मार्च 2026 में बैंक 18 दिन बंद, जरूरी लेनदेन पहले निपटाएं

नई दिल्ली। मार्च 2026 में देशभर के बैंक कुल 18 दिन बंद रहेंगे। भारतीय रिज़र्व बैंक के आधिकारिक कैलेंडर के अनुसार इसमें पांच रविवार, दूसरे और चौथे शनिवार के नियमित अवकाश के साथ-साथ अलग-अलग राज्यों में 11 अतिरिक्त छुट्टियाँ शामिल हैं। यह अवधि शाखा-स्तरीय बैंकिंग सेवाओं को प्रभावित करेगी इसलिए ग्राहकों को जरूरी वित्तीय काम पहले से निपटाने की सलाह दी जा रही है। अवकाश की व्यवस्था क्षेत्रीय त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और प्रशासनिक छुट्टियों के आधार पर तय की जाती है। इसलिए सभी राज्यों में एक साथ बैंक बंद नहीं रहेंगे। जहां संबंधित पर्व या स्थानीय छुट्टी घोषित होगी, वहीं शाखाएँ बंद रहेंगी। इस तरह बैंकिंग संचालन संतुलित रहता है और आवश्यक सेवाएँ पूरी तरह बाधित नहीं होतीं। हालांकि, बैंक बंद रहने के बावजूद डिजिटल माध्यमों की सेवाएँ सामान्य रूप से चालू रहेंगी। ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सेवाओं के जरिए ग्राहक धन हस्तांतरण, बिल भुगतान और अन्य लेनदेन आसानी से कर सकेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल बैंकिंग ने छुट्टियों के दौरान सेवा व्यवधान के प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया है। फिर भी शाखा आधारित सेवाएँ जैसे चेक क्लियरेंस और कैश डिपॉजिट अवकाश के दौरान प्रभावित हो सकती हैं। वित्तीय गतिविधियों की दृष्टि से मार्च में शेयर बाजार में भी सीमित कारोबारी दिन रहेंगे। सप्ताहांत अवकाश और कुछ प्रमुख त्योहारों के कारण बाजार बंद रहेगा। निवेशकों और ट्रेडरों को अपने सौदों की योजना समय से बनानी होगी ताकि किसी तरह की वित्तीय हानि न हो। लगातार अवकाश वाले महीनों में नकदी प्रबंधन और भुगतान चक्र पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। बैंकिंग क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि छुट्टियों की पूर्व जानकारी ग्राहकों को वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है। व्यापारियों, वेतनभोगी कर्मचारियों और लोनधारकों के लिए भुगतान तिथियों का समुचित प्रबंधन जरूरी है। समय पर ईएमआई, चेक जमा और अन्य भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल विकल्पों का उपयोग करना लाभकारी रहेगा। यह अवकाश सूची सार्वजनिक हित के लिए जारी की गई है ताकि आम नागरिक, व्यापारी और संस्थान अपनी वित्तीय गतिविधियों की पूर्व योजना बना सकें। बैंकिंग प्रणाली के सुचारु संचालन और उपभोक्ता सुविधा के लिए समय-समय पर ऐसे अपडेट जारी किए जाते हैं। मार्च 2026 के अवकाश कार्यक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि बदलते वित्तीय परिवेश में डिजिटल बैंकिंग अब वैकल्पिक नहीं बल्कि आवश्यक सेवा बन चुकी है। इसलिए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे अपने राज्य के अनुसार अवकाश सूची की पुष्टि कर अपने जरूरी कार्य समय रहते पूरा कर लें।
गुरुवार का दिन: व्रत, पूजा और दान से जीवन में सुख और समृद्धि पाएं

नई दिल्ली। गुरुवार को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व प्राप्त है। इसे श्रद्धा संयम और गुरु तत्व के सम्मान का दिन माना जाता है। आस्था और सेवा भाव के साथ किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। पंचांग और धर्मग्रंथों के अनुसार गुरुवार भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना का अनुकूल दिन है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से ज्ञान, समृद्धि और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरुवार को पीले रंग का विशेष महत्व है। पीले रंग को गुरु का प्रतीक माना गया है। इसलिए व्रत पूजा और दान में पीले पदार्थों का प्रयोग शुभ माना जाता है। प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्र धारण करना चाहिए और भगवान विष्णु के समक्ष दीप