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Android 17 अपडेट का धमाका, कैमरा क्वालिटी से लेकर फाइल ट्रांसफर तक सब हुआ आसान

नई दिल्ली । मोबाइल टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है क्योंकि Google ने अपना नया ऑपरेटिंग सिस्टम Android 17 पेश कर दिया है। इस नए अपडेट के साथ स्मार्टफोन इस्तेमाल करने का तरीका काफी हद तक बदल सकता है, खासकर उन यूजर्स के लिए जो सोशल मीडिया, फोटोग्राफी और फाइल शेयरिंग पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। Android 17 में सबसे बड़ा फोकस कैमरा और वीडियो क्वालिटी को बेहतर बनाने पर रखा गया है। खासकर इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड करते समय जो क्वालिटी लॉस की समस्या आती थी, उसे काफी हद तक कम किया गया है। नए अपडेट में Ultra HDR वीडियो सपोर्ट और बेहतर नाइट मोड इंटीग्रेशन दिया गया है, जिससे लो-लाइट में भी साफ और शार्प वीडियो रिकॉर्ड किए जा सकेंगे। इससे एंड्रॉयड यूजर्स को अब iPhone जैसी बेहतर सोशल मीडिया वीडियो क्वालिटी का अनुभव मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा Google और Meta के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन की वजह से इंस्टाग्राम ऐप का एंड्रॉयड अनुभव और भी स्मूद हो जाएगा। अब वीडियो एडिटिंग और अपलोडिंग के दौरान कम कंप्रेशन और बेहतर प्रोसेसिंग देखने को मिलेगी। एडिटिंग ऐप्स में भी नए टूल्स जोड़े जा रहे हैं, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स को ज्यादा क्रिएटिव कंट्रोल मिलेगा। Android 17 में एक नया फीचर “Pause Point” भी जोड़ा गया है, जिसका उद्देश्य यूजर्स की डिजिटल आदतों को बेहतर बनाना है। यह फीचर लगातार ऐप्स स्क्रॉल करने की आदत को नियंत्रित करने में मदद करेगा और स्क्रीन टाइम को मैनेज करने में उपयोगी साबित हो सकता है। आज के समय में जहां सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग एक चिंता का विषय बन चुका है, यह फीचर डिजिटल वेलबीइंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फाइल शेयरिंग के मामले में भी Android 17 एक बड़ा अपग्रेड लेकर आया है। Quick Share फीचर को अब और ज्यादा डिवाइसेज के साथ कंपैटिबल बनाया जा रहा है। इसकी मदद से यूजर्स एंड्रॉयड और अन्य प्लेटफॉर्म्स के बीच तेजी से और आसानी से फाइल ट्रांसफर कर पाएंगे। यह फीचर कई मायनों में Apple के AirDrop जैसा अनुभव देने की कोशिश करता है, जिससे क्रॉस-प्लेटफॉर्म शेयरिंग आसान हो सके। सुरक्षा के मोर्चे पर भी Android 17 को और मजबूत बनाया गया है। इसमें फर्जी कॉल्स, स्पैम और बैंकिंग फ्रॉड कॉल्स को ऑटोमैटिक ब्लॉक करने जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। साथ ही Google Play Store पर आने वाले संदिग्ध ऐप्स को रियल टाइम में पहचानने और रोकने की क्षमता भी बढ़ाई गई है, जिससे यूजर्स को एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण मिल सके। कुल मिलाकर Android 17 सिर्फ एक सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं बल्कि एक बेहतर, तेज और ज्यादा सुरक्षित मोबाइल अनुभव की ओर कदम है। यह अपडेट आने वाले महीनों में धीरे-धीरे अलग-अलग डिवाइसेज के लिए रोल आउट किया जाएगा, जिससे करोड़ों यूजर्स को इसका फायदा मिलेगा।

Apple sale 2026: Apple की प्रीमियम डिवाइसेज सस्ते दामों में, iPhone और MacBook पर आकर्षक ऑफर्स की बाढ़

