AI बनाम जुगाड़: चीन में गुड़िया का सिर बन गया Tesla के ऑटोपायलट का सबसे बड़ा दुश्मन

नई दिल्ली।टेस्ला की सेल्फ ड्राइविंग तकनीक को दुनिया की सबसे उन्नत ऑटोमोबाइल तकनीकों में गिना जाता है। कंपनी का ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा तंत्र इस बात पर लगातार नजर रखता है कि वाहन चला रहा व्यक्ति सड़क पर ध्यान दे रहा है या नहीं। लेकिन चीन में कुछ ड्राइवरों ने इस हाईटेक सिस्टम को चकमा देने का ऐसा तरीका खोज निकाला है जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन में कई टेस्ला चालक अपनी कार के अंदर रियर व्यू मिरर के पास प्लास्टिक की गुड़िया का सिर फिट कर रहे हैं। यह गुड़िया का सिर टेस्ला के इन-कैबिन कैमरे के सामने इस तरह लगाया जाता है कि कार का एआई सिस्टम उसे एक वास्तविक और सतर्क ड्राइवर समझ लेता है। इसके बाद वाहन का ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम यह मान लेता है कि चालक पूरी तरह सक्रिय है और सड़क पर नजर बनाए हुए है। दरअसल टेस्ला के ऑटोपायलट और फुल सेल्फ ड्राइविंग फीचर्स पूरी तरह स्वायत्त नहीं हैं। इनका उपयोग करते समय चालक का सतर्क रहना और जरूरत पड़ने पर तुरंत वाहन का नियंत्रण संभालना अनिवार्य होता है। इसी उद्देश्य से कंपनी ने ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है जो चालक की आंखों की गतिविधियों और सिर की दिशा पर नजर रखता है। यदि सिस्टम को लगता है कि चालक ध्यान नहीं दे रहा है तो वह चेतावनी जारी करता है और जरूरत पड़ने पर ऑटोपायलट फीचर को सीमित भी कर सकता है। चीन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसी गुड़िया के सिर तेजी से बिक रहे हैं जिनकी कीमत लगभग 10 से 50 डॉलर के बीच बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें लोग प्रसिद्ध हस्तियों की आकृति वाले प्लास्टिक सिर का इस्तेमाल कर टेस्ला के एआई सिस्टम को भ्रमित करते दिखाई दे रहे हैं। इस जुगाड़ के जरिए कुछ चालक लंबे सफर के दौरान ड्राइविंग पर कम ध्यान देते हुए ऑटोपायलट के भरोसे यात्रा करते नजर आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। टेस्ला की तकनीक भले ही अत्याधुनिक हो लेकिन यह अभी भी मानव निगरानी पर निर्भर करती है। सड़क पर अचानक आने वाली किसी अप्रत्याशित स्थिति में वाहन हमेशा सही निर्णय लेने में सक्षम नहीं हो सकता। ऐसे समय चालक का सक्रिय और सतर्क होना बेहद जरूरी होता है। यदि ड्राइवर का ध्यान भटका हुआ हो तो दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ सकता है। फिलहाल टेस्ला ने इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी भविष्य में ओवर द एयर यानी ओटीए अपडेट के माध्यम से अपने एआई सिस्टम को और अधिक उन्नत बना सकती है ताकि ऐसे जुगाड़ों को रोका जा सके। यह घटना केवल टेस्ला के लिए ही नहीं बल्कि पूरी ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है क्योंकि इससे यह सवाल उठता है कि इंसानी चालाकी के सामने एआई आधारित सुरक्षा प्रणालियां कितनी प्रभावी हैं। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो उसकी सफलता अंततः जिम्मेदार उपयोगकर्ताओं पर ही निर्भर करती है। यदि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जाएगी तो अत्याधुनिक तकनीक भी दुर्घटनाओं को पूरी तरह नहीं रोक पाएगी।
अब कहीं भी देखें बड़ी स्क्रीन पर फिल्में! प्रोजेक्टर और पावरफुल फीचर्स वाला स्मार्टफोन लॉन्च

नई दिल्ली। स्मार्टफोन की दुनिया में लगातार नए प्रयोग देखने को मिल रहे हैं और अब एक ऐसा फोन सामने आया है जो जेब में मिनी सिनेमाघर लेकर चलता है। चीनी रग्ड स्मार्टफोन निर्माता 8849 ने अपना नया फ्लैगशिप स्मार्टफोन Tank 5 लॉन्च कर दिया है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसका इनबिल्ट 2K DLP लेजर प्रोजेक्टर है जो इसे सामान्य स्मार्टफोन्स से बिल्कुल अलग बनाता है। Tank 5 को खासतौर पर एडवेंचर पसंद करने वाले यूजर्स और आउटडोर गतिविधियों के लिए डिजाइन किया गया है। यह फोन केवल एक स्मार्टफोन नहीं बल्कि मनोरंजन और उपयोगिता का पावरहाउस साबित हो सकता है। इसके जरिए यूजर्स कहीं भी बड़ी स्क्रीन जैसा अनुभव ले सकते हैं। कंपनी ने इसमें लेजर बेस्ड ऑटो फोकस और ऑटोमैटिक कीस्टोन करेक्शन जैसी सुविधाएं दी हैं जिससे प्रोजेक्शन की गुणवत्ता बेहतर हो जाती है। यह 220 लुमेन ब्राइटनेस और 2048 x 1080 पिक्सल रिजॉल्यूशन प्रदान करता है। फोन की एक और खासियत यह है कि इसमें 4 मीटर तक मापने वाला लेजर रेंजफाइंडर भी दिया गया है जो इसे एक उपयोगी टूल में बदल देता है। आउटडोर कैंपिंग और प्रोफेशनल उपयोग के दौरान