प्रज्वलित करना चाहिए। इसके बाद तुलसी की माला से 11 या 21 बार “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करने से गुरु कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद चने की दाल गुड़ या पीले फलों का भोग अर्पित करना लाभकारी माना गया है। गुरुवार को केले के वृक्ष की पूजा भी अत्यंत फलदायी मानी गई है। पूजा विधि में वृक्ष के नीचे जल अर्पित करें हल्दी का तिलक लगाएं और दीपक जलाकर समृद्धि की कामना करें। धार्मिक परंपरा अनुसार गुरुवार को हल्दी चने की दाल पीले फल या बेसन से बने प्रसाद का दान करना शुभ फल देता है। श्रद्धालु सुख समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए गुरुवार व्रत रखते हैं और सत्यनारायण कथा का श्रवण करते हैं। गुरुवार के दिन माथे पर हल्दी या केसर का तिलक लगाना गुरु कृपा का प्रतीक माना गया है। संयमित व्यवहार और सकारात्मक संकल्प इस दिन की आध्यात्मिक साधना को पूर्णता देते हैं। इस दिन किए गए कर्म और पूजा के प्रभाव से जीवन में मानसिक संतुलन और स्थिरता आती है। हालांकि परंपराओं में गुरुवार को कुछ कार्यों से बचने की सलाह भी दी गई है। सिर धोना या बाल कटवाना, हल्दी या धन उधार देना, घर में पोछा लगाना या पीली वस्तुओं का अपमान करना वर्जित कार्य माने गए हैं। इन बातों का पालन करने से गुरुवार की पूजा और व्रत का पूर्ण लाभ मिलता है। धार्मिक दृष्टि से गुरुवार का दिन साधना ध्यान और पूजा के लिए विशेष फलदायी है। यह दिन जीवन में समृद्धि सुख और ज्ञान के मार्ग खोलता है। गुरु और भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए नियमित पूजा व मंत्र जाप अत्यंत आवश्यक है। छोटे उपाय जैसे पीले वस्त्र, केले के वृक्ष की पूजा और दान-पुण्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आशीर्वाद लाते हैं।इस प्रकार गुरुवार केवल सप्ताह का एक दिन नहीं है बल्कि जीवन में स्थिरता और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देता है। श्रद्धा संयम और सेवा भाव के माध्यम से इस दिन की पूजा करना हर व्यक्ति के लिए लाभकारी और फलदायी है।
आज का पंचांग 26 फरवरी 2026, फाल्गुन शुक्ल दशमी: प्रीति योग और शुभ मुहूर्त से दिन बने विशेष

नई दिल्ली। आज 26 फरवरी 2026 गुरुवार को फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष दशमी तिथि के साथ दिन की शुरुआत हुई। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह दिन आध्यात्मिक साधना, ज्ञानार्जन, दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार दशमी तिथि रात्रि 12 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी और ग्रहों की स्थिति मानव जीवन के बौद्धिक और सामाजिक पक्ष को सुदृढ़ करने में सहायक होगी। खगोलीय दृष्टि से आज सूर्य मंगल बुध शुक्र और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं जबकि चंद्रमा मिथुन राशि के मृगशिरा नक्षत्र में विराजमान हैं। मृगशिरा नक्षत्र ज्ञान, खोज और मानसिक शांति का प्रतीक माना जाता है। इस नक्षत्र के देवता सोम माने जाते हैं जो अमृत और चंद्र ऊर्जा के प्रतिनिधि हैं। इसलिए आज का दिन ध्यान, जप, साधना और नए विचारों पर मनन के लिए विशेष रूप से फलदायी रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आज रात्रि 10 बजकर 33 मिनट तक प्रीति योग रहेगा। धार्मिक दृष्टि से यह योग आपसी सद्भाव, संबंधों में मधुरता और रुके हुए कार्यों की सिद्धि का संकेत देता है। इसी प्रकार अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा जिसे दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। वहीं अमृत काल रात्रि 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा जो साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए बेहद अनुकूल समय है। हालांकि पंचांग में कुछ अशुभ काल भी बताए गए हैं। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और इस अवधि में नए कार्य, यात्रा या महत्वपूर्ण निर्णय से बचने की परंपरा रही है। इसके अतिरिक्त गुलिकाल और यमगण्ड भी दिन के अलग-अलग समय में प्रभावी रहेंगे जिनमें सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 49 मिनट और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। चंद्रोदय दोपहर 12 बजकर 54 मिनट पर तथा चंद्रास्त अगले दिन प्रातः 3 बजकर 46 मिनट पर होगा। धार्मिक दृष्टि से यह समय क्रम दैनिक पूजा, व्रत और आध्यात्मिक अनुशासन के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्माचार्यों का मत है कि आज का दिन आत्मसंयम, ज्ञानार्जन और ईश्वर स्मरण के लिए विशेष फलदायी है। ग्रहों की स्थिति मानसिक संतुलन विवेकपूर्ण निर्णय और सामाजिक मेल-जोल के संकेत देती है। श्रद्धालुओं को आज प्रार्थना दान और सकारात्मक संकल्प के माध्यम से जीवन में शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए। इस प्रकार आज का दिन आस्था, विवेक और सद्भाव के समन्वय का संदेश देता है। कर्म श्रद्धा और संयम जीवन को संतुलित दिशा प्रदान करते हैं। ध्यान साधना और ज्ञानार्जन के लिए अनुकूल यह दिन प्रत्येक व्यक्ति को अपने कार्यों और जीवन के प्रति जागरूक और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है।
27 फरवरी को आमलकी/रंगभरी एकादशी: जानें व्रत, पूजा और शुभ मुहूर्त..

नई दिल्ली। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि इस साल 27 फरवरी को पड़ रही है। इसे आमलकी एकादशी या रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन का धार्मिक महत्व विशेष है क्योंकि मान्यता है कि नारायण के साथ-साथ महादेव से भी इसका गहरा संबंध है। आमलकी एकादशी का व्रत भक्ति भाव से रखने पर सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा आती है। आंवले के वृक्ष में नारायण का निवास माना जाता है, इसलिए इस दिन आंवले की पूजा करना अत्यंत फलदायी है। भक्त इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की भी आराधना करते हैं। रंगभरी एकादशी का संबंध शिव और पार्वती से भी है। धार्मिक मान्यता है कि विवाह के बाद भगवान शिव पहली बार माता पार्वती के साथ काशी आए थे और माता पार्वती का गौना इसी दिन हुआ था। यही कारण है कि इस दिन से रंगों के पर्व होली का जश्न भी शुरू माना जाता है। दृक पंचांग के अनुसार, 27 फरवरी की एकादशी तिथि रात 10:32 बजे तक रहेगी, इसके बाद द्वादशी शुरू होगी। नक्षत्र की स्थिति के अनुसार आर्द्रा नक्षत्र सुबह 10:48 बजे तक रहेगा, उसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा। योग आयुष्मान शाम 7:44 बजे तक रहेगा। करण वणिज सुबह 11:31 बजे तक रहेगा और उसके बाद विष्टि करण रहेगा। शुभ योगों की बात करें तो सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:48 बजे से अगले दिन 6:47 बजे तक रहेगा, वहीं रवि योग सुबह 6:48 बजे से 10:48 बजे तक रहेगा। सूर्योदय शुक्रवार को 6:48 बजे और सूर्यास्त 6:20 बजे होगा। शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:11 बजे से 12:57 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 बजे से 3:15 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:17 बजे से 6:42 बजे तक रहेगा। अशुभ समय में राहुकाल सुबह 11:08 बजे से 12:34 बजे तक, यमगण्ड दोपहर 3:27 बजे से 4:53 बजे तक, गुलिक काल सुबह 8:15 बजे से 9:41 बजे तक और दुर्मुहूर्त सुबह 9:07 बजे से 9:53 बजे तक रहेगा। भद्रा दोपहर 11:31 बजे से रात 10:32 बजे तक रहेगी।इस प्रकार 27 फरवरी की आमलकी या रंगभरी एकादशी धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और इस दिन के शुभ मुहूर्त और व्रत पालन से जीवन में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
होली पर 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और भद्रा काल का साया, जानें होलिका दहन का सही मुहूर्त