 Apple sale 2026:नई दिल्ली । प्रीमियम टेक्नोलॉजी सेगमेंट में इस समय एक बड़ी कीमत गिरावट देखने को मिल रही है, जहां Apple के iPhone, iPad, MacBook और AirPods जैसे लोकप्रिय डिवाइसेज पर ग्राहकों को भारी छूट का फायदा मिल रहा है। इस ऑफरिंग के चलते हाई-एंड गैजेट्स खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के लिए यह समय काफी आकर्षक माना जा रहा है।जानकारी के अनुसार, सीमित अवधि के लिए शुरू की गई इस सेल में Apple के कई प्रोडक्ट्स की प्रभावी कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। खास बात यह है कि यह छूट केवल सीधी कीमत कटौती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें एक्सचेंज ऑफर, बैंक कार्ड डिस्काउंट, लॉयल्टी पॉइंट्स और अन्य डिजिटल पेमेंट बेनिफिट्स को मिलाकर कुल कीमत और भी कम हो जाती है। iPhone सेगमेंट में इस बार सबसे ज्यादा चर्चा नई और पुरानी दोनों सीरीज को लेकर हो रही है। कुछ मॉडल्स की कीमतें लगभग आधी तक पहुंच गई हैं, जिससे मिड-रेंज और प्रीमियम खरीदार दोनों को फायदा मिल रहा है। वहीं, iPad के नए और पुराने वर्जन भी पहले की तुलना में काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल यूजर्स के बीच इन डिवाइसेज की डिमांड बढ़ने की उम्मीद है। India’s Economic Growth: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत का व्यापार मजबूत, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में हल्की बढ़त की संभावना MacBook सेगमेंट में भी आकर्षक ऑफर्स देखने को मिल रहे हैं। लैपटॉप की कीमतों में भारी कटौती के साथ-साथ स्टूडेंट ऑफर्स और EMI विकल्पों ने इसे और सुलभ बना दिया है। इससे उन लोगों के लिए भी Apple का लैपटॉप खरीदना आसान हो गया है जो पहले बजट के कारण पीछे रह जाते थे। इसके अलावा AirPods और Apple Watch जैसे एक्सेसरी प्रोडक्ट्स पर भी डिस्काउंट दिया जा रहा है। वायरलेस ऑडियो और स्मार्ट वियरेबल डिवाइसेज की कीमतों में आई इस गिरावट से टेक-लवर्स के बीच उत्साह देखा जा रहा है। खासकर वे यूजर्स जो Apple इकोसिस्टम में एंट्री करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक अच्छा अवसर माना जा रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस तरह की सेल्स का उद्देश्य प्रीमियम सेगमेंट में ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को आकर्षित करना होता है। साथ ही, कंपनियां पुराने स्टॉक को क्लियर कर नए मॉडल्स के लिए जगह भी बनाती हैं। हालांकि, अंतिम कीमतें स्टॉक, शहर और एक्सचेंज डिवाइस की स्थिति पर निर्भर करती हैं, इसलिए ग्राहकों को खरीदारी से पहले सभी शर्तों को ध्यान से समझने की सलाह दी जाती है।

बिना बिजली-बर्फ के 30 दिन तक ताजी रहेंगी सब्जियां! IIT इंजीनियर ने बनाया किसानों के लिए ‘स्मार्ट फ्रिज’

