मंगलवार व्रत के नियम: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नहीं मिलेगा हनुमान जी का आशीर्वाद

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना गया है। इस दिन भक्त व्रत रखकर बजरंगबली की पूजा करते हैं और जीवन के संकटों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में शक्ति, साहस और सफलता लाता है। लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि व्रत में नियमों का पालन न किया जाए तो उसका पूरा फल नष्ट भी हो सकता है। व्रत की सही विधि क्या है?व्रत की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान से होती है। इसके बाद साफ लाल वस्त्र पहनकर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। फिर हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर दीपक जलाया जाता है। उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और पान के पत्तों की माला अर्पित की जाती है। भोग के रूप में बेसन के लड्डू या बूंदी चढ़ाना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान ‘राम’ नाम का जप और मंगलवार व्रत कथा का पाठ करना जरूरी होता है। मंगलवार व्रत में जरूर बचें इन गलतियों सेधार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ नियमों का पालन न करने से व्रत का फल प्रभावित हो सकता है:– व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया हैप्याज, लहसुन, मांस और मदिरा से दूर रहना चाहिएमानसिक और शारीरिक पवित्रता बनाए रखना जरूरी हैव्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना गया हैदिनभर निराहार रहकर संयम रखना चाहिए शाम की पूजा के बाद ही गेहूं और गुड़ से बना सादा भोजन करना उचित माना जाता है, उसमें भी नमक का उपयोग नहीं करना चाहिए। आस्था और संयम का प्रतीक है मंगलवार व्रतमंगलवार व्रत केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त पूरी निष्ठा और नियमों के साथ हनुमान जी की आराधना करते हैं, उनके जीवन से भय, संकट और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मंगलवार के दिन करें हनुमान मंत्रों का जाप, हर संकट से मिलेगी बड़ी राहत

नई दिल्ली । मंगलवार का दिन हिंदू धर्म में हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होने और सुख-समृद्धि प्राप्त होने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन हनुमान जी की उपासना करने से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर स्वच्छ और विशेषकर लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा के लिए घर के ईशान कोण को साफ करके वहां हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की प्रतिमा या चित्र स्थापित किए जाते हैं। इसके बाद दीपक जलाकर पुष्प, माला और लाल सिंदूर अर्पित किया जाता है। इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। भोग के रूप में गुड़-चना और बूंदी चढ़ाने की परंपरा भी है। पूजा के दौरान हनुमान जी के विशेष मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। श्रद्धालु निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हैं, जिनमें शक्ति और संरक्षण का भाव निहित है- ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।इसके अलावा अन्य पवित्र मंत्रों का भी जाप किया जाता है, जिनसे मानसिक शांति और भय से मुक्ति मिलने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि नियमित रूप से इन मंत्रों का जाप करने से जीवन में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। मंगलवार को हनुमान जी को लाल सिंदूर और तिल का तेल अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना गया है। लाल वस्त्र और लाल पुष्प भी उन्हें अत्यंत प्रिय होते हैं। इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा भक्त के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाली मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हनुमान जी की भक्ति से व्यक्ति में साहस, शक्ति और आत्मविश्वास का विकास होता है। मंगलवार का दिन उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने का सर्वोत्तम अवसर माना जाता है, जो भक्तों को हर प्रकार के संकट से उबारने की क्षमता रखता है।
वट सावित्री व्रत 2026: नए व्रतियों के लिए आसान पूजा विधि और जरूरी नियम

नई दिल्ली । वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। इस व्रत का संबंध माता सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जिसमें सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले लिए थे। इसी कारण यह व्रत वैवाहिक जीवन की मजबूती और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा। यह तिथि ज्येष्ठ माह की अमावस्या को पड़ रही है। अमावस्या तिथि का आरंभ सुबह 5 बजकर 11 मिनट पर होगा और यह देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 16 मई को ही रखा जाएगा। जो महिलाएं पहली बार व्रत रखने जा रही हैं, उनके लिए नियमों का पालन बेहद जरूरी है। इस दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर वट वृक्ष की पूजा की जाती है। महिलाएं वट वृक्ष की परिक्रमा करती हैं और कच्चा सूत बांधकर पूजा करती हैं। सावित्री-सत्यवान की कथा सुनना इस व्रत का प्रमुख हिस्सा है। इसके बाद पति की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना की जाती है। पूजा के लिए इस दिन शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 12 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक रहेगा, जो अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस वर्ष वट सावित्री व्रत पर सौभाग्य योग और शोभन योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है। वट सावित्री व्रत न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण को भी दर्शाता है। पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वे पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा करें ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
कृतिका नक्षत्र में प्लूटो के प्रवेश से बदलेंगे इन राशियों के भाग्य, धन और सफलता के खुलेंगे नए रास्ते

