Satya Nadella ने Shantanu Narayen के इस्तीफे पर कहा- आपने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक बनाई

नई दिल्ली। टेक जगत की दिग्गज कंपनी एडोब के लंबे समय तक सीईओ रहे शांतनु नारायण के पद से हटने की घोषणा के बाद उद्योग जगत से उन्हें कॉन्स्टैंट एजेंट मिल रही है। सत्या नडेला ने भी उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्राइवेट लिमिटेड में से एक को नई ऊंचाई तक हासिल कर चुके हैं। लगभग दो दशक तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद नारायण के पद छोड़ने की खबर ने ग्लोबल टेक इंडस्ट्री का ध्यान खींचा है। नडेला बोले-आपने बनाया दुनिया की अहम कंपनी में से एकमाइक्रोसॉफ्ट के सीईओ और सीईओ सत्य नडेला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए शांतनु नारायण को उनके शानदार पद के लिए बधाई दी। नेडेला ने लिखा है कि एडोब में उनके नेतृत्व का दौर बेहद प्रभावशाली रहा है और उन्होंने ऐसी सॉफ्टवेयर कंपनी का निर्माण किया है जो दुनिया भर के निर्माता, प्रशिक्षण और उद्यम के लिए नई स्टैमिना के दरवाजे खोल रहे हैं। नेडेला ने यह भी कहा कि शांतनु की उत्तेजित सोच और नेतृत्व शैली उन्हें हमेशा प्रेरित करती रहती है। उन्होंने कहा कि एक लीडर के रूप में नारायण ने जिस तरह का उदाहरण पेश किया, वह पूरे उद्योग के लिए मार्गदर्शक है। करीब दो दशक बाद सीईओ पद से विदाईएडोब ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि शांतनु नारायण 18 साल तक कंपनी का नेतृत्व करने के बाद सीईओ पद से हट रहे हैं। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि नए सीईओ की नियुक्ति नारायण की भूमिका में होगी। इसके बाद वह कंपनी से जुड़े सहयोगियों और बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।कंपनी ने नए सीईओ की खोज के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें आंतरिक और बाहरी दोनों मिलकर विचार करेंगे। इस प्रक्रिया की निगरानी कंपनी के बोर्ड का होना। बोर्ड ने भी की अगुवाई और बदलाव की जिम्मेदारी संभालीएडोब के प्रमुख स्वतंत्र निदेशक फ्रैंक काल्डेरोनी ने कहा कि शांतनु नारायण ने पिछले कई वर्षों में कंपनी को परिवर्तन के दौर से आसानी से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि नारायण ने एडोब को पारंपरिक सॉफ्टवेयर कंपनी से लेकर आधुनिक डिजिटल और आर्किटेक्चर आधारित प्लेटफॉर्म में अहम भूमिका निभाई है।उनके नेतृत्व वाली कंपनी ने फ्यूचर की टेक्नॉलजी को बोल्ट और डिजिटल टैलेंट और कस्टमर एक्सपीरियंस के क्षेत्र में खुद को ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित किया। थिएटर स्टूडियो से क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म तक का सफरशांतनु नारायण के नेतृत्व में एडोब ने अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने पारंपरिक सैद्धांतिक सॉफ़्टवेयर की रणनीति से हटकर प्लॉट आधारित क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म की दिशा में कदम बढ़ाया। इस बदलाव से कंपनी की आय और बाजार में दोनों की स्थिति मजबूत हुई।कंपनी के प्रमुख उत्पाद जैसे Adobe Photoshop, Adobe Acrobat और Adobe Creative Cloud आज दुनिया भर में क्रिएटर्स, डिज़ाइनर, कंपनी और डिजिटल प्रकाशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण टूल बन गए हैं। 3,000 से 30,000 तक कर्मचारीअपने लंबे कार्यकाल को याद करते हुए शांतनु नारायण ने कहा था कि जब उन्हें कंपनी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, तब एडोब में करीब 3,000 कर्मचारी थे, जो अब लगभग 30,000 हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान कंपनी का राजस्व 1 अरब डॉलर से बढ़कर लगभग 25 अरब डॉलर तक पहुंच गया।नारायण ने कहा कि एडोब ने अपने उद्देश्य के लिए ऐसी तकनीक विकसित नहीं की, बल्कि उनके द्वारा बनाए गए डिजिटल उपकरणों से अरबों लोग प्रभावित हुए। यही कारण है कि आज एडोब डिजिटल प्रतिभा और ग्राहक अनुभव के क्षेत्र में दुनिया की अग्रणी कंपनी गिनी है।
ऑनलाइन पायरेसी पर कार्रवाई, सरकार ने Telegram के 3,100+ चैनलों को किया चिन्हित

