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फोन हैक होने के संकेत पहचानना है जरूरी, बैटरी ड्रेन से लेकर अनचाही एक्टिविटी तक ऐसे करें खतरे की पहचान

नई दिल्ली । डिजिटल युग में स्मार्टफोन केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह बैंकिंग, सोशल मीडिया, ईमेल, व्यक्तिगत दस्तावेज और कई महत्वपूर्ण जानकारियों का केंद्र बन चुका है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल फोन हैक हो जाए तो उसकी निजी जानकारी, वित्तीय डेटा और ऑनलाइन पहचान गंभीर खतरे में पड़ सकती है। साइबर अपराधों में लगातार बढ़ोतरी के बीच यह समझना बेहद जरूरी हो गया है कि फोन हैक होने के शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार फोन हैक होने का सबसे सामान्य संकेत बैटरी का असामान्य रूप से तेजी से खत्म होना है। यदि आपका स्मार्टफोन सामान्य उपयोग के बावजूद पहले की तुलना में अधिक तेजी से डिस्चार्ज होने लगे, तो यह संकेत हो सकता है कि कोई संदिग्ध एप्लिकेशन या मैलवेयर बैकग्राउंड में लगातार सक्रिय है। ऐसे प्रोग्राम बिना जानकारी के डेटा एकत्र करते हैं और लगातार इंटरनेट का उपयोग करते रहते हैं। फोन का बार-बार गर्म होना भी चिंता का विषय हो सकता है। यदि डिवाइस का उपयोग कम होने के बावजूद वह असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, तो संभव है कि बैकग्राउंड में कोई अनधिकृत गतिविधि चल रही हो। इसी तरह मोबाइल डेटा का अचानक तेजी से खर्च होना भी किसी संदिग्ध सॉफ्टवेयर की मौजूदगी का संकेत माना जाता है। फोन की कार्यक्षमता में अचानक गिरावट भी हैकिंग की संभावना की ओर इशारा कर सकती है। यदि स्मार्टफोन पहले की तुलना में धीमा हो गया हो, ऐप्स बार-बार बंद हो रहे हों या सिस्टम बार-बार फ्रीज हो रहा हो, तो इसकी जांच करना आवश्यक हो जाता है। कई बार दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर डिवाइस के संसाधनों का अत्यधिक उपयोग करते हैं, जिससे प्रदर्शन प्रभावित होता है। हैकिंग का एक और महत्वपूर्ण संकेत अनचाही डिजिटल गतिविधियां हैं। यदि आपके सोशल मीडिया अकाउंट पर ऐसी पोस्ट दिखाई दें जिन्हें आपने साझा नहीं किया, या आपके ईमेल और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से बिना अनुमति संदेश भेजे जा रहे हों, तो यह स्पष्ट संकेत हो सकता है कि किसी तीसरे व्यक्ति को आपके अकाउंट तक पहुंच मिल चुकी है। ऐसी स्थिति में तुरंत सुरक्षा उपाय अपनाना आवश्यक है। इसके अलावा यदि मोबाइल स्क्रीन पर लगातार संदिग्ध विज्ञापन, पॉप-अप विंडो या अज्ञात नोटिफिकेशन दिखाई देने लगें, तो सतर्क हो जाना चाहिए। कई बार हैकिंग के दौरान ऐसे ऐप्स इंस्टॉल कर दिए जाते हैं जिनकी जानकारी उपयोगकर्ता को नहीं होती। इसलिए समय-समय पर इंस्टॉल किए गए एप्लिकेशनों की सूची की समीक्षा करना जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को अपने फोन के हैक होने का संदेह हो तो सबसे पहले सभी इंस्टॉल ऐप्स की जांच करनी चाहिए। जो एप्लिकेशन पहचान में न आएं या जिनकी आवश्यकता न हो, उन्हें तुरंत हटाना चाहिए। इसके बाद विश्वसनीय सुरक्षा सॉफ्टवेयर की मदद से पूरे फोन की स्कैनिंग करनी चाहिए ताकि किसी भी संभावित मैलवेयर या वायरस का पता लगाया जा सके। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सभी महत्वपूर्ण ऑनलाइन खातों के पासवर्ड तुरंत बदलने की सलाह देते हैं। बैंकिंग, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड का उपयोग करना चाहिए। साथ ही जहां भी सुविधा उपलब्ध हो, वहां टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय करना सुरक्षा का अतिरिक्त स्तर प्रदान करता है। मोबाइल सुरक्षा आज प्रत्येक डिजिटल उपयोगकर्ता की प्राथमिक आवश्यकता बन चुकी है। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर उठाए गए कदम न केवल निजी जानकारी की रक्षा कर सकते हैं, बल्कि वित्तीय और डिजिटल नुकसान से भी बचा सकते हैं। इसलिए फोन में दिखाई देने वाले असामान्य संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और किसी भी संदेह की स्थिति में तत्काल जांच और सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।

