कालाष्टमी 2026: क्यों Kaal Bhairav ने Brahma का सिर काटा? कैसे बने ‘काशी के कोतवाल’

नई दिल्ली। हिन्दू धार्मिक परंपरा के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रुद्रावतार काल भैरव को समर्पित होती है। इस दिन उनकी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि काल भैरव की आराधना से कुंडली के ग्रह दोष दूर होते हैं, शत्रुओं और बाधाओं से सुरक्षा मिलती है, कार्यों में सफलता मिलती है और भय दूर होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन काल भैरव ने ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काटा था। चलिए जानते हैं इस घटना के पीछे की कथा। ब्रह्मा और विष्णु के बीच विवादकथा कहती है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच यह विवाद उत्पन्न हुआ कि सृष्टि में सर्वोच्च कौन है। ब्रह्मा जी का दावा था कि वे सृजनकर्ता हैं, इसलिए सर्वोपरि हैं, जबकि विष्णु जी का मानना था कि पालनकर्ता होने के नाते उनका स्थान सर्वोच्च है। ज्योतिर्लिंग की खोज में निकले ब्रह्मा और विष्णुमहादेव ने इस विवाद का समाधान करने के लिए स्वयं को अनंत ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट किया। इसका न कोई आरंभ था और न कोई अंत। दोनों देवताओं को शर्त दी गई कि जो भी इस ज्योतिर्लिंग का सिरा पहले खोज लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। विष्णु जी वराह रूप धारण कर पाताल की ओर गए और ब्रह्मा जी हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। ब्रह्मा का अहंकार और काल भैरव का प्राकट्यलंबी खोज के बाद भी विष्णु जी को सिर नहीं मिला और उन्होंने हार मान ली। लेकिन ब्रह्मा जी ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें ज्योतिर्लिंग का ऊपरी सिरा मिल गया। इसके साथ ही उनके पांचवें मुख से महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द निकले। इससे महादेव क्रोधित हो उठे और उनके क्रोध से काल भैरव प्रकट हुए। काल भैरव ने अपने नाखून से पल भर में ब्रह्मा जी का पांचवां सिर काट दिया। काशी में मोक्ष और ‘कोतवाल’ का सम्मानचूंकि काल भैरव ने सृष्टि के रचयिता का मस्तक काटा था, इसलिए उन पर ब्रह्महत्या का पाप लगा। कटा हुआ सिर उनके हाथ में चिपक गया। मुक्ति पाने के लिए वे तीनों लोकों में भटकते रहे। अंततः जब वे काशी पहुंचे, तो सिर अपने आप हाथ से गिर गया। तभी से काल भैरव को ‘काशी के कोतवाल’ के रूप में सम्मान मिला। कालाष्टमी कब हैहिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 अप्रैल 2026 को है। दृक पंचांग के मुताबिक वैशाख कृष्ण अष्टमी की शुरुआत 9 अप्रैल को रात 9:19 बजे होगी और समाप्ति 10 अप्रैल को रात 11:15 बजे होगी। (Disclaimer: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और धर्मशास्त्रों पर आधारित है।)
हनुमान जी की पूजा: मंगलवार का महाउपाय और सरल उपाय

नई दिल्ली। हनुमान जी, जिन्हें राम भक्तों में बजरंगी या महाबली संकट मोचन के नाम से जाना जाता है, हिन्दू धर्म में शक्ति, बुद्धि और साहस के प्रतीक हैं। सनातन परंपरा में हनुमान साधना का विशेष महत्व माना गया है, क्योंकि उनकी कृपा से भय, रोग, बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। मंगलवार को उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। 1. हनुमान चालीसा का पाठहनुमान जी की महिमा का गुणगान करना उनके प्रसन्न होने का प्रमुख मार्ग है। मंगलवार को हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करने से: दुर्भाग्य दूर होता हैमानसिक शांति मिलती हैसौभाग्य और सफलता प्राप्त होती हैसाधक पर हर समय बजरंगी की कृपा बनी रहती हैचालीसा पढ़ते समय अपने मनोकामनाओं का ध्यान करें और पूरी श्रद्धा से पढ़ें। 