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 12 मई 2026 का दिन खास माना जा रहा है। आज सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर अरुण ग्रह यानी प्लूटो ने कृतिका नक्षत्र में प्रवेश किया है। प्लूटो बेहद धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, इसलिए इसका प्रभाव लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक यह नक्षत्र परिवर्तन कई लोगों के जीवन में बड़े बदलाव, नए अवसर और अचानक मिलने वाली सफलताओं के संकेत दे सकता है। प्लूटो के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभावज्योतिष में प्लूटो को गहराई, परिवर्तन और छिपी शक्तियों का प्रतीक माना जाता है। कृतिका नक्षत्र में इसका प्रवेश पुराने कार्यों के परिणाम सामने लाने और नई शुरुआत के अवसर पैदा करने वाला माना जा रहा है। खासकर उन लोगों को लाभ मिल सकता है जो लंबे समय से मेहनत कर रहे हैं लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम नहीं मिले थे। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। पुराने निवेश से फायदा मिलने और अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। करियर में नई दिशा मिलने की संभावना भी है। सिंह राशिसिंह राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ सकता है। कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने और रुके हुए काम पूरे होने के संकेत हैं। सामाजिक मान-सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है। तुला राशितुला राशि के लोगों को भाग्य का साथ मिल सकता है। नए अवसर मिलने और निवेश से लाभ होने की संभावना जताई जा रही है। विदेश या नई जगह से जुड़े कामों में भी सफलता मिल सकती है। कुंभ राशिकुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर करियर में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। अचानक सफलता, आर्थिक मजबूती और नई योजनाओं में अच्छे परिणाम मिलने के संकेत हैं। इस दौरान क्या करेंज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस समय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित रखना चाहिए। अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करें और अचानक मिलने वाले अवसरों को नजरअंदाज न करें। सकारात्मक सोच बनाए रखना भी लाभकारी रहेगा।
आज ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल, जानिए हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

नई दिल्ली । आज 12 मई को ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमान जी की पहली भेंट हुई थी। इसलिए ज्येष्ठ के मंगलवार को विशेष रूप से बजरंगबली की पूजा का महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने, पूजा-पाठ करने, दान देने और भंडारा करवाने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि इस बार बड़ा मंगल पंचक काल में पड़ रहा है, जिसके चलते कई लोग पूजा के शुभ समय और पंचक के प्रभाव को लेकर सवाल कर रहे हैं। पूजा का शुभ मुहूर्तदूसरे बड़े मंगल पर पूजा का शुभ समय सुबह 8:55 बजे से दोपहर 1:59 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शाम को भी पूजा की जा सकती है। संध्या पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:03 बजे से रात 8:06 बजे तक बताया गया है। इस दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। पंचक में भी कर सकते हैं पूजाइस बार बड़ा मंगल रोग पंचक में पड़ रहा है। सामान्य तौर पर पंचक में शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है, लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की पूजा पंचक में भी की जा सकती है। कहा जाता है कि पंचमुखी हनुमान की आराधना करने से भय, तनाव और शत्रु बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान भंडारा करवाना भी शुभ माना गया है। हालांकि नए मांगलिक कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी गई है। ऐसे करें हनुमान जी की पूजाबड़ा मंगल पर हनुमान जी को सिंदूर, लाल चंदन और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही चमेली के तेल का दीपक जलाने का भी विशेष महत्व है। भक्त इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:- “ॐ नमो भगवते पंचवदनाय, पूर्वकपि मुखाय, सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा।”इस दिन हनुमान चालीसा, हनुमान बीसा और सुंदरकांड का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। हालांकि पंचक के दौरान हवन और यज्ञ करने से बचने की सलाह दी गई है। इन बातों का रखें ध्यान– पूजा के दौरान काले और नीले रंग के कपड़े पहनने से बचें। लाल, पीले और सफेद रंग को शुभ माना गया है।– व्रत रखने वाले लोगों को गुस्सा और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।– पूरे दिन सात्विक भोजन करें और मांसाहार व शराब से परहेज रखें।– ब्रह्मचर्य का पालन करना भी शुभ माना गया है।
पूजा में किन चीजों का दोबारा उपयोग करें और किनका नहीं? जानिए धार्मिक नियम और मान्यताएं

