Chambalkichugli.com

फोन की बैटरी जल्दी हो रही खराब? ये छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़ा कारण

नई दिल्ली। आजकल स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन कई यूजर्स एक आम समस्या से परेशान रहते हैंफोन की बैटरी जल्दी खराब होना। ज्यादातर स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन बैटरी दी जाती है, जो बेहतर बैकअप और लंबी लाइफ के लिए जानी जाती है। हालांकि, गलत इस्तेमाल और कुछ छोटी लापरवाहियां बैटरी की हेल्थ तेजी से खराब कर सकती हैं। टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं जिनका सीधा असर फोन की बैटरी लाइफ पर पड़ता है। सबसे बड़ी गलती खराब क्वालिटी वाले चार्जर का इस्तेमाल करना मानी जाती है। कई कंपनियां अब फोन के साथ चार्जर नहीं देतीं, ऐसे में लोग सस्ते या लोकल चार्जर खरीद लेते हैं। ऐसे चार्जर सही तरीके से वोल्टेज कंट्रोल नहीं कर पाते, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए हमेशा ओरिजिनल या सर्टिफाइड चार्जर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। फोन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने देना भी बैटरी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। धूप में फोन इस्तेमाल करना, गेमिंग के दौरान चार्जिंग करना या लंबे समय तक लगातार भारी ऐप्स चलाना बैटरी को ओवरहीट कर सकता है। अधिक तापमान के कारण बैटरी के अंदर केमिकल रिएक्शन तेज हो जाते हैं, जिससे बैटरी जल्दी डैमेज होने लगती है। कई यूजर्स की आदत होती है कि वे फोन को पूरी तरह डिस्चार्ज होने के बाद ही चार्ज करते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार बैटरी को 0 प्रतिशत तक गिराना उसकी लाइफ कम कर सकता है। बेहतर होगा कि फोन को 20 से 30 प्रतिशत बैटरी बचने पर ही चार्ज कर लिया जाए। बहुत ज्यादा ठंड में फोन चार्ज करना भी नुकसानदेह हो सकता है। अत्यधिक ठंडे तापमान में बैटरी की क्षमता प्रभावित होती है और चार्जिंग प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बैटरी के अंदर तकनीकी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा स्मार्ट चार्जिंग फीचर को नजरअंदाज करना भी गलत माना जाता है। आजकल कई स्मार्टफोन्स में बैटरी प्रोटेक्शन या स्मार्ट चार्जिंग फीचर दिया जाता है, जो बैटरी को लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज रहने से बचाता है। इससे बैटरी की हेल्थ लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है। टेक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूजर्स इन छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखें तो स्मार्टफोन की बैटरी कई साल तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।

108MP कैमरा और 6520mAh बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Honor 600e, 8GB RAM ने बढ़ाई ताकत

नई दिल्ली। Honor ने अपनी नई E-सीरीज के तहत Honor 600e स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को दमदार कैमरा, बड़ी बैटरी और प्रीमियम फीचर्स के साथ पेश किया है। खास बात यह है कि फोन में 108 मेगापिक्सल का हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और 6520mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो इसे मिड-प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाती है। Honor 600e में 6.6 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें 2000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलती है। इससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। फोन को धूल और पानी से बचाने के लिए IP66 रेटिंग भी दी गई है। परफॉर्मेंस के लिए स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 7100 प्रोसेसर दिया गया है। इसके साथ Mali G610 MC2 GPU मिलता है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहतर बनाता है। डिवाइस में 8GB RAM और 512GB इंटरनल स्टोरेज दी गई है, जिससे यूजर्स को स्टोरेज की कमी महसूस नहीं होगी। फोटोग्राफी के लिए फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है। इसका प्राइमरी कैमरा 108MP का है, जो 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा 5MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस भी दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 16MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है। बैटरी की बात करें तो Honor 600e में 6520mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है, जिससे फोन कम समय में चार्ज हो सकता है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को Desert Gold, Velvet Gray और Vital Green कलर ऑप्शन में पेश किया है। इसकी कीमत PEN 1,999 यानी करीब 56 हजार रुपये रखी गई है। फिलहाल यह स्मार्टफोन पेरू में कंपनी के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है।

6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ आया Lava का नया 5G फोन, कीमत रखी सिर्फ ₹11,999

नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टफोन कंपनी Lava International ने बजट सेगमेंट में अपना नया 5G स्मार्टफोन SHARK 2 5G लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को बड़ी बैटरी, हाई रिफ्रेश रेट डिस्प्ले और दमदार परफॉर्मेंस के साथ पेश किया है। खास बात यह है कि इसकी शुरुआती कीमत सिर्फ 11,999 रुपये रखी गई है, जिससे यह बजट यूजर्स के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकता है। Lava का यह नया फोन 6.75 इंच के HD+ LCD डिस्प्ले के साथ आता है, जिसमें 120Hz रिफ्रेश रेट दिया गया है। इससे स्क्रॉलिंग, गेमिंग और वीडियो देखने का अनुभव काफी स्मूद हो जाता है। कंपनी ने फोन में 2.3GHz क्लॉक स्पीड वाला Unisoc T8200 6nm प्रोसेसर दिया है, जिसके साथ Mali-G57 MC2 GPU मिलता है। यह कॉम्बिनेशन रोजमर्रा के कामों के साथ मल्टीटास्किंग और सामान्य गेमिंग को भी बेहतर बनाता है। फोन में 4GB LPDDR4x रैम और 64GB UFS 2.2 स्टोरेज दी गई है। स्टोरेज को माइक्रोSD कार्ड की मदद से 1TB तक बढ़ाया जा सकता है। फोटोग्राफी के लिए डिवाइस में 13MP का रियर कैमरा और 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर मिलता है। Lava SHARK 2 5G की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की बड़ी बैटरी है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी दिया गया है। फोन को धूल और पानी के छींटों से बचाने के लिए IP64 रेटिंग भी मिलती है। कंपनी के मुताबिक, इस स्मार्टफोन की पहली सेल 10 जून 2026 से शुरू होगी। इसे Lava के रिटेल स्टोर्स के जरिए खरीदा जा सकेगा। लॉन्च ऑफर्स के तहत ग्राहकों को कई फाइनेंशियल स्कीम्स और कंपनी की Free Service @ Home सुविधा भी मिलेगी।

AI की फर्जी तस्वीरों से बचना अब आसान! ChatGPT और Gemini बताएंगे फोटो असली है या नकली

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों पर आंख बंद करके भरोसा करना अब खतरे से खाली नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसी फोटो बनाई जा रही हैं जो पहली नजर में बिल्कुल असली लगती हैं। पहले AI इमेज में चेहरे बिगड़े हुए, हाथों की उंगलियां गलत या बैकग्राउंड में अजीब चीजें आसानी से दिख जाती थीं, लेकिन अब तकनीक इतनी एडवांस हो चुकी है कि असली और नकली तस्वीर में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। यही वजह है कि लोग कई बार फर्जी तस्वीरों को सच मानकर तेजी से शेयर कर देते हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI से बनी तस्वीरों में अब भी कुछ ऐसी छोटी गलतियां रह जाती हैं जिन्हें ध्यान से देखकर पकड़ा जा सकता है। कई बार उंगलियां असामान्य दिखती हैं, दांतों की बनावट अजीब लगती है या चश्मा और ज्वेलरी सही तरीके से दिखाई नहीं देती। तस्वीरों में लिखा टेक्स्ट भी अक्सर उल्टा-पुल्टा या समझ से बाहर होता है। इसके अलावा रोशनी और छाया का असंतुलन, बैकग्राउंड में अननेचुरल चीजें और भीड़ में लोगों के चेहरे एक जैसे दिखना भी AI इमेज की पहचान हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी वायरल फोटो को जूम करके ध्यान से जरूर देखना चाहिए। अब बड़ी टेक कंपनियां भी AI तस्वीरों की पहचान के लिए खास टूल्स तैयार कर रही हैं। OpenAI ने ऐसा सिस्टम विकसित किया है जो यह पहचानने में मदद करता है कि कोई तस्वीर AI से बनाई गई है या उसमें एडिटिंग की गई है। यूजर फोटो अपलोड करके उसकी जांच कर सकते हैं। सिस्टम तस्वीर में मौजूद डिजिटल पैटर्न और AI संकेतों को स्कैन करता है और फिर बताता है कि तस्वीर असली है या AI जनरेटेड। वहीं Google का Gemini भी SynthID तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। यह तकनीक AI से तैयार तस्वीरों में मौजूद डिजिटल मार्कर्स को पहचानने में सक्षम मानी जाती है। यूजर Gemini में फोटो अपलोड करके सीधे पूछ सकते हैं कि तस्वीर AI से बनाई गई है या नहीं। AI तस्वीरों की सच्चाई पता करने के लिए रिवर्स इमेज सर्च भी बेहद असरदार तरीका माना जा रहा है। इसके जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि कोई फोटो पहली बार इंटरनेट पर कहां दिखाई दी थी। अगर एक ही तस्वीर अलग-अलग दावों के साथ वायरल हो रही हो तो उसके फेक होने की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कंटेंट आने वाले समय में और ज्यादा स्मार्ट होगा, इसलिए इंटरनेट पर दिखने वाली हर वायरल तस्वीर को बिना जांचे सच मानना खतरनाक साबित हो सकता है।