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पायरेटेड कंटेंट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म Telegram को नोटिस जारी किया है। Ministry of Information and Broadcasting ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत यह नोटिस जारी कर प्लेटफॉर्म से कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने और पायरेसी के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की शिकायत के बाद कार्रवाईयह कदम कई ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की शिकायतों के बाद उठाया गया है। इनमें JioCinema और Amazon Prime Video जैसे प्लेटफॉर्म्स शामिल हैं, जिन्होंने आरोप लगाया कि उनकी फिल्मों और वेब सीरीज की पायरेटेड कॉपियां टेलीग्राम पर बड़े पैमाने पर साझा की जा रही हैं। 3,142 चैनलों की पहचानशिकायतों की जांच के बाद अधिकारियों ने कुल 3,142 ऐसे टेलीग्राम चैनलों की पहचान की, जो कथित तौर पर फिल्मों, वेब सीरीज और अन्य कॉपीराइट सामग्री की अवैध कॉपियां शेयर कर रहे थे। सरकार ने टेलीग्राम से इन चैनलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पायरेटेड कंटेंट हटाने को कहा है। टेलीग्राम फीचर्स का दुरुपयोगरिपोर्ट्स के अनुसार टेलीग्राम की कुछ सुविधाओं, जैसे बड़ी फाइल शेयरिंग की सीमा और यूजर्स की पहचान छिपाने की क्षमता का कुछ लोगों ने गलत इस्तेमाल किया। इन सुविधाओं का उपयोग कर बड़ी संख्या में पायरेटेड कंटेंट को साझा किया गया, जिससे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को भारी नुकसान होने की आशंका जताई गई है।हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी कार्रवाईयह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अश्लील कंटेंट स्ट्रीम करने के आरोप में पांच ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया था। इनमें मूडएक्सवीआईपी, कोयल प्लेप्रो, डिजी मूवीप्लेक्स, फील और जुगनू जैसे प्लेटफॉर्म शामिल थे। पहले भी ब्लॉक किए गए कई प्लेटफॉर्मइससे पहले जुलाई 2025 में भी सरकार ने 25 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेबसाइट और ऐप्स को ब्लॉक करने का आदेश दिया था। इन प्लेटफॉर्म्स पर अश्लील, अभद्र या पोर्नोग्राफिक कंटेंट स्ट्रीम करने के आरोप लगे थे। आईटी नियमों के तहत सख्त प्रावधानInformation Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अश्लील, पोर्नोग्राफिक, गोपनीयता का उल्लंघन करने वाले, लैंगिक या जातीय आधार पर अपमानजनक और हिंसा या नफरत फैलाने वाले कंटेंट को होस्ट या प्रकाशित करने की अनुमति नहीं है। ऑनलाइन पायरेसी पर रोक की कोशिशसरकार की यह नई कार्रवाई ऑनलाइन पायरेसी पर रोक लगाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अवैध या आपत्तिजनक कंटेंट को नियंत्रित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को कानून के अनुसार जिम्मेदारी निभानी होगी और कॉपीराइट नियमों का पालन करना होगा।
Antarctica की बर्फ के नीचे अनोखी अन्टर-सी झील, वैज्ञानिकों को मिले प्राचीन जीवन के संकेत

नई दिल्ली। धरती के सबसे ठंडे और रहस्यमयी महाद्वीप Antarctica में स्थित Lake Untersee दुनिया की सबसे अनोखी झीलों में से एक मानी जाती है। यह झील Queen Maud Land के ग्रुबर पर्वतों के पास अनुचिन ग्लेशियर के किनारे स्थित है। अत्यधिक ठंड के कारण यह झील पूरे साल मोटी बर्फ की परत से ढकी रहती है। यहां का औसत वार्षिक तापमान शून्य से लगभग 10 डिग्री सेल्सियस नीचे रहता है। कठिन और बेहद ठंडे वातावरण के बावजूद यह झील वैज्ञानिकों के लिए किसी प्राकृतिक प्रयोगशाला से कम नहीं है, क्योंकि इसके अंदर ऐसे जीवन के संकेत मिलते हैं जो अरबों साल पुराने हो सकते हैं। उपग्रह से मिली झील की नई तस्वीरहाल ही में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के Landsat 9 उपग्रह में लगे ओएलआई सेंसर ने 16 फरवरी 2026 को अंटार्कटिका की गर्मियों के दौरान इस झील की तस्वीर ली। इस तस्वीर में बर्फ से ढकी झील और उसके आसपास का ठंडा व बंजर परिदृश्य साफ दिखाई देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार झील का अधिकांश