नई दिल्ली। बिहार के भागलपुर के रहने वाले IIT ग्रेजुएट निक्की कुमार झा और उनकी बहन रश्मि झा ने किसानों और आम लोगों की बड़ी समस्या का अनोखा समाधान खोज निकाला है। दोनों भाई-बहन ने ‘सब्जीकोठी’ नाम का ऐसा स्मार्ट डिवाइस तैयार किया है, जो बिना भारी बिजली खर्च और बिना बर्फ के सब्जियों और फलों को लंबे समय तक ताजा रख सकता है। खास बात यह है कि यह डिवाइस सिर्फ एक लीटर पानी और मोबाइल फोन चार्ज करने जितनी बिजली में काम कर जाता है। यही वजह है कि इसे ग्रामीण भारत और किसानों के लिए बड़ी तकनीकी क्रांति माना जा रहा है। दरअसल, भारत में हर साल लाखों टन फल और सब्जियां खराब हो जाती हैं क्योंकि गांवों और छोटे कस्बों में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा नहीं होती। किसानों को मजबूरी में अपनी फसल कम दाम पर बेचनी पड़ती है। इसी समस्या को देखते हुए ‘सब्जीकोठी’ तैयार की गई। यह डिवाइस पारंपरिक फ्रिज की तरह लगातार बिजली पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि एक खास कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इस तकनीक में पानी को ऑक्सीडाइज कर कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन और वाष्प में बदला जाता है। साथ ही यह डिवाइस फल और सब्जियों से निकलने वाली एथिलीन गैस को खत्म करता है। यही गैस फलों और सब्जियों को जल्दी पकाने और सड़ाने का कारण बनती है। जब एथिलीन गैस नियंत्रित हो जाती है तो सब्जियों की शेल्फ लाइफ कई गुना बढ़ जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस डिवाइस में रखी सब्जियां 3 दिन से लेकर 30 दिन तक ताजा रह सकती हैं। सब्जीकोठी की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद कम बिजली खपत है। जहां एक सामान्य फ्रिज लगातार बिजली खर्च करता है, वहीं यह डिवाइस बहुत कम ऊर्जा में काम कर जाता है। इसे सोलर पैनल से भी आसानी से चलाया जा सकता है। यही वजह है कि बिजली की कमी वाले गांवों और दूरदराज इलाकों में भी इसका इस्तेमाल संभव है। यह डिवाइस पोर्टेबल भी है। इसे आसानी से खोलकर एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। किसान इसे ई-रिक्शा, ठेले या छोटे वाहन पर रखकर सीधे खेत से मंडी तक ले जा सकते हैं। इसकी स्टोरेज क्षमता भी सामान्य घरेलू फ्रिज से कई गुना ज्यादा बताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। फसल खराब होने से बचने पर किसानों को अपनी उपज सही समय और सही कीमत पर बेचने का मौका मिलेगा। यही नहीं, इससे खाद्य बर्बादी भी कम होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में कम लागत वाला आधुनिक कोल्ड स्टोरेज विकल्प उपलब्ध हो सकेगा। ‘सब्जीकोठी’ अब एग्री-टेक सेक्टर में भारत के सबसे चर्चित इनोवेशन में से एक बनती जा रही है।

Google पर सर्च करना भी पड़ सकता है भारी! Claude AI के नाम पर फैल रहा खतरनाक Malware Scam

नई दिल्ली। इंटरनेट पर किसी भी जानकारी के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला Google Search अब साइबर अपराधियों का नया हथियार बनता नजर आ रहा है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने एक ऐसे खतरनाक मालवेयर कैंपेन का खुलासा किया है, जिसमें स्कैमर्स लोकप्रिय AI टूल Claude AI के नाम का इस्तेमाल कर लोगों के सिस्टम में मालवेयर इंस्टॉल करने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जब यूजर्स “Claude download for Mac” या इससे जुड़े कीवर्ड सर्च करते हैं, तो उन्हें कुछ फर्जी विज्ञापन और संदिग्ध लिंक दिखाई देते हैं। ये लिंक देखने में असली डाउनलोड वेबसाइट जैसे लगते हैं, लेकिन उन पर क्लिक करते ही यूजर एक ऐसे वेबपेज पर पहुंच जाता है जहां मालवेयर छिपा होता है। डाउनलोड या इंस्टॉल प्रक्रिया शुरू होते ही सिस्टम संक्रमित हो सकता है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला इसलिए ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें इस्तेमाल किया जा रहा मालवेयर “मेमोरी-बेस्ड” तकनीक पर काम करता है। यानी यह सिस्टम की मेमोरी में रन करता है और हार्ड डिस्क पर आसानी से दिखाई नहीं देता। यही वजह है कि कई एंटीवायरस प्रोग्राम भी शुरुआती स्तर पर इसे पकड़ नहीं पाते। Claude AI की बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाकर स्कैमर्स लोगों को फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में Claude AI और दूसरे AI टूल्स को लेकर लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी है, जिसके कारण साइबर अपराधियों ने नकली डाउनलोड लिंक, पॉप-अप विज्ञापन और फर्जी वेबसाइट्स बनाना शुरू कर दिया है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के अनुसार मालवेयर का इस्तेमाल सिस्टम की जानकारी चुराने, पासवर्ड हासिल करने, बैंकिंग डेटा एक्सेस करने या डिवाइस को पूरी तरह कंट्रोल करने के लिए किया जा सकता है। कई बार ये मालवेयर बैकग्राउंड में काम करते रहते हैं और यूजर को लंबे समय तक इसका पता भी नहीं चलता। विशेषज्ञों ने यूजर्स को सलाह दी है कि इंटरनेट ब्राउज करते समय किसी भी संदिग्ध विज्ञापन, पॉप-अप या अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें। किसी भी ऐप या सॉफ्टवेयर को हमेशा उसके आधिकारिक स्रोत से ही डाउनलोड करें। इसके अलावा ब्राउजर और ऑपरेटिंग सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखना भी जरूरी है ताकि सुरक्षा खामियों का फायदा न उठाया जा सके। साइबर सुरक्षा के लिए एड-ब्लॉकर और सिक्योरिटी एक्सटेंशन का इस्तेमाल भी मददगार माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आज के समय में सिर्फ ईमेल या मैसेज ही नहीं, बल्कि साधारण Google Search भी साइबर हमलों का जरिया बन सकता है, इसलिए इंटरनेट इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी हो गई है।