WhatsApp अब सिर्फ मैसेजिंग ऐप नहीं, Meta ने भारत में लॉन्च किया प्रीमियम ‘WhatsApp Plus’; ₹79 महीने में मिलेंगे एक्सक्लूसिव फीचर्स, AI रणनीति से जुड़ा बड़ा कदम

नई दिल्ली । भारत के डिजिटल संचार बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी Meta ने भारतीय यूजर्स के लिए WhatsApp Plus नामक प्रीमियम सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च कर दी है। इस नई सेवा के तहत यूजर्स को कई अतिरिक्त और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनके लिए उन्हें प्रति माह 79 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि WhatsApp का सामान्य संस्करण पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा और उसके मौजूदा फीचर्स में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत WhatsApp के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है, जहां करोड़ों लोग रोजाना इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संवाद के लिए करते हैं। ऐसे में WhatsApp Plus को कंपनी की नई कारोबारी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रीमियम सेवाओं के जरिए अतिरिक्त राजस्व अर्जित करना है। नई सेवा के तहत यूजर्स को अपने WhatsApp अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाने का अवसर मिलेगा। प्रीमियम सदस्य अपनी पसंद के अनुसार ऐप की थीम बदल सकेंगे और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले WhatsApp आइकन को भी नया रूप दे सकेंगे। इसके अलावा विशेष स्टिकर्स और एक्सक्लूसिव रिंगटोन्स जैसी सुविधाएं भी केवल सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध रहेंगी। कंपनी ने चैट मैनेजमेंट से जुड़े फीचर्स में भी सुधार किया है। WhatsApp Plus उपयोगकर्ताओं को अधिक संख्या में चैट्स पिन करने की सुविधा मिलेगी, जिससे महत्वपूर्ण बातचीत को आसानी से शीर्ष पर रखा जा सकेगा। साथ ही चैट सूची को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएंगे। Meta का मानना है कि ये फीचर्स उन यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होंगे जो WhatsApp का व्यापक और नियमित उपयोग करते हैं। WhatsApp Plus की शुरुआत के साथ कंपनी नए ग्राहकों को एक महीने का निःशुल्क ट्रायल भी उपलब्ध करा रही है। ट्रायल अवधि समाप्त होने के बाद सब्सक्रिप्शन स्वतः नवीनीकृत हो सकता है। इसलिए उपयोगकर्ताओं को अपनी सदस्यता की स्थिति पर ध्यान देना होगा, विशेषकर तब जब वे सेवा को जारी नहीं रखना चाहते हों। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रीमियम फीचर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि Meta की व्यापक कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति का भी हिस्सा है। पिछले कुछ समय में कंपनी ने AI आधारित सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। WhatsApp में Meta AI के एकीकरण के बाद कंपनी के सर्वर और तकनीकी संसाधनों पर खर्च बढ़ा है। ऐसे में WhatsApp Plus को आय के नए स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं को वित्तीय आधार प्रदान कर सकता है। डिजिटल उद्योग के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में कई टेक कंपनियां अब फ्रीमियम मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें मूल सेवाएं मुफ्त रहती हैं जबकि उन्नत सुविधाओं के लिए भुगतान करना पड़ता है। Meta का यह कदम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय उपभोक्ता इन अतिरिक्त सुविधाओं के लिए मासिक शुल्क देने को कितना तैयार होते हैं। भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में किसी भी प्रीमियम सेवा की सफलता उसके वास्तविक उपयोग और ग्राहकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभों पर निर्भर करती है। फिलहाल Meta ने स्पष्ट कर दिया है कि WhatsApp Plus पूरी तरह वैकल्पिक सेवा है और सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए WhatsApp का अनुभव पहले की तरह निशुल्क और उपलब्ध बना रहेगा।

टेलीग्राम पर केंद्र का सख्त रुख, हाई कोर्ट में कहा- आतंकी गतिविधियों और अपराधों का प्रमुख माध्यम बन रहा प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली । देश में लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा का हवाला देते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध के अपने फैसले का बचाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर कंपनी इस कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दे रही है। इस पूरे मामले ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। सरकार की ओर से कहा गया कि यह प्लेटफॉर्म कई मामलों में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुविधाजनक माध्यम बनता जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इसकी कुछ तकनीकी विशेषताएं ऐसी हैं, जिनके कारण संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद ही कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस विषय पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया था। समिति ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, तकनीकी मूल्यांकन और प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं। सरकार का दावा है कि निर्णय किसी एक घटना के आधार पर नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि क्या किसी एक वर्ग या उद्देश्य की सुरक्षा के लिए व्यापक स्तर पर उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है। यह सवाल डिजिटल युग में नागरिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन की जटिलता को दर्शाता है। अदालत ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर विशेष रूप से चिंता का विषय हैं। इनमें संदेशों और उनसे जुड़े समय संबंधी विवरणों में बदलाव की क्षमता को लेकर सवाल उठाए गए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे फीचर जांच प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं और संवेदनशील मामलों में तथ्यात्मक सत्यापन को जटिल बना सकते हैं। इसी आधार पर सरकार ने प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। टेलीग्राम का पक्ष है कि किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए पूरी सेवा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी का मानना है कि अपराध रोकने के लिए तकनीकी सहयोग और नियामकीय उपाय बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कंपनी यह भी कह रही है कि किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती, क्योंकि गलत गतिविधियों में शामिल लोग अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी कर सकते हैं। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में हाल के महीनों में सामने आए कुछ संवेदनशील मामलों और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर सरकार ने सीमित अवधि के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले का असर देश के करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर पड़ा, जिनमें छात्र, व्यवसायी, कंटेंट क्रिएटर और सामान्य उपभोक्ता शामिल हैं। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

