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गुरु-शुक्र युति 2026: गजलक्ष्मी राजयोग से इन राशियों का बदलेगा भाग्‍य, बरसेगा धन और सुख-समृद्धि

नई दिल्ली। मई 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस दौरान ग्रहों की स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। 14 मई 2026 को शुक्र ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से ही गुरु विराजमान होंगे। दोनों ग्रहों की इस युति से गजलक्ष्मी राजयोग का निर्माण होगा। यह योग 2 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा और कुछ राशियों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। गजलक्ष्मी राजयोग कैसे बनेगा?ज्योतिषीय गणना के अनुसार, जब गुरु और शुक्र एक ही राशि में मिलते हैं, तो शुभ गजलक्ष्मी राजयोग बनता है। यह योग धन, वैभव, समृद्धि और सौभाग्य से जुड़ा माना जाता है। इस अवधि में कई लोगों के जीवन में करियर, वित्त और निजी संबंधों में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। वृषभ राशि: संपत्ति और करियर में बढ़तइस योग का सबसे अच्छा प्रभाव वृषभ राशि पर पड़ सकता है। संपत्ति में वृद्धि के योग बनेंगे और करियर में भी उन्नति देखने को मिलेगी। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिल सकता है, जबकि व्यापारियों को नई डील या अच्छा मुनाफा मिलने की संभावना है। अविवाहित लोगों के विवाह के योग भी बन सकते हैं। तुला राशि: पहचान और धन लाभतुला राशि के जातकों के लिए यह समय आर्थिक रूप से लाभकारी रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिल सकता है और निवेश के नए अवसर मिलेंगे। वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी और समाज में आपकी प्रतिष्ठा मजबूत होगी। धनु राशि: बड़ा आर्थिक लाभ और नई उपलब्धियांधनु राशि वालों के लिए यह योग भाग्यशाली साबित हो सकता है। नया घर या वाहन खरीदने के अवसर बन सकते हैं। व्यापार में लाभ और आर्थिक स्थिति में मजबूती देखने को मिलेगी। परिवार के साथ यात्रा के योग भी बन सकते हैं। मीन राशि: प्रेम और सुख में वृद्धिमीन राशि के लिए यह समय बेहद अनुकूल रहेगा। धन-संपत्ति में वृद्धि के साथ-साथ प्रेम जीवन भी मजबूत होगा। पुरानी परेशानियों से राहत मिलेगी और पारिवारिक जीवन में खुशियां बढ़ेंगी।

गरुड़ पुराण के रहस्य: जानिए मृत्यु के बाद 13 दिन तक क्यों निभाए जाते हैं सूतक और पिंडदान के नियम?

नई दिल्ली। सनातन धर्म में मृत्यु को जीवन का अटल सत्य माना गया है, जिसे कोई टाल नहीं सकता। लेकिन मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा कैसी होती है, यह जिज्ञासा हर व्यक्ति के मन में रहती है। गरुड़ पुराण में मृत्यु और उसके बाद की स्थिति को विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार, जैसे ही शरीर से प्राण निकलते हैं, आत्मा की यात्रा शुरू हो जाती है। यही कारण है कि मृत्यु के बाद 13 दिनों तक सूतक और पिंडदान से जुड़े नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है।मृत्यु के बाद आत्मा की पहली अवस्थाधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के तुरंत बाद यमदूत आत्मा को यमलोक ले जाते हैं, जहां उसे उसके कर्मों का लेखा-जोखा दिखाया जाता है। कुछ समय बाद आत्मा को वापस उसके घर लाया जाता है, ताकि वह अपने परिजनों को देख सके और अपने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया का साक्षी बन सके। 13 दिनों तक घर-परिवार के पास रहती है आत्मागरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा अपने घर और परिवार के आसपास ही रहती है। इस दौरान वह अपने प्रियजनों को देखती और उनकी बातें सुनती है, लेकिन उनसे संवाद नहीं कर पाती। यह समय आत्मा के लिए मोह और आत्मचिंतन का होता है, जिसमें वह अपने जीवन के कर्मों पर विचार करती है। पिंडदान का आध्यात्मिक महत्वधार्मिक मान्यता है कि परलोक की यात्रा लंबी और कठिन होती है। ऐसे में पिंडदान आत्मा के लिए उस यात्रा का आहार माना जाता है। जैसे कोई व्यक्ति लंबी यात्रा पर भोजन साथ ले जाता है, वैसे ही पिंडदान आत्मा को ऊर्जा और सहारा प्रदान करता है, जिससे वह यमलोक तक की यात्रा पूरी कर सके।तेरहवीं के बाद आत्मा को मिलती है मुक्ति की राहमृत्यु के 13वें दिन होने वाला तेरहवीं संस्कार बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। इन 13 दिनों तक आत्मा सांसारिक मोह में बंधी रहती है। तेरहवीं के अनुष्ठान के बाद आत्मा को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती है और वह इस संसार के बंधनों को छोड़कर अपनी अगली यात्रा पर निकल पड़ती है।शोक काल में गरुड़ पुराण पाठ की परंपरामृत्यु के बाद शोक के दिनों में गरुड़ पुराण का पाठ करना परंपरा का हिस्सा है। माना जाता है कि इससे आत्मा को मोह त्यागने और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है, जिससे उसे शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही यह पाठ परिवार के सदस्यों को इस कठिन समय में मानसिक संबल भी देता है। (डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)