WhatsApp हुआ प्रीमियम! iPhone यूजर्स के लिए आया पेड प्लान, अब पैसे देकर बदल सकेंगे ऐप का पूरा लुक

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल WhatsApp ने आखिरकार अपना पेड सब्सक्रिप्शन प्लान लॉन्च कर दिया है। “WhatsApp Plus” नाम से पेश किए गए इस नए प्लान को फिलहाल चुनिंदा iPhone यूजर्स के लिए रोलआउट किया गया है। लंबे समय से इसके आने की चर्चा चल रही थी और अब कंपनी ने इसे सीमित स्तर पर टेस्टिंग के तौर पर जारी करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक WhatsApp Plus उन यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो अपने ऐप को ज्यादा पर्सनलाइज्ड और प्रीमियम लुक देना चाहते हैं। इस प्लान के तहत यूजर्स को कई नए कस्टमाइजेशन फीचर्स मिलते हैं। इनमें 18 नई थीम्स, 14 अलग-अलग ऐप आइकन, एक्सक्लूसिव कॉल रिंगटोन, एनिमेटेड स्टिकर पैक और एडवांस नोटिफिकेशन कंट्रोल शामिल हैं। इसके अलावा यूजर्स एक साथ 20 चैट्स पिन कर सकेंगे और चैट लिस्ट को ज्यादा बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएंगे। हालांकि कंपनी ने अभी इस प्लान में कोई बड़ा “कोर फीचर” नहीं जोड़ा है। यानी मैसेजिंग, कॉलिंग, वीडियो कॉल और फाइल शेयरिंग जैसी मूल सुविधाएं पहले की तरह फ्री ही रहेंगी। WhatsApp Plus मुख्य रूप से ऐप की डिजाइन, इंटरफेस और एक्सपीरियंस को प्रीमियम बनाने पर फोकस करता है। यूरोप में इस सब्सक्रिप्शन की शुरुआती कीमत 2.49 यूरो प्रति महीना रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 280 रुपये होती है। अलग-अलग देशों में इसकी कीमत अलग हो सकती है। फिलहाल यह फीचर भारत में उपलब्ध नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में इसे एंड्रॉयड और बाकी iPhone यूजर्स के लिए भी जारी किया जा सकता है। WhatsApp Plus को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि पहली बार WhatsApp ने आम यूजर्स के लिए इस तरह का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन मॉडल पेश किया है। हालांकि कंपनी ने साफ किया है कि यह पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) प्लान है और सामान्य यूजर्स को ऐप इस्तेमाल करने के लिए कोई पैसा नहीं देना पड़ेगा। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि Meta के स्वामित्व वाला WhatsApp अब धीरे-धीरे प्रीमियम फीचर्स और सब्सक्रिप्शन मॉडल की ओर बढ़ रहा है। आने वाले समय में कंपनी इसमें AI फीचर्स, एडवांस प्राइवेसी टूल्स और ज्यादा कस्टमाइजेशन विकल्प भी जोड़ सकती है।

AI इंडस्ट्री में बड़ा धमाका! Elon Musk ने Anthropic को दिया सुपरकंप्यूटर एक्सेस, तेज होगी Claude AI की ताकत

