चातुर्मास कब से शुरू होगा? जानिए तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि और पालन के प्रमुख नियम

नई दिल्ली। सनातन धर्म में चातुर्मास को भक्ति, तपस्या और आत्मसंयम का विशेष काल माना जाता है। यह चार महीने का पावन समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी और इसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस दौरान श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास आएंगे। क्या है चातुर्मास का धार्मिक महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित रखा जाता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाती है। पौराणिक कथाओं में चातुर्मास का संबंध राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से बताया गया है। कथा के अनुसार, भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। दो पग में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया, जबकि तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और चार माह तक उनके द्वार पर रहने का संकल्प लिया। इसी परंपरा से चातुर्मास की मान्यता जुड़ी मानी जाती है। चातुर्मास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य? चातुर्मास के दौरान विवाह, यज्ञ, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार सहित अन्य बड़े शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई रोक नहीं होती। बल्कि इस समय को साधना, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। चातुर्मास में खान-पान के नियम इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और खान-पान में संयम रखने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु गुड़, तेल, बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, अधिक मसालेदार और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं। वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले भक्त प्याज, लहसुन और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाए रखते हैं। मास अनुसार परहेज के नियम इस प्रकार बताए गए हैं श्रावण मास: पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज।भाद्रपद मास: दही का सेवन नहीं किया जाता।आश्विन मास: दूध का त्याग करने की परंपरा है।कार्तिक मास: मांसाहार, विशेष रूप से मछली का सेवन वर्जित माना जाता है। चातुर्मास में कैसे करें पूजा और साधना? चातुर्मास का पालन घर पर रहकर भी सरलता से किया जा सकता है। इसके लिए प्रतिदिन भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। – प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु की पूजा करें।– दीप प्रज्वलित कर तुलसी दल अर्पित करें।– विष्णु सहस्रनाम अथवा हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।– चातुर्मास में कम से कम एकादशी व्रत अवश्य रखें।– किसी एक प्रिय वस्तु या आदत का त्याग कर व्यक्तिगत संकल्प लें।– श्रीमद्भागवत, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ एवं श्रवण करें।– अन्नदान, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक सेवा कार्यों में सहभागिता करें।धार्मिक दृष्टि से चातुर्मास केवल व्रत और नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और ईश्वर भक्ति को जीवन में उतारने का अवसर भी माना जाता है।
वास्तु शास्त्र में घड़ी का महत्व सही दिशा से बदल सकती है आर्थिक स्थिति

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में समय को केवल मापने का साधन नहीं माना जाता बल्कि इसे ऊर्जा और भाग्य से भी जोड़ा जाता है। घर में लगी दीवार घड़ी का प्रभाव केवल समय देखने तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह घर के वातावरण और आर्थिक स्थिति पर भी असर डालती है। माना जाता है कि यदि घड़ी सही दिशा और सही तरीके से लगाई जाए तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। वहीं गलत स्थान पर लगी या खराब घड़ी बाधाओं का कारण बन सकती है। घर में घड़ी का चयन भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु के अनुसार गोल आकार वाली घड़ी को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह निरंतरता और संतुलन का प्रतीक होती है। अंडाकार और चौकोर आकार भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। पेंडुलम वाली घड़ी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि उसकी गति घर में ऊर्जा के प्रवाह को सक्रिय बनाए रखती है। घड़ी के रंग का भी विशेष महत्व होता है। पूर्व दिशा के लिए हल्के रंग जैसे सफेद हल्का नीला और हल्का हरा शुभ माने जाते हैं। उत्तर दिशा में सफेद या धातु जैसे रंग बेहतर माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सही रंग का चयन मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता को बढ़ाता है। घड़ी की नियमित सफाई भी आवश्यक है क्योंकि धूल या गंदगी ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकती है। वास्तु के अनुसार घड़ी लगाने की दिशा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पूर्व दिशा को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह सूर्य उदय की दिशा है और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मानी जाती है। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है इसलिए यहां घड़ी लगाने से आर्थिक लाभ और समृद्धि के अवसर बढ़ते हैं। पश्चिम दिशा को भी उपयुक्त माना गया है यदि अन्य दिशा में स्थान उपलब्ध न हो। दक्षिण दिशा को घड़ी लगाने के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि इसे यम की दिशा कहा गया है। इस दिशा में घड़ी लगाने से मानसिक तनाव और रुकावटें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा दरवाजे के ठीक ऊपर घड़ी लगाना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे घर के सदस्यों पर दबाव और बेचैनी का प्रभाव पड़ सकता है। टूटी हुई या बंद घड़ी को घर में रखना भी नकारात्मक ऊर्जा का कारण माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि रुकी हुई घड़ी जीवन में रुकावटों और प्रगति में बाधा का संकेत देती है। घड़ी हमेशा सही समय दिखानी चाहिए या फिर हल्का आगे होना शुभ माना जाता है। पीछे चलने वाली घड़ी को प्रगति में रुकावट का प्रतीक माना जाता है। घर में घड़ी का सही चयन और सही स्थान न केवल समय को व्यवस्थित करता है बल्कि यह मानसिक शांति और आर्थिक उन्नति में भी सहायक माना जाता है। वास्तु के इन सरल नियमों का पालन करके व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है।
सोमवार पूजा विधि: भगवान शिव की कृपा पाने का सरल और प्रभावी तरीका, जानें पूरी विधि

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं। यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। सुबह की पूजा विधि: कैसे करें शिव आराधना की शुरुआतसोमवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद साफ और हल्के सफेद या नीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या शिवालय में जाकर भगवान शिव का ध्यान करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा की शुरुआत की जाती है। अभिषेक और पूजन की विधिभगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग का अभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सबसे पहले जल और गंगाजल से अभिषेक करें, उसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और भस्म चढ़ाना शुभ माना जाता है। बेलपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। मंत्र जाप और ध्यान का महत्वपूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। इससे मन शांत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है। यदि संभव हो तो रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है। इसके साथ शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। सोमवार व्रत की विधि और नियमसोमवार को व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार या दूध का सेवन करते हैं। व्रत के दौरान सात्विक आचरण अपनाना चाहिए और क्रोध, झूठ व नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। संध्या के समय शिव आरती कर व्रत का समापन किया जाता है। कई भक्त लगातार 16 सोमवार का व्रत रखते हैं, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है। दान और सेवा का महत्वसोमवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। सफेद वस्त्र, चावल, दूध या गरीबों को भोजन दान करना शुभ माना जाता है। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। क्या न करें इस दिनसोमवार के दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। किसी का अपमान, झूठ बोलना और क्रोध करना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है। इस दिन मन को शांत और भक्ति में लीन रखना चाहिए। सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सही विधि से पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
वास्तु शास्त्र में फ्रिज का रहस्य गलत रखरखाव से बढ़ सकता है घर का दोष

