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हैदराबाद के इंजीनियरों का इनोवेशन: ‘Ambiator’AC जैसी ठंडक, लेकिन कूलर जितना कम बिजली बिल

नई दिल्ली। हैदराबाद के दो इंजीनियरों टाइगर एस्टर और जीतन देसाई ने एक नया इको-फ्रेंडली कूलिंग डिवाइस Ambiator विकसित किया है, जिसे एयर कंडीशनर का किफायती और टिकाऊ विकल्प माना जा रहा है। यह डिवाइस दावा करता है कि यह सामान्य AC की तुलना में करीब 80% तक कम बिजली खर्च करता है, जबकि ठंडक लगभग AC जैसी ही देता है। खास बात यह है कि यह किसी हानिकारक गैस पर नहीं चलता, बल्कि साधारण पानी और इवेपोरेटिव कूलिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित है। Ambiator में IoT सेंसर भी लगाए गए हैं, जो कमरे के तापमान और नमी के अनुसार कूलिंग को अपने आप एडजस्ट करते हैं। इसे सोलर एनर्जी से भी चलाया जा सकता है, जिससे यह और भी किफायती बन जाता है। तकनीकी रूप से यह सिस्टम पानी को सीधे हवा में मिलाने के बजाय हीट एक्सचेंजर के जरिए हवा को ठंडा करता है, जिससे कूलर जैसी उमस की समस्या नहीं होती। किफायती बिजली खपत, कम पानी उपयोग और बिना गैस आधारित तकनीक के कारण Ambiator को एक ग्रीन कूलिंग सॉल्यूशन के तौर पर देखा जा रहा है, जिसे नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब में भी प्रदर्शित किया गया है।

Zoho फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने AI निवेश को बताया ‘अब तक का सबसे बड़ा बुलबुला’, टेक कंपनियों की रणनीति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर वैश्विक टेक कंपनियों की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि मौजूदा AI बूम शायद अब तक का “सबसे बड़ा बुलबुला” साबित हो सकता है। वेम्बु के अनुसार, हर बड़ी टेक्नोलॉजी वेव में इस तरह की स्थिति बनती है, लेकिन मौजूदा AI निवेश और प्रचार का स्तर पहले से कहीं ज्यादा बड़ा है। उनका मानना है कि कई कंपनियां वास्तविक मांग से ज्यादा भविष्य की उम्मीदों पर भारी निवेश कर रही हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि AI इंडस्ट्री की ग्रोथ केवल वास्तविक उपयोग नहीं, बल्कि निवेश चक्र और अकाउंटिंग स्ट्रक्चर पर भी आधारित हो सकती है। इस पोस्ट में दावा किया गया कि बड़ी टेक कंपनियां AI स्टार्टअप्स में निवेश कर क्लाउड सर्विसेज के जरिए उसी पैसा वापस अर्जित कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर पोस्ट में Microsoft और OpenAI के बीच हुए निवेश और क्लाउड क्रेडिट्स के उपयोग का भी जिक्र किया गया, जिससे यह सवाल उठाया गया कि AI इकोसिस्टम का असली रेवेन्यू मॉडल कितना मजबूत है। वेम्बु ने यह भी कहा कि इस पूरे दौर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कंपनियां बिना बड़े नुकसान के इस तेज AI दौड़ में कैसे आगे बढ़ें, खासकर तब जब कई टेक कंपनियों में छंटनी भी देखने को मिल रही है। इसके अलावा वे AI आधारित कोडिंग पर भी सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना है कि AI से कोड लिखने के बावजूद सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की उत्पादकता में अपेक्षित वृद्धि नहीं दिख रही है।फिलहाल, उनके इस बयान ने टेक इंडस्ट्री में AI निवेश और उसके वास्तविक प्रभाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

AI से हार्ट अटैक की पहले से चेतावनी संभव? हॉन्ग कॉन्ग रिसर्चर्स का दावा, एक ब्लड टेस्ट से 15 साल पहले जोखिम का अंदाजा