नई दिल्ली। दुनिया की तेजी से बदलती आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंडस्ट्री में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Elon Musk की कंपनी SpaceX और AI कंपनी Anthropic के बीच बड़ी टेक डील हुई है। इस समझौते के तहत Anthropic अब SpaceXAI के शक्तिशाली “Colossus 1” सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल अपने AI मॉडल्स को ट्रेन और रन करने के लिए कर सकेगी। टेक इंडस्ट्री में इस डील को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि Anthropic, OpenAI और xAI जैसी कंपनियों की सीधी प्रतिस्पर्धी मानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक Colossus 1 को दुनिया के सबसे बड़े AI-फोकस्ड सुपरकंप्यूटर्स में गिना जाता है। इसे मूल रूप से Musk की AI कंपनी xAI ने Grok AI मॉडल की ट्रेनिंग और X प्लेटफॉर्म को सपोर्ट देने के लिए तैयार किया था। इस सुपरकंप्यूटर में करीब 2.2 लाख NVIDIA GPUs का इस्तेमाल किया गया है और इसे रिकॉर्ड 122 दिनों में तैयार किया गया था। दिलचस्प बात यह है कि एलन मस्क पहले से ओपनएआई  के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और Anthropic भी AI रेस में ओपनएआई की बड़ी प्रतिद्वंद्वी मानी जाती है। वहीं Anthropic, Musk की xAI के लिए भी सीधी चुनौती है। इसके बावजूद Musk ने यह साझेदारी की है, जिससे टेक जगत में काफी चर्चा शुरू हो गई है। Musk ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस डील को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने Anthropic के अधिकारियों से बातचीत की और यह समझने की कोशिश की कि Claude AI मानवता के लिए किस तरह उपयोगी और सुरक्षित हो सकता है। Musk ने कहा कि बातचीत के बाद उन्हें भरोसा हुआ कि Claude AI को जिम्मेदारी के साथ विकसित किया जा रहा है। इसी भरोसे के आधार पर उन्होंने Anthropic को Colossus 1 एक्सेस देने का फैसला किया। इस डील का सबसे बड़ा फायदा Anthropic को अतिरिक्त कंप्यूटिंग पावर के रूप में मिला है। इसके बाद कंपनी ने अपने Claude Code प्लेटफॉर्म की लिमिट्स में बदलाव किया है। अब प्रो, मैक्स और एंटरप्राइज प्लान वाले यूजर्स को पहले से ज्यादा AI क्षमता और बेहतर स्पीड मिलने वाली है। कंपनी ने कई पीक-आवर लिमिटेशन भी हटाने का ऐलान किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार एंथ्रोपिक और स्पेसएक्सएआई भविष्य में “स्पेस-बेस्ड AI कंप्यूटिंग” पर भी साथ काम कर सकते हैं। यानी आने वाले समय में अंतरिक्ष में मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल AI मॉडल्स की ट्रेनिंग और प्रोसेसिंग के लिए किया जा सकता है। टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह डील AI सेक्टर में कंप्यूटिंग पावर की बढ़ती जरूरत को दिखाती है। अब कंपनियों के बीच मुकाबला सिर्फ बेहतर AI मॉडल बनाने का नहीं, बल्कि सबसे ताकतवर कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हासिल करने का भी बन गया है।

Netflix पर ‘डिजिटल जासूसी’ का आरोप! यूजर्स की हर पसंद-नापसंद ट्रैक करने को लेकर अमेरिका में बड़ा मुकदमा