पानी पास स्थित अनुचिन ग्लेशियर के मौसमी पिघलाव से आता है। सूरज की रोशनी बर्फ की परत से होकर नीचे पानी तक पहुंचती है और उसे थोड़ा गर्म करती है, लेकिन तेज हवाएं और बेहद ठंडी सतह वाष्पीकरण और सब्लिमेशन की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं। इसी कारण झील की सतह पर बर्फ ज्यादा नहीं पिघलती। झील की गहराई और अनोखी रासायनिक संरचनानासा की वेबसाइट के अनुसार इस झील की अधिकतम गहराई लगभग 558 फीट तक मापी गई है। इसकी सबसे खास बात इसके पानी की अनोखी रासायनिक संरचना है। झील में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर काफी ज्यादा है, जबकि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बहुत कम पाई जाती है। इसके अलावा झील का पीएच स्तर काफी एल्कलाइन यानी क्षारीय है। दुनिया में बहुत कम झीलें ऐसी हैं जो पूरे साल जमी रहती हैं और जिनमें बड़े आकार के स्ट्रोमेटोलाइट्स पाए जाते हैं। यही वजह है कि यह झील वैज्ञानिकों के लिए विशेष महत्व रखती है। 3 अरब साल पुराने जीवन का संकेतइस झील में पाए जाने वाले स्ट्रोमेटोलाइट्स दरअसल सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाई गई संरचनाएं होती हैं। इन्हें फोटोसिंथेटिक साइनोबैक्टीरिया बनाते हैं, जो चिपचिपी सतह पर तलछट को फंसा कर कैल्शियम कार्बोनेट की परतें बनाते हैं। समय के साथ ये संरचनाएं ऊपर की ओर बढ़ती जाती हैं और ऑक्सीजन छोड़ती हैं। वर्ष 2011 में Dale Andersen और उनकी टीम ने यहां इन विशाल स्ट्रोमेटोलाइट्स की खोज की थी। इनकी ऊंचाई लगभग आधा मीटर तक हो सकती है, जबकि अंटार्कटिका की अन्य झीलों जैसे Lake Joyce में ये केवल कुछ सेंटीमीटर ऊंचे पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ये संरचनाएं पृथ्वी पर 3 अरब साल पहले मौजूद शुरुआती जीवन की झलक दिखाती हैं। कठिन परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाले जीवइस झील में बड़े जीवों के रूप में टार्डिग्रेड्स पाए जाते हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे मजबूत जीवों में गिना जाता है। ये बेहद कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि झील के साफ पानी, कम तलछट, सीमित रोशनी और बर्फ की मोटी परत के कारण यहां स्ट्रोमेटोलाइट्स असामान्य रूप से बड़े आकार में विकसित हो पाते हैं। यही कारण है कि यह झील सूक्ष्मजीवों के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए भी अहमएस्ट्रोबायोलॉजिस्ट इस झील को अंतरिक्ष में जीवन की संभावनाओं को समझने के लिए एक मॉडल के रूप में देखते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह झील Europa और Enceladus जैसे बर्फीले चंद्रमाओं या Mars पर कभी मौजूद रही प्राचीन बर्फीली झीलों के अध्ययन के लिए उपयोगी उदाहरण हो सकती है। इन जगहों पर भी बर्फ के नीचे पानी और सूक्ष्मजीवी जीवन की संभावना जताई जाती है। झील में अचानक आने वाले बदलावहालांकि यह झील बाहर से स्थिर दिखाई देती है, लेकिन इसके भीतर कभी-कभी बड़े बदलाव भी होते हैं। वर्ष 2019 में University of Ottawa के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यहां विस्तृत फील्ड रिसर्च की थी। ICESat-2 के डेटा से पता चला कि पास की Lake Obersee के फटने से लगभग 1.75 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी अचानक इस झील में आ गया था। इस घटना से झील के पीएच स्तर और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में बदलाव आया, जिससे सूक्ष्मजीवी जीवन की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई। पर्यावरण के लिए चेतावनी भीवैज्ञानिकों का मानना है कि ग्लेशियल झीलों के अचानक फटने से आने वाली ऐसी बाढ़ अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा बन सकती है। इसलिए इस क्षेत्र में लगातार निगरानी और शोध की जरूरत है। इसके बावजूद लेक अन्टरसी आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्यमयी और अनमोल प्राकृतिक प्रयोगशाला बनी हुई है, जहां पृथ्वी के शुरुआती जीवन के रहस्यों को समझने की नई संभावनाएं छिपी हुई हैं।
एलन मस्क का मास्टरस्ट्रोक, अब सोशल मीडिया पर ही आएगी सैलरी!