यह फीचर काफी मददगार साबित हो सकता है। डिस्प्ले की बात करें तो Tank 5 में 6.73 इंच का बड़ा AMOLED पंच होल डिस्प्ले मिलता है। यह 3200 x 1440 पिक्सल रिजॉल्यूशन 120Hz रिफ्रेश रेट और 3000 निट्स पीक ब्राइटनेस के साथ आता है। हाई ब्राइटनेस की वजह से तेज धूप में भी स्क्रीन को आसानी से देखा जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा 50 मेगापिक्सल का नाइट विजन कैमरा और 50 मेगापिक्सल का टेलीफोटो कैमरा दिया गया है। वहीं सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 32 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा मिलता है। नाइट विजन कैमरा कम रोशनी में शानदार तस्वीरें लेने में सक्षम है। परफॉर्मेंस के मामले में भी यह स्मार्टफोन किसी फ्लैगशिप डिवाइस से कम नहीं है। इसमें MediaTek Dimensity 9400e प्रोसेसर दिया गया है। फोन में 18GB RAM और 512GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है जिसे माइक्रो एसडी कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह स्मार्टफोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है और कंपनी ने पांच साल तक सिक्योरिटी अपडेट देने का वादा किया है। बैटरी इसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। Tank 5 में 17600mAh की विशाल बैटरी दी गई है जो लंबे समय तक उपयोग सुनिश्चित करती है। यह 120W फास्ट चार्जिंग और 25W रिवर्स चार्जिंग को सपोर्ट करता है जिससे अन्य डिवाइसेज को भी चार्ज किया जा सकता है। फोन में IP68 और IP69K वॉटर रेजिस्टेंस रेटिंग WiFi 7 NFC Bluetooth 5.4 eSIM सपोर्ट 3.5mm हेडफोन जैक और 1200 ल्यूमेन की कैंपिंग लाइट जैसे कई एडवांस फीचर्स भी दिए गए हैं। कीमत की बात करें तो 8849 Tank 5 की वैश्विक बाजार में कीमत 899.99 डॉलर यानी लगभग 85 हजार रुपये रखी गई है। फिलहाल इसे केवल ब्लैक कलर विकल्प में लॉन्च किया गया है और यह भारत में उपलब्ध नहीं है।
Samsung यूजर्स के लिए बड़ा अलर्ट: सरकार ने दी चेतावनी, करोड़ों डिवाइस पर हैकिंग का खतरा

नई दिल्ली। अगर आप Samsung स्मार्टफोन या टैबलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। करोड़ों Samsung यूजर्स पर साइबर हमले का खतरा मंडरा रहा है। खुद सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने इस संबंध में गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (CERT-In) ने Samsung के Knox सिक्योरिटी फ्रेमवर्क में एक हाई-सीवियरिटी सुरक्षा खामी को लेकर अलर्ट जारी किया है। Samsung Knox, गैलेक्सी डिवाइस में मौजूद एक इनबिल्ट सिक्योरिटी सिस्टम है, जो डिवाइस, ऐप्स और यूजर्स के संवेदनशील डेटा को सुरक्षा प्रदान करता है।किन डिवाइस पर खतरा ज्यादाएडवाइजरी के मुताबिक यह सुरक्षा खामी उन Samsung डिवाइस को प्रभावित कर सकती है जो Android 13, Android 14, Android 15 और Android 16 पर चल रहे हैं और जिनमें जनवरी 2026 के सिक्योरिटी मेंटेनेंस रिलीज (SMR Jan-2026 Release 1) से पहले का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल है। यह खामी Samsung Knox के PROCA ड्राइवर में मौजूद एक बग के कारण बताई गई है।क्या हो सकता है खतराCERT-In की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस खामी का फायदा उठाकर हैकर्स डिवाइस में मैलिशियस कोड रन कर सकते हैं, सुरक्षा सिस्टम को बायपास कर सकते हैं और अनधिकृत रूप से फोन तक पहुंच हासिल कर सकते हैं। गंभीर स्थिति में डिवाइस का पूरा नियंत्रण भी हमलावरों के हाथ में जा सकता है। सरकारी एजेंसी ने इस जोखिम को “हाई सीवियरिटी” कैटेगरी में रखा है और कहा है कि इससे डेटा चोरी और सिस्टम से छेड़छाड़ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, इस खामी का फायदा उठाने के लिए डिवाइस तक लोकल एक्सेस की आवश्यकता होती है, फिर भी यूजर्स को सावधानी बरतने और तुरंत अपडेट करने की सलाह दी गई है। कितने यूजर्स प्रभावित हैं, जानकारी नहींरिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि Samsung की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि भारत या वैश्विक स्तर पर कितने डिवाइस इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं। यूजर्स के लिए जरूरी सलाहसुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के साइबर जोखिम से बचने का सबसे आसान तरीका डिवाइस को अपडेट रखना है। यूजर्स अपने फोन में जाकरSettings → Software Update → Download and Install के जरिए लेटेस्ट अपडेट चेक और इंस्टॉल कर सकते हैं। समय पर अपडेट करने से संभावित साइबर हमलों और डेटा चोरी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