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और शुद्धता से जुड़ी एक गहन प्रक्रिया मानी जाती है। हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार किया जाता है ताकि पूजा का पूरा फल प्राप्त हो सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें शुद्ध मानकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि कुछ एक बार उपयोग के बाद अपवित्र मानी जाती हैं। किन चीजों का किया जा सकता है दोबारा उपयोग?पूजा में इस्तेमाल होने वाली कई धातु की वस्तुएं और पवित्र सामग्री ऐसी होती हैं जिन्हें साफ-सफाई के बाद दोबारा प्रयोग किया जा सकता है। धातु के पात्चांदी, पीतल और तांबे के बर्तन पूजा में बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन्हें एक बार उपयोग करने के बाद अच्छी तरह साफ करके फिर से पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है। पूजा सामग्रीभगवान की मूर्ति, शंख, घंटी, पूजा की माला और आसन भी बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं। इन्हें केवल स्वच्छता के साथ सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। तुलसीतुलसी को माता तुलसी का स्वरूप माना गया है। मान्यता है कि तुलसी कभी अपवित्र नहीं होती। यदि नई तुलसी उपलब्ध न हो, तो पहले से चढ़ाई गई तुलसी को भी दोबारा पूजा में उपयोग किया जा सकता है। बेलपत्भगवान शिव को अर्पित किया गया बेलपत्र भी कई मान्यताओं के अनुसार 6 महीने तक उपयोग योग्य माना जाता है, बशर्ते वह फटा या खराब न हो। किन चीजों का दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिएकुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें एक बार उपयोग करने के बाद दोबारा पूजा में इस्तेमाल करना अशुद्ध माना जाता है। भोग और प्रसाभगवान को चढ़ाया गया भोग और प्रसाद दोबारा उपयोग नहीं किया जाता। इसे ग्रहण या वितरण के बाद समाप्त मानना चाहिए। जल और फूलपूजा में चढ़ाया गया जल और फूल एक बार उपयोग के बाद अपवित्र माने जाते हैं, इसलिए इन्हें दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए। चंदन, कुमकुम और अक्षभगवान को अर्पित चंदन, कुमकुम और चावल (अक्षत) का दोबारा उपयोग वर्जित है। दीपक का तेल या घीपूजा में जलाए गए दीपक में बचा हुआ तेल या घी भी दोबारा प्रयोग नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यता और महत्शास्त्रों के अनुसार पूजा में शुद्धता और एकाग्रता का विशेष महत्व है। माना जाता है कि अपवित्र या उपयोग हो चुकी वस्तुओं का पुनः प्रयोग करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसलिए हर वस्तु का उपयोग नियमों के अनुसार करना आवश्यक बताया गया है। पूजा-पाठ में उपयोग होने वाली वस्तुओं का सही ज्ञान होना जरूरी है। जहां एक ओर कुछ चीजें शुद्ध मानी जाती हैं और बार-बार उपयोग की जा सकती हैं, वहीं कुछ वस्तुएं केवल एक बार के उपयोग के लिए होती हैं। इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक लाभ मिलता है, बल्कि पूजा की पवित्रता भी बनी रहती है।
2026–2027 का सूर्य ग्रहण: 2027 क्यों कहलाएगा ‘सदी का सबसे खास नजारा’? जानें पूरी सच्चाई

नई दिल्ली। खगोल विज्ञान के अनुसार 2026 और 2027 के बीच दो महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने को मिलेंगे, लेकिन इनमें 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण सबसे ज्यादा चर्चा में है। इसका कारण इसकी असाधारण लंबी अवधि और बड़े भौगोलिक क्षेत्र में दिखाई देना है, जो इसे बेहद दुर्लभ खगोलीय घटना बनाता है। 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहणयह पूर्ण सूर्य ग्रहण ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी स्पेन जैसे क्षेत्रों से दिखाई देगा। इस दौरान चंद्रमा सूर्य को कुछ मिनटों के लिए ढक लेगा और आकाश में शाम जैसा नजारा बन सकता है। इसकी कुल अवधि लगभग 2 मिनट से कुछ ज्यादा होगी, इसलिए यह एक सामान्य लेकिन आकर्षक पूर्ण ग्रहण माना जा रहा है। 2 अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण क्यों खास है?2 अगस्त 2027 को लगने वाला सूर्य ग्रहण 21वीं सदी के सबसे लंबे पूर्ण सूर्य ग्रहणों में से एक होगा। मिस्र के लक्सर जैसे स्थानों पर यह लगभग 6 मिनट से अधिक समय तक चलेगा। इतनी लंबी अवधि में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा और दिन में कुछ समय के लिए गहरा अंधेरा छा जाएगा। खगोलविदों के अनुसार ऐसा लंबा पूर्ण सूर्य ग्रहण बहुत दुर्लभ होता है और इसके बाद इतना लंबा ग्रहण 2114 तक देखने को नहीं मिलेगा। यही वजह है कि इसे “Eclipse of the Century” यानी सदी का सबसे खास खगोलीय नजारा कहा जा रहा है। देखने में क्या होगा अंतर?2026 ग्रहण: छोटा, लेकिन सुंदर सूर्यास्त के समय यूरोप में दिखाई देगा 2027 ग्रहण: लंबा, गहरा और अफ्रीका–मध्य पूर्व में व्यापक रूप से दिखेगा वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य का कोरोना (बाहरी चमकदार आवरण) साफ दिखाई देता है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाता है। दोनों ग्रहण महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 2027 का सूर्य ग्रहण अपनी लंबी अवधि और व्यापक दृश्यता के कारण बेहद दुर्लभ और ऐतिहासिक माना जा रहा है। यही कारण है कि खगोल प्रेमियों के लिए यह घटना किसी “सदी के शो” से कम नहीं होगी।
बड़ा मंगल: भक्ति, सेवा और आस्था का पावन पर्व