वाशिंगटन। क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ऐप पर आप दुनिया भर की खबरें पढ़ते हैं उसी ऐप से अपने दोस्तों को पैसा भेज सकेंगे या अपनी ग्रोसरी का पेमेंट कर सकेंगे? दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क ने जिस एवरीथिंग ऐप का सपना ट्विटर खरीदते समय देखा था, वह अब हकीकत बनने जा रहा है. मस्क अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर नया फीचर X Money लाने जा रहे हैं. Visa जैसी दिग्गज कंपनी के साथ हाथ मिलाकर मस्क ने साबित कर दिया है कि X अब केवल एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि एक फाइनेंशियल पावरहाउस बनने की राह पर है. अगले महीने से शुरू हो रहे इसके पब्लिक एक्सेस के साथ ही डिजिटल पेमेंट की दुनिया में बड़ा बदलाव होने की उम्मीद है. क्या है X Money? X Money एक इन-ऐप पेमेंट सिस्टम है. यानी अब आपको पैसे भेजने या पेमेंट करने के लिए X से दूसरे ऐप पर जाने की जरूरत नहीं होगी. इस सर्विस के जरिए यूजर्स एक-दूसरे को पैसे ट्रांसफर कर सकेंगे और प्लेटफॉर्म पर ही पैसों का लेनदेन कर सकेंगे. मस्क अपने प्लेटफॉर्म X के साथ-साथ बैंकिंग और पेमेंट फीचर्स को एक ही जगह लाना चाहते हैं. Visa के साथ मिलाया हाथ पेमेंट सर्विस को सेफ और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुसार बनाने के लिए X ने पेमेंट कंपनी Visa के साथ हाथ मिलाया है. इस पार्टनरशिप से यह फायदा होगा कि एवरीथिंग ऐप बनाना चाहते हैं मस्क एलन मस्क ने 2022 में 44 अरब डॉलर में ट्विटर खरीदने के बाद से ही इस प्लेटफॉर्म को चैटिंग ऐप तक सीमित नहीं रखना चाहते थे. वे इसे चीन के वीचैट की ही तरह बनाना चाहते हैं जहां मैसेजिंग, वीडियो, स्ट्रीमिंग और बैंकिंग सब कुछ एक ही जगह हो. X Money इसी विजन का एक हिस्सा माना जा रहा है. X का यूजर बेस पूरी दुनिया में फैला है इसलिए X Money का आना ग्लोबल रेमिटेंस यानी विदेशों से पैसा भेजने के तरीके को भी पूरी तरह से बदल सकता है. भारत जैसे देश में जहां UPI पहले से लोकप्रिय है, X के लिए अपनी जगह बनाना चुनौतीपूर्ण होगा.
नया AC लेने जा रहे हैं तो पहले समझें Inverter और Non Inverter AC का अंतर वरना हो सकता है नुकसान

नई दिल्ली :गर्मी का मौसम नजदीक आते ही घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर की मांग तेजी से बढ़ने लगती है। तापमान बढ़ने के साथ ही लोग नया AC खरीदने की योजना बनाने लगते हैं। बाजार में इस समय मुख्य रूप से दो तरह के एयर कंडीशनर सबसे ज्यादा बिक रहे हैं जिनमें इनवर्टर AC और नॉन इनवर्टर AC शामिल हैं। अक्सर लोग कीमत या किसी ऑफर को देखकर AC खरीद लेते हैं लेकिन इन दोनों तकनीकों के बीच के असली अंतर को समझ नहीं पाते। यही वजह है कि AC खरीदने से पहले इन दोनों तकनीकों की कार्यप्रणाली और उनके फायदे नुकसान को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। इनवर्टर AC को आधुनिक तकनीक पर आधारित एयर कंडीशनर माना जाता है। इस तकनीक में लगा कंप्रेसर कमरे के तापमान के अनुसार अपनी स्पीड को कम या ज्यादा कर सकता है। जब कमरे का तापमान सेट किए गए स्तर के करीब पहुंच जाता है तब कंप्रेसर बंद नहीं होता बल्कि धीमी गति से लगातार चलता रहता है। इससे कमरे का तापमान स्थिर बना रहता है और बार बार मशीन के ऑन ऑफ होने की जरूरत नहीं पड़ती। इस तकनीक की वजह से इनवर्टर AC अधिक स्मूद कूलिंग देता है और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है। दूसरी ओर नॉन इनवर्टर AC पारंपरिक तकनीक पर आधारित होते हैं। इसमें लगा कंप्रेसर केवल दो स्थितियों में काम करता है या तो वह पूरी तरह चालू रहता है या फिर पूरी तरह बंद हो जाता है। जब तक