टेक्नोलॉजी से फाइनेंस तक भारतीयों का जलवा, दुनिया की दिग्गज कंपनियों में बढ़ रही नेतृत्वकारी भूमिका; वैश्विक स्तर पर प्रतिभा का बढ़ा सम्मान

नई दिल्ली । वैश्विक कॉरपोरेट जगत में भारतीय मूल के पेशेवरों का बढ़ता प्रभाव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। दुनिया की अग्रणी तकनीकी, वित्तीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भारतीय प्रतिभाएं लगातार शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। हाल के वर्षों में कई भारतीय मूल के अधिकारियों ने वैश्विक संस्थानों में महत्वपूर्ण पद हासिल किए हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय पेशेवरों की क्षमता, नेतृत्व कौशल और रणनीतिक सोच को व्यापक मान्यता मिल रही है। फिनटेक क्षेत्र में अपनी अलग पहचान स्थापित करने वाले कुणाल शाह को वैश्विक तकनीकी नेतृत्व से जुड़ी नई जिम्मेदारी मिलने के बाद इस विषय पर चर्चा और तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उस व्यापक बदलाव का हिस्सा है जिसमें भारतीय मूल के पेशेवर वैश्विक निर्णय प्रक्रिया के महत्वपूर्ण केंद्रों तक पहुंच रहे हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा प्रबंधन और क्लाउड तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारतीय विशेषज्ञों की बढ़ती भूमिका अब वैश्विक कंपनियों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। पिछले एक दशक के दौरान दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों ने भारतीय मूल के अधिकारियों को शीर्ष प्रबंधन की जिम्मेदारियां सौंपी हैं। इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि भारतीय पेशेवर जटिल कारोबारी चुनौतियों का समाधान निकालने, बड़े संगठनों का संचालन करने और तेजी से बदलते तकनीकी माहौल के अनुरूप रणनीति तैयार करने में सक्षम हैं। तकनीकी क्षेत्र में मिली इन सफलताओं ने भारत की वैश्विक पहचान को भी मजबूत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत उसकी बहुआयामी कार्यशैली और वैश्विक दृष्टिकोण है। भारतीय पेशेवर अक्सर विविध सांस्कृतिक और व्यावसायिक परिवेश में काम करने का अनुभव रखते हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। यही कारण है कि उन्हें केवल तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक नेतृत्वकर्ता के रूप में भी देखा जा रहा है। तकनीक के अलावा भारतीय प्रतिभाओं ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, स्वास्थ्य क्षेत्र, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर उद्योग, उपभोक्ता उत्पाद और वैश्विक परामर्श सेवाओं में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। आज दुनिया की कई प्रतिष्ठित कंपनियों के बोर्डरूम में भारतीय मूल के अधिकारी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दिखाई देते हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि भारतीय प्रतिभा का प्रभाव अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में फैल चुका है। भारतीय शिक्षा व्यवस्था और तकनीकी संस्थानों की भूमिका भी इस सफलता के पीछे महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश के प्रमुख इंजीनियरिंग और प्रबंधन संस्थानों से निकलने वाले छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की बढ़ती भागीदारी उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति प्रदान कर रही है। यही कारण है कि विश्व की बड़ी कंपनियां भारतीय प्रतिभाओं को नेतृत्व के लिए उपयुक्त मान रही हैं। विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या भी इस प्रवृत्ति को गति दे रही है। कई भारतीय छात्र वैश्विक विश्वविद्यालयों से शिक्षा प्राप्त करने के बाद अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी संगठनों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा रहे हैं। समय के साथ इनमें से कई पेशेवर शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचकर वैश्विक कारोबारी नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा, उन्नत कंप्यूटिंग और डेटा विज्ञान जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में भारतीय मूल के पेशेवरों की भूमिका और अधिक मजबूत होगी। वैश्विक कंपनियों में उनकी बढ़ती भागीदारी केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी दक्षता, शिक्षा प्रणाली और विश्व स्तर पर स्वीकार की जा रही प्रतिभा का भी प्रमाण है। बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारतीय नेतृत्व की यह उपस्थिति भविष्य में और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आने की संभावना रखती है।