युद्ध का नया कमांडर बना AI! 96 घंटे में 2,000 ठिकानों पर हमलों के दावे से बढ़ी चिंता, बदल रही वैश्विक युद्ध की तस्वीर

नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध की परिभाषा तेजी से बदल रही है और अब केवल मिसाइल, टैंक या लड़ाकू विमान ही किसी सैन्य शक्ति की पहचान नहीं रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने युद्धक्षेत्र में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के दौरान सामने आए दावों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के युद्धों में AI की भूमिका निर्णायक हो सकती है। संघर्ष के दौरान ऐसी रिपोर्टें सामने आईं कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में उन्नत AI तकनीकों का उपयोग किया गया। दावा किया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों ने बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में सैन्य सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित लक्ष्यों की पहचान करने और अभियान की गति बढ़ाने में सहायता की। इससे युद्ध संचालन की पारंपरिक अवधारणाओं पर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की सबसे बड़ी ताकत विशाल डेटा को कुछ ही सेकंड में प्रोसेस करने की क्षमता है। आधुनिक युद्ध में उपग्रह चित्रों, ड्रोन फीड, रडार संकेतों, संचार नेटवर्क और खुफिया सूचनाओं से लगातार डेटा प्राप्त होता है। AI इन जानकारियों का विश्लेषण कर कमांडरों को तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अब AI आधारित रक्षा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। युद्धक्षेत्र में ड्रोन तकनीक का बढ़ता प्रभाव भी इसी परिवर्तन का हिस्सा माना जा रहा है। विशेष रूप से ड्रोन स्वॉर्म तकनीक ने सैन्य रणनीति को नया आयाम दिया है। इस व्यवस्था में बड़ी संख्या में ड्रोन एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमिकाएं स्वतः बदल सकते हैं। यदि कोई ड्रोन नष्ट हो जाए तो दूसरा उसकी जिम्मेदारी संभाल लेता है। इससे हमले अधिक प्रभावी और लचीले बन जाते हैं। AI का प्रभाव केवल भौतिक युद्ध तक सीमित नहीं है। साइबर युद्ध के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। आधुनिक सुरक्षा ढांचे में AI नेटवर्क पर होने वाले संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, साइबर हमलों को रोकने और संवेदनशील प्रणालियों की निगरानी करने में मदद कर रहा है। दूसरी ओर, यही तकनीक साइबर हमलों को अधिक जटिल और प्रभावशाली बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। इस कारण साइबर सुरक्षा अब वैश्विक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI आधारित युद्ध मॉडल और अधिक विकसित हो सकते हैं। भविष्य में ऐसी प्रणालियां देखने को मिल सकती हैं जो इंसानी सैनिकों, स्वायत्त ड्रोन, रोबोटिक वाहनों और निगरानी नेटवर्क के बीच समन्वय स्थापित कर युद्ध संचालन को अधिक तेज और सटीक बनाएंगी। इससे सैन्य अभियानों की गति और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि इस तकनीकी प्रगति के साथ गंभीर नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि घातक हथियारों को पूरी तरह स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता दे दी गई तो जवाबदेही, नियंत्रण और मानव सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रश्न खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में AI आधारित सैन्य तकनीकों के नियमन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। स्पष्ट है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, सैन्य रणनीति और शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनती जा रही है। आने वाले समय में युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता से भी तय होते दिखाई दे सकते हैं।