नई दिल्ली। हॉन्ग कॉन्ग यूनिवर्सिटी के LKS फैकल्टी ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने एक नया AI आधारित टूल विकसित किया है, जिसका नाम ‘CardioMicscore’ रखा गया है। दावा है कि यह सिस्टम सिर्फ एक ब्लड टेस्ट के आधार पर भविष्य में होने वाली दिल की बीमारियों का जोखिम काफी पहले, यहां तक कि लगभग 15 साल तक पहले पहचान सकता है। शोध के अनुसार, यह टूल शरीर में होने वाले शुरुआती मॉलिक्यूलर बदलावों को पकड़ने की क्षमता रखता है, जो सामान्य लक्षणों जैसे छाती में दर्द या सांस फूलने से बहुत पहले शुरू हो जाते हैं। इस AI मॉडल को तैयार करने के लिए शोधकर्ताओं ने डीप लर्निंग तकनीक और मल्टीओमिक्स डेटा (जीनोमिक्स, प्रोटिओमिक्स और मेटाबोलोमिक्स) का उपयोग किया है। स्टडी में यूके बायोबैंक के बड़े पैमाने के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिसमें हजारों ब्लड प्रोटीन और मेटाबोलाइट्स शामिल थे, जो दिल की सेहत से जुड़े संकेत दिखाते हैं। शोध के मुताबिक यह सिस्टम कोरोनरी आर्टरी डिजीज, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर, एट्रियल फिब्रिलेशन और अन्य कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम का अनुमान लगाने में मदद कर सकता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यह तकनीक अभी रिसर्च और वैलिडेशन के स्तर पर है और इसे आम मरीजों के लिए क्लिनिकल उपयोग में लाने से पहले और परीक्षणों की जरूरत होगी। अगर यह तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में हार्ट डिजीज की शुरुआती पहचान और रोकथाम के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं।

घर की वायरिंग में आग का खतरा क्यों बढ़ता है? जानिए बड़ी टेक्निकल गलतियां जो बनती हैं वजह

नई दिल्ली। घरों में एसी, गीजर, फ्रिज और अन्य हाई-पावर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ गई है। ऐसे में अगर वायरिंग पुरानी या कमजोर हो, तो ओवरलोड की वजह से गर्म होकर बड़ी दुर्घटना का खतरा पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी वायर पर उसकी क्षमता से ज्यादा लोड पड़ता है तो वह धीरे-धीरे गर्म होने लगती है। लगातार गर्मी बढ़ने से तार की इंसुलेशन (बाहरी परत) पिघल सकती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने की संभावना बढ़ जाती है। सबसे बड़ी समस्या तब होती है जब घरों में घटिया क्वालिटी की लोकल वायरिंग या सस्ता इलेक्ट्रिकल सामान लगाया जाता है। ऐसे वायर जल्दी गर्म होते हैं और इनमें स्पार्किंग की समस्या भी देखने को मिलती है। इसके अलावा पुरानी वायरिंग, गलत लोड मैनेजमेंट और समय-समय पर मेंटेनेंस न कराना भी आग लगने के प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई बार दीवारों के अंदर खराब हो रही वायरिंग का पता भी नहीं चलता और यही आगे चलकर बड़ा खतरा बन जाती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर की वायरिंग की समय-समय पर जांच कराना और जरूरत पड़ने पर उसे अपग्रेड करना सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

Redmi के 5G स्मार्टफोन हुए महंगे, कीमतों में 2,000 रुपये तक की बढ़ोतरी; मिड-रेंज सेगमेंट पर असर

