1 मार्च से यूटीएस ऐप बंद, रेलवे का नया रेलवन ऐप करेगा अनारक्षित टिकट बुकिंग आसान

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे एक मार्च से अपने यूटीएस (अनारक्षित टिकटिंग सिस्टम) ऐप को बंद करने जा रहा है। इस ऐप के जरिए अब अनारक्षित टिकट बुकिंग, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट बुकिंग संभव नहीं होगी। इसके स्थान पर रेलवे का नया सुपर ऐप रेलवन सभी प्रकार की टिकट बुकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। रेलवन ऐप के प्रमुख फीचर्स: एकीकृत प्लेटफॉर्म: अनारक्षित टिकट, प्लेटफॉर्म पास और सीजन टिकट सभी इसी ऐप से बुक किए जा सकेंगे। सरल इंटरफेस: पहले के यूटीएस ऐप की तुलना में नया ऐप अधिक आसान और यूजर-फ्रेंडली है। लॉगइन आसान: यूटीएस या आईआरसीटीसी के मौजूदा लॉगिन का इस्तेमाल करके साइनअप किया जा सकता है, नया अकाउंट बनाने की जरूरत नहीं। दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध: एंड्रॉइड और आईओएस दोनों पर निशुल्क डाउनलोड। डिजिटल पेमेंट छूट: 14 जनवरी से 14 जुलाई तक रेलवन ऐप से डिजिटल माध्यम UPI कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट) से बुकिंग पर 3% छूट। यात्रियों के लिए लाभ: कभी-कभार ट्रेन का उपयोग करने वाले यात्रियों के लिए सरल बुकिंग। दैनिक यात्रियों के लिए आसान और तेज़ इंटरफेस। कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा और 3% अतिरिक्त छूट। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे सभी टिकट बुकिंग के लिए 1 मार्च से रेलवन ऐप का उपयोग करें और यूटीएस ऐप पर निर्भर न रहें।
Galaxy AI ने मल्टी-एजेंट इकोसिस्टम का किया विस्तार; यूज़र्स को मिलेंगे अधिक विकल्प और बेहतर

नई दिल्ली। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स अपने गैलेक्सी इकोसिस्टम में नए AI एजेंट जोड़कर एआई अनुभव को लगातार बेहतर बना रहा है, ताकि रोजमर्रा के डिजिटल काम और भी आसान, सहज और स्मार्ट बन सकें। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने आज अपने गैलेक्सी इकोसिस्टम में गैलेक्सी AI का विस्तार करते हुए ‘मल्टी-एजेंट इकोसिस्टम’ को और मजबूत करने की घोषणा की है। कंपनी का उद्देश्य यूज़र्स को अधिक विकल्प, और बेहतर नियंत्रण देना है, ताकि वे अपने दैनिक कार्य कम मेहनत और अधिक स्वाभाविक तरीके से पूरे कर सकें। कंपनी के अनुसार, अब लोग अलग-अलग कामों के लिए कई तरह के AI एजेंट्स का उपयोग कर रहे हैं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 10 में से लगभग 8 यूज़र्स दो या उससे अधिक AI एजेंट्स पर निर्भर हैं। इसी बदलाव को देखते हुए, सैमसंग गैलेक्सी AI को इस तरह विकसित कर रहा है कि यूज़र अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग इंटीग्रेटेड एआई अनुभवों को चुन सकें। गैलेक्सी AI को ऑपरेटिंग सिस्टम के स्तर पर गहराई से जोड़ा गया है। यह केवल किसी एक ऐप तक सीमित रहने के बजाय पूरे डिवाइस के सिस्टम लेवल पर काम करता है। यह यूज़र की जरूरतों को समझते हुए ज्यादा स्वाभाविक और सरल इंटरैक्शन सुनिश्चित करता है। इससे बार-बार ऐप बदलने या एक ही कमांड को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं पड़ती और एआई बैकग्राउंड में बिना किसी रुकावट के काम करता रहता है। साथ ही, सैमसंग अपने अनुभव को और बेहतर बनाने के लिए परप्लेक्सिटी जैसी सहायक सेवाओं को भी जोड़ रहा है, ताकि पूरा गैलेक्सी इकोसिस्टम एक जैसा और सहज महसूस हो। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के मोबाइल एक्सपीरियंस (MX) बिजनेस के प्रेसिडेंट और आर एंड डी हेड, वॉन-जून चोई ने कहा, “हम एक खुले और समावेशी एआई इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो यूज़र्स को जटिल कार्यों को तेजी से पूरा करने के लिए अधिक विकल्प और नियंत्रण दे। गैलेक्सी AI एक ऑर्केस्ट्रेटर (सूत्रधार) की तरह काम करता है, जो विभिन्न एआई क्षमताओं को जोड़कर एक सहज और एकीकृत अनुभव प्रदान करता है! इस विस्तार के तहत, सैमसंग आगामी फ्लैगशिप गैलेक्सी डिवाइसेज़ में परप्लेक्सिटी को एक अतिरिक्त AI एजेंट के रूप में पेश करेगा। यूज़र “Hey Plex” (हे प्लेक्स) वॉयस कमांड या साइड बटन को दबाकर सीधे इसका उपयोग कर सकेंगे। परप्लेक्सिटी को सैमसंग नोट्स, क्लॉक, गैलरी, रिमाइंडर और कैलेंडर जैसे ऐप्स में गहराई से जोड़ा जाएगा। इससे यूज़र्स बिना अलग-अलग ऐप्स को मैन्युअल रूप से मैनेज किए, मल्टी-स्टेप वर्कफ्लो को आसानी से पूरा कर सकेंगे। सैमसंग अपने एआई इकोसिस्टम को भरोसेमंद भागीदारों के साथ मिलकर लगातार बढ़ाता रहेगा। कंपनी जल्द ही इस सुविधा से जुड़े डिवाइस और अन्य अनुभवों की जानकारी साझा करेगी।
