मंगलवार, 7 अप्रैल : अभिजित व विजय मुहूर्त सहित पंचांग विवरण

नई दिल्ली । सनातन धर्म में पंचांग के पांच अंग – तिथि नक्षत्र योग करण और वार – का विशेष महत्व है। इन्हीं के आधार पर दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है। 7 अप्रैल मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है जो दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्य और चंद्रमा की गणना के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव रहेगा। दृक पंचांग के अनुसार मंगलवार को ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। योग व्यतीपात दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर। चंद्रमा रात 11 बजकर 50 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर अस्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कार्य जैसे पूजा नया काम शुरू करना या यात्रा योजना बनाना चाहिए। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं जबकि अशुभ समय में किए गए कार्य निष्फल हो सकते हैं। 7 अप्रैल के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं – ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 41 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक और अमृत काल शाम 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक यमगण्ड सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक और वर्ज्य समय सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन गण्ड मूल का प्रभाव रहेगा और बाण रज सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक सक्रिय रहेगा। इस प्रकार 7 अप्रैल का दिन पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण मुहूर्त प्रदान करता है जिनका उपयोग पूजा यात्रा और नए कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही अशुभ समय से बचकर कार्य करने से समस्याओं और असफलताओं से बचा जा सकता है। यह दिन विशेष रूप से अभिजित और विजय मुहूर्त के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
11 अप्रैल से गुरु की राशि में बनेगा मंगल-बुध-शनि का त्रिग्रही योग, 4 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली। अप्रैल की शुरुआत मीन राशि में मंगल, शनि और सूर्य के त्रिग्रही योग के साथ हुई, और यह योग 14 अप्रैल 2026 तक सक्रिय रहेगा, जब सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 10 और 11 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि 01:20 बजे बुध मीन राशि में गोचर करेंगे, जिससे मीन राशि में बुध, मंगल, शनि और सूर्य मिलकर चतुर्ग्रही योग बनाएंगे। 21 दिन तक त्रिग्रही योग का असर सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के बाद भी मीन राशि में मंगल, बुध और शनि रहेंगे और यह त्रिग्रही योग 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा। 30 अप्रैल को बुध के मेष राशि में गोचर करने के बाद यह योग समाप्त होगा। इस अवधि में 4 राशियों को धन लाभ, करियर तरक्की और निवेश में फायदा मिलेगा, जबकि मेष, सिंह और कुंभ राशि वालों को सतर्क रहने की जरूरत है। वृषभ राशि – नए धन स्रोत मिलेंगे 11 अप्रैल से वृषभ राशि वालों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं। नए स्रोतों से आमदनी बढ़ेगी। बिजनेस करने वालों के लिए बड़ी डील फाइनल होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या बोनस मिलने के योग हैं। मिथुन राशि – करियर में उछाल मिथुन राशि के स्वामी बुध के त्रिग्रही योग में शामिल होने से करियर में बड़ा उछाल आएगा। नौकरी में पदोन्नति और सैलरी बढ़ोतरी के मौके मिल सकते हैं। कारोबारियों के लिए समय बहुत फायदेमंद रहेगा और पैसों की आवक बढ़ेगी। वृश्चिक राशि – निवेश से लाभ त्रिग्रही योग वृश्चिक राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ाएगा। साहसिक निवेश और फैसलों से बड़ा रिटर्न मिलने के योग हैं। कुछ जातक अचानक मालामाल हो सकते हैं, लेकिन फैसले सोच-समझकर लें। धनु राशि – विदेश यात्रा और संपत्ति लाभ धनु राशि के स्वामी गुरु हैं और यह योग धनु राशि वालों को पैतृक संपत्ति या फंसे हुए पैसे की वापसी का अवसर देगा। कुछ जातकों के लिए विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं।
