हबल स्पेस टेलीस्कोप: ब्रह्मांड की ‘टाइम मशीन’ जो दिखाती है अरबों साल पुरानी दुनिया

नई दिल्ली ब्रह्मांड के रहस्यों का पता लगाने में इंसान की सबसे बड़ी सुविधा में से एक है हबल स्पेस टेलीस्कोप। इसे अक्सर “टाइम्समशीन” कहा जाता है, क्योंकि यह हमें अरबों वर्षों पुराने ब्रह्मांडों की तस्वीरें दिखाता है। असल में, जब हबल दूर स्थित पोजीशन और ग्लासों की रोशनी को स्थापित किया जाता है, तो वह लाखों-करोड़ों साल पहले रोशन होती है। यानी हम जो घटित होते देख रहे हैं, वह पिंड वर्तमान नहीं बल्कि अतीत घटित है।रोशनी का सफर ही है टाइम स्टोर्स का राजखगोल विज्ञान में ‘प्रकाश-वर्ष’ की दूरी की इकाई है, जो बताती है कि प्रकाश एक वर्ष में कितनी दूरी तय करता है। रोशनी की गति लगभग 3 लाख किमी/सेकंड है। उदाहरण के लिए, सूर्य की रोशनी पृथ्वी तक पहुँचने में करीब 8 मिनट लगते हैं, यानी हम सूरज को हमेशा 8 मिनट पुराने देखते हैं। जब बात बहुत दूर स्थित बिल्डरों और इलेक्ट्रॉनिक्स की होती है, तो यह समय लाखों अरब वर्षों तक पहुंच जाता है। यही कारण है कि हबल स्पेस टेलीस्कोप हमें ब्रह्मांड के इतिहास की झलक दिखाता है। पृथ्वी से ऊपर, साफ़ नज़र और अद्भुत दृश्यहबल स्पेस टेलीस्कोप पृथ्वी की सतह से लगभग 550 किमी ऊपर मठ कक्षा में स्थित है और लगभग 95 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर लगाया गया है। पृथ्वी के ऊपर बने चक्रवात के कारण इस पर प्रदूषण, प्रदूषण या प्रकाश प्रदूषण का प्रभाव नहीं पड़ता है। यही वजह है कि ये बेहद साफा और प्रवासी तस्वीरें ले पाता है। यह सिर्फ एक टेलीस्कोप नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण अंतरिक्ष वेधशाला है, जिसे देखने का हमारा नजरिया ही बदल गया। ब्रह्मांड के प्रारंभिक दौर की झलकहबल की नजर इतनी दूर तक फैली हुई है कि हमें ब्रह्मांड के जन्म की करीबी घटनाएं दिखाई दे सकती हैं। उदाहरण के तौर पर GN-z11 नाम की आकाशगंगा, कीमत रोशनी हम तक की पहुंच में करीब 13.4 अरब साल लगी। यानी हम उसे वैसे ही देख रहे हैं, जैसी वह 40 करोड़ साल बाद बिग बैंग की थी। इसी तरह इयरेंडेल नाम का तारा, जिसका नाम लाइट लगभग 12.9 अरब साल पुराना है, हबल द्वारा देखा गया सबसे दूर का तारा इसमें शामिल है। ब्रह्मांडीय खजाना के लिएहबल से मिले डेटा ने ब्रह्मांड के विकास, आकाशगंगाओं के निर्माण और डार्क मैटर जैसे रहस्यों को समझने में मदद की है। इसे “कॉस्मिक आर्कियोलॉजी” यानी ब्रह्मांडीय पुरातत्व के प्रमुख उपकरण माना जाता है। वैज्ञानिक इन आंकड़ों और आँकड़ों के माध्यम से ब्रह्मांड के इतिहास को खोजते हैं और उनके अनसुलझे प्रश्नों के उत्तर खोजते हैं। निष्कर्ष: अतीत की खिड़की, भविष्य की समझहबल स्पेस टेलीस्कोप सिर्फ एक वैज्ञानिक उपकरण नहीं है, बल्कि मानव जिज्ञासा और खोज का प्रतीक है। यह हमें न सिर्फ यह बताता है कि ब्रह्मांड कैसा था, बल्कि यह भी समझने में मदद करता है कि हम इसमें कहां हैं।
AI तकनीक से प्रभावित 5-Star AC की कीमत, जानें कंपनी ने क्या कहा