GWALIOR AAJEEVIKA MART OPENING: ग्वालियर में आज से ‘आजीविका मार्ट’ की शुरुआत, सीएम मोहन यादव करेंगे वर्चुअल शुभारंभ

HIGHLIGHTS: फूलबाग संभागीय हाट बाजार में स्थापित हुआ स्थायी आजीविका मार्ट 25 फरवरी को सीएम मोहन यादव करेंगे वर्चुअल शुभारंभ सालभर उपलब्ध रहेंगे स्व-सहायता समूहों के उत्पाद 27-28 फरवरी को लगेगा विशेष होली मेला महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा GWALIOR AAJEEVIKA MART OPENING: ग्वालियर। संभागीय हाट बाजार, फूलबाग में अब स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए स्थायी मंच मिल गया है।बता दें कि 25 फरवरी को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव वर्चुअली ‘आजीविका मार्ट’ का शुभारंभ करेंगे। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उनके उत्पादों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है। होली से पहले 8 दिन उग्र ग्रहों का प्रभाव, जानें किन राशियों को बरतनी होगी सावधानी महिलाओं को मिलेगा स्थायी बाजार मंच फूलबाग स्थित संभागीय हाट बाजार में स्थापित यह मार्ट सालभर संचालित रहेगा। यहां स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद, सजावटी सामग्री, वस्त्र और दैनिक उपयोग की वस्तुएं भी बिक्री के लिए उपलब्ध करवाई जाएँगी। यह पहल महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही मुख्यमंत्री ग्वालियर के साथ-साथ प्रदेश के अन्य शहरों में शुरू हो रहे आजीविका मार्ट का भी वर्चुअली शुभारंभ करेंगे। “होली के रंग, आजीविका के संग” दो दिवसीय मेला आजीविका मार्ट के शुभारंभ के साथ ही 27 और 28 फरवरी को विशेष होली मेला आयोजित किया जाएगा। “होली के रंग, आजीविका के संग” थीम पर आधारित इस मेले में संभाग भर से राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगी। त्योहार के अवसर पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी का विशेष अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज करेंगे समूहों की “आजीविका विपणन क्षमतावर्धन कार्यशाला’’ का शुभारंभ प्रशासन ने बताया महत्वपूर्ण पहल सूत्रों की माने तो ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़ा कदम बताया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी और महिलाओं की आय में वृद्धि होगी।
रंगों के त्योहार पर बनाएं कम तेल और कम शुगर वाली गुजिया..

नई दिल्ली :होली का त्योहार खुशियों, रंगों और स्वादिष्ट पकवानों से भरा होता है। खासतौर पर गुजिया के बिना होली अधूरी मानी जाती है। पारंपरिक गुजिया घी, मैदा और ज्यादा शुगर से बनती है, जिससे कैलोरी काफी बढ़ जाती है। लेकिन अगर आप फिटनेस का ध्यान रखते हुए त्योहार मनाना चाहते हैं, तो हेल्दी गुजिया एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है।इस होली आप पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए कुछ छोटे बदलावों के साथ इसे ज्यादा पौष्टिक और हल्का बना सकते हैं। हेल्दी गुजिया कैसे बनाएं?1. मैदा की जगह साबुत आटा या मल्टीग्रेन आटापारंपरिक गुजिया में मैदा इस्तेमाल होता है, जो जल्दी पचता है और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है। इसके बजाय गेहूं का आटा या मल्टीग्रेन आटा इस्तेमाल करें। इससे गुजिया में फाइबर की मात्रा बढ़ेगी और पेट लंबे समय तक भरा रहेगा। 2. भरावन में हेल्दी बदलावखोया और रिफाइंड शुगर से भरी पारंपरिक भरावन की जगह भुने हुए बादाम, काजू, अखरोट और खजूर का मिश्रण तैयार करें। इसमें खसखस और थोड़ी सी नारियल की कतरन मिलाने से स्वाद भी बढ़ेगा और पोषण भी। 