकारक स्थितियां पैदा होगी। अल्प-परिश्रम से ही लाभ होगा। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। घरेलू बहुमूल्य वस्तुओं के क्रय का योग है। शुभांक-3-5-7वृष राशि :- परामर्श व परिस्थिति सभी का सहयोग मिलेगा। अधिकारी वर्ग से आपकी निकटता बढ़ेगी। व्यावसायिक उपक्रम में उलटफेर की शुरूआत हो सकती है। स्थाई सम्पति के निर्माण, मरम्मत व पुर्नस्थापना पर व्ययभार बढ़ेगा। किसी की टीका-टिप्पणी से आपको परेशानी हो सकती हैं। शुभांक-2-4-5मिथुन राशि :- विश्वस्त लोगों के कहे अनुसार चलें। राजकीय कार्यों में सतर्कता बरतें। मान-सम्मान को ठेस लग सकती है। जोश से कम व होश में रहकर कार्य करें। नये आगंतुकों से लाभ होगा। कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। परिवार के साथ मनोरांजनिक स्थल की यात्रा होगी। शुभांक-2-4-6कर्क राशि :- पुरानी पारिवारिक समस्याओं का समाधान होगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। परिवार पक्ष से थोड़ी ङ्क्षचता रहेगी। शुभांक-1-3-5सिंह राशि :- दाम्पत्य जीवन में तनाव का वातावरण बन सकता हैं। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आत्मचिंतन करें। पुराने मित्र से मिलन होगा। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। खान-पान में सावधानी रखें। अपने अधीनस्थ लोगों से कम सहयोग मिलेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शुभांक-4-6-8कन्या राशि :- अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। अपने हित के काम सुबह-सवेरे निपटा लें। नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। परिवार में कोई मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। शुभांक-2-3-5तुला राशि :- कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। समय को देखकर कार्य करना ज्यादा हितकर रहेगा। परिश्रम अधिक करना पड़ेगा तभी आप लाभ की आशा कर सकते हैं। कार्य क्षेत्र में पदोन्नति के योग बनेंगे। दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। पुरुषार्थ का सहारा लें। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा और प्रसन्नताएं भी बढ़ेगी। शुभांक-2-5-6वृश्चिक राशि :- कर्म बल पर आपको सफलता मिलेगी। व्यवसायिक क्षेत्र में वर्तमान क्षमता को बढ़ाएंगे। उपक्रम का विस्तार करने का प्रयास सफल होगा। आप अच्छी सफलताएं प्राप्त करेंगे। बुद्घि कौशल से चुनौतीपूर्ण कार्यों में सफलता मिलेगी। आर्थिक दृष्टि से समय उपलब्धिकारक रहेगा। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-1-4-6धनु राशि :- संतान की ओर से हर्ष के प्रसंग बनेंगे। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। स्वास्थ्य कमजोर बना रहेगा। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। श्रम अधिक करना पड़ सकता है। वरिष्ठजनों से मतभेद उभर सकते हैं। शुभांक-3-5-6मकर राशि :- शनै:-शनै: स्थिति पक्ष की बनने लगेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। यात्रा परिणाम शुभ रहेगा। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होगी। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। अभिभावकों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने होंगे। शुभांक-2-4-6कुंभ राशि :- विकास के लिए बनाई योजना सफल होगी। अच्छा हो कि आप अपने उद्देश्य को लेकर सचेत रहें। प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य सौंपे जा सकते है जो कि अतिविश्वसनीय व्यक्तियों को ही दिये जाते हैं। कार्य साधक दिन है व्यर्थ न गंवाऐ। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-3-5-7मीन राशि :- व्यापार में स्थिति उत्तम रहेगी। उत्तरदायित्व की अधिकता निजी जीवन में अपने ही ढंग की परेशानियां पैदा करेगी। कारोबार की उन्नति के लिये एक से अधिक सीढ़ी चढ़कर लोंगो को आश्चर्य में डाल देगें। चल-अचल सम्पति में वृद्घि होगी। बौद्घिक क्षेत्र में प्रतियोगिता जीतने का मौका मिलेगा। शुभांक-2-5-6

शनिवार का राशिफल

युगाब्ध-5127, विक्रम संवत 2083, राष्ट्रीय शक संवत-1948, सूर्योदय 06.14, सूर्यास्त 06.20, ऋतु – ग्रीष्मचैत्र शुक्ल पक्ष तृतीया, शनिवार, 21 मार्च 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।मेष राशि :- स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। सफलता मिलेगी। शुभांक-5-7-9वृष राशि :- विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। परिवारजनों का सहयोग बना रहेगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-1-3-5मिथुन राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। धीरे-धीरे लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा उचित समय का इन्तजार करें। शुभांक-3-5-6कर्क राशि :- आय के अच्छे योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। कार्य सफल होंगे। दैनिक सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-2-5-7सिंह राशि :- व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा।  सही समय का इंतजार करें। शुभांक-2-4-6कन्या राशि :- मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। शुभ कार्यों में व्यय होगा। शुभांक-1-3-5तुला राशि :– लाभ में आशातीत वृद्घि तय है मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। विशिष्ट जनों से मेल-मुलाकात होगी। शुभांक-4-6-8वृश्चिक राशि :- जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। पर-प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। शुभ समाचारों मिलेगें। शुभांक-3-5-6धनु राशि :- प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा।  श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। आत्मीय श्रेष्ठता बनेगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। बुजुर्गों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आत्मचिन्तन करें। शुभांक-4-6-8मकर राशि :- कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। होश में रहकर कार्य करें। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। समय पर देनदार भी पैसे लौटाने में आनाकानी करेंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-6-8कुंभ राशि :- राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। शुभांक-2-4-5मीन राशि :- व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। आय-व्यय समान रहेगा। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। अभी सिर्फ आश्वासनों से संतोष करना बड़ेगा। शुभांक-1-3-5

