वैश्विक खेल इतिहास का सबसे बड़ा आयोजन आज से, 104 कड़े मुकाबलों के बीच खिताब बचाने उतरेगी अर्जेंटीना और लियोनेल मेसी की सेना

नई दिल्ली । खेल जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच फीफा विश्व कप 2026 का ऐतिहासिक शंखनाद हो गया है। उत्तरी अमेरिका के तीन देशों, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की संयुक्त मेजबानी में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट फुटबॉल के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और भव्य आयोजन बनने जा रहा है। खेल के स्वरूप में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए इस बार प्रतिस्पर्धा करने वाली टीमों की संख्या को बढ़ाकर 48 कर दिया गया है। टीमों की संख्या बढ़ने के कारण इस महाकुंभ में कुल 104 हाई-वोल्टेज मुकाबले खेले जाएंगे, जो दुनिया भर के खेल प्रशंसकों को एक नया रोमांच प्रदान करेंगे।टूर्नामेंट का आधिकारिक उद्घाटन मैक्सिको सिटी के ऐतिहासिक स्टेडियम में एक बेहद भव्य और रंगारंग समारोह के साथ हुआ। इस उद्घाटन समारोह में दुनिया भर के शीर्ष संगीतकारों और कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया, जिसमें वैश्विक पॉप स्टार्स ने फीफा के आधिकारिक एंथम पर लाइव परफॉर्म किया। इस सांस्कृतिक और खेल महोत्सव को दुनिया के कोने-कोने में प्रसारित किया जा रहा है। भारतीय उपमहाद्वीप में भी खेल प्रेमियों के लिए व्यापक प्रसारण व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि वे अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में इस वैश्विक उत्सव का सीधा आनंद उठा सकें। इसके अतिरिक्त खेल के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष और महत्वपूर्ण नॉकआउट मुकाबलों के मुफ्त प्रसारण की भी व्यवस्था की गई है।इस बार का विश्व कप न केवल टीमों और मैचों की संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि इसकी वित्तीय संरचना भी ऐतिहासिक है। शासी निकाय ने इस टूर्नामेंट के लिए कुल प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार राशि को बढ़ाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है। टूर्नामेंट की विजेता टीम को मिलने वाली इनामी राशि अन्य वैश्विक खेल प्रतियोगिताओं की तुलना में कई गुना अधिक है। इस वित्तीय प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रतियोगिता में अंतिम पायदान पर रहने वाली टीम को भी एक बड़ी धनराशि सहायता और भागीदारी शुल्क के रूप में मिलेगी, जो कई अन्य खेलों के कुल बजट से भी अधिक है। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि वैश्विक खेल बाजार में फुटबॉल का आर्थिक साम्राज्य कितना मजबूत है।अगर इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पिछले 96 वर्षों के सफर में इस चमचमाती सुनहरी ट्रॉफी पर केवल आठ देशों का ही कब्जा रहा है। ब्राजील, जर्मनी, इटली और अर्जेंटीना जैसे दिग्गजों ने इस खेल पर हमेशा अपना वर्चस्व बनाए रखा है। इस बार भी मुख्य मुकाबला इन्हीं पारंपरिक महाशक्तियों के बीच माना जा रहा है, लेकिन टूर्नामेंट के बढ़े हुए प्रारूप ने छोटे और उभरते हुए देशों के लिए भी बड़े उलटफेर करने के रास्ते खोल दिए हैं। मध्य प्रदेश सहित भारत के तमाम राज्यों के फुटबॉल जानकारों का मानना है कि इस बार ग्रुप स्टेज में कड़े मुकाबले देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि हर टीम इस ऐतिहासिक मंच पर खुद को साबित करने के लिए पूरी जान लगा देगी।इस पूरे टूर्नामेंट में दुनिया भर की खेल प्रेमी जनता की नजरें विशेष रूप से डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना और उनके करिश्माई कप्तान लियोनेल मेसी पर टिकी हुई हैं। आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार मेसी के करियर का यह आखिरी विश्व कप माना जा रहा है, जिससे इस अभियान की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। अर्जेंटीना के सामने अपनी बादशाहत को बरकरार रखने की बहुत बड़ी चुनौती होगी क्योंकि फ्रांस, ब्राजील और पुर्तगाल जैसी मजबूत टीमें उन्हें कड़ी टक्कर देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अगले कुछ हफ्तों तक चलने वाला यह खेल उत्सव यह तय करेगा कि दुनिया को कोई नया चैंपियन मिलता है या फिर पुराने दिग्गजों का ही दबदबा कायम रहता है।
फीफा विश्व कप 2026: गोल्डन बॉल की जंग में मेसी, एमबाप्पे और यमाल आमने-सामने, कौन बनेगा टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी?