Smart TV लगाते समय भूलकर भी न करें ये गलती, धूप की वजह से खराब हो सकता है महंगा टीवी

नई दिल्ली। अगर आप नया Smart TV खरीदकर घर में इंस्टॉल करने जा रहे हैं, तो उसकी सही जगह चुनना बेहद जरूरी है। कई लोग टीवी को ऐसी जगह लगा देते हैं जहां उस पर सीधे धूप पड़ती रहती है, लेकिन यही लापरवाही बाद में भारी नुकसान का कारण बन सकती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक डायरेक्ट सनलाइट Smart TV के डिस्प्ले पैनल और इंटरनल पार्ट्स दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे ज्यादा खतरा OLED पैनल वाले टीवी को होता है। दक्षिण कोरिया के रिसर्चर्स की एक स्टडी में पाया गया कि लंबे समय तक UV रेडिएशन यानी तेज धूप के संपर्क में रहने से OLED पैनल का कैथोड और इलेक्ट्रॉन इंजेक्शन एरिया डैमेज होने लगता है। यही हिस्सा स्क्रीन पर ब्राइट और स्टेबल इमेज दिखाने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। स्टडी में यह भी सामने आया कि ज्यादा धूप पड़ने से सिल्वर और मैग्नीशियम जैसे मटेरियल अपनी जगह से खिसकने लगते हैं। इससे स्क्रीन की ब्राइटनेस कम हो सकती है और पैनल जल्दी खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि LCD टीवी को OLED के मुकाबले कम नुकसान होता है, लेकिन वे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माने जाते। टीवी निर्माता कंपनियों का कहना है कि लगातार धूप पड़ने से स्क्रीन पर ग्लेयर बढ़ जाता है, जिससे टीवी देखना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा ज्यादा गर्मी LCD पैनल के लिक्विड क्रिस्टल को भी नुकसान पहुंचा सकती है। धूप का असर सिर्फ डिस्प्ले तक सीमित नहीं रहता। लगातार गर्मी मिलने से टीवी की बॉडी, इंटरनल सर्किट, स्टैंड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भी गर्म होने लगते हैं। इससे टीवी की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है और लंबे समय में डिवाइस जल्दी खराब हो सकता है। LG और Sony जैसी कंपनियां भी सलाह देती हैं कि टीवी को हमेशा ऐसी जगह इंस्टॉल करें जहां सीधी धूप न पहुंचे और आसपास का तापमान सामान्य बना रहे। ज्यादा गर्म माहौल में OLED टीवी की ब्राइटनेस घट सकती है और बिजली की खपत भी बढ़ सकती है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि आपका महंगा Smart TV लंबे समय तक सही तरीके से काम करे, तो उसे खिड़की, बालकनी या तेज धूप वाली जगह से दूर लगाना बेहतर रहेगा।

WhatsApp ला रहा ‘Sensitive Content Hide’ फीचर, मैसेज भेजने से पहले स्पॉयलर और जरूरी जानकारी हो सकेगी ब्लर