नई दिल्ली। आज का दौर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। अब AI सिर्फ इंसान की जिंदगी को आसान नहीं बना रहा, बल्कि घर में इस्तेमाल होने वाले सामान—जैसे AC, TV, वैक्यूम क्लीनर—को भी स्मार्ट बना रहा है। AI की मदद से ये प्रोडक्ट पावर सेविंग, बेहतर कूलिंग और यूजर के बिहेवियर को समझकर खुद एडजस्ट होने लगे हैं। हाइसेंस ग्रुप इंडिया के सीईओ पंकज राणा ने बताया कि आने वाले समय में AI होम एप्लायंसेस की हर कैटेगरी में नजर आएगा। उन्होंने कहा कि हाइसेंस के अधिकांश टीवी में AI पहले से मौजूद है, जिससे यूजर को बेहतर विजुअल और ऑडियो एक्सपीरियंस मिलता है। AC में AI का कमालपंकज राणा के मुताबिक, AC में AI यूजर के व्यवहार को समझकर कूलिंग अपने आप एडजस्ट करता है। इसमें वॉयस कंट्रोल और पावर सेविंग फीचर्स भी शामिल हैं। भारतीय गर्मी के हिसाब से ये फीचर्स 20–30 प्रतिशत तक एनर्जी की बचत कर सकते हैं। इसका मतलब है कि बिजली का बिल कम आएगा और AC की स्मार्ट परफॉर्मेंस भी बढ़ेगी। ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में AIAI सिर्फ प्रोडक्ट को स्मार्ट बनाने तक सीमित नहीं है। यह ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में भी मदद करता है। दुनिया भर में जीरो कार्बन फैक्ट्रियों में AI बेस्ड प्रोसेस का इस्तेमाल होता है। हाइसेंस ने भारत में मेक इन इंडिया के तहत लोकल असेंबली और ग्रीन सप्लाई चेन की शुरुआत की है। इससे एफिशिएंट प्रोडक्ट बनेंगे और इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी। कॉपर की बढ़ती कीमत का असरAC, TV और रेफ्रिजरेटर में कॉपर का इस्तेमाल ज्यादा होता है। AC में 100 प्रतिशत कॉपर ट्यूबिंग होती है, जिससे बेहतर हीट ट्रांसफर, मजबूती और लंबी लाइफ मिलती है। कॉपर की बढ़ती कीमतों की वजह से 5 स्टार AC की कीमत 7–8 प्रतिशत और 3 स्टार AC की कीमत 2–4 प्रतिशत बढ़ जाएगी। लोकल प्रोडक्शन और आसान सर्विसिंगहाइसेंस ने आंध्र प्रदेश के श्री सिटी में नए प्लांट में पायलट प्रोडक्शन शुरू किया है। इसमें लोकल कंपोनेंट्स का इस्तेमाल बढ़ेगा, सप्लाई चेन आसान होगी और डिलीवरी तेज होगी। साथ ही, स्क्रू फ्री प्लास्टिक लॉक डिजाइन से सर्विसिंग आसान होगी। नई AC रेंज2026 से लागू नए स्टैंडर्ड के अनुसार हाइसेंस ने AC का प्रोडक्शन शुरू किया है। नई रेंज में 1 टन, 1.5 टन और 2 टन कैपेसिटी के 10–12 मॉडल होंगे। इसमें 3 स्टार और 5 स्टार दोनों रेटिंग उपलब्ध हैं। इन्वर्टर टेक्नोलॉजी के जरिए बेहतर कूलिंग, कम आवाज और ज्यादा एनर्जी एफिशिएंसी मिलेगी।
Instagram पर खतरा: आपकी जानकारी हो रही है ट्रैक, ये हैं कलेक्ट किए जाने वाले डेटा के प्रकार

नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में Instagram सिर्फ फोटो और वीडियो शेयर करने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि यह यूजर्स की कई तरह की निजी जानकारी भी इकट्ठा करता है। अधिकतर लोग बिना पढ़े ही ऐप को परमिशन दे देते हैं, जिससे उनकी पर्सनल डिटेल्स तक ऐप की पहुंच आसान हो जाती है। क्या-क्या डेटा करता है ट्रैक?Instagram यूजर्स के स्मार्टफोन से कई तरह की जानकारी कलेक्ट करता है। इसमें आपकी लोकेशन, सर्च हिस्ट्री, ब्राउजिंग हिस्ट्री