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु को ऊर्जा प्रवाह से जोड़ा जाता है और माना जाता है कि हर चीज का सही स्थान जीवन की दिशा और समृद्धि पर प्रभाव डालता है। इसी क्रम में फ्रिज को भी केवल एक घरेलू उपकरण नहीं बल्कि ऊर्जा संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। फ्रिज जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है और इसका गलत उपयोग या गलत स्थान पर रखा जाना घर में नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकता है। घर की रसोई में रखा फ्रिज केवल भोजन को सुरक्षित रखने का माध्यम नहीं होता बल्कि यह आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति से भी जुड़ा होता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार फ्रिज के ऊपर रखी जाने वाली वस्तुएं घर की ऊर्जा को प्रभावित करती हैं और कई बार अनजाने में आर्थिक नुकसान का कारण भी बन सकती हैं। फ्रिज के ऊपर दवाइयां रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। ऐसा करने से दवाइयों की प्रभावशीलता पर नकारात्मक असर पड़ता है और घर में असंतुलित ऊर्जा का संचार होता है। इसी तरह नकदी सिक्के या कीमती वस्तुएं फ्रिज के ऊपर रखना भी अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे धन के प्रवाह में रुकावट और अनावश्यक आर्थिक हानि की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा माइक्रोवेव टोस्टर जैसे भारी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी फ्रिज के ऊपर नहीं रखने चाहिए। इन उपकरणों के बीच ऊर्जा का टकराव होता है और साथ ही फ्रिज के कंपन के कारण इनके गिरने का खतरा भी बना रहता है। सूखे पौधे या मुरझाए हुए फूल भी फ्रिज के ऊपर रखना नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और घर के वातावरण को भारी बना सकता है। खाने पीने की वस्तुएं जैसे ब्रेड अनाज या शराब आदि को भी फ्रिज के ऊपर नहीं रखना चाहिए क्योंकि फ्रिज की गर्मी के कारण ये जल्दी खराब हो सकते हैं और इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव माना जाता है। वहीं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए कुछ उपाय भी बताए गए हैं। फ्रिज के दरवाजे पर स्वास्तिक जैसे शुभ प्रतीक या सकारात्मक संकेत वाले मैग्नेट लगाने से घर में सुख समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ती है। कुछ वास्तु विशेषज्ञ फ्रिज के ऊपर क्लीयर क्वार्ट्ज क्रिस्टल रखने की सलाह देते हैं जिससे वातावरण में ऊर्जा संतुलन बना रहता है। इसके अलावा फ्रिज के आसपास एक छोटा दीपक या सुगंधित मोमबत्ती रखना भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देने में सहायक माना जाता है। सेंधा नमक को एक छोटी कांच की कटोरी में रखकर फ्रिज के पास रखने से नकारात्मक ऊर्जा को सोखने में मदद मिलती है जिसे समय समय पर बदलना चाहिए। फ्रिज के लिए सही दिशा का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु के अनुसार फ्रिज को रसोई या डाइनिंग क्षेत्र के दक्षिण पश्चिम या दक्षिण पूर्व दिशा में रखना सबसे शुभ माना जाता है। उत्तर पूर्व दिशा में फ्रिज रखने से बचना चाहिए क्योंकि इसे ऊर्जा प्रवाह के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस प्रकार फ्रिज का सही उपयोग और उचित स्थान न केवल घर की ऊर्जा को संतुलित करता है बल्कि आर्थिक स्थिरता और मानसिक शांति बनाए रखने में भी सहायक माना जाता है।
रसोई में इन 5 चीजों का खाली होना पड़ सकता है भारी मां अन्नपूर्णा हो सकती हैं नाराज

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में रसोई को घर का सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र स्थान माना गया है क्योंकि यहीं से पूरे परिवार के स्वास्थ्य और समृद्धि का आधार तय होता है। मान्यता है कि रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है और उनकी कृपा से ही घर में अन्न धन और सुख समृद्धि बनी रहती है। ऐसे में रसोई में रखी कुछ आवश्यक वस्तुओं का कभी भी पूरी तरह खत्म होना शुभ नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार यदि रसोई में उपयोग होने वाली कुछ चीजें पूरी तरह समाप्त हो जाएं तो इससे नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर की आर्थिक स्थिति पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इन वस्तुओं का समय रहते ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है ताकि घर में बरकत बनी रहे और किसी प्रकार की तंगी का सामना न करना पड़े। नमक को वास्तु में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इसका संबंध राहु केतु और शुक्र ग्रह से जोड़ा जाता है। यदि रसोई में नमक पूरी तरह खत्म हो जाए तो इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। इससे घर में असंतुलन और आर्थिक परेशानियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए नमक के डिब्बे को कभी भी पूरी तरह खाली नहीं होने देना चाहिए। हल्दी को भी अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। इसका संबंध देवगुरु बृहस्पति से जोड़ा जाता है जो ज्ञान भाग्य और समृद्धि के कारक माने जाते हैं। रसोई में हल्दी का खत्म होना गुरु दोष का संकेत माना जाता है जिससे कार्यों में बाधाएं और आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है। चावल को शास्त्रों में अक्षत कहा गया है जिसका अर्थ है जो कभी नष्ट न हो। चावल का संबंध माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह से माना जाता है। यदि रसोई में चावल पूरी तरह समाप्त हो जाए तो इसे घर में सुख और ऐश्वर्य