साईं बाबा के प्रेरक उपदेश जीवन में शांति और संतुलन लाने का मार्ग

नई दिल्ली: भारत के महान संत साईं बाबा की शिक्षाएं आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं उनके विचार केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन ही नहीं बल्कि एक संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने का रास्ता भी दिखाते हैं उनके अनुसार जीवन का असली सार प्रेम करुणा सत्य और सेवा में छिपा है और यही गुण इंसान को एक बेहतर व्यक्ति बनाते हैं साईं बाबा का सबसे प्रसिद्ध संदेश है श्रद्धा और सबुरी जीवन में ये दो गुण व्यक्ति को हर परिस्थिति में मजबूत बनाए रखते हैं श्रद्धा का अर्थ है ईश्वर और स्वयं पर विश्वास रखना जबकि सबुरी का मतलब है धैर्य रखना और हर स्थिति का शांतिपूर्वक सामना करना बाबा कहते थे कि जो व्यक्ति इन दोनों को अपने जीवन में अपनाता है वह कभी निराश नहीं होता उनकी एक और महत्वपूर्ण सीख थी कि सबका मालिक एक है चाहे हम किसी भी धर्म या पंथ से जुड़े हों ईश्वर एक ही है और हर जगह उपस्थित है इस विचार के माध्यम से उन्होंने समाज में एकता और भाईचारे का संदेश दिया उनका मानना था कि सच्ची भक्ति वही है जो बिना किसी स्वार्थ के की जाए और जो व्यक्ति सच्चे मन से ईश्वर को पुकारता है उसकी हर प्रार्थना अवश्य सुनी जाती है साईं बाबा ने दान और सेवा को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया उन्होंने कहा कि दान करने से कभी धन कम नहीं होता बल्कि यह और बढ़ता है यह विचार आज भी लोगों को जरूरतमंदों की मदद करने के लिए प्रेरित करता है इसके साथ ही उन्होंने सत्य बोलने और दूसरों का सम्मान करने पर जोर दिया उनका मानना था कि हर व्यक्ति में ईश्वर का वास है इसलिए सभी के साथ समान और आदरपूर्ण व्यवहार करना चाहिए उनकी शिक्षाओं में प्रेम को सबसे बड़ा धर्म माना गया है साईं बाबा कहते थे कि प्रेम से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है और यही भावना समाज में शांति और सद्भाव को बढ़ाती है उन्होंने कर्म के सिद्धांत पर भी जोर दिया उनके अनुसार जैसा कर्म करेंगे वैसा ही फल मिलेगा इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए साईं बाबा ने ध्यान और भक्ति के माध्यम से आंतरिक शांति प्राप्त करने की शिक्षा दी उनका कहना था कि सच्ची शांति बाहर नहीं बल्कि हमारे अंदर होती है यदि मन शांत और स्थिर है तो जीवन की हर चुनौती को आसानी से पार किया जा सकता है  साईं बाबा की शिक्षाएं आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी पहले थीं उनके विचार हमें सिखाते हैं कि यदि हम अपने जीवन में श्रद्धा सबुरी प्रेम और सेवा को अपनाएं तो न केवल हमारा जीवन बेहतर बन सकता है बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है

दूब घास के स्वास्थ्य लाभ और नवरात्रि में इसका महत्व, जानिए कैसे करें उपयोग

नई दिल्ली चैत्र राष्ट्रीयता में डब घास का विशेष महत्व है। मां जगदंबा के पूजन में दूब घास अनिवार्य रूप से की जाती है, और घर में कन्या पूजन के समय भी इसका उपयोग पैर पूजन के लिए किया जाता है। परंतु डब केवल पूजा का हिस्सा नहीं है; इसके औषधीय एवं औषधीय गुण भी अत्यंत मूल्यवान हैं। आध्यात्मिक महत्वडब को मां जगदम्बा की पूजा में निक्की जाती है।पैर मोक्ष के दौरान कन्या पूजन का प्रयोग किया जाता है।इसे ‘अमृता’ की डिग्री दी गई है, जो इसे आध्यात्मिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्थान देता है। बाहरी उपयोग और लाभडब घास के बाहरी उपयोग से त्वचा और मैशवेरे पर लाभकारी लाभ है: चोट या पुराने घाव में डूबा हुआ घास का लेप लगाने से खून रुक जाता है और घाव जल्दी भर जाता है। सिर दर्द और नाक में दर्द से आराम मिलता है – सिर दर्द और नाक में दर्द से आराम मिलता है।त्वचा की सुरक्षा – गर्मियों में जलन हो या धूप से त्वचा पर असर हो रहा है।मुल्तानी मिट्टी के साथ प्रयोग – डब कोमार्क से मानसिक शांति और ताजगी मिलती है।आंतरिक उपयोग और लाभ डब ग्लास का सेवन आंतरिक स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी है:पेट की समस्या – अपच, गैस या अन्य पाचन संबंधी तत्वों से राहत।मासिक धर्म के दर्द से राहत – महिलाओं को मासिक धर्म के दर्द से राहत। सेवन करने से पहले हमेशा डॉक्टर की सलाह लें। आयुर्वेदिक गुणडब ग्लास कफ और वात दोष को शुरू किया गया है।नियमित उपयोग से शरीर में दोष संतुलन बना रहता है।न केवल मनुष्य, बल्कि कई साध्यों के लिए भी स्वास्थ्य परामर्श।