नई दिल्ली। अगर आप नया 5G स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो यह खबर आपके बजट पर असर डाल सकती है। Xiaomi ने अपने दो पॉपुलर मिड-रेंज स्मार्टफोन Redmi 15 5G और Redmi Note 15 5G की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। जानकारी के अनुसार, दोनों ही मॉडलों के सभी वेरिएंट्स की कीमतों में करीब 2,000 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है, जो आज से लागू हो चुकी है। नई कीमतों के बाद Redmi 15 5G का बेस वेरिएंट अब पहले से महंगा हो गया है, जबकि Redmi Note 15 5G के टॉप वेरिएंट्स की कीमत भी बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बदलाव Xiaomi के एक इंटरनल डॉक्यूमेंट में सामने आया है, जो डीलर्स और ऑफलाइन पार्टनर्स को भेजा गया है। माना जा रहा है कि यह फैसला बढ़ती प्रोडक्शन कॉस्ट और ग्लोबल मार्केट में RAM व मेमोरी चिप्स की कमी के चलते लिया गया है। टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डाटा सेंटर्स की बढ़ती डिमांड के कारण मेमोरी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है, जिसका असर अब स्मार्टफोन की कीमतों पर भी पड़ रहा है। फिलहाल इस बढ़ोतरी के बाद मिड-रेंज स्मार्टफोन सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा और ज्यादा कड़ी होने की संभावना है, और आने वाले समय में अन्य ब्रांड्स भी कीमतों में बदलाव कर सकते हैं।

eSIM से नहीं बढ़ती इंटरनेट स्पीड! जानिए आखिर क्यों नए फोन में मिलता है तेज 5G अनुभव

नई दिल्ली। कई लोग मानते हैं कि eSIM वाले स्मार्टफोन में इंटरनेट ज्यादा तेज चलता है, लेकिन टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह सिर्फ एक गलतफहमी है। असल में इंटरनेट की तेज और स्थिर 5G स्पीड का सीधा संबंध eSIM से नहीं, बल्कि फोन में इस्तेमाल किए गए नए मॉडेम, बेहतर एंटीना और पावरफुल चिपसेट से होता है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में 5G नेटवर्क और eSIM टेक्नोलॉजी लगभग एक साथ तेजी से लोकप्रिय हुईं। इसी वजह से लोगों को लगने लगा कि eSIM इस्तेमाल करने से इंटरनेट स्पीड बढ़ जाती है। जबकि सच्चाई यह है कि नए स्मार्टफोन में मिलने वाले एडवांस 5G मॉडेम और हाई-एंड प्रोसेसर बेहतर डाउनलोड स्पीड, मजबूत सिग्नल और ज्यादा स्थिर नेटवर्क कनेक्शन देते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार टेलीकॉम कंपनियां लगातार अपने 5G नेटवर्क को अपग्रेड कर रही हैं, जिससे इंटरनेट अनुभव पहले से बेहतर हुआ है। वहीं नेटवर्क कवरेज, सिग्नल स्ट्रेंथ और यूजर्स की संख्या भी इंटरनेट स्पीड को प्रभावित करती है। हालांकि eSIM के अपने कई बड़े फायदे जरूर हैं। इसमें फिजिकल सिम स्लॉट की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे स्मार्टफोन कंपनियों को फोन के अंदर की जगह का बेहतर इस्तेमाल करने का मौका मिलता है। इससे कंपनियां बड़ी बैटरी, पतला डिजाइन और बेहतर वॉटर-रेसिस्टेंट फोन तैयार कर पाती हैं। Apple के नए iPhone मॉडल्स में eSIM तकनीक को तेजी से अपनाया गया है। वहीं Google की Pixel सीरीज और Samsung के फ्लैगशिप स्मार्टफोन भी eSIM सपोर्ट के साथ आते हैं। टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप सिर्फ तेज इंटरनेट के लिए eSIM चुन रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि इंटरनेट स्पीड का असली खेल फोन के हार्डवेयर और नेटवर्क क्वालिटी पर निर्भर करता है, न कि सिम के प्रकार पर।

AI के दौर में इंसान की असली ताकत क्या? न्यूरोसाइंटिस्ट हन्ना ने बताया सफलता का नया फॉर्मूला