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 का आगाज होते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की निगाहें सिर्फ ट्रॉफी पर ही नहीं, बल्कि टूर्नामेंट के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तिगत सम्मान ‘गोल्डन बॉल’ पर भी टिक गई हैं। यह पुरस्कार विश्व कप के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को दिया जाता है और इसके लिए हर बार दुनिया के सबसे बड़े सितारों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। इस बार भी अनुभवी दिग्गजों और युवा प्रतिभाओं के बीच रोमांचक मुकाबले की उम्मीद की जा रही है। गोल्डन बॉल के प्रमुख दावेदारों में सबसे चर्चित नाम अर्जेंटीना के कप्तान लियोनल मेसी का है। 39 वर्षीय मेसी पहले ही दो बार यह सम्मान जीतकर इतिहास रच चुके हैं। 2022 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन कर अर्जेंटीना को चैंपियन बनाने वाले मेसी अब अपने करियर के अंतिम विश्व कप में एक और यादगार उपलब्धि हासिल करने की कोशिश करेंगे। क्लब फुटबॉल में भी उनकी फॉर्म प्रभावशाली रही है, जिससे उनके समर्थकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल को इस विश्व कप का सबसे बड़ा उभरता चेहरा माना जा रहा है। महज 18 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रमण में निर्णायक भूमिका निभाने की क्षमता उन्हें गोल्डन बॉल की दौड़ में मजबूत दावेदार बनाती है। यदि स्पेन टूर्नामेंट में गहरी छाप छोड़ता है, तो यमाल इतिहास रच सकते हैं। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे भी इस सूची में बेहद मजबूत दावेदार हैं। 2022 विश्व कप फाइनल में हैट्रिक लगाने वाले एमबाप्पे पहले ही विश्व कप इतिहास के सबसे खतरनाक गोल स्कोररों में गिने जाने लगे हैं। उनकी गति, तकनीक और बड़े मुकाबलों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें हर टूर्नामेंट में खास बनाती है। इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन भी बेहतरीन फॉर्म में विश्व कप में उतर रहे हैं। क्लब स्तर पर लगातार गोल करने वाले केन के कंधों पर इंग्लैंड को लंबे समय बाद विश्व चैंपियन बनाने की जिम्मेदारी होगी। यदि इंग्लैंड खिताब जीतने में सफल रहता है तो केन का नाम गोल्डन बॉल की दौड़ में सबसे आगे दिखाई दे सकता है। ब्राजील के स्टार विंगर विनीसियस जूनियर से भी काफी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। क्लब फुटबॉल में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह अभी तक विश्व मंच पर अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा सके हैं। हालांकि नए माहौल और अनुभवी मार्गदर्शन में वह ब्राजील के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं। वहीं, पुर्तगाल के महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक बार फिर सुर्खियों में हैं। 41 वर्ष की उम्र में अपने छठे विश्व कप में हिस्सा लेने जा रहे रोनाल्डो के पास इतिहास रचने का अवसर है। यदि वह पुर्तगाल को पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में सफल रहते हैं, तो यह फुटबॉल इतिहास की सबसे यादगार उपलब्धियों में से एक होगी। इन छह बड़े नामों के अलावा एरलिंग हालंद, केविन डी ब्रुइन, जमाल मुसियाला, फ्लोरियन विर्ट्ज, लुइस डियाज और माइकल ओलिसे जैसे खिलाड़ी भी अपने प्रदर्शन से गोल्डन बॉल की दौड़ को रोमांचक बना सकते हैं। कुल मिलाकर विश्व कप 2026 में न केवल खिताब की लड़ाई दिलचस्प होगी, बल्कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने की प्रतिस्पर्धा भी प्रशंसकों को रोमांचित करेगी।
नाइटक्लब विवाद के बीच इंग्लैंड टीम में बड़ा बदलाव, बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन दूसरे टेस्ट से बाहर

नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी दूसरे टेस्ट मैच से पहले इंग्लैंड क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन को दूसरे टेस्ट के लिए घोषित स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है। यह निर्णय हाल ही में सामने आए कथित नाइटक्लब विवाद और उससे जुड़ी जांच के बीच लिया गया है। वहीं, अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को टीम की अंतरिम कप्तानी सौंपी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत के बाद हुए जश्न से जुड़ा है। बताया गया है कि खिलाड़ी पहले ड्रेसिंग रूम और बाद में लंदन के एक पब में मौजूद थे। इसके बाद कुछ खिलाड़ी चेल्सी स्थित एक नाइटक्लब पहुंचे, जहां देर रात कथित रूप से एक झड़प की घटना सामने आई। रिपोर्ट्स में बेन स्टोक्स, गस एटकिंसन, इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की सुरक्षा टीम के एक सदस्य और एक रग्बी खिलाड़ी का नाम सामने आया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि स्टोक्स