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल Netflix अब गंभीर प्राइवेसी विवाद में घिर गया है। अमेरिका के टेक्सास राज्य ने कंपनी के खिलाफ बड़ा मुकदमा दायर किया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि Netflix यूजर्स, खासकर बच्चों, की गतिविधियों को ट्रैक कर उनकी डिजिटल आदतों से जुड़ा डेटा इकट्ठा करता है और प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन करता है कि लोग लंबे समय तक स्क्रीन से जुड़े रहें। टेक्सास अटॉर्नी जनरल केन पैक्सटन की ओर से दायर शिकायत में कहा गया है कि Netflix वर्षों से यूजर्स को यह भरोसा दिलाता रहा कि वह उनके डेटा का दुरुपयोग नहीं करता, लेकिन वास्तव में कंपनी देखने की आदतें, पसंद, सर्च पैटर्न और प्लेटफॉर्म पर बिताया गया समय जैसी जानकारियां रिकॉर्ड करती रही। आरोप है कि इस डेटा का इस्तेमाल विज्ञापन और बिजनेस फायदे के लिए किया गया। मुकदमे में सबसे ज्यादा चर्चा जब आप नेटफ्लिक्स देखते हैं, तो नेटफ्लिक्स आपको देखता है।” लाइन को लेकर हो रही है। इसका मतलब यह नहीं कि कंपनी कैमरे से लोगों की निगरानी कर रही थी, बल्कि आरोप यह है कि प्लेटफॉर्म यूजर्स के डिजिटल बिहेवियर को लगातार मॉनिटर करता है। जैसे कौन-सी फिल्म देखी गई, किस सीन को दोबारा चलाया गया, वीडियो कहां रोकी गई और कितनी देर तक कंटेंट देखा गया। इन जानकारियों के जरिए Netflix कथित तौर पर यूजर का डिजिटल प्रोफाइल तैयार करता है। इस केस में “डार्क पैटर्न” शब्द भी सामने आया है। टेक्नोलॉजी की भाषा में इसका मतलब ऐसे डिजाइन और फीचर्स से होता है जो यूजर्स को बिना महसूस कराए ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म पर रोके रखते हैं। टेक्सास सरकार का आरोप है कि Netflix का ऑटो-प्ले फीचर और पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन सिस्टम इसी रणनीति का हिस्सा हैं, जिससे लोग लगातार अगला शो देखते रहें। मुकदमे में यह भी दावा किया गया है कि Netflix बच्चों के लिए बनाए गए प्रोफाइल्स से भी डेटा इकट्ठा करता रहा। टेक्सास प्रशासन का कहना है कि कंपनी ने खुद को “सुरक्षित और प्राइवेसी-फ्रेंडली” प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया, लेकिन व्यवहार में डेटा ट्रैकिंग जारी रखी। हालांकि Netflix ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि वह यूजर्स की प्राइवेसी को गंभीरता से लेती है और सभी डेटा सुरक्षा कानूनों का पालन करती है। Netflix के प्रवक्ता ने मुकदमे को “भ्रामक और गलत जानकारी पर आधारित” बताया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब दुनियाभर में डिजिटल प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो चुकी है। इससे पहले Meta, TikTok और YouTube जैसी कंपनियां भी यूजर्स की आदतों को प्रभावित करने और डेटा ट्रैकिंग के आरोपों में घिर चुकी हैं। अब Netflix पर लगे आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मनोरंजन प्लेटफॉर्म भी धीरे-धीरे “डेटा कंपनियों” में बदलते जा रहे हैं।

AI की दुनिया में नई जंग! Claude Mythos के बाद OpenAI ने उतारा ‘Daybreak’, साइबर सिक्योरिटी रेस हुई और तेज