और डिवाइस से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। इसके अलावा, ऐप पर आपकी हर गतिविधि भी ट्रैक की जाती है जैसे आपने क्या लाइक किया, किसे फॉलो किया और किस पोस्ट पर कितना समय बिताया। अगर आपने कॉन्टैक्ट एक्सेस की अनुमति दी है, तो आपके फोनबुक के नंबर भी ऐप तक पहुंच सकते हैं। डेटा का कैसे होता है इस्तेमाल?Instagram की पेरेंट कंपनी Meta इस डेटा का इस्तेमाल यूजर्स को बेहतर अनुभव देने और विज्ञापन दिखाने के लिए करती है। यानी आपको वही कंटेंट और विज्ञापन दिखाए जाते हैं, जिनमें आपकी रुचि हो सकती है। अगर आप किसी खास तरह का कंटेंट ज्यादा देखते हैं, तो उसी से जुड़े पोस्ट आपके फीड में ज्यादा दिखाई देने लगते हैं। प्राइवेसी पर क्यों है खतरा?यूजर्स की इतनी ज्यादा जानकारी ट्रैक होने से प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ जाती है। डेटा थर्ड पार्टी के साथ शेयर हो सकता है। हैकिंग या डेटा लीक का खतरा रहता है निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है यही वजह है कि बिना सोचे-समझे परमिशन देना आपके लिए जोखिम भरा हो सकता है। कैसे रखें अपनी जानकारी सुरक्षित?अगर आप अपनी प्राइवेसी को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें ऐप की परमिशन समय-समय पर चेक करें लोकेशन, माइक्रोफोन और कॉन्टैक्ट एक्सेस जरूरत पड़ने पर ही दें Instagram की प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर डेटा शेयरिंग कंट्रोल करें अनावश्यक ऐप एक्सेस को बंद करें सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी सावधानी आपकी निजी जानकारी को सुरक्षित रख सकती है। इसलिए जरूरी है कि आप ऐप परमिशन देते समय सतर्क रहें और अपनी प्राइवेसी को प्राथमिकता दें।
पुराने Android फोन से घर में Wi-Fi रेंज बढ़ाएं, मिनटों में होगा इंटरनेट कनेक्शन मजबूत

नई दिल्ली। आज के समय में तेज इंटरनेट हर घर की जरूरत बन चुका है, लेकिन कई बार पावरफुल राउटर होने के बावजूद घर के हर कोने में Wi-Fi सिग्नल नहीं पहुंच पाते। ऐसे में लोग नया राउटर खरीदते हैं या महंगे Wi-Fi Extender और Mesh सिस्टम लगवाते हैं, जिससे खर्च बढ़ जाता है। लेकिन अब एक आसान और सस्ता तरीका सामने आया है, जिसकी मदद से आप अपने पुराने Android smartphone को ही Wi-Fi Extender बना सकते हैं। कैसे काम करेगा पुराना फोन?पुराना फोन Wi-Fi सिग्नल को पकड़कर उसे दोबारा प्रसारित (रीब्रॉडकास्ट) करता है। यह मोबाइल हॉटस्पॉट की तरह काम करता है, लेकिन इसमें मोबाइल डेटा नहीं बल्कि Wi-Fi डेटा का इस्तेमाल होता है। इससे आपके घर के उन कोनों में भी इंटरनेट पहुंच सकता है,जहां पहले सिग्नल नहीं आता था। फोन को Wi-Fi Extender कैसे बनाएं?पुराने फोन को Wi-Fi Extender बनाना बहुत आसान है सबसे पहले फोन को Wi-Fi से कनेक्ट करें फिर मोबाइल हॉटस्पॉट ऑन करेंहॉटस्पॉट का नाम और पासवर्ड सेट करें ऑटोमैटिक हॉटस्पॉट ऑफ होने का ऑप्शन बंद कर दें अब आपका फोन एक नए Wi-Fi नेटवर्क की तरह काम करेगा, जिससे दूसरे डिवाइस आसानी से कनेक्ट हो सकेंगे। कहां रखें फोन?