Android यूजर्स अलर्ट! यह सीक्रेट Private Space सेटिंग ऑन नहीं की तो खतरे में है आपका डेटा

नई दिल्ली। आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन सिर्फ कॉल और मैसेज का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारी पूरी निजी और वित्तीय जिंदगी का एक डिजिटल भंडार बन चुका है। बैंकिंग ऐप्स से लेकर निजी फोटो, जरूरी दस्तावेज और सोशल मीडिया अकाउंट्स तक, हर संवेदनशील जानकारी अब मोबाइल फोन में सुरक्षित रहती है। ऐसे में साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इसी जरूरत को देखते हुए एंड्रॉयड सिस्टम में एक बेहद उपयोगी और उन्नत सुरक्षा फीचर शामिल किया गया है, जिसे Android के नए वर्जन Android 15 में “Private Space” के नाम से जाना जाता है। हालांकि यह फीचर डिफॉल्ट रूप से ऑन नहीं होता, लेकिन यह उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सुरक्षा की एक मजबूत परत प्रदान करता है। यह फीचर वास्तव में फोन के अंदर एक अलग और सुरक्षित डिजिटल स्पेस बनाता है, जो मुख्य प्रोफाइल से पूरी तरह अलग काम करता है। इस स्पेस में यूजर अपने ऐप्स, फाइलें और संवेदनशील डेटा अलग से स्टोर कर सकते हैं, जिसे केवल एक अलग PIN, पासवर्ड या पैटर्न से ही एक्सेस किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह फीचर एक तरह का “डिजिटल लॉकर” है, जो आपके मुख्य फोन सिस्टम से अलग होता है। इसमें रखे गए ऐप्स और डेटा सामान्य प्रोफाइल से सीधे एक्सेस नहीं किए जा सकते, जिससे डेटा चोरी या अनधिकृत उपयोग का खतरा काफी कम हो जाता है। Google Pixel और कुछ अन्य Android डिवाइसों में इसे Private Space कहा जाता है, जबकि Samsung Electronics के स्मार्टफोन्स में यही फीचर “Secure Folder” के नाम से उपलब्ध है। Secure Folder भी लगभग समान सुरक्षा सुविधा देता है, जहां यूजर अलग से ऐप्स और फाइलें सुरक्षित रख सकता है। इस फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बैंकिंग ऐप्स, निजी चैटिंग एप्स और जरूरी डॉक्यूमेंट्स को एक अलग सुरक्षित वातावरण में रखा जा सकता है। इससे न केवल डेटा सुरक्षित रहता है, बल्कि प्राइवेसी भी मजबूत होती है। साथ ही, यह अलग Google अकाउंट या प्रोफाइल के उपयोग की सुविधा भी देता है, जिससे काम और निजी डेटा को अलग-अलग रखा जा सकता है। यदि कोई यूजर Android 15 या उससे नए वर्जन का फोन इस्तेमाल कर रहा है, तो वह इसे Settings > Security & Privacy > Private Space में जाकर एक्टिवेट कर सकता है। इसके लिए एक अलग लॉगिन और लॉक सेट करना होता है, जो मुख्य फोन लॉक से अलग होता है। Samsung यूजर्स के लिए यह सुविधा Settings > Security & Privacy > More Security Settings > Secure Folder में उपलब्ध है, जिसे Samsung अकाउंट के जरिए सेट किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह फीचर उन सभी यूजर्स के लिए बेहद जरूरी है जो अपने फोन में निजी और संवेदनशील जानकारी रखते हैं। सही तरीके से इस फीचर का उपयोग करके डेटा चोरी और साइबर खतरे से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
165Hz डिस्प्ले, Snapdragon 8 Elite और विशाल बैटरी की चर्चा के बीच Redmi K90 Ultra लॉन्च से पहले बना टेक जगत का केंद्रबिंदु

नई दिल्ली । स्मार्टफोन बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रीमियम और गेमिंग-केंद्रित डिवाइसों की बढ़ती मांग के बीच Redmi K90 Ultra को लेकर सामने आ रही जानकारियों ने तकनीक प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। कंपनी की ओर से आधिकारिक लॉन्च तिथि का खुलासा भले ही अभी नहीं किया गया हो, लेकिन डिवाइस को लेकर जारी संकेतों और विभिन्न रिपोर्ट्स ने इसे आगामी महीनों के सबसे चर्चित स्मार्टफोन्स में शामिल कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह स्मार्टफोन पिछले मॉडल के मुकाबले कई महत्वपूर्ण अपग्रेड्स के साथ बाजार में उतारा जा सकता है। विशेष रूप से इसकी बैटरी क्षमता और गेमिंग प्रदर्शन को लेकर सबसे अधिक चर्चा हो रही है। माना जा रहा है कि फोन में 8000mAh या उससे अधिक क्षमता की बैटरी देखने को मिल सकती है, जो इसे लंबे समय तक उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प बना सकती है। इसके साथ 100W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना भी जताई जा रही है, जिससे बड़ी बैटरी को कम समय में चार्ज किया जा सकेगा। डिस्प्ले के मोर्चे पर भी यह डिवाइस काफी उन्नत तकनीक के साथ आ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें लगभग 6.89 इंच का LTPS OLED पैनल दिया जा सकता है, जो 1.5K रेजोल्यूशन और 165Hz रिफ्रेश रेट के साथ आएगा। उच्च रिफ्रेश रेट गेमिंग, वीडियो स्ट्रीमिंग और स्क्रॉलिंग अनुभव को अधिक स्मूद और प्रतिक्रियाशील बनाने में मदद करेगा। इसके अलावा अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और प्रीमियम मेटल फ्रेम जैसे फीचर्स इसे फ्लैगशिप श्रेणी के करीब ला सकते हैं। परफॉर्मेंस के मामले में भी Redmi K90 Ultra से बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। संभावित रूप से इसमें Qualcomm का Snapdragon 8 Elite प्रोसेसर दिया जा सकता है, जिसे वर्तमान समय के सबसे शक्तिशाली मोबाइल चिपसेट्स में गिना जाता है। यही कारण है कि इस डिवाइस को विशेष रूप से मोबाइल गेमिंग पसंद करने वाले उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए जाने की चर्चा है। बेहतर प्रदर्शन बनाए रखने के लिए फोन में उन्नत थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम और सक्रिय कूलिंग तकनीक भी देखने को मिल सकती है। सॉफ्टवेयर अनुभव को आधुनिक बनाने के लिए यह स्मार्टफोन Android 16 आधारित HyperOS 3 पर संचालित हो सकता है। इसके अलावा IP68 रेटिंग मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है, जिससे फोन धूल और पानी से अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकेगा। यह फीचर प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कैमरा सेक्शन में भी संतुलित हार्डवेयर मिलने की उम्मीद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिवाइस में 50 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा, 8 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड सेंसर और सेल्फी व वीडियो कॉलिंग के लिए 20 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया जा सकता है। हालांकि कंपनी ने अभी कैमरा कॉन्फिगरेशन की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। कीमत को लेकर अनुमान है कि इसकी शुरुआती कीमत लगभग 3,000 चीनी युआन, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 41,000 रुपये के आसपास हो सकती है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो Redmi K90 Ultra बड़ी बैटरी, उच्च प्रदर्शन, तेज चार्जिंग और गेमिंग-केंद्रित फीचर्स के साथ प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। लॉन्च से पहले ही इस डिवाइस को लेकर बढ़ती चर्चा यह संकेत दे रही है कि तकनीक जगत की नजरें अब इसके आधिकारिक अनावरण पर टिकी हुई हैं।
Apple का बड़ा दांव: iPhone Air 2 में मिल सकते हैं बड़े अपग्रेड, कैमरा और बैटरी में सुधार से बदल सकता है यूजर अनुभव

नई दिल्ली । वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में प्रीमियम डिवाइसों के लिए पहचानी जाने वाली कंपनी Apple अपने अल्ट्रा-थिन स्मार्टफोन लाइनअप को और मजबूत करने की तैयारी में जुटी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अब iPhone Air 2 पर काम कर रही है, जिसे मौजूदा मॉडल की कमियों को दूर करते हुए अधिक आकर्षक और सक्षम बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि नया मॉडल डिजाइन की पहचान को बरकरार रखते हुए कैमरा और बैटरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े सुधार लेकर आएगा। iPhone Air को कंपनी ने बेहद पतले और हल्के डिजाइन के साथ पेश किया था। हालांकि इसकी प्रीमियम बनावट और आकर्षक लुक को सराहना मिली, लेकिन कैमरा सेटअप और बैटरी प्रदर्शन को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने सवाल भी उठाए। यही कारण है कि Apple अब अगली पीढ़ी के मॉडल में इन पहलुओं को प्राथमिकता देकर बेहतर अनुभव प्रदान करने की दिशा में काम कर रही है। जानकारी के अनुसार कंपनी नए मॉडल के विभिन्न प्रोटोटाइप पर परीक्षण कर रही है। माना जा रहा है कि iPhone Air 2 में पिछली पीढ़ी के मुकाबले डुअल रियर कैमरा सिस्टम देखने को मिल सकता है। इससे फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव पहले से अधिक बेहतर हो सकता है। विशेष रूप से अल्ट्रावाइड फोटोग्राफी जैसे फीचर्स को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उपयोगकर्ताओं को अधिक रचनात्मक विकल्प मिल सकते हैं। कैमरे के अलावा बैटरी प्रदर्शन भी कंपनी के लिए महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र माना जा रहा है। अल्ट्रा-थिन डिजाइन के कारण बड़े आकार की बैटरी जोड़ना तकनीकी चुनौती हो सकता है, इसलिए Apple ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे सकती है। नए