नई दिल्ली। एआई और मशीनों के तेजी से विकसित होते दौर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंसान खुद को भविष्य में कैसे प्रासंगिक बनाए रखेगा? जब मशीनें लेखन, कोडिंग और डेटा विश्लेषण जैसे काम तेजी से करने लगी हैं, तब इंसानी दिमाग की असली ताकत क्या होगी? इसी सवाल का जवाब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की न्यूरोसाइंटिस्ट Hannah Critchlow ने अपनी नई किताब The 21st Century Brain में दिया है। डॉ. हन्ना के मुताबिक आने वाले समय में सिर्फ तेज दिमाग या हाई IQ ही सफलता तय नहीं करेगा, बल्कि वही लोग आगे बढ़ेंगे जो भावनाओं को समझना जानते हों, बदलाव और अनिश्चितता से डरते न हों और जिनकी कल्पनाशक्ति मजबूत हो। डॉ. हन्ना के मुताबिक आने वाले समय में सिर्फ तेज दिमाग या हाई IQ ही सफलता तय नहीं करेगा, बल्कि वही लोग आगे बढ़ेंगे जो भावनाओं को समझना जानते हों, बदलाव और अनिश्चितता से डरते न हों और जिनकी कल्पनाशक्ति मजबूत हो। उनका कहना है कि तकनीक के इस युग में इंसान की सबसे बड़ी ताकत उसकी सहानुभूति, भावनात्मक समझ और रचनात्मक सोच होगी। हन्ना बताती हैं कि पिछले हजारों वर्षों में इंसानी दिमाग का आकार थोड़ा छोटा जरूर हुआ है, लेकिन नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने और नई सोच पैदा करने की क्षमता पहले से ज्यादा मजबूत हुई है। उनका मानना है कि यही लचीलापन इंसानों को मशीनों से अलग बनाता है। डॉ. हन्ना के अनुसार एआई का विकास भी न्यूरोसाइंस के सिद्धांतों पर आधारित है, लेकिन अब वक्त आ गया है कि इंसान अपने दिमाग की उन खूबियों को फिर से मजबूत करे जिन्हें लंबे समय तक “सॉफ्ट स्किल्स” कहकर नजरअंदाज किया गया। इनमें भावनात्मक संतुलन, टीमवर्क, रिश्तों को समझने की क्षमता और कल्पनाशील सोच शामिल हैं। उन्होंने बताया कि महान वैज्ञानिक Thomas Edison भी रचनात्मक सोच के लिए खास तरीके अपनाते थे। एडिसन झपकी लेते समय हाथ में धातु की वस्तु रखते थे ताकि नींद लगते ही वस्तु गिरने की आवाज से उनकी आंख खुल जाए और वे अवचेतन में आए नए विचारों को तुरंत लिख सकें। डॉ. हन्ना दिमाग को तेज और लचीला बनाए रखने के लिए अच्छी नींद, संतुलित खान-पान, नियमित व्यायाम और प्रकृति के बीच समय बिताने को बेहद जरूरी मानती हैं। उनके मुताबिक आंत यानी गट में मौजूद बैक्टीरिया भी ऐसे रसायन बनाते हैं जो दिमाग तक संदेश पहुंचाने में मदद करते हैं और इंसान के व्यवहार व सामाजिक संबंधों को प्रभावित करते हैं। रचनात्मकता बढ़ाने को लेकर उनकी सबसे दिलचस्प सलाह है कि इंसान को अपने दिमाग को कभी-कभी “भटकने” देना चाहिए। यानी डेड्रीमिंग और माइंड-वांडरिंग को पूरी तरह बेकार नहीं समझना चाहिए। उनका कहना है कि दिमाग का यही भटकाव नए और क्रांतिकारी विचारों को जन्म देता है। प्रकृति के बीच टहलने से दिमाग में अल्फा वेव्स बढ़ती हैं, जो मन को शांत और अधिक रचनात्मक बनाती हैं।

iPhone 20 ने लॉन्च से पहले मचाई सनसनी! बेजल-लेस डिजाइन और Invisible Face ID के रेंडर्स वायरल