और एटकिंसन सीधे तौर पर किसी शारीरिक झड़प में शामिल नहीं थे। घटना में सुरक्षा दल का एक सदस्य घायल हुआ था, लेकिन मामले में पुलिस हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ी और फिलहाल किसी आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी नहीं जताई गई है। इसके बावजूद घटना ने इंग्लैंड क्रिकेट के भीतर अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर बहस छेड़ दी है। ईसीबी और संबंधित संस्थाएं इस मामले की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने तक स्टोक्स और एटकिंसन को दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार एटकिंसन की अनुपस्थिति को औपचारिक निलंबन नहीं माना जा रहा, बल्कि यह कदम जांच प्रक्रिया और खिलाड़ी के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इस बीच जो रूट को टीम की कमान सौंपना इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक सुरक्षित और अनुभवी विकल्प माना जा रहा है। रूट इससे पहले 2017 से 2022 के बीच इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी कर चुके हैं और उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण जीत दर्ज की थीं। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम मुकाबले में उनकी वापसी को टीम के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बेन स्टोक्स फिलहाल मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और उन्होंने अपनी स्थिति तथा भविष्य को लेकर विचार करने के लिए कुछ निजी समय मांगा है। दूसरी ओर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों की नजरें ईसीबी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब इंग्लैंड क्रिकेट टीम पहले से ही अपने प्रदर्शन, अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि पहले टेस्ट से पहले मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने खिलाड़ियों को देर रात तक बाहर रहने और अनुशासनहीनता से बचने की सलाह दी थी। अब दूसरे टेस्ट से ठीक पहले सामने आए इस विवाद ने टीम प्रबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ द ओवल में 17 जून से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम नए नेतृत्व में मैदान पर उतरेगी। इस मुकाबले के साथ-साथ सभी की नजरें जांच के नतीजों और बेन स्टोक्स की भविष्य की भूमिका पर भी बनी रहेंगी।
रोहित शर्मा रचेंगे नया इतिहास, वनडे में भारत के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने के करीब

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने जा रहे हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच 13 जून से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में मैदान पर कदम रखते ही रोहित शर्मा भारत के लिए वनडे क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। इसके साथ ही वह 37 साल पुराना एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। धर्मशाला में खेले जाने वाले पहले वनडे मुकाबले के दौरान रोहित शर्मा की उम्र 39 साल और 44 दिन होगी। इसी के साथ वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे। अमरनाथ ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच वर्ष 1989 में खेला था, उस समय उनकी उम्र 39 साल और 36 दिन थी। अब लगभग चार दशक बाद यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम दर्ज होने जा रहा है। हाल ही में फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद रोहित शर्मा भारतीय टीम से जुड़े हैं और चयनकर्ताओं तथा टीम प्रबंधन का भरोसा बनाए रखने में सफल रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में चोट और फिटनेस को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन रोहित ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से साबित किया है कि वह अभी भी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाने में सक्षम हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ यह सीरीज भारतीय टीम के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम के दो प्रमुख खिलाड़ी विराट कोहली और हार्दिक पांड्या चोट के कारण इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी टीम को मजबूती प्रदान करेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम में उनका अनुभव निर्णायक साबित हो सकता है। रोहित शर्मा पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। अब उनका पूरा ध्यान वनडे क्रिकेट पर केंद्रित है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नजर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी क्रिकेट विश्व कप पर है। रोहित की इच्छा भारत को एक और विश्व कप खिताब दिलाकर अपने शानदार करियर को यादगार तरीके से समाप्त करने की हो सकती