ईश्वर के करीब होने के संकेत! अगर दिखें ये बातें तो समझें किस्मत बदलने वाली है

नई दिल्ली। भगवान की कृपा पाने के लिए लोग पूजा-पाठ, भजन और प्रार्थनाएं करते हैं। लेकिन जब सच में ईश्वर की विशेष कृपा होती है, तो उसका असर सिर्फ बाहरी जीवन में नहीं बल्कि व्यक्ति के अंदर गहराई तक दिखाई देता है। मन शांत होता है, सोच बदल जाती है और जीवन को देखने का नजरिया भी अलग हो जाता है। धीरे-धीरे व्यक्ति संसार से ऊपर उठकर आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने लगता है। दया और प्रेम से भर जाता है मनजब भगवान की कृपा होती है, तो व्यक्ति के भीतर हर किसी के लिए प्रेम और करुणा की भावना जाग जाती है। वह अपने-पराए में फर्क नहीं करता और जिसने उसे दुख दिया हो, उसे भी आसानी से माफ कर देता है। उसके लिए हर घटना भगवान की इच्छा बन जाती है, जिसे वह सहजता से स्वीकार कर लेता है। सुख-दुख से परे हो जाता है व्यक्तिऐसा इंसान न ज्यादा खुशी में बहकता है और न ही दुख में टूटता है। वह हर परिस्थिति में संतुलित और शांत रहता है। उसका मन केवल भगवान के स्मरण में लगा रहता है और वह उसी में संतुष्टि महसूस करता है। हर किसी में अच्छाई देखनाभगवान की कृपा पाने वाला व्यक्ति दूसरों की बुराइयों को नजरअंदाज कर देता है। उसे हर इंसान में कुछ न कुछ अच्छा जरूर दिखता है। वह दोष ढूंढने के बजाय अच्छाई को अपनाने की कोशिश करता है। दुनिया से थोड़ा अलग हो जानाजब ईश्वर के प्रति लगाव बढ़ता है, तो सांसारिक चीजें धीरे-धीरे कम आकर्षित करने लगती हैं। व्यक्ति अकेले रहकर भजन, ध्यान और साधना में अधिक आनंद महसूस करता है। उसे भीड़-भाड़ से ज्यादा शांति में सुकून मिलता है। दूसरों के कल्याण की भावनाभगवान का सच्चा भक्त केवल अपने बारे में नहीं सोचता, बल्कि दूसरों के भले की कामना करता है। वह निस्वार्थ भाव से लोगों की मदद करता है और बदले में कुछ भी पाने की इच्छा नहीं रखता। भगवत चर्चा में ही आनंदऐसे व्यक्ति को भगवान से जुड़ी बातें करना, सुनना और समझना ही अच्छा लगता है। उसे दुनिया की अन्य बातों में ज्यादा रुचि नहीं रहती, क्योंकि उसका मन पूरी तरह आध्यात्मिकता में रम जाता है। जब भगवान की कृपा होती है, तो इंसान का पूरा व्यक्तित्व बदल जाता है। उसका मन शांत, विचार सकारात्मक और जीवन संतुलित हो जाता है। वह बाहरी सुखों के बजाय आंतरिक शांति और ईश्वर के साथ संबंध में ही सच्चा आनंद खोजने लगता है।
अप्रैल 2026 में विवाह और मांगलिक कार्य के शुभ मुहूर्त: जानें कौन से दिन करें शादी और गृह प्रवेश

नई दिल्ली। अप्रैल 2026 में विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुभ समाचार है। सनातन धर्म में खरमास को विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। खरमास साल में दो बार आता है और जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब यह अवधि शुरू होती है। यह पूरे एक महीने तक चलता है और इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, सगाई, मुंडन और नए व्यापार या संपत्ति की खरीद जैसी मांगलिक गतिविधियों से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रह को पिता पक्ष का प्रतिनिधि और ग्रहों का राजा माना गया है। जब सूर्य मीन या धनु राशि में होते हैं, तो उनका तेज कम हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूर्य का तेज मांगलिक कार्यों के लिए शुभ फल देने के लिए आवश्यक है। इसलिए खरमास के दौरान कोई भी शुभ कार्य करने से उसका परिणाम अनिश्चित या अशुभ माना जाता है। इस बार अप्रैल 2026 में खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य का राशि परिवर्तन होते ही खरमास का प्रभाव समाप्त हो जाएगा और 15 अप्रैल से विवाह, मुंडन, नामकरण, गृह प्रवेश और नए कार्य जैसे मांगलिक कार्य फिर से शुभ और फलदायक हो जाएंगे। विवाह के लिए अप्रैल में कुल 8 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। ये तिथियां हैं: 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28 और 29 अप्रैल 2026। वहीं गृह प्रवेश के लिए अप्रैल में केवल एक मुहूर्त उपलब्ध है, जो 21 अप्रैल 2026 को पड़ रहा है। इस दिन गृह प्रवेश करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। इस प्रकार, अप्रैल के दूसरे भाग से मांगलिक कार्यों की योजना बनाने वालों के लिए समय अत्यंत अनुकूल है। विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों की तैयारी करने वाले परिवारों को इस अवधि का लाभ उठाना चाहिए। इस समय सूर्य का तेज पूर्ण रूप से प्रभावी होने के कारण सभी शुभ कार्य सफलता और मंगल की प्राप्ति के साथ संपन्न होंगे। अप्रैल 2026 के शुभ मुहूर्तों का पालन कर योजना बनाना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह आपके कार्यक्रम को सफल और सौभाग्यपूर्ण बनाने में भी मदद करेगा।