बेहतर रिजल्ट के लिए फोन को सही जगह रखना जरूरी है फोन को राउटर और डेड जोन के बीच रखें इससे सिग्नल बेहतर तरीके से फैल पाएगा अगर फोन में सिम है तो मोबाइल डेटा बंद रखें फोन को चार्जिंग पर लगाकर रखें बैटरी बचाने के लिए बैटरी सेवर ऑन करें जरूरत हो तो 2.4GHz और 5GHz नेटवर्क के बीच स्विच करें अगर आपके घर में Wi-Fi सिग्नल की समस्या है, तो महंगे डिवाइस खरीदने से पहले यह आसान तरीका जरूर अपनाएं। पुराना Android फोन आपके लिए सस्ता और आसान Wi-Fi Extender बन सकता है, जिससे पूरे घर में बेहतर इंटरनेट मिल सकेगा।
2 अप्रैल को लॉन्च होगा Realme 16 5G, डुअल 50MP कैमरा और 7000mAh बैटरी के साथ

नई दिल्ली। मिड-रेंज स्मार्टफोन बाजार में अब प्रीमियम फीचर्स और बेहतर कैमरा वाले फोन की मांग लगातार बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए रियलमी 16 5जी भारत में 2 अप्रैल को लॉन्च होने जा रहा है। यह फोन रियलमी की नंबर सीरीज की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए एडवांस टेक्नोलॉजी और यूजर-फ्रेंडली डिजाइन के साथ आएगा। कैमरा और फोटोग्राफी में दमदार प्रदर्शनरियलमी 16 5जी में डुअल 50एमपी कैमरा सेटअप मिलेगा। इसमें फ्रंट और रियर दोनों कैमरा 50एमपी के हैं, और रियर कैमरा में सोनी आईएमएक्स 852 सेंसर शामिल है। यह सेटअप सेल्फी, ग्रुप फोटो और रोजमर्रा की फोटोग्राफी में शानदार क्वालिटी देने का दावा करता है। फोन की सबसे खास फीचर है सेगमेंट-फर्स्ट रियर सेल्फी मिरर, जिससे यूजर्स रियर कैमरे से भी साफ और शानदार सेल्फी ले सकते हैं। इसके साथ ही ‘से हाय’ जेस्चर फीचर और रिंग फ्लैश दिया गया है, जिससे बिना हाथ लगाए फोटो लेना आसान हो जाता है और हर तरह की रोशनी में बेहतर परिणाम मिलता है। एआई इमेज टेक्नोलॉजीरियलमी 16 5जी में लूमाकलर इमेज टेक्नोलॉजी दी गई है, जो स्किन टोन को नेचुरल दिखाती है और लाइट तथा शैडो को बैलेंस करती है। इसके अलावा एआई एल्गोरिदम, रॉ एचडीआर प्रोसेसिंग और फेस एन्हांसमेंट फीचर फोटो को ज्यादा रियल और आकर्षक बनाते हैं। वाइब मास्टर मोड में प्रीसेट जैसे लाइवली, फेस्टिवल और सेरेमनी मिलते हैं, जिससे फोटो का मूड और स्टाइल बदलना आसान होता है। एआई एडिट जीनियस की मदद से हेयरस्टाइल, कपड़े और बैकग्राउंड बदलना संभव है, जबकि एआई इंस्टेंट क्लिप फोटो और वीडियो को सोशल मीडिया के लिए जल्दी तैयार करता है। डिजाइन और बैटरीफोन का डिजाइन स्लिम और हल्का है, जिसमें एयर-इंस्पायर्ड डिजाइन दिया गया है। इसके साथ ही इसमें 7000एमएएच की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल की सुविधा देती है। रियलमी 16 5जी मिड-रेंज सेगमेंट में प्रीमियम डिजाइन, दमदार कैमरा और लंबी बैटरी लाइफ का बेहतरीन कॉम्बिनेशन पेश करेगा। इसकी डुअल 50एमपी कैमरा सेटअप, एआई फोटो एडिटिंग फीचर्स और रियर सेल्फी मिरर इसे फोटो और सोशल मीडिया प्रेमियों के लिए खास बनाते हैं।
स्पेस रेस में चीन की बढ़त पर अमेरिका चिंतित, अधिकारियों ने दी चेतावनी