है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ चुनौतियां भी बढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लगातार दबाव, फिटनेस बनाए रखने की जरूरत और युवा खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा रोहित के सामने बड़ी परीक्षा होगी। इसके बावजूद उनका अनुभव, तकनीक और बड़े मैचों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें भारतीय टीम का महत्वपूर्ण सदस्य बनाए हुए है। आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन वनडे क्रिकेट में उन्होंने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यही कारण है कि टीम प्रबंधन और प्रशंसकों को उनसे आगामी मुकाबलों में भी बड़ी पारियों की उम्मीद है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में रोहित शर्मा सिर्फ रन बनाने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए भी मैदान पर उतरेंगे। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें इस उपलब्धि पर टिकी रहेंगी।
ऋतुराज गायकवाड़ के बल्ले से निकला दम तो युवा वैभव सूर्यवंशी रहे फ्लॉप: जानिए क्यों तिलक वर्मा की धीमी बल्लेबाजी पर उठ रहे हैं तीखे सवाल

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के भविष्य के सितारों से सजी इंडिया ‘ए’ ने दांबुला के मैदान पर मेजबान श्रीलंका ‘ए’ को 8 विकेट के बड़े अंतर से मात देकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस एकतरफा जीत के बाद भी टीम मैनेजमेंट और सेलेक्टर्स के चेहरे पर पूरी तरह से संतुष्टि के भाव नजर नहीं आ रहे हैं। इस मुकाबले में मिली शानदार कामयाबी के बावजूद कुछ ऐसी तकनीकी और रणनीतिक कमियां उजागर हुई हैं, जिसके कारण इस जीत के मायने क्रिकेट पंडितों को थोड़े अधूरे और चिंताजनक लग रहे हैं। टीम का शीर्ष क्रम और मध्यक्रम आगामी बड़े दौरों के लिहाज से अभी भी पूरी तरह लय में नजर नहीं आ रहा है। मैच के सकारात्मक पहलुओं की बात करें तो कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने एक बार फिर अपनी क्लास और बेहतरीन फॉर्म का परिचय दिया। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाजी आक्रमण के सामने सूझबूझ और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन बनाते हुए टीम की जीत की मजबूत नींव रखी और दमदार बल्लेबाजी की। ऋतुराज की इस कप्तानी पारी के दम पर ही भारत ने मेजबान टीम द्वारा दिए गए लक्ष्य को बेहद आसानी से महज दो विकेट खोकर हासिल कर लिया। ऋतुराज का यह प्रदर्शन उन्हें मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खटखटाने के लिए एक बार फिर सबसे मजबूत दावेदार के रूप में पेश करता है। हालांकि, इस चमकीली पारी के दूसरी तरफ युवा और होनहार सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का फ्लॉप होना टीम के लिए एक बड़ा झटका रहा। घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के दम पर इंडिया ‘ए’ की जर्सी पहनने वाले वैभव इस महत्वपूर्ण मुकाबले में पूरी तरह से असहज नजर आए और बिना कोई बड़ा योगदान दिए बेहद सस्ते में पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने के कारण पावरप्ले में टीम को जो आक्रामक शुरुआत मिलनी चाहिए थी, वह नहीं मिल सकी। वैभव की इस असफलता ने आगामी मैचों के लिए ओपनिंग स्लॉट की स्थिरता पर एक बार फिर सवालिया निशान लगा दिया है। जीत के रास्ते में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा की बल्लेबाजी शैली रही। टी20 और आधुनिक सीमित ओवरों के क्रिकेट के इस दौर में जहां बल्लेबाज पहली ही गेंद से कड़ा प्रहार करने की कोशिश करते हैं, वहीं तिलक वर्मा ने मैदान पर कछुआ गति से बल्लेबाजी की। उनके बल्ले से रनों की गति इतनी धीमी थी कि एक समय पर मजबूत स्थिति में दिख रही भारतीय टीम पर भी अनावश्यक दबाव बनता हुआ दिखने लगा था। तिलक की इस अत्यधिक रक्षात्मक और धीमी अप्रोच को देखकर कमेंटेटर्स और क्रिकेट विश्लेषक भी हैरान रह गए, क्योंकि वे अपनी आक्रामक और बेखौफ बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। यही कारण है कि दांबुला में मिली इस 8 विकेट की बड़ी जीत के बाद भी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और जानकारों को यह सफलता पूरी तरह से संपूर्ण नहीं लग रही है। आगामी समय में होने वाली मुख्य अंतरराष्ट्रीय श्रृंखलाओं और टीम इंडिया के कड़े शेड्यूल को देखते हुए ‘ए’ टीम के खिलाड़ियों से केवल मैच जीतने की ही नहीं, बल्कि आधुनिक क्रिकेट के मापदंडों के अनुरूप प्रभावी खेल दिखाने की उम्मीद की जाती है। यदि वैभव सूर्यवंशी की निरंतरता और तिलक वर्मा के स्ट्राइक रेट की समस्या का जल्द समाधान नहीं तलाशा गया, तो आने वाले मैचों में टीम को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
टॉप-10 की रेस में शामिल होने वाले एकमात्र अंग्रेज खिलाड़ी बने हैरी केन..

नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के सबसे प्रतिष्ठित और बड़े महाकुंभ, फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत से पहले मैदान पर उतरने वाले दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों की वित्तीय संपत्तियों का एक बड़ा खुलासा हुआ है। खेल के मैदान पर विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी जीतने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाने वाले ये अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मैदान से बाहर आर्थिक मोर्चे पर भी बड़े कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। हाल ही में जारी की गई एक वैश्विक सूची के अनुसार, क्लब फुटबॉल, भारी-भरकम विज्ञापन अनुबंधों और दूरदर्शी निजी व्यावसायिक निवेशों के दम पर इन खेल सितारों ने अरबों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया है। इस सूची के वित्तीय आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। रोनाल्डो की कुल अनुमानित संपत्ति अब एक अरब पाउंड यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 12,773 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के करीब पहुंच चुकी है। सऊदी अरब के प्रतिष्ठित क्लब अल-नस्र के साथ हुआ उनका सालाना 173 मिलियन पाउंड का करार उनकी कमाई का मुख्य जरिया है। इसके अतिरिक्त, रोनाल्डो ने खेल से इतर होटल श्रृंखला, अत्याधुनिक जिम, खुद के फैशन ब्रांड और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में भारी निवेश कर अपनी वित्तीय स्थिति को बेहद मजबूत किया है। इस धनकुबेर सूची में दूसरे स्थान पर अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाने वाले कप्तान लियोनल मेसी का नाम शामिल है। मेसी की कुल अनुमानित नेटवर्थ 742 मिलियन पाउंड यानी करीब 9,476 करोड़ रुपये आंकी गई है। अमेरिकी क्लब इंटर मियामी से मिलने वाले वेतन के अलावा वैश्विक खेल ब्रांड एडिडास सहित कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ उनकी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी उनकी इस विशाल कमाई का एक बड़ा आधार है। वहीं, ब्राजील के स्टार फारवर्ड नेमार इस फेहरिस्त में 334 मिलियन पाउंड (लगभग 4,266 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से बने हुए हैं। बार्सिलोना और पीएसजी के बाद अब अल-हिलाल क्लब से मिलने वाले पैसों और दुनिया के सबसे महंगे जूता ब्रांड के साथ उनके विज्ञापन सौदे ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है। फ्रांस के युवा सनसनी किलियन एमबाप्पे इस सूची में चौथे स्थान पर काबिज हैं। स्पेनिश जाइंट रियल मैड्रिड के साथ हुए उनके नए अनुबंध और नाइकी व हबलोट जैसे लग्जरी ब्रांडों के साथ एंडोर्समेंट के चलते उनकी नेटवर्थ 186 मिलियन पाउंड (करीब 2,376 करोड़ रुपये) तक पहुंच चुकी है। दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी सूची में इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी उनके कप्तान हैरी केन हैं। जर्मन क्लब बायर्न म्यूनिख के लिए खेलने वाले हैरी केन 110 मिलियन पाउंड (लगभग 1,405 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ पांचवें स्थान पर हैं। सूची के निचले आधे हिस्से की बात करें तो मिस्र के स्टार मोहम्मद सलाह 104 मिलियन पाउंड के साथ छठे स्थान पर हैं, जिन्हें लिवरपूल क्लब से प्रति सप्ताह करीब चार लाख पाउंड का भारी-भरकम वेतन मिलता है। उनके बाद दक्षिण कोरिया के सोन ह्युंग-मिन (74 मिलियन पाउंड) सातवें और अल्जीरिया के रियाद महरेज (63 मिलियन पाउंड) आठवें स्थान पर हैं। नॉर्वे के युवा गोल मशीन एरलिंग हालैंड और कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज दोनों ही 59-59 मिलियन पाउंड (लगभग 754 करोड़ रुपये) की संपत्ति के साथ क्रमशः नौवें और दसवें स्थान पर मौजूद हैं। यह आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि आधुनिक युग में फुटबॉल केवल एक खेल मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक बिजनेस मॉडल बन चुका है।
इंग्लैंड और वेल्स में 12 जून से सजेगा महिला टी20 विश्व कप का भव्य मंच: 12 सर्वश्रेष्ठ टीमों के बीच 24 दिनों तक मचेगा क्रिकेट का घमासान