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अब मुकाबला सिर्फ चैटबॉट्स तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर सिक्योरिटी के मोर्चे पर भी बड़ी कंपनियों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। एन्थ्रोंपिक के चर्चित AI मॉडल क्लॉउड मेथोस के बाद अब ओपनएआई ने डे ब्रेक नाम से नया साइबर डिफेंस प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है, जिसे कंपनियों के सॉफ्टवेयर और डिजिटल सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए तैयार किया गया है। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने बताया कि डे ब्रेक का मकसद कंपनियों को एडवांस साइबर खतरों से बचाने में मदद करना है। यह प्लेटफॉर्म सिक्योर कोड रिव्यू, थ्रेट मॉडलिंग, पैच वैलिडेशन और सॉफ्टवेयर में मौजूद कमजोरियों की पहचान जैसे काम कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें GPT-5.5, GPT-5.5-Cyber और Codex Security जैसे सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। डे ब्रेक को सीधे तौर पर Anthropic के “Project Glasswing” और “Claude Mythos” के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। Claude Mythos को लेकर पिछले कुछ महीनों से काफी चर्चा रही है, क्योंकि कंपनी ने दावा किया था कि यह मॉडल साइबर सिक्योरिटी से जुड़े बेहद जटिल काम कर सकता है और कई पुराने सॉफ्टवेयर बग्स व कमजोरियों को पहचान चुका है। सुरक्षा चिंताओं के कारण इसे आम लोगों के लिए जारी नहीं किया गया और फिलहाल चुनिंदा पार्टनर्स के साथ टेस्ट किया जा रहा है। हालांकि सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में Mythos को “किसी भी सिस्टम को हैक करने वाला AI” बताकर पेश किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इन दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि यह मॉडल बिना अनुमति किसी भी सिस्टम को हैक कर सकता है। दूसरी ओर OpenAI ने Daybreak को ज्यादा सहयोगी और नियंत्रित तरीके से पेश किया है। कंपनी का कहना है कि वह अधिक से अधिक कंपनियों और सुरक्षा विशेषज्ञों के साथ मिलकर इसे टेस्ट करना चाहती है ताकि साइबर हमलों से बचाव को मजबूत किया जा सके। Oracle, Cisco और Cloudflare जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी की भी चर्चा है। टेक विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले समय में AI कंपनियों के बीच सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धा “सुरक्षित AI” और “साइबर डिफेंस” को लेकर होने वाली है। यही वजह है कि अब AI मॉडल सिर्फ चैटिंग या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्रीय साइबर ढांचे का भी अहम हिस्सा बन सकते हैं।

सैमसंग का नया Re-Newed फोन प्रोग्राम: पुराने फ्लैगशिप को बनाया नया जैसा, लेकिन क्या वाकई में बचत का सौदा है?

नई दिल्ली। सैमसंग ने भारत में अपना नया प्रमाणित नवीकृत स्मार्टफोन प्रोग्राम लॉन्च किया है, जिसके तहत कंपनी अपने पुराने प्रीमियम और मिड-रेंज गैलेक्सी फोन्स को रीफर्बिश करके दोबारा बाजार में पेश कर रही है। इन फोन्स को सैमसंग की इन-हाउस टीम द्वारा पूरी तरह जांचा जाता है, जिनमें हार्डवेयर टेस्टिंग, सॉफ्टवेयर अपडेट, डेटा वाइप और ओरिजिनल पार्ट्स से रिपेयर शामिल होती है। इसके बाद इन्हें नए बॉक्स में पैक करके ग्राहकों को बेचा जाता है। कंपनी इन री-न्यूड स्मार्टफोन्स के साथ 1 साल की मैन्युफैक्चरर वॉरंटी भी दे रही है, जिससे यूजर्स को भरोसे और सुरक्षा का फायदा मिलता है। इसके अलावा चार्जिंग केबल, सिम इजेक्टर पिन और यूजर मैनुअल जैसी जरूरी एक्सेसरीज भी दी जा रही हैं। इस प्रोग्राम में सैमसंग गैलेक्सी एस25, गैलेक्सी एस25 अल्ट्रा, गैलेक्सी ए56 5जी और Galaxy A36 5G जैसे मॉडल शामिल हैं। कीमतों की बात करें तो री-न्यूड वर्जन और नए फोन्स के बीच ज्यादा अंतर नहीं देखने को मिल रहा है। उदाहरण के तौर पर Galaxy S25 का नया वर्जन सेल में करीब 62,999 रुपये में उपलब्ध है, जबकि री-न्यूड वर्जन लगभग 58,749 रुपये में मिल रहा है। यानी अंतर करीब 4 से 5 हजार रुपये का ही है। इसी तरह Galaxy S25 Ultra और अन्य मॉडल्स में भी कीमतों का अंतर बहुत कम है, जिससे ग्राहकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या थोड़ी सी बचत के लिए रीफर्बिश्ड फोन लेना सही विकल्प है या फिर थोड़ा और जोड़कर नया फोन खरीदना बेहतर रहेगा। टेक विशेषज्ञों का मानना है कि री-न्यूड फोन उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं जो सैमसंग के प्रीमियम डिवाइस कम कीमत में और भरोसे के साथ इस्तेमाल करना चाहते हैं। वहीं, अगर कीमत का अंतर बहुत कम हो तो नया फोन लेना ज्यादा समझदारी भरा फैसला हो सकता है। कुल मिलाकर सैमसंग का यह कदम रिफर्बिश्ड मार्केट को एक नया भरोसेमंद विकल्प देने की कोशिश है, लेकिन कीमतों का छोटा अंतर इसे ग्राहकों के लिए थोड़ा कन्फ्यूजिंग बना देता है।