2. सिंदूर का महाउपायहनुमान जी को सिंदूर बहुत प्रिय है। इसलिए मंगलवार की पूजा में उन्हें सिंदूर का चोला चढ़ाना विशेष फलदायी है।सिंदूर अर्पित करते समय मंत्र का उच्चारण करें: “सिंदूरं रक्तवर्णं च सिंदूरतिलकप्रिये, भक्तायन दत्तं मया देव सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्” इस मंत्र का पाठ करते समय अपनी मनोकामनाओं को हृदय में संजोएं। मान्यता है कि सच्चे मन से यह उपाय करने पर हनुमान जी सभी कष्ट दूर करते हैं और इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। 3. भोग और प्रसादहनुमान जी को भोग अर्पित करना भी उनकी प्रसन्नता का मार्ग है। मंगलवार को पूजा करते समय आप निम्न चीजें अर्पित कर सकते हैं: बूंदीलड्डूचूरमागुड़चनाये सामग्री बजरंगी जी को अत्यंत प्रिय मानी जाती हैं। भोग अर्पित करते समय भक्तों को अपनी श्रद्धा और भावनाओं को पूर्ण रूप से व्यक्त करना चाहिए। 4. साधारण नियम और मंत्रपूजा के समय स्वच्छ कपड़े पहनें और ब्रह्म मुहूर्त या सुबह का समय श्रेष्ठ मानें।मंत्र जाप और भोग के साथ मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या नकारात्मकता न रखें।पूजा के बाद भोग का वितरण कर दें और शांति भाव बनाए रखें। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, सिंदूर का चोला अर्पित करना, प्रिय भोग चढ़ाना, और श्रद्धा भाव से साधना करना अत्यंत फलदायी है। इन उपायों से सभी कष्ट, भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता, सौभाग्य और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
संकट मोचन बालाजी: सालासर की दाढ़ी-मूंछ वाली हनुमान जी की रहस्यमयी कहानी

नई दिल्ली । राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी धाम भारत का एक अनोखा हनुमान मंदिर है यहां विराजमान हनुमान जी की मूर्ति दाढ़ी-मूंछों वाली है जो पूरे देश में एकमात्र है यही वजह है कि लाखों भक्त सालाना यहां दर्शन करने आते हैं और मानते हैं कि सालासर बालाजी अपनी भक्तों की मनोकामनाएं बहुत जल्दी पूरी करते हैं सालासर बालाजी धाम जयपुर-बीकानेर राजमार्ग पर आसोटा गांव के पास स्थित है यह मंदिर 19वीं शताब्दी में स्थापित हुआ और आज पूरे देश में प्रसिद्ध है यहाँ रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं खासतौर पर हनुमान जयंती और शरद पूर्णिमा के मेले में मंदिर में भक्तों की भीड़ हमेशा रहती है सालासर बालाजी की मूर्ति की खोज की कहानी भी बहुत रोचक है कहा जाता है कि साल 1811 में आसोटा गांव के किसान मोहनदास खेत में हल जोत रहे थे तभी हल किसी नुकीली चीज से टकराया जब उन्होंने खुदाई की तो उन्हें हनुमान जी की मूर्ति मिली मोहनदास उस समय दोपहर का भोजन चूरमा लेकर आए थे उन्होंने उसी चूरमा का भोग अर्पित कर मूर्ति की पूजा की और रात को उन्हें हनुमान जी का सपना आया सपने में हनुमान जी मोहनदास को दाढ़ी-मूंछों वाले रूप में दिखाई दिए उन्होंने मोहनदास को निर्देश दिया कि मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर वहीं स्थापित करें जहाँ बैल खुद रुक जाए मोहनदास ने वैसा ही किया और बैलगाड़ी वहीं रुकी जहाँ आज सालासर बालाजी धाम स्थित है चूंकि सपने में हनुमान जी दाढ़ी-मूंछों में दिखाई दिए इसलिए मोहनदास ने मूर्ति का शृंगार उसी रूप में किया यही कारण है कि सालासर बालाजी की मूर्ति पूरे देश में अनोखी मानी जाती है भारत के अधिकांश हनुमान मंदिरों में मूर्तियां युवा और बिना दाढ़ी-मूंछ वाली होती हैं लेकिन सालासर बालाजी इस नियम का अपवाद हैं उनकी दाढ़ी-मूंछ उन्हें