सफलता के शिखर पर पहुंचने का गुप्त मार्ग: इन 3 रत्नों को अपनाने वाला व्यक्ति ही कहलाता है दुनिया का सबसे बड़ा भाग्यशाली

नई दिल्ली। चाणक्य नीति जीवन दर्शन का एक ऐसा स्तंभ है जो सदियों बाद आज भी मानव समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। आचार्य चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र के माध्यम से मनुष्य को भौतिकता और आध्यात्मिकता के बीच का अंतर समझाया है। उनके अनुसार संसार में जिन्हें हम रत्न मानकर अत्यधिक मूल्यवान समझते हैं और सुरक्षा के घेरे में रखते हैं वे वास्तव में केवल पाषाण के टुकड़े हैं। चाणक्य का मानना है कि असली रत्न वे नहीं जो तिजोरियों में बंद हों बल्कि वे हैं जो जीवन के अस्तित्व और सामाजिक समरसता के लिए अपरिहार्य हैं। आचार्य ने पृथ्वी पर तीन रत्नों को सर्वोपरि माना है जिनमें जल अन्न और मधुर वाणी शामिल है। उनके अनुसार इन तीनों के महत्व के सामने सोना चांदी और हीरा भी तुच्छ प्रतीत होते हैं क्योंकि ये धातुएं व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में अक्षम हैं। जीवन की निरंतरता के लिए जल को प्रथम और सबसे महत्वपूर्ण रत्न माना गया है। चाणक्य कहते हैं कि मनुष्य स्वर्ण आभूषणों के बिना जीवन व्यतीत कर सकता है लेकिन जल के बिना उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। जल न केवल प्यास बुझाता है बल्कि संपूर्ण प्रकृति और कृषि चक्र का आधार है। जो व्यक्ति जल की महत्ता को समझता है वही वास्तव में समझदार है। प्यास लगने पर स्वर्ण मुद्राएं गले को गीला नहीं कर सकतीं और न ही जीवन की रक्षा कर सकती हैं। इसलिए चाणक्य ने जल को किसी भी कीमती पत्थर से ऊपर रखा है क्योंकि यह प्राण रक्षक है। जल की उपलब्धता ही एक समृद्ध समाज और स्वस्थ शरीर का निर्माण करती है जिसे किसी भी भौतिक धन से खरीदा नहीं जा सकता। दूसरे रत्न के रूप में अन्न का स्थान आता है जिसे आचार्य चाणक्य ने अतुलनीय माना है। अन्न वह शक्ति है जो शरीर को ऊर्जा बल और बुद्धि प्रदान करती है। एक भूखे व्यक्ति के लिए सोने के भंडार का कोई मूल्य नहीं होता जब तक कि उसके पास अपनी जठराग्नि शांत करने के लिए भोजन न हो। अन्न ही वह माध्यम है जिससे संसार की समस्त व्यवस्थाएं संचालित होती हैं। चाणक्य के अनुसार जिस व्यक्ति के पास सम्मानपूर्वक अर्जित किया हुआ पर्याप्त अन्न उपलब्ध है वह विश्व का सबसे धनी व्यक्ति है। पेट की भूख केवल भोजन से ही शांत हो सकती है धन की चमक से नहीं। इसलिए अन्न को सहेजने और उसका सम्मान करने वाला व्यक्ति ही जीवन के वास्तविक सुख का अनुभव कर पाता है। आचार्य चाणक्य ने मधुर वाणी यानी सुभाषित को तीसरे रत्न के रूप में व्याख्यायित किया है। मधुर वाणी वह अद्वितीय धन है जो समाज में मान सम्मान और सफलता दिलाता है। कड़वे शब्द बोलने वाला व्यक्ति अपार संपत्ति के बावजूद अकेला रह जाता है जबकि मीठे और संयमित वचन बोलने वाला व्यक्ति शत्रुओं का हृदय भी जीत लेता है। मधुर वाणी बिगड़े हुए कार्यों को बनाने की क्षमता रखती है और रिश्तों में प्रेम का संचार करती है। यह एक ऐसा आभूषण है जिसे न तो कोई चुरा सकता है और न ही यह समय के साथ पुराना होता है। चाणक्य का संदेश स्पष्ट है कि मनुष्य को पत्थर के टुकड़ों को रत्न समझने की भूल नहीं करनी चाहिए बल्कि जीवन के इन तीन वास्तविक रत्नों को आत्मसात करना चाहिए।