सोशल मीडिया से दूरी और डिजिटल शांति का नया विकल्प, लॉन्च हुआ Commodore Callback 8020; Android Apps सपोर्ट के साथ Flip Phone ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली । स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच टेक्नोलॉजी बाजार में एक अलग सोच वाला डिवाइस सामने आया है। Commodore ने अपना नया Callback 8020 Flip Phone लॉन्च किया है, जिसे उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो आधुनिक तकनीक का लाभ तो चाहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया, अनावश्यक नोटिफिकेशन और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत से दूरी बनाना चाहते हैं। कंपनी इसे पारंपरिक फीचर फोन और आधुनिक स्मार्टफोन के बीच का संतुलित विकल्प बता रही है। डिजिटल जीवनशैली में बढ़ती व्यस्तता और स्मार्टफोन पर बढ़ती निर्भरता के बीच Callback 8020 को एक ऐसे उपकरण के रूप में पेश किया गया है जो उपयोगकर्ताओं को डिजिटल विकर्षणों से राहत दिलाने का प्रयास करता है। इस फोन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेब ब्राउजर और ईमेल जैसी सुविधाओं को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है, ताकि उपयोगकर्ता का ध्यान केवल आवश्यक संचार और सीमित डिजिटल गतिविधियों पर केंद्रित रहे। फोन की कीमत 499 डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 42 हजार रुपये के बराबर है। हालांकि इस कीमत पर बाजार में कई उन्नत स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, लेकिन कंपनी का लक्ष्य सीधे स्मार्टफोन बाजार से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। इसके बजाय यह उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती है जो तकनीक का उपयोग नियंत्रित और संतुलित तरीके से करना चाहते हैं। Callback 8020 की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राइवेसी-केंद्रित ऑपरेटिंग सिस्टम माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस पारंपरिक एंड्रॉयड सिस्टम का उपयोग किए बिना भी अधिकांश एंड्रॉयड एप्लिकेशन चलाने में सक्षम है। इसके अलावा उपयोगकर्ता चाहें तो फोन की टचस्क्रीन सुविधा को पूरी तरह बंद कर सकते हैं, जिससे डिवाइस का अनुभव और अधिक सरल तथा सीमित हो जाता है। फोन में T9 स्टाइल टेक्स्टिंग, हाई-डेफिनिशन ऑडियो सपोर्ट, एफएम रेडियो और एलईडी नोटिफिकेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य उपयोगकर्ता को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जबकि उसे अनावश्यक डिजिटल व्यस्तताओं से दूर रखना है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक उपयोगकर्ता अब केवल अधिक फीचर्स नहीं, बल्कि बेहतर डिजिटल संतुलन भी चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में डिजिटल डिटॉक्स की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हुई है। लगातार सोशल मीडिया उपयोग, नोटिफिकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों के कारण मानसिक तनाव, ध्यान भंग होने और उत्पादकता में कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा बढ़ी है। ऐसे माहौल में सीमित लेकिन उपयोगी फीचर्स वाले फोन फिर से बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। फ्लिप फोन की वापसी को केवल पुरानी तकनीक के प्रति आकर्षण के रूप में नहीं देखा जा रहा है। युवा उपयोगकर्ता इन्हें सोशल मीडिया से दूरी बनाने और स्क्रीन टाइम कम करने के साधन के रूप में अपना रहे हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिक इनके आसान उपयोग और सरल इंटरफेस को पसंद कर रहे हैं। फोन को बंद करने के लिए फ्लिप को बंद करना भी कई लोगों को एक स्पष्ट डिजिटल विराम का अनुभव देता है। तकनीकी बाजार में Callback 8020 जैसे उत्पाद यह संकेत दे रहे हैं कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल अधिक शक्तिशाली स्मार्टफोन बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। उपयोगकर्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए अब ऐसे उपकरणों की मांग भी बढ़ सकती है जो तकनीक और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास करें।

PhonePe Wallet पर नया चार्ज बना चर्चा का विषय, 12 महीने निष्क्रिय रहने पर लग सकती है फीस; UPI यूजर्स में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के लेनदेन के लिए UPI आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच PhonePe Wallet से जुड़ी एक जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। वायरल दावों के अनुसार, यदि कोई उपयोगकर्ता लंबे समय तक अपने PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करता है, तो उस पर निष्क्रियता शुल्क लगाया जा सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद डिजिटल भुगतान करने वाले कई उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और सवाल पैदा हो गए हैं। हाल के दिनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा किए गए, जिनमें कथित तौर पर यह जानकारी दिखाई गई कि यदि PhonePe Wallet लगातार 12 महीने तक निष्क्रिय रहता है तो उस पर तिमाही आधार पर शुल्क लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह शुल्क हर तीन महीने में अधिकतम 100 रुपये तक हो सकता है। इस सूचना के वायरल होते ही बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसकी वैधता और प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी। दरअसल, कई उपभोक्ता PhonePe का उपयोग केवल UPI ट्रांजैक्शन के लिए करते हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि ऐप के भीतर एक अलग डिजिटल वॉलेट सुविधा भी उपलब्ध है। PhonePe Wallet एक प्रीपेड डिजिटल वॉलेट है, जिसमें उपयोगकर्ता पहले से धनराशि जोड़कर विभिन्न भुगतान कर सकते हैं। यह बैंक खाते से सीधे होने वाले UPI भुगतान से अलग व्यवस्था पर काम करता है और विशेष रूप से छोटे तथा त्वरित लेनदेन को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल वॉलेट सेवाओं में निष्क्रिय खातों के रखरखाव को लेकर शुल्क की व्यवस्था नई बात नहीं है। कई वित्तीय और फिनटेक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक उपयोग न होने वाले खातों के लिए प्रशासनिक या रखरखाव शुल्क से संबंधित शर्तें रखते हैं। हालांकि किसी भी शुल्क को लागू करने से पहले संबंधित नियम, शर्तें और उपयोगकर्ता को दी जाने वाली सूचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया है कि यदि वे PhonePe Wallet को बंद करना चाहते हैं तो उन्हें पहले केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसी वजह से कुछ उपभोक्ताओं ने इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की है। हालांकि इस विषय पर अंतिम निर्णय और प्रक्रिया संबंधित प्लेटफॉर्म की आधिकारिक शर्तों पर निर्भर करती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चर्चा केवल PhonePe Wallet से जुड़ी हुई है। सामान्य UPI भुगतान, जिसमें बैंक खाते से सीधे पैसे भेजे या प्राप्त किए जाते हैं, उस पर इस प्रकार के शुल्क का कोई प्रभाव नहीं बताया गया है। यानी जो उपयोगकर्ता केवल UPI के माध्यम से लेनदेन करते हैं और डिजिटल वॉलेट का उपयोग नहीं करते, उनके लिए नियमित भुगतान सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में उपभोक्ताओं के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे किसी भी वित्तीय प्लेटफॉर्म की शर्तों, शुल्क संरचना और सेवा नियमों को समय-समय पर समझते रहें। इससे अनावश्यक शुल्क, भ्रम और संभावित असुविधा से बचा जा सकता है। फिलहाल PhonePe Wallet से जुड़ी इस चर्चा ने डिजिटल भुगतान क्षेत्र में निष्क्रिय खातों और उनसे जुड़े नियमों पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