प्रौढ़, गंभीर और संकट मोचन स्वरूप में प्रस्तुत करती है भक्त मानते हैं कि इस स्वरूप से बालाजी अधिक शक्तिशाली और भक्तों के लिए तुरंत संकट मोचन बन जाते हैं सालासर बालाजी धाम में दो प्रमुख मेले लगते हैं पहला मेला हनुमान जयंती पर और दूसरा शरद पूर्णिमा पर इन मेलों में दूर-दूर से भक्त आते हैं यहाँ धार्मिक किताबें हनुमान जी के चित्र चूरमा प्रसाद और पूजा सामग्री उपलब्ध होती है मेले के दौरान मंदिर में भारी भीड़ लगती है सालासर बालाजी में नारियल चढ़ाने की अनोखी परंपरा भी है भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर लाल कपड़े में नारियल बांधकर मंदिर परिसर के खेजड़ी पेड़ पर चढ़ाते हैं ये नारियल ना तो फेंके जाते हैं ना जलाए जाते हैं इन्हें मंदिर से करीब 11 किलोमीटर दूर मुरड़ाकिया गांव के खेत में गाड़ दिया जाता है यह परंपरा भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है सालासर बालाजी धाम भक्ति और विश्वास का केंद्र है यहाँ की दाढ़ी-मूंछ वाली मूर्ति भक्तों के हर संकट को दूर करती है और चूरमा प्रसाद हर भक्त के मन को शांति और विश्वास देता है यदि आप जीवन में किसी समस्या से गुजर रहे हैं तो सालासर बालाजी के दर्शन अवश्य करें
आज का राशिफल 7 अप्रैल 2026: मेष से लेकर मीन राशि तक, जानें दिन का हाल

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल के आधार पर 7 अप्रैल 2026, मंगलवार के लिए राशिफल इस प्रकार है। मंगलवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन की पूजा करने से भय, रोग और मानसिक कष्ट दूर होते हैं। मेष (Aries)आज मेष राशि वालों को अच्छी खबर और सफलता मिलने की संभावना है। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और किसी विशेष व्यक्ति से महत्वपूर्ण मुलाकात हो सकती है। शादीशुदा जातकों की लव लाइफ भी अच्छी रहेगी। वृषभ (Taurus)आज का दिन वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक चुनौती भरा हो सकता है। बड़े खर्चों के कारण बजट प्रभावित हो सकता है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें। मिथुन (Gemini)मिथुन राशि वालों को ऑफिस में प्रमोशन या नया अवसर मिल सकता है। लेकिन दिन के मध्य में गुप्त शत्रुओं से सतर्क रहें। खर्चों में सावधानी बरतें। कर्क (Cancer)कर्क राशि का समय मिला-जुला रहेगा। दिन की शुरुआत में मेहनत का पूरा फल मिलेगा और मान-सम्मान बढ़ेगा। दिन के अंत में पैसों के लेन-देन से बचें। शादीशुदा जीवन में खुशियां रहेंगी। सिंह (Leo)सिंह राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है। नौकरीपेशा जातकों को नए अवसर मिल सकते हैं। कन्या (Virgo)कन्या राशि वालों का दिन शुभ समाचार लेकर आएगा। पारिवारिक जीवन सुखद रहेगा और कमाई के साधनों में वृद्धि होगी। व्यापारियों को लाभ की संभावना है। तुला (Libra)तुला राशि के लिए दिन की शुरुआत में कुछ बाधाओं और मतभेद देखने को मिल सकते हैं। छात्रों का मन पढ़ाई से भटक सकता है। परिवार में तालमेल बनाए रखें। वृश्चिक (Scorpio)वृश्चिक राशि वालों का दिन मिला-जुला रहेगा। नौकरीपेशा जातकों को काम का दबाव महसूस होगा। सफलता पाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। धनु (Sagittarius)धनु राशि वालों का आर्थिक बजट बिगड़ सकता है। संतान या परिवार से जुड़ी किसी बात से तनाव हो सकता है। दिन के मध्य में किसी विशेष काम में सफलता मिलने की संभावना है। मकर (Capricorn)मकर राशि वालों के लिए दिन उतार-चढ़ाव भरा रहेगा। किसी काम में सफलता पाने के लिए मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। कुंभ (Aquarius)कुंभ राशि के लिए परिश्रम का फल मिलेगा। दिन के बीच में नौकरीपेशा जातकों को नए अवसर मिलेंगे। खर्चों में सावधानी बरतें और नकारात्मक विचारों से बचें। मीन (Pisces)मीन राशि वालों को सेहत का ध्यान रखना आवश्यक है। सुख-सुविधाओं पर खर्च बढ़ सकता है और आर्थिक बजट प्रभावित हो सकता है। व्यापारियों को लाभ की संभावना है।