3. शुगर का हेल्दी विकल्पसफेद चीनी की जगह गुड़ पाउडर, खजूर पेस्ट या नारियल शुगर का उपयोग करें। ये प्राकृतिक मिठास देते हैं और रिफाइंड शुगर की तुलना में बेहतर विकल्प माने जाते हैं। 4. तलने की बजाय बेक या एयर फ्राई करेंडीप फ्राई करने से गुजिया में अतिरिक्त तेल और कैलोरी बढ़ जाती है। आप इन्हें ओवन में 180°C पर 15–20 मिनट तक बेक कर सकते हैं या एयर फ्रायर में हल्का ब्रश किया हुआ तेल लगाकर क्रिस्प होने तक पका सकते हैं। 5. स्वस्थ मसालों का इस्तेमालभरावन में इलायची पाउडर, दालचीनी या थोड़ा सा अदरक पाउडर मिलाएं। ये न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि पाचन में भी मददगार होते हैं। हेल्दी गुजिया के फायदेकम तेल और कम कैलोरी होने से वजन नियंत्रण में सहायक ड्राय फ्रूट्स से हृदय और मस्तिष्क को पोषण फाइबर युक्त आटे से बेहतर पाचन कम शुगर होने से ब्लड शुगर लेवल संतुलित रखने में मदद पारंपरिक स्वाद के साथ फिटनेस-फ्रेंडली मिठाई टिप्स और ट्रिक्सगुजिया का आकार छोटा रखें ताकि पोर्शन कंट्रोल आसान हो। बेकिंग से पहले हल्का सा तेल ब्रश करना पर्याप्त है। भरावन को पहले हल्का भूनकर ठंडा कर लें, इससे भरते समय मिश्रण बाहर नहीं निकलेगा। चाहें तो ऊपर से हल्का सा पिस्ता या बादाम गार्निश कर सकते हैं।
कम कीमत में बड़ा दावा, itel A100 लाया अल्ट्रा लिंक कॉलिंग और दमदार बैटरी बैकअप

नई दिल्ली से बजट स्मार्टफोन बाजार के लिए एक नई पेशकश सामने आई है। itel ने अपना नया एंट्री लेवल मॉडल itel A100 लॉन्च किया है, जो कम कीमत में प्रीमियम डिजाइन और कुछ अनोखे फीचर्स के कारण चर्चा में है। कंपनी का दावा है कि यह फोन खास तौर पर उन यूजर्स के लिए तैयार किया गया है जो सीमित बजट में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने वाला भरोसेमंद स्मार्टफोन चाहते हैं। इस डिवाइस की सबसे खास बात इसकी अल्ट्रा लिंक तकनीक है। इस फीचर के जरिए बिना सिम नेटवर्क के भी दूसरे संगत डिवाइस पर कॉल की जा सकती है। कंपनी का कहना है कि कमजोर नेटवर्क या ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अलावा कंपनी 100 दिनों के भीतर स्क्रीन डैमेज होने पर मुफ्त रिप्लेसमेंट की सुविधा भी दे रही है, जो इस प्राइस सेगमेंट में कम ही देखने को मिलती है। डिजाइन के लिहाज से फोन पॉलीकार्बोनेट बॉडी और मैट फिनिश के साथ आता है। 8.49 मिमी मोटाई वाला यह डिवाइस हाथ में हल्का और स्लिम महसूस होता है। MIL STD 810H सर्टिफिकेशन के साथ इसे रोजमर्रा के उपयोग में टिकाऊ बताया गया है। पीछे की ओर टेक्सचर्ड पैनल, फिंगरप्रिंट सेंसर और सादा कैमरा मॉड्यूल दिया गया है। इसके साथ ट्रिपल कार्ड स्लॉट और IR ब्लास्टर जैसे फीचर भी मिलते हैं, जो इस कीमत में अतिरिक्त उपयोगिता जोड़ते हैं। फोन में 6.6 इंच का HD प्लस IPS डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें 90Hz रिफ्रेश रेट का सपोर्ट है। इससे सामान्य ब्राउजिंग और वीडियो देखने का अनुभव स्मूथ रहता है। डायनामिक बार इंटरफेस नोटिफिकेशन और बैटरी स्टेटस को स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में दिखाता है, जिससे उपयोग में सुविधा मिलती है। कैमरा सेटअप की बात करें तो इसमें 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है। यह सेटअप फुल HD वीडियो रिकॉर्डिंग को सपोर्ट करता है। हालांकि यह डिवाइस प्रोफेशनल फोटोग्राफी के लिए नहीं बल्कि बेसिक फोटो और वीडियो जरूरतों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। परफॉर्मेंस के लिए इसमें यूनिसोक T7100 प्रोसेसर और एंड्रॉयड 15 गो एडिशन दिया गया है। यह कॉन्फिगरेशन भारी गेमिंग के लिए नहीं बल्कि कॉलिंग, सोशल मीडिया और सामान्य एप्स के लिए बेहतर माना जा रहा है। 5000mAh की बैटरी एक दिन तक का बैकअप देने में सक्षम बताई गई है और इसके साथ 10W चार्जिंग सपोर्ट मिलता है। 3GB 64GB और 4GB 64GB वेरिएंट में उपलब्ध यह स्मार्टफोन लगभग 7 हजार रुपये की कीमत के आसपास बाजार में उतारा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी बजट बाजार में यह मॉडल स्टाइल, टिकाऊपन और वैकल्पिक कॉलिंग फीचर के कारण अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। खासकर उन यूजर्स के लिए यह उपयोगी विकल्प हो सकता है जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी स्थिर नहीं रहती।