नई दिल्ली । इस साल फाल्गुन पूर्णिमा के दिन यानी 3 मार्च 2026 को भारत में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने वाला है। ज्योतिष के अनुसार चंद्र ग्रहण और इसका सूतक काल शुभ कार्यों पर प्रभाव डालते हैं जिससे होलिका दहन की तारीख पर भी भ्रम पैदा हो गया है। इस साल चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे होगी और शाम 6:46 बजे समाप्त होगी। ग्रहण का सूतक काल इससे लगभग 9 घंटे पहले सुबह 6:20 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे पूजा-पाठ नहीं किया जाएगा और बुजुर्गों बीमारों और गर्भवती महिलाओं को छोड़कर भोजन भी वर्जित माना जाएगा। इस दिन भारत में ब्लड मून भी दिखाई देगा जो इसे और भी विशेष बना देगा। फाल्गुन पूर्णिमा तिथि और स्नान-दान पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि 2 मार्च की शाम 5:15 बजे से शुरू होकर 3 मार्च दोपहर 4:33 बजे तक रहेगी। स्नान-दान के लिए पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को मानी जाएगी जबकि पूर्णिमा व्रत 2 मार्च को रखना उचित होगा। होलिका दहन और भद्रा काल धर्म-शास्त्र के अनुसार होलिका दहन के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: पूर्णिमा तिथि रात्रि काल और भद्रा मुक्त समय। इस साल अगर 3 मार्च को पूर्णिमा मानें तो चंद्र ग्रहण और उसके सूतक काल के कारण होलिका दहन नहीं किया जा सकता। वहीं 2 मार्च को रात में होलिका दहन करने पर भद्रा काल खेल बिगाड़ रहा है। भद्रा काल 2 मार्च की शाम 5:15 बजे से 3 मार्च की तड़के 4:46 बजे तक रहेगा।उत्तम मुहूर्त शास्त्रों के अनुसार इस स्थिति में होलिका दहन मध्य रात्रि से पूर्व कर लेना ही सर्वोत्तम माना गया है। इस साल 2 मार्च की रात 12:50 बजे से 2:38 बजे तक का समय सबसे शुभ मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 3 मार्च या 4 मार्च को होली खेलना या धुलैंडी मनाना उचित होगा। Disclaimer यह खबर केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखी गई है। हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।
आज से बुध कुंभ राशि में चलेंगे वक्री की चाल, इन राशियों को रहना होगा सतर्क, ये होंगी मालामाल

नई दिल्ली । ज्योतिष के अनुसार, बुध ग्रह बुद्धि, तर्क और बातचीत का कारक माना जाता है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, 26 फरवरी 2026 से बुध कुंभ राशि में वक्री चाल चलेंगे, जो लगभग 21 मार्च 2026 तक बनी रहेगी। इस दौरान लोगों की सोच, निर्णय लेने की क्षमता और संवाद पर असर दिख सकता है। पुराने अधूरे काम सामने आ सकते हैं, गलतफहमियां बढ़ सकती हैं, इसलिए जल्दबाजी करने की बजाय सोच-समझकर कदम उठाना जरूरी होगा। इन राशियों को मिलेगा फायदा या सामान्य परिणाममेष: आमदनी बढ़ सकती है, पुराने पैसे वापस मिल सकते हैं। दोस्तों से मुलाकात खुशियाँ लाएगी। निवेश सोच-समझकर करें। वृषभ: करियर में मेहनत रंग लाएगी। अधिकारियों के साथ संबंध बेहतर रहेंगे, लेकिन जल्दबाजी से बचें। मिथुन: रुके काम धीरे-धीरे पूरे होंगे। धार्मिक यात्रा का योग बन सकता है। कागजी काम में सावधानी रखें। सिंह: पार्टनरशिप में लाभ, जीवनसाथी के साथ रिश्ते मधुर रहेंगे। अहंकार से बचें। तुला: लव और क्रिएटिव फील्ड में समय अच्छा। अचानक धन लाभ और नए मौके मिल सकते हैं। वृश्चिक: घर-परिवार से जुड़ी समस्याओं का समाधान, प्रॉपर्टी या वाहन मामलों में राहत मिल सकती है। इन राशियों को रहना होगा ज्यादा सतर्ककर्क: काम में लापरवाही नुकसान दे सकती है। बड़े फैसले से पहले सलाह लें। थकान और नींद की कमी से परेशानी बढ़ सकती है। कन्या: जॉब बदलाव या ट्रांसफर का संकेत। विदेश से जुड़े काम में देरी हो सकती है। धैर्य बनाए रखें। धनु: यात्रा में रुकावट और भाई-बहनों से विवाद की स्थिति। बोलते समय संयम रखें। मकर: बातों को गलत समझा जा सकता है, विवाद बढ़ सकता है। गले या आवाज की समस्या संभव। कुंभ: बुध आपकी राशि में वक्री हैं, मन में उलझन और फैसले में दुविधा रह सकती है। शांत रहें। मीन: पैसों के मामलों में सावधानी। वाहन चलाते समय सतर्क रहें और परिवार की सेहत का ध्यान रखें।