Ravivar Mantra: सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए अपनाएं ये आसान पूजा विधि

नई दिल्ली। सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करने से आपके जीवन में चल रही सभी परे दिन सूर्य भगवान की पूजा अर्चना करके उनकी कृपा प्राप्त कर लें। ज्योतिष शास्त्र में भी बताया गया है कि जो जातक सूर्य देव की पूजा अर्चना करेंगे उनका व्रत रहेंगे उनके घर परिवार में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहेगी। सूर्य भगवान की कृपा से रुका हुआ काम भी बनने लगता है आपकी कई परेशानियां खत्म हो जाती है। आज के दिन आपको उनके कुछ चमत्कारी मंत्रों का भी जाप करना चाहिए। पूजा विधिआपको सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद तांबे के लोटे में सिंदूर अक्षत और लाल फूल डालकर आप सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा के चौकी में लाल रंग का कपड़ा रखकर सूर्य देव की तस्वीर स्थापित करें। भगवान को रोली, अक्षत, सुपारी, फूल आदि चढ़ाएं। फल व मिष्ठान का भोग लगाएं और फिर धूप दिखाएं।अब रविवार की व्रत कथा पढ़े या सुने। अंत में सूर्य देव की आरती जरूर करें। इन मंत्रों का करें जापॐ ह्रां भानवे नम: ॐ हृों खगाय नम: ॐ हृां मित्राय नम: ॐ हृीं रवये नम: ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः। ॐ ह्रां हिरण्यगर्भाय नमः ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:। ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ। ऊं घृणिं सूर्य्य: आदित्य:। इस प्रकार करें सूर्य भगवान को प्रसन्नसूर्य भगवान को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन आपको लाल कपड़ा पहनना चाहिए ऐसा माना जाता है कि सूर्य भगवान को लाल कपड़ा अधिक प्रिय है। इससे उनकी कृपा आपके ऊपर बनी रहती है। वहीं अगर आपका कोई भी काम नहीं बन रहा है तो आप सूर्य देव को अर्घ्य देते समय गुलहड़ का एक फूल लेकर सूर्य भगवान का मंत्र उच्चारण करके जल में डालकर अर्घ्य दें। इससे भगवान की कृपा पर बनी रहती है। इसके अलावा आज के दिन जरूरतमंदों को दान भी देना चाहिए।
6 अप्रैल का पंचांग : बैशाख कृष्ण की चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग व विजय मुहूर्त, नोट कर लें राहुकाल

नई दिल्ली। सनातन धर्म में दिन की शुरुआत हो या शुभ-अशुभ समय की जानकारी पंचांग के पांचों अंग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का विचार महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि शुभ समय में किया गया कार्य फलदायी वहीं, अशुभ समय में किए कार्य में बाधा आती है और सफलता भी नहीं मिलती। 6 अप्रैल को सोमवार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगी। इसके बाद कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। उदयातिथि के अनुसार, पूरे दिन चतुर्थी तिथि का ही मान होगा। नक्षत्र की बात करें तो अनुराधा नक्षत्र 6 अप्रैल की रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र लगेगा। सूर्योदय 6 अप्रैल को 6 बजकर 6 मिनट पर होगा जबकि सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर होगा। चंद्रोदय रात 10 बजकर 55 मिनट पर और चंद्रास्त अगली सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर होगा। दृक पंचांग के अनुसार 6 अप्रैल को सिद्धि योग दोपहर 3 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। बालव करण दोपहर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद कौलव करण लगेगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6 बजकर 6 मिनट से अगली रात 2 बजकर 57 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए विशेष रूप से अच्छा माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 42 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक होगी। अमृत काल दोपहर 3 बजकर 19 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। निशिता मुहूर्त 7 अप्रैल की रात 12 बजे से 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान कोई महत्वपूर्ण काम शुरू न करें। यमगण्ड दोपहर 10 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 24 मिनट तक होगा। गुलिक काल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। दुर्मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 49 मिनट से 1 बजकर 39 मिनट तक और दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से 4 बजकर 11 मिनट तक होगा। गण्ड मूल 7 अप्रैल की सुबह 2 बजकर 57 मिनट से 6 बजकर 5 मिनट तक रहेगा। बाण रज सुबह 6 बजकर 9 मिनट से पूर्ण रात्रि तक रहेगा और विंछुड़ो पूरे दिन प्रभावी रहेगा।
अक्षय तृतीया के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां वरना समृद्धि की जगह आ सकती है परेशानी

नई दिल्ली। अक्षय तृतीया सनातन परंपरा का एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व माना जाता है जो हर वर्ष वैशाख शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह दिन इतना शुभ होता है कि किसी भी मांगलिक कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती इसलिए इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है और माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं यानी उनका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। दृक पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 49 मिनट से होगी और इसका समापन 20 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 27 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 19 अप्रैल को ही अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। पूजा और खरीदारी के लिए विशेष शुभ समय सुबह 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में सोना चांदी या अन्य शुभ वस्तुओं की खरीद विशेष फलदायी मानी जाती है। अक्षय तृतीया पर जहां एक ओर सोना चांदी तांबा और पीतल जैसी धातुएं खरीदना शुभ माना जाता है वहीं कुछ ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें इस दिन खरीदने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इन वस्तुओं की खरीदारी से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश हो सकता है और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। सबसे पहले बात करें धारदार और नुकीली वस्तुओं की तो इस दिन चाकू कैंची सुई या किसी भी प्रकार की काटने वाली चीज खरीदना अशुभ माना गया है। यह प्रतीकात्मक रूप से रिश्तों में कटुता और तनाव को बढ़ा सकता है जिससे परिवार में कलह की स्थिति बन सकती है। इसी तरह काले रंग की वस्तुओं से भी इस दिन दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है। शास्त्रों में काले रंग को शनि और राहु से जोड़कर देखा गया है और इसे शुभ कार्यों में वर्जित माना गया है। ऐसे में काले कपड़े जूते या अन्य सामान खरीदने के बजाय पीले लाल और सफेद जैसे शुभ रंगों को अपनाना बेहतर होता है। धातुओं की बात करें तो अक्षय तृतीया पर धातु खरीदना शुभ जरूर है लेकिन सही धातु का चयन बेहद जरूरी है। सोना चांदी तांबा और पीतल जहां समृद्धि के प्रतीक हैं वहीं एल्यूमीनियम और स्टील को राहु से संबंधित माना जाता है। इनकी खरीदारी इस दिन करने से घर की बरकत पर असर पड़ सकता है इसलिए इनसे बचना चाहिए। इसके अलावा घर की सजावट के लिए पौधे खरीदने का विचार कर रहे हैं तो इस दिन कांटेदार पौधों जैसे कैक्टस से दूर रहें। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसे पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और जीवन में बाधाएं उत्पन्न कर सकते हैं। इसके बजाय तुलसी मनी प्लांट या सुगंधित फूलों के पौधे लाना शुभ माना जाता है जो सकारात्मकता और समृद्धि को बढ़ाते हैं। अक्षय तृतीया केवल खरीदारी का पर्व नहीं बल्कि श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन सही नियमों का पालन करके और गलतियों से बचकर आप अपने जीवन में सुख समृद्धि और शांति को स्थायी बना सकते हैं।
6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक शुक्र का गोचर इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण, समझदारी से लें फैसले