क्या AI से नौकरियों पर आएगा संकट? ओपनएआई के CEO का बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी बोले

नई दिल्ली। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान की सीमाओं को छू रहा है। जहां एक साल पहले AI सिर्फ हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी प्रगति कर रहा है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को एक रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां हर प्रोडक्ट का आधार रिसर्च ही है। यह बात उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही। भारत में AI की संभावनाभारत को लेकर ऑल्टमैन ने काफी उत्साह जताया। उन्होंने कहा कि भारत में बिल्डर एनर्जी जबरदस्त है और आईआईटी दिल्ली में सुबह का माहौल शानदार था। भारत चैटजीपीटी के टॉप यूजर्स में शामिल है, जहां लोग कोडिंग, डेटा एनालिसिस और लर्निंग के लिए इसका ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। ओपनएआई ने मुंबई और बेंगलुरु में नए ऑफिस खोलने की घोषणा की है और टीसीएस के साथ लोकल AI डेटा सेंटर बनाने के साथ ही मेकमाईट्रिप, जियोहॉटस्टार जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप भी की। ऑल्टमैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मोटिवेशन की तारीफ की और कहा कि भारत को AI के हर लेयर में सक्रिय रूप से खेलना चाहिए। बैलेंस ऑफ पावर और AI का लोकतंत्रीकरणएजीआई और सुपरइंटेलिजेंस पर ऑल्टमैन ने कहा कि एजीआई अब काफी करीब लगता है, जबकि ASI कुछ साल दूर है। उन्होंने जोर दिया कि सुपरइंटेलिजेंस पर किसी एक देश या कंपनी का नियंत्रण नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे असंतुलन पैदा होगा। दुनिया में बैलेंस ऑफ पावर जरूरी है। उन्होंने AI के डेमोक्रेटाइजेशन की वकालत की और कहा कि गार्डरेल्स के साथ AI हर किसी के हाथ में पहुंचना चाहिए। सेफ्टी के लिए उन्होंने AI रेजिलिएंस को कोर स्ट्रैटेजी बताया और कहा कि कोई भी लैब अकेले अच्छा भविष्य नहीं बना सकती। सरकारों को कैटास्ट्रोफिक रिस्क्स पर फोकस करना चाहिए, जबकि बाकी मामलों में लचीला रवैया अपनाना चाहिए। नौकरियों पर AI का असरनौकरियों पर AI के प्रभाव के बारे में ऑल्टमैन ने इतिहास का हवाला दिया कि इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन में भी लोग डरते थे, लेकिन गलत साबित हुए। उन्होंने कहा कि AI से कुछ प्रोफेशंस तो जाएंगे, लेकिन लोग नई चीजें करेंगे और समाज एडजस्ट हो जाएगा। ऑल्टमैन ने एलन मस्क की तारीफ करते हुए प्रतिस्पर्धा को स्वीकार किया। ऊर्जा खपत पर उन्होंने कहा कि वाटर यूज के दावे फेक हैं, लेकिन सोलर और न्यूक्लियर एनर्जी की ओर तेजी से जाना होगा। उन्होंने AI को मानव एजेंसी बढ़ाने वाला बताया, साथ ही ग्लोबल कोऑपरेशन, डेमोक्रेसी और बैलेंस्ड डेवलपमेंट पर जोर दिया।क्या AI से नौकरियों पर आएगा संकट? ओपनएआई के CEO का बड़ा बयान, एलन मस्क पर भी बोलेनई दिल्ली । ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि AI अब हाई स्कूल स्तर की गणित से आगे बढ़कर मानव ज्ञान की सीमाओं को छू रहा है। जहां एक साल पहले AI सिर्फ हाई स्कूल मैथ कर पाता था, अब यह नई रिसर्च और फिजिक्स में भी प्रगति कर रहा है। ऑल्टमैन ने ओपनएआई को एक रिसर्च-फर्स्ट कंपनी बताया, जहां हर प्रोडक्ट का आधार रिसर्च ही है। यह बात उन्होंने शुक्रवार को नई दिल्ली में मीडिया कार्यक्रम में कही।
TATA.ev ने नए Punch.ev के साथ मेनस्ट्रीम EV अपनाने में तेज़ी लाई