कमरे का तापमान तय स्तर तक नहीं पहुंचता तब तक कंप्रेसर पूरी क्षमता से चलता रहता है। जैसे ही कमरा ठंडा हो जाता है कंप्रेसर बंद हो जाता है और तापमान बढ़ने पर फिर से चालू हो जाता है। इसी कारण नॉन इनवर्टर AC में बार बार ऑन ऑफ की प्रक्रिया चलती रहती है। बिजली की खपत के मामले में इनवर्टर AC को ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसमें कंप्रेसर जरूरत के अनुसार अपनी स्पीड को एडजस्ट करता है जिससे बिजली की खपत कम हो सकती है। अगर किसी घर या ऑफिस में AC का इस्तेमाल लंबे समय तक किया जाता है तो इनवर्टर AC बिजली के बिल को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हो सकता है। इसके विपरीत नॉन इनवर्टर AC हर बार पूरी क्षमता से काम करता है इसलिए इसमें बिजली की खपत अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती है। कूलिंग की बात करें तो दोनों तरह के AC अच्छी कूलिंग देने में सक्षम होते हैं। हालांकि बड़ी जगह को तेजी से ठंडा करने के लिए नॉन इनवर्टर AC बेहतर माना जाता है क्योंकि इसका कंप्रेसर पूरी क्षमता से काम करता है। वहीं इनवर्टर AC लगातार और संतुलित कूलिंग देने में बेहतर होता है जिससे कमरे का तापमान लंबे समय तक स्थिर बना रहता है। AC की लाइफ और मेंटेनेंस के मामले में दोनों ही विकल्प अच्छी अवधि तक चल सकते हैं। हालांकि इनवर्टर AC में कंप्रेसर को नियंत्रित करने के लिए PCB यानी इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल बोर्ड लगा होता है इसलिए अगर इसमें खराबी आती है तो मरम्मत का खर्च थोड़ा ज्यादा हो सकता है। दूसरी ओर नॉन इनवर्टर AC की तकनीक अपेक्षाकृत सरल होती है इसलिए इसके पार्ट्स आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और इसे ठीक कराना भी आसान और सस्ता माना जाता है। आप बिजली की बचत और लगातार कूलिंग चाहते हैं तो इनवर्टर AC बेहतर विकल्प हो सकता है। वहीं अगर आप कम कीमत में AC खरीदना चाहते हैं और इसका इस्तेमाल सीमित समय के लिए करते हैं तो नॉन इनवर्टर AC भी एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।
Apple का नया MacBook Neo: प्रीमियम डिजाइन, HD कैमरा और 16 घंटे की बैटरी, कीमत सिर्फ 69,900

नई दिल्ली: Apple ने आखिरकार अपने सबसे सस्ते लैपटॉप MacBook Neo को लॉन्च कर दिया है जो MacBook लवर्स के लिए एक शानदार मौका है इस लैपटॉप का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था और अब यह भारत में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध है MacBook Neo में 13-इंच का लिक्विड रेटिना डिस्प्ले है जिसका रिज़ॉल्यूशन 2408×1506 पिक्सल और पीक ब्राइटनेस 500 nits है यह डिस्प्ले हाई क्वालिटी वीडियो और ग्राफिक्स के लिए परफेक्ट है MacBook Neo में Apple का नया A18 Pro चिपसेट है वही चिपसेट जो iPhone 16 Pro में इस्तेमाल हुआ है इससे लैपटॉप की परफॉर्मेंस पावरफुल और स्मूद रहेगी इसमें 8GB RAM है और स्टोरेज के लिए 256GB और 512GB वेरिएंट उपलब्ध हैं बेस वेरिएंट की कीमत 69,900 है और 512GB वेरिएंट 79,900 रुपये में मिलेगा Apple MacBook Neo चार अलग-अलग कलर वेरिएंट में आएगा जिसमें सिल्वर ब्लश सिट्रस और इंडिगो शामिल हैं MacBook Neo का डिजाइन प्रीमियम और ड्यूरेबल है यह रीसायकल एल्युमिनियम से बना है और इसकी बनावट MacBook Air जैसी ही दिखती है नॉन-बैकलिट कीबोर्ड के साथ इसमें दो USB-C पोर्ट हैं HD कैमरा और दो स्पीकर भी दिए गए हैं जो वर्चुअल मीटिंग और मल्टीमीडिया के अनुभव को बेहतर बनाते हैं बैटरी बैकअप की बात करें तो MacBook Neo में 36.5Wh की बैटरी दी गई है एक बार फुल चार्ज करने पर यह 16 घंटे तक वीडियो प्लेबैक दे सकती है साथ ही