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को सुख, प्रेम, सुविधा और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को शुक्र देव अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। भरणी नक्षत्र के स्वामी स्वयं शुक्र देव हैं, लेकिन इसका स्वभाव उग्र माना गया है। शुक्र देव भरणी नक्षत्र में 15 अप्रैल तक रहेंगे और 16 अप्रैल को कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि शुक्र अपनी ही राशि के नक्षत्र में हैं, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि आर्थिक और व्यक्तिगत मोर्चे पर चुनौतियां लेकर आ सकती है।प्रभावित राशियां और उपाय वृषभ राशि वृषभ राशि के स्वामी स्वयं शुक्र हैं, लेकिन भरणी नक्षत्र में गोचर के दौरान अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। इस समय सुख-सुविधा की वस्तुओं पर धन खर्च करना पड़ सकता है और बजट बिगड़ सकता है। निवेश या बड़े वित्तीय फैसलों में 15 अप्रैल तक रुकना बेहतर रहेगा।कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर मिला-जुला रहेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ वैचारिक मतभेद और सुख-सुविधाओं में अचानक कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान अपनी सेहत और खान-पान का विशेष ध्यान रखें। जीवनसाथी के साथ बातचीत में मधुरता बनाए रखें। वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए शत्रुओं का प्रभाव बढ़ सकता है। गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रेम संबंधों में गलतफहमियां आ सकती हैं। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और विवादों से दूरी बनाकर रखें। मीन राशि मीन राशि वालों के लिए धन के मामलों में उतार-चढ़ाव संभव है। उधार देना या बड़ा कर्ज लेना हानिकारक हो सकता है। धन के अटकने के योग बन रहे हैं, जिससे भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। आर्थिक निर्णय लेने से पहले परिवार के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें।
आज का राशिफल: 5 अप्रैल 2026, मेष से लेकर मीन राशि तक जानें पूरे दिन का हाल

नई दिल्ली।5 अप्रैल 2026, शनिवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के अनुसार अलग-अलग राशियों के लिए अलग अनुभव लेकर आएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुछ राशियों को सफलता और लाभ मिलेगा, जबकि कुछ को सतर्क रहने की जरूरत है। मेष राशिआज का दिन भागदौड़ वाला रहेगा। कामों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे थोड़ा दबाव महसूस होगा। ऑफिस में अचानक बदलाव हो सकते हैं, इसलिए पहले से प्लान बनाना जरूरी है। पैसों के मामले में जल्दबाजी से बचें। परिवार में सामान्य माहौल रहेगा, लेकिन छोटी बातों पर बहस से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान हो सकती है। वृषभ राशिआज काम में स्थिरता महसूस होगी। पिछले कुछ समय से अटके काम धीरे-धीरे बन सकते हैं। पैसों के मामले में स्थिति संभली रहेगी। खर्च रहेगा, लेकिन नियंत्रण में रहेगा। परिवार का साथ मिलेगा और किसी पुराने मित्र से बातचीत हो सकती है। सेहत सामान्य रहेगी, खानपान का ध्यान रखें। मिथुन राशिआज आपका ध्यान एक जगह टिकाना मुश्किल हो सकता है। काम के बीच-बीच में ध्यान भटक सकता है। जरूरी काम पहले निपटाना बेहतर रहेगा। पैसों के मामले में बड़े फैसले से बचें। रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखना जरूरी है। सेहत सामान्य रहेगी, नींद पूरी करना आवश्यक है। कर्क राशि आज मन उलझा रह सकता है। छोटी बातों को लेकर ज्यादा सोच सकते हैं। कामकाज सामान्य रहेगा, लेकिन ध्यान बार-बार भटक सकता है। परिवार में किसी मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। सिंह राशि आज काम में देरी या रुकावट आ सकती है। जो चीजें जल्दी होनी चाहिए, उनमें समय लग सकता है। गुस्से से बचें और ऑफिस में किसी की बात को गलत न समझें। पैसों के मामले में सोच-समझकर खर्च करें। परिवार का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। कन्या राशिआज सोच-समझकर फैसले लें। जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में बदलना पड़ सकता है। काम में धीरे-धीरे प्रगति होगी। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन खर्च पर नजर रखें। रिश्तों में स्पष्टता बनाए रखें। सेहत सामान्य रहेगी। तुला राशिआज काम में संतुलन बनाकर चलें। जिम्मेदारियां एक साथ बढ़ सकती हैं। किसी के साथ मिलकर काम करना पड़े तो स्पष्टता बनाए रखें। पैसों के मामले में दिन ठीक रहेगा। रिश्तों में समझदारी दिखाएं। सेहत सामान्य रहेगी। वृश्चिक राशि पैसों के मामले में सतर्क रहें। खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए योजना बनाकर चलें। कामकाज सामान्य रहेगा। ऑफिस में किसी मुद्दे पर दोबारा विचार करने की जरूरत पड़ सकती है। परिवार का माहौल सामान्य रहेगा। सेहत सामान्य रहेगी। धनु राशि आज दिन व्यस्त रहेगा। काम ज्यादा होंगे और समय कम लगेगा। प्राथमिकता तय करना जरूरी है। ऑफिस में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। पैसों की स्थिति ठीक रहेगी। परिवार का सहयोग मिलेगा। थकान से बचें। मकर राशि आज चीजों को गहराई से समझने की कोशिश करेंगे। हर बात पर तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचें। कामकाज सामान्य रहेगा। पैसों में सावधानी रखें। रिश्तों में दूरी न आने दें। दिमाग को आराम देना जरूरी है। कुम्भ राशिआज घर और काम दोनों में संतुलन बनाए रखें। किसी एक चीज पर ज्यादा ध्यान देने से दूसरी प्रभावित हो सकती है। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। पुराने काम पूरे करने का मौका मिलेगा। परिवार का साथ मिलेगा। सेहत ठीक रहेगी। मीन राशिआज आप थोड़ा अंदर की ओर रह सकते हैं। ज्यादा बोलने के बजाय सोचने का मन करेगा। काम में जल्दबाजी से बचें। पैसों के मामले में बड़े फैसले टाल सकते हैं। रिश्तों में समय दें। आराम करना आवश्यक है।
Vastu Tips: शनि देव की कृपा पाने के लिए शनिवार को करें ये आसान उपाय

Vastu Tips:Vastu Tips:नई दिल्ली। शनिवार के दिन शनिदेव की विशेष पूजा और वास्तु उपाय करने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। शनि देव की कृपा पाने के लिए केवल पूजा ही नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ विशेष उपाय करना भी जरूरी है। अगर आपके घर में लगातार आर्थिक तंगी, कामों में रुकावट या नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नजर आ रहा है, तो आज के दिन ये उपाय विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। 1. शनि मंदिर जाएं और सरसों के तेल का दिया जलाएं शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर पूजा करना बेहद लाभकारी माना गया है। इस दौरान सरसों के तेल का दिया जलाना चाहिए। शनि देव को काला रंग प्रिय है, इसलिए इस दिन काले कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। इसके साथ ही काली दाल का दान करने से भी शनिदेव की कृपा बनी रहती है। 2. घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाएं वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि घर के मुख्य द्वार पर शनि यंत्र लगाने से घर में आने वाली नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। यह उपाय घर के वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। 3. शमी का पौधा लगाएं और पत्तियां चढ़ाएं शनिवार को शमी का पौधा लगाना विशेष लाभकारी माना गया है। शमी देवता को प्रिय होने के कारण यह पौधा शनि देव की कृपा बढ़ाता है। शमी की पत्तियों को शनिदेव को चढ़ाने से घर में आर्थिक तंगी और अन्य परेशानियां कम होती हैं। 4. नकारात्मकता बढ़ाने वाली आदतों से बचें शनिवार के दिन कुछ विशेष सावधानियां रखना भी जरूरी है। जैसे, नाखून और बाल काटना इस दिन वर्जित माना गया है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और घर में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए शनिवार को अपने बाल और नाखून न काटें। 5. नियमित पूजा और उपाय से घर में खुशहाली इन उपायों को नियमित रूप से अपनाने से घर और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। शनि देव प्रसन्न रहते हैं और किसी भी बाधा, आर्थिक तंगी या मानसिक परेशानियों को दूर करने में मदद करते हैं। शनिवार के दिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ये उपाय करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और परिवार के सभी सदस्य मानसिक और आर्थिक रूप से मजबूत रहते हैं।