धीमा इंटरनेट और तेजी से खत्म होता डेटा दे सकता है खतरे का संकेत, जानिए Wi-Fi घुसपैठियों को पकड़ने का आसान तरीका

नई दिल्ली । इंटरनेट आज दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन शिक्षा, वर्क फ्रॉम होम, वीडियो स्ट्रीमिंग, डिजिटल बैंकिंग और स्मार्ट होम उपकरणों के बढ़ते उपयोग के बीच घर का Wi-Fi नेटवर्क पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि सुविधाओं के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ी हैं। कई बार उपयोगकर्ताओं को यह पता भी नहीं चलता कि उनके Wi-Fi नेटवर्क का इस्तेमाल कोई अनजान व्यक्ति कर रहा है। ऐसी स्थिति न केवल इंटरनेट की गति को प्रभावित करती है बल्कि व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार कमजोर पासवर्ड, पुरानी सुरक्षा सेटिंग्स और दूसरों के साथ साझा किया गया Wi-Fi पासवर्ड अनधिकृत लोगों को नेटवर्क तक पहुंचने का अवसर दे सकता है। यदि इंटरनेट अचानक धीमा होने लगे, वीडियो स्ट्रीमिंग में बार-बार रुकावट आने लगे या डेटा खपत असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो यह संकेत हो सकता है कि नेटवर्क से कोई अतिरिक्त डिवाइस जुड़ा हुआ है। अपने Wi-Fi नेटवर्क की निगरानी करने का सबसे आसान तरीका राउटर के एडमिन पैनल की जांच करना है। उपयोगकर्ता अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउजर में राउटर का IP एड्रेस दर्ज करके लॉगिन कर सकते हैं। अधिकांश राउटर में नेटवर्क से जुड़े सभी डिवाइसों की सूची देखने का विकल्प उपलब्ध होता है। यहां वर्तमान में कनेक्टेड मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, कैमरा या अन्य स्मार्ट डिवाइस दिखाई देते हैं। यदि सूची में कोई ऐसा डिवाइस नजर आए जिसकी पहचान न हो, तो यह सुरक्षा संबंधी चिंता का विषय हो सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार डिवाइस निर्माता के नाम से भी दिखाई देते हैं। इसलिए सूची में मौजूद डिवाइसों का मिलान घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से करना जरूरी होता है। नेटवर्क की नियमित जांच से अनधिकृत कनेक्शन का जल्दी पता लगाया जा सकता है और संभावित जोखिमों को कम किया जा सकता है। यदि किसी संदिग्ध डिवाइस की पहचान होती है, तो सबसे पहला कदम Wi-Fi पासवर्ड बदलना होना चाहिए। नया पासवर्ड मजबूत, जटिल और अनुमान लगाना कठिन होना चाहिए। इसके साथ ही राउटर की सुरक्षा सेटिंग्स में जाकर WPA3 एन्क्रिप्शन सक्रिय करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह आधुनिक वायरलेस सुरक्षा मानक है, जो पुराने सुरक्षा प्रोटोकॉल की तुलना में अधिक सुरक्षित सुरक्षा प्रदान करता है। सुरक्षा केवल Wi-Fi पासवर्ड तक सीमित नहीं है। साइबर विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महत्वपूर्ण ऑनलाइन अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी 2FA अवश्य सक्रिय किया जाए। इससे पासवर्ड लीक होने की स्थिति में भी अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच प्राप्त करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा राउटर के फर्मवेयर को समय-समय पर अपडेट करना भी आवश्यक है, क्योंकि निर्माता नियमित रूप से सुरक्षा कमजोरियों को दूर करने के लिए नए अपडेट जारी करते रहते हैं। तकनीकी जानकारों का मानना है कि Wi-Fi पासवर्ड को भी बैंकिंग PIN की तरह ही गोपनीय माना जाना चाहिए। एक बार पासवर्ड सेट कर वर्षों तक उसका उपयोग करते रहना सुरक्षा जोखिम बढ़ा सकता है। नियमित अंतराल पर पासवर्ड बदलना, नेटवर्क की निगरानी करना और सुरक्षा सेटिंग्स को अपडेट रखना डिजिटल सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। बढ़ते साइबर खतरों के दौर में केवल तेज इंटरनेट ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित इंटरनेट भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी सी सतर्कता और कुछ सरल तकनीकी उपाय अपनाकर उपयोगकर्ता अपने Wi-Fi नेटवर्क को सुरक्षित रख सकते हैं और निजी जानकारी को संभावित खतरों से बचा सकते हैं।