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है। आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौतीइंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी। चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशनचीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे। सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंताएयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है। ‘स्पेस गैप’ का खतराविशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा। तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेसकमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है। नासा की नई रणनीतिनासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी। निर्णायक होंगे आने वाले सालअमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।
उबलता पानी और जहरीली गैसें: ‘डालोल’ क्यों है धरती का सबसे खतरनाक इलाका?

नई दिल्ली। दुनिया में कई जगहें अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती हैं, लेकिन कुछ स्थान ऐसे भी हैं जो रहस्य और खतरे का अनोखा संगम हैं। डालोल ऐसा ही एक इलाका है, जो इथियोपिया के डानाकिल डिप्रेशन में स्थित है। यह जगह पृथ्वी के सबसे गर्म, अम्लीय और खतरनाक स्थानों में गिनी जाती है, जहां प्रकृति अपने सबसे भयावह रूप में नजर आती है। ज्वालामुखी के मुंह पर बसा ‘नरक जैसा’ इलाकाडालोल दरअसल नमक से भरे एक ज्वालामुखी क्रेटर के ऊपर बसा है। यहां लगातार हाइड्रोथर्मल गतिविधियां होती रहती हैं, जिससे उबलता पानी, जहरीली गैसें और खनिज सतह पर निकलते रहते हैं। जमीन से निकलते ये उबलते झरने किसी उबलते हुए “पृथ्वी के जख्म” जैसे लगते हैं। तापमान इतना ज्यादा होता है कि कई जगह पानी 90 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तक पहुंच जाता है। रंगों का मायाजाल, लेकिन बेहद खतरनाकNASA के अनुसार, डालोल का इलाका देखने में बेहद रंगीन और आकर्षक लगता है—पीला रंग सल्फर से, लाल आयरन ऑक्साइड से और हरा कॉपर सॉल्ट से बनता है। लेकिन यह खूबसूरती बेहद खतरनाक है, क्योंकि यहां का पानी अत्यधिक अम्लीय (pH 0.25 तक) और बेहद नमकीन है। जमीन पर बनी नमक की चिमनियां और रंग-बिरंगे झरने इसे किसी दूसरे ग्रह जैसा बना देते हैं। जहरीली हवा, जहां इंसानों का रहना लगभग नामुमकिनइस क्षेत्र की हवा में क्लोरीन और सल्फर जैसी जहरीली गैसें मौजूद रहती हैं। यही कारण है कि यहां लंबे समय तक इंसानों का रहना लगभग असंभव माना जाता है। इसके बावजूद, यह इलाका पूरी तरह निर्जीव नहीं है। मौत के बीच जीवन की खोजवैज्ञानिकों के लिए डालोल किसी खजाने से कम नहीं है। स्पेन के एस्ट्रोबायोलॉजी सेंटर के डॉ. फेलिप गोमेज की टीम ने यहां ऐसे सूक्ष्म जीव (बैक्टीरिया) खोजे हैं जो अत्यधिक गर्मी, अम्लता और नमक के बीच भी जीवित रह सकते हैं। ये बैक्टीरिया सामान्य जीवों से 20 गुना तक छोटे हैं और बेहद कठिन परिस्थितियों में भी पनपते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जीवन कितनी चरम परिस्थितियों में संभव हो सकता है। मंगल ग्रह से कनेक्शनवैज्ञानिक डालोल को मंगल ग्रह के पुराने वातावरण का मॉडल मानते हैं। यहां की हाइड्रोथर्मल गतिविधियां, खनिज और अम्लीय स्थितियां मंगल के कुछ क्षेत्रों से काफी