प्रोसेसर, बेहतर सॉफ्टवेयर अनुकूलन और ऊर्जा प्रबंधन तकनीकों के जरिए बैटरी बैकअप को पहले से अधिक प्रभावी बनाने की संभावना है। डिजाइन की बात करें तो Apple अपने पतले स्मार्टफोन की मूल पहचान को बरकरार रख सकती है। कंपनी की रणनीति यह हो सकती है कि डिवाइस का प्रीमियम और स्लिम प्रोफाइल बना रहे, जबकि आंतरिक हार्डवेयर को अधिक सक्षम बनाया जाए। कैमरा मॉड्यूल में संभावित बदलाव के कारण फोन के पिछले हिस्से में हल्का डिजाइन परिवर्तन देखने को मिल सकता है, लेकिन कुल मिलाकर इसकी पहचान एक अल्ट्रा-थिन प्रीमियम डिवाइस के रूप में ही बनी रहने की उम्मीद है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और उपभोक्ता अब केवल डिजाइन ही नहीं बल्कि कैमरा, बैटरी और प्रदर्शन के संतुलन को भी महत्व देते हैं। ऐसे में Apple के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपने नए मॉडल में इन सभी पहलुओं को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी अपने आगामी उत्पादों की लॉन्च रणनीति में भी बदलाव कर सकती है। भविष्य में विभिन्न मॉडल अलग-अलग समय पर पेश किए जा सकते हैं, जिससे प्रत्येक डिवाइस को बाजार में अधिक ध्यान और पहचान मिल सके। इसी रणनीति के तहत iPhone Air 2 को अगले वर्ष की शुरुआत में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि Apple की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सामने आ रही जानकारियों ने तकनीक प्रेमियों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। यदि अनुमान सही साबित होते हैं, तो iPhone Air 2 कंपनी के सबसे आकर्षक और संतुलित स्मार्टफोनों में से एक बन सकता है, जो डिजाइन, प्रदर्शन और उपयोगकर्ता अनुभव का नया मानक स्थापित करने की क्षमता रखता है।
व्हाट्सऐप ला रहा बड़ा बदलाव, बिना चैट खोले दिखेगा कौन है ऑनलाइन, बैकअप मैनेजमेंट भी होगा पहले से ज्यादा आसान

नई दिल्ली । दुनिया के सबसे लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के लिए नए और उपयोगी फीचर्स तैयार करने में लगातार जुटा हुआ है। इसी क्रम में कंपनी दो ऐसे फीचर्स की टेस्टिंग कर रही है जो न केवल चैटिंग अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाएंगे बल्कि स्टोरेज प्रबंधन से जुड़ी परेशानियों को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार इन फीचर्स में ऑनलाइन इंडिकेटर और एडवांस बैकअप कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं। नए ऑनलाइन इंडिकेटर फीचर का उद्देश्य यूजर्स को किसी भी कॉन्टैक्ट की ऑनलाइन स्थिति को अधिक आसान तरीके से दिखाना है। मौजूदा समय में किसी व्यक्ति के ऑनलाइन होने की जानकारी प्राप्त करने के लिए उसकी चैट विंडो खोलनी पड़ती है। प्रस्तावित फीचर के तहत यदि कोई व्यक्ति व्हाट्सऐप पर सक्रिय होगा तो उसकी प्रोफाइल फोटो के पास एक छोटा ग्रीन डॉट दिखाई देगा। इससे यूजर्स बिना चैट ओपन किए ही यह समझ सकेंगे कि संबंधित व्यक्ति उस समय ऐप पर मौजूद है या नहीं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फीचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है जो लगातार कई संपर्कों के साथ संवाद करते हैं। प्रोफाइल स्तर पर ऑनलाइन स्टेटस दिखाई देने से समय की बचत होगी और बार-बार चैट खोलने की आवश्यकता भी कम हो जाएगी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस सुविधा के साथ प्राइवेसी कंट्रोल के अतिरिक्त विकल्प भी दिए जाएंगे या नहीं। दूसरा महत्वपूर्ण फीचर बैकअप कंट्रोल से जुड़ा है। व्हाट्सऐप लंबे समय से चैट बैकअप की सुविधा प्रदान करता रहा है, लेकिन कई उपयोगकर्ताओं को पुराने बैकअप के कारण स्टोरेज संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नए सिस्टम के तहत यूजर्स अपने बैकअप को अधिक व्यवस्थित तरीके से देख सकेंगे, उनकी कॉपी बना सकेंगे और आवश्यकता न होने पर पुराने बैकअप को हटा भी सकेंगे। यह फीचर विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जिनके स्मार्टफोन में सीमित स्टोरेज उपलब्ध है। समय के साथ बैकअप फाइलें बड़ी होती जाती हैं और फोन या क्लाउड स्टोरेज की पर्याप्त जगह घेर लेती हैं। नए विकल्पों की मदद से यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार बैकअप को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर सकेंगे। जानकारी के अनुसार इस दिशा में एंड्रॉयड इकोसिस्टम में भी कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। भविष्य में यूजर्स को फोन की सिस्टम सेटिंग्स के भीतर ही एक अलग बैकअप मैनेजमेंट सेक्शन उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे व्हाट्सऐप