Android 17 अपडेट रोलआउट शुरू, पुराने स्मार्टफोन में भी आएगी नई जान; सिक्योरिटी और AI फीचर्स पर खास जोर

नई दिल्ली । एंड्रॉयड स्मार्टफोन यूजर्स के लिए बड़ी खुशखबरी है। गूगल ने अपने बहुप्रतीक्षित Android 17 अपडेट का रोलआउट शुरू कर दिया है। सबसे पहले यह अपडेट गूगल पिक्सल स्मार्टफोन यूजर्स को मिलेगा, जबकि अन्य एंड्रॉयड ब्रांड्स के डिवाइसों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। Android 17 को सिर्फ एक सामान्य सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे यूजर एक्सपीरियंस, सिक्योरिटी और परफॉर्मेंस को पूरी तरह नए स्तर पर ले जाने वाला अपडेट बताया जा रहा है। Android 17 में सबसे ज्यादा ध्यान मल्टीटास्किंग को आसान बनाने पर दिया गया है। इसके लिए गूगल ने नया “Bubbles” फीचर पेश किया है। इस फीचर की मदद से यूजर किसी भी ऐप को फ्लोटिंग विंडो में बदल सकेंगे और एक ही समय में कई काम आसानी से कर पाएंगे। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होगा जो काम के दौरान एक साथ कई ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया यूजर्स के लिए भी Android 17 कई नए विकल्प लेकर आया है। नई अपडेट में स्क्रीन रिकॉर्डिंग को अपग्रेड किया गया है और “स्क्रीन रिएक्शन” फीचर जोड़ा गया है। इसकी मदद से यूजर फ्रंट और रियर कैमरा का उपयोग करते हुए एक साथ वीडियो रिकॉर्ड कर सकेंगे। इससे रिएक्शन वीडियो बनाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा और एडिटिंग की जरूरत भी कम पड़ेगी। फोल्डेबल स्मार्टफोन यूजर्स के लिए भी यह अपडेट खास साबित होने वाला है। Android 17 में नया फोल्डेबल गेमिंग मोड दिया गया है, जिसमें गेम स्क्रीन के ऊपरी हिस्से पर चलेगा और नीचे का हिस्सा गेम कंट्रोलर की तरह काम करेगा। इससे गेमिंग अनुभव और भी बेहतर और इंटरैक्टिव बनने की उम्मीद है। सिक्योरिटी के मामले में भी गूगल ने कई बड़े बदलाव किए हैं। “Find Hub” में नया “Mark as Lost” फीचर जोड़ा गया है, जिसकी मदद से चोरी या गुम हुए फोन को दूर से लॉक किया जा सकेगा। फोन लॉक होने के बाद कोई भी व्यक्ति व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच नहीं बना सकेगा। इसके अलावा लोकेशन शेयरिंग और कॉन्टैक्ट एक्सेस को लेकर भी यूजर्स को ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। अब किसी ऐप को स्थायी अनुमति देने के बजाय अस्थायी एक्सेस दी जा सकेगी। Android 17 में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एडवांस्ड स्कैम प्रोटेक्शन और लाइव थ्रेट डिटेक्शन फीचर भी शामिल किए गए हैं। ये फीचर्स बैकग्राउंड में काम करते हुए संदिग्ध ऐप्स, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर खतरों से यूजर्स की सुरक्षा करेंगे। विजुअल बदलावों की बात करें तो यूजर्स अब होम स्क्रीन पर ऐप्स के नाम छिपा सकेंगे। डार्क थीम को अधिक कस्टमाइज करने के विकल्प मिलेंगे और पैरेंटल कंट्रोल फीचर्स को भी पहले से ज्यादा प्रभावी बनाया गया है। वहीं वर्चुअल असिस्टेंट के लिए अलग वॉल्यूम कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। परफॉर्मेंस के मोर्चे पर Android 17 फोन की स्पीड और बैटरी लाइफ बेहतर बनाने का दावा करता है। यूजर्स को रैम उपयोग नियंत्रित करने का विकल्प मिलेगा, जिससे बैकग्राउंड में चलने वाले ऐप्स कम संसाधन इस्तेमाल करेंगे। इसका सीधा फायदा फोन की स्मूद परफॉर्मेंस और लंबी बैटरी बैकअप के रूप में देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर Android 17 अपडेट पुराने स्मार्टफोन को भी नया अनुभव देने की क्षमता रखता है। बेहतर सिक्योरिटी, स्मार्ट फीचर्स, शानदार मल्टीटास्किंग और तेज परफॉर्मेंस के साथ यह अपडेट एंड्रॉयड यूजर्स के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