की कमी का संकेत माना जाता है जिससे आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। आटा भी रसोई की सबसे आवश्यक वस्तुओं में से एक है। इसे घर के मान सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है। यदि आटा पूरी तरह खत्म हो जाए तो इसे सामाजिक और आर्थिक प्रतिष्ठा में गिरावट का संकेत माना जाता है। इसलिए आटे के कनस्तर में हमेशा थोड़ा आटा बचा रहना चाहिए ताकि निरंतरता बनी रहे। सरसों का तेल भी वास्तु में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसका संबंध न्याय के देवता शनि से माना जाता है। यदि रसोई में सरसों का तेल अचानक खत्म हो जाए तो इसे शनि दोष या बाधाओं का संकेत माना जाता है जिससे कार्यों में रुकावट और अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। इन सभी वस्तुओं को सही तरीके से संभालना और समय रहते भरते रहना वास्तु के अनुसार बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। यह भी सलाह दी जाती है कि इन डिब्बों को पूरी तरह खाली होने से पहले ही नया सामान डाल दिया जाए। नमक को कांच के पात्र में रखना और हल्दी चावल व आटे को साफ और ढके हुए बर्तनों में रखना शुभ माना जाता है। इसके अलावा रसोई के उत्तर पूर्व दिशा में मां अन्नपूर्णा की तस्वीर या प्रतिमा रखना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे घर में अन्न धन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।
सोमवार वास्तु टिप्स: शिव कृपा और सकारात्मक ऊर्जा पाने के लिए अपनाएं ये सरल उपाय

नई दिल्ली । हिंदू परंपरा में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना गया है, और इसी के साथ वास्तु शास्त्र में भी इस दिन कुछ विशेष उपाय करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि यदि घर का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरा हो, तो जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और मानसिक संतुलन बना रहता है। सोमवार के दिन किए गए छोटे-छोटे वास्तु उपाय न केवल घर की ऊर्जा को शुद्ध करते हैं, बल्कि भगवान शिव की कृपा भी आकर्षित करते हैं। घर की सफाई से करें शुभ शुरुआतसोमवार के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छी तरह सफाई करना अत्यंत शुभ माना जाता है। विशेष रूप से पूजा स्थान, मुख्य द्वार और रसोई घर को स्वच्छ रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार साफ-सुथरा घर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है और नकारात्मकता को दूर करता है। यदि संभव हो तो घर में गंगाजल का छिड़काव करना भी लाभकारी माना जाता है। मुख्य द्वार पर दीपक जलाना है शुभ संकेतवास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार ऊर्जा का प्रवेश द्वार होता है। सोमवार के दिन मुख्य द्वार पर सरसों के तेल या घी का दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह उपाय घर में सुख-समृद्धि और शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है। शिव पूजा से बढ़ती है सकारात्मक ऊर्जासोमवार के दिन घर में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने से घर का वातावरण शुद्ध होता है। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। घर में शांति और सकारात्मक माहौल बनाए रखेंवास्तु के अनुसार सोमवार के दिन घर में कलह, क्रोध और नकारात्मक बातचीत से बचना चाहिए। इस दिन घर का वातावरण शांत और सौहार्दपूर्ण होना चाहिए। शांत संगीत या भजन चलाना भी घर की ऊर्जा को सकारात्मक बनाता है। जल और पौधों से जुड़ा वास्तु उपायसोमवार के दिन घर में तुलसी के पौधे को जल देना और उसकी देखभाल करना बहुत शुभ माना जाता है। तुलसी का पौधा न केवल वातावरण को शुद्ध करता है बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। इसके अलावा साफ पानी से भरा बर्तन घर के उत्तर-पूर्व दिशा में रखना भी शुभ संकेत देता है। क्या न करें इस दिनवास्तु के अनुसार सोमवार के दिन घर में टूटे-फूटे सामान को इकट्ठा नहीं रखना चाहिए। गंदगी और अव्यवस्था नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है। साथ ही इस दिन किसी से विवाद या झगड़ा करने से बचना चाहिए। सोमवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि इस दिन सरल वास्तु उपायों को अपनाया जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है।
सोमवार को भगवान शिव के लिए क्या करें, जानिए सरल और प्रभावी उपाय