मुंबई! ईवी को मेनस्ट्रीम करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, भारत में जीरो एमिशन पर्सनलमोबिलिटी सॉल्यूशंस के लीडिंग प्रोवाइडर, TATA.ev ने आज अपने पॉपुलर Punch.ev का नया अवतार लॉन्च किया, जिससेभारत में बड़े पैमाने पर EV अपनाने की नई लहर शुरू हो गई है। एंट्री लेवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को डेमोक्रेटाइज़ करने के लिएडिजाइन की गई, नई Punch.ev उन सभी चीज़ों को एक साथ लाता है जो कस्टमर न सिर्फ अपनी पहली इलेक्ट्रिक कार मेंबल्कि अपनी पहली घरेलू कार में भी चाहते हैं। यह EV ओनरशिप को रोकने वाली मुख्य रुकावटों – अफोर्डेबिलिटी, रेंजकॉन्फिडेंस, चार्जिंग सुविधा और बैटरी एश्योरेंस – को पूरी तरह से दूर करता है; जिससे बड़े पैमाने पर मेनस्ट्रीम EV अपनाने कापूरा समीकरण हल हो जाता है।सिर्फ़ ₹ 9.69 लाख (एक्स-शोरूम, मुंबई) की आकर्षक शुरुआती कीमत पर लॉन्च की गई, नई Punch.ev एंट्री-लेवल स्मॉल-कारसेगमेंट में ICE ऑफ़रिंग के साथ EV ओनरशिप को लगभग ऑन-रोड कीमत के बराबर लाता है।TATA.ev BaaS का ऑप्शन भी दे रहा है, जो ₹ 9.69 लाख से शुरू होता है और बैटरी EMI ₹2.6 /किमी है, जिससे कस्टमरके लिए एक दूसरा फाइनेंसिंग ऑप्शन मिलता है।नई Punch.ev को लॉन्च करते हुए टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल लिमिटेड और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लिमिटेड केमैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश चंद्रा ने कहा, “नई Punch.ev, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को हर घर के लिए सच में आसान, प्रैक्टिकल औरचिंता-मुक्त बनाती है। ~355 किमी की रियल-वर्ल्ड रेंज, फास्ट चार्जिंग कैपेबिलिटी, लाइफटाइम HV बैटरी वारंटी और बहुत हीकिफायती कीमत के साथ, यह उन मुख्य चिंताओं को दूर करती है जो अब तक ग्राहकों को अपनी मुख्य कार के रूप में एंट्रीलेवल EV चुनने से रोकती थीं। रोज़ाना और लंबी दूरी की यात्रा के लिए ग्राहक अपनी पसंदीदा कार में जो कुछ भी चाहते हैं, उसेएक साथ लाकर, नई Punch.ev भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के डेमोक्रेटाइजेशन में एक बड़ी छलांग है।” कीमतों का टेबल नई Punch.ev – बियॉन्ड लिमिट्स के बारे में एडवांस्ड acti.ev आर्किटेक्चर पर बनी नई Punch.ev प्योर EVs को अगले लेवल पर ले जाती है। सबकॉम्पैक्ट SUV कैटेगरीमें सबसे आगे रहने के साथ-साथ भारत की सबसे पसंदीदा SUV में से एक के तौर पर अपनी जगह बनाए रखने वाली, Punchअपने EV अवतार में कई खरीदारों के लिए एक पक्की पसंद है। ज्यादा रियल-वर्ल्ड रेंज और बड़े बैटरी पैक के साथ रेंज की चिंता दूर करनाबड़े 40 kWh LFP प्रिज़्मैटिक सेल बैटरी पैक के साथ, जो ज्यादा काम की रियल-वर्ल्ड C75 रेंज ~355 किमी* और ARAIसर्टिफाइड (P1+P2) रेंज 468 किमीs** देता है, नई Punch.ev रोज़ाना शहर में इस्तेमाल और छोटी इंटरसिटी यात्राओं के लिएबहुत अच्छी है, जिसमें बार-बार चार्जिंग स्टॉप की ज़रूरत कम होती है। इसके अलावा नई Punch.ev एक नए 30kWh बैटरीपैक ऑप्शन के साथ भी मिलेगी। इन दोनों ऑप्शन को मिलाकर नई Punch.ev ग्राहकों को ICE से इलेक्ट्रिक में आसानी सेबदलने में मदद करती है, जिससे बेहतर ड्राइव क्वालिटी, कम रनिंग और मेंटेनेंस कॉस्ट, और एक बार चार्ज करने पर रोजाना यालंबी दूरी की यात्रा में कोई समझौता नहीं होता है।फास्टर चार्जिंग, ज्यादा ड्राइविंग:फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ, बैटरी सिर्फ़ 26 मिनट* में 20% से 80% तक तेज़ी से चार्ज हो सकती है। इसके अलावा, यह सिर्फ 15 मिनट* में बैटरी को आसानी से 135 किमी की रियल-वर्ल्ड रेंज दे देती है, जो लगभग लंबी ड्राइव पर एक छोटीचाय या कॉफ़ी ब्रेक के समय के बराबर है।अनलिमिटेड किमी कवर करने वाली लाइफ़टाइम बैटरी वारंटी:नया Punch.ev अनलिमिटेड किमी*** कवर करने वाली लाइफ़टाइम HV बैटरी वारंटी के साथ आता है, जो सबसे जरूरी EVपार्ट्स पर लंबे समय तक कवरेज देता है, जिससे पहली बार मालिक बनने वाले ग्राहकों को मालिकाना हक के दौरान ज्यादाभरोसा मिलता है।