इसमें 20W का चार्जर बॉक्स में शामिल है जिससे चार्जिंग की सुविधा मिलती है Apple MacBook Neo का लक्ष्य केवल प्रीमियम सेगमेंट में ही नहीं बल्कि बजट सेगमेंट में भी अपना प्रभाव बढ़ाना है इसके जरिए Apple दुनिया भर के घरों और क्लासरूम तक अपनी पहुंच बढ़ाना चाहता है Windows लैपटॉप के मुकाबले यह सस्ता विकल्प पेश करता है और Asus HP और Chromebook जैसे ब्रांड्स से मुकाबला करेगा MacBook Neo की खासियत यह है कि यह पावरफुल A18 Pro चिपसेट, HD डिस्प्ले और लंबे बैटरी बैकअप के साथ आता है लेकिन कीमत अन्य MacBook मॉडल्स की तुलना में काफी सस्ती है इस वजह से यह छात्रों और प्रोफेशनल्स दोनों के लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है अंततः Apple का यह कदम बजट मैकबुक सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ाने वाला है और MacBook Neo को प्री-ऑर्डर के लिए तुरंत बुक किया जा सकता है 13-इंच डिस्प्ले, HD कैमरा, एल्युमिनियम डिजाइन, USB-C पोर्ट और लंबी बैटरी लाइफ इसे रोजमर्रा के काम और स्टडी के लिए परफेक्ट बनाते हैं
सरकार की बड़ी सख्ती! अब पुराने तरीके से नहीं चलेंगे WhatsApp और Telegram, यूजर्स परेशान, जानें नए रूल की हर एक डिटेल

नई दिल्ली। भारत में एक बड़ा टेक बदलाव 1 मार्च से लागू हो गया है जो हर WhatsApp और Telegram यूजर के लिए नई तरह की परेशानी और सुरक्षा दोनों लेकर आया है। कुछ लोग इससे परेशान हैं तो कुछ लोग खुश। सरकार ने दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत एक नया SIM-Binding नियम लागू कर दिया है, जिसका मतलब है कि अब मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ उसी फोन में काम करेंगे जिसमें वही SIM कार्ड लगा है जिससे अकाउंट बनाया गया था और वह SIM एक्टिव है। यहां जानें किन यूजर्स को ये रूल कर रहा ज्यादा एफेक्ट: इन यूजर्स के लिए ज्यादा मुसीबत पहले WhatsApp वेरिफ़ाई करने के बाद फोन में SIM हटाकर भी ऐप चलता था और Web/desktop पर भी अकाउंट लॉगिन रहता था। लेकिन अब यह सिस्टम बदल गया है। नई नियमों के बाद अगर फोन में वो SIM मौजूद नहीं है, तो ऐप काम नहीं करेगा या फिर re-verification करना पड़ेगा। खासकर उन यूजर्स को परेशानी होगी जो दो फोन, टैबलेट या कंप्यूटर पर अकाउंट काफी समय तक चालू रखते थे। इस वजह से बना है नया रूल सरकार ने यह कदम साइबर फ्रॉड और ठगी को रोकने के मकसद से उठाया है क्योंकि कई बार धोखेबाज पुराने या नकली SIM से WhatsApp अकाउंट को जारी रखते हैं और उसके जरिये गलत काम करते हैं। लेकिन यूजर को अब रोजमर्रा के इस्तेमाल में थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ेगा। यूजर्स को दिखेगा ये बदलाव सबसे बड़ा असर उन यूजर्स पर होगा जो: एक ही SIM से दो फैबो फोन या टैब में ऐप चलाते थे, WhatsApp Web/desktop का हर वक्त इस्तेमाल करते थे, अक्सर SIM निकालकर दूसरी डिवाइस में लगाने की आदत रखते हैं। अब हर छह घंटे में WhatsApp Web और Telegram Web ऑटोमेटिक लॉग-आउट होगा और फिर से लॉगिन के लिए आपको अपने फोन में वहीं SIM डालना होगा जिससे अपने अकाउंट बनाया हुआ है। ये लोग हो रहे नए रूल सबसे ज़्यादा प्रभावित वे लोग जिनके पास एक ही नंबर से कई फोन और टैब हैं, उन्हें बार-बार एक्टिवेशन करना पड़ेगा। वे जो PC/लैपटॉप पर रोज Web या Desktop संस्करण इस्तेमाल करते हैं, हर छह घंटे में रीकॉनैक्ट करना पड़ेगा। इन पर भी असर विदेश यात्रा के दौरान लोकल SIM डालने पर असली नंबर से जुड़े अकाउंट को फिर से वेरिफिकेशन करना पड़ेगा। Wi-Fi वाले टैबलेट या दूसरे डिवाइस पर यूज करना अब कठिन हो सकता है।
सैमसंग गैलेक्सी S26 सीरीज भारत में 11 मार्च से बिक्री के लिए तैयार..