नई दिल्ली । महिला क्रिकेट जगत के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 का बिगुल बज चुका है। आगामी 12 जून से इंग्लैंड और वेल्स की मेजबानी में क्रिकेट के इस सबसे छोटे और रोमांचक प्रारूप का महाकुंभ शुरू होने जा रहा है। इस भव्य वैश्विक प्रतियोगिता में दुनिया की 12 सर्वश्रेष्ठ टीमें प्रतिष्ठित ट्रॉफी को अपने नाम करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी। कुल 24 दिनों तक चलने वाले इस व्यापक टूर्नामेंट का समापन 5 जुलाई को क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर होने वाले खिताबी मुकाबले के साथ होगा। टूर्नामेंट के प्रारूप के अनुसार सभी 12 टीमों को दो अलग-अलग ग्रुपों में विभाजित किया गया है। ग्रुप-1 में भारतीय टीम को मौजूदा चैंपियन ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान, बांग्लादेश और पहली बार इस वैश्विक मंच पर जगह बनाने वाली नीदरलैंड की टीम के साथ रखा गया है। वहीं ग्रुप-2 में मेजबान इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड, श्रीलंका, आयरलैंड और स्कॉटलैंड की टीमें शामिल हैं। टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला 12 जून को एजबेस्टन के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड और एशियाई चैंपियन श्रीलंका के बीच खेला जाएगा, जो इस टूर्नामेंट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें विशेष रूप से 14 जून की तारीख पर टिकी हुई हैं, जब एजबेस्टन के ऐतिहासिक मैदान पर भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें आमने-सामने होंगी। दोनों देशों के बीच होने वाला यह मुकाबला हमेशा की तरह भारी दबाव, रोमांच और खेल भावना से भरपूर होने की उम्मीद है। भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल की राह आसान नहीं होगी, क्योंकि ग्रुप चरण में उन्हें न केवल पाकिस्तान बल्कि दक्षिण अफ्रीका और महिला क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम ऑस्ट्रेलिया की कड़ी चुनौती का भी सामना करना पड़ेगा। भारत अपने ग्रुप चरण के मुकाबले एजबेस्टन, हेडिंग्ले, ओल्ड ट्रैफर्ड और लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदानों पर खेलेगा। इस विश्व कप की कुछ प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो पूरे टूर्नामेंट के दौरान कुल 33 कड़े मुकाबले खेले जाएंगे। दर्शकों के रोमांच को दोगुना करने के लिए आईसीसी ने इस बार के कार्यक्रम में पांच ट्रिपल हेडर (एक दिन में तीन मैच) और पांच डबल हेडर (एक दिन में दो मैच) को शामिल किया है। नीदरलैंड की महिला टीम के लिए यह आयोजन बेहद खास है क्योंकि वह अपने इतिहास में पहली बार महिला टी20 विश्व कप की मुख्य प्रतियोगिता में भाग ले रही है। भारतीय समयानुसार ग्रुप चरण के मुकाबले दोपहर 3:00 बजे, शाम 7:00 बजे और रात 11:00 बजे से प्रसारित किए जाएंगे। ग्रुप चरण के कड़े मुकाबलों के बाद शीर्ष पर रहने वाली टीमें नॉकआउट चरण में प्रवेश करेंगी। टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल मुकाबला 30 जून को द ओवल के मैदान पर भारतीय समयानुसार शाम 7:00 बजे से खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल मैच इसी मैदान पर 2 जुलाई को रात 11:00 बजे आयोजित होगा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम इस बार अपनी तैयारियों को पुख्ता कर पहली बार टी20 विश्व कप के खिताब को चूमने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलियाई टीम अपनी बादशाहत को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी, जिससे इस बार का विश्व कप इतिहास का सबसे प्रतिस्पर्धी टूर्नामेंट बनने जा रहा है।
WOMEN T20 WORLD CUP: महिला टी20 वर्ल्ड कप में इन बल्लेबाजों का रहा दबदबा: टॉप-5 रन स्कोरर्स में कोई भारतीय नहीं, हरमनप्रीत टॉप-10 में

WOMEN T20 WORLD CUP: नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 का आगाज 12 जून से होने जा रहा है और क्रिकेट प्रेमियों की नजरें एक बार फिर दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों पर टिकी हैं। इंग्लैंड में आयोजित होने वाले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का फाइनल 5 जुलाई को खेला जाएगा। टी20 क्रिकेट के तेजी से बदलते स्वरूप में बल्लेबाजों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाजों की सूची भी चर्चा का विषय बनी हुई है। महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड न्यूजीलैंड की दिग्गज बल्लेबाज Suzie Bates के नाम दर्ज है। उन्होंने 2009 से 2024 के बीच खेले गए 42 मैचों की 42 पारियों में 1,216 