झाबुआ जिले के झाबुआ, थांदला और पेटलावद सहित कई क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर बंद रहे। केमिस्टों का कहना है कि ई-फार्मेसी के बढ़ते चलन से छोटे दवा व्यापारियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री हो रही है, जिससे न सिर्फ कारोबार प्रभावित हो रहा है बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
झाबुआ में शिवम मेडिकल के संचालक महेंद्र प्रताप सिंह राठौर ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ गया है। उन्होंने सरकार से इस पर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
वहीं प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की है। जिला प्रशासन ने कुछ सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोरों को चालू रखने का निर्णय लिया, ताकि जरूरी दवाइयों की उपलब्धता बनी रहे। इनमें जिला अस्पताल परिसर स्थित जन औषधि केंद्र सहित कई निजी अस्पतालों के मेडिकल स्टोर शामिल रहे।
इसी तरह आलीराजपुर जिले में भी मेडिकल स्टोर बंद रहे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर हुई इस हड़ताल का असर पूरे जिले में दिखा। सुबह से ही मरीज और उनके परिजन दवाइयों के लिए परेशान नजर आए। ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग पर्चे लेकर बंद दुकानों के बाहर खड़े रहे, लेकिन उन्हें दवा नहीं मिल सकी।
ग्राम बड़ा गुड़ा निवासी राजू ने बताया कि वे इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन दवा न मिलने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इसी तरह बुजुर्ग मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के परिजनों को भी सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा।
दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल स्टोर बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। उनका आरोप है कि यह व्यवस्था बिना पर्याप्त नियंत्रण के चल रही है, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
हालांकि, दिनभर की स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी आम मरीजों और ग्रामीण परिवारों को झेलनी पड़ी। कई लोगों का कहना है कि इस तरह के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर जरूरतमंद मरीजों पर पड़ता है, जिन्हें समय पर दवा नहीं मिल पाती।