बैकअप की निगरानी और प्रबंधन सीधे डिवाइस स्तर पर करना संभव होगा। यह सुविधा बैकअप से जुड़ी प्रक्रियाओं को पहले की तुलना में अधिक सरल और व्यवस्थित बना सकती है। फिलहाल दोनों फीचर्स परीक्षण और विकास के चरण में हैं। कंपनी की ओर से इनके आधिकारिक लॉन्च की तारीख की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन तकनीकी जगत में इन सुविधाओं को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। यदि परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले अपडेट्स में करोड़ों यूजर्स को इनका लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाट्सऐप लगातार ऐसे फीचर्स विकसित कर रहा है जो उपयोगकर्ताओं की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हैं। ऑनलाइन इंडिकेटर और बैकअप कंट्रोल जैसे फीचर्स भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं, जो प्लेटफॉर्म को और अधिक उपयोगी तथा सुविधाजनक बना सकते हैं।
रातभर चार्जिंग पर छोड़ते हैं फोन? समझिए 100% बैटरी के बाद कहां जाता है करंट और बैटरी हेल्थ पर इसका कितना पड़ता है असर

नई दिल्ली । स्मार्टफोन आज केवल संचार का माध्यम नहीं बल्कि दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। कामकाज, बैंकिंग, शिक्षा, मनोरंजन और सामाजिक संपर्क जैसे लगभग हर क्षेत्र में इनका उपयोग बढ़ गया है। इसी कारण अधिकांश लोग अपने फोन को हमेशा चार्ज रखाना चाहते हैं और कई बार रातभर चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं। हालांकि लंबे समय से लोगों के मन में यह सवाल बना रहता है कि जब फोन 100 प्रतिशत चार्ज हो जाता है तो उसके बाद भी चार्जिंग क्यों जारी रहती है और चार्जर से आने वाली बिजली आखिर जाती कहां है। तकनीक के विकास के साथ आधुनिक स्मार्टफोन पहले की तुलना में कहीं अधिक उन्नत हो चुके हैं। इनमें अत्याधुनिक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और स्मार्ट चार्जिंग कंट्रोलर लगाए जाते हैं, जो बैटरी को सुरक्षित रखने का काम करते हैं। जैसे ही बैटरी अपनी अधिकतम क्षमता तक पहुंचती है, सिस्टम सीधे बैटरी में अतिरिक्त बिजली भेजना बंद कर देता है। इसका उद्देश्य बैटरी को ओवरचार्जिंग से बचाना होता है, क्योंकि लगातार ऊर्जा भरते रहने से बैटरी को नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि 100 प्रतिशत चार्ज दिखने का अर्थ यह नहीं होता कि फोन पूरी तरह बिजली लेना बंद कर देता है। आधुनिक स्मार्टफोन एक विशेष तकनीक का उपयोग करते हैं, जिसे ट्रिकल चार्जिंग कहा जाता है। इस प्रक्रिया में फोन केवल उतनी ही ऊर्जा ग्रहण करता है जितनी उसकी तत्काल आवश्यकता होती है। इससे बैटरी सुरक्षित रहती है और उसका चार्ज स्तर लगभग 100 प्रतिशत के आसपास बना रहता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि जब फोन चार्जिंग पर लगा रहता है, तब भी कई बैकग्राउंड प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। नोटिफिकेशन प्राप्त होना, इंटरनेट कनेक्शन बनाए रखना, सिस्टम अपडेट की जांच करना या बैकग्राउंड एप्लिकेशन का चलना जैसी गतिविधियां थोड़ी-थोड़ी ऊर्जा खर्च करती रहती हैं। ट्रिकल चार्जिंग इसी खर्च हुई ऊर्जा की पूर्ति करती है। यही कारण है कि बैटरी पूरी तरह भर जाने के बाद भी चार्जिंग सिस्टम समय-समय पर सक्रिय दिखाई देता है। आधुनिक चार्जिंग सर्किट यह भी सुनिश्चित करते हैं कि अतिरिक्त करंट सीधे बैटरी पर दबाव न बनाए। जब बैटरी पूरी तरह चार्ज होती है तो अधिकांश बिजली फोन के संचालन और आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को चलाने में उपयोग होती है। इस प्रक्रिया के कारण बैटरी लगातार ऊर्जा संग्रह नहीं करती, बल्कि सुरक्षित स्तर पर बनी रहती है। हालांकि तकनीक ने ओवरचार्जिंग की समस्या को काफी हद तक समाप्त कर दिया है, फिर भी बैटरी को लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज पर बनाए रखना पूरी तरह लाभदायक नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार लिथियम-आयन बैटरियां लगातार उच्च वोल्टेज पर रहने से धीरे-धीरे अपनी क्षमता खोने लगती हैं। यदि कोई व्यक्ति रोजाना पूरी रात फोन को चार्जिंग पर लगाए रखता है तो लंबे समय में बैटरी की कुल कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा तापमान भी बैटरी की उम्र निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि फोन चार्जिंग के दौरान अधिक गर्म हो जाए तो बैटरी के रासायनिक घटकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चार्जिंग के दौरान फोन को तकिए, कंबल या किसी ऐसी जगह पर न रखा जाए जहां गर्मी बाहर न निकल सके। तकनीकी जानकारों का मानना है कि बैटरी की लंबी उम्र के लिए फोन को सामान्यतः 20 से 80 प्रतिशत के बीच रखना अधिक फायदेमंद होता है। हालांकि आधुनिक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को अधिक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि उनमें सुरक्षा के कई स्तर मौजूद होते हैं। फिर भी सही चार्जिंग आदतें अपनाकर बैटरी की कार्यक्षमता और जीवनकाल को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।