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 8 अर्धशतक निकले। बेट्स लंबे समय से न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी की रीढ़ रही हैं और आगामी विश्व कप में उनके पास इस रिकॉर्ड को और मजबूत करने का मौका होगा। खास बात यह है कि यह टूर्नामेंट उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी विश्व कप भी माना जा रहा है। IRCTC ELECTRONIC COOKING: 17 लाख यात्रियों के भोजन पर नहीं पड़ेगा असर, LPG कमी के बीच IRCTC ने अपनाया इलेक्ट्रिक कुकिंग मॉडल दूसरे स्थान पर इंग्लैंड की पूर्व स्टार बल्लेबाज Sarah Taylor हैं। उन्होंने 35 मैचों में 1,014 रन बनाकर महिला टी20 विश्व कप इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी और निरंतरता ने इंग्लैंड को कई अहम जीत दिलाई। ऑस्ट्रेलिया की विस्फोटक ओपनर Alyssa Healy तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने 39 पारियों में 1,008 रन बनाए हैं। बड़े मैचों में दबाव झेलने और तेज शुरुआत देने की उनकी क्षमता ने उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में शामिल किया है। चौथे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान Meg Lanning हैं। उन्होंने 32 पारियों में 992 रन बनाए, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। लैनिंग की कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों ने ऑस्ट्रेलिया को महिला क्रिकेट की सबसे सफल टीमों में शामिल करने में बड़ी भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारत पर भरोसा बरकरार, फिच ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान कायम रखा 2. पांचवें स्थान पर न्यूजीलैंड की अनुभवी ऑलराउंडर Sophie Devine हैं। उन्होंने 37 पारियों में 785 रन बनाकर इस सूची में अपनी जगह बनाई है। अपनी आक्रामक बल्लेबाजी और मैच जिताऊ प्रदर्शन के लिए डिवाइन दुनिया भर में जानी जाती हैं। भारतीय दृष्टिकोण से देखें तो टॉप-10 में केवल कप्तान हरमनप्रीत कौर का नाम शामिल है। हरमनप्रीत ने 39 मैचों में 726 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। वह इस समय दसवें स्थान पर हैं। आगामी विश्व कप में यदि उनका बल्ला चला, तो उनके पास शीर्ष पांच बल्लेबाजों की सूची में जगह बनाने का सुनहरा अवसर होगा। महिला टी20 विश्व कप 2026 के साथ क्रिकेट प्रशंसकों को न केवल नई चैंपियन टीम देखने का मौका मिलेगा, बल्कि यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या मौजूदा खिलाड़ी इन ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स को चुनौती दे पाती हैं या नहीं। भारतीय फैंस को खास उम्मीद हरमनप्रीत कौर से होगी, जो अपने अनुभव और विस्फोटक बल्लेबाजी से नया इतिहास रच सकती हैं।
Devendra Jhajharia: हादसे ने छीना एक हाथ, हौसले ने दिलाए तीन पैरालंपिक पदक: देवेंद्र झाझरिया की प्रेरक कहानी

Devendra Jhajharia: नई दिल्ली । भारत के खेल इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल अपनी उपलब्धियों के लिए नहीं बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे के लिए भी हमेशा याद किए जाते हैं। देवेंद्र झाझरिया ऐसा ही एक नाम है, जिन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। एक दर्दनाक हादसे में बचपन में अपना बायां हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और दुनिया को दिखा दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। राजस्थान के चुरू जिले में 10 जून 1981 को जन्मे देवेंद्र झाझरिया का बचपन सामान्य बच्चों की तरह बीत रहा था। लेकिन महज आठ साल की उम्र में एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। एक दिन पेड़ पर चढ़ते समय उनका संपर्क हाई वोल्टेज बिजली के तार से हो गया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका बायां हाथ काटना पड़ा। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी। हादसे के बाद देवेंद्र को सामाजिक उपेक्षा और मानसिक संघर्ष का भी सामना करना पड़ा। साथी बच्चों के बीच खुद को अलग महसूस करने वाले देवेंद्र ने धीरे-धीरे खेलों की ओर रुख किया। स्कूल स्तर पर भाला फेंक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उनकी प्रतिभा सामने आने लगी। वर्ष 1997 में एक पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान कोच रिपुदमन सिंह की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने देवेंद्र को इस खेल को गंभीरता से अपनाने की सलाह दी और यहीं से एक महान खिलाड़ी के सफर की शुरुआत हुई। सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में देवेंद्र ने 2004 एथेंस पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया। उन्होंने एफ-46 भाला फेंक स्पर्धा में 62.15 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक नया अध्याय साबित हुई। इसके बाद कई वर्षों तक उनकी स्पर्धा पैरालंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रही, लेकिन उन्होंने अभ्यास और मेहनत जारी रखी। 