वैशाख माह का रहस्य: इन देवताओं की आराधना से खुलेंगे सफलता के द्वार

नई दिल्ली । सनातन धर्म में वैशाख माह को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है इस महीने में किए गए व्रत दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन और निस्वार्थ भावना से की गई आराधना व्यक्ति के जीवन की दिशा बदल सकती है और किस्मत के बंद दरवाजे खोल सकती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस माह में सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है इन्हें जगत के पालनहार माना जाता है वैशाख में एकादशी अक्षय तृतीया और पूर्णिमा जैसे विशेष दिनों पर विष्णु पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इसके साथ ही हनुमान जी की पूजा भी इस माह में अत्यंत शुभ मानी जाती है मान्यता है कि हनुमान जी की आराधना करने से नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और व्यक्ति को साहस शक्ति और सफलता प्राप्त होती है मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। वैशाख माह में भगवान शिव की पूजा भी विशेष महत्व रखती है शिवलिंग पर जलाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं जो लोग मानसिक तनाव या जीवन की परेशानियों से जूझ रहे हैं उनके लिए यह पूजा अत्यंत लाभकारी मानी गई है। इसके अलावा सूर्य देव की उपासना भी इस पवित्र महीने में विशेष फलदायी होती है सुबह स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है साथ ही आत्मविश्वास और सम्मान में वृद्धि होती है। इस प्रकार वैशाख माह केवल पूजा का समय नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर भी है यदि श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से इन देवताओं की आराधना की जाए तो जीवन में सुख समृद्धि और सफलता के नए द्वार खुल सकते हैं।
मकर राशि आज का राशिफल: सहयोग मिलेगा, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से बचें

नई दिल्ली। आज का दिन आपके वित्तीय मामलों के लिए अनुकूल है। कारोबार बढ़ाने के लिए कुछ विशेष लोगों से मदद मिल सकती है। साथ ही, अगर आपने पहले किसी को उधार पैसे दिए थे, तो उन्हें वापस मिलने की संभावना है। परिवार और मित्र:व्यक्तिगत संबंधों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। किसी की आलोचना या राजनीति में शामिल होने से बचें, क्योंकि इससे आपके पारिवारिक और मित्र संबंध प्रभावित हो सकते हैं। समझदारी से काम लें। रिश्ते और प्यार:प्रेम संबंधों में आज का दिन काफी शुभ है। यदि आप अपने साथी के साथ विवाह करने का मन बना रहे हैं, तो इसके लिए अनुकूल समय है। प्यार और समझदारी से रिश्ते मजबूत होंगे। स्वास्थ्य:योग और ध्यान से आप अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं। छोटे-छोटे व्यायाम और ध्यान से शारीरिक समस्याओं में राहत मिलेगी। शिक्षा और नौकरी:नौकरीपेशा लोगों को आज कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों से मदद न मिलने के कारण परेशान हो सकते हैं। धैर्य और समझदारी से परिस्थितियों को संभालें। बिज़नेस / स्टॉक / प्रॉपर्टी:आज अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। लेकिन कारोबार में उधारी लेने और लोगों को ज्यादा पैसा उधार देने से बचें। सतर्कता से निवेश और लेन-देन करें। ज्योतिष उपाय:आज के दिन को शुभ बनाने के लिए भगवान श्री गणेश जी को दूर्वा पर हल्दी अर्पित करें। यह उपाय आपके कार्यों में सफलता और धन की वृद्धि सुनिश्चित करेगा। शुभ रंग: गुलाबी – यह रंग आपके व्यक्तित्व और किस्मत में निखार लाएगा।शुभ अंक: 9 – इस अंक के साथ दिन आपके लिए भाग्यशाली रहेगा।