मिलती-जुलती हैं। इसी वजह से इस इलाके का अध्ययन अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने में मदद करता है। पृथ्वी का सबसे गर्म और अनोखा इलाकासमुद्र तल से 125 मीटर नीचे स्थित डालोल का औसत तापमान सालभर 34-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। यह पृथ्वी के सबसे गर्म बसे हुए इलाकों में से एक माना जाता है। यहां जिंक, मैंगनीज, सल्फाइड और रॉक सॉल्ट जैसे खनिज लगातार बनते रहते हैं, जो इसे भूवैज्ञानिक रूप से बेहद खास बनाते हैं। रहस्य और खतरे का अनोखा संगमडालोल सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि प्रकृति की चरम सीमाओं का जीवंत उदाहरण है। जहां एक तरफ यह इलाका जीवन के लिए लगभग असंभव है, वहीं दूसरी ओर यहां मौजूद सूक्ष्म जीव यह साबित करते हैं कि जीवन हर मुश्किल परिस्थिति में अपना रास्ता खोज ही लेता है।
Meta: मेटा पर 3100 करोड़ का जुर्माना, कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का ठहराया दोषी

वाशिंगटन। अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक जूरी ने मंगलवार को मेटा को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण से जुड़े खतरों को छिपाने का दोषी ठहराया। करीब सात हफ्ते चले इस ट्रायल के बाद आए इस फैसले को टेक कंपनियों के खिलाफ सख्ती के बढ़ते रुझान के रूप में देखा जा रहा है। जूरी ने राज्य के अभियोजकों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि मेटा (इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप का मालिक) ने सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को प्राथमिकता दी। जूरी ने माना कि कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और यौन शोषण के खतरों को लेकर भ्रामक जानकारी दी और अनुचित व्यापारिक तरीकों का इस्तेमाल किया। मेटा पर लगा 3100 करोड़ रुपये का जुर्माना जूरी ने पाया कि हजारों उल्लंघन हुए हैं, जिनके आधार पर 375 मिलियन डॉलर यानी करीब 3100 करोड़ भारतीय रुपये का जुर्माना तय किया गया, जो अभियोजन पक्ष की मांग से काफी कम है। हालांकि, कंपनी का बाजार मूल्य लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर है और फैसले के बाद उसके शेयरों में करीब 5% की बढ़त देखी गई। फिलहाल मेटा को तुरंत अपने कामकाज में बदलाव करने के लिए बाध्य नहीं किया गया है। अब यह तय करना एक जज के ऊपर होगा कि क्या मेटा के प्लेटफॉर्म्स सार्वजनिक नुकसान का कारण बने और क्या कंपनी को इससे जुड़े नुकसान की भरपाई करनी होगी। इस मामले की अगली सुनवाई मई में होगी। मेटा ने फैसले पर जताई असहमति मेटा के प्रवक्ता ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि कंपनी इसके खिलाफ अपील करेगी। उन्होंने कहा कि मेटा अपने प्लेटफॉर्म्स पर लोगों को सुरक्षित रखने के लिए लगातार काम करती है और हानिकारक कंटेंट को हटाने की कोशिश करती है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ बढ़ते कानूनी मामलों में से एक है। 