आज ही अपनाएं ये वास्तु टिप्स, अक्षय तृतीया पर चमक उठेगा भाग्य

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के पर्व के दिन यानी आज अगर आप माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना करते हैं। उनकी आराधना करके उनका व्रत रखते हैं साथ ही कुछ छोटे-बड़े उपाय करते हैं। तब आपके घर परिवार में सुख समृद्धि आती है आपका जीवन खुशियों से भर जाता है तरक्की आपके पास आने लगती है। इसके साथ ही आपको यह नीचे बताए गए कुछ खास उपायों को जरूर करना चाहिए तो चलिए उन्हें जानते हैं। आज करें ये खास उपायअक्षय तृतीया पर घर की अच्छे से सफाई करनी चाहिए, विशेष रूप से मुख्य द्वार को साफ रखना चाहिए। नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखने के लिए घर में नमक मिले पानी से पोंछा लगाना चाहिए। घर या ऑफिस, कहीं भी अगर मकड़ी के जाले दिखते हैं, तो अक्षय तृतीया से पहले उसे जरूर साफ़ कर लें क्योंकि वास्तु शास्त्र के अनुसार मकड़ी के जाले धन को आने का रास्ता रोक देता है। ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आपके घर में आगमन करती हैं और खुशियां और बरकत लेकर आती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि आज के दिन सोना चांदी खरीदने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है आपके ऊपर अपनी कृपा बनाए रखती हैं।हर व्यक्ति सोना-चांदी खरीदने में सक्षम नहीं होता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे इस शुभ अवसर का लाभ नहीं उठा सकते। अगर कोई सोना-चांदी नहीं खरीद सकता, तो वह पीतल या कांसे के बर्तन खरीद सकता है. इसके अलावा, घर के लिए छोटी-छोटी धार्मिक वस्तुएं जैसे घंटी या शंख भी खरीदे जा सकते हैं। आज अक्षर से दिया के दिन आपको अपने मुख्य द्वार पर भी साफ सफाई पूरी तरह से रखनी चाहिए कहते हैं आज के दिन माता लक्ष्मी धरती पर भ्रमण करने आती हैं अगर आपके मुख्य द्वार पर अंधेरा रहेगा तो माता लक्ष्मी आपके घर में कभी भी प्रवेश नहीं करेगी इसलिए आपको इन सभी नियमों को ध्यान से समझना और मानना चाहिए ताकि आपके जीवन में बरकत हो सके।