तेजी से बढ़ता चार्जिंग इकोसिस्टम:TATA.ev का चार्जिंग नेटवर्क घर, कम्युनिटी और पार्टनर्स की पब्लिक चार्जिंग के ज़रिए 1,500 शहरों में 2.3 लाख से ज़्यादाचार्जिंग पॉइंट को कवर करता है। TATA.ev ने 30 से ज्यादा चार्ज पॉइंट ऑपरेटर के साथ मिलकर 30,000 से ज्यादा पब्लिकचार्जर जोड़े हैं। ग्राहक IRA.ev ऐप के जरिए एक्टिव चार्जर की रियल टाइम अवेलेबिलिटी/स्टेटस चेक कर सकते हैं ताकि आसानीसे नेविगेशन और एंड-टू-एंड पेमेंट हो सके। TATA.ev पब्लिक चार्जर कितने भरोसेमंद हैं, इस पर नजर रखता है और इसने एक‘.ev वेरिफाइड’ चार्जर नेटवर्क बनाया है, जिसमें 500 शहरों और कस्बों में 2,500+ तेज़, सुरक्षित और बहुत भरोसेमंद चार्जिंगपॉइंट हैं। चार्जिंग के अनुभव को वर्ल्ड क्लास लेवल तक ले जाते हुए, TATA.ev ने भारत का सबसे बड़ा सुपरफास्ट चार्जिंगनेटवर्क बनाया है – 80 हाईवे पर 130+ मेगा चार्जिंग हब पर 450+ चार्जिंग पॉइंट – यह संख्या FY26 तक 800 चार्जिंग पॉइंटतक बढ़ जाएगी। Share this:
AI ALERT: AI कंटेंट के नए नियम आज से लागू, इंटरनेट पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले रखें इन बातों का ध्यान

AI ALERT: नई दिल्ली । एआई जेनरेटेड कंटेंट के नए नियम लागू द्र सरकार ने एआई जेनरेटेड कंटेंट को लेकर पिछले दिनों नियमों में संशोधन किया था। ये नियम आज यानी 20 फरवरी से लागू हो गए हैं। अब सोशल मीडिया या इंटरनेट पर एआई जेनरेटेड कंटेंट शेयर करना भारी पड़ सकता है। आईटी मिनिस्ट्री ने इस नए नियम को 10 फरवरी 2026 को नोटिफाई किया था। इस नए नियम को IT Digital Media Ethics Code Rules 2021 के अमेंटमेंट के तौर पर लागू किया गया है। सरकार ने इस नियम में सिंथेटिकली या AI द्वारा जनेरेटड कंटेंट को परिभाषित किया है। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी भी तय की है। इस तरह के कंटेंट शेयर करने वाले यूजर्स पर भी एक्शन की बात इस नए नियम में स्पष्ट किए गए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे AI Impact Summit के दौरान पीएम मोदी ने भी एआई सेफ्टी पर खुलकर अपनी बात रखी है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि डीपफेक और फेब्रिकेटेड कंटेंट की वजह से समाज प्रभावित हो रहे हैं। इस तरह के कंटेंट के लिए वाटरमार्किंग और क्लियर सोर्स स्टैंडर्ड सेट करने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने ऑनलाइन चाइल्ड सेफ्टी को लेकर भी और ज्यादा विजिलेंट होने की बात की है। क्या है सिंथेटिकली जेनरेटेड SGI कंटेंट? नए नियम के मुताबिक ऐसे कोई भी कम्प्यूटिकृत कंटेंट SGI माने जाएंगे जिन्हें एआई या कम्प्यूटर द्वारा मोडिफेकशन करके जेनरेट किया जाएगा। अगर वो कंटेंट किसी वास्तविक व्यक्ति घटना या स्थान जैसा प्रतीत हो रहा है। ऐसे कंटेंट को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या इंटरनेट पर शेयर करने से पहले वाटरमार्किंग या लेबलिंग जरूरी है ताकि लोग पहचान कर सके कि ये AI जेनरेटेड है। हालांकि बेसिक एडिटिंग वाले फोटो और वीडियो को SGI कंटेंट नहीं माना जाएगा। इसके लिए लेबलिंग या वाटरमार्किंग की जरूरत नहीं है। हुए तीन बड़े बदलाव डीपफेक वीडियो और इमेज को लेकर सरकार ने सख्ती दिखाते हुए तीन बड़े बदलाव करने का फैसला किया है। इनमें एआई जेनरेटेड कंटेंट को शेयर करने से पहले लेबलिंग को अनिवार्य कर दिया गया है। अगर किसी इमेज या वीडियो पर एक बार एआई वाला लेबल लग गया है तो उसे दोबारा नहीं हटाया जाएगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा अपलोड किए जाने वाले एआई जेनरेटेड कंटेंट को वेरिफाई करने के लिए जरूरी टूल्स डेवलप करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बिना वेरिफिकेशन के ऐसे कंटेंट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं किए जा सके। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ये भी निर्देश दिया गया है कि वो अपने यूजर्स को हर तीन महीने में ये चेतावनी जारी करे कि एआई के मिसयूज पर जुर्माना या सजा हो सकता है। इसे एक सोशल मीडिया अवेयरनेस के तौर पर देखा जाना चाहिए। इन तीन बड़े बदलावों के अलावा सरकार ने कुछ कैटेगरी को No Go जोन में रखा है जिनमें बच्चों से जुड़े अश्लील कंटेंट फर्जी डॉक्यूमेंट या फेक इलेक्ट्रॉनिक्स रिकॉर्ड हथियार गोला-बारूद से संबंधित जानकारी डीपफेक फोटो और वीडियो शामिल हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय MeitY ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी बढ़ाते हुए कहा कि किसी कंटेंट को सोशल मीडिया से हटाने के निर्देश जारी होने पर 3 घंटे में उसे हटाना होगा। पहले यह लिमिट 36 घंटों की थी। इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को एक कोडिंग यूज करने के लिए कहा गया है ताकि यह पता चल सके कि एआई कंटेंट को किस प्लेटफॉर्म ने तैयार किया है। बच्चों से जुड़े हिंसक और अश्लील वीडियो पर तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा है। इसके अलावा रिस्पॉन्स की टाइमलाइन को भी घटाकर 12 घंटा कर दिया गया है। AI कंटेंट अब जिम्मेदारी के दायरे में-बिना लेबल पोस्ट करना जोखिमभरा। नए नियमों के तहत 3 घंटे में हटाना होगा आपत्तिजनक कंटेंट वरना सख्त कार्रवाई तय। कानूनी कार्रवाई का प्रावधान सरकार ने SGI या एआई जेनरेटेड कंटेंट के नियमों के उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा है। SGI के नए नियमों के उल्लंघन पर भारतीय न्याय संहिता भारतीय नागरिकता सुरक्षा संहिता और POCSO एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑटोमैटेड टूल्स और तकनीक का इस्तेमाल करके SGI की पहुंच को हटाने को IT एक्ट के धारा 79 की शर्तों का उल्लंघन नहीं माना है। ऐसी कार्रवाई को नियमों के तहत माना जाएगा।
INDIA’S THIRD NUCLEAR SUBMARINE: भारत ने बनाई घातक मिसाइलों से लैस तीसरी स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी, नौसेना के बेड़े में जल्द होगी शामिल

INDIA’S THIRD NUCLEAR SUBMARINE: नई दिल्ली। भारत (India) अपनी समुद्री सैन्य शक्ति और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार है। देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-सक्षम पनडुब्बी (Indigenous Nuclear-Capable Submarine) (SSBN), INS अरिधमन (S4) इस साल अप्रैल-मई तक नौसेना (Navy) में शामिल होने की संभावना है। भारत की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता में बड़ा इजाफा भारतीय नौसेना के प्रमुख एडमिरल डी.के. त्रिपाठी ने पिछले दिसंबर में संकेत दिया था कि INS अरिधमन को 2026 में कमीशन किया जाएगा। वर्तमान में यह पनडुब्बी अपने समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है। INS अरिधमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास पहली बार तीन परिचालन परमाणु पनडुब्बियां होंगी। यह भारत को ‘कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस’ की रणनीति हासिल करने के करीब ले जाएगा, जिसका अर्थ है कि साल के 365 दिन भारत की कम से कम एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में गश्त पर तैनात रहेगी। INS अरिधमन: क्यों है यह खास? एक रिपोर्ट के मुताबिक, एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विशाखापत्तनम में निर्मित यह पनडुब्बी अपने पूर्ववर्तियों (INS अरिहंत और INS अरिघात) की तुलना में अधिक घातक और एडवांस है। बड़ा आकार और क्षमता: अरिधमन का वजन 7,000 टन है, जबकि पिछली पनडुब्बियां 6,000 टन की थीं। हथियार प्रणाली: यह पनडुब्बी K-4 बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस होगी, जिसकी मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है। इसके अलावा, यह 24 K-15 ‘सागरिका’ मिसाइलों (750 किमी रेंज) को भी ले जा सकती है। इंजन और तकनीक: इसमें 83 मेगावाट का प्रेशराइज्ड वॉटर रिएक्टर लगा है। दुश्मन की नजरों से बचने के लिए इसमें उन्नत ‘एनेकोइक टाइल्स’ लगाई गई हैं, जो शोर को कम करती हैं और इसे रडार की पकड़ से दूर रखती हैं। स्वदेशी सेंसर: बेहतर लक्ष्य पहचान के लिए इसमें भारत में विकसित ‘उषस’ (USHUS) और ‘पंचेंद्रिय’ सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा जरूरी भारत की यह तैयारी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में सैन्य संतुलन बदल रहा है। पाकिस्तान की तैयारी: पाकिस्तान चीन से $5 बिलियन के सौदे के तहत आठ उन्नत ‘हंगोर-क्लास’ पनडुब्बियां खरीद रहा है। रूस से मदद: भारत रूस से एक अकुला-क्लास परमाणु हमलावर पनडुब्बी (चक्र-III) को भी लीज पर लेने की प्रक्रिया में