गुरुवार 26 फरवरी 2026: रवि योग, अमृतकाल, राहुकाल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी

नई दिल्ली। सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। यह दिन-प्रतिदिन के कार्यों के लिए शुभ और अशुभ समय बताता है। 26 फरवरी गुरुवार को नारायण और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है। इस दिन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगी, उसके बाद एकादशी आरंभ होगी। पंचांग के पांच अंग होते हैं-तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इनका मिलकर शुभ-अशुभ समय निर्धारित करने में उपयोग होता है। 26 फरवरी को नक्षत्र मृगशिरा दोपहर 12 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, उसके बाद आर्द्रा नक्षत्र प्रारंभ होगा। योग प्रीति रात 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। यह दिन रवि योग से युक्त है, जो अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। सूर्योदय 6 बजकर 49 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 19 मिनट पर होगा। मुहूर्त का ज्ञान भी पंचांग से ही मिलता है। गुरुवार के शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं- अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 29 मिनट से 3 बजकर 15 मिनट तक। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 9 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 16 मिनट से 6 बजकर 42 मिनट तक है। अमृत काल रात 1 बजकर 23 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन रवि योग का प्रभाव बना रहेगा। पंचांग में अशुभ काल का विशेष महत्व होता है। राहुकाल दोपहर 2 बजे से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 6 बजकर 49 मिनट से 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 42 मिनट से 11 बजकर 8 मिनट तक है। दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 39 मिनट से 11 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किसी भी नए या महत्वपूर्ण कार्य से परहेज करना चाहिए। गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति और नारायण को समर्पित पूजन का विधान है। पीले रंग का भोजन करना, पीले वस्त्र धारण करना और मस्तक पर पीला चंदन या हल्दी लगाना शुभ माना जाता है। इस दिन दान करना और नारायण की विशेष पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।संपूर्ण दिन के पंचांग का पालन करके व्यक्ति अपने कार्यों में सफलता और समृद्धि प्राप्त कर सकता है। शुभ मुहूर्त और रवि योग का ध्यान रखते हुए गुरुवार को किए गए कार्य विशेष फलदायी माने जाते हैं।
जानिए आज गुरुवार का राशिफल

युगाब्ध-5126, विक्रम संवत 2082, राष्ट्रीय शक संवत-1947, सूर्योदय 06.44, सूर्यास्त 06.04, ऋतु – शीतफाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी, गुरुवार, 26 फरवरी 2026 का दिन आपके लिए कैसा रहेगा। आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल। मेष राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। जोखिम से दूर रहना ही बुद्घिमानी होगी। शुभ कार्यों की प्रवृत्ति बनेगी और शुभ समाचार भी मिलेंगे। किसी से कहा सुनी न हो यही ध्यान रहे। अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। शुभांक-1-4-6 वृष राशि :- अपने संघर्ष में स्वयं को अकेला महसूस करेंगे। विशेष परिश्रम से ही अभिष्ट कार्य सिद्घ होंगे। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। बनते हुए कार्यों में बाधा आएगी। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। चल-अचल सम्पति में वृद्घि होगी। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। शुभांक-2-4-6 मिथुन राशि :- रोजगार में तरक्की मिलेगी। जमीन जायदाद का लाभ भी हो सकता है। अपने संघर्ष में स्वयं के आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे। आवास, मकान तथा वाहन की सुविधाएं मिलेंगी। कर्ज तथा रोगों से मुक्ति भी संभव है। शत्रुओं की पराजय होगी। कुछ आर्थिक चिंताएं भी कम होगी। शुभांक-2-5-6 कर्क राशि :- उच्चमनोबल रखकर कार्य करें, सफल होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-2-5-7 सिंह राशि :- सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्त्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। शुभांक-4-6-7 कन्या राशि :- घर-परिवार में प्रसन्नता व सहयोग का वातावरण बनेगा। मानसिक एवं शारीरिक शिथिलता पैदा होगी। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। कामकाज की अधिकता रहेगी। लाभ भी होगा और पुराने मित्रों का समागम भी। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। श्रम अधिक करना पड़ सकता है। शुभांक-4-6-8 तुला राशि :- वरिष्ठजनों से मतभेद उभर सकते हैं। शांतिपूर्वक नित्य कार्य करें। संतान की प्रगति से संतोष होगा। व्यर्थ की भाग-दौड़ में समय व्यतीत होगा। समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। कलह विवाद का डर बना रहेगा। पारिवारिक तनाव, अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। शुभांक-4-6-7 वृश्चिक राशि :- अपना कार्य दूसरों के सहयोग से बना लेंगे। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। आमोद-प्रमोद का दिन होगा और व्यावसायिक प्रगति भी होगी। ज्ञान-विज्ञान की वृद्घि होगी और सज्जनों का साथ भी रहेगा। कुछ कार्य भी सिद्घ होंगे। किसी अपने की सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। शुभांक-1-5-9 धनु राशि :- बुद्घि और धन का दुरूपयोग न करें व्यर्थ के आडम्बरों से बचें। परिवार में किसी का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। मानसिक तनाव में बढ़ोतरी होगी। किसी का अभद्र व्यवहार खिन्नता व तनाव बढ़ायेगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। आज का परिश्रम आगे लाभ देगा। शुभांक-2-5-7 मकर राशि :- आगे बढ़ने के अवसर लाभकारी सिद्घ हो रहे हैं। कुछ आर्थिक संकोच पैदा हो सकते हैं। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। मान-सम्मान बढ़ेगा। धार्मिक आस्थाएं फलीभूत होंगी। सुख-आनंद कारक समय है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। आय के अच्छे योग बनेंगे। शुभांक-3-7-9 कुम्भ राशि :- बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। सुखद समय की अनुभूतियां प्रबल होंगी। मनोविनोद बढ़ेंगे। व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। संतान की उन्नति के योग हैं। शुभांक-5-7-9 मीन राशि :- जरा-सी लापरवाही आपको परेशानी में डाल सकती है। व्यर्थ की भाग-दौड़ से यदि बचा ही जाए तो अच्छा है। मानसिक व्यथा व संतान के कारण परेशानी होगी। आवेश में आना आपके हित में नहीं होगा, इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियंत्रण रखें। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। शुभांक-3-5-7
मार्च 2026 में महादेव की विशेष कृपा पाने का मौका, इस महीने 3 बार पड़ेगा प्रदोष व्रत, जानें तिथि और शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को विशेष महत्व प्राप्त है। यह व्रत हर महीने दोनो पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है और इसे करने से भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साल 2026 का मार्च महीना इस लिहाज से खास है, क्योंकि इस महीने तीन प्रदोष व्रत पड़ रहे हैं। इस महीने व्रत रखने वालों को तीन अलग-अलग अवसरों में शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त करने का मौका मिलेगा। प्रदोष व्रत शाम के प्रदोष काल में किया जाता है, जिससे जीवन के कष्ट, बीमारियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि बढ़ती है। मार्च 2026 में 3 प्रदोष व्रत और उनके शुभ मुहूर्त 1. पहला प्रदोष व्रत रवि प्रदोष 1 मार्च 2026 तिथि: फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशीसमय: 28 फरवरी रात 08:43 बजे से 1 मार्च सुबह 09:11 बजे तकप्रदोष काल: शाम 06:21 बजे से 07:08 बजे तकविशेष: रविवार होने के कारण इसे रवि प्रदोष कहा जाएगा। दूसरा प्रदोष व्रत सोम प्रदोष 16 मार्च 2026 तिथि: चैत्र कृष्ण त्रयोदशीसमय: 16 मार्च सुबह 09:41 बजे से 17 मार्च सुबह 09:24 बजे तकप्रदोष काल: शाम 06:31 बजे से रात 08:54 बजे तकविशेष: सोमवार होने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाएगा और व्रत का फल दोगुना माना जाता है। तीसरा प्रदोष व्रत सोम प्रदोष 30 मार्च 2026 तिथि: चैत्र शुक्ल त्रयोदशीसमय: 30 मार्च सुबह 07:08 बजे से 31 मार्च सुबह 06:56 बजे तकप्रदोष काल: शाम 06:38 बजे से 08:57 बजे तकविशेष: सोमवार होने के कारण इसे भी सोम प्रदोष कहा जाएगा। यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
कुंभ राशि में गोचर हुए मंगल, इन राशियों को मिलेगा फायदा, कुछ को रहना होगा सावधान

नई दिल्ली। 23 फरवरी 2026 को ग्रहों के सेनापति मंगल ने कुंभ राशि में प्रवेश किया। यह गोचर 2 अप्रैल तक जारी रहेगा। कुंभ राशि में पहले से ही राहु, सूर्य, बुध और शुक्र बैठे हैं और शनि का प्रभाव भी चल रहा है, इसलिए इस गोचर को ज्योतिषविदों ने काफी महत्वपूर्ण बताया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कुंभ राशि में मंगल के प्रवेश से कुछ राशियों को लाभ मिलेगा, जबकि कुछ राशियों को संभलकर आगे बढ़ना होगा। राशियों के अनुसार प्रभाव मेष राशि मेष राशि के लिए यह गोचर बहुत लाभकारी है। मंगल आपके 11वें घर (लाभ का घर) में प्रवेश कर रहे हैं। करियर और पेशेवर मोर्चे पर खुशखबरी मिलने की संभावना है। प्रमोशन रुका है तो जल्दी अच्छा समाचार मिलेगा।वृषभ राशि वृषभ के लिए कार्यक्षेत्र में सफलता पाने का समय है, लेकिन इसके लिए मेहनत बढ़ानी होगी। कुंभ राशि में मौजूद अन्य ग्रहों के कारण सतर्क रहना जरूरी है। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों को इस समय नकारात्मक सोच और कान की सुनाई बातों पर तुरंत भरोसा करने से बचना चाहिए। नुकसान का जोखिम है।कर्क राशि कर्क राशि वालों को कार्यस्थल पर विवाद से बचना चाहिए। बहस और मतभेद टालें। सीनियर्स से संबंधों में संतुलन बनाए रखना लाभकारी रहेगा। सिंह राशि सिंह राशि के लिए गोचर बेहद शुभ है। शनि की ढैय्या के बीच भी पेशेवर सफलता और व्यापार में लाभ मिल सकता है। मेहनत का फल शानदार रहेगा। कन्या राशि कन्या राशि वालों को बड़े निवेश या जोखिम लेने से फिलहाल दूरी रखनी चाहिए। छात्रों के लिए समय अनुकूल है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें। तुला राशि तुला राशि के लिए यह गोचर शुभ है। नौकरी और व्यवसाय में उन्नति के अवसर मिल सकते हैं। धन आवक अच्छी रहेगी, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि के जातकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। संयम और सोच-समझकर निर्णय लेने से फायदा होगा। धनु राशि धनु राशि वालों के लिए यह समय साहस और प्रयास बढ़ाने वाला है। करियर और व्यापार में अवसर मिल सकते हैं। परिवार और संगति पर ध्यान देना लाभदायक रहेगा। मकर राशि मकर राशि के लिए गोचर सुधार के संकेत दे रहा है। कार्य समय पर पूरा करें, वाणी और रिश्तों पर नियंत्रण रखें। नौकरी की तलाश में प्रयास जारी रखें। कुंभ राशि कुंभ राशि वालों के लिए यह गोचर चुनौतीपूर्ण है। कार्यक्षेत्र में कठिनाइयां आ सकती हैं, लेकिन सकारात्मक सोच से सफलता मिल सकती है। खर्च और अनजान लोगों पर भरोसा सीमित रखें। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए खर्च बढ़ने वाला समय है। बजट संतुलित रखें, कार्यस्थल विवाद टालें और स्वास्थ्य पर ध्यान दें। रिश्तों में धैर्य और समझदारी जरूरी है।