शिव भक्तों के लिए खास दिन: 15 अप्रैल को रखें मासिक शिवरात्रि व्रत

नई दिल्ली । वैशाख माह में आने वाली मासिक शिवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व होता है यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख समृद्धि आती है । सनातन परंपरा के अनुसार मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है वर्ष 2026 में वैशाख माह की मासिक शिवरात्रि 15 अप्रैल को रखी जाएगी पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट पर होगा और इसका समापन 16 अप्रैल को रात 8 बजकर 11 मिनट पर होगा इसलिए व्रत और पूजा 15 अप्रैल को ही की जाएगी। इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण पूजा समय निशिता काल माना जाता है जो रात्रि 12 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 1 मिनट तक रहेगा इसी समय भगवान शिव की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 50 मिनट से 5 बजकर 36 मिनट तक और अमृत काल सुबह 7 बजकर 37 मिनट से रात 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। मासिक शिवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व भी बहुत गहरा है यह व्रत आत्मशुद्धि मानसिक शांति और जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए रखा जाता है विशेष रूप से विवाह में आ रही बाधाओं और कष्टों को दूर करने के लिए इसे अत्यंत प्रभावी माना गया है। पूजा विधि के अनुसार श्रद्धालुओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लेना चाहिए इसके बाद शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक किया जाता है भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा भांग शमी पत्र सफेद चंदन और फूल अर्पित किए जाते हैं वहीं माता पार्वती को सुहाग सामग्री और लाल वस्त्र चढ़ाए जाते हैं। इस दिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप और शिव गायत्री मंत्र का उच्चारण अत्यंत शुभ माना जाता है साथ ही शिवरात्रि व्रत कथा का श्रवण या पाठ भी किया जाता है रात्रि के निशिता काल में विशेष पूजा करने के बाद अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है। इस प्रकार वैशाख मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है जो भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
सोमवार के शुभ अवसर पर शिव पूजा कैसे करें, जलाभिषेक से लेकर आरती तक पूरी जानकारी

नई दिल्ली। सनातन धर्म में भगवान शिव को ‘आशुतोष’ कहा गया है, अर्थात् जो थोड़े से प्रयास और निष्कलंक भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। उनके प्रसन्न होने पर जीवन के क्लेश, रोग, शोक, दुर्भाग्य और बाधाएं दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से सोमवार का दिन शिव पूजन के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। शिवपुराण, लिंगपुराण और स्कंदपुराण में वर्णित उपायों से सोमवार को भोलेनाथ को प्रसन्न किया जा सकता है। सोमवार शिव पूजा का महत्वसोमवार का दिन चंद्रमा और भगवान शिव दोनों से जुड़ा हुआ है। इस दिन शिव की पूजा करने से मानसिक शांति, स्वास्थ्य, धन-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। शिवपुराण के अनुसार, सोमवार को किया गया भजन, जप और व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करता है। सच्चे भाव से शिव की आराधना करने वाले भक्तों के समस्त कष्ट हर लिए जाते हैं, और भगवान आशुतोष स्वरूप शीघ्र प्रसन्न होकर वरदान देते हैं। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर शिव ध्यानब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। ध्यान करते समय भगवान शिव के त्रिनेत्र, जटाजूट में गंगा, माथे पर चंद्रमा और नीलकंठ स्वरूप का स्मरण करें।मौन साधना करते हुए ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें। इस विधि से पूर्व जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और मन की एकाग्रता बढ़ती है। शिवलिंग पर पंचामृत और गंगाजल अभिषेकसोमवार को शिवलिंग का अभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से बना पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद गंगाजल से अभिषेक करें। अभिषेक के समय ॐ नमः शिवाय, ॐ रुद्राय नमः और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।इस विधि से मन की शुद्धि होती है, रोग दूर होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रिय वस्तुएं अर्पित करेंभगवान शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अत्यंत प्रिय हैं। बिल्वपत्र (तीन दल वाला) अर्पित करें, क्योंकि यह ब्रह्मा, विष्णु और शिव का प्रतीक है।धतूरा और आक के फूल चढ़ाने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं।भस्म लगाना भी शुभ माना जाता है।अर्पण करते समय भावपूर्वक ‘ॐ नमः शिवाय’ का उच्चारण करें।सोमवार व्रत, शिव कथा और महामृत्युंजय मंत्र सोमवार का व्रत रखने से धन, आरोग्य और शांति प्राप्त होती है। व्रत में फलाहार करें और शाम को शिव कथा का श्रवण करें।महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी है: ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥ इस मंत्र का 108 बार जाप रुद्राक्ष माला से करें। इससे अकाल मृत्यु, रोग और भय का नाश होता है। समर्पण ही सर्वोच्च उपायशिवपुराण में कहा गया है कि यदि भक्त के पास पूजन सामग्री न हो तो केवल सच्चे भाव और समर्पण से भी भगवान शिव प्रसन्न हो जाते हैं। निष्काम भाव से शिव का स्मरण करने वाले भक्त के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें शांति, स्वास्थ्य और सौभाग्य प्राप्त होता है। सोमवार को ये सरल विधियां अपनाकर भगवान शिव की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। नियमित शिव भक्ति से भक्त को आशुतोष महादेव की असीम कृपा प्राप्त होती है और जीवन सुख-समृद्धि से परिपूर्ण हो जाता है।
मंगलवार, 7 अप्रैल : अभिजित व विजय मुहूर्त सहित पंचांग विवरण

नई दिल्ली । सनातन धर्म में पंचांग के पांच अंग – तिथि नक्षत्र योग करण और वार – का विशेष महत्व है। इन्हीं के आधार पर दिन की शुरुआत और शुभ-अशुभ समय तय किया जाता है। 7 अप्रैल मंगलवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है जो दोपहर 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी। सूर्य और चंद्रमा की गणना के अनुसार पूरे दिन पंचमी तिथि का ही प्रभाव रहेगा। दृक पंचांग के अनुसार मंगलवार को ज्येष्ठा नक्षत्र सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा इसके बाद मूल नक्षत्र शुरू होगा। योग व्यतीपात दोपहर 4 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। सूर्योदय सुबह 6 बजकर 5 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 42 मिनट पर। चंद्रमा रात 11 बजकर 50 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर अस्त होगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचांग में दिए गए शुभ-अशुभ समय को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कार्य जैसे पूजा नया काम शुरू करना या यात्रा योजना बनाना चाहिए। शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य फलदायी माने जाते हैं जबकि अशुभ समय में किए गए कार्य निष्फल हो सकते हैं। 