नई दिल्ली। WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक नया और बेहद काम का फीचर लाने की तैयारी में है, जिसकी मदद से मैसेज भेजने से पहले ही सेंसिटिव या स्पॉयलर कंटेंट को हाइड किया जा सकेगा। यह फीचर फिलहाल डेवलपमेंट स्टेज में है और आने वाले समय में इसकी बीटा टेस्टिंग शुरू होने की संभावना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नया फीचर एक एडवांस टेक्स्ट फॉर्मेटिंग टूल की तरह काम करेगा। इसमें यूजर किसी भी मैसेज के चुने हुए हिस्से को ब्लर या हाइड मार्क कर सकेगा। जब यह मैसेज रिसीवर को पहुंचेगा, तो उसे छिपे हुए हिस्से को देखने के लिए उस पर टैप करना होगा। इससे यूजर कंटेंट को पूरी तरह ओपन करने से पहले कंट्रोल कर सकेगा। यह फीचर खासतौर पर स्पॉयलर कंटेंट के लिए काफी उपयोगी माना जा रहा है, जैसे कि मूवी, वेब सीरीज, मैच रिजल्ट या किसी ऐसी जानकारी को शेयर करना जिसे तुरंत दिखाना जरूरी नहीं होता। इससे चैटिंग ज्यादा सेफ और व्यवस्थित हो जाएगी और अनचाहे स्पॉयलर से बचाव होगा। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि यह फीचर सिर्फ टेक्स्ट तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में इसे मीडिया कैप्शन, फोटो और वीडियो पर भी लागू किया जा सकता है, जिससे यूजर्स किसी भी संवेदनशील या जरूरी हिस्से को शेयर करने से पहले हाइड कर सकेंगे। इसके साथ ही WhatsApp एक और प्राइवेसी फीचर पर काम कर रहा है, जिसे “After Reading” नाम दिया जा सकता है। इस फीचर के तहत यूजर यह सेट कर सकेगा कि मैसेज पढ़ने के तुरंत बाद वह अपने आप डिलीट हो जाए या फिर 5 मिनट, 1 घंटे या 12 घंटे के भीतर गायब हो जाए। यह मौजूदा Disappearing Messages फीचर का और एडवांस वर्जन होगा। कुल मिलाकर WhatsApp लगातार अपने प्लेटफॉर्म को ज्यादा प्राइवेसी-कंट्रोल और यूजर फ्रेंडली बनाने की दिशा में काम कर रहा है, और यह नया फीचर उसी अपग्रेड का हिस्सा माना जा रहा है।

watchOS 27 में Apple Watch को मिलेगा बड़ा हेल्थ अपग्रेड, हार्ट-रेट ट्रैकिंग होगी और ज्यादा स्मार्ट

Apple Watch यूजर्स के लिए आने वाला watchOS 27 अपडेट इस बार बड़े डिजाइन बदलावों की बजाय हेल्थ और परफॉर्मेंस सुधारों पर फोकस करता नजर आ सकता है। ब्लूमबर्ग के जाने-माने टेक पत्रकार Mark Gurman की रिपोर्ट के मुताबिक Apple इस अपडेट में सिस्टम को ज्यादा स्थिर और स्मूद बनाने के साथ-साथ कुछ अहम हेल्थ फीचर्स को भी अपग्रेड कर सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि watchOS 27 में सबसे बड़ा बदलाव हार्ट-रेट ट्रैकिंग फीचर को लेकर देखने को मिल सकता है। Apple अपनी मौजूदा सेंसर तकनीक और एल्गोरिद्म को और बेहतर बनाने पर काम कर रहा है, जिससे हार्ट-रेट डेटा पहले से ज्यादा सटीक और भरोसेमंद मिल सकेगा। यह सुधार उन यूजर्स के लिए खास होगा जो फिटनेस और हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए Apple Watch का इस्तेमाल करते हैं। फिलहाल Apple Watch में ECG, अनियमित हार्टबीट अलर्ट, स्लीप ट्रैकिंग और कई फिटनेस मैट्रिक्स जैसे एडवांस हेल्थ फीचर्स पहले से मौजूद हैं। ऐसे में हार्ट-रेट ट्रैकिंग में सुधार इस पूरे हेल्थ इकोसिस्टम को और मजबूत बना सकता है। हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि इस बार Apple किसी बड़े विजुअल या डिजाइन चेंज की योजना में नहीं है। यानी यूजर्स को नया इंटरफेस या बड़ा UI बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, बल्कि छोटे लेकिन उपयोगी सुधारों पर ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही Apple अंदरूनी तौर पर अपने AI आधारित हेल्थ प्रोजेक्ट “Project Mulberry” पर भी काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य ऐसा AI सिस्टम तैयार करना है जो Apple Health डेटा के आधार पर यूजर्स को हेल्थ इनसाइट्स और सलाह दे सके। लेकिन फिलहाल इसकी रफ्तार धीमी बताई जा रही है, इसलिए AI हेल्थ कोचिंग फीचर्स iOS 27 के शुरुआती वर्जन में आने की संभावना कम है। रिपोर्ट्स के अनुसार Apple अपने Health ऐप को भी नए डिजाइन और स्मार्ट फीचर्स के साथ अपडेट कर सकता है, लेकिन यह बदलाव iOS 27.1 या उसके बाद के अपडेट्स में देखने को मिल सकता है। इससे यूजर्स को हेल्थ डेटा को समझने और ट्रैक करने का ज्यादा आसान और AI-आधारित अनुभव मिलेगा। कुल मिलाकर watchOS 27 का फोकस बड़े बदलावों से ज्यादा स्थिरता, बेहतर परफॉर्मेंस और हेल्थ फीचर्स को ज्यादा स्मार्ट बनाने पर रहेगा।

iPhone 18 Pro सीरीज में अब तक का सबसे बड़ा डिस्प्ले? Pro और Pro Max मॉडल में मिल सकता है नया रिकॉर्ड साइज