धन-समृद्धि का पर्व अक्षय तृतीया: लक्ष्मी पूजन का खास महत्व और आसान तरीका

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र दिन माना जाता है। इस दिन को अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाली समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान-पुण्य और खरीदारी का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। लोग इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और नई चीजें खरीदते हैं ताकि घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि हो। इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा अर्चना भी की जाती है। इस दिन धरती पर भ्रमण करती हैंकथाओं के अनुसार कहा जाता हैं कि, अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी भ्रमण को निकलती हैं। इस दौरान भक्तों के घर जा कर उन्हें सुख समृदि का वरदान देती हैं। शास्त्रों और वाराह पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी 7 से 9 बजे तक भ्रमण करने जाती हैं। वहीं जहां पर माता लक्ष्मी के भक्त भक्ति भाव से उनकी पूजा अर्चना करते हैं वहां माता लक्ष्मी प्रकट होकर उनको आशीर्वाद देती हैं। वहीं कुछ लोगों का मनाना हैं कि, अक्षय तृतीया के दिन माता लक्ष्मी की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि इस दिन को धन, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-शांति और आर्थिक उन्नति बनी रहती है। आज अक्षय तृतीया पर इस विधि से करें लक्ष्मी पूजनअक्षय तृतीया पर विशेष रूप से लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थान पर चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। गंगाजल से भगवान का अभिषेक करें। अब देवी को रोली, चंदन, अक्षत अर्पित करें। इस दौरान फूल माला भी पहनाएं। यह शुभ होता है। पूजा के दौरान ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और खीर व पंचामृत का भोग बनाकर पूजा में शामिल करें। अंत में आरती करें और प्रसाद सभी में वितरित करें। मां लक्ष्मी की आरतीऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।मैया तुम ही जग-माता।।सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।मैया सुख संपत्ति दाता।जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।मैया तुम ही शुभदाता।कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।मैया सब सद्गुण आता।सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।मैया वस्त्र न कोई पाता।खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।मैया क्षीरोदधि-जाता।रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।मैया जो कोई नर गाता।उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।। ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।ऊं जय लक्ष्मी माता।।

19 अप्रैल से शुरू होगी Chardham Yatra 2026, जानें कब खुलेंगे केदारनाथ-बद्रीनाथ के कपाट

नई दिल्ली। Chardham Yatra 2026 का इंतजार अब खत्म हो गया है। उत्तराखंड की प्रसिद्ध धार्मिक यात्रा इस साल 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हर साल की तरह इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कब खुलेंगे चारों धाम के कपाटयात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल से यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई। इसके बाद केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले जाएंगे। वहीं, बद्रीनाथ धाम 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। इस तरह कुछ ही दिनों के भीतर चारों धाम के द्वार खुल जाएंगे और पूरी यात्रा शुरू हो जाएगी। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन करते हैं। क्या है Chardham Yatra का महत्व और तैयारियांचार धाम यात्रा का धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस यात्रा को करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इस बार भी सरकार ने यात्रा को सुगम बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू कर दी गई है, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक मैनेजमेंट को भी बेहतर बनाया जा रहा है। अगर आप भी इस साल चार धाम यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो समय रहते रजिस्ट्रेशन कराना और यात्रा की पूरी तैयारी करना जरूरी है, क्योंकि सीजन के दौरान भारी भीड़ देखने को मिलती है।

अक्षय तृतीया पर इन वस्तुओं से रहें दूर सोना चांदी के साथ ये गलत खरीदारी ला सकती है पनौती

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया को अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाला पर्व माना जाता है इस दिन सोना चांदी जमीन और वाहन जैसी कीमती वस्तुओं की खरीदारी को विशेष रूप से शुभ समझा जाता है मान्यता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्य का फल लंबे समय तक और अक्षय रूप में मिलता है यानी उसका शुभ प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाई जाएगी यह शुभ तिथि 19 अप्रैल सुबह 10 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7 बजकर 28 मिनट तक रहेगी इस दौरान कई महत्वपूर्ण शुभ योग भी बन रहे हैं जिनमें सर्वार्थ सिद्धि योग अमृत सिद्धि योग और गज केसरी योग शामिल हैं साथ ही रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस दिन को और अधिक फलदायी बना रहा है हालांकि इस दिन को बेहद शुभ माना जाता है लेकिन ज्योतिष और लोक मान्यताओं के अनुसार कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है माना जाता है कि गलत चीजें खरीदने से घर में अशांति आर्थिक बाधाएं या मानसिक तनाव बढ़ सकता है विशेषज्ञों के अनुसार इस दिन लोहे और स्टील से बनी वस्तुएं जैसे बर्तन या मशीनरी घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि इसे नकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है इसी तरह प्लास्टिक की वस्तुएं भी अशुभ मानी जाती हैं जो घर की समृद्धि पर असर डाल सकती हैं इसके अलावा काले रंग की वस्तुओं को भी इस दिन न खरीदने की सलाह दी जाती है क्योंकि काला रंग शनि और नकारात्मक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है धारदार या नुकीली चीजें जैसे चाकू कैंची या सुई आदि भी इस दिन घर लाना शुभ नहीं माना जाता क्योंकि यह तनाव और विवाद का कारण बन सकता है कांच से बनी वस्तुओं को भी राहु ग्रह से जोड़कर देखा जाता है इसलिए इन्हें भी इस दिन खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है साथ ही इस दिन किसी को उधार देना या लेना भी अशुभ माना जाता है क्योंकि इससे आर्थिक अस्थिरता बढ़ सकती है ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन पैसों से जुड़े निर्णय भी सोच समझकर लेने चाहिए और अनावश्यक खर्च या उधारी से बचना चाहिए ताकि सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि बनी रहे कुल मिलाकर अक्षय तृतीया का दिन जितना शुभ माना जाता है उतना ही जरूरी है कि इस दिन सही और गलत खरीदारी के बारे में जागरूक रहा जाए ताकि इस पर्व का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सके