नई दिल्ली। बड़ा मंगल हिंदू धर्म में भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और लोकप्रिय पर्व है। यह विशेष रूप से ज्येष्ठ माह के मंगलवारों को मनाया जाता है। उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश के लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इस पर्व को बड़े उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है। बड़ा मंगल क्यों मनाया जाता है?बड़ा मंगल मनाने का मुख्य उद्देश्य भगवान Hanuman जी की आराधना करना और उनके आशीर्वाद से जीवन में शक्ति, साहस और संकटों से मुक्ति प्राप्त करना है। मान्यता है कि हनुमान जी संकटमोचक हैं और उनकी पूजा करने से: जीवन के कष्ट दूर होते हैं भय और नकारात्मकता समाप्त होती है आत्मविश्वास और साहस बढ़ता है मंगल ग्रह से जुड़े दोषों का प्रभाव कम होता है जीवन में सुख, शांति और सफलता मिलती है बड़ा मंगल की शुरुआत और इतिहासबड़ा मंगल की परंपरा बहुत पुरानी मानी जाती है, हालांकि इसका कोई एक निश्चित ऐतिहासिक प्रमाणित आरंभ नहीं मिलता। यह परंपरा मुख्य रूप से अवध क्षेत्र से जुड़ी हुई है। ऐसा माना जाता है कि, यह परंपरा कई सौ वर्ष पुरानी हैमुगल काल और अवध के नवाबों के समय में यह परंपरा और अधिक लोकप्रिय हुईलखनऊ में हनुमान मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा का आयोजन शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह परंपरा पूरे उत्तर भारत में फैल गई। समय के साथ यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सेवा का भी प्रतीक बन गया। बड़ा मंगल की परंपराएं और आयोजनबड़ा मंगल के दिन देशभर में विशेष धार्मिक और सामाजिक आयोजन किए जाते हैं: 1. विशेष पूजा और आरतीहनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और आरती का पाठ किया जाता है। 2. भंडारे और लंगरइस दिन सबसे खास परंपरा भंडारे की होती है, जिसमें हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है। यह सेवा भावना का प्रतीक है। 3. सेवा कार्यभक्त गरीबों, जरूरतमंदों और राहगीरों की सेवा करते हैं, जो इस पर्व की सबसे सुंदर विशेषता है। 4. भक्ति और जुलूसकई स्थानों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक जुलूस निकाले जाते हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है। बड़ा मंगल का सामाजिक महत्वबड़ा मंगल केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी प्रतीक है। यह दिन लोगों को जोड़ने का कार्य करता है और समाज में दया, करुणा और सहयोग की भावना को बढ़ाता है।इस दिन अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी लोग एक साथ सेवा और भक्ति में शामिल होते हैं। बड़ा मंगल का आधुनिक महत्वआज के समय में भी बड़ा मंगल की परंपरा उतनी ही मजबूत है। बदलते समय के साथ डिजिटल माध्यमों से भी भक्ति कार्यक्रम साझा किए जाते हैंबड़े स्तर पर भंडारों का आयोजन होता हैयुवा पीढ़ी भी इस परंपरा से जुड़ रही हैयह पर्व आधुनिक समाज में भी आस्था और सेवा का संतुलन बनाए हुए है।बड़ा मंगल हमें यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-पाठ में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता में निहित है। हनुमान जी की आराधना हमें जीवन में शक्ति, साहस और सकारात्मकता प्रदान करती है।यह पर्व हर साल भक्तों को यह याद दिलाता है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और मानवता की सेवा ही सच्ची पूजा है।
मेहनत के बाद भी नहीं मिल रही सफलता? अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय, बदल जाएगी किस्मत