ChatGPT बना और ज्यादा स्मार्ट, Scheduled Tasks फीचर से अब तय समय पर मिलेगा अलर्ट और अपने आप होंगे कई जरूरी काम

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच ChatGPT को एक और महत्वपूर्ण क्षमता मिलने जा रही है। OpenAI ने अपने लोकप्रिय एआई प्लेटफॉर्म के लिए Scheduled Tasks नाम का नया फीचर पेश किया है, जिसका उद्देश्य ChatGPT को केवल सवाल-जवाब करने वाले चैटबॉट से आगे बढ़ाकर एक सक्रिय डिजिटल असिस्टेंट के रूप में विकसित करना है। इस फीचर के जरिए उपयोगकर्ता विभिन्न कार्यों को पहले से निर्धारित समय के अनुसार सेट कर सकेंगे और ChatGPT समय आने पर स्वतः उन्हें पूरा करने या उनसे संबंधित सूचना देने का काम करेगा। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपडेट एआई आधारित व्यक्तिगत सहायता सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। अब तक ChatGPT मुख्य रूप से उपयोगकर्ता के निर्देश मिलने पर ही प्रतिक्रिया देता था, लेकिन Scheduled Tasks फीचर के आने के बाद यह निर्धारित समय पर स्वयं सक्रिय होकर कार्यों को पूरा करने में सक्षम होगा। इससे दैनिक जीवन और पेशेवर कार्यों के प्रबंधन में उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त सुविधा मिलने की उम्मीद है। इस फीचर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी ऑटोमेशन क्षमता है। उपयोगकर्ता किसी बैठक, प्रोजेक्ट, अध्ययन कार्यक्रम, दैनिक रिपोर्ट या अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए पहले से निर्देश सेट कर सकेंगे। निर्धारित समय आने पर ChatGPT संबंधित सूचना, रिमाइंडर या अपडेट उपलब्ध कराएगा। इससे बार-बार एक ही प्रकार के निर्देश देने की आवश्यकता कम हो जाएगी और समय की बचत होगी। Scheduled Tasks के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के कार्य निर्धारित किए जा सकेंगे। उपयोगकर्ता किसी विशेष तारीख और समय के लिए एक बार चलने वाले कार्य निर्धारित कर सकते हैं। इसके अलावा ऐसे कार्य भी सेट किए जा सकते हैं जो रोजाना, साप्ताहिक या अन्य नियमित अंतराल पर स्वतः दोहराए जाएं। यह सुविधा उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जा रही है जो अपने कामकाज को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना चाहते हैं। फीचर का एक और महत्वपूर्ण पहलू मॉनिटरिंग क्षमता है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता किसी खास विषय, जानकारी या अपडेट पर नजर रखने के लिए ChatGPT को निर्देश दे सकेंगे। यदि उस विषय से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है, तो सिस्टम उपयोगकर्ता को स्वतः सूचित करेगा। इससे महत्वपूर्ण घटनाओं और नियमित अपडेट्स पर नजर रखना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकता है। OpenAI इस सुविधा के लिए एक अलग कंट्रोल इंटरफेस भी उपलब्ध करा रहा है। यह सेक्शन ChatGPT के मुख्य प्लेटफॉर्म में शामिल होगा, जहां उपयोगकर्ता अपने सभी सक्रिय टास्क, उनकी स्थिति और निर्धारित समय को एक ही स्थान पर देख सकेंगे। आवश्यकता पड़ने पर किसी भी कार्य को संशोधित, रोकने या दोबारा सक्रिय करने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। इससे उपयोगकर्ताओं को अपने सभी ऑटोमेटेड कार्यों पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह फीचर छात्रों, पेशेवरों, कंटेंट क्रिएटर्स, व्यवसायियों और उन सभी लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो समय प्रबंधन और नियमित अपडेट्स पर निर्भर रहते हैं। डिजिटल उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ यह सुविधा एआई को रोजमर्रा की गतिविधियों का अधिक सक्रिय हिस्सा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में ऐसे फीचर्स एआई आधारित सेवाओं को और अधिक व्यक्तिगत तथा उपयोगकर्ता-केंद्रित बना सकते हैं। Scheduled Tasks की शुरुआत यह संकेत देती है कि भविष्य में ChatGPT केवल जानकारी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समयबद्ध कार्यों और दैनिक गतिविधियों के प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।