नई दिल्ली। एप्पल के अपकमिंग फ्लैगशिप iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर बड़ी लीक्स सामने आई हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि कंपनी इस बार डिस्प्ले साइज में बड़ा बदलाव कर सकती है। रिपोर्ट्स और टिप्स्टर जानकारी के मुताबिक iPhone 18 Pro में 6.4 इंच और Pro Max में करीब 7 इंच तक का डिस्प्ले दिया जा सकता है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह अब तक का सबसे बड़ा iPhone डिस्प्ले होगा, क्योंकि अभी तक Apple 6.9 इंच से आगे नहीं गया है। हालांकि कंपनी ने इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लीक के अनुसार, इस बार डिजाइन में भी कुछ अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कहा जा रहा है कि iPhone 18 Pro मॉडल्स में Dynamic Island को और छोटा किया जा सकता है, जो मौजूदा मॉडल्स की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक कम होगा। इसके साथ ही Apple नया LTPO+ डिस्प्ले पैनल इस्तेमाल कर सकता है, जो पहले से ज्यादा पावर एफिशिएंट और स्मूद परफॉर्मेंस देने में सक्षम होगा। बैटरी को लेकर भी बड़े अपडेट की चर्चा है। रिपोर्ट्स में अनुमान लगाया जा रहा है कि iPhone 18 Pro सीरीज में 5,100mAh से 5,200mAh तक की बैटरी मिल सकती है। वहीं Pro Max मॉडल में बड़ी बैटरी के कारण डिवाइस की मोटाई में हल्का इजाफा भी देखने को मिल सकता है। लॉन्चिंग टाइमलाइन को लेकर कहा जा रहा है कि Apple अपनी परंपरा के अनुसार सितंबर महीने में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर सकता है। लॉन्च के कुछ हफ्तों बाद इनकी बिक्री शुरू होने की उम्मीद है। कीमत की बात करें तो अनुमान है कि कंपनी इस बार भी मौजूदा Pro सीरीज के आसपास ही कीमत रख सकती है, यानी भारत में शुरुआती कीमत करीब 1.34 लाख रुपये के आसपास हो सकती है। हालांकि ये सभी जानकारियां अभी लीक्स और अनुमान पर आधारित हैं, इसलिए असली फीचर्स और डिजाइन का खुलासा Apple के ऑफिशियल लॉन्च इवेंट में ही होगा।

Meta का नया धमाका: Facebook में आया Reddit जैसा “Forum” ऐप, AI के साथ अब होगी खुली कम्युनिटी चर्चा