Portable TV: अब टीवी आपके साथ चलेगा! बैटरी वाला स्मार्ट टीवी बना नया टेक ट्रेंड, जानिए फीचर्स, कीमत और फायदे-नुकसान

नई दिल्ली। टेक्नोलॉजी की दुनिया में अब टीवी सिर्फ घर की दीवार तक सीमित नहीं रहा। एक नया इनोवेशन सामने आया है जिसे पोर्टेबल स्मार्ट टीवी (Portable Smart TV) कहा जाता है। यह ऐसा टीवी है जिसे आप अपने स्मार्टफोन या टैबलेट की तरह कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं। क्या है पोर्टेबल टीवी?पोर्टेबल टीवी एक बैटरी से चलने वाला स्मार्ट डिस्प्ले है, जिसे खास तौर पर मोबाइलिटी के लिए डिजाइन किया गया है। यह 32 इंच या उससे छोटे साइज में आता है और इसमें इनबिल्ट बैटरी होती है, जो एक बार चार्ज करने पर लगभग 8 से 11 घंटे तक चल सकती है। फीचर्स जो इसे खास बनाते हैंबैटरी ऑपरेटेड (बिजली पर निर्भर नहीं)टचस्क्रीन और रोटेटिंग डिस्प्ले (कुछ मॉडल्स में)एंड्रॉयड सपोर्ट, ऐप्स और गेम्स की सुविधावाई-फाई और ब्लूटूथ कनेक्टिविटीटीवी + टैबलेट + मॉनिटर का कॉम्बो अनुभववायरलेस कीबोर्ड/माउस से मिनी कंप्यूटर जैसा इस्तेमाल कहां काम आता है?पोर्टेबल टीवी को सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया है। इसका इस्तेमाल:घर के किसी भी कोने में मूवी देखनेकिचन में रेसिपी देखनेगार्डन या आउटडोर में मैच देखनेऑफिस प्रेजेंटेशन और सेकेंडरी मॉनिटर के रूप मेंट्रैवल और कैंपिंग के दौरान किया जा सकता है कीमत कितनी है?भारत में पोर्टेबल टीवी की कीमत लगभग 20,000 रुपये से 50,000 रुपये तक शुरू होती है। वहीं हाई-एंड और एडवांस मॉडल्स की कीमत 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा भी हो सकती है। फायदे और नुकसानफायदे:वायरलेस और पोर्टेबल सुविधामल्टी-यूज डिवाइस (टीवी + टैबलेट + मॉनिटर)आउटडोर यूज के लिए बेहतरीन नुकसानकीमत अभी भी ज्यादाभारत में सीमित लोकप्रियता बड़े टीवी जितना पावरफुल व्यूइंग अनुभव नहींपोर्टेबल टीवी आने वाले समय में टेक्नोलॉजी का बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल यह प्रीमियम सेगमेंट में हैं, लेकिन जैसे-जैसे डिमांड बढ़ेगी, ये आम लोगों की पहुंच में भी आ सकते हैं।अब टीवी सिर्फ घर में नहीं, आपकी जेब और बैग में भी होगा! क्या आपको खरीदना चाहिए पोर्टेबल TV?यह टीवी हर किसी के लिए नहीं है। अगर आप बेहतरीन पिक्चर क्वालिटी और बड़े स्क्रीन वाले थिएटर अनुभव की तलाश में हैं, तो पोर्टेबल टीवी आपको निराश कर सकते हैं क्योंकि इनका रेजोल्यूशन अक्सर 1080p या QHD तक ही सीमित होता है।हालांकि, अगर आप कम जगह वाले अपार्टमेंट में रहते हैं, बार-बार सफर करते हैं या एक ऐसा ऑल-इन-वन डिवाइस चाहते हैं जो टीवी, मॉनिटर और टैबलेट तीनों का काम करे, तो यह एक बेहतरीन गैजेट साबित हो सकता है।