2016 रियो पैरालंपिक में उन्होंने 63.97 मीटर का थ्रो कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वे पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। देवेंद्र के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब पिता की गंभीर बीमारी ने उन्हें खेल छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन उनके पिता ने ही उन्हें हार न मानने और देश के लिए खेलने की प्रेरणा दी। पिता की इसी सीख ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। वर्ष 2020 पैरालंपिक में उन्होंने 64.35 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे पैरालंपिक में तीन पदक जीतने वाले भारत के पहले व्यक्तिगत एथलीट बने। देवेंद्र झाझरिया ने केवल पैरालंपिक ही नहीं, बल्कि एशियन पैरा गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में भी भारत का गौरव बढ़ाया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। देवेंद्र झाझरिया की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनका जीवन आज लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नेमार की फिटनेस पर बड़ा अपडेट, रिकवरी की राह पर ब्राज़ील स्टार

नई दिल्ली । ब्राजीलियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (CBF) ने नेमार की फिटनेस को लेकर ताजा मेडिकल अपडेट जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, नेमार के दाहिने पैर में ग्रेड-टू पिंडली की चोट है, जिसके इलाज के लिए उनका MRI स्कैन किया गया। CBF के अनुसार उनकी रिकवरी प्रक्रिया सही दिशा में है और वह एक विशेष मेडिकल प्लान के तहत लगातार इलाज करा रहे हैं। हालांकि, संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे कब तक मैदान पर वापसी कर पाएंगे। शुरुआती मैचों से बाहर रहने की आशंकास्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नेमार वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं हो सकते। माना जा रहा है कि वह कम से कम दूसरे ग्रुप मैच तक टीम से बाहर रह सकते हैं। ब्राजील अपने अभियान की शुरुआत मोरक्को के खिलाफ करेगा, इसके बाद हैती और स्कॉटलैंड के खिलाफ मुकाबले होंगे। ऐसे में शुरुआती चरण में टीम को अपने सबसे बड़े स्टार की कमी खल सकती है। ब्राजील के लिए सबसे बड़ा सवालनेमार ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक 128 इंटरनेशनल मैचों में 79 गोल किए हैं। लंबे समय से चोटों से जूझ रहे नेमार अक्टूबर 2023 के बाद से राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं खेले हैं। हाल ही में क्लब फुटबॉल के दौरान लगी चोट ने उनकी वापसी को और भी अनिश्चित बना दिया है। इसी कारण ब्राजील टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क है। वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील की उम्मीदेंब्राजील अगले वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 23वीं बार हिस्सा लेने जा रहा है और वह अब तक एकमात्र टीम है जिसने हर संस्करण में भाग लिया है। ऐसे में टीम से उम्मीदें हमेशा की तरह ऊंची हैं। हालांकि, नेमार की फिटनेस टीम की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर वह पूरी तरह फिट नहीं होते, तो ब्राजील को अपनी आक्रमण रणनीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। करियर के अंतिम वर्ल्ड कप की संभावना34 वर्षीय नेमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 उनके करियर का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट हो सकता है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। CBF के अपडेट ने ब्राजील को राहत जरूर दी है, लेकिन नेमार की पूर्ण फिटनेस और समय पर वापसी अब भी अनिश्चित बनी हुई है। वर्ल्ड कप से पहले उनकी स्थिति टीम के प्रदर्शन और रणनीति दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।