Parshuram Jayanti: आज भगवान परशुराम जयंती, जानें पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

नई दिल्ली । शस्त्र और शास्त्र के महान ज्ञाता भगवान परशुराम की जयंती 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन अक्षय तृतीया का भी विशेष संयोग बन रहा है। भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाने वाले परशुराम जी की पूजा शक्ति धर्म और न्याय की स्थापना के लिए की जाती है। जानें शुभ मुहूर्त का समय वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से होगी जो 20 अप्रैल को सुबह 7:27 बजे तक रहेगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:29 से दोपहर 12:20 तक रहेगा जबकि सुबह 6:49 से 10:57 बजे तक का समय भी पूजन के लिए अनुकूल माना गया है। पूजा करने की विधि सुबह स्नान कर स्वच्छ या पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर पूजा शुरू करें और अक्षत फूल विशेषकर पीले या सफेद पुष्प अर्पित करें। इसके बाद फल मिठाई या गुड़-चना का भोग लगाएं और “ॐ जमदग्नये विद्महे महावीराय धीमहि तन्नो परशुराम प्रचोदयात्” मंत्र का 11 या 21 बार जप करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरण करें। परशुराम जी की पौराणिक कथा मान्यता के अनुसार परशुराम जी के पिता ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका थीं। कठोर तपस्या के बाद उन्हें यह दिव्य पुत्र प्राप्त हुआ। जन्म के समय उनका नाम ‘राम’ रखा गया था। भगवान शिव की कृपा से उन्हें परशु (फरसा) प्राप्त हुआ और तभी से वे परशुराम कहलाए। उन्हें चिरंजीवी होने का वरदान भी प्राप्त है। परशुराम जी एक ऐसे ब्राह्मण योद्धा थे जिन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों में महारत हासिल की। उनका जीवन यह संदेश देता है कि शक्ति का उपयोग हमेशा धर्म और न्याय के लिए होना चाहिए। रामायण और महाभारत में भूमिका पौराणिक ग्रंथों के अनुसार परशुराम जी ने भगवान राम और भगवान कृष्ण दोनों के युग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रामायण काल में उनका सामना भगवान राम से हुआ जबकि महाभारत काल में वे भीष्म द्रोणाचार्य और कर्ण जैसे महान योद्धाओं के गुरु रहे। मान्यता है कि परशुराम जी ने अधर्म और अत्याचार को समाप्त करने के लिए 21 बार क्षत्रियों का संहार किया। उनका जीवन धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना का प्रतीक माना जाता है।

शादी से लेकर गृह प्रवेश ,तक बिना मुहूर्त के, भी होते हैं शुभ कार्य जानिए अबूझ मुहूर्त के दिन