है, जो 2027-28 तक आने की उम्मीद है। जर्मनी के साथ डील: भारत और जर्मनी के बीच $8-10 बिलियन का प्रोजेक्ट-75(I) समझौता अंतिम चरण में है, जिसके तहत एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक वाली छह अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। एक बार चालू होने के बाद, INS अरिधमन को विशाखापत्तनम के पास ‘प्रोजेक्ट वर्षा’ नामक एक उच्च-सुरक्षा वाले भूमिगत बेस पर तैनात किया जाएगा। यह विकास भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में मजबूती से खड़ा करता है जिनके पास समुद्र के नीचे से परमाणु हमले को विफल करने और उसका जवाब देने की अचूक क्षमता है।
S-400 से सस्ता लेजर कवच, अमेरिकी HELIOS ने हवा में पिघलाए ड्रोन, बिना गोला-बारूद का नया हथियार

नई दिल्ली। वॉशिंगटन। आधुनिक युद्ध तकनीक तेजी से बदल रही है और अब मिसाइलों की जगह लेजर हथियार अपनी जगह बना रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने 2025 में समुद्र में तैनात अपने गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर USS Preble से हाई एनर्जी लेजर सिस्टम HELIOS का सफल परीक्षण किया, जिसकी जानकारी 2026 की शुरुआत में सार्वजनिक की गई। इस परीक्षण के दौरान जहाज पर तैनात लेजर प्रणाली ने हवा में उड़ रहे चार ड्रोन को मार गिराया। यह पहली बार है जब अमेरिकी नौसेना ने ऑपरेशनल डेमोंस्ट्रेशन में जहाज पर लगे लेजर से हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने की पुष्टि की है। HELIOS का पूरा नाम हाई एनर्जी लेजर विद इंटीग्रेटेड ऑप्टिकल डैजलर एंड सर्विलांस है। करीब 60 किलोवॉट क्षमता वाला यह सिस्टम लॉकहीड मार्टिन ने विकसित किया है। इसे Arleigh Burke क्लास डेस्ट्रॉयर के Aegis कॉम्बैट सिस्टम से जोड़ा गया है, जिससे यह जहाज के रडार और फायर कंट्रोल डेटा के आधार पर लक्ष्य की पहचान कर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है। यह प्रणाली दो तरह से काम करती है। पहली सॉफ्ट किल क्षमता जिसमें लेजर दुश्मन ड्रोन के ऑप्टिकल या इंफ्रारेड सेंसर को चकाचौंध कर उन्हें भ्रमित कर देता है, जिससे उनकी निगरानी और निशाना साधने की क्षमता प्रभावित होती है। दूसरी हार्ड किल क्षमता जिसमें केंद्रित थर्मल ऊर्जा लक्ष्य को भौतिक रूप से क्षतिग्रस्त कर देती है, यानी ड्रोन को जला या पिघला सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लागत है। पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर पर जहां लाखों डॉलर खर्च हो सकते हैं, वहीं लेजर शॉट की लागत बेहद कम मानी जाती है। इसमें गोला बारूद की आवश्यकता नहीं होती और लगातार फायर की क्षमता होती है। छोटे और मध्यम आकार के ड्रोन खासकर कम दूरी पर इसके लिए आसान लक्ष्य माने जा रहे हैं। हालांकि इसकी सीमाएं भी हैं। लेजर हथियार लाइन ऑफ साइट पर काम करता है यानी लक्ष्य सीधा दिखाई देना चाहिए। अधिक नमी, धूल, बादल या समुद्री छींटे बीम की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं। यही कारण है कि अब तक निर्देशित ऊर्जा हथियारों का व्यापक उपयोग सीमित रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत वाले ड्रोन के बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे ऊर्जा आधारित हथियार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ईरान के शाहेद ड्रोन जैसे सस्ते लेकिन बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले सिस्टम के खिलाफ पारंपरिक एयर डिफेंस महंगा पड़ता है। ऐसे में लेजर आधारित प्रणाली कम खर्च में तेज प्रतिक्रिया देने वाला विकल्प बन सकती है। अमेरिकी रक्षा विभाग बहु स्तरीय समुद्री रक्षा में ऊर्जा आधारित हथियारों को शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है। भविष्य में HELIOS को अन्य युद्धपोतों पर भी तैनात किया जा सकता है, हालांकि इसके लिए और परीक्षण किए जाएंगे। यह परीक्षण संकेत देता है कि लेजर हथियार प्रयोगशाला से निकलकर वास्तविक तैनाती के दौर में प्रवेश कर चुके हैं और आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति को बदल सकते हैं।