7 अप्रैल के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं – ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 41 मिनट से 7 बजकर 4 मिनट तक और अमृत काल शाम 8 बजकर 1 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक प्रभावी रहेगा। अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक यमगण्ड सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 49 मिनट तक गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 23 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके अतिरिक्त दुर्मुहूर्त सुबह 8 बजकर 36 मिनट से 9 बजकर 27 मिनट तक और वर्ज्य समय सुबह 9 बजकर 14 मिनट से 11 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। पूरे दिन गण्ड मूल का प्रभाव रहेगा और बाण रज सुबह 6 बजकर 32 मिनट तक सक्रिय रहेगा। इस प्रकार 7 अप्रैल का दिन पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण मुहूर्त प्रदान करता है जिनका उपयोग पूजा यात्रा और नए कार्यों में किया जा सकता है। साथ ही अशुभ समय से बचकर कार्य करने से समस्याओं और असफलताओं से बचा जा सकता है। यह दिन विशेष रूप से अभिजित और विजय मुहूर्त के लिए अनुकूल माना जा रहा है।
11 अप्रैल से गुरु की राशि में बनेगा मंगल-बुध-शनि का त्रिग्रही योग, 4 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा

नई दिल्ली। अप्रैल की शुरुआत मीन राशि में मंगल, शनि और सूर्य के त्रिग्रही योग के साथ हुई, और यह योग 14 अप्रैल 2026 तक सक्रिय रहेगा, जब सूर्य मीन से मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 10 और 11 अप्रैल 2026 की मध्यरात्रि 01:20 बजे बुध मीन राशि में गोचर करेंगे, जिससे मीन राशि में बुध, मंगल, शनि और सूर्य मिलकर चतुर्ग्रही योग बनाएंगे। 21 दिन तक त्रिग्रही योग का असर सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के बाद भी मीन राशि में मंगल, बुध और शनि रहेंगे और यह त्रिग्रही योग 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा। 30 अप्रैल को बुध के मेष राशि में गोचर करने के बाद यह योग समाप्त होगा। इस अवधि में 4 राशियों को धन लाभ, करियर तरक्की और निवेश में फायदा मिलेगा, जबकि मेष, सिंह और कुंभ राशि वालों को सतर्क रहने की जरूरत है। वृषभ राशि – नए धन स्रोत मिलेंगे 11 अप्रैल से वृषभ राशि वालों के लिए धन लाभ के योग बन रहे हैं। नए स्रोतों से आमदनी बढ़ेगी। बिजनेस करने वालों के लिए बड़ी डील फाइनल होने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या बोनस मिलने के योग हैं। मिथुन राशि – करियर में उछाल मिथुन राशि के स्वामी बुध के त्रिग्रही योग में शामिल होने से करियर में बड़ा उछाल आएगा। नौकरी में पदोन्नति और सैलरी बढ़ोतरी के मौके मिल सकते हैं। कारोबारियों के लिए समय बहुत फायदेमंद रहेगा और पैसों की आवक बढ़ेगी। वृश्चिक राशि – निवेश से लाभ त्रिग्रही योग वृश्चिक राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ाएगा। साहसिक निवेश और फैसलों से बड़ा रिटर्न मिलने के योग हैं। कुछ जातक अचानक मालामाल हो सकते हैं, लेकिन फैसले सोच-समझकर लें। धनु राशि – विदेश यात्रा और संपत्ति लाभ धनु राशि के स्वामी गुरु हैं और यह योग धनु राशि वालों को पैतृक संपत्ति या फंसे हुए पैसे की वापसी का अवसर देगा। कुछ जातकों के लिए विदेश यात्रा के भी योग बन रहे हैं।