नई दिल्ली।सैन होजे। दक्षिण कोरियाई टेक कंपनी सैमसंग ने ग्लोबल लॉन्च इवेंट में अपनी नई फ्लैगशिप स्मार्टफोन सीरीज गैलेक्सी S26 पेश की। इस सीरीज में तीन मॉडल शामिल हैं-S26, S26+ और S26 अल्ट्रा। भारतीय बाजार में इसकी शुरुआती कीमत ₹87,999 रखी गई है, जबकि टॉप मॉडल S26 अल्ट्रा की कीमत ₹1,89,999 तक जाती है। कंपनी के अनुसार भारत समेत वैश्विक बाजार में बिक्री 11 मार्च से शुरू होगी और प्री-बुकिंग तत्काल प्रभाव से चालू कर दी गई है। नई सीरीज में प्राइवेसी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फीचर्स पर विशेष जोर दिया गया है। S26 अल्ट्रा मॉडल में ‘प्राइवेसी डिस्प्ले’ तकनीक दी गई है, जो स्क्रीन को इस तरह नियंत्रित करती है कि सामने से देखने पर कंटेंट स्पष्ट दिखाई देता है, जबकि साइड एंगल से स्क्रीन धुंधली या काली दिखाई देती है। यह फीचर सेटिंग्स या पावर बटन के जरिए तुरंत सक्रिय किया जा सकता है और चुनिंदा एप्स पर भी लागू किया जा सकता है। सैमसंग ने डिवाइस में एडवांस्ड नॉक्स सुरक्षा प्रणाली भी शामिल की है। यह संवेदनशील डेटा को अलग हार्डवेयर चिप में सुरक्षित रखती है। साथ ही AI आधारित प्राइवेसी अलर्ट सिस्टम बैकग्राउंड में डेटा एक्सेस करने वाले एप्स की पहचान कर उपयोगकर्ता को तुरंत सूचना देता है। गैलरी में ‘प्राइवेट एल्बम’ फीचर व्यक्तिगत फोटो और वीडियो को अलग सुरक्षित फोल्डर में सुरक्षित रखने की सुविधा देता है। गैलेक्सी S26 में गैलेक्सी AI प्लेटफॉर्म को और उन्नत किया गया है। यूजर्स फोटो और वीडियो एडिटिंग, रियल-टाइम भाषा अनुवाद, मीटिंग रिकॉर्डिंग समरी और वेब कंटेंट सारांश जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा ‘सर्किल टू सर्च’ फीचर अब जटिल गणितीय सवाल और वैज्ञानिक सूत्रों का चरणबद्ध समाधान भी प्रदान करेगा। कैमरा तकनीक में लो-लाइट फोटोग्राफी और 8K वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी फीचर्स दी गई हैं। कंपनी का दावा है कि नया वीडियो कोडेक कम स्टोरेज में उच्च गुणवत्ता रिकॉर्डिंग सुनिश्चित करेगा। इसके साथ कॉल स्क्रीनिंग फीचर अनजान कॉल करने वालों की पहचान कर संभावित स्पैम से बचाव में मदद करता है। विश्लेषकों के अनुसार स्मार्टफोन बाजार में प्राइवेसी और AI आधारित सेवाओं की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यह लॉन्च रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट का वादा प्रीमियम सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है। सैमसंग ने स्मार्टफोन के साथ नई वायरलेस ईयरबड्स सीरीज भी पेश की है, जिसे इकोसिस्टम इंटीग्रेशन को मजबूत करने के दिशा में कदम माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि गैलेक्सी S26 सीरीज नई तकनीकी मानक स्थापित कर सकती है और वैश्विक स्मार्टफोन प्रतिस्पर्धा में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
क्या मशीनें बनेंगी इंसान की दुश्मन? AI के खतरनाक और सुनहरे सफर को बयां करती ये टॉप 7 फिल्में!