नई दिल्ली । हिंदू परंपराओं में शुभ कार्यों के लिए मुहूर्त का विशेष महत्व माना जाता है लेकिन कुछ ऐसे विशेष समय भी होते हैं जब किसी पंचांग या ज्योतिषीय गणना की आवश्यकता नहीं होती और इन समयों को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है आम धारणा यह है कि यह योग केवल अक्षय तृतीया तक ही सीमित होता है लेकिन वास्तविकता यह है कि साल में कई ऐसे अवसर आते हैं जब बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में लगभग साढ़े तीन दिन ऐसे माने जाते हैं जिन्हें स्वयंसिद्ध या अबूझ मुहूर्त कहा जाता है इन दिनों में ग्रह नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि किसी भी शुभ कार्य की सफलता के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं होती इन विशेष अवसरों में चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और एक आधा अतिरिक्त शुभ योग शामिल होता है इन दिनों को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है और धार्मिक दृष्टि से इन्हें अत्यधिक महत्व प्राप्त है इन अबूझ मुहूर्तों में विवाह जैसे बड़े मांगलिक कार्य विशेष रूप से किए जाते हैं क्योंकि माना जाता है कि इस समय किया गया विवाह स्थायी और सुखद होता है खासकर उन जोड़ों के लिए जिनकी कुंडली का मिलान कठिन होता है उनके लिए यह दिन वरदान के समान माने जाते हैं इसके अलावा गृह प्रवेश, नए मकान की नींव रखना, सोना चांदी, वाहन या जमीन की खरीदारी जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी इन दिनों में शुभ माने जाते हैं व्यवसाय शुरू करना भी इस समय अत्यंत लाभकारी माना जाता है क्योंकि यह समय सफलता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है बच्चों से जुड़े संस्कार जैसे अन्नप्राशन, कर्णवेध, नामकरण, विद्यारंभ और मुंडन संस्कार भी इन शुभ दिनों में संपन्न किए जाते हैं धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए सभी कार्यों का फल कई गुना बढ़कर मिलता है और उन्हें अक्षय पुण्य प्राप्त होता है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार अबूझ मुहूर्त का अर्थ है ऐसा समय जो स्वयं में पूर्ण रूप से शुभ हो और जिसमें किसी विशेष गणना की आवश्यकता न हो इन दिनों को इतना शुभ माना जाता है कि कोई भी कार्य बिना बाधा के सफल होने की संभावना अधिक रहती है कुल मिलाकर यह मान्यता भारतीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां समय को केवल कैलेंडर नहीं बल्कि शुभ और अशुभ ऊर्जा के आधार पर भी देखा जाता है

19 अप्रैल का राशिफल: जानें सभी 12 राशियों का हाल, किसे मिलेगा फायदा और किसे बरतनी होगी सावधानी

नई दिल्ली । आज 19 अप्रैल, रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है। इस दिन सुबह सूर्य को अर्घ्य देने से सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल बढ़ता है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल का असर सभी राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन तक सभी राशियों का आज का राशिफल—मेष राशि आज का दिन व्यस्तता भरा रह सकता है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों के मामलों में जल्दबाजी से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से राहत मिलेगी और थकान भी महसूस हो सकती है। वृषभ राशि धैर्य बनाए रखना जरूरी है। कुछ काम उम्मीद के अनुसार पूरे नहीं होंगे। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें। रिश्तों में संवाद से समस्याएं सुलझ सकती हैं। ओवरथिंकिंग से बचें। मिथुन राशि दिन सकारात्मक रहेगा। रुके हुए काम आगे बढ़ेंगे और दोस्तों का सहयोग मिलेगा। खर्च बढ़ सकता है, इसलिए बजट संभालकर चलें। नई योजनाओं के लिए समय अनुकूल है। कर्क राशि भावनात्मक उतार-चढ़ाव रह सकता है, लेकिन काम पर ध्यान देंगे तो स्थिति संभल जाएगी। परिवार की जिम्मेदारियां निभानी होंगी। पुराने दोस्त से बातचीत मन को खुश करेगी।सिंह राशि आत्मविश्वास में वृद्धि होगी और कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। गुस्से पर नियंत्रण रखें। शाम का समय आराम के लिए बेहतर रहेगा। कन्या राशि मेहनत का फल धीरे-धीरे मिलने लगेगा। काम का दबाव रह सकता है, लेकिन आप संभाल लेंगे। आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी। खानपान पर ध्यान दें। तुला राशि दिन सामान्य रहेगा। रोजमर्रा के काम पूरे होंगे। सेहत का ध्यान रखें और अनावश्यक सोच से बचें। घर का माहौल शांत रखने की कोशिश करें। वृश्चिक राशि आज अपने दिल की सुनें। काम धीरे-धीरे आगे बढ़ेगा। परिवार का सहयोग मिलेगा। तनाव से दूर रहें और ठंडे दिमाग से निर्णय लें। धनु राशि महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिल सकती है। परिवार और पार्टनर का सहयोग मिलेगा। नए लोगों से मुलाकात लाभदायक रहेगी। सकारात्मक सोच बनाए रखें। मकर राशि दिन थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा हो सकता है। धैर्य रखें और विवाद से बचें। आर्थिक मामलों में सावधानी जरूरी है। शाम तक हालात बेहतर होंगे। कुंभ राशि नई जानकारी या अवसर मिल सकता है। काम में फोकस बनाए रखें। परिवार के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे। खर्चों पर नियंत्रण रखें। मीन राशि क्रिएटिव कामों के लिए दिन अच्छा है। नई सोच आपके काम आएगी। दोस्तों से बातचीत से मन प्रसन्न रहेगा। सेहत ठीक रहेगी, लेकिन बाहर के खाने से बचें।