नई दिल्ली । सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए छोटे-छोटे उपाय भी शुभ फल देने वाले माने जाते हैं। अगर आप सोमवार को भगवान शिव की पूजा करना चाहते हैं, तो ये सरल और प्रभावी तरीके अपनाए जा सकते हैं: 1. सुबह स्नान करके पूजा करेंसोमवार को जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के मंदिर में या शिवलिंग के सामने शांत मन से पूजा करें। 2. शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करेंभगवान शिव को जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना बहुत शुभ माना जाता है। इसे “पंचामृत अभिषेक” कहते हैं। 3. बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएंशिवजी को बेलपत्र बहुत प्रिय है। तीन पत्तों वाला बेलपत्र, सफेद फूल और धतूरा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 4. दीपक जलाएं और मंत्र जप करें“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। चाहें तो रुद्राक्ष की माला का उपयोग कर सकते हैं। 5. व्रत (Fast) रखेंसोमवार का व्रत रखने से मन की शांति और इच्छाओं की पूर्ति मानी जाती है। आप फलाहार या दूध का सेवन कर सकते हैं। 6. शिव चालीसा या रुद्राष्टक पढ़ेंभगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिव चालीसा, रुद्राष्टक या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें। 7. दान और सेवा करेंइस दिन सफेद वस्त्र, दूध, चावल या गरीबों को भोजन दान करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है। क्या न करेंकिसी का अपमान या झगड़ा न करेंमांस-मदिरा का सेवन न करेंक्रोध और नकारात्मक सोच से बचें सोमवार का दिन भगवान शिव की भक्ति और आत्मशुद्धि के लिए बहुत खास माना जाता है। सच्चे मन से “ॐ नमः शिवाय” का जाप और सरल पूजा करने से जीवन में शांति, सुख और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
22 जून राशिफल: कर्क राशि पर सरस्वती राजयोग का असर, करियर-धन में मिलेगी बड़ी सफलता

नई दिल्ली । 22 जून का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन ग्रहों के विशेष गोचर के कारण कर्क राशि में सरस्वती राजयोग और त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है। यह योग कुछ राशियों के लिए करियर, धन और सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकता है, जबकि कुछ राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मेष राशि के जातकों के लिए यह दिन ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं, लेकिन आर्थिक मामलों में लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए बजट को लेकर सतर्क रहना जरूरी होगा। वृष राशि के लोगों को हिम्मत और आत्मबल का लाभ मिलेगा। पारिवारिक जीवन और प्रेम संबंधों में सकारात्मक समय बिताने का अवसर मिलेगा, जिससे मानसिक संतुलन बना रहेगा। मिथुन राशि के लिए दिन थोड़ा सतर्कता भरा रह सकता है। कार्यक्षेत्र में सावधानी आवश्यक है और पैसों के लेन-देन में सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी गई है। फिजूलखर्ची से बचना लाभकारी रहेगा। कर्क राशि के लिए यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है, क्योंकि उनके ही राशि में सरस्वती राजयोग और त्रिग्रही योग बन रहा है। करियर में उन्नति और आर्थिक लाभ की प्रबल संभावना है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। सिंह राशि के जातकों को करियर में नए अवसर मिल सकते हैं, लेकिन वाणी और गुस्से पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, अन्यथा रिश्तों में तनाव पैदा हो सकता है। कन्या राशि के लोगों के रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। छात्रों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय अनुकूल है और सफलता के योग बन रहे हैं। तुला राशि के जातकों को अधिक भागदौड़ करनी पड़ सकती है। कार्य के साथ आराम का संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। परिवार के सहयोग से कुछ आर्थिक दबाव कम हो सकता है। वृश्चिक राशि के लिए दिन प्रेम और संबंधों के लिहाज से अच्छा रहेगा। कार्यस्थल पर मान-सम्मान बढ़ेगा और नई उपलब्धियां मिलने के संकेत हैं। धनु राशि के लोगों की किसी प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है, जो भविष्य में लाभकारी साबित होगी। सामाजिक गतिविधियों में सक्रियता बढ़ेगी। मकर राशि के लिए परिवार में किसी सदस्य की सेहत में सुधार होने के संकेत हैं। साथ ही अचानक कोई अच्छी खबर या उपहार मिलने की संभावना भी बन रही है। कुंभ राशि के जातकों की आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। आर्थिक मामलों में सतर्क रहने और बड़े निवेश से बचने की सलाह दी गई है। मीन राशि के नौकरीपेशा लोगों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। हालांकि, सेहत पर थोड़ा ध्यान देने की आवश्यकता रहेगी। कुल मिलाकर 22 जून का दिन कुछ राशियों के लिए अवसरों से भरा रहेगा, जबकि कुछ के लिए यह दिन सावधानी और संतुलन बनाए रखने का संकेत लेकर आया है।
12 अगस्त 2026 को लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं जानिए असर