नई दिल्ली। Apple के आने वाले iPhone को लेकर एक बार फिर इंटरनेट पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अभी कंपनी ने आधिकारिक तौर पर iPhone 18 सीरीज भी लॉन्च नहीं की है, लेकिन इसी बीच कथित iPhone 20 के रेंडर्स और लीक्स सामने आने के बाद टेक जगत में हलचल मच गई है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि Apple अपनी 20वीं एनिवर्सरी पर अब तक का सबसे बड़ा डिजाइन बदलाव पेश कर सकता है। लीक्स के मुताबिक iPhone 20 में लगभग पूरी तरह बेजल-लेस डिस्प्ले देखने को मिल सकती है। यानी स्क्रीन चारों किनारों तक फैली होगी और फोन का फ्रंट हिस्सा पूरी तरह डिस्प्ले जैसा नजर आ सकता है। इतना ही नहीं, कंपनी Face ID सेंसर और फ्रंट कैमरे को भी डिस्प्ले के नीचे छिपा सकती है। अगर ऐसा होता है तो मौजूदा Dynamic Island डिजाइन पूरी तरह खत्म हो सकता है। सामने आए रेंडर्स में फोन को क्वाड-कर्व्ड डिस्प्ले डिजाइन के साथ दिखाया गया है। इसका मतलब है कि स्क्रीन सिर्फ किनारों पर ही नहीं बल्कि चारों तरफ हल्के कर्व के साथ दिखाई दे सकती है, जिससे फोन का लुक काफी प्रीमियम और फ्यूचरिस्टिक नजर आएगा। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि Apple फिजिकल बटन हटाने की दिशा में भी काम कर सकता है। यानी आने वाले समय में iPhone पूरी तरह टच और जेस्चर बेस्ड कंट्रोल सिस्टम पर शिफ्ट हो सकता है। Apple की नंबरिंग स्ट्रेटेजी को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जिस तरह कंपनी ने iPhone 9 को स्किप कर सीधे iPhone X लॉन्च किया था, उसी तरह माना जा रहा है कि 20वीं एनिवर्सरी को खास बनाने के लिए कंपनी भविष्य में सीधे iPhone 20 नाम इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि अभी तक Apple की तरफ से इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल ये सभी जानकारियां लीक्स और रेंडर्स पर आधारित हैं, लेकिन अगर इनमें से आधे फीचर्स भी सही साबित होते हैं तो iPhone 20 Apple के इतिहास का सबसे बड़ा डिजाइन अपग्रेड साबित हो सकता है।