नई दिल्ली। कई लोग दिन-रात मेहनत करने के बावजूद नौकरी और व्यापार में सफलता नहीं पा पाते। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसका कारण घर या कार्यस्थल में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और गलत दिशा में रखा गया सामान हो सकता है। अगर वातावरण सही हो तो व्यक्ति की सोच, आत्मविश्वास और अवसरों पर सीधा सकारात्मक असर पड़ता है। उत्तर दिशा को रखें हमेशा साफवास्तु में उत्तर दिशा को धन और करियर की दिशा माना गया है, जो भगवान कुबेर से जुड़ी है। इस दिशा में गंदगी, भारी सामान या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। इसे साफ रखने से आर्थिक प्रगति और नए अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है। सही दिशा में बैठकर करें कामकाम करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है। साथ ही पीठ के पीछे मजबूत दीवार होने से आत्मविश्वास बढ़ता है। मुख्य द्वार को बनाएं सकारात्मक ऊर्जा का स्रोतघर या ऑफिस का मुख्य द्वार ऊर्जा के प्रवेश का रास्ता होता है। इसे साफ, रोशन और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे पर स्वास्तिक, शुभ-लाभ या गणेश जी का चिन्ह लगाने से सकारात्मक माहौल बनता है। तिजोरी की सही दिशा रखें ध्यान मेंधन रखने वाली अलमारी या तिजोरी को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है। तिजोरी का मुख उत्तर दिशा की ओर हो तो धन स्थिर रहता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। टूटे और बेकार सामान तुरंत हटाएंघर या ऑफिस में टूटे उपकरण, बंद घड़ियां या कबाड़ नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं। इन्हें समय-समय पर हटाना जरूरी है, ताकि तरक्की में रुकावट न आए। पूजा और सकारात्मक ऊर्जा का महत्वभगवान गणेश और मां लक्ष्मी की नियमित पूजा करने से बाधाएं दूर होती हैं और समृद्धि बढ़ती है। दीपक और कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध और सकारात्मक बना रहता है। छोटे-छोटे वास्तु बदलाव आपकी मेहनत को सही दिशा देकर सफलता के रास्ते खोल सकते हैं।
करोड़ों का फ्लैट, भारी EMI… फिर भी घर में घुटन क्यों? जानें वास्तु का इंद्र–जयंत रहस्य

नई दिल्ली। आज के समय में लोग लाखों-करोड़ों रुपये लगाकर लग्जरी फ्लैट खरीद रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कई लोग शिकायत करते हैं कि घर में घुसते ही बेचैनी, तनाव और भारीपन महसूस होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसका कारण अक्सर घर की पूर्व दिशा में ऊर्जा संतुलन का बिगड़ना होता है, जिसे इंद्र और जयंत क्षेत्र से जोड़ा जाता है। वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा सूर्य की पहली किरणों और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी जाती है। इसी दिशा में इंद्र भाग सामाजिक प्रतिष्ठा, अवसर और सफलता से जुड़ा होता है, जबकि जयंत भाग आत्मविश्वास, मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। जब ये क्षेत्र बाधित होते हैं, तो घर में मानसिक अस्थिरता और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। आजकल कई आधुनिक फ्लैट्स में जगह की कमी के कारण पूर्व दिशा में भारी फर्नीचर, कबाड़, शू-रैक या बंद बालकनी जैसी चीजें रख दी जाती हैं। इससे प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवाह रुक जाता है, जिससे घर में “भारी ऊर्जा” महसूस हो सकती है। हालांकि यह पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध अवधारणा नहीं है, लेकिन जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रकाश और वेंटिलेशन के असर को आधुनिक विज्ञान भी स्वीकार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार सुबह की धूप और ताजी हवा शरीर के हार्मोन बैलेंस, मूड और नींद पर सकारात्मक असर डालती है। इसलिए घर में खुली जगह, साफ-सफाई और पर्याप्त रोशनी बेहद जरूरी मानी जाती है। समाधान के आसान उपायसुबह कुछ समय के लिए पूर्व दिशा की खिड़कियां खोलें उस क्षेत्र को हल्का और साफ रखें, भारी सामान न रखें प्राकृतिक रोशनी और हवा का अधिक से अधिक उपयोग करें हल्के रंगों और पौधों का इस्तेमाल करें कुल मिलाकर, चाहे इसे वास्तु कहा जाए या लाइफस्टाइल साइंस घर में खुलापन, रोशनी और साफ-सफाई मानसिक शांति के लिए जरूरी है। असली खुशी महंगे फ्लैट में नहीं, बल्कि संतुलित और शांत वातावरण में होती है।