नई दिल्ली ।खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए साल 2026 एक खास खगोलीय घटना लेकर आ रहा है। 12 अगस्त 2026 को साल का आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है जिसे दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। यह एक ऐसी स्थिति होती है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी को पूरी तरह या आंशिक रूप से ढक लेता है। इस दौरान कुछ समय के लिए दिन में अंधकार जैसा माहौल बन जाता है और आकाश में एक अद्भुत दृश्य दिखाई देता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है जिससे सूर्य के चारों ओर चमकती हुई एक रिंग जैसी संरचना नजर आती है जिसे कोरोना कहा जाता है। यह दृश्य बेहद आकर्षक और दुर्लभ माना जाता है जिसे देखने के लिए वैज्ञानिक और आम लोग दोनों ही उत्साहित रहते हैं। इस बार का सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप के कुछ हिस्सों जैसे स्पेन ग्रीनलैंड आइसलैंड और आर्कटिक क्षेत्र में दिखाई देगा। हालांकि भारत में यह ग्रहण किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा। इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप में इसे प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर नहीं मिलेगा। भारत में इस सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो ग्रहण किसी क्षेत्र में दिखाई नहीं देता उसका सूतक काल भी लागू नहीं होता। ऐसे में भारत में लोग अपने दैनिक कार्य पूजा-पाठ और सामान्य दिनचर्या बिना किसी प्रतिबंध के जारी रख सकते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण को देखने के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे सीधे आंखों से देखना खतरनाक हो सकता है क्योंकि सूर्य की तीव्र किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसे देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर वाले चश्मों का उपयोग करना चाहिए या फिर सुरक्षित प्रोजेक्शन तकनीक का सहारा लेना चाहिए। साधारण चश्मे या बिना सुरक्षा उपकरण के इसे देखना जोखिम भरा हो सकता है। इस प्रकार 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण जहां दुनिया के कुछ हिस्सों में एक यादगार खगोलीय दृश्य प्रस्तुत करेगा वहीं भारत में इसका कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होगा।
4 दिन रजस्वला रहेंगी मां कामाख्या, बंद रहेंगे मंदिर के कपाट; अंबुबाची मेले में उमड़ेगी आस्था

नई दिल्ली । असम के Kamakhya Temple में 22 जून से विश्व प्रसिद्ध अंबुबाची महापर्व का शुभारंभ होने जा रहा है। 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर को देवी शक्ति की आराधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि नीलाचल पर्वत पर स्थित इस शक्तिपीठ में देवी सती का योनि भाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। अंबुबाची पर्व के दौरान मान्यता है कि मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इसी वजह से मंदिर के कपाट तीन से चार दिनों के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस अवधि में नियमित पूजा-अर्चना और दर्शन भी स्थगित रहते हैं। श्रद्धालु इसे देवी की विश्राम अवधि मानते हैं, जिसके बाद मंदिर पुनः खुलने पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जब लाल हो जाता है सफेद वस्त्रकामाख्या मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यह है कि यहां देवी की कोई प्रतिमा नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में प्राकृतिक योनि-आकार की शिला की पूजा होती है, जिससे निरंतर जलधारा बहती रहती है। अंबुबाची पर्व शुरू होने से पहले पुजारी इस शिला के समीप सफेद वस्त्र रखते हैं। मान्यता के अनुसार, जब मंदिर के कपाट पुनः खोले जाते हैं तो यह वस्त्र लाल रंग का दिखाई देता है। इस पवित्र वस्त्र के छोटे-छोटे टुकड़ों को श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित किया जाता है। भक्त इसे देवी की कृपा और शुभता का प्रतीक मानते हैं। ब्रह्मपुत्र नदी और रहस्य का आकर्षणअंबुबाची मेले के दौरान यह भी मान्यता है कि पास बहने वाली Brahmaputra River का जल लालिमा लिए दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे देवी की दिव्य लीला मानते हैं। वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार जल में खनिज तत्वों और अन्य प्राकृतिक कारणों से ऐसा प्रभाव देखने को मिल सकता है। दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेलाअंबुबाची मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तांत्रिक साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है। देशभर से साधु, संत, अघोरी और तांत्रिक यहां पहुंचकर विशेष साधनाएं करते हैं। यही वजह है कि इसे दुनिया का सबसे बड़ा तांत्रिक मेला भी कहा जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर मां कामाख्या के दर्शन और आशीर्वाद के लिए गुवाहाटी पहुंचते हैं। मंदिर के कपाट खुलने के बाद विशेष पूजा-अर्चना होती है और फिर भक्तों के लिए दर्शन प्रारंभ किए जाते हैं।