नई दिल्ली। मेटा ने सोशल मीडिया अनुभव को और अधिक कम्युनिटी-केंद्रित बनाने के लिए एक नया प्रयोग शुरू किया है। कंपनी ने अमेरिका में “Forum” नाम से एक नया ऐप लॉन्च किया है, जिसे खास तौर पर Facebook Groups की चर्चाओं को एक जगह और अधिक व्यवस्थित तरीके से दिखाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ऐप फिलहाल iPhone यूजर्स के लिए उपलब्ध कराया गया है और इसका उद्देश्य पारंपरिक स्क्रॉलिंग फीड से हटकर विषय-आधारित बातचीत को बढ़ावा देना है। Forum ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें यूजर्स अपने Facebook अकाउंट से लॉगिन कर सकते हैं। लॉगिन करने के बाद उन्हें अलग-अलग Facebook Groups की पोस्ट एक Reddit-जैसी इंटरफेस में दिखाई देती हैं, जहां वे किसी भी विषय पर चर्चा पढ़ सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और कम्युनिटी से सीधे जुड़ सकते हैं। Meta का कहना है कि इस ऐप का फोकस वायरल कंटेंट के बजाय उपयोगी बातचीत और ज्ञान साझा करने पर है। इस प्लेटफॉर्म में यूजर्स को Nickname (छद्म नाम) के जरिए पोस्ट करने का विकल्प भी दिया गया है, हालांकि उनकी एक्टिविटी उनके असली Facebook अकाउंट और संबंधित ग्रुप्स से जुड़ी रहती है। इसका उद्देश्य लोगों को ज्यादा खुलकर अपनी राय रखने की सुविधा देना है, लेकिन कम्युनिटी ट्रैकिंग और पारदर्शिता भी बनी रहती है। Forum ऐप का सबसे अहम फीचर इसका AI-आधारित “Ask” सिस्टम है। इसमें यूजर किसी भी सवाल को टाइप करता है और ऐप Facebook Groups में मौजूद चर्चाओं के आधार पर जवाब तैयार करता है। साथ ही, जिन पोस्ट्स या चर्चाओं से जानकारी ली गई होती है, उनके लिंक भी दिखाए जाते हैं, ताकि यूजर चाहें तो पूरा संदर्भ भी पढ़ सकें। यह फीचर जानकारी को अधिक भरोसेमंद और स्रोत-आधारित बनाता है। Meta पहले भी कम्युनिटी फीचर्स पर प्रयोग कर चुका है। कंपनी ने 2014 में अलग से Facebook Groups ऐप लॉन्च किया था, लेकिन बाद में उसे बंद कर दिया गया। अब AI तकनीक और नए इंटरफेस के साथ कंपनी इस कॉन्सेप्ट को दोबारा मजबूत तरीके से पेश कर रही है। इससे पहले Threads और Instants जैसे प्रोजेक्ट्स भी Meta के नए सोशल मीडिया प्रयोगों का हिस्सा रहे हैं। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया केवल फोटो और वीडियो स्क्रॉलिंग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह ज्यादा चर्चा-आधारित और ज्ञान साझा करने वाला प्लेटफॉर्म बनेगा। इसी रणनीति के तहत Meta लगातार AI को अपने सभी प्लेटफॉर्म्स में इंटीग्रेट कर रहा है ताकि यूजर्स को ज्यादा पर्सनलाइज्ड और उपयोगी अनुभव मिल सके। फिलहाल यह ऐप केवल अमेरिका में उपलब्ध है और इसके ग्लोबल लॉन्च को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह प्रयोग सफल होता है तो Meta भविष्य में इसे Facebook इकोसिस्टम का एक बड़ा हिस्सा बना सकता है।

Chrome यूजर्स के लिए सरकार का बड़ा अलर्ट: पुराने वर्जन से हो सकता है बैंक अकाउंट खाली, तुरंत करें अपडेट

नई दिल्ली। भारत सरकार की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने Google Chrome यूजर्स के लिए गंभीर सुरक्षा चेतावनी जारी की है। एजेंसी ने बताया है कि Chrome ब्राउजर के कुछ पुराने वर्जन में ऐसी खामियां पाई गई हैं, जिनका फायदा उठाकर साइबर अपराधी यूजर्स का निजी डेटा चुरा सकते हैं। इसमें बैंकिंग डिटेल्स, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी के लीक होने का खतरा शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, यह खतरा खासकर उन यूजर्स के लिए ज्यादा गंभीर है जो अपने मोबाइल या कंप्यूटर में अपडेटेड Chrome वर्जन का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। साइबर ठग फर्जी लिंक और संक्रमित वेबसाइट्स के जरिए यूजर्स को फंसाते हैं। जैसे ही कोई यूजर ऐसे लिंक पर क्लिक करता है, हैकर्स उसके डिवाइस पर कंट्रोल हासिल कर सकते हैं और जरूरी डेटा चोरी कर सकते हैं। CERT-In ने यह भी चेतावनी दी है कि इस सिक्योरिटी खामी के जरिए डिवाइस में मालवेयर इंस्टॉल किया जा सकता है, जो यूजर की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकता है। इतना ही नहीं, यह खतरनाक सॉफ्टवेयर कैमरा और माइक्रोफोन तक एक्सेस कर सकता है, जिससे प्राइवेसी पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट करने वालों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस खतरे से बचने के लिए यूजर्स को तुरंत अपने Google Chrome ब्राउजर को अपडेट करने की सलाह दी गई है। यूजर्स Chrome ऐप या Google Play Store के जरिए लेटेस्ट वर्जन इंस्टॉल कर सकते हैं। जिन डिवाइस में ऑटो-अपडेट फीचर ऑन है, उनमें यह अपडेट अपने आप इंस्टॉल हो जाता है और सिस्टम सुरक्षित रहता है। CERT-In ने साफ किया है कि नया अपडेट इन सभी सुरक्षा खामियों को ठीक करता है, जिससे यूजर्स का डेटा और डिवाइस दोनों सुरक्षित रहते हैं।