2023 में न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज द्वारा दायर इस मुकदमे में आरोप लगाया गया था कि मेटा ने सोशल मीडिया के खतरों और लत से जुड़े मुद्दों को पूरी तरह उजागर नहीं किया। जूरी ने यह भी जांचा कि कंपनी ने 13 साल से कम उम्र के उपयोगकर्ताओं पर प्रतिबंध लागू करने, किशोर आत्महत्या से जुड़े कंटेंट और एल्गोरिदम के जरिए हानिकारक सामग्री को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर क्या जानकारी साझा की। मेटा के वकीलों ने कहा कि कंपनी जोखिमों को उजागर करती है और हानिकारक सामग्री को हटाने का प्रयास करती है, हालांकि कुछ सामग्री सुरक्षा तंत्र से बच निकलती है।
OnePlus Nord 6 में मिलेगा 9000mAh बैटरी और Snapdragon 8 Gen 4 जानें पूरी डिटेल

नई दिल्ली:स्मार्टफोन बाजार में एक और बड़ा धमाका करने की तैयारी में OnePlus अपना नया मिड-प्रीमियम डिवाइस OnePlus Nord 6 जल्द ही भारत में लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने पुष्टि की है कि इस फोन के पूरे स्पेसिफिकेशंस 7 अप्रैल को शाम 7 बजे जारी किए जाएंगे, जिससे टेक लवर्स के बीच इसका इंतजार और बढ़ गया है OnePlus Nord 6 को खास तौर पर मॉडर्न यूजर्स और गेमिंग एक्सपीरियंस को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसमें क्वालकॉम का लेटेस्ट Snapdragon 8 Gen 4 chipset दिया गया है, जो 4nm प्रोसेस पर आधारित है और हाई-एंड परफॉर्मेंस देने में सक्षम है। यह प्रोसेसर एडवांस कोर आर्किटेक्चर के साथ आता है, जिससे फोन तेज और स्मूद काम करता है गेमिंग के शौकीनों के लिए यह फोन खास साबित हो सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह BGMI, Call of Duty Mobile और Free Fire MAX जैसे पॉपुलर गेम्स में लगातार 165FPS तक का गेमप्ले दे सकता है, जो इसे अपने सेगमेंट में अलग बनाता है। साथ ही एड्रेनो GPU और नई एज टेक्नोलॉजी गेमिंग को और बेहतर बनाती है डिस्प्ले की बात करें तो इसमें 165Hz रिफ्रेश रेट के साथ 1.5K AMOLED सनबर्स्ट HDR डिस्प्ले दी गई है, जो बेहद स्मूद विजुअल्स और शानदार ब्राइटनेस प्रदान करती है। इसमें 1800 निट्स तक हाई ब्राइटनेस मोड और 3600 निट्स तक पीक HDR ब्राइटनेस मिलती है, जिससे आउटडोर और HDR कंटेंट देखने का अनुभव शानदार हो जाता है इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 9000mAh की विशाल बैटरी है, जो इस सेगमेंट में सबसे बड़ी मानी जा रही है। कंपनी के अनुसार यह बैटरी एक बार चार्ज करने पर सामान्य उपयोग में 2.5 दिन तक चल सकती है। इसके अलावा यह 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आती है, जिससे फोन लगभग 70 मिनट में फुल चार्ज हो सकता है। इसमें 27W रिवर्स चार्जिंग का सपोर्ट भी दिया गया है, जिससे आप दूसरे डिवाइसेस को भी चार्ज कर सकते हैं कनेक्टिविटी के लिए इसमें G2 वाई-फाई चिप दी गई है, जो बेहतर नेटवर्क परफॉर्मेंस सुनिश्चित करती है। इसके अलावा फोन तीन कलर ऑप्शन होलोग्राफिक क्विक सिल्वर, फ्रेश मिंट और पिच ब्लैक में उपलब्ध होगा, जो यूजर्स को स्टाइलिश डिजाइन का विकल्प देता है OnePlus Nord 6 एक पावरफुल ऑलराउंडर स्मार्टफोन के रूप में सामने आ रहा है, जो बैटरी, गेमिंग और परफॉर्मेंस के मामले में नए स्टैंडर्ड सेट कर सकता है TagsOnePlus, Nord6, Smartphone, TechNews, GamingPhone