मेगापिक्सल के आंकड़ों से न हों प्रभावित, 48MP iPhone कैमरा कैसे 108MP Android फोन को दे देता है कड़ी टक्कर

नई दिल्ली । स्मार्टफोन खरीदते समय कैमरा आज अधिकांश उपभोक्ताओं की प्राथमिकता बन चुका है। बाजार में उपलब्ध विभिन्न मॉडल्स के बीच तुलना करते समय सबसे पहले जिस फीचर पर नजर जाती है, वह है कैमरे का मेगापिक्सल। एक ओर जहां कई एंड्रॉयड स्मार्टफोन 108 मेगापिक्सल कैमरे के साथ आते हैं, वहीं दूसरी तरफ iPhone के कई लोकप्रिय मॉडल 48 मेगापिक्सल कैमरे पर आधारित हैं। पहली नजर में अधिक मेगापिक्सल वाला कैमरा बेहतर दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक तस्वीर इससे कहीं अधिक जटिल और तकनीकी है। फोटोग्राफी विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कैमरे की गुणवत्ता केवल मेगापिक्सल संख्या से निर्धारित नहीं होती। मेगापिक्सल मुख्य रूप से तस्वीर में मौजूद पिक्सल्स की संख्या को दर्शाता है, लेकिन फोटो की स्पष्टता, रंगों की सटीकता, डायनामिक रेंज, लो-लाइट प्रदर्शन और डिटेलिंग कई अन्य तकनीकी कारकों पर निर्भर करती है। यही कारण है कि अधिक मेगापिक्सल होने के बावजूद हर कैमरा बेहतर परिणाम नहीं दे पाता। 108MP कैमरे वाले अधिकांश स्मार्टफोन एक विशेष तकनीक का उपयोग करते हैं जिसे पिक्सल बिनिंग कहा जाता है। इस तकनीक में कई छोटे पिक्सल मिलकर एक बड़ा पिक्सल बनाते हैं। इसका उद्देश्य कम रोशनी में अधिक प्रकाश एकत्र करना और तस्वीर की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होता है। कई 108MP कैमरा वाले स्मार्टफोन सामान्य परिस्थितियों में पूर्ण 108MP रिजॉल्यूशन पर फोटो नहीं लेते, बल्कि पिक्सल बिनिंग के बाद लगभग 12MP की तस्वीर तैयार करते हैं। इससे तस्वीरों में ब्राइटनेस बढ़ती है और नॉइज कम होता है। यही कारण है कि उपभोक्ताओं को अक्सर यह भ्रम रहता है कि उनका फोन हमेशा 108MP फोटो खींच रहा है, जबकि वास्तविक उपयोग में अधिकांश तस्वीरें कम रिजॉल्यूशन पर प्रोसेस की जाती हैं। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर उपयोगकर्ता मैन्युअली हाई-रिजॉल्यूशन मोड का चयन कर सकते हैं, लेकिन सामान्य फोटोग्राफी में यह मोड लगातार उपयोग नहीं किया जाता। दूसरी ओर, Apple Inc. ने अपने कैमरा सिस्टम को अलग रणनीति के साथ विकसित किया है। कंपनी का 48MP सेंसर केवल रिजॉल्यूशन बढ़ाने पर नहीं बल्कि इमेज क्वालिटी को संतुलित रखने पर केंद्रित रहता है। कई iPhone मॉडल डिफॉल्ट रूप से लगभग 24MP आउटपुट प्रदान करते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं को बेहतर डिटेल और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें प्राप्त होती हैं। आवश्यकता पड़ने पर फुल 48MP मोड का भी उपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार Apple की सबसे बड़ी ताकत उसकी कम्प्यूटेशनल फोटोग्राफी तकनीक है। आधुनिक iPhone कैमरे हार्डवेयर के साथ-साथ उन्नत सॉफ्टवेयर एल्गोरिद्म का उपयोग करते हैं जो तस्वीरों के रंग, कॉन्ट्रास्ट, स्किन टोन और प्रकाश संतुलन को बेहतर बनाते हैं। यही वजह है कि कई बार कम मेगापिक्सल होने के बावजूद iPhone से ली गई तस्वीरें अधिक प्राकृतिक और संतुलित दिखाई देती हैं। फोटोग्राफी की दुनिया में अब केवल हार्डवेयर ही निर्णायक नहीं रह गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रोसेसिंग, स्मार्ट HDR, नाइट मोड और उन्नत इमेज इंजन जैसी तकनीकें तस्वीरों की अंतिम गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। इसलिए कैमरा चुनते समय केवल मेगापिक्सल संख्या को आधार बनाना सही नहीं माना जाता। तकनीकी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्मार्टफोन खरीदने से पहले कैमरा सेंसर का आकार, इमेज प्रोसेसिंग क्षमता, लो-लाइट प्रदर्शन, वीडियो रिकॉर्डिंग गुणवत्ता और वास्तविक कैमरा सैंपल्स पर भी ध्यान देना चाहिए। आज के दौर में बेहतर कैमरा वही माना जाता है जो विभिन्न परिस्थितियों में संतुलित और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें देने में सक्षम हो, चाहे उसके मेगापिक्सल की संख्या कम ही क्यों न हो।