एक AC से ठंडे होंगे 5 कमरे! Mini Split AC सिस्टम ने बदल दिया होम कूलिंग का खेल

नई दिल्ली। घर के हर कमरे में अलग-अलग AC लगवाने का झंझट अब पुराना होता जा रहा है। अब बाजार में ऐसा स्मार्ट कूलिंग सिस्टम मौजूद है, जो सिर्फ एक आउटडोर यूनिट से घर के कई कमरों को ठंडा कर सकता है। इसे Mini Split AC System कहा जाता है। नाम भले “मिनी” हो, लेकिन इसकी क्षमता और फायदे किसी हाई-एंड कूलिंग सिस्टम से कम नहीं हैं। Mini Split AC असल में मल्टी-जोन कूलिंग टेक्नोलॉजी पर काम करता है। यानी एक ही आउटडोर यूनिट से 2, 3, 4 या उससे ज्यादा इंडोर यूनिट्स को जोड़ा जा सकता है। हर कमरे का तापमान अलग-अलग कंट्रोल किया जा सकता है। अगर एक कमरे में ज्यादा ठंडक चाहिए और दूसरे में कम, तो दोनों सेटिंग अलग रखी जा सकती हैं। यही वजह है कि इसे बड़े घरों, ऑफिस और लग्जरी अपार्टमेंट्स के लिए बेहतर विकल्प माना जा रहा है। यह सिस्टम सामान्य Split AC की तरह ही काम करता है। इसमें भी कॉपर पाइप के जरिए आउटडोर और इंडोर यूनिट कनेक्ट रहती हैं, लेकिन फर्क यह है कि साधारण Split AC में एक आउटडोर यूनिट सिर्फ एक कमरे को ठंडा करती है, जबकि Mini Split AC कई कमरों को एक साथ कूल कर सकता है। Mini Split AC का सबसे बड़ा फायदा बिजली की बचत है। अलग-अलग कमरों में कई AC लगाने की बजाय एक ही सिस्टम पूरे घर को संभालता है, जिससे पावर कंजम्प्शन कम होता है। इसके अलावा घर की बालकनी, छत या बाहरी दीवार पर कई आउटडोर यूनिट लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सेटअप भी साफ और आकर्षक दिखता है। यह सिस्टम खासतौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, जिन्हें बड़े घर में स्मार्ट और कम बिजली खर्च वाला कूलिंग सिस्टम चाहिए। हालांकि इसकी शुरुआती कीमत सामान्य Split AC से ज्यादा होती है, लेकिन लंबे समय में बिजली और मेंटेनेंस का खर्च कम होने की वजह से यह फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

Google Pay और PhonePe को टक्कर? BSNL Pay से Selfcare ऐप में मिलेंगी UPI जैसी सुविधाएं

नई दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने अपने ग्राहकों के लिए नया डिजिटल पेमेंट फीचर “BSNL Pay” लॉन्च किया है। यह कोई अलग ऐप नहीं होगा, बल्कि BSNL की मौजूदा Selfcare App के भीतर ही उपलब्ध रहेगा। इस कदम का उद्देश्य रिचार्ज और पेमेंट प्रक्रिया को आसान बनाना और थर्ड पार्टी ऐप्स पर निर्भरता कम करना है। अब तक BSNL यूजर्स को मोबाइल रिचार्ज या बिल पेमेंट के लिए Selfcare App से दूसरे UPI या पेमेंट ऐप्स पर रिडायरेक्ट होना पड़ता था। लेकिन नए अपडेट के बाद यूजर्स सीधे ऐप के अंदर ही रिचार्ज और पेमेंट पूरा कर सकेंगे। BSNL Pay को UPI और BHIM इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ा गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसे NPCI और बैंक ऑफ बड़ौदा के सहयोग से विकसित किया गया है। इससे यूजर्स को सुरक्षित और तेज डिजिटल पेमेंट का अनुभव मिलेगा। इस फीचर में सिर्फ रिचार्ज ही नहीं बल्कि कई UPI आधारित सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। इसमें UPI Lite का विकल्प भी दिया गया है, जिससे छोटे ट्रांजेक्शन बिना UPI पिन डाले पूरे किए जा सकते हैं। इसके अलावा AutoPay फीचर भी मिलेगा, जिससे यूजर्स अपने नंबर का ऑटोमैटिक रिचार्ज सेट कर सकेंगे। BSNL Pay का इस्तेमाल करने के लिए यूजर के पास BSNL मोबाइल नंबर होना जरूरी है, क्योंकि यह फीचर केवल BSNL Selfcare App के भीतर ही लॉगिन के बाद उपलब्ध होगा। इसका मुख्य उद्देश्य BSNL यूजर्स के लिए एक “ऑल-इन-वन” प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जहां अकाउंट मैनेजमेंट, प्लान देखने, कस्टमर सपोर्ट और पेमेंट—सब कुछ एक ही जगह पर किया जा सके। फिलहाल यह फीचर BSNL ग्राहकों के लिए डिजिटल सुविधा को और आसान बनाने की दिशा में एक कदम माना जा रहा है, जिससे कंपनी अपने यूजर बेस को बेहतर और एकीकृत अनुभव देने की कोशिश कर रही है।