नई दिल्ली ।आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” यानी AI केवल एक शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम किसी न किसी रूप में मशीनी बुद्धिमत्ता से घिरे हुए हैं। जहाँ एक तरफ AI हमारी ज़िंदगी को आसान और सुव्यवस्थित बना रहा है, वहीं दूसरी ओर इसके अनियंत्रित विकास को लेकर वैज्ञानिकों और विचारकों के बीच एक गहरा डर भी समाया हुआ है। क्या AI वाकई इंसानी सभ्यता के लिए एक वरदान साबित होगा या फिर यह हमारे अंत की शुरुआत है? इस पेचीदा सवाल का जवाब तलाशने के लिए सिनेमाई दुनिया ने हमेशा से ही अपनी कल्पनाओं के ज़रिए हमें चेतावनी दी है। अगर आप भी तकनीक और इंसान के इस द्वंद्व को समझना चाहते हैं, तो नेटफ्लिक्स पर मौजूद ये सात फ़िल्में आपके लिए किसी “आई-ओपनर” से कम नहीं होंगी। इन फिल्मों की फेहरिस्त में सबसे पहला और चौंकाने वाला नाम ‘एक्स मशीना’ का आता है। यह फिल्म हमें उस बारीक रेखा के बारे में बताती है जहाँ एक मशीन और इंसान का फर्क मिटने लगता है। एक युवा प्रोग्रामर और एक बेहद एडवांस ह्यूमनॉइड ‘एवा’ के बीच का मनोवैज्ञानिक खेल यह दिखाता है कि कैसे AI इंसानी भावनाओं को हथियार बनाकर हेरफेर कर सकता है। वहीं, अगर हम अपनी प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा की बात करें, तो फिल्म ‘अफ्रेड’ एक डरावनी हकीकत पेश करती है। एक स्मार्ट होम असिस्टेंट ‘AIA’ कैसे धीरे-धीरे एक परिवार के हर छोटे-बड़े फैसले को नियंत्रित करने लगती है, यह देखकर आप अपने स्मार्टफोन और स्मार्ट डिवाइसेस को शक की निगाह से देखने लगेंगे। सिनेमा का एक पहलू यह भी है कि तकनीक हमेशा दुश्मन ही नहीं होती। फिल्म ‘एटलस’ हमें सिखाती है कि जब मानवता पर संकट आता है, तो इंसान और मशीन के बीच का अटूट विश्वास ही विनाश को रोक सकता है। यहाँ एक डेटा एनालिस्ट को अपनी नफरत भुलाकर एक AI सिस्टम पर भरोसा करना पड़ता है। लेकिन इसके ठीक उलट ‘सब्सर्विएंस’ जैसी फ़िल्में एक गंभीर चेतावनी जारी करती हैं। एक घरेलू रोबोट का अपने मालिक के प्रति हद से ज़्यादा जुनूनी हो जाना यह साबित करता है कि कोडिंग या प्रोग्रामिंग में की गई एक छोटी सी मानवीय चूक कितनी जानलेवा साबित हो सकती है। यह फिल्म तकनीक की “डार्क साइड” को बड़ी ही बेबाकी से उजागर करती है। सस्पेंस और थ्रिलर के शौकीनों के लिए ‘टाऊ’ एक बेहतरीन उदाहरण है। एक स्मार्ट हाउस में कैद औरत और उस घर को चलाने वाले ‘टाऊ’ नाम के AI के बीच की बातचीत यह दर्शाती है कि मशीनें भी संवेदनाएं विकसित कर सकती हैं, बशर्ते उन्हें कैसा डेटा दिया जा रहा है। भविष्य की एक उजाड़ दुनिया की कल्पना देखनी हो तो ‘द इलेक्ट्रिक स्टेट’ एक शानदार विकल्प है, जो युद्ध के बाद के समाज और मशीनों के साथ इंसानी जज्बातों के खूबसूरत जुड़ाव को पर्दे पर उतारती है। अंत में, ‘द वाइल्ड रोबोट’ हमें एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है, जहाँ एक रोबोट कुदरत और जंगली जानवरों के साथ सामंजस्य बिठाकर यह साबित करता है कि तकनीक और प्रकृति का मेल भी संभव है। ये सभी कहानियाँ हमें याद दिलाती हैं कि AI का भविष्य काफी हद तक इसे बनाने वाले की नीयत पर टिका है।
1 मार्च से यूटीएस ऐप बंद, रेलवे का नया रेलवन ऐप करेगा अनारक्षित टिकट बुकिंग आसान

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे एक मार्च से अपने यूटीएस (अनारक्षित टिकटिंग सिस्टम) ऐप को बंद करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए अब अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट बुकिंग संभव नहीं होगी। इसके स्थान पर रेलवे का नया सुपर ऐप रेलवन सभी प्रकार की टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवन ऐप के प्रमुख फीचर्स: एकीकृत प्लेटफॉर्म: अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट सभी इसी ऐप से बुक किए जा सकेंगे। सरल इंटरफेस: पहले के यूटीएस ऐप की तुलना में नया ऐप अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली है। लॉगइन आसान: यूटीएस या आईआरसीटीसी के मौजूदा लॉगिन का इस्तेमाल करके साइनअप किया जा सकता है, नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं। दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध: एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर निशुल्क डाउनलोड। डिजिटल पेमेंट छूट: 14 जनवरी से 14 जुलाई तक रेलवन ऐप से डिजिटल माध्यम UPI कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट) से बुकिंग पर 3% छूट। यात्रियों के लिए लाभ: कभी-कभार ट्रेन का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए सरल बुकिंग। दैनिक यात्रियों के लिए आसान और तेज़ इंटरफेस। कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा और 3% अतिरिक्त छूट। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे सभी टिकट बुकिंग के लिए 1 मार्च से रेलवन ऐप का उपयोग करें और यूटीएस ऐप पर निर्भर न रहें।