गर्मी से कार और सफर दोनों को बचाना है जरूरी, जानिए कैसे कम होगा केबिन का तापमान और बढ़ेगी एसी की क्षमता

नई दिल्ली । देश के कई हिस्सों में गर्मी लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है और कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में धूप में खड़ी कार कुछ ही समय में अत्यधिक गर्म हो जाती है। कार का दरवाजा खोलते ही अंदर से निकलने वाली गर्म हवा, तपती सीटें और गर्म स्टीयरिंग यात्रियों के लिए असुविधा का कारण बनते हैं। यही वजह है कि गर्मियों के मौसम में कार के अंदर का तापमान नियंत्रित रखना केवल आराम का विषय नहीं बल्कि वाहन की कार्यक्षमता और सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार कार को अत्यधिक गर्म होने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका सही पार्किंग स्थान का चयन है। यदि संभव हो तो वाहन को हमेशा किसी शेड, बेसमेंट पार्किंग या पेड़ों की छाया वाले स्थान पर खड़ा करना चाहिए। प्रत्यक्ष सूर्य की रोशनी से बचने पर कार के अंदर का तापमान काफी हद तक कम रहता है। यदि पूरी छाया उपलब्ध न हो तो आंशिक छाया भी वाहन के केबिन को अपेक्षाकृत ठंडा बनाए रखने में मदद कर सकती है। गर्मी से बचाव के लिए विंडशील्ड सनशेड का उपयोग भी एक प्रभावी उपाय माना जाता है। बाजार में उपलब्ध रिफ्लेक्टिव सनशेड सूर्य की किरणों को सीधे डैशबोर्ड, स्टीयरिंग और सीटों तक पहुंचने से रोकते हैं। इससे कार के अंदर गर्मी का स्तर काफी कम रहता है। विशेष रूप से लंबे समय तक पार्किंग के दौरान यह छोटा सा उपकरण केबिन को अत्यधिक गर्म होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार में बैठने के बाद लोग अक्सर तुरंत एसी चालू कर लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसके बजाय पहले कार के दरवाजे और खिड़कियां कुछ समय के लिए खोलने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से वाहन के भीतर जमा गर्म हवा बाहर निकल जाती है। जब गर्म हवा बाहर निकल जाती है, तब एसी को केबिन को ठंडा करने में कम समय और कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। इससे यात्रियों को जल्दी राहत मिलती है और एसी सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ता। एयर कंडीशनिंग सिस्टम का सही उपयोग भी गर्मी से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण है। गर्म हवा बाहर निकलने के बाद खिड़कियां बंद कर एसी चालू करना चाहिए और उसे री-सर्कुलेशन मोड पर सेट करना चाहिए। इस मोड में एसी बाहर की गर्म हवा को अंदर नहीं खींचता बल्कि पहले से मौजूद हवा को ही ठंडा करता है। इससे केबिन तेजी से ठंडा होता है और वाहन के ईंधन की खपत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यदि कार को लंबे समय तक खुले स्थान पर खड़ा करना अनिवार्य हो, तो कार कवर का उपयोग एक अच्छा विकल्प हो सकता है। गुणवत्तापूर्ण कार कवर न केवल वाहन के अंदर का तापमान कम रखने में मदद करता है बल्कि पेंट, डैशबोर्ड और बाहरी सतह को भी तेज धूप और अल्ट्रावायलेट किरणों के प्रभाव से बचाता है। इससे वाहन की बाहरी चमक और आंतरिक गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती गर्मी के दौर में वाहन मालिकों को केवल एसी पर निर्भर रहने के बजाय तापमान नियंत्रण के इन सरल उपायों को भी अपनाना चाहिए। सही पार्किंग, सनशेड, कार कवर और एसी के उचित उपयोग जैसे छोटे कदम न केवल सफर को अधिक आरामदायक बनाते हैं, बल्कि वाहन की कार्यक्षमता और दीर्घकालिक रखरखाव में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।