चांद मिशन में नई टेक्नोलॉजी NASA ट्रैक करेगा एस्ट्रोनॉट्स की हेल्थ और बिहेवियर

नई दिल्ली: अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग कर रहा NASA अब अपने आने वाले Artemis II मिशन को और भी खास बनाने जा रहा है। यह मिशन केवल चांद की यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें अंतरिक्ष यात्रियों की सेहत और व्यवहार को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण रिसर्च भी शामिल की गई है। Artemis II mission को 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च करने की तैयारी है और यह Apollo मिशनों के बाद पहली बार होगा जब इंसान लो-अर्थ ऑर्बिट से बाहर डीप स्पेस में जाएगा। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री Orion कैप्सूल के जरिए चांद के आसपास की यात्रा करेंगे और करीब 10 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेंगे। यह मिशन भविष्य में इंसानों की चांद पर वापसी की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस मिशन की सबसे खास बात है “Archer” स्टडी, जिसका पूरा नाम Artemis Research for Crew Health and Readiness है। इसके तहत सभी अंतरिक्ष यात्रियों को एक खास रिस्टबैंड पहनाया जाएगा। यह बैंड उनकी नींद, स्ट्रेस लेवल, मूवमेंट और व्यवहार से जुड़ा डेटा रियल-टाइम में रिकॉर्ड करेगा। इस डेटा के जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश करेंगे कि डीप स्पेस का वातावरण इंसानों के दिमाग और शरीर पर किस तरह असर डालता है। मिशन में शामिल अंतरिक्ष यात्रियों में Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं। इन सभी के डेटा को मिशन से पहले, मिशन के दौरान और मिशन के बाद इकट्ठा किया जाएगा, जिससे उनके काग्निटिव परफॉर्मेंस, टीमवर्क और बिहेवियर को बेहतर तरीके से समझा जा सके। डीप स्पेस मिशन लो-अर्थ ऑर्बिट मिशनों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं। लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहना, सीमित संसाधन और अलग-थलग वातावरण अंतरिक्ष यात्रियों पर मानसिक और शारीरिक दबाव डाल सकता है। ऐसे में यह स्टडी भविष्य के मिशनों, खासकर Mars मिशन के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। NASA के Human Research Program के तहत जुटाया गया यह डेटा आने वाले समय में नई टेक्नोलॉजी और बेहतर सेफ्टी प्रोटोकॉल तैयार करने में मदद करेगा। इससे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता दोनों को बेहतर बनाया जा सकेगा। NASA की साइकोलॉजिस्ट Suzanne Bell के अनुसार यह रिसर्च यह समझने में मदद करेगी कि अंतरिक्ष यात्री टीम के रूप में कैसे काम करते हैं और मिशन कंट्रोल के साथ उनका तालमेल कैसा रहता है।Artemis II मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि इंसानी क्षमता और व्यवहार को समझने की दिशा में एक बड़ा वैज्ञानिक कदम है, जो भविष्य